Blog

  • जब फुटबॉल बना विरासत, वर्ल्ड कप में मैदान पर उतरी पिता और बेटे की ये 5 जोड़ियां

    जब फुटबॉल बना विरासत, वर्ल्ड कप में मैदान पर उतरी पिता और बेटे की ये 5 जोड़ियां


    नई दिल्ली । फुटबॉल के सबसे बड़े मंच FIFA World Cup में जहां हर खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलना सपना मानता है, वहीं कुछ परिवार ऐसे भी रहे हैं जिनमें यह सपना दो पीढ़ियों तक पूरा हुआ। कई दिग्गज खिलाड़ियों ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्व कप में जगह बनाई।

    1. लुइस और मारियो पेरेज (मेक्सिको)
    पिता लुइस पेरेज ने 1930 के विश्व कप में मेक्सिको का प्रतिनिधित्व किया था। उनके बेटे मारियो पेरेज ने 1950 के वर्ल्ड कप में राष्ट्रीय टीम की ओर से खेला। हालांकि दोनों ही अपने-अपने विश्व कप में गोल नहीं कर सके।

    2. मार्टी और जोस वैंटोलरा (स्पेन/मेक्सिको)
    मार्टी वैंटोलरा 1934 में स्पेन की टीम का हिस्सा थे, जबकि उनके बेटे जोस वैंटोलरा ने 1970 में मेक्सिको के लिए विश्व कप खेला। दोनों ही खिलाड़ी गोल करने में सफल नहीं हो पाए।

    3. डोमिंगोस और अदेमिर दा गुइया (ब्राजील)
    डोमिंगोस ने 1938 में Brazil national football team की ओर से विश्व कप खेला। उनके बेटे अदेमिर दा गुइया 1974 में ब्राजील टीम का हिस्सा रहे, लेकिन सीमित अवसरों में उन्हें भी गोल नहीं मिला।

    4. रोजर और पैट्रिस रियो (फ्रांस)
    रोजर रियो ने 1934 में France national football team के लिए विश्व कप खेला। उनके बेटे पैट्रिस रियो 1978 में फ्रांस की टीम में शामिल रहे, लेकिन वे भी गोल नहीं कर सके।

    5. निकोले और इओन लुपस्कु (रोमानिया)
    निकोले लुपस्कु ने 1970 विश्व कप में रोमानिया का प्रतिनिधित्व किया। उनके बेटे इओन लुपस्कु 1990 और 1994 के वर्ल्ड कप में टीम का हिस्सा रहे और कुल 8 मैच खेले, लेकिन गोल नहीं कर पाए।

    विरासत की कहानी
    ये सभी जोड़ियां इस बात का प्रतीक हैं कि विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक चलने वाली फुटबॉल परंपरा भी है, जहां एक ही परिवार का नाम दो अलग-अलग युगों में इतिहास बनाता है।

  • UN सुरक्षा परिषद चुनाव में बड़ा बदलाव: पाकिस्तान की विदाई तय, पहली बार किर्गिस्तान को मिली UNSC में जगह

    UN सुरक्षा परिषद चुनाव में बड़ा बदलाव: पाकिस्तान की विदाई तय, पहली बार किर्गिस्तान को मिली UNSC में जगह

    नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों के लिए हुए चुनाव में इस बार महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े सबसे प्रभावशाली मंचों में से एक माने जाने वाले सुरक्षा परिषद में कई नए देशों की एंट्री हुई है, जबकि कुछ मौजूदा सदस्य अपने कार्यकाल की समाप्ति के साथ परिषद से बाहर हो जाएंगे। इस चुनाव का सबसे चर्चित परिणाम किर्गिस्तान की ऐतिहासिक जीत रही, जिसने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में जगह बनाई है।

    संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान के बाद किर्गिस्तान को दो वर्षीय कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद का सदस्य चुना गया। इसके साथ ही देश ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सुरक्षा परिषद में उसकी मौजूदगी को मध्य एशियाई क्षेत्र के बढ़ते महत्व और वैश्विक मंच पर उसकी सक्रिय भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।

    इस चुनाव के परिणामों के बाद पाकिस्तान का कार्यकाल समाप्त होने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। पाकिस्तान वर्तमान में सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों में शामिल है, लेकिन उसका कार्यकाल वर्ष 2026 के अंत में समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही परिषद में उसकी जगह नए सदस्य देश अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। पाकिस्तान के अलावा पनामा, डेनमार्क, ग्रीस और सोमालिया भी अपना कार्यकाल पूरा कर परिषद से बाहर हो जाएंगे।

    चुनाव प्रक्रिया के दौरान पांच सीटों के लिए सात देशों के बीच मुकाबला हुआ। संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार किसी भी उम्मीदवार देश को जीत के लिए महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य देशों के कम से कम दो-तिहाई मत प्राप्त करना आवश्यक होता है। मतदान के पहले दौर में ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा जिम्बाब्वे को पर्याप्त समर्थन मिल गया और वे सीधे निर्वाचित हो गए। शेष सीट के लिए कई दौर की वोटिंग हुई, जिसके बाद किर्गिस्तान ने फिलीपींस को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की।

    नवनिर्वाचित देशों का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा और 31 दिसंबर 2028 तक जारी रहेगा। इस दौरान ये देश वैश्विक सुरक्षा, संघर्ष समाधान, शांति स्थापना अभियानों और अंतरराष्ट्रीय संकटों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। सुरक्षा परिषद में उनकी भूमिका न केवल क्षेत्रीय हितों का प्रतिनिधित्व करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी योगदान देगी।

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कुल 15 सदस्य देशों से मिलकर बनी है। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन स्थायी सदस्य हैं, जिन्हें वीटो शक्ति प्राप्त है। इनके अलावा दस गैर-स्थायी सदस्य होते हैं, जिनका चुनाव क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर किया जाता है। हर वर्ष पांच सीटों पर नए सदस्यों का चयन होता है, जिससे परिषद में विभिन्न क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    सुरक्षा परिषद को संयुक्त राष्ट्र की सबसे प्रभावशाली संस्था माना जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में बाध्यकारी निर्णय लेने, आर्थिक प्रतिबंध लगाने और आवश्यकता पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने की शक्ति रखती है। ऐसे में परिषद की सदस्यता किसी भी देश के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीतिक उपस्थिति मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। किर्गिस्तान की ऐतिहासिक जीत और नए सदस्य देशों की एंट्री को इसी संदर्भ में वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

  • जब टेस्ट क्रिकेट में आमने-सामने आए भारत और अफगानिस्तान, किसका रहा दबदबा?

    जब टेस्ट क्रिकेट में आमने-सामने आए भारत और अफगानिस्तान, किसका रहा दबदबा?


    नई दिल्ली । भारत और अफगानिस्तान के बीच महामुकाबला: मुल्लांपुर टेस्ट में युवा जोश के साथ उतरेगी टीम इंडिया
    क्रिकेट प्रेमियों का इंतजार खत्म होने जा रहा है क्योंकि भारत और अफगानिस्तान की टीमें पूरे आठ साल बाद टेस्ट क्रिकेट के सबसे लंबे और पारंपरिक प्रारूप में एक बार फिर टकराने के लिए तैयार हैं। दोनों देशों के बीच यह एकमात्र टेस्ट मैच शनिवार से मुल्लांपुर के महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम इस मुकाबले में नए और युवा कप्तान शुभमन गिल की अगुआई में अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान क्रिकेट टीम इस बार मजबूत तैयारी के साथ इतिहास रचने की पुरजोर कोशिश करेगी।

    अगर दोनों टीमों के हेड टू हेड रिकॉर्ड और इतिहास पर नजर डालें, तो टेस्ट प्रारूप में भारत का पलड़ा पूरी तरह भारी रहा है। भारत और अफगानिस्तान के बीच अब तक टेस्ट इतिहास में केवल एक ही मुकाबला खेला गया है। यह ऐतिहासिक मैच वर्ष 2018 में बेंगलुरु के मैदान पर आयोजित हुआ था, जो अफगानिस्तान के क्रिकेट इतिहास का पहला टेस्ट मैच भी था। उस मुकाबले में भारतीय टीम ने खेल के हर विभाग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए अफगानिस्तान को एक पारी और 262 रनों के विशाल अंतर से शिकस्त दी थी। यह ऐतिहासिक जीत आज भी टेस्ट क्रिकेट में रनों और पारी के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी जीतों में शुमार की जाती है। हालांकि, तब से लेकर अब तक वक्त काफी बदल चुका है और अफगान टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक नई पहचान बनाई है।

    इस बार मुल्लांपुर टेस्ट के लिए भारतीय चयनकर्ताओं ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए टीम में कई नए और युवा चेहरों को शामिल किया है, जिन पर चयनकर्ताओं के भरोसे को सही साबित करने का दारोमदार होगा। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपनी चमक बिखेरने वाले देवदत्त पडिक्कल को टीम में मौका मिला है। इसके अलावा पहली बार भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा बने मानव सुथार, तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ और फिरकी गेंदबाज हर्ष दुबे जैसी नई प्रतिभाओं पर भी सभी खेल प्रेमियों और जानकारों की खास निगाहें टिकी रहेंगी।

    कागज पर भारतीय टीम का बल्लेबाजी क्रम बेहद मजबूत, संतुलित और आक्रामक नजर आ रहा है। टीम के पास यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन, ऋषभ पंत और देवदत्त पडिक्कल जैसे मैच जिताऊ बल्लेबाज मौजूद हैं। पिछले कुछ समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के लिए यह टेस्ट मैच अपनी लय और पुरानी फॉर्म में वापस लौटने का एक बेहतरीन सुनहरा अवसर माना जा रहा है। इसके साथ ही युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल और साई सुदर्शन भी भारतीय सरजमीं पर एक बड़ी और यादगार पारी खेलने के प्रबल दावेदार के रूप में उतरेंगे।

    भले ही आंकड़े और परिस्थितियां टीम इंडिया के पक्ष में दिख रही हों, लेकिन भारतीय टीम अफगानिस्तान को किसी भी कीमत पर हल्के में लेने की भूल नहीं कर सकती है। पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान ने सीमित ओवरों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बेहद तेजी से प्रगति की है। उनके कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी, आक्रामक ओपनर रहमानुल्लाह गुरबाज, अनुभवी रहमत शाह और ऑलराउंडर अजमतुल्लाह उमरजई जैसे धाकड़ खिलाड़ी किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने का माद्दा रखते हैं। हालांकि भारतीय टीम घरेलू परिस्थितियों में बेहद मजबूत है, लेकिन अफगानिस्तान के पास उलटफेर करने की पूरी क्षमता है, जिससे यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।

  • वैभव के बल्ले ने जीता विदेशी स्टार का दिल, लिविंगस्टन ने की जमकर तारीफ

    वैभव के बल्ले ने जीता विदेशी स्टार का दिल, लिविंगस्टन ने की जमकर तारीफ


    नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से रिकॉर्ड बुक्स को हिला देने वाले युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi की तारीफ में अब विदेशी क्रिकेटर भी कसीदे पढ़ रहे हैं। इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर Liam Livingstone ने वैभव की बल्लेबाजी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने पूरे क्रिकेट करियर में ऐसी बल्लेबाजी पहले कभी नहीं देखी।

    लिविंगस्टन ने ‘स्टिक टू क्रिकेट’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कहा कि आईपीएल में यह उनका सातवां सीजन था और उन्होंने दुनिया के कई बेहतरीन बल्लेबाजों को करीब से देखा है, लेकिन वैभव की बल्लेबाजी कुछ अलग ही स्तर की थी। उन्होंने कहा, “मैंने इस तरह की बल्लेबाजी पहले कभी नहीं देखी। मैं कई महान खिलाड़ियों के साथ खेल चुका हूं, लेकिन वैभव जैसा प्रभाव किसी ने नहीं छोड़ा।”

    एलिमिनेटर में मचाया था तूफान
    वैभव सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए एलिमिनेटर मुकाबले में Sunrisers Hyderabad के खिलाफ सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन की विस्फोटक पारी खेली थी। इस दौरान उन्होंने 5 चौके और 12 छक्के जड़कर विपक्षी गेंदबाजों की जमकर धुनाई की थी। उनकी इस पारी ने कई रिकॉर्ड तोड़े और क्रिकेट विशेषज्ञों को हैरान कर दिया। यही मैच लिविंगस्टन के लिए भी सबसे यादगार अनुभवों में से एक बन गया।

    ‘मिस हिट नाम की चीज नहीं थी’
    लिविंगस्टन ने वैभव की तकनीक और शॉट चयन की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि वैभव गेंद को इतनी सफाई से मारते हैं कि उनके शॉट्स में मिस हिट लगभग देखने को नहीं मिलती।

    उन्होंने बताया, “शुरुआत में हमने उन्हें बाउंसर पर आउट किया था, लेकिन इसके बाद उन्होंने जिस तरह अपने खेल में सुधार किया, वह अविश्वसनीय था। जब हम बाउंसर डालते तो वह गेंद को थर्ड मैन की दिशा में भेज देते। फुल लेंथ गेंद डालते तो उसे भी बाउंड्री के पार पहुंचा देते। हमें समझ ही नहीं आता था कि आखिर उन्हें गेंद कहां फेंकी जाए।”

    आईपीएल 2026 में बनाया नया इतिहास
    वैभव के लिए आईपीएल 2026 सपनों जैसा रहा। उन्होंने 16 मुकाबलों में 776 रन बनाए और 237 के शानदार स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। इस प्रदर्शन के दम पर वह ऑरेंज कैप जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। इतना ही नहीं, उन्होंने टी20 दिग्गज Chris Gayle का बड़ा रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। पूरे सीजन में 72 छक्के लगाकर वैभव आईपीएल के एक सीजन में सर्वाधिक छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए।

    महज 15 साल की उम्र में जिस तरह वैभव सूर्यवंशी ने घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी है, उसे देखते हुए क्रिकेट विशेषज्ञ उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सुपरस्टार मान रहे हैं।

  • बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ा तनाव, उस्मान हादी की हत्या पर भाई का सनसनीखेज आरोप, पीएम तारिक रहमान को भी दी चेतावनी

    बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ा तनाव, उस्मान हादी की हत्या पर भाई का सनसनीखेज आरोप, पीएम तारिक रहमान को भी दी चेतावनी

    नई दिल्ली । बांग्लादेश के चर्चित युवा राजनीतिक नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस मामले में उनके बड़े भाई उमर हादी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उमर हादी ने दावा किया है कि उनके भाई की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कई प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों की भूमिका रही है।

    शरीफ उस्मान हादी वर्ष 2024 में हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उस आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ व्यापक जनसमर्थन हासिल किया था और देश की राजनीति को नई दिशा दी थी। हादी को सरकार विरोधी राजनीति के एक मुखर युवा नेता के रूप में देखा जाता था। उन्होंने बाद में इंकलाब मंच नामक राजनीतिक संगठन का गठन किया और संसदीय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सक्रिय प्रचार अभियान चला रहे थे।

    दिसंबर 2025 में चुनाव प्रचार के दौरान उन पर घातक हमला हुआ था। ढाका में आयोजित एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान नकाबपोश हमलावरों ने उनके सिर में गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल हादी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन छह दिन तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई थी। इस घटना ने उस समय पूरे बांग्लादेश में राजनीतिक सुरक्षा और चुनावी हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    अब इस मामले में उनके बड़े भाई उमर हादी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कई महत्वपूर्ण दावे किए हैं। ब्रिटेन में बांग्लादेश के राजनयिक के रूप में कार्यरत उमर हादी ने फेसबुक पर साझा किए गए अपने संदेशों में कहा कि उनके भाई की हत्या एक सुनियोजित साजिश का परिणाम थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जमात-ए-इस्लामी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े एक व्यक्ति ने इस हमले की योजना तैयार की थी।

    उमर हादी ने यह भी दावा किया कि पूर्व अंतरिम सरकार के कुछ प्रभावशाली सलाहकारों तथा मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े कुछ सांसद और मंत्री भी इस पूरे घटनाक्रम में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत साक्ष्य साझा नहीं किया है, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

    अपने संदेश में उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और दोषियों को कानून के दायरे में लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि इस हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह केवल एक व्यक्ति की हत्या तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है।

    उमर हादी ने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अपराधियों को संरक्षण मिलता रहा तो भविष्य में शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व भी ऐसे खतरों से सुरक्षित नहीं रह पाएगा। उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में हत्या की निष्पक्ष जांच और राजनीतिक हिंसा के मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है।

    फिलहाल संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही इस संवेदनशील प्रकरण से जुड़े सवालों का समाधान कर सकती है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और सरकार की प्रतिक्रिया पर पूरे मामले की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

  • अफगानिस्तान सीरीज से विराट कोहली के बाहर होने की खबर, भारतीय टीम की बढ़ी चिंता

    अफगानिस्तान सीरीज से विराट कोहली के बाहर होने की खबर, भारतीय टीम की बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली । अफगानिस्तान के खिलाफ 13 जून से शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले भारतीय क्रिकेट टीम की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि टीम इंडिया के दिग्गज बल्लेबाज Virat Kohli हैमस्ट्रिंग चोट के कारण सीरीज से बाहर हो सकते हैं। हालांकि भारतीय क्रिकेट बोर्ड की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार विराट कोहली फिलहाल हैमस्ट्रिंग की समस्या से जूझ रहे हैं। चोट कब और कैसे लगी, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि उन्हें आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले के दौरान परेशानी हुई थी। फाइनल में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपनी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

    कोहली की संभावित गैरमौजूदगी भारतीय टीम के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। खास बात यह है कि कप्तान Rohit Sharma की फिटनेस को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। रोहित और Hardik Pandya दोनों को वनडे टीम में शामिल किया गया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें सीरीज से पहले फिटनेस टेस्ट पास करना होगा।

    13 जून से शुरू होगी सीरीज
    भारत और Afghanistan national cricket team के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 13 जून को धर्मशाला में खेला जाएगा। दूसरा मैच 17 जून को लखनऊ में होगा, जबकि तीसरा और अंतिम मुकाबला 20 जून को चेन्नई के M. A. Chidambaram Stadium में आयोजित किया जाएगा।

    यदि विराट कोहली वास्तव में सीरीज से बाहर होते हैं, तो टीम प्रबंधन को मध्यक्रम में नया संयोजन तैयार करना पड़ सकता है। चयनकर्ता युवा खिलाड़ियों को मौका देने पर भी विचार कर सकते हैं।

    आईपीएल 2026 में रहा शानदार प्रदर्शन
    विराट कोहली का आईपीएल 2026 सीजन बेहद शानदार रहा था। उन्होंने 16 मैचों में 675 रन बनाए और टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में चौथे स्थान पर रहे। उनका स्ट्राइक रेट 165 का रहा, जो उनके टी20 करियर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है।

    फाइनल मुकाबले में उन्होंने सिर्फ 42 गेंदों में नाबाद 75 रन की विस्फोटक पारी खेली थी। इस दौरान उन्होंने 25 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर आईपीएल फाइनल में अपनी सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड भी बनाया। उनकी शानदार बल्लेबाजी की बदौलत उनकी टीम लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने में सफल रही।

    अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर भारतीय टीम प्रबंधन और मेडिकल अपडेट पर टिकी है। यदि कोहली पूरी तरह फिट नहीं होते हैं तो अफगानिस्तान सीरीज में भारत को अपने सबसे अनुभवी बल्लेबाज के बिना मैदान में उतरना पड़ सकता है।

  • डेवॉन में बड़ा सैन्य हादसा: रॉयल नेवी का अत्याधुनिक हेलिकॉप्टर खेत में गिरा, तीन जवानों की जान गई; पीएम स्टार्मर ने जताया शोक

    डेवॉन में बड़ा सैन्य हादसा: रॉयल नेवी का अत्याधुनिक हेलिकॉप्टर खेत में गिरा, तीन जवानों की जान गई; पीएम स्टार्मर ने जताया शोक

    नई दिल्ली । ब्रिटेन की रॉयल नेवी को एक गंभीर सैन्य दुर्घटना का सामना करना पड़ा है। इंग्लैंड के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित डेवॉन काउंटी में सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान रॉयल नेवी का एक Merlin Mk4 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार तीन क्रू मेंबरों की मौत हो गई। घटना के बाद ब्रिटिश रक्षा प्रतिष्ठान में शोक का माहौल है और हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    रॉयल नेवी की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना बुधवार तड़के उस समय हुई, जब हेलिकॉप्टर नियमित सैन्य प्रशिक्षण मिशन पर था। उड़ान के दौरान अचानक हेलिकॉप्टर नियंत्रण खो बैठा और डेवॉन क्षेत्र के एक खेत में जा गिरा। दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय आपातकालीन सेवाओं, सैन्य अधिकारियों और बचाव दलों को घटनास्थल पर भेजा गया, लेकिन हेलिकॉप्टर में सवार तीनों क्रू मेंबरों को बचाया नहीं जा सका।

    रॉयल नेवी के प्रमुख जनरल ग्विन जेनकिंस ने हादसे की पुष्टि करते हुए कहा कि यह नौसेना और सशस्त्र बलों के लिए बेहद दुखद क्षण है। उन्होंने मृतक सैन्यकर्मियों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि इस कठिन समय में पूरा रक्षा समुदाय उनके साथ खड़ा है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष और व्यापक जांच की जाएगी।

    इस घटना पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि देश ने अपने तीन समर्पित सैन्यकर्मियों को खो दिया है, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और सेवा के लिए अपना योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस दुखद घड़ी में उनके साथ है।

    हालांकि दुर्घटना के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी खराबी, मौसम संबंधी परिस्थितियों अथवा अन्य परिचालन कारणों की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। रक्षा अधिकारियों ने कहा है कि जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। विशेषज्ञों की टीम दुर्घटनास्थल से मिले मलबे, उड़ान रिकॉर्ड और तकनीकी आंकड़ों का परीक्षण कर रही है।

    Merlin Mk4 हेलिकॉप्टर को रॉयल नेवी के सबसे महत्वपूर्ण और भरोसेमंद सैन्य हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है। यह आधुनिक तकनीक से लैस बहुउद्देशीय विमान है, जिसका उपयोग समुद्री अभियानों, सैनिकों की तैनाती, खोज एवं बचाव कार्यों तथा लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण मिशनों में किया जाता है। हेलिकॉप्टर में चार सदस्यीय क्रू की आवश्यकता होती है और यह एक समय में 24 सैनिकों को ले जाने की क्षमता रखता है।

    विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा अभियानों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। यह दुश्मन की पनडुब्बियों की निगरानी, समुद्री गश्त और रणनीतिक सैन्य अभियानों में प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में इस हेलिकॉप्टर का दुर्घटनाग्रस्त होना रॉयल नेवी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

    दुर्घटना के बाद पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है और सैन्य विशेषज्ञ घटनास्थल पर जांच में जुटे हुए हैं। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने भी कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों को सार्वजनिक किया जाएगा। फिलहाल पूरे देश में मृत सैन्यकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जा रही है और उनकी सेवाओं को याद किया जा रहा है।

  • वैभव सूर्यवंशी को लेकर आकाश चोपड़ा ने खोले पत्ते, बताया चयन में क्या है सबसे बड़ी बाधा

    वैभव सूर्यवंशी को लेकर आकाश चोपड़ा ने खोले पत्ते, बताया चयन में क्या है सबसे बड़ी बाधा


    नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में अपने विस्फोटक प्रदर्शन से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचने वाले युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi को भारतीय टी20 टीम में शामिल किए जाने की मांग लगातार उठ रही है। हालांकि पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर Aakash Chopra का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वैभव को राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने के लिए अभी कुछ समय इंतजार करना पड़ सकता है।

    आकाश चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि भारतीय टी20 टीम में ओपनिंग और टॉप ऑर्डर की जगहों के लिए पहले से ही कड़ा मुकाबला है। उनके अनुसार Sanju Samson और Abhishek Sharma लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे वैभव के लिए तत्काल अवसर बनना मुश्किल दिखाई देता है।

    चोपड़ा ने विशेष रूप से संजू सैमसन की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने टी20 विश्व कप 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन किया और टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे। ऐसे में उनकी जगह किसी युवा खिलाड़ी को मौका देना चयनकर्ताओं के लिए आसान फैसला नहीं होगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि अभिषेक शर्मा पिछले काफी समय से टी20 क्रिकेट में निरंतर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और दुनिया के शीर्ष बल्लेबाजों में गिने जा रहे हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन उनके स्थान पर भी बदलाव करने की जल्दी में नहीं होगा।

    हालांकि आकाश चोपड़ा ने वैभव की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि 15 वर्षीय बल्लेबाज असाधारण क्षमता रखते हैं और भविष्य में भारतीय क्रिकेट के बड़े सितारे बन सकते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर पाने के लिए उन्हें थोड़ा धैर्य रखना होगा और लगातार प्रदर्शन जारी रखना होगा।

    आईपीएल 2026 में बनाया इतिहास
    वैभव सूर्यवंशी का आईपीएल 2026 सीजन बेहद शानदार रहा। उन्होंने 16 मैचों में 237 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए और ऑरेंज कैप जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। पूरे टूर्नामेंट में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी चर्चा का विषय रही।

    इतना ही नहीं, वैभव ने टी20 दिग्गज Chris Gayle का एक बड़ा रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। उन्होंने एक सीजन में सबसे ज्यादा 72 छक्के लगाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। एलिमिनेटर और दूसरे क्वालिफायर में उनकी मैच जिताऊ पारियों ने उनकी लोकप्रियता और बढ़ा दी।

    अब श्रीलंका दौरे पर नजरें
    वैभव को श्रीलंका में होने वाली त्रिकोणीय श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। 9 जून से शुरू होने वाली इस प्रतियोगिता में उनका प्रदर्शन चयनकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। यदि वे यहां भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं, तो निकट भविष्य में राष्ट्रीय टी20 टीम के दरवाजे उनके लिए और मजबूती से खुल सकते हैं।

    फिलहाल क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का भविष्य हैं, लेकिन टीम इंडिया में स्थायी जगह बनाने के लिए उन्हें अपने प्रदर्शन की निरंतरता बनाए रखनी होगी।

  • मालवीय नगर अग्निकांड ने उठाए गंभीर सवाल: 21 लोगों की मौत के बाद होटल मालिक पर शिकंजा, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी

    मालवीय नगर अग्निकांड ने उठाए गंभीर सवाल: 21 लोगों की मौत के बाद होटल मालिक पर शिकंजा, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी

    नई दिल्ली । राजधानी के मालवीय नगर क्षेत्र में स्थित एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। 21 लोगों की मौत के बाद दिल्ली पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस द्वारा दर्ज मामले में गैर इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं के तहत जांच आगे बढ़ाई जा रही है। हादसे ने एक बार फिर राजधानी में संचालित हो रहे होटलों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    घटना 3 जून की सुबह सामने आई थी, जब होटल के बेसमेंट में संचालित एक रेस्टोरेंट क्षेत्र में अचानक आग लग गई। शुरुआती आग कुछ ही मिनटों में पूरे भवन में फैल गई और होटल के कई हिस्से धुएं तथा लपटों की चपेट में आ गए। आग लगने के समय होटल में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। हादसे में कुल 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें 11 विदेशी और 10 भारतीय नागरिक शामिल बताए गए हैं। मृत विदेशी नागरिकों में अफ्रीकी देशों और तुर्कमेनिस्तान के लोग भी शामिल थे।

    पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि होटल परिसर में मूल संरचना से अधिक कमरे तैयार किए गए थे। पूछताछ के दौरान होटल मालिक ने स्वीकार किया कि कारोबार विस्तार के उद्देश्य से भवन में अतिरिक्त कमरे जोड़े गए थे। हालांकि उसने दावा किया कि होटल के संचालन, प्रबंधन और वित्तीय गतिविधियों की जिम्मेदारी अन्य लोगों को सौंप रखी गई थी। पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है कि होटल में किए गए निर्माण और संशोधन संबंधित नियमों के अनुरूप थे या नहीं।

    जांच एजेंसियों का ध्यान विशेष रूप से भवन की संरचना और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर केंद्रित है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार होटल में बाहर निकलने के लिए सीमित मार्ग उपलब्ध था, जिससे आग लगने के बाद कई लोग अंदर फंस गए। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यावसायिक भवन में पर्याप्त आपात निकास मार्ग और अग्नि सुरक्षा उपाय अत्यंत आवश्यक होते हैं। ऐसे में यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है कि होटल में सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था।

    हादसे के बाद दिल्ली प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने जिला मजिस्ट्रेट की निगरानी में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। इस जांच का उद्देश्य आग लगने के वास्तविक कारणों, संभावित लापरवाही और नियमों के उल्लंघन से जुड़े तथ्यों को सामने लाना है।

    घटनास्थल के आसपास संचालित अन्य होटल और होमस्टे भी अब जांच के दायरे में आ सकते हैं। जानकारी के अनुसार संबंधित होटल समूह के कई प्रतिष्ठान उसी इलाके में संचालित हो रहे हैं, जहां देश-विदेश से आने वाले लोग ठहरते हैं। ऐसे में प्रशासन सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा की तैयारी कर रहा है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    मालवीय नगर अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि शहरी सुरक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा केवल तकनीकी कारणों से हुआ या फिर इसके पीछे प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर की गंभीर लापरवाही भी जिम्मेदार थी। फिलहाल पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभाग सभी पहलुओं की जांच में जुटे हुए हैं।

  • जब अनुभव ने रचा इतिहास, वर्ल्ड कप में गोल दागने वाले सबसे उम्रदराज फुटबॉलरों की कहानी

    जब अनुभव ने रचा इतिहास, वर्ल्ड कप में गोल दागने वाले सबसे उम्रदराज फुटबॉलरों की कहानी


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप फुटबॉल की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट माना जाता है। यहां गोल करना किसी भी खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होता है। कई खिलाड़ी अपने करियर के शुरुआती दौर में चमकते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने बढ़ती उम्र के बावजूद विश्व मंच पर शानदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया। आइए जानते हैं फीफा विश्व कप के इतिहास में सबसे अधिक उम्र में गोल करने वाले पांच खिलाड़ियों के बारे में।

    1. Roger Milla (कैमरून) – 42 वर्ष, 39 दिन
    फीफा विश्व कप इतिहास में सबसे अधिक उम्र में गोल करने का रिकॉर्ड कैमरून के महान फुटबॉलर रोजर मिला के नाम दर्ज है। उन्होंने 1994 विश्व कप में रूस के खिलाफ मुकाबले में 42 वर्ष और 39 दिन की उम्र में गोल किया था। हालांकि यह मैच कैमरून 6-1 से हार गया था, लेकिन रोजर मिला का यह रिकॉर्ड आज भी कायम है। उनकी उपलब्धि को विश्व फुटबॉल के सबसे यादगार रिकॉर्ड्स में गिना जाता है।

    2. Pepe (पुर्तगाल) – 39 वर्ष, 283 दिन
    पुर्तगाल के अनुभवी डिफेंडर पेपे ने 2022 फीफा विश्व कप में स्विट्जरलैंड के खिलाफ शानदार गोल कर इतिहास रच दिया था। 39 वर्ष और 283 दिन की उम्र में किया गया उनका यह गोल उन्हें विश्व कप में गोल करने वाले दूसरे सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बनाता है। उस मुकाबले में पुर्तगाल ने स्विट्जरलैंड को 6-1 से हराया था।

    3. Cristiano Ronaldo (पुर्तगाल) – 37 वर्ष, 292 दि
    विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े सितारों में से एक क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी इस सूची में शामिल हैं। उन्होंने 2022 विश्व कप में घाना के खिलाफ ग्रुप चरण के मैच में 37 वर्ष और 292 दिन की उम्र में गोल किया था। यह गोल मैच का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और पुर्तगाल ने मुकाबला 3-2 से अपने नाम किया। रोनाल्डो विश्व कप के पांच अलग-अलग संस्करणों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी भी हैं।

    4. Gunnar Gren (स्वीडन) – 37 वर्ष, 236 दिन
    स्वीडन के दिग्गज खिलाड़ी गुन्नार ग्रेन ने 1958 फीफा विश्व कप में पश्चिमी जर्मनी के खिलाफ 37 वर्ष और 236 दिन की उम्र में गोल किया था। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत स्वीडन ने वह मुकाबला 3-1 से जीता। गुन्नार अपने दौर के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।

    5. Cuauhtémoc Blanco (मेक्सिको) – 37 वर्ष, 151 दिन
    मेक्सिको के अनुभवी स्टार कुआउतेमोक ब्लैंको ने 2010 विश्व कप में फ्रांस के खिलाफ 37 वर्ष और 151 दिन की उम्र में गोल किया था। उनके गोल ने मेक्सिको की 2-0 की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ब्लैंको अपनी तकनीकी क्षमता और नेतृत्व के लिए प्रसिद्ध रहे हैं।

    क्या मेसी या रोनाल्डो तोड़ पाएंगे रिकॉर्ड?
    2026 फीफा वर्ल्ड कप में सभी की निगाहें Lionel Messi और Cristiano Ronaldo पर रहेंगी। यदि दोनों खिलाड़ी टूर्नामेंट में गोल करते हैं, तो उम्र के आधार पर कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड उनके नाम हो सकते हैं। हालांकि रोजर मिला का 42 वर्ष की उम्र में बनाया गया रिकॉर्ड अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।