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  • पहलगाम हमले पर भारत के साथ खड़ा वियतनाम, पीएम मोदी ने जताया आभार..

    पहलगाम हमले पर भारत के साथ खड़ा वियतनाम, पीएम मोदी ने जताया आभार..

    नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बातचीत के दौरान भारत और वियतनाम के बीच संबंधों को नई दिशा देने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा करने और कठिन समय में भारत के साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए वियतनाम का धन्यवाद किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुटता बेहद आवश्यक है और इस चुनौतीपूर्ण समय में वियतनाम का समर्थन भारत के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप को स्वीकार नहीं करता और इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत है।

    बातचीत के दौरान दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और वियतनाम के रिश्ते केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि यह साझा सभ्यताओं और आध्यात्मिक परंपराओं से भी जुड़े हुए हैं। बोधगया जैसे स्थानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में दोनों देशों के बीच संबंधों में लगातार मजबूती आई है। व्यापार, तकनीक और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है और अब यह साझेदारी एक नए स्तर पर पहुंच रही है। दोनों देश अब अपने संबंधों को और व्यापक और रणनीतिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    इस दौरान यह भी सहमति बनी कि भारत और वियतनाम आने वाले समय में सुरक्षा, आर्थिक विकास और आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेंगे। दोनों देशों का लक्ष्य है कि वे एक-दूसरे की विकास यात्रा में मजबूत साझेदार बनें और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करें।

    प्रधानमंत्री ने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भारत और वियतनाम दोनों तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं। ऐसे में आपसी सहयोग न केवल दोनों देशों के विकास को गति देगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सकारात्मक संदेश देगा।

    उन्होंने बुद्ध के उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति दूसरों के लिए प्रकाश फैलाता है, तो उसका लाभ स्वयं को भी मिलता है। इसी भावना के साथ दोनों देश एक-दूसरे के विकास और लक्ष्यों का समर्थन करते हुए आगे बढ़ेंगे।

    इस पूरे संवाद से यह स्पष्ट संकेत मिला कि भारत और वियतनाम के बीच संबंध अब एक नए और मजबूत चरण में प्रवेश कर चुके हैं, जहां सहयोग केवल औपचारिकता नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • केपटाउन में दीपिका पादुकोण की 'किंग' साइज शूटिंग, तो मुंबई में नन्ही दुआ के साथ 'सुपर डैड' की भूमिका निभा रहे रणवीर सिंह।

    केपटाउन में दीपिका पादुकोण की 'किंग' साइज शूटिंग, तो मुंबई में नन्ही दुआ के साथ 'सुपर डैड' की भूमिका निभा रहे रणवीर सिंह।

    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के सबसे ऊर्जावान और बहुमुखी अभिनेताओं में शुमार रणवीर सिंह इन दिनों पर्दे के पीछे एक बिल्कुल अलग और सराहनीय भूमिका में नजर आ रहे हैं। ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर-2’ जैसी लगातार दो ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद रणवीर ने अपनी पेशेवर प्राथमिकताओं को पूरी तरह से बदल लिया है। जहाँ पहले वह अपनी फिल्मों के प्रचार और कार्यक्रमों की चकाचौंध में डूबे रहते थे, वहीं अब वह एक समर्पित पिता और सहायक पति की जिम्मेदारी निभाने को सर्वोच्च महत्व दे रहे हैं। वर्तमान में दीपिका पादुकोण दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में शाहरुख खान के साथ अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘किंग’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। ऐसी स्थिति में रणवीर सिंह ने घर पर रहकर अपनी नन्ही बेटी दुआ पादुकोण का पूरा ख्याल रखने का फैसला किया है, ताकि दीपिका बिना किसी चिंता के अपना काम पूरा कर सकें।

    फिल्म जगत के जानकारों के अनुसार, रणवीर और दीपिका का एक-दूसरे के प्रति यह सहयोग और समझदारी वाकई मिसाल पेश करने वाली है। रणवीर ने ‘धुरंधर-2’ की अपार सफलता के बाद अपनी अगली बड़ी फिल्म ‘प्रलय’ पर काम शुरू करने से पहले परिवार के साथ समय बिताने का निर्णय लिया। उनकी बेटी दुआ के जन्म के बाद से ही रणवीर सिंह ने लाइमलाइट और सार्वजनिक कार्यक्रमों से थोड़ी दूरी बना ली है। उनके करीबी लोगों का कहना है कि पिता बनने के बाद रणवीर के व्यक्तित्व में काफी ठहराव और सकारात्मक बदलाव आए हैं। वे अब अपनी शूटिंग के व्यस्त शेड्यूल के बीच भी समय निकालकर अपने परिवार के पास लौटने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते। उनके लिए उनकी बेटी दुआ एक ‘लकी चार्म’ की तरह है, जिसके आने के बाद से उनकी फिल्मों ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

    अगर उनके वर्क फ्रंट की बात करें, तो रणवीर सिंह अब किसी अन्य बड़े प्रोजेक्ट के बजाय अपना पूरा ध्यान फिल्म ‘प्रलय’ की तैयारी पर लगा रहे हैं। उन्होंने रचनात्मक मतभेदों के चलते कुछ पुराने प्रोजेक्ट्स से दूरी बना ली है और अब वह एक धमाकेदार अवतार में पर्दे पर लौटने की तैयारी में हैं। दूसरी ओर, दीपिका पादुकोण केपटाउन के खूबसूरत लोकेशन्स पर ‘किंग’ के जरिए एक बार फिर दर्शकों को रोमांचित करने के लिए तैयार हैं। इन दोनों सितारों का आपसी तालमेल यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वे न केवल बड़े पर्दे पर एक सफल जोड़ी हैं, बल्कि अपनी निजी जिंदगी में भी एक-दूसरे के करियर और सपनों का पूरा सम्मान करते हैं। रणवीर का यह ‘सुपर डैड’ अवतार उनके प्रशंसकों के बीच काफी चर्चा और प्रशंसा बटोर रहा है।

  • तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां विजय ने चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय का यह कदम राज्य की सियासत को नए मोड़ पर ले गया है।

    इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने टीवीके प्रमुख से मुलाकात कर औपचारिक रूप से समर्थन पत्र भी सौंपा, जिसके बाद पार्टी मुख्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला।

    कांग्रेस के इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में गेमचेंजर माना जा रहा है। पार्टी के प्रभारी गिरीश चोडानकर ने कहा कि विजय के समर्थन मांगने के बाद यह निर्णय लिया गया और शीर्ष नेतृत्व ने भी इसे मंजूरी दी है। कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्यपाल विजय को जल्द ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।

    हालांकि, आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। टीवीके ने चुनाव में 108 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस के 5 विधायक हैं। इस तरह दोनों का कुल आंकड़ा 113 तक पहुंचता है, जो बहुमत से अभी भी 5 सीट कम है। ऐसे में विजय को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।

    तमिलनाडु की सियासत में यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है, जहां एक तरफ नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने गठबंधन टूटते नजर आ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय बहुमत का आंकड़ा हासिल कर पाते हैं या राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी।

  • उज्जैन में पप्पू यादव का बड़ा हमला: “बंगाल में BJP जीती नहीं, जिताई गई”, चुनाव नतीजों पर उठाए गंभीर सवाल

    उज्जैन में पप्पू यादव का बड़ा हमला: “बंगाल में BJP जीती नहीं, जिताई गई”, चुनाव नतीजों पर उठाए गंभीर सवाल



    नई दिल्ली। उज्जैन में दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव “जीता नहीं, जिताया गया है”। उनके मुताबिक करीब 100 सीटों पर गड़बड़ी कर जीत हासिल की गई और अब भाजपा कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं।

    पप्पू यादव ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और राष्ट्रीय जांच एजेंसी जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया गया। साथ ही उन्होंने भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि हालात ऐसे थे जैसे युद्ध जैसी स्थिति बना दी गई हो।

    वोटिंग प्रतिशत को लेकर भी उन्होंने गंभीर शंका जताई। उनका कहना था कि एक बूथ पर सीमित समय में जितने वोट पड़ सकते हैं, उससे कहीं ज्यादा प्रतिशत दर्ज किया गया, जो जांच का विषय है। उन्होंने मांग की कि दोपहर 2 बजे के बाद की सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए और सभी सीटों की गिनती सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में दोबारा कराई जाए। उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी हारती हैं तो वे जनादेश स्वीकार करेंगे।

    उज्जैन प्रवास के दौरान पप्पू यादव ने महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन कर देश में शांति और मानवता की रक्षा के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि दुनिया युद्ध की ओर बढ़ रही है और ऐसे समय में नफरत नहीं, बल्कि प्रेम और एकता की जरूरत है। उन्होंने नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की।

    राजनीतिक बयानबाजी के बीच पप्पू यादव ने विपक्षी दलों को एकजुट होने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि छोटी पार्टियों को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर नहीं लड़ना चाहिए, बल्कि 2027 और 2029 के चुनावों के लिए एक मजबूत गठबंधन बनाना जरूरी है। उनका मानना है कि बिखरा हुआ विपक्ष भाजपा के सामने कमजोर पड़ता है।

    अपने बयान में उन्होंने कई क्षेत्रीय नेताओं और दलों के कमजोर पड़ने का जिक्र करते हुए कहा कि अब विपक्ष को नई रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कई जगहों पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर हमले हुए, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।

    पप्पू यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर उनके आरोपों ने चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर सियासी बयानबाजी का दौर भी तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

  • ग्लोबल सपोर्ट से बाजार में तेजी का माहौल: बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

    ग्लोबल सपोर्ट से बाजार में तेजी का माहौल: बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

    नई दिल्ली।
    बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत मजबूत रुख के साथ हुई और पूरे सत्र में सकारात्मक माहौल बना रहा। वैश्विक बाजारों से मिले अच्छे संकेतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला, जिससे निवेशकों के बीच खरीदारी का रुझान बढ़ गया। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई और बाजार ने मजबूती के साथ अपनी दिशा तय की।

    बाजार में सबसे ज्यादा असर बैंकिंग सेक्टर का देखने को मिला, जहां लगातार खरीदारी ने पूरे बाजार को सहारा दिया। बैंकिंग शेयरों में आई इस तेजी ने न केवल प्रमुख सूचकांकों को ऊपर उठाया, बल्कि निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत किया। वित्तीय सेक्टर की मजबूती के कारण बाजार में स्थिरता बनी रही और तेजी का रुझान दिनभर कायम रहा।

    इसके साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। छोटे और मध्यम कंपनियों के शेयरों में आई तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशक केवल बड़े स्टॉक्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापक बाजार में भी अवसर तलाश रहे हैं। ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर्स में भी सकारात्मक रुझान बना रहा, जिससे बाजार की गति और मजबूत हुई।

    हालांकि कुछ सेक्टर्स में हल्का दबाव भी देखने को मिला, जहां एफएमसीजी और एनर्जी सेक्टर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। लेकिन इन कमजोरियों का असर पूरे बाजार पर ज्यादा नहीं पड़ा और कुल मिलाकर बाजार हरे निशान में ही बना रहा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में खरीदारी का दबाव मजबूत बना हुआ है।

    वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में सकारात्मक माहौल रहा, जिसका लाभ भारतीय बाजार को मिला। अंतरराष्ट्रीय संकेतों में सुधार और कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के चलते निवेशकों के बीच जोखिम लेने की भावना बढ़ी, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजार पर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में भी तेजी का रुख रहा, जिससे घरेलू निवेशकों का मनोबल और मजबूत हुआ।

    निवेश प्रवाह के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली देखने को मिली, जबकि घरेलू निवेशकों ने बाजार में खरीदारी जारी रखी। घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने बाजार को संतुलन और मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। इसी वजह से विदेशी बिकवाली के बावजूद बाजार में गिरावट नहीं आई और तेजी का रुख बना रहा।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय शेयर बाजार इस समय सकारात्मक चरण में दिखाई दे रहा है, जहां वैश्विक संकेत, मजबूत सेक्टोरल प्रदर्शन और घरेलू निवेशकों की सक्रियता मिलकर बाजार को सपोर्ट कर रहे हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी, लेकिन फिलहाल रुझान मजबूत और स्थिर बना हुआ है।

  • ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल: जख्म अभी बाकी, लेकिन सीमा पर लौट रही जिंदगी; डर के बीच उम्मीद की नई शुरुआत

    ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल: जख्म अभी बाकी, लेकिन सीमा पर लौट रही जिंदगी; डर के बीच उम्मीद की नई शुरुआत


    नई दिल्ली। एक साल पहले शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर आज भी देश के साहस, जवाबी कार्रवाई और मजबूत इरादों की याद दिलाता है। इस ऑपरेशन ने जहां दुश्मन को कड़ा संदेश दिया, वहीं सीमा पर बसे लोगों के जीवन को गहरे जख्म भी दिए। अब एक साल बाद तस्वीर बदलती जरूर दिख रही है घाव अभी भरे नहीं हैं, लेकिन उम्मीद की नई सुबह जरूर दिखाई दे रही है।

    एलओसी से सटे उड़ी सेक्टर के गांवों में जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। चुरुंडा, सिलिकोट, सलामाबाद, गिंगल और लगामा जैसे गांव, जो कभी गोलाबारी से थम गए थे, आज फिर खेतों की हरियाली और बच्चों की स्कूल वापसी से जिंदा नजर आने लगे हैं। छोटे कारोबार फिर शुरू हो चुके हैं, लेकिन हर चेहरे पर सतर्कता अब भी साफ झलकती है।

    बीते संघर्ष के निशान अभी मिटे नहीं हैं। कई गांवों में घरों की दीवारों पर गोलियों और मोर्टार के निशान आज भी उस भयावह दौर की कहानी कहते हैं। चुरुंडा और सिलिकोट में दर्जनों घर क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि कई परिवारों ने अपने अपनों को खोया। लोगों की आंखों में आज भी वो खौफ जिंदा है, जब हर पल जान बचाने की जद्दोजहद थी।

    स्थानीय लोग बताते हैं कि हालात अब शांत जरूर हैं, लेकिन यह शांति स्थायी नहीं बल्कि उम्मीद और डर के बीच सांस ले रही है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग आज भी सुरक्षा से जुड़ी है—कई गांवों में अब तक पर्याप्त बंकर नहीं हैं, जबकि सीमावर्ती इलाकों में खतरा कब बढ़ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।

    पुंछ और आसपास के इलाकों में भी हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। गोलाबारी में तबाह हुए सैकड़ों घर अब फिर से खड़े हो गए हैं। सरकार की मदद और लोगों की मेहनत से दीवारें तो दोबारा बन गईं, लेकिन अपनों को खोने का दर्द आज भी उतना ही गहरा है। कई परिवार ऐसे हैं, जो उस दर्दनाक घटना के बाद आज तक अपने घर लौट नहीं पाए।

    सीमावर्ती इलाकों में अब सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग तेज हो गई है। स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि बंकरों की संख्या बढ़ाई जाए, आधुनिक तकनीक से सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाए और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

    हालांकि, इस पूरे दौर में भारतीय सेना की भूमिका को लोग सबसे बड़ा सहारा मानते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सेना की चौकसी ही उनका आत्मविश्वास बनाए रखती है। खेतों में काम करते किसान और आंगन में खेलते बच्चे इस बात के गवाह हैं कि जिंदगी आगे बढ़ रही है—डर के साथ, लेकिन हौसले के दम पर।

    एक साल बाद तस्वीर साफ है ऑपरेशन सिंदूर ने दुश्मन को करारा जवाब दिया और सीमा पर बड़ी घटनाओं पर रोक लगी। पाकिस्तान की ओर से बड़े हमलों में कमी आई है, जिससे लोगों में भरोसा बढ़ा है।

    फिर भी, सीमावर्ती गांवों की असली कहानी यही है जख्म अभी भी ताजा हैं, यादें अब भी दर्द देती हैं, लेकिन इन सबके बीच उम्मीद जिंदा है। लोग कहते हैं “डटे थे, डटे हैं और डटे रहेंगे।” यही जज्बा इन इलाकों को आगे बढ़ा रहा है और यही विश्वास है कि आने वाले समय में यह शांति स्थायी रूप लेगी।

  • आर्थिक मजबूती की नई मिसाल, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर नीति बनी बड़ी ताकत

    आर्थिक मजबूती की नई मिसाल, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर नीति बनी बड़ी ताकत

    नई दिल्ली।
    भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक नया वैश्विक आकलन सामने आया है, जिसमें देश को उभरते बाजारों में सबसे मजबूत स्थिति में रखा गया है। यह आकलन इस आधार पर किया गया है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई वैश्विक आर्थिक झटकों के बावजूद अपनी स्थिरता और विकास क्षमता को बनाए रखा है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे तीन प्रमुख आधार हैं। इनमें विशाल विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर और संतुलित आर्थिक नीतियां तथा मजबूत घरेलू पूंजी बाजार शामिल हैं। ये तीनों तत्व मिलकर देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2020 के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार कई चुनौतियों से गुजरती रही है। महामारी का प्रभाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी और बैंकिंग क्षेत्र में आए संकट जैसी परिस्थितियों ने कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। इन कठिन हालातों के बीच भारत ने अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया है।

    इस मूल्यांकन में यह भी सामने आया है कि भारत ने फंडिंग लागत में अचानक वृद्धि या अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक पहुंच में किसी बड़ी बाधा का सामना नहीं किया, जो कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुई।

    देश की मौद्रिक नीति को भी स्पष्ट और स्थिर बताया गया है, जिससे महंगाई की उम्मीदें नियंत्रित रहती हैं और निवेशकों का भरोसा बना रहता है। साथ ही जरूरत के अनुसार मुद्रा विनिमय दर में लचीलापन बनाए रखना भी भारत की आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण पहलू माना गया है।

    आकलन में यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौरान भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहेगा। इसका कारण यह है कि देश के पास पहले से मौजूद आर्थिक सुरक्षा ढांचा किसी भी बाहरी झटके को संभालने में सक्षम है।

    भारत की तुलना कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से की गई, जहां यह पाया गया कि विभिन्न देशों ने महामारी के बाद आर्थिक दबावों को अलग-अलग स्तर पर झेला है, लेकिन भारत ने अपेक्षाकृत अधिक स्थिरता दिखाई है।

  • वैश्विक बाजार का असर, सोना-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी..

    वैश्विक बाजार का असर, सोना-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी..

    नई दिल्ली।
    वैश्विक वित्तीय बाजार में बुधवार को एक अहम बदलाव देखने को मिला, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा। डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी के बाद सोने और चांदी की कीमतों में तेज बढ़त दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की गतिविधियों में भी तेजी आ गई है। शुरुआती कारोबार से ही दोनों धातुएं मजबूत रुख के साथ आगे बढ़ती नजर आईं और दिन चढ़ने के साथ इनमें लगातार तेजी बनी रही।

    बाजार में सोने की कीमतों ने मजबूत शुरुआत की और कुछ ही समय में इसमें उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने अपने पिछले स्तर को पार करते हुए नया उच्च स्तर भी छुआ। कीमतों में यह बढ़त निवेशकों की बढ़ती खरीदारी और वैश्विक संकेतों में बदलाव का परिणाम मानी जा रही है।

    इसी तरह चांदी के बाजार में भी तेजी का रुख देखा गया। चांदी ने भी शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाई और कुछ ही समय में इसमें तेज उछाल दर्ज हुआ। कारोबार के दौरान चांदी ने अपने पिछले रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर मजबूत स्थिति बनाई, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि बाजार में इसकी मांग बढ़ रही है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोना और चांदी दोनों में तेजी देखने को मिली, जिससे घरेलू बाजार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में अनिश्चितता और मुद्रा बाजार में बदलाव के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा लाभ कीमती धातुओं को मिल रहा है।

    इस पूरी स्थिति के पीछे मुख्य कारण डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट को माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने पर आमतौर पर कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी जैसी धातुओं की मांग बढ़ जाती है। इसका कारण यह है कि निवेशक डॉलर से हटकर उन संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं, जो आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षित मानी जाती हैं।

    घरेलू बाजार में भी इसका असर साफ तौर पर देखा गया है, जहां सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन कुल मिलाकर रुझान मजबूती की ओर ही बना रहा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक डॉलर इंडेक्स पर दबाव बना रहेगा, तब तक सोने और चांदी में मजबूती का माहौल बना रह सकता है। हालांकि बाजार की प्रकृति को देखते हुए इसमें अचानक बदलाव की संभावना भी बनी रहती है, इसलिए निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।

    फिलहाल बाजार का रुख यह संकेत दे रहा है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर आने वाले दिनों में भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, और सोना-चांदी में तेजी या मंदी पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर रहेगी।

  • MP Weather Alert: डबल सिस्टम का असर, 28 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट; कहीं तूफान तो कहीं झुलसाती गर्मी

    MP Weather Alert: डबल सिस्टम का असर, 28 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट; कहीं तूफान तो कहीं झुलसाती गर्मी



    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है और इस बार वजह बने हैं एक साथ एक्टिव हुए दो मजबूत वेदर सिस्टम। इनके असर से प्रदेश के बड़े हिस्से में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार करीब 28 जिलों में तेज हवाओं, बारिश और अचानक बदलते मौसम की संभावना है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

    ग्वालियर-चंबल, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के जिलों में हालात ज्यादा गंभीर रह सकते हैं। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली समेत कई जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और बारिश होने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने खासतौर पर शाम और रात के समय सतर्क रहने को कहा है, क्योंकि इस दौरान सिस्टम ज्यादा सक्रिय हो सकता है।

    दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश में मौसम का डबल रूप देखने को मिल रहा है। एक तरफ कई जिलों में आंधी-बारिश का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ भोपाल, इंदौर, उज्जैन, विदिशा, सीहोर, धार, खंडवा, खरगोन और आसपास के इलाकों में दिन के समय तेज गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर रही है। हालांकि शाम होते-होते यहां भी मौसम बदल रहा है और तेज हवाओं के साथ बादल छाने लगते हैं।

    बीते कुछ दिनों से प्रदेश में लगातार मौसम का उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कई जिलों में आंधी-बारिश का सिलसिला जारी है, जबकि कुछ इलाकों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। खरगोन में पारा 42 डिग्री तक दर्ज किया गया, जबकि खंडवा और नरसिंहपुर में भी तापमान 41 डिग्री से ऊपर रहा। वहीं कुछ जगहों पर तापमान में गिरावट भी देखने को मिली है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक यह बदलाव दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक ट्रफ लाइन के सक्रिय होने के कारण हो रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में मौसम अस्थिर बना हुआ है और अगले कुछ दिनों तक इसी तरह के हालात बने रहने की संभावना है। इतना ही नहीं, 10 मई के आसपास एक और नया सिस्टम एक्टिव हो सकता है, जिससे आंधी-बारिश का दौर और तेज होने के संकेत हैं।

    कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में फिलहाल मौसम पूरी तरह से अनिश्चित बना हुआ है—कहीं तेज आंधी, कहीं बारिश और कहीं भीषण गर्मी एक साथ देखने को मिल रही है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने, खुले स्थानों से दूर रहने और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

  • 'डार्लिंग-डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा': धुरंधर-2 के इस वायरल संवाद के पीछे का सच आया सामने, अभिनेता ने साझा किए निर्देशक के अतरंगी विकल्प।

    'डार्लिंग-डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा': धुरंधर-2 के इस वायरल संवाद के पीछे का सच आया सामने, अभिनेता ने साझा किए निर्देशक के अतरंगी विकल्प।

    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में ‘धुरंधर’ फ्रैंचाइजी एक ऐसी मिसाल बन चुकी है, जिसने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के साथ-साथ लोकप्रियता के भी सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। रणवीर सिंह अभिनीत ‘धुरंधर-2: द रिवेंज’ अब विश्व स्तर पर 1800 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होने के बेहद करीब पहुंच गई है। इस फिल्म की अपार सफलता में जहाँ मुख्य कलाकारों के अभिनय की सराहना हो रही है, वहीं ‘आलम भाई’ जैसे छोटे लेकिन बेहद प्रभावशाली किरदारों ने भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह पक्की कर ली है। आलम भाई का किरदार निभाने वाले अभिनेता गौरव गेरा ने हाल ही में फिल्म से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जिसने प्रशंसकों को हैरान और लोटपोट कर दिया है।

    गौरव गेरा ने बताया कि फिल्म में उनके किरदार का एक संवाद ‘डार्लिंग-डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा’ सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हुआ है। यह संवाद फिल्म के उस दृश्य का हिस्सा है जहाँ रणवीर सिंह का किरदार (हमजा) अपनी मायूसी के बीच आलम भाई की जूस की दुकान पर बैठता है। गौरव ने खुलासा किया कि यह मशहूर संवाद दरअसल निर्देशक आदित्य धर की रचनात्मक उपज थी। उन्होंने बताया कि शूटिंग से पहले निर्देशक ने उन्हें कई अतरंगी और मजेदार तुकबंदियां विकल्पों के तौर पर भेजी थीं, ताकि दृश्य के मूड के हिसाब से सबसे सटीक जुमला चुना जा सके। गौरव ने सोशल मीडिया पर उन विकल्पों की सूची साझा की है, जिन्हें पढ़कर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस फिल्म के हर सीन पर कितनी बारीकी और रचनात्मकता के साथ काम किया गया है।

    निर्देशक आदित्य धर द्वारा दिए गए विकल्पों में कुछ बेहद अजीबोगरीब और मजेदार जुमले शामिल थे। इनमें ‘महफिल में घुस गया बहन का घोड़ा, पीलो पीलो आलम दूध सोडा’ और ‘अंडे से निकला चूजा खा लो खा लो क्रीम खरबूजा’ जैसे विकल्प थे। यही नहीं, इश्क में नाकामी पर ‘पिस्टल अनानास’ पिलाने और खूबसूरती के लिए ‘आंवला का मामला’ समझाने जैसी तुकबंदियां भी गौरव को सीखने के लिए दी गई थीं। गौरव ने बताया कि ‘लोहे पर हथौड़ा’ और ‘आलम दूध सोडा’ जैसे विकल्पों के बावजूद अंततः सेट पर ‘डार्लिंग-डार्लिंग’ वाले संवाद को ही फाइनल किया गया, क्योंकि इसमें एक अलग तरह का आकर्षण और मनोरंजन था जो दर्शकों को तुरंत पसंद आया।

    बता दें कि फिल्म के इस दूसरे भाग में आलम भाई का किरदार भावनात्मक मोड़ पर शहीद हो जाता है, जिससे कहानी में एक गहरा प्रभाव पड़ता है। पहले भाग में वह हमजा के लिए ल्यारी के मुश्किल माहौल में इकलौता सहारा था और उसे फिल्म के मुख्य विलेन रहमान डकैत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां देता था। गौरव गेरा के इस ताजा खुलासे के बाद फिल्म प्रेमी अब उन अन्य विकल्पों पर भी मजेदार चर्चा कर रहे हैं और यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या अन्य अतरंगी डायलॉग्स भी इतने ही प्रभावी साबित होते। फिलहाल, फिल्म की टीम अपनी इस ऐतिहासिक वैश्विक जीत का आनंद ले रही है और ‘धुरंधर-2’ की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है।