Blog

  • सूरत नवजात केस: तीसरी बार प्रेग्नेंट होने पर महिला ने नवजात को फेंका, CCTV से पहुंची पुलिस तक सच्चाई

    सूरत नवजात केस: तीसरी बार प्रेग्नेंट होने पर महिला ने नवजात को फेंका, CCTV से पहुंची पुलिस तक सच्चाई

    नई दिल्ली । गुजरात के सूरत शहर में एक नवजात शिशु के शव मिलने की घटना ने गंभीर चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय क्षेत्र में कचरे के ढेर से एक नवजात का शव बरामद हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में मामला संदिग्ध पाया गया, जिसके बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला गया और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की कोशिश की गई।

    जांच के दौरान पुलिस को एक महिला की गतिविधि संदिग्ध लगी, जो काले रंग की प्लास्टिक थैली लेकर इलाके में जाती दिखाई दी थी। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने अपनी जांच को आगे बढ़ाया और तकनीकी विश्लेषण तथा स्थानीय पूछताछ के जरिए महिला की पहचान की। कई दिनों की जांच के बाद पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।

    पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सभी को चौंका दिया। महिला पहले से दो बच्चों की मां है और उसके दोनों बच्चे वयस्क हो चुके हैं। उसने स्वीकार किया कि वह तीसरी बार गर्भवती हो गई थी और इस स्थिति को लेकर वह मानसिक तनाव में थी। उसे डर था कि समाज में उसकी बदनामी होगी और लोग इस बात को स्वीकार नहीं करेंगे। इसी डर और सामाजिक दबाव के कारण उसने नवजात को जन्म देने के बाद उसे काले प्लास्टिक बैग में डालकर कचरे में फेंक दिया।

    इस घटना के बाद पूरे इलाके में दुख और गुस्से का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में बढ़ते मानसिक दबाव और जागरूकता की कमी को भी दर्शाती हैं। कई सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में महिलाओं को उचित परामर्श और सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वे किसी भी प्रकार के चरम कदम उठाने से बच सकें।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और नवजात की मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि घटना के समय परिस्थितियां क्या थीं और इसमें अन्य कोई पहलू तो शामिल नहीं है।

    यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव की गंभीर स्थिति को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सहायता तंत्र को मजबूत करना जरूरी है।

    इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समाज में ऐसे हालातों से जूझ रहे लोगों के लिए पर्याप्त समर्थन मौजूद है या नहीं। जांच आगे बढ़ने के साथ इस घटना से जुड़े अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।

  • राहुल गांधी के सामने बड़ी चुनौती, कर्नाटक और केरल कांग्रेस अध्यक्ष पद पर मंथन तेज

    राहुल गांधी के सामने बड़ी चुनौती, कर्नाटक और केरल कांग्रेस अध्यक्ष पद पर मंथन तेज

    नई दिल्ली । कांग्रेस शासित राज्यों कर्नाटक और केरल में संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चा अब केवल औपचारिकता नहीं रही, बल्कि यह सत्ता संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों का अहम राजनीतिक प्रश्न बन चुकी है। पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट अपने-अपने नेताओं के लिए समर्थन जुटाने में सक्रिय हैं, जिससे संगठनात्मक फैसले और भी जटिल होते जा रहे हैं।

    कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती लगातार बनी हुई है। अब प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी एक मजबूत संगठनात्मक चेहरे को आगे लाएगी या फिर सत्ता और संगठन के बीच सामंजस्य बनाए रखने वाला कोई समझौता फार्मूला अपनाया जाएगा। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भी इस बात को लेकर उत्सुकता है कि अगला प्रदेश अध्यक्ष किस दिशा में संगठन को आगे ले जाएगा और आने वाले चुनावों के लिए किस तरह की रणनीति तैयार की जाएगी।

    दूसरी ओर केरल में कांग्रेस की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, जहां पार्टी लंबे समय से सत्ता से बाहर है। यहां संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी प्रदेश नेतृत्व पर सबसे अधिक है। प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर यहां भी कई नामों की चर्चा चल रही है और हर गुट अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश में है। केरल में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मतदाता आधार को पुनः संगठित करने और वामपंथी दलों से मुकाबला करने की रणनीति तैयार करना है।

    सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले को संतुलित तरीके से सुलझाने की कोशिश कर रहा है, ताकि किसी भी राज्य में असंतोष की स्थिति न बने। राहुल गांधी की भूमिका इस पूरे संगठनात्मक पुनर्गठन में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वे लगातार राज्यों में संगठन को मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं। कर्नाटक और केरल दोनों ही राज्यों में कांग्रेस के लिए आने वाला समय राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, इसलिए नेतृत्व चयन में हर कदम सावधानी से उठाया जा रहा है।

    पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि संगठन में युवा नेतृत्व को आगे लाने की जरूरत है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हो सके। हालांकि वरिष्ठ नेताओं की राय है कि अनुभव और स्थिरता भी उतनी ही जरूरी है, खासकर उन राज्यों में जहां राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी है। यही वजह है कि प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर अंतिम निर्णय लेना आसान नहीं हो पा रहा है।

    आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व को यह तय करना होगा कि वह संगठनात्मक मजबूती को प्राथमिकता देगा या फिर सत्ता संतुलन के समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला करेगा। यह निर्णय न केवल कर्नाटक और केरल की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि आने वाले राष्ट्रीय चुनावों में भी पार्टी की रणनीति पर इसका असर देखा जा सकता है।

  • ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ की भावुक कहानी: Neel Kamal का अमर विदाई गीत और Rajendra Kumar का यादगार किस्सा

    ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ की भावुक कहानी: Neel Kamal का अमर विदाई गीत और Rajendra Kumar का यादगार किस्सा

    नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं जो सिर्फ धुन या बोल तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समय के साथ भावनाओं की विरासत बन जाते हैं। वर्ष 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘नील कमल’ का विदाई गीत ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ भी उन्हीं चुनिंदा गीतों में शामिल किया जाता है, जिसने भारतीय समाज में पिता-बेटी के रिश्ते की संवेदनशीलता को एक अलग पहचान दी। इस गीत को संगीतकार रवि के संगीत, गीतकार साहिर लुधियानवी के शब्दों और मोहम्मद रफी की भावपूर्ण आवाज ने कालजयी बना दिया।

    कहा जाता है कि इस गीत की लोकप्रियता केवल फिल्म रिलीज़ के बाद नहीं बढ़ी, बल्कि उससे पहले ही इसकी भावनात्मक शक्ति लोगों तक पहुंचने लगी थी। एक चर्चित किस्से के अनुसार, गीतकार राजेंद्र कृष्ण की बेटी की शादी के अवसर पर फिल्म इंडस्ट्री की कई हस्तियां मौजूद थीं। इसी समारोह में संगीतकार रवि से अनुरोध किया गया कि वे कोई विशेष प्रस्तुति दें। रवि ने इस गीत को विदाई के समय प्रस्तुत करने का निर्णय लिया, ताकि उसकी भावनात्मक गहराई पूरी तरह महसूस की जा सके।

    जैसे ही विदाई की रस्म शुरू हुई, माहौल बेहद भावुक हो गया। परिवार के सदस्य पहले से ही भावनाओं में डूबे हुए थे और उसी क्षण ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ की धुन ने पूरे वातावरण को और भारी कर दिया। गीत के बोल जैसे-जैसे आगे बढ़े, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। कहा जाता है कि यह केवल एक संगीत प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने वहां मौजूद लोगों के दिलों को गहराई से छू लिया।

    इस घटना से जुड़ा सबसे चर्चित पहलू अभिनेता राजेंद्र कुमार का बताया जाता है। कहा जाता है कि गीत समाप्त होने के बाद वे इतने भावुक हो गए कि सीधे संगीतकार रवि के पास पहुंचे और पूछ बैठे कि यह गीत किस फिल्म का हिस्सा है, क्योंकि उस समय तक ‘नील कमल’ रिलीज नहीं हुई थी। यह घटना इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि कभी-कभी कला अपनी आधिकारिक प्रस्तुति से पहले ही लोगों के दिलों तक पहुंच जाती है और अमर हो जाती है।

    गीत से जुड़ी एक और भावनात्मक कथा मोहम्मद रफी से संबंधित बताई जाती है। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान वे अपने निजी जीवन के अनुभवों से भावुक हो गए थे, जिससे उनकी आवाज में एक विशेष कंपन और दर्द झलक आया। संगीतकार रवि ने उस प्राकृतिक भाव को गीत में बनाए रखने का निर्णय लिया, क्योंकि उन्हें लगा कि यही वास्तविकता गीत को और अधिक प्रभावशाली बनाती है। यही कारण है कि यह गीत आज भी विदाई समारोहों में विशेष स्थान रखता है।

    समय के साथ यह गीत केवल एक फिल्मी प्रस्तुति नहीं रहा, बल्कि भारतीय पारिवारिक भावनाओं का प्रतीक बन गया। विवाह समारोहों में विदाई के क्षणों में इसकी मौजूदगी आज भी उतनी ही प्रभावशाली महसूस की जाती है जितनी दशकों पहले थी।

    यह गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हिंदी सिनेमा की उस विरासत का हिस्सा बना रहेगा, जिसमें संगीत केवल मनोरंजन नहीं बल्कि भावनाओं की गहराई को व्यक्त करने का माध्यम बनता है। इसकी लोकप्रियता यह साबित करती है कि सच्ची कला समय की सीमाओं से परे जाकर हमेशा जीवित रहती है।

    आज भी जब यह गीत गूंजता है, तो हर श्रोता के मन में विदाई का वही पुराना भाव और अपनापन लौट आता है, जो इसे अमर बनाता है।

  • IPL 2026 के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज कौन? टॉप-5 लिस्ट चौंकाएगी

    IPL 2026 के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज कौन? टॉप-5 लिस्ट चौंकाएगी


    नई दिल्ली । आईपीएल 2026 का रोमांचक सीजन समाप्त हो चुका है और एक बार फिर Royal Challengers Bengaluru ने खिताब अपने नाम कर लिया। सीजन खत्म होने के बाद बल्लेबाजों के प्रदर्शन को लेकर कई दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। बल्लेबाजी औसत के मामले में सबसे बड़ा सरप्राइज यह रहा कि Virat Kohli टॉप-5 में पांचवें स्थान पर रहे, जबकि सूची में शीर्ष स्थान पर Ravindra Jadeja का कब्जा रहा।

    IPL 2026 में सर्वाधिक बल्लेबाजी औसत वाले टॉप-5 बल्लेबाज

    1. Ravindra Jadeja (राजस्थान रॉयल्स
    मैच: 14
    पारियां: 11
    रन: 266
    औसत: 66.50
    जडेजा ने सीमित अवसरों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए सीजन का सर्वश्रेष्ठ औसत दर्ज किया।

    2. Quinton de Kock (मुंबई इंडियंस)
    मैच: 3
    रन: 132
    औसत: 66.00
    डिकॉक ने केवल तीन मैच खेले, लेकिन प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए दूसरे स्थान पर रहे।

    3. Rinku Singh (कोलकाता नाइट राइडर्स)
    मैच: 14
    पारियां: 11
    रन: 295
    औसत: 59.00
    रिंकू सिंह ने फिनिशर की भूमिका निभाते हुए लगातार उपयोगी पारियां खेलीं।

    4. Anshul Kamboj (चेन्नई सुपर किंग्स)
    मैच: 14
    पारियां: 4
    रन: 58
    औसत: 58.00
    मुख्य रूप से गेंदबाजी ऑलराउंडर होने के बावजूद अंशुल कंबोज ने बल्लेबाजी में भी प्रभाव छोड़ा।

    5. Virat Kohli (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु)
    मैच: 16
    पारियां: 16
    रन: 675
    औसत: 56.25
    कोहली इस सूची में पांचवें स्थान पर रहे, लेकिन रन बनाने के मामले में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और ऑरेंज कैप की दौड़ में भी शीर्ष बल्लेबाजों में शामिल रहे।

    दिलचस्प बात यह है कि औसत के आधार पर कोहली पांचवें स्थान पर हैं, लेकिन उन्होंने टॉप-5 में शामिल अधिकांश खिलाड़ियों की तुलना में कहीं अधिक रन बनाए। इससे साफ है कि पूरे सीजन में निरंतरता के मामले में उनका प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा।

  • ‘किसी को बैन करने का अधिकार नहीं’, प्रोड्यूसर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

    ‘किसी को बैन करने का अधिकार नहीं’, प्रोड्यूसर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया


    नई दिल्ली । अभिनेता Ranveer Singh और फिल्म Don 3 को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। वरिष्ठ फिल्म निर्माता T.P. Aggarwal ने Federation of Western India Cine Employees द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ घोषित गैर-सहयोग (नॉन-कोऑपरेशन) के फैसले को चुनौती देते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

    क्या है मामला?
    रिपोर्ट्स के अनुसार, रणवीर सिंह के डॉन 3 से अलग होने के बाद FWICE ने उनके खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन की घोषणा की थी। संगठन का कहना था कि मामला सुलझने तक उससे जुड़े सदस्य अभिनेता के साथ काम नहीं करेंगे।

    टीपी अग्रवाल ने क्या कहा?
    पूर्व Film Federation of India अध्यक्ष टीपी अग्रवाल ने मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट में FWICE और Indian Motion Picture Producers Association के खिलाफ याचिका दायर की है।

    उनका तर्क है कि किसी भी फिल्म संगठन या ट्रेड बॉडी को किसी कलाकार को काम करने से रोकने का कानूनी अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे फैसले कलाकारों की आजीविका, काम करने की स्वतंत्रता और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर सीधा असर डालते हैं।

    विवाद की जड़
    साल 2023 में रणवीर सिंह को डॉन 3 में नए डॉन के रूप में कास्ट किया गया था। फिल्म के निर्देशक Farhan Akhtar ने इसका टीजर भी जारी किया था, जिसे दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। बाद में खबरें आईं कि रचनात्मक मतभेदों के चलते रणवीर इस प्रोजेक्ट से दूर हो गए।

    अब आगे क्या?
    मामला अब अदालत में पहुंच चुका है, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट फिल्म संगठनों की शक्तियों और कलाकारों के काम करने के अधिकार को लेकर क्या रुख अपनाती है। इस फैसले का असर भविष्य में फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों और संगठनों के बीच होने वाले विवादों पर भी पड़ सकता है।

    यह मामला केवल रणवीर सिंह तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि फिल्म उद्योग में ट्रेड बॉडी की भूमिका और उनके अधिकारों पर भी एक बड़ी बहस छेड़ सकता है।

  • बजरंगबली को प्रिय हैं ये भोग, बड़ा मंगल पर मिलेगा विशेष आशीर्वाद

    बजरंगबली को प्रिय हैं ये भोग, बड़ा मंगल पर मिलेगा विशेष आशीर्वाद

    नई दिल्ली । ज्येष्ठ मास के पांचवें बड़े मंगल का पर्व आज 2 जून 2026 को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़े मंगल के दिन भगवान हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं, आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। इस दिन बजरंगबली को उनके प्रिय भोग अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है।

    मान्यता है कि सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बरसती है। बड़े मंगल के अवसर पर कुछ विशेष भोग चढ़ाने से मनोकामनाओं की पूर्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

    1. बूंदी का भोग
    हनुमान जी को बूंदी अत्यंत प्रिय मानी जाती है। बड़े मंगल के दिन पूजा के बाद बूंदी का भोग लगाने से घर-परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भोग भक्तों के जीवन में खुशहाली लाने वाला माना जाता है।

    2. बेसन के लड्डू
    बेसन के लड्डू बजरंगबली के सबसे प्रिय प्रसादों में शामिल हैं। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी को बेसन के लड्डू अर्पित करने और प्रसाद स्वरूप बांटने से बड़े से बड़े संकट दूर हो जाते हैं। इससे परिवार में समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।

    3. भुने चने और गुड़
    हनुमान जी को गेंदे या कमल का फूल अर्पित करने के बाद भुने हुए चने और गुड़ का भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि यह उपाय मंगल, शनि और अन्य ग्रहों के दोषों को शांत करने में सहायक होता है। साथ ही घर में चल रहे विवाद और कलह भी कम होते हैं।

    4. मीठा पान
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई विशेष मनोकामना पूरी करनी हो तो हनुमान जी को गुलकंद युक्त मीठे पान का भोग अर्पित करना चाहिए। इससे रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं और व्यक्ति का आत्मविश्वास मजबूत होता है।

    5. इमरती या जलेबी
    बड़े मंगल के दिन इमरती या जलेबी का भोग चढ़ाने का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इससे न केवल हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि अन्य देवी-देवताओं का भी आशीर्वाद मिलता है। यह भोग सफलता, आत्मबल और शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है।

    सप्ताह के दिनों के अनुसार हनुमान जी के प्रिय भोग
    सोमवार : हलवा
    मंगलवार : गुड़ के लड्डू
    बुधवार : पंचमेवा
    गुरुवार : बूंदी या बूंदी के लड्डू
    शुक्रवार : केसर भात
    शनिवार : इमरती
    रविवार : डंठल वाला पान

    बड़े मंगल के दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ और राम नाम का जाप विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने से भय, बाधाएं और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं तथा जीवन में सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।

  • बंगाल: TMC में सब कुछ ठीक नहीं…. टूट की अटकलें तेज…. 50 MLA छोड़ सकते हैं पार्टी !

    बंगाल: TMC में सब कुछ ठीक नहीं…. टूट की अटकलें तेज…. 50 MLA छोड़ सकते हैं पार्टी !


    कोलकाता।
    तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress- TMC ) में सब ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने सोमवार को ही दो विधायकों को निष्कासित कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ, जब पार्षदों लगातार पद छोड़ रहे हैं। वहीं, टीएमसी के कार्यक्रमों से बड़े नेता दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। अब अटकलें ये भी हैं कि टीएमसी के 50 विधायक (50 MLAs) टूट सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

    संघवाद प्रतिदिन की रिपोर्ट के अनुसार, अटकलें हैं कि 50 विधायक तृणमूल कांग्रेस छोड़ सकते हैं और पार्टी टूट सकती है। विधायकों के निष्कासन के बाद टीएमसी के बाद विधानसभा में सदस्यों की संख्या 78 पर आ गई है। चर्चाएं हैं कि रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा के जरिए नई तृणमूल बनाई जा सकती है। हालांकि, इसे लेकर किसी भी नेता ने सार्वजनिक रूप से अब तक कुछ नहीं कहा है।


    महाराष्ट्र जैसा होगा हाल

    अगर टीएमसी के 50 विधायक अलग होकर दूसरा धड़ बनाते हैं तो बंगाल में महाराष्ट्र की राजनीति का रीकैप देखने को मिल सकता है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना से जब एकनाथ शिंदे (अब उप मुख्यमंत्री) विधायकों के साथ अलग हुए थे, तो ठाकरे ने शिवसेना का नाम और चिह्न गंवा दिए थे। ऐसा ही दिग्गज नेता शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ हुआ था।


    क्यों 2 विधायकों पर हुआ ऐक्शन

    दोनों विधायकों को भेजे गए पत्र में कहा गया है, ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के संज्ञान में सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से यह बात लाई गई है कि तृणमूल की तरफ से नामित उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित होने के बावजूद आप पार्टी के अधिकृत नेतृत्व द्वारा बुलाई गई बैठकों में शामिल होने में बार-बार विफल रहे हैं और आपने खुद को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल किया है।’

    पार्टी उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है, ‘यह भी पाया गया है कि आप ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और आपने ऐसे बयान दिए हैं, जो तृणमूल कांग्रेस के हितों के प्रतिकूल हैं।’ पत्र में कहा गया है कि मामले पर समुचित विचार-विमर्श के बाद ‘तृणमूल कांग्रेस के सक्षम प्राधिकारी ने आपको पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने का फैसला किया है।’


    शुभेंदु अधिकारी ने किया 2 विधायकों का जिक्र

    मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दो टीएमसी विधायकों का जिक्र किया था। इनमें हावड़ा के उलुबेरिया पूर्व सीट जीतने वाले रीताब्रत बनर्जी और मध्य कोलकाता के एंटाली से विधायक संदीपन साहा थे। उन्होंने कहा था कि इनकी तरफ से दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर ही विधानसभा सचिवालय ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता घोषित करने के लिए तृणमूल विधायक दल के जाली हस्ताक्षर का मामला हरे स्ट्रीट पुलिस थाने में दर्ज कराया था।

    मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह जांच भाजपा द्वारा शुरू नहीं की गई थी। यह तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों द्वारा 27 मई को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दर्ज कराई गई शिकायत के बाद की कार्रवाई थी। विधायकों ने आरोप लगाया था कि छह मई को हुई उनकी पार्टी की बैठक में विपक्ष के नेता के चयन के संबंध में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। उन्होंने शिकायत की थी कि 70 विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित उनकी पार्टी का समर्थन पत्र फर्जी और मनगढंत है, जिसमें से 14 हस्ताक्षर बड़े अक्षरों में किए गए हैं।’

  • विपक्षी एकता दिखाने की फिर से तैयारी…. दिल्ली में महाबैठक करेगा INDIA' गठबंधन

    विपक्षी एकता दिखाने की फिर से तैयारी…. दिल्ली में महाबैठक करेगा INDIA' गठबंधन


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) को घेरने और विपक्षी एकता (Opposition unity) दिखाने के लिए ‘INDI’ गठबंधन दिल्ली में महाबैठक (General Meeting) करने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 8 जून को यह बैठक हो सकती है। इसमें केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करने के लिए संयुक्त रणनीति पर चर्चा होनी है। बैठक में करीब 15 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि भाग ले सकते हैं।


    ममता बनर्जी भी हो सकती हैं शामिल

    जानकारी के मुताबिक हाल के चुनाव में बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके की हार की समीक्षा और आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए यह बैठक बुलाई गई है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिवसेना (UBT) नेता उद्धव ठाकरे और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव आदि के भाग लेने की उम्मीद है।

    बता दें कि पश्चिम बंगाल की हार के बाद ममता बनर्जी की टीएमसी भी बड़े संकट का सामना कर रही है। सूत्रों का कहना है कि टीएमसी के अंदर विरोध काफी तेज हो गया है और टीएमसी के कई बड़े नेता बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। उधर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हमला हो गया जिसको लेकर ममता बनर्जी केंद्र पर आक्रामक हैं। वहीं खबरें यहां तक आ रही हैं कि पार्टी में ममता बनर्जी के कद पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।


    राहुल गांधी बोले- रीति और नीति को प्रसारित करें

    राहुल गांधी ने एक दिन पहले ही पार्टी संगठन को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीति और नीति को जन-जन तक पहुंचाना है। गांधी सोमवार को कांग्रेस की ओर से अजमेर के पुष्कर स्थित तिलोरा में आयोजित 10 दिवसीय सृजन संगठन चिंतन शिविर के समापन पर कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर में जिला अध्यक्षों को संगठन के प्रति निष्ठा और एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने जिला अध्यक्षों को स्पष्ट कहा कि संगठन से सर्वोपरि कुछ भी नहीं है। पार्टी की रीति-नीति आम जनता के बीच प्रसारित कर कांग्रेस को और मजबूत किया जाए।

    शिविर को सफल बताते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि संगठन सृजन अभियान के साथ चिंतन शिविर से कांग्रेस के कार्यकर्ता में एक नया जोश पैदा होगा और नयी जिम्मेदारी के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता जब पार्टी की रीति के साथ जब सड़कों पर उतरकर जनता के बीच जाएगा तो जनता का मत और समर्थन कांग्रेस को प्राप्त होगा। यही इस शिविर का मूल उद्देश्य भी है।

  • शनि प्रदोष व्रत 2026: शिव कृपा से शांत होंगे शनि दोष, साढ़ेसाती-ढैय्या से राहत पाने के लिए करें ये उपाय

    शनि प्रदोष व्रत 2026: शिव कृपा से शांत होंगे शनि दोष, साढ़ेसाती-ढैय्या से राहत पाने के लिए करें ये उपाय


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और शनि देव दोनों की आराधना करने से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के कष्टों में राहत मिलती है।

    शनि प्रदोष व्रत 2026 कब है?
    त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 26 जून 2026, रात 10:22 बजे
    त्रयोदशी तिथि समाप्त: 27 जून 2026, रात 12:43 बजे
    शनि प्रदोष व्रत: शनिवार, 27 जून 2026
    प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 4:49 बजे से रात 9:03 बजे तक
    प्रदोष काल में करें ये विशेष पूजा

    भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष काल में
    शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करें।
    बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और पुष्प चढ़ाएं।
    घी का दीपक और धूप जलाएं।
    “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
    शिव परिवार की पूजा करें।
    शनि दोष से राहत के लिए करें ये उपाय
    यदि कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही है तो:

    पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    शनि देव को नीले या सफेद पुष्प अर्पित करें।
    “ॐ शं शनैश्चराय नमः” अथवा “ॐ शं शनिश्चराय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
    काला तिल, काला चना, काले वस्त्र या भोजन का दान करें।
    जरूरतमंदों की सहायता करें।

    इस दिन क्या न करें?
    मांसाहार और शराब का सेवन न करें।
    किसी का अपमान या अनादर न करें।
    झूठ, क्रोध और कटु वचन से बचें।
    पिता, गुरु और बड़े भाई का अनादर न करें।
    पीपल वृक्ष के आसपास गंदगी न फैलाएं।
    साढ़ेसाती और ढैय्या के लिए प्रभावी मंत्र

    ॐ शं शनैश्चराय नम
    मान्यता है कि इस मंत्र का नियमित जाप शनि की प्रतिकूलता को कम करने में सहायक माना जाता है। शनिवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक इसका जाप विशेष फलदायी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यत
    शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को शनि देव का गुरु माना जाता है। इसलिए शनि प्रदोष व्रत पर शिव पूजा करने से शनि से जुड़े कष्टों में कमी आने और जीवन में सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली पर निर्भर करते हैं, इसलिए विशेष उपायों के लिए किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना उचित माना जाता है।

  • कर्नाटक HC की सख्त टिप्पणी…. कहा- मिडिल-ईस्ट की तरह हाथ-पैर काटे… तभी लोग मानेंगे कानून

    कर्नाटक HC की सख्त टिप्पणी…. कहा- मिडिल-ईस्ट की तरह हाथ-पैर काटे… तभी लोग मानेंगे कानून


    बेंगलुरु।
    देश में अपराध के मामले जिस तरह से बढ़ रहे हैं और लोग कानून को हल्के में ले रहे हैं, उस पर कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। एक रेप आरोपी की जमानत याचिका (Bail Petition) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में लोग अपने अधिकारों का गलत फायदा उठा रहे हैं। अगर खाड़ी (मिडिल-ईस्ट-Middle East) देशों की तरह अपराधियों के हाथ-पैर काटने जैसी कड़ी सजा दी जाए, शायद तभी लोग कानून का पालन करना सीखेंगे।


    ‘कानून ने अपने दांत खो दिए हैं’

    कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस आर. नटराज की बेंच 23 वर्षीय रेप आरोपी गोपी रेड्डी कार्तिक रेड्डी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान जस्टिस नटराज ने बेहद तल्ख मौखिक टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा, “हम अपराधियों से सख्ती से नहीं निपट रहे हैं, इसी वजह से कानून ने अपने दांत खो दिए हैं (प्रभावहीन हो गया है)। मिडिल-ईस्ट के उलट यहां अपराध करना बहुत आसान हो गया है। अगर हाथ या पैर काट दिए जाएं, तो शायद तभी लोगों को समझ आएगा कि कानून का पालन करना है। क्योंकि हमारे यहां लोकतंत्र है, इसलिए हर कोई इसे हल्के में लेता है।”

    ‘नमक खाया है, तो पानी पीना पड़ेगा’
    जज ने आरोपी को फिलहाल जमानत देने से इनकार करते हुए कहा, “अगर आपने नमक खाया है, तो पानी पीना ही पड़ेगा। उसे (आरोपी को) और चार-पांच दिन वहीं रहने दो। उसे जेल की आदत पड़ने दो। क्या पता, अगर उसे सजा हो गई तो वापस वहीं जाना पड़ सकता है।” कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जून की तारीख तय की है।


    क्या है पूरा मामला?

    आरोपी गोपी रेड्डी कार्तिक रेड्डी मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) का छात्र है और रेप के आरोप में 5 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पीड़िता और आरोपी मणिपाल में क्लासमेट थे। जुलाई 2023 में आरोपी ने लड़की से अपने प्यार का इजहार किया था, जिसे शुरुआत में लड़की ने भी मान लिया, लेकिन बाद में शक होने पर उसने आरोपी से दूरी बना ली।

    शिकायत के अनुसार, 12 सितंबर 2023 को आरोपी रिश्ते पर बात करने के बहाने लड़की को अपने फ्लैट पर ले गया और वहां उसकी इच्छा के खिलाफ उसका यौन उत्पीड़न किया। इस घटना से पीड़िता गहरे सदमे और डिप्रेशन में चली गई, जिसके लिए उसने केएमसी (KMC) मणिपाल में अपना इलाज भी कराया।

    पीड़िता ने पहले बेंगलुरु में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का दरवाजा खटखटाया और फिर उडुपी महिला पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 375(ए) और 376 के तहत केस दर्ज कराया।

    बचाव पक्ष की क्या रही दलील?
    बचाव पक्ष की वकील अयानतिका मंडल ने कोर्ट में दलील दी कि उनका मुवक्किल लगभग 2 महीने से जेल में बंद है और उसने कोई अपराध नहीं किया है। वकील की तरफ से यह भी तर्क दिया गया कि ये आरोप करीब 3 साल पुरानी घटना से जुड़े हैं और अगर आरोपी को आगे भी जेल में रखा गया, तो इससे उसका पेशेवर भविष्य पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल कोई राहत नहीं दी है।

    कोर्ट ने रेड्डी को जमानत देने से इनकार करते हुए टिप्पणी की, “अगर आप नमक खाते हैं, तो आपको पानी भी पीना होगा। उसे चार-पांच दिन और रहने दीजिए। उसे जेल की आदत डालने दीजिए। कौन जानता है, अगर आपको सजा हुई तो आपको वापस जाना पड़ सकता है।” अदालत ने रेड्डी की जमानत याचिका पर राज्य को नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि इस मामले पर आगे विचार के लिए 8 जून को सुनवाई की जाए।