Blog

  • पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदलेगा समीकरण, तीस्ता जल विवाद सुलझने की उम्मीद..

    पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदलेगा समीकरण, तीस्ता जल विवाद सुलझने की उम्मीद..

    ढाका। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। इस राजनीतिक बदलाव ने भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से लंबित जल विवादों के समाधान को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं।

    बांग्लादेश की सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भाजपा को जीत पर बधाई देते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। पार्टी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के प्रदर्शन की सराहना की और उम्मीद जताई कि इससे दोनों पक्षों के रिश्ते और मजबूत होंगे। बीएनपी का मानना है कि नई राजनीतिक परिस्थिति से ढाका और कोलकाता के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर तीस्ता नदी जल बंटवारा समझौते को लेकर नई प्रगति की संभावना जताई गई है।

    तीस्ता विवाद पर ममता पर आरोप
    बीएनपी ने अपने बयान में ममता बनर्जी और उनकी सरकार को तीस्ता समझौते में देरी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि पिछली राज्य सरकार के रुख के कारण यह संधि लंबे समय से अटकी हुई है। अब बीएनपी को उम्मीद है कि भाजपा सरकार केंद्र के साथ समन्वय कर इस समझौते को आगे बढ़ाएगी। उनका कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद तीस्ता बैराज परियोजना को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

    पुराना है जल बंटवारे का मुद्दा
    भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां साझा हैं, लेकिन अब तक सिर्फ दो जल समझौते ही हो सके हैं—गंगा जल संधि और कुशियारा नदी संधि। 1996 की गंगा जल संधि के तहत फरक्का बैराज पर पानी के बंटवारे को नियंत्रित किया जाता है, हालांकि बांग्लादेश समय-समय पर कम पानी मिलने की शिकायत करता रहा है।

    तीस्ता नदी को लेकर 1983 में एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36% और भारत को 39% पानी देने की बात कही गई थी, लेकिन यह पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। बाद में 2011 में मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान नए प्रस्ताव पर चर्चा हुई, लेकिन राज्य सरकार के विरोध के चलते यह समझौता भी अधूरा रह गया।

    वैचारिक अंतर के बावजूद सहयोग की उम्मीद
    बीएनपी नेता हेलाल ने यह भी कहा कि भले ही बीएनपी और भाजपा के बीच वैचारिक अंतर हो, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि तीस्ता जल विवाद और द्विपक्षीय संबंध जैसे मुद्दों पर दोनों पक्ष सहयोग कर सकते हैं। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तेजी आने की संभावना है, जिससे लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान का रास्ता साफ हो सकता है।

  • दुनिया में भारत का जलवा: विदेशों से आया रिकॉर्ड पैसा, रेमिटेंस में फिर नंबर-1

    दुनिया में भारत का जलवा: विदेशों से आया रिकॉर्ड पैसा, रेमिटेंस में फिर नंबर-1

    नई दिल्‍ली। वैश्विक स्तर पर भारतीयों की मेहनत और कौशल का असर एक बार फिर दिखा है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशों में काम कर रहे भारतीयों ने अपने देश को रिकॉर्ड स्तर पर पैसा भेजकर नया इतिहास रच दिया है।
    इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन की ‘वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, साल 2024 में भारत को करीब 137 बिलियन डॉलर (लगभग 11.4 लाख करोड़ रुपये) का रेमिटेंस मिला। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और भारत लगातार एक दशक से इस सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।
    00 बिलियन डॉलर पार करने वाला इकलौता देश
    रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का पहला और इकलौता देश बन गया है जिसने रेमिटेंस में 100 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया है। इससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर भारतीयों की आर्थिक भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है।
    दूसरे देशों से काफी आगे भारत
    रेमिटेंस के मामले में भारत के बाद मेक्सिको दूसरे, फिलीपींस तीसरे और फ्रांस चौथे स्थान पर हैं। हालांकि इनमें से कोई भी देश अभी तक 100 बिलियन डॉलर के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है।
    लगातार बढ़ता ग्राफ
    अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2010 में भारत को करीब 53.48 बिलियन डॉलर, 2015 में 68.91 बिलियन डॉलर और 2020 में 83.15 बिलियन डॉलर का रेमिटेंस मिला था।
    पिछले चार वर्षों में इसमें तेज उछाल दर्ज किया गया है।
    किन देशों से आता है ज्यादा पैसा?
    रेमिटेंस भेजने वाले देशों में अमेरिका सबसे आगे है, जहां से 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का आउटफ्लो दर्ज किया गया। इसके अलावा सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और जर्मनी भी प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं।
    छात्रों की भी मजबूत मौजूदगी
    आर्थिक योगदान के साथ-साथ भारतीय छात्र भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
    आंकड़ों के मुताबिक, विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों में चीन पहले और भारत दूसरे स्थान पर है। 2022 तक 6.20 लाख से अधिक भारतीय छात्र विदेशों में उच्च शिक्षा ले रहे थे।
    रेमिटेंस के क्षेत्र में भारत की यह उपलब्धि न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि दुनियाभर में भारतीयों की भूमिका कितनी अहम हो चुकी है। लगातार बढ़ता यह आंकड़ा आने वाले समय में भारत की आर्थिक ताकत को और मजबूत कर सकता है।
  • कब है शनि जयंती ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    कब है शनि जयंती ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव और छाया के संयोग से शनिदेव का जन्म हुआ था। इसलिए यह दिन उनकी पूजा-अर्चना और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष महत्व रखता है। साल 2026 में शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी। इस दिन विधि-विधान से पूजा और उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है।

    शुभ मुहूर्त
    द्रिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 बजे से प्रारंभ होगी और 17 मई को रात 1:30 बजे समाप्त होगी। ऐसे में 16 मई को ही शनि जयंती और शनि अमावस्या मनाना शुभ रहेगा।

    पूजा विधि
    शनि जयंती के दिन संध्या काल को पूजा के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। इस दौरान श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

    – संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    – पश्चिम दिशा की ओर मुख करके शनिदेव का ध्यान करें।
    – शनि मंत्र या शनि स्तोत्र का पाठ करें।
    – पूजा के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    – जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।

    क्या रखें ध्यान?
    इस दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं, जिसे अपनी आस्था के अनुसार रखा जा सकता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा जीवन की बाधाओं को कम करती है और शनिदेव की कृपा दिलाती है।

  • गजकेसरी राजयोग: मई में चंद्रमा और गुरु की युति से इन राशियों को मिलेगा धन और तरक्की का लाभ

    गजकेसरी राजयोग: मई में चंद्रमा और गुरु की युति से इन राशियों को मिलेगा धन और तरक्की का लाभ

    नई दिल्ली। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार मई का महीना विशेष महत्व रखता है। इस माह के मध्य में चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक 18 मई को चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही देवगुरु बृहस्पति स्थित हैं। इस प्रकार चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग बनेगा।

    ज्योतिष शास्त्र में इस योग को सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है। इसके प्रभाव से पुराने तनाव कम हो सकते हैं, प्रगति के नए अवसर मिल सकते हैं और जीवन में मानसिक शांति के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिल सकता है। आइए जानते हैं किन राशियों पर इसका शुभ प्रभाव पड़ेगा।

    वृषभ राशि
    इस राशि के लोगों को राहत महसूस हो सकती है। पुराने विवाद सुलझने लगेंगे और पारिवारिक माहौल बेहतर होगा। युवाओं की मानसिक उलझनें कम होंगी। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावना है, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।

    कर्क राशि
    कर्क राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। आय में वृद्धि से घरेलू जरूरतें आसानी से पूरी होंगी। इस दौरान यात्रा के योग भी बन सकते हैं। युवाओं को आत्मचिंतन का अवसर मिलेगा, जिससे मानसिक संतुलन बेहतर होगा।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और रिश्तों दोनों में सकारात्मक परिणाम देने वाला हो सकता है। अविवाहित लोगों के लिए नए संबंध बनने की संभावना है। नौकरी और व्यवसाय में आय बढ़ने के संकेत हैं। निवेश के अवसर भी मिल सकते हैं, जो भविष्य में लाभदायक रहेंगे।

    तुला राशि
    तुला राशि वालों के जीवन में स्थिरता आने के संकेत हैं। लंबे समय से चल रही परेशानियां धीरे-धीरे कम होंगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा और रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। यह समय संतुलन और शांति का अनुभव कराएगा।

    मीन राशि
    मीन राशि के लोगों के लिए यह समय आत्मविश्लेषण और समझ को बढ़ाने वाला रहेगा। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और मानसिक हल्कापन महसूस होगा। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावना है।

  • एमपी में मौसम के दो सिस्टम सक्रिय, 28 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, कई जिलों में चलेंगी तेज हवाएं

    एमपी में मौसम के दो सिस्टम सक्रिय, 28 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, कई जिलों में चलेंगी तेज हवाएं


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में इस समय मौसम के दो सिस्टम सक्रिय हैं, जिसके चलते प्रदेश के करीब आधे हिस्से यानी 28 जिलों में बुधवार को तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कई इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है।

    बुधवार को ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में आंधी-बारिश का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, शाम के समय मौसम में बदलाव ज्यादा स्पष्ट होगा, हालांकि कुछ जिलों में दिन के दौरान भी आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    वहीं, प्रदेश के कुछ हिस्सों में दिन के समय गर्मी का असर बना रहेगा। इनमें भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, गुना, शिवपुरी और अशोकनगर शामिल हैं। मंगलवार को प्रदेश में लगातार पांचवें दिन भी आंधी-बारिश का सिलसिला जारी रहा। ग्वालियर, छतरपुर, धार, बड़वानी, डिंडौरी और बालाघाट सहित कई जिलों में सुबह से ही मौसम बदला रहा, जबकि रात में भोपाल समेत अन्य क्षेत्रों में तेज हवाएं चलीं।

    तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख शहरों में भोपाल का अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री, इंदौर 37.6 डिग्री, ग्वालियर 34.7 डिग्री, उज्जैन 38 डिग्री और जबलपुर 37 डिग्री सेल्सियस रहा। खरगोन सबसे गर्म रहा, जहां पारा 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा खंडवा में 41.5 डिग्री और नरसिंहपुर में 41.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। वहीं, नौगांव में सबसे कम 33.5 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। अन्य शहरों में भी तापमान सामान्य से कम रहा।

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में फिलहाल आंधी-बारिश का दौर कुछ दिन और जारी रह सकता है। वर्तमान में एक चक्रवाती परिसंचरण प्रदेश के मध्य भाग में सक्रिय है, जबकि दूसरा ऊपरी हिस्से में बना हुआ है। इसके साथ ही पूर्वी हिस्से से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है, जिसके कारण मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। साथ ही 10 मई से एक नया सिस्टम भी सक्रिय होने की संभावना है।

  • मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में दिखे लुप्तप्राय इंडियन स्किमर पक्षी

    मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में दिखे लुप्तप्राय इंडियन स्किमर पक्षी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में लुप्तप्राय पक्षी इंडियन स्किमर (Rynchops albicollis) की मौजूदगी दर्ज की गई है। बोट गश्ती के दौरान वन विभाग के स्टाफ को कुल 8 इंडियन स्कीमर दिखाई पड़े, जिनकी तस्वीर मढ़ई रेंजर द्वारा ली गई है।

    जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व बाघों का उत्कृष्ट प्राकृतिक आवास (हैबिटेट) माना जाता है। इसी रिजर्व में स्थित तवा जलाशय में इंडियन स्कीमर की उपस्थिति से यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए एक आदर्श और सुरक्षित आवास के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

    उन्होंने बताया कि इंडियन स्किमर भारत के अत्यंत संकटग्रस्त नदी-आधारित पक्षियों में शामिल है, जिसकी संख्या लगातार घट रही है। यह पक्षी अपनी विशिष्ट लंबी निचली चोंच के लिए जाना जाता है, जिसके माध्यम से यह पानी की सतह को चीरते हुए मछलियों का शिकार करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रजाति केवल स्वच्छ जल, प्रचुर मछली संसाधन और निर्बाध रेतीले तटों वाले क्षेत्रों में ही अपना आवास बनाती है। इस लुप्तप्राय पक्षी की उपस्थिति से सतपुड़ा को विशिष्ट पहचान मिलेगी।

    तवा जलाशय के आवास में इंडियन स्किमर की उपस्थिति इस क्षेत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। वन विभाग के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का संरक्षित क्षेत्र न केवल बाघों के संरक्षण में अग्रणी है, बल्कि यह अन्य संवेदनशील वन्यजीव प्रजातियों के लिए भी एक पूरी तरह से अनुकूल और सुरक्षित आवास प्रदान कर रहा है।

  • मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू

    मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू


    भोपाल।
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने मध्य प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सनोफी इंडिया लिमिटेड के साथ मंगलवार को एक महत्वपूर्ण एमओयू किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उनकी शीघ्र पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करना और दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों को बेहतर सहयोग प्रदान करना है।

    एमओयू पर एनएचएम मध्य प्रदेश की मिशन डायरेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना और सनोफी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक अरोड़ा द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी एवं संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    एनएचएम एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल विशेष रूप से दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से लोगों को उनके क्षेत्र में ही निःशुल्क जांच, उपचार और डॉक्टरों से टेली-परामर्श की सुविधा मिलेगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य गैर-संचारी रोगों के लिए जागरूकता, प्रारंभिक जोखिम पहचान और रेफरल सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों के लिए शीघ्र पहचान, निःशुल्क जांच और बेहतर उपचार व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे मरीजों को समय पर उचित देखभाल मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल स्तर पर बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से संबंधित सही जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे स्वयं स्वस्थ आदतें अपनाने के साथ अपने परिवार और समुदाय में भी जागरूकता फैला सकें।

    सनोफी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अरोड़ा ने भारत में बढ़ते एनसीडी के दृष्टिगत शीघ्र पहचान की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सनोफी स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाने और मरीजों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की साझेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध है। यह साझेदारी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करेगी।

    इस अवसर पर बताया कि एमओयू के तहत दुर्लभ रोगों के निदान और उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, उन्नत तकनीकों के माध्यम से शीघ्र पहचान तथा चयनित बीमारियों की निःशुल्क जांच की सुविधा चिन्हित संस्थानों में उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य एनसीडी के लिए प्रारंभिक जोखिम पहचान, जागरूकता अभियान और रेफरल सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, जिसमें राज्यभर में तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत “किड्स एंड डायबिटीज इन स्कूल्स (KiDS)” जैसे अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ एवं सामुदायिक कार्यकर्ताओं के लिए क्षमता निर्माण के तहत संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।

    एमओयू के तहत सिंगरौली, बालाघाट और अनूपपुर जिलों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की तैनाती की जाएगी, जिससे दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी। इन यूनिट्स के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मुख कैंसर जैसी बीमारियों की निःशुल्क जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रत्येक यूनिट में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहेंगे तथा डॉक्टरों से टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। प्रारंभिक चरण में यह सेवा इन तीन जिलों में शुरू की जाएगी और आवश्यकता अनुसार अन्य जिलों में भी विस्तार किया जाएगा।

  • भोजशाला के प्राचीन पत्थरों पर अंकित हैं कई मंत्र, सर्वे में मिले ऐतिहासिक तांबे के सिक्के और शिलालेख

    भोजशाला के प्राचीन पत्थरों पर अंकित हैं कई मंत्र, सर्वे में मिले ऐतिहासिक तांबे के सिक्के और शिलालेख


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में चल रही नियमित सुनवाई के दौरान मंगलवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दावा किया ऐतिहासिक भोजशाला के प्राचीन पत्थरों पर कई मंत्र अंकित हैं, जिन्हें मिटाने के सबूत भी मौजूद हैं। वहीं, सर्वे के दौरान ऐतिहासिक तांबे के सिक्के और शिलालेख भी मिले हैं।

    भोजशाला मामले में मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने विस्तृत सर्वे रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया कि इस बार भोजशाला का सर्वे पूर्व की तुलना में अधिक व्यापक और वैज्ञानिक तरीके से किया गया है।

    एएसआई की ओर से बताया गया कि पूर्व में केवल तीन अधिकारियों द्वारा सीमित स्तर पर सर्वे किया गया था, जबकि इस बार 22 अप्रैल 2024 से 98 दिनों तक संरक्षित स्मारक के सभी हिस्सों का विस्तृत अध्ययन किया गया। इस सर्वे में सात एक्सपर्ट्स अधिकारी, पुरातत्वविद और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल रहे, जिन्होंने दोनों पक्षों की उपस्थिति में प्रतिदिन सुबह से शाम तक कार्य किया। सर्वे के दौरान विशेष सावधानी बरती गई कि खुदाई से भोजशाला की मूल संरचना को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। सर्वे की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि प्रत्येक प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट 10 वॉल्यूम में तैयार की गई है, जिसमें कुल 2189 पृष्ठ शामिल हैं। रिपोर्ट में सर्वे के दौरान मिले विभिन्न पुरातात्विक साक्ष्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है।

    एएसआई की ओर से सर्वे का विवरण बताते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने कहा कि ऐतिहासिक भोजशाला में प्राचीन पत्थरों पर ऊं नम: शिवाय समेत कई मंत्र अंकित पाए गए। गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह, भैरव सहित कई देवी-देवताओं की आकृतियां मिलीं। धार्मिक और स्थापत्य महत्व को दर्शातीं 94 कलाकृतियां भी पाई गईं। ये सिद्ध करते हैं कि भोजशाला प्राचीन मंदिर ही थी। इसके साथ ही कई पत्थरों पर अंकित संस्कृत-प्राकृत अक्षरों को मिटाने के साक्ष्य भी मिले हैं। उन पर अरबी-फारसी शब्द स्याही से लिखे होने से छेड़छाड़ के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।

    राजा भोज के काल में बनी भोजशाला

    अधिवक्ता जैन ने यह भी कहा कि अत्याधुनिक तकनीक से किए गए सर्वे से पता चला है कि भोजशाला का निर्माण 10वीं-11वीं सदी के बीच परमार राजा भोज के काल में किया गया था। यहां पाई गईं मिट्टी की ईंटों से बनीं काफी चौड़ी दीवारों की बनावट वैसी ही पाई गई, जैसा उल्लेख राजा भोज की पुस्तकों में मिलता है।

    अब्दुल शाह चंगेज ने बना दिया था मंदिरों को नमाज की जगह

    एएसआई के अधिवक्ता सुनील जैन ने प्राचीन साहित्य का उल्लेख करते हुए कोर्ट को अवगत कराया कि खिलजी शासन के दौरान अब्दुल शाह चंगेज ने फौज के साथ मालवा की राजधानी धार में प्रवेश किया था और ताकत के बल पर कई मंदिरों को नमाज पढ़ने की जगह के रूप में परिवर्तित कर दिया था।

    सर्वे में क्या-क्या मिला, एएसआई ने बताया

    एएसआई के अनुसार, सर्वे में भोजशाला में संस्कृत और प्राकृत भाषा में 150 से अधिक शब्द और शिलालेख मिले। इनमें प्राचीन लेखन स्पष्ट दिखाई देता है। ऊं नम: शिवाय और ऊं सरस्वतैय: नम: जैसे मंत्र पत्थरों पर उकेरे हुए पाए गए। गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह, भैरव सहित कई देव आकृतियां मिलीं। कुल 94 प्राचीन कलाकृतियां पाई गईं, जो धार्मिक और स्थापत्य महत्व दर्शाती हैं। स्तंभों और दीवारों पर शेर, बंदर, सांप और कीर्तिमुख की आकृतियां मिलीं। सीलिंग और पत्थरों पर कमल के डिजाइन मिले, जो मंदिर वास्तुशैली की पहचान माने जाते हैं। संस्कृत-प्राकृत अक्षरों वाले पत्थरों को मिटाकर दोबारा उपयोग के संकेत मिले। ईंट, बेसाल्ट, चूना पत्थर और मार्बल का उपयोग पाया। इससे विभिन्न कालखंडों में निर्माण के संकेत हैं। दक्षिणी हिस्से की मेहराब बाद में जोड़ी गई, जिसका मटेरियल बाकी ढांचे से अलग है। पत्थरों पर स्याही से लिखे गए शब्द भी मिले, जो बाद में जोड़े जाने का संकेत देते हैं।

    मंगलवार को एएसआई के तर्क पूरे हो गए। अगली सुनवाई 6 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें मध्य प्रदेश शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सलेक चंद जैन की ओर से एडवोकेट दिनेश राजभर अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे।

  • टोल प्लाजा हटेंगे…. देश में शुरू होगा नया GPS बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम

    टोल प्लाजा हटेंगे…. देश में शुरू होगा नया GPS बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम


    नई दिल्ली।
    देश में बहुत जल्द ही नया टोल सिस्टम (New Toll System) आने वाला है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने इसको लेकर जानकारी दी है। इसके मुताबिक इस साल के अंत तक पूरे देश से टोल प्लाजा हट सकते हैं। इसकी जगह ऑटोमैटिक सिस्टम (Automatic system) शुरू होगा। जीपीएस बेस्ड इस सिस्टम (GPS Based System) के जरिए गाड़ियों की नंबर प्लेट और फास्टैग लिंक्ड सिस्टम से पैसे कट जाएंगे। गडकरी ने इस सिस्टम के कई फायदे बताए हैं। जिसमें सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टोल प्लाजा पर लगने वाली लाइनों से छुटकारा मिल जाएगा।


    जेब पर भी नहीं पड़ेगा भारी

    नितिन गडकरी ने बताया कि नया सिस्टम काफी सस्ता भी पड़ेगा। टाइम्स ड्राइव ऑटो समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 के दौरान केंद्रीय परिवहन मंत्री इस नए सिस्टम की खूबियां बता रहे थे। उन्होंने कहाकि एक बार ऑटोमैटिक सिस्टम लागू होने के बाद वाहन चालकों के पैसे भी बचेंगे। गडकरी ने कहाकि अभी तक टोल बूथ पर 125 से 150 रुपए देने पड़ते हैं। लेकिन नया सिस्टम लागू होने के बाद यह रकम घटकर 15 रुपए प्रति टोल तक आ सकती है। सिर्फ इतना ही नहीं, 3000 रुपए का पास भी बनवाया जा सकेगा, जिससे वाहन चालक 200 टोल क्रॉसिंग्स तक पार कर सकेंगे।


    कैसे कटेगा पैसा

    नए टोल सिस्टम के बारे में जानकारी देते हुए गडकरी ने कहाकि वाहन चालक आराम से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से जाएंगे। बिना वाहन को रोके नंबर प्लेट और फास्टैग डिटेल कैप्चर की जाएंगी। इसके बाद तय की गई दूरी के अनुसार बैंक अकाउंट से टोल अमाउंट ऑटोमैटिकली कट जाएगी। परिवहन मंत्री के मुताबिक फिलहाल 85 टोल लोकेशंस पर यह सिस्टम पहले ही शुरू किया जा चुका है। इस साल के अंत तक इसे पूरे देश में लागू करने की योजना है।

    ट्रॉलिंग पर क्या बोले

    नितिन गडकरी ने कहाकि सुधार हमेशा प्रैक्टिकल होने चाहिए। उन्होंने गाड़ियों के हॉर्न को बांसुरी और तबले की धुनों से बदले जाने की अपने सुझाव को याद किया। इसके लिए उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा ट्रॉल किया गया था। गडकरी ने बताया कि लोगों ने इस आइडिया की इतनी ज्यादा खिंचाई की कि उन्हें यह आइडिया ही ड्रॉप करना पड़ा। उन्होंने कहाकि इसके बाद मुझे समझ आया कि सुधार प्रैक्टिकल होने चाहिए और ऐसे होने चाहिए जिसे बड़े पैमाने पर स्वीकार किया जाए।

  • MP सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला… गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की डेडलाइन बढ़ाई

    MP सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला… गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की डेडलाइन बढ़ाई


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने किसानों के हित में गेहूं खरीद (Purchasing wheat) के लिए स्लॉट बुकिंग (Slot Booking) की समय-सीमा बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी है ताकि कोई भी किसान एमएसपी के लाभ से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सोमवार को यह घोषणा की। पहले इसकी अंतिम तिथि नौ मई थी। एक अधिकारी ने बताया कि यह फैसला इस उद्देश्य से लिया गया है कि समर्थन मूल्य योजना से कोई भी किसान वंचित न रह जाए।

    चना और मसूर की खरीद की डेडलाइन
    अधिकारी के अनुसार, दो मई तक राज्य में किसानों से 34.73 टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। साल 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत लगभग 600 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। चना और मसूर की खरीद की डेडलाइन 30 मार्च से 28 मई तक निर्धारित की गई है।

    सरकार ने चना के लिए 6.49 लाख टन और मसूर के लिए 6.01 लाख टन खरीद का लक्ष्य तय किया है, जबकि अरहर की 1.31 लाख टन खरीद का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीदी गई उपज का भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया जा रहा है।

    अधिकारी ने बताया कि किसानों की उपज की सुरक्षा के लिए खाद्यान्न भंडारण योजना के तहत लगभग 3.55 लाख टन क्षमता का भंडारण तैयार किया गया है। सामग्री भंडारण योजना के अंतर्गत 1.5 लाख टन क्षमता के आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 1.1 लाख टन क्षमता वाले गोदामों का पंजीकरण पूरा हो चुका है।


    भूमि और फसल का होगा पूरा डिजिटल रिकॉर्ड

    सीएम मोहन यादव ने बताया कि ‘ई-विकास’ और ‘ई-किसान’ प्रणाली के जरिए किसानों को योजनाओं, बाजार भाव, मौसम और तकनीकी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराई जा रही है। एक अप्रैल से राज्य के सभी जिलों में लागू ई-किसान प्रणाली के तहत हर किसान को एक विशिष्ट आईडी दी जा रही है, जिसमें उसकी भूमि और फसल का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड होगा।


    हर खेत का किया जा रहा भू-टैगिंग

    किसान रजिस्ट्री के माध्यम से प्रत्येक खेत का भू-टैगिंग किया जा रहा है, जिससे फसल बीमा, नुकसान का आकलन और ड्रोन से छिड़काव में सुविधा होगी।


    1,000 से अधिक कृषि ड्रोन आपरेटरों को ट्रेनिंग

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में मध्य प्रदेश देश और दुनिया में अग्रणी है, जहां 53 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खेती हो रही है और 6,000 से अधिक संकुल बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि आधुनिक कृषि प्रणाली के तहत 1,000 से अधिक कृषि ड्रोन ऑपरेटरों को जैविक कीटनाशकों के छिड़काव के लिए प्रशिक्षित किया गया है।