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  • सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम में हंगामा और मुख्य न्यायाधीश से अभद्रता करने वाले लॉ के दो छात्र गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

    सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम में हंगामा और मुख्य न्यायाधीश से अभद्रता करने वाले लॉ के दो छात्र गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

    नई दिल्ली । देश की सर्वोच्च अदालत के भीतर एक बेहद चौंकाने वाली घटना में न्यायिक कार्यवाही को बाधित करने, फाइलों को हवा में उछालने और देश के मुख्य न्यायाधीश के प्रति अत्यंत अभद्र व असंसदीय भाषा का प्रयोग करने वाले कानून के दो छात्रों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सुरक्षाकर्मियों के साथ हाथापाई और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में इन छात्रों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी के तिलक मार्ग थाने में एक आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की वैधानिक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान लखनऊ विश्वविद्यालय में विधि संकाय के छात्रों के रूप में की गई है। इनमें से एक आरोपी का नाम प्रबल प्रताप सिंह है, जो कानून के तीसरे वर्ष का छात्र है और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा का निवासी है। वहीं, दूसरे आरोपी की पहचान चंद्र भान के रूप में हुई है, जो इसी विश्वविद्यालय में विधि द्वितीय वर्ष का छात्र है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह पूरी कानूनी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट परिसर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा स्टाफ के लिखित बयान और शिकायत के आधार पर अमल में लाई गई है।

    यह अभूतपूर्व घटना सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 13 के भीतर घटित हुई, जब अदालत में एक विशेष अनुमति याचिका पर नियमित सुनवाई चल रही थी। अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस याचिका का शीर्षक ‘प्रबल प्रताप व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार’ था। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी प्रबल प्रताप सिंह किसी अधिवक्ता के माध्यम से पेश होने के बजाय खुद ही याचिकाकर्ता-इन-पर्सन के रूप में न्यायाधीशों के समक्ष उपस्थित होकर अपनी दलीलें रख रहा था।

    दर्ज की गई प्राथमिकी के विवरण के मुताबिक, न्यायिक कार्यवाही के दौरान दलीलें खारिज होने या किसी अन्य कारण से आरोपी प्रबल प्रताप सिंह अचानक उग्र हो गया और उसने पूरी तरह से सोची-समझी रणनीति के तहत अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाना शुरू कर दिया। उसने जजों के सामने बेहद अमर्यादित, अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। अपना आपा खोते हुए उसने कोर्ट रूम के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण अदालती कागजात और कानूनी फाइलों को हवा में उछाल दिया, जिससे वे पूरे कोर्ट रूम में बिखर गईं। इस हिंसक आचरण से अदालत कक्ष के भीतर पूरी तरह से अव्यवस्था और अशांति का माहौल पैदा हो गया।

    घटना के वक्त कोर्ट रूम में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षाकर्मियों के अनुसार, आरोपी छात्र यहीं नहीं रुका, बल्कि उसने देश के मुख्य न्यायाधीश के प्रति भी सीधे तौर पर अमर्यादित शब्दों और गालियों का प्रयोग किया। जब कोर्ट रूम की सुरक्षा में तैनात ऑन-ड्यूटी सुरक्षाकर्मियों और प्रशासनिक स्टाफ ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उसे पकड़ने तथा शांत करने का प्रयास किया, तो दोनों आरोपी छात्र और अधिक हिंसक हो गए। उन्होंने सुरक्षा स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी, जिससे ऑन-ड्यूटी कर्मचारियों को अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में गंभीर बाधा का सामना करना पड़ा।

    न्यायालय परिसर के भीतर इस प्रकार के अप्रत्याशित हंगामे को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल को तुरंत मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों उपद्रवी छात्रों को काबू में किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की लिखित शिकायत पर तिलक मार्ग थाना पुलिस ने विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने देश की सबसे बड़ी अदालत की सुरक्षा व्यवस्था और कोर्ट रूम के भीतर वकीलों व याचिकाकर्ताओं के आचरण को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिस पर आने वाले दिनों में और सख्त रुख अपनाए जाने की संभावना है।

  • US: ट्रंप को बड़ा झटका…. यौन शोषण मामले में जीन कैरोल को मिले 5.63 मिलियन डॉलर

    US: ट्रंप को बड़ा झटका…. यौन शोषण मामले में जीन कैरोल को मिले 5.63 मिलियन डॉलर


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी लेखिका ई. जीन कैरोल (American writer E. Jean Carroll) को डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से करीब 56 लाख 30 हजार डॉलर (लगभग 5.63 मिलियन डॉलर) मिल गए हैं. यह पैसा उन्हें 2023 में एक जूरी के फैसले के बाद मिला है, जिसमें ट्रंप को कैरोल का यौन उत्पीड़न करने और उन्हें बदनाम करने का दोषी ठहराया गया था।

    अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक यह रकम सोमवार को कैरोल की लॉ फर्म को भेज दी गई. यह फैसला ट्रंप की आपत्तियों के बावजूद लिया गया. जज लुईस कैप्लान (Judge Lewis Kaplan) ने पांच दिन पहले ही इस भुगतान को मंजूरी दी थी। यह रकम मूल रूप से 5 मिलियन डॉलर के सिविल वर्डिक्ट और उस पर लगे ब्याज को मिलाकर बनी है. यह पहली बार है जब ट्रंप को कैरोल को कोई भुगतान करने पर मजबूर होना पड़ा है।

    पिछले सात साल में कैरोल कुल 88.3 मिलियन डॉलर के सिविल फैसले ट्रंप के खिलाफ जीत चुकी हैं. यह मामला 1996 के आसपास न्यूयॉर्क के बर्गडॉर्फ गुडमैन डिपार्टमेंट स्टोर की एक ड्रेसिंग रूम में हुई कथित घटना से जुड़ा है, जिसे ट्रंप ने हमेशा नकारा है।

    राष्ट्रपति ट्रंप कैरोल के आरोपों को झूठा बताते रहे हैं. उनका कहना है कि वे कैरोल को जानते तक नहीं और कैरोल ने अपनी किताब बेचने के लिए यह कहानी गढ़ी है. पिछले महीने अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रंप की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने 5 मिलियन डॉलर के फैसले को चुनौती दी थी. ट्रंप की कानूनी टीम ने मंगलवार को फिर कहा कि यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित है।

    इससे पहले ट्रंप के वकील ने अदालत से भुगतान रोकने की मांग की थी. वकील का कहना था कि अगर कैरोल यह पैसा दान कर देती हैं, जैसा उन्होंने पहले कहा था, तो यह रकम वापस मिलनी मुश्किल हो जाएगी. हालांकि कैरोल ने बाद में भरोसा दिलाया कि वे इस पैसे को अपने रिटायरमेंट के लिए एक ब्याज वाले खाते में रखेंगी।

  • शुक्र देव कल करेंगे नक्षत्र परिवर्तन… इन चार राशि वालों के लिए खुलेंगे धन के द्वार

    शुक्र देव कल करेंगे नक्षत्र परिवर्तन… इन चार राशि वालों के लिए खुलेंगे धन के द्वार


    नई दिल्ली।
    ज्योतिष शास्त्र में सुख, समृद्धि, धन और वैभव के दाता माने जाने वाले शुक्र देव (Lord Shukra) 16 जुलाई 2026 को अपना नक्षत्र परिवर्तन (Shukra Nakshatra Gochar 2026) करने जा रहे हैं. शुक्र देव (Lord Shukra) इस दिन सिंह राशि (Leo) में रहते हुए मघा नक्षत्र (Magha Nakshatra) से निकलकर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र (Purva Phalguni Nakshatra) में प्रवेश करेंगे।

    सबसे खास बात यह है कि पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी खुद शुक्र देव ही हैं. जब भी कोई ग्रह अपने ही स्वामित्व वाले नक्षत्र में आता है, तो उसकी शक्तियां दोगुनी हो जाती हैं और वह अत्यंत शुभ फल देता है. शुक्र का यह स्व-नक्षत्र गोचर 4 भाग्यशाली राशियों के लिए धन के द्वार खोलने वाला और तिजोरी भरने वाला साबित होगा. आइए जानते हैं उन 4 भाग्यशाली राशियों के बारे में जिन्हें इस दौरान बंपर लाभ मिलने जा रहा है।


    मेष राशि (Aries)

    मेष राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह नक्षत्र परिवर्तन बेहद अनुकूल रहने वाला है. यदि आपका पैसा कहीं लंबे समय से अटका हुआ था, तो वह इस दौरान वापस मिल सकता है. आय के नए स्रोत बनेंगे. नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां या प्रमोशन मिल सकता है. व्यापारियों के लिए यह समय तगड़ा मुनाफा लेकर आ रहा है. मानसिक तनाव कम होगा, प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी और संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है।


    सिंह राशि (Leo)

    शुक्र देव अभी आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, इसलिए इस नक्षत्र परिवर्तन का सबसे बड़ा और सीधा लाभ आपको मिलेगा. यदि आप पार्टनरशिप में कोई बिजनेस कर रहे हैं, तो बड़ा आर्थिक लाभ होने की पूरी संभावना है. भौतिक सुख-सुविधाओं जैसे वाहन, आभूषण या इलेक्ट्रॉनिक्स पर खर्च करेंगे. आपके व्यक्तित्व और आकर्षण में जबरदस्त निखार आएगा. समाज और कार्यक्षेत्र में आपकी लोकप्रियता और मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी. लोग आपकी बातों और फैसलों से प्रभावित होंगे।


    तुला राशि (Libra)

    तुला राशि के स्वामी खुद शुक्र देव ही हैं, इसलिए अपने ही नक्षत्र में शुक्र का आना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. आर्थिक मामलों में लंबे समय से चल रही तंगी दूर होगी. आकस्मिक धन लाभ (अचानक पैसा मिलना) और निवेश से जुड़े मामलों में बड़ा मुनाफा होने के योग हैं. जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं या इंक्रीमेंट का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें 16 जुलाई के बाद कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है. दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी और परिवार के सहयोग से बिगड़े काम बन जाएंगे।


    धनु राशि (Sagittarius)

    धनु राशि के जातकों के लिए भी शुक्र का यह गोचर भाग्य के सितारे बुलंद करने वाला है. आपके जो काम पिछले कई महीनों से लटके हुए थे, वे अब तेजी से पूरे होने लगेंगे. भाग्य का पूरा साथ मिलेगा. नौकरीपेशा लोगों को अपनी मेहनत का शानदार फल मिलेगा. वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को इस अवधि में बड़ी सफलता मिल सकती है. काम के सिलसिले में की गई यात्राएं आपके लिए आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित होंगी।

  • खजुराहो एयरपोर्ट देशभर में टॉप पर, भोपाल का राजाभोज एयरपोर्ट तीसरे स्थान पर

    खजुराहो एयरपोर्ट देशभर में टॉप पर, भोपाल का राजाभोज एयरपोर्ट तीसरे स्थान पर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खजुराहो एयरपोर्ट (Khajuraho Airport) ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के इस साल के नेशनल कस्टमर सैटिस्फैक्शन रैंकिंग (National Customer Satisfaction Survey Ranking) में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है. वहीं, भोपाल स्थित राजा भोज एयरपोर्ट (Raja Bhoj Airport) ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है. यात्री सुविधाओं, साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और सेवा गुणवत्ता के मामले में दोनों एयरपोर्ट का शीर्ष स्थानों पर पहुंचना मध्य प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है।

    खजुराहो एयरपोर्ट के डायरेक्टर संतोष सिंह ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह पूरी टीम की कड़ी मेहनत, यात्रियों के भरोसे और बेहतर सेवाएं देने की निरंतर प्रतिबद्धता का परिणाम है. उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट मैनेजमेंट का उद्देश्य यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना और भविष्य में सेवा की गुणवत्ता को लगातार बेहतर बनाना है. उनका कहना था कि यात्रियों का सकारात्मक अनुभव ही किसी भी एयरपोर्ट की सबसे बड़ी सफलता का पैमाना होता है।


    यात्रियों के फीडबैक के आधार पर बनी रैंकिंग

    एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के मुताबिक, यह रैंकिंग देशभर के विभिन्न हवाई अड्डों पर यात्रियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर तैयार की गई है. सर्वे के दौरान यात्रियों से एयरपोर्ट पर मिलने वाली सुविधाओं और सेवाओं के बारे में विस्तृत प्रतिक्रिया ली गई. इसके बाद विभिन्न मानकों पर एयरपोर्ट का मूल्यांकन कर अंतिम रैंकिंग जारी की गई. इस सर्वे में चेक-इन प्रक्रिया, सुरक्षा जांच, टर्मिनल की साफ-सफाई, कर्मचारियों का व्यवहार, प्रतीक्षा समय, खानपान की सुविधाएं, सूचना प्रणाली और यात्रियों के समग्र अनुभव जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया।

    इन सभी मानकों पर खजुराहो एयरपोर्ट ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश में पहला स्थान हासिल किया. संतोष सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एयरपोर्ट प्रबंधन के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि विश्व प्रसिद्ध खजुराहो के मंदिर, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं, हर साल बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. ऐसे में बेहतर हवाई संपर्क, आधुनिक सुविधाएं और उत्कृष्ट यात्री अनुभव क्षेत्र में पर्यटन को और बढ़ावा देंगे।

    वहीं, भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट का देश में तीसरे स्थान पर आना भी इस बात का संकेत है कि मध्य प्रदेश के हवाई अड्डों पर यात्री सुविधाओं और सेवा गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा है. अधिकारियों का मानना है कि इस उपलब्धि से राज्य की सकारात्मक छवि मजबूत होगी और भविष्य में अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

  • कल से शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा…. सोने की झाड़ू से होती है यात्रा मार्ग की सफाई, जानें इसकी वजह

    कल से शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा…. सोने की झाड़ू से होती है यात्रा मार्ग की सफाई, जानें इसकी वजह


    पुरी।
    ‘जगन्नाथ रथ यात्रा 2026’ (Jagannath Rath Yatra 2026) का शुभारंभ 16 जुलाई से होने जा रहा है. हिंदू धर्म (Hinduism) में भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की रथ यात्रा सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है. इस रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं. इस रथ यात्रा में एक बड़ी ही अनोखी और विशेष परंपरा निभाई जाती है, जो वहां मौजूद हर एक शख्स का ध्यान खींचती है।

    रथ यात्रा के दौरान गजपति महाराज या उनके राजवंश के उत्तराधिकारी झाड़ू लेकर रथ के मार्ग की सफाई करते हैं. ये झाड़ू बहुत ही खास होती है, जिसमें सोने का हत्था लगा होता है. इसी से रथ मार्ग की सफाई की जाती है. इसके बाद वैदिक मंत्रों और जयघोष के बीच रथ यात्रा का शुभारंभ होता है. आइए जानते हैं कि रथ यात्रा के मार्ग को साफ करने के लिए सोने की झाड़ू का प्रयोग क्यों किया जाता है।

    1. जगन्नाथ रथ यात्रा में सोने की झाड़ू से मार्ग की सफाई केवल एक औपचारिक रस्म नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक भावना का प्रतीक मानी जाती है. हिंदू परंपरा में सोने को शुद्धता, पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक माना गया है. इसलिए भगवान के रथ के मार्ग को सोने के हत्थे वाली झाड़ू से साफ करना उनके स्वागत और सम्मान का विशेष तरीका माना जाता है।

    3. यह परंपरा यह संदेश भी देती है कि ईश्वर की दृष्टि में हर व्यक्ति समान है. क्या राजा और क्या प्रजा. गजपति महाराज स्वयं झाड़ू लगाकर यह दर्शाते हैं कि ईश्वर के सामने राजा और सामान्य व्यक्ति में कोई भेद नहीं होता है. यह विनम्रता, सेवा और समर्पण की सर्वोच्च प्रतीक है।

    3. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोना सौभाग्य, समृद्धि और शुभता का भी प्रतीक है. इसलिए इस पवित्र अनुष्ठान को सकारात्मक ऊर्जा और मंगलमय वातावरण का माध्यम माना जाता है. श्रद्धालु ऐसा मानते हैं कि इस परंपरा के दर्शन और सहभागिता से भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यह परंपरा कई पीढ़ियों से निरंतर निभाई जा रही है और आज भी रथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

  • मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की तैयारी… इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाले दलों से समर्थन पर बातचीत जारी

    मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की तैयारी… इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाले दलों से समर्थन पर बातचीत जारी


    नई दिल्ली।
    मानसून सत्र (Monsoon-Session) में परिसीमन (Delimitation) व महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment-Bill) को पारित कराने के लिए मोदी सरकार (Modi Government) ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसके लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल हासिल करने के लिए सरकार ने विपक्षी दलों की तीन श्रेणियां बनाई हैं। हाल ही में इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाली द्रमुक के अलावा एनसीपी (एसपी), जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस से विधेयक को प्रत्यक्ष समर्थन करने पर, जबकि दूसरे कई अन्य गैर कांग्रेसी दलों से परोक्ष समर्थन पर बातचीत का दौर जारी है।

    सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों की तीन श्रेणियों में पहली श्रेणी ऐसे दलों की है, जो विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे। दूसरी श्रेणी समर्थन की संभावना वाले दलों की है। तीसरी श्रेणी मतदान से दूरी बनाने की संभावना वाले दलों की है। सूत्रों की माने तो प्रत्यक्ष समर्थन के लिए द्रमुक, वाईएसआर कांग्रेस की कुछ मांगों पर विचार किया जा रहा है। इसी श्रेणी में शरद पवार की एनसीपी भी शामिल है। सदन में अगर पुरानी स्थिति रही तो सरकार को दो तिहाई बहुमत के लिए अतिरिक्त 54 तो वर्तमान स्थिति के हिसाब से 60 मतों का जुगाड़ करना होगा।


    संसद में कैसे सधेगा नंबर गेम?

    इस बीच तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के बाद सरकार को पुरानी स्थिति में 28 मतों और वर्तमान स्थिति में 36 अतिरिक्त मतों का जुगाड़ करना होगा। अगर द्रमुक के 22, एनसीपी (एसपी) के 8 और वाईएसआर कांग्रेस के 4 सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया तो सरकार की परेशानी दूर हो जाएगी। मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के वॉयस ऑफ पीपुल्स, यूपीपीएल और जेडपीएम (4 सांसद) को पहले ही साध लिया है।


    दूसरी स्थिति के लिए भी रणनीति

    द्रमुक, एनसीपी (एसपी) और वाईएसआर कांग्रेस में से एक या दो दल अगर समर्थन के लिए राजी नहीं हुए तो इन्हें मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि तृणमूल के कम से कम दो सांसद इस प्रस्ताव को स्वीकार कर सकते हैं। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल, निर्दलीय सांसदों को भी समर्थन न देने की स्थिति में मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। फिर सरकार की विपक्षी दलों के उन सांसदों पर भी नजर है जो नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं।


    सत्र के दौरान बनेगी अंतिम रणनीति

    सरकार की योजना विपक्षी दलों से लगातार बातचीत जारी रखते हुए सत्र के दौरान अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने की है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि विधेयक को अगले महीने के पहले सप्ताह में पेश करने की है। ऐसे में सत्र के दौरान विपक्षी दलों से मंथन का नया दौर शुरू होगा।

  • कनाड़ा में भीषण गर्मी ने लोग बेहाल…. टोरंटो में तापमान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड

    कनाड़ा में भीषण गर्मी ने लोग बेहाल…. टोरंटो में तापमान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड


    टोरंटो।
    कनाडा (Canada) के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी (Scorching heat) का दौर जारी है, तेज गर्मी और उमस ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. टोरंटो (Toronto) समेत दक्षिणी ओंटारियो (Southern Ontario) के कई शहरों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड (Old Records) तोड़ दिए. टोरंटो के डाउनटाउन इलाके में मंगलवार को तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो जुलाई के इस समय के लिए 31 साल पुराने रिकॉर्ड से भी ज्यादा रहा।

    एनवायरनमेंट कनाडा के मुताबिक, इससे पहले 14 जुलाई को टोरंटो पियर्सन एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा तापमान 1995 में दर्ज किया गया था, जब पारा 36.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था. इस बार तापमान उस स्तर को पार कर गया. हालांकि, तेज उमस के कारण लोगों को गर्मी 40 से 45 डिग्री सेल्सियस जैसी महसूस हुई।


    कई प्रांतों में हीट वॉर्निंग जारी

    भीषण गर्मी के चलते ओंटारियो के ज्यादातर हिस्सों में हीट वॉर्निंग जारी की गई. इसके अलावा मैनिटोबा, सस्केचेवान, अल्बर्टा और नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज के कई इलाकों में भी गर्मी और खराब हवा की गुणवत्ता को लेकर अलर्ट जारी किए गए. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में बने एक बड़े हाई प्रेशर सिस्टम की वजह से कनाडा के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंचा है. इस सिस्टम ने अमेरिका के ऊपरी मैदानी इलाकों से लेकर ग्रेट लेक्स क्षेत्र और क्यूबेक तक गर्म हवा का प्रभाव बढ़ाया है.


    हीटवेव के साथ एयर क्वालिटी की चिंता

    गर्मी के बीच पश्चिमी कनाडा में जंगलों की आग का धुआं भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. थंडर बे के आसपास के क्षेत्रों में जंगलों की आग से उठने वाला धुआं हवा के साथ पहुंच रहा है, जिससे कुछ जगहों पर एयर क्वालिटी खराब दर्ज की गई.

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गर्मी और प्रदूषित हवा का एक साथ असर स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है. खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

    नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज के डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे नियमित रूप से एयर क्वालिटी इंडेक्स चेक करें. धुएं वाले दिनों में N95 मास्क पहनने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह हवा में मौजूद बारीक कणों को रोकने में ज्यादा प्रभावी होता है.


    क्यूबेक में तूफान और टॉरनेडो का अलर्ट

    जहां एक ओर देश का बड़ा हिस्सा गर्मी से जूझ रहा है, वहीं पूर्वी कनाडा में मौसम का अलग रूप देखने को मिला. क्यूबेक और न्यू ब्रंसविक में तेज तूफान की चेतावनी जारी की गई. मॉन्ट्रियल से क्यूबेक सिटी के बीच के इलाकों में कुछ समय के लिए टॉरनेडो वॉच भी जारी की गई थी.


    कूलिंग सेंटर और सार्वजनिक सुविधाएं शुरू

    गर्मी से राहत देने के लिए ओटावा समेत कई शहरों ने कूलिंग सेंटर और सार्वजनिक पूल खोल दिए हैं. कुछ व्यवसायों ने भी कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए अस्थायी रूप से काम बंद करने का फैसला किया है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है. लोगों को मौसम के अलर्ट पर नजर रखने और तेज गर्मी के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

  • महाराष्ट्र में नए सियासी उलटफेर के संकेत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस संग एनसीपी के दोनों धड़ों की गोपनीय बैठक से गरमाया राजनीतिक माहौल

    महाराष्ट्र में नए सियासी उलटफेर के संकेत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस संग एनसीपी के दोनों धड़ों की गोपनीय बैठक से गरमाया राजनीतिक माहौल

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़े सियासी फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास पर मंगलवार देर रात राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं की ताबड़तोड़ बैठकें हुईं। इन गोपनीय मुलाकातों के बाद से ही कयासों का बाजार बेहद गर्म है और विपक्षी खेमे में भारी बेचैनी देखी जा रही है। सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी गठबंधन को बड़ा झटका देकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के पाले में जाने की तैयारी कर रही है।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास ‘सिल्वर ओक’ पर जाकर उनसे बेहद लंबी मंत्रणा की। इसके तुरंत बाद वे देर शाम सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करने पहुंचे। इस दौरान राजनीतिक तापमान तब और बढ़ गया जब सत्ताधारी एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल भी अलग से मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। हालांकि बैठक में शामिल किसी भी नेता या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस चर्चा के मुख्य एजेंडे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन दोनों ही गुटों के सूत्रों ने इस बात को स्वीकार किया है कि पर्दे के पीछे किसी बड़े राजनीतिक समझौते की पटकथा लिखी जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई 2023 में पार्टी के विभाजन के बाद यह पहली बार है जब शरद पवार की पार्टी सबसे बड़े रणनीतिक संकट का सामना कर रही है। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो शरद पवार गुट के कुल 10 विधायकों में से कम से कम आधे से अधिक विधायक भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में शामिल होने के प्रबल पक्ष में हैं। लंबे समय तक विपक्षी खेमे में रहने के कारण इन विधायकों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आवश्यक विकास निधि जुटाने और प्रशासनिक मंजूरियां हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनके जमीनी राजनीतिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे।

    पार्टी के प्रांतीय नेतृत्व ने हाल ही में अपने विधायकों की इस गंभीर भावना और चिंताओं से शीर्ष आलाकमान को विस्तार से अवगत कराया था। यद्यपि शरद पवार ने इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही पार्टी के अगले कदम को लेकर कोई सार्वजनिक घोषणा की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि वे अपने विधायकों के भारी दबाव के कारण इस नए विकल्प पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस साल की शुरुआत में मुंबई महानगरपालिका चुनावों के बाद से ही दोनों धड़ों के एक होने या शरद गुट के कांग्रेस में विलय की खबरें आती रही हैं, लेकिन कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के कड़े विरोध के कारण अब बाजी पूरी तरह एनडीए की ओर मुड़ती हुई दिखाई दे रही है।

    संख्या बल के रणनीतिक गणित को देखें तो विधानसभा में शरद पवार गुट के पास वर्तमान में 10 विधायक और लोकसभा में 8 सांसद मौजूद हैं। हालांकि यह महाराष्ट्र के प्रमुख राजनीतिक दलों में संख्या के हिसाब से छोटा समूह प्रतीत हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा नीत एनडीए के लिए इसकी उपयोगिता बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। केंद्र सरकार आगामी संसद सत्रों में सीमांकन विधेयक जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कानूनों को पारित कराने की योजना बना रही है, जिसके लिए उसे उच्च सदन और निम्न सदन दोनों में अतिरिक्त मतों की आवश्यकता है। ऐसे समय में एनडीए के शीर्ष रणनीतिकार शरद पवार गुट से मिलने वाले किसी भी संभावित वैधानिक समर्थन का खुले दिल से स्वागत करने के लिए तैयार दिख रहे हैं।

    यह राजनीतिक उथल-पुथल सिर्फ शरद पवार खेमे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अजित पवार गुट के भीतर भी भारी अंतर्विरोध और मंथन का दौर जारी है। इस साल जनवरी के अंत में एक दुखद विमान हादसे में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद से राज्य की राजनीति का पूरा परिदृश्य बदल चुका है। उनके निधन के बाद से दोनों गुटों के दोबारा एक होने की सुगबुगाहट तो तेज हुई थी, लेकिन नेतृत्व को लेकर बात नहीं बन सकी। अब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर ही कानूनी आपत्तियां उठाई जा रही हैं, जिसने संगठन के आंतरिक असंतोष को उजागर कर दिया है। इन सभी बदलते हालातों के बीच दिल्ली से लेकर मुंबई तक की राजनीतिक नजरें अब शरद पवार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।

  • US ने ईरान पर लगाया सात कारोबारी जहाजों पर हमले का आरोप, भारतीय नाविक भी प्रभावित

    US ने ईरान पर लगाया सात कारोबारी जहाजों पर हमले का आरोप, भारतीय नाविक भी प्रभावित


    वॉशिंगटन।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव (West Asia Crisis) के बीच अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) (US Central Command -CENTCOM) ने कहा है कि पिछले सात दिनों में ईरान ने सात वाणिज्यिक (कमर्शियल) जहाजों को निशाना बनाया, जिससे करीब एक दर्जन नागरिक चालक दल (क्रू) के सदस्य मारे गए, लापता हुए या घायल हुए हैं। अमेरिका ने कहा कि इन घटनाओं के लिए वह ईरान को जिम्मेदार मानता है।

    सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बयान जारी कर कहा कि ईरानी बलों ने जानबूझकर नागरिक जहाजों को निशाना बनाया है। उनके मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में ईरान ने सात कारोबारी जहाजों पर हमले किए। इसके अलावा ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों की ओर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन भी दागे। उन्होंने कहा कि अमेरिका निर्दोष लोगों की जान को खतरे में डालने वाली ईरान की आक्रामक गतिविधियों के लिए उसे जवाबदेह ठहरा रहा है।


    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा तनाव

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही को बाधित कर रहा है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त तेल और व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। सेंटकॉम ने बताया कि उसने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले जहाजों पर नौसैनिक नाकेबंदी फिर से शुरू कर दी है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कदम ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए उठाया गया है, जिनका इस्तेमाल व्यापारिक जहाजों पर हमलों में किया जा रहा है। अमेरिका के अनुसार, इस अभियान के तहत क्षेत्र में 20 से अधिक अमेरिकी युद्धपोत और सैकड़ों सैन्य विमान तैनात किए गए हैं।


    भारत ने जताई चिंता

    इस बीच भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो जहाजों; एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा; पर हुए हमले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इन दोनों जहाजों पर कुल 46 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 30 भारतीय नाविक शामिल थे।


    यूएई ने भी हमले की पुष्टि की

    संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यूएई के झंडे वाले टैंकर मोम्बासा और बहियाह को होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में, ओमान के क्षेत्रीय जल में, ईरानी क्रूज मिसाइलों से निशाना बनाया गया। इन घटनाओं के बाद पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तेज होने की आशंका भी जताई जा रही है।

  • पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने की PM मोदी की तारीफ…. बोले- रूसी राष्ट्रपति मानते हैं उनकी बात

    पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने की PM मोदी की तारीफ…. बोले- रूसी राष्ट्रपति मानते हैं उनकी बात


    वारसॉ।
    पोलैंड के उप विदेश मंत्री (Polish Deputy Foreign Minister ) व्लादिस्लाव थियोफिल बार्टोशेवस्की (Vladislav Theophil Bartoshevsky) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की सराहना की है। उन्होंने पीएम मोदी को एक बहुत प्रसिद्ध और सम्मानित वैश्विक राजनेता बताया। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) भारतीय प्रधानमंत्री की बातों पर ध्यान देते हैं। बार्टोशेवस्की ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि पीएम मोदी ने साल 2022 के अंत में राष्ट्रपति पुतिन को यूक्रेन में सामरिक परमाणु हथियारों (टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स) का इस्तेमाल करने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


    रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने में प्रभाव

    पोलिश नेता ने कहा कि पीएम मोदी रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अपना प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी उन गिने-चुने लोगों में से एक हैं जो वास्तव में राष्ट्रपति पुतिन पर कुछ दबाव और प्रभाव डाल सकते हैं। भारत इस संघर्ष को रोकने के लिए ऐसा कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत एक गुटनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में रूस और पूर्व सोवियत संघ के साथ लंबे समय से संबंध बनाए हुए है।


    पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत का रुख

    पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत के रुख को सही बताते हुए बार्टोशेवस्की ने कहा कि भारत एक बड़ा और महत्वपूर्ण देश है। भारत को तेल सहित वस्तुओं के मुक्त प्रवाह से लाभ होता है। भारत खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस पर बहुत निर्भर है। पोलैंड भी ईरान के संपर्क में है और कूटनीतिक समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि हम भी पीएम मोदी की तरह ही समझदारी से बात करने की कोशिश कर रहे हैं।


    पुतिन ने भी की थी भारत की तारीफ

    रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था। पिछले महीने सेंट पीटर्सबर्ग इकोनॉमिक फोरम में राष्ट्रपति पुतिन ने भी भारत को एक महान देश बताया था। उन्होंने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का समर्थन किया था। पुतिन ने कहा था कि भारत का अपनी पसंद के देशों के साथ आर्थिक संबंध विकसित करना स्वाभाविक है। पुतिन ने भारत पर दबाव बनाने की अमेरिकी कोशिशों की आलोचना करते हुए इसे द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदेह बताया था।

    पुतिन ने पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक वृद्धि की सराहना की थी और कहा था कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उन्होंने इसे पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार की कड़ी मेहनत का परिणाम बताया था। उन्होंने भारत और रूस के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को भी रेखांकित किया था।