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  • हर समारोह में वंदे मातरम् के सभी अंतरे बजाने को अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं : शशि थरूर

    हर समारोह में वंदे मातरम् के सभी अंतरे बजाने को अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं : शशि थरूर


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) ने वंदे मातरम् (VANDAM MATARAM) के गायन को लेकर चल रही बहस के बीच बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रीय गीत के सभी पांच पदों का गायन करवाना उचित नहीं लगता। संवाददाताओं से बात करते हुए थरूर ने कहा कि वंदे मातरम का सभी सम्मान करते हैं, लेकिन हर समारोह में इसके सभी अंतरे बजाने को अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं है।

    कांग्रेस सांसद ने कहा, “वंदे मातरम राष्ट्रगीत है और जब इसे गाया जाता है तो हम सम्मानपूर्वक खड़े हो जाते हैं। इसका पहला अंतरा या शुरुआती दो अंतरे, ज्यादातर लोगों को मुंह जुबानी याद होते हैं।” थरूर ने बताया कि परंपरागत रूप से यह गीत किसी कार्यक्रम की शुरुआत में एक बार गाया जाता है, जबकि राष्ट्रगान अलग से, अक्सर अंत में बजाया जाता है।

    उन्होंने कहा, “अब वे चाहते हैं कि हर कार्यक्रम की शुरुआत में और अंत में पांचों अंतरे गाए जाएं। मुझे लगता है कि यह एक अनावश्यक थोपा हुआ नियम है।” थारूर ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें राष्ट्रगीत से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, “हम सभी वंदे मातरम का सम्मान करते हैं। मैं खुशी-खुशी इसे आपके लिए गा सकता हूं।”

    राज्य सरकार और राज्यपाल के रुख में अंतर का संकेत
    कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य थरूर ने कहा कि केरल सरकार का रुख यह रहा है कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाना वैकल्पिक है। वहीं, उन्होंने संकेत दिया कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की राय इससे अलग दिखाई देती है। थरूर के मुताबिक, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय की आवश्यकता पड़ सकती है क्योंकि संसद द्वारा ऐसा कोई कानून पारित नहीं किया गया है जो हर कार्यक्रम में पूरे गीत के गायन को अनिवार्य बनाता हो। उन्होंने इसे मुख्य रूप से परंपरा और प्रचलन से जुड़ा विषय बताया।

    ‘राष्ट्रीय गीत से कोई आपत्ति नहीं’
    थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्हें वंदे मातरम् से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय इस राष्ट्रीय गीत का सम्मान करते हैं और वह स्वयं भी इसे खुशी से गा सकते हैं। उन्होंने एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए बताया कि नई दिल्ली में आयोजित उस कार्यक्रम में, जिसमें उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मौजूद थे, वंदे मातरम् का पूरा संस्करण कार्यक्रम की शुरुआत और अंत दोनों समय बजाया गया था।

    ‘दर्शकों के लिए यह व्यावहारिक चुनौती बन जाती है’
    थरूर का कहना था कि अपेक्षाकृत लंबा और कम परिचित गीत जब एक ही कार्यक्रम में दो बार सुनाया जाता है तो दर्शकों के लिए लंबे समय तक खड़े रहना एक मुद्दा बन सकता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में परंपरागत रूप से वंदे मातरम् का वही हिस्सा गाया जाता रहा है जिसकी अवधि लगभग राष्ट्रीय गान के बराबर होती है। यह स्वरूप लंबे समय से व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता रहा है और लोगों द्वारा सम्मानित भी है।

    विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकलने की उम्मीद
    इस पूरे विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए थरूर ने उम्मीद जताई कि इसका समाधान आपसी समझ और सौहार्द के साथ निकलेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पदाधिकारियों की मौजूदगी वाले विशेष औपचारिक कार्यक्रमों में एक बार पूरा गीत गाए जाने को समझा जा सकता है। हालांकि, किसी छोटे कार्यक्रम में पूरे वंदे मातरम् का दो बार गायन करवाने के पीछे उन्हें कोई स्पष्ट तर्क नजर नहीं आता। उनके अनुसार यह व्यवस्था न तो विशेष रूप से व्यावहारिक है और न ही बहुत प्रभावी।

  • CM बनने से पहले तीखे तेवर… डीके शिवकुमार बोले- गुजरात नहीं ले जाने दूंगा कर्नाटक का हक

    CM बनने से पहले तीखे तेवर… डीके शिवकुमार बोले- गुजरात नहीं ले जाने दूंगा कर्नाटक का हक


    बेंगलुरु।
    डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) कर्नाटक (Karnataka) के अगले मुख्यमंत्री (Chief Minister) बनने वाले हैं। हालांकि मुख्यमंत्री बनने से पहले ही उन्होंने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। डीके शिवकुमार ने सोमवार को कहाकि सरकार में आते ही वह तय करेंगे कि कर्नाटक का हक गुजरात नहीं चला जाए। शिवकुमार ने आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bangalore) की खिताबी जीत के बाद यह बयान दिया है। गौरतलब है आरसीबी ने आईपीएल के खिताबी मुकाबले में गुजरात टाइटंस को हराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है।


    गुजरात पर प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप

    डीके शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत में कहाकि कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) को आईपीएल फाइनल की मेजबानी करनी थी। राज्य सरकार ने भी इसकी अनुमति दी थी। लेकिन गुजरात ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और फाइनल की मेजबानी कर्नाटक से छीन ली। बुधवार को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने जा रहे डीके ने कहाकि यह हमारे क्रिकेट प्रशंसकों को निराश कर सकता है। हम जरूरी कदम उठा रहे हैं ताकि यह फिर कभी न हो। हालांकि, इसमें कुछ समय लगेगा।


    अहमदाबाद में हुआ था फाइनल

    आरसीबी और जीटी के बीच यह फाइनल मुकाबला गुजरात के अहमदाबाद शहर स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया था। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की जीत पर राजधानी बेंगलुरु और कर्नाटक के अन्य शहरों में जश्न का माहौल है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) ने पिछले महीने अहमदाबाद को आईपीएल फाइनल की मेजबानी के लिए नए वेन्यू के तौर पर चुना था। इससे पहले बेंगलुरु को इस फाइनल की मेजबानी करनी थी। लेकिन सांसदों और विधायकों के लिए टिकटों की मांग को लेकर विवाद के बाद यह फैसला लिया गया।


    दिल्ली पहुंच गए डीके

    गौरतलब है कि कर्नाटक के भावी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया राज्य के अगले मंत्रिमंडल को अंतिम रूप देने के लिए पार्टी आलाकमान से चर्चा करेंगे। सूत्रों का कहना है कि दोनों नेता मंगलवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया सोमवार दोपहर दिल्ली पहुंचे। शिवकुमार बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। कांग्रेस नेतृत्व के कहने पर सिद्धरमैया के इस्तीफा देने के बाद वह इस जिम्मेदारी को संभालने जा रहे हैं।


    कब है शपथ ग्रहण

    कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार तीन जून को शाम चार बजकर पांच मिनट पर लोक भवन परिसर में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस दौरान कुछ विधायक भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। शिवकुमार को शनिवार को औपचारिक रूप से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया था। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद में अधिकतम 34 मंत्रियों को शामिल किए जाने का प्रावधान है।

  • नीट विवाद: PM मोदी के जवाबदेही मॉडल की दिग्विजय सिंह ने की सराहना….

    नीट विवाद: PM मोदी के जवाबदेही मॉडल की दिग्विजय सिंह ने की सराहना….


    नई दिल्ली।
    नीट विवाद (NEET Controversy) को लेकर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) जहां प्रधानमंत्री (Prime Minister) के साथ आर-पार के मूड में है, वहीं पार्टी के सबसे मुखर चेहरों में से एक दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने प्रधानमंत्री की नीयत और देश की संस्थागत व्यवस्था पर खुलकर भरोसा जताया है। शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह सोमवार को हुए बैठक में साफ कहा कि जब देश का शीर्ष नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के समक्ष परीक्षा प्रणाली को सुधारने की जवाबदेही ले रहा है, तो इस सकारात्मक रुख की सराहना की जानी चाहिए।

    सूत्रों ने बताया, बैठक में परीक्षा सुधार, एनटीए की कार्यप्रणाली और नीट से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान दिग्विजय ने कहा कि जब सरकार जवाबदेही स्वीकार रही है तो इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। हालांकि, उनकी टिप्पणी का आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। वैसे यह पहला अवसर नहीं है जब दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से मोदी की किसी विशेषता का उल्लेख किया हो। पिछले वर्ष उन्होंने भाजपा-आरएसएस की संगठनात्मक क्षमता की सराहना करते हुए कहा था कि एक साधारण कार्यकर्ता का प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना संगठन की ताकत को दर्शाता है।


    पीएम छात्रों के नाम खुला पत्र लिखें

    अध्यक्ष ने कहा, 21 जून की दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों और अभिभावकों में विश्वास जगाना बेहद जरूरी है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान छात्रों के नाम खुला पत्र या फिर संदेश लिखें जिसमें छात्रों को लगे कि वो अकेले नहीं हैं।


    राजनीतिकरण पर सवाल तो सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी

    सूत्रों के मुताबिक, भाजपा से जुड़े सदस्यों ने समिति में शामिल विपक्ष के सदस्यों से पूछा कि नीट यूजी की दोबारा परीक्षा पर राजनीति क्यों हो रही है। परीक्षा के बीच जांच के नाम पर ऐसी बैठकें क्योंकि की जा रही हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा, राजनीति का तो कोई सवाल ही नहीं है। अध्यक्ष ने मंत्रालय और अधिकारियों को 21 जून को होने वाली दोबारा नीट के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं भी दी हैं।


    पुनर्मूल्यांकन फीस पर राहुल बोले- सीबीएसई के जेबकतरों से सावधान

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया और उसकी फीस को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा को एक सेवा के बजाय एक व्यापार के तौर पर देखा जाता है, तो गलतियां सुधारी नहीं जातीं, बल्कि और बढ़ जाती हैं और इसकी सबसे बड़ी कीमत हमारे बच्चे अपने वक्त,अपने आत्मविश्वास खोने और अपने भविष्य के रूप में चुका रहे हैं। इसके साथ उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली की वजह से दिक्कतों का सामना कर रहे सीबीएसई छात्रों संग अपनी बातचीत का वीडियो क्लिप भी साझा किया।

    इसके साथ उन्होंने लिखा, जेबकतरों से सावधान रहें। आज वे सीधे सीबीएसई के अंदर ही बैठे हैं। सीबीएसई की वजह से गलत नंबर आने पर आपको डिजिटल स्कैन कॉपी पाने के लिए 100 रुपये प्रति विषय, नंबरों की दोबारा गिनती के लिए 100 रुपये प्रति पेपर और पुनर्मूल्यांकन के लिए 25 प्रति सवाल शुल्क देना पड़ता है। अपनी ही आंसर सीट की सही जांच के लिए एक छात्र को 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, जरा सोचिए कि जब करीब 4 लाख चार लाख छात्रों ने ऐसे आवेदन दिए हैं, तो सीबीएसई कितनी कमाई कर रहा होगा।

  • ईरान-US के बीच अगले सप्ताह तक हो सकती है डील, ट्रंप ने दिए होर्मुज खुलने के संकेत

    ईरान-US के बीच अगले सप्ताह तक हो सकती है डील, ट्रंप ने दिए होर्मुज खुलने के संकेत


    वॉशिंगटन।
    ईरान (Iran) के साथ बहुप्रतीक्षित समझौते को लेकर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि संभव है कि अगले सप्ताह समझौता हो जाए और इसके बाद होर्मुज (Hormuz) भी खुल जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि छोटी सी एक समस्या सामने आ रही है लेकिन अगले सप्ताह तक उसे सुलझा लिया जाएगा। उनका मतलब लेबनान पर इजरायली हमले से था जिसको लेकर ईरान काफी नाराज है।


    युद्ध में जीत से बड़ा होगा समझौता

    डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, मैंने हिजबुल्लाह से बात की और कहा कि अब कोई गोलीबारी नहीं होनी चाहिए। इसके बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) से बात की और गोलीबारी, बमबारी रोकने को कहा। इसके बाद दोनों तरफ से हमले बंद हो गए हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ साथ समझौता किसी सैन्य विजय से ज्यादा अच्छा हो सकता है। उन्होंने कहा कि हम एक बड़े देश के हित में काम कर रहे हैं इसलिए काम भी उसी हिसाब से करना होगा।


    लेबनान पर इजरायली हमला आ रहा आड़े

    इजरायली सेना ने लेबनान में अपने जमीनी अभियान का विस्तार कर दिया है और नयी सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका की मंजूरी भी मांगी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ व्यापक शांति समझौते की दिशा में क्षेत्रीय तनाव कम करने का प्रयास कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लेबनान में युद्धविराम भी अमेरिका-ईरान वार्ता के व्यापक ढांचे का हिस्सा है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 48 घंटों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग-अलग बातचीत कर युद्धविराम बहाल करने की कोशिश की। प्रस्ताव के तहत हिज्बुल्ला को इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले रोकने थे, जबकि इजरायल को लेबनान में आगे सैन्य कार्रवाई से बचना था।

    रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि राष्ट्रपति आउन इस पहल के पक्ष में थे और उन्होंने संसद अध्यक्ष नबीह बेरी से हिज्बुल्ला पर दबाव बनाने को कहा। शअरी बेरी की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं रही और उन्होंने पहले इजरायल से हमले रोकने की बात कही।

    इस बीच, इजरायली और लेबनानी सैन्य अधिकारियों ने शुक्रवार को पेंटागन में संभावित युद्धविराम, इजरायली सैनिकों की वापसी, दक्षिणी लेबनान में लेबनानी सेना की तैनाती और हिज्बुल्ला के निरस्त्रीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों के राजनयिकों के बीच इस सप्ताह एक और बैठक होने की संभावना है।

    डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत तीव्र गति से जारी है। तेहरान द्वारा नए सिरे से हमले किए जाने से संघर्षविराम कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच नाममात्र का संघर्षविराम ऐसे जवाबी हमलों और पलटवारों से बार-बार परखा जा रहा है जबकि दोनों देशों के अधिकारी युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

  • US में थम नहीं रही गोलीबारी की घटनाएं, आयोवा राज्य के मुस्काटीन शहर में फायरिंग में 7 लोगों की मौत

    US में थम नहीं रही गोलीबारी की घटनाएं, आयोवा राज्य के मुस्काटीन शहर में फायरिंग में 7 लोगों की मौत


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) का आयोवा राज्य (Iowa State) सोमवार (स्थानीय समयानुसार) को गोलियों की आवाज से दहल उठा। यहां के एक शहर में कई जगहों पर हुई गोलीबारी की घटनाओं में कम से कम 7 लोगों की मौत होने की खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक संदिग्ध आरोपी ने पहले 6 लोगों की गोली मारकर हत्या की और फिर पुलिस के सामने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने कहा है कि शुरुआती जांच से यह मामला पारिवारिक विवाद (Family dispute) का लगता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक दिल दहला देने वाली यह घटना आयोवा के मुस्काटीन शहर (Muscatine City) में हुई। यहां हमलावर ने दो घरों और एक दुकान में घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। मुस्काटीन पुलिस प्रमुख एंथनी कीस ने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे पुलिस को गोलीबारी की सूचना मिली। हालांकि जब तक पुलिस वहां पहुंची तब तक लोगों की मौत हो चुकी थी। घटनास्थल से चार लोगों के शव बरामद हुए।

    वहीं पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी घटनास्थल से फरार हो चुका था। पुलिस के मुताबिक संदिग्ध की पहचान 52 वर्षीय रयान विलिस मैकफारलैंड के रूप में हुई है। पुलिस ने तलाशी अभियान शुरू कर उसे खोज निकाला। हालांकि जैसे ही अधिकारी उसे पकड़ने वाले थे, उसने खुद को गोली मार ली। पुलिस प्रमुख कीस ने बताया, “अधिकारियों और डॉक्टर्स की टीम ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन मौके पर ही उसकी मौत हो गई।”

    वहीं जांच के दौरान पुलिस को कुछ और जगहों पर भी गोलीबारी की सूचना मिली। इसके बाद एक अन्य घर और पास के एक दुकान से दो और लोगों के शव बरामद किए गए। सबकी मौत गोली लगने की वजह से ही हुई। मुस्काटीन पुलिस ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि यह गोलीबारी घरेलू विवाद का नतीजा थी। सभी पीड़ितों के आरोपी के परिवार का सदस्य होने की आशंका है।”

  • Bangladesh: इस्लामी बैंक में नए चेयरमैन की नियुक्ति का विवाद हुआ हिंसक… प्रदर्शन के बीच पुलिस के साथ झड़प

    Bangladesh: इस्लामी बैंक में नए चेयरमैन की नियुक्ति का विवाद हुआ हिंसक… प्रदर्शन के बीच पुलिस के साथ झड़प


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) की राजधानी ढाका (Dhaka) में इस्लामी बैंक पीएलसी (Islami Bank PLC) के नए चेयरमैन (New chairman) की नियुक्ति को लेकर उत्पन्न विवाद अब हिंसक रूप ले लिया है। बैंक मुख्यालय के सामने ग्राहकों और कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ जोरदार झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस, साउंड ग्रेनेड और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में दर्जनों लोग घायल हो गए।

    बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी ‘सचेत ग्राहक मंच’ के बैनर तले बैंक के मुख्य द्वार पर बैठे थे। पुलिस ने पहले चेतावनी दी, लेकिन प्रदर्शनकारियों के हटने से इनकार करने पर आक्रामक कार्रवाई की गई। आंसू गैस के धुएं से पूरा इलाका भर गया और पानी की तेज धार से कई महिलाएं व बुजुर्ग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हालांकि, घायलों की सटीक संख्या की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


    क्या है पूरा मामला?

    बांग्लादेश सरकार ने कुछ दिन पहले बांग्लादेश बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर खुर्शीद आलम को इस्लामी बैंक पीएलसी का नया चेयरमैन नियुक्त किया था। इस फैसले का बैंक के कर्मचारियों, अधिकारियों और ग्राहकों ने जमकर विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शेख हसीना के शासनकाल में खुर्शीद आलम डिप्टी गवर्नर रहते हुए बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार में संलिप्त थे। उन्होंने देश के प्रमुख व्यापारी एस. आलम के साथ मिलीभगत कर बैंकों से हजारों करोड़ रुपये के गबन में मदद की थी।

    कर्मचारी यूनियन और ग्राहक संगठनों का कहना है कि खुर्शीद आलम का राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव इतना ज्यादा है कि उनकी नियुक्ति बैंक की विश्वसनीयता और शरिया अनुपालन को गंभीर खतरे में डाल देगी। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह नियुक्ति न सिर्फ इस्लामी बैंक बल्कि पूरे इस्लामी बैंकिंग सिस्टम के लिए खतरा है। हम किसी भी कीमत पर इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

    बता दें कि इस्लामी बैंक पीएलसी बांग्लादेश का सबसे बड़ा निजी शरिया-आधारित बैंक है, जो पूरे देश में सैकड़ों शाखाओं के जरिए लाखों ग्राहकों को सेवाएं देता है। इस बैंक पर लंबे समय से विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव माना जाता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान प्रदर्शन के पीछे जमात-ए-इस्लामी का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन हो सकता है। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद इस्लामी बैंकिंग क्षेत्र में सत्ता परिवर्तन की कोशिशें तेज हुई हैं। कुछ लोग खुर्शीद आलम की नियुक्ति को अवामी लीग के बचे-खुचे प्रभाव को खत्म करने की कवायद मान रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं।


    अभी क्या हैं हालात?

    ढाका ट्रिब्यून समेत स्थानीय मीडिया के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैंक परिसर के बाहर बड़े बैनर और पोस्टर लगाए थे, जिन पर लिखा था कि खुर्शीद आलम इस्तीफा दो… मनी लॉन्ड्रर को चेयरमैन मत बनाओ… इस्लामी बैंक बचाओ। बताया जा रहा है कि विरोध-प्रदर्शन के कारण अभी भी बैंक मुख्यालय और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। सड़कें बंद हैं और यातायात पूरी तरह प्रभावित है।

    दूसरी ओर प्रदर्शनकारी तितर-बितर होकर आसपास की गलियों में खड़े हैं और नारेबाजी जारी रखे हुए हैं। बैंक के अंदर कामकाज ठप पड़ा हुआ है। स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और आगे बड़े प्रदर्शन की आशंका जताई जा रही है।

  • IPL टीमों को करोड़ों का नुकसान करा रहे स्काउट्स? सुनील गावस्कर का बड़ा बयान

    IPL टीमों को करोड़ों का नुकसान करा रहे स्काउट्स? सुनील गावस्कर का बड़ा बयान


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के दिग्गज Sunil Gavaskar ने IPL फ्रेंचाइजियों की स्काउटिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि कई टीमें राज्य और शहर स्तर की टी20 लीगों में प्रदर्शन देखकर खिलाड़ियों पर करोड़ों रुपये खर्च कर देती हैं, लेकिन वही खिलाड़ी IPL में अंतरराष्ट्रीय स्तर की गेंदबाजी के सामने टिक नहीं पाते।

    क्या बोले गावस्कर?
    स्पोर्टस्टार में अपने कॉलम में गावस्कर ने लिखा कि कई बड़े हिटर स्थानीय टी20 लीगों में शानदार प्रदर्शन करते हैं, लेकिन IPL में आने पर उनकी कमजोरियां उजागर हो जाती हैं। उनके अनुसार, लोकल लीग और IPL के स्तर में बहुत बड़ा अंतर है।

    उन्होंने कहा कि:
    राज्य और शहर की लीगों में बल्लेबाजी और गेंदबाजी का स्तर IPL जैसा नहीं होता। ऐसे में स्काउट्स को केवल आंकड़ों या हाइप के आधार पर खिलाड़ियों का चयन नहीं करना चाहिए।

    स्काउट्स पर उठाए सवाल
    गावस्कर का मानना है कि कई बार स्काउट्स खिलाड़ी एजेंटों, सोशल मीडिया प्रचार और कुछ चुनिंदा पारियों से प्रभावित हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि फ्रेंचाइजी ऐसे खिलाड़ियों पर बड़ी रकम खर्च कर देती हैं जो बाद में टीम की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते। उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी करोड़ों में खरीदा जाए और फिर उसे कुछ मैचों के बाद बेंच पर बैठा दिया जाए, तो यह स्काउटिंग सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।

    “डमी बेच दिया जाता है”
    गावस्कर ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार फ्रेंचाइजियों को ऐसे खिलाड़ी “बेच” दिए जाते हैं जिनकी क्षमता IPL स्तर की नहीं होती। उनका इशारा इस ओर था कि कुछ खिलाड़ी स्थानीय प्रतियोगिताओं के प्रदर्शन के कारण जरूरत से ज्यादा मूल्य पा लेते हैं।

    एक मैच के प्रदर्शन पर मिल जाता है नया कॉन्ट्रैक्ट
    गावस्कर ने यह भी कहा कि कुछ खिलाड़ी पूरे सीजन में संघर्ष करते हैं, लेकिन किसी एक कम दबाव वाले मुकाबले में अच्छी पारी खेल देते हैं। फिर उसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें अगले सीजन के लिए दोबारा खरीद लिया जाता है। उनके अनुसार IPL में ऐसे “वन-मैच परफॉर्मर्स” की पूरी टीम बनाई जा सकती है, जिन्हें बार-बार मौके मिलते रहते हैं।

    IPL टीमों के लिए संदेश
    गावस्कर का साफ संदेश है कि फ्रेंचाइजियों को केवल रन, छक्के या सोशल मीडिया चर्चा देखकर खिलाड़ी नहीं चुनने चाहिए। स्काउट्स को तकनीक, मानसिक मजबूती और उच्च स्तर के क्रिकेट में प्रदर्शन की क्षमता का भी गहराई से मूल्यांकन करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब Indian Premier League में कई महंगे खिलाड़ी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए, जबकि कुछ कम कीमत वाले खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर अपनी टीमों को फायदा पहुंचाया।

  • 11 साल बाद शिल्पा शिंदे का बड़ा बयान, केस पर किया चौंकाने वाला खुलासा

    11 साल बाद शिल्पा शिंदे का बड़ा बयान, केस पर किया चौंकाने वाला खुलासा


    नई दिल्ली । टीवी एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे ने ‘भाबीजी घर पर हैं’ छोड़ने और उस दौरान हुए विवाद पर 11 साल बाद अपनी बात रखते हुए कई बड़े दावे किए हैं। भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उस समय प्रोड्यूसर के खिलाफ लगाया गया सेक्शुअल हैरेसमेंट का केस उन्होंने “मजबूरी में” किया था और अब वे मानती हैं कि वह आरोप पूरी तरह सच नहीं था।

    क्या कहा शिल्पा शिंदे ने?
    शिल्पा शिंदे ने बातचीत में बताया कि शो छोड़ने के बाद उनके और प्रोडक्शन हाउस के बीच तनाव बढ़ गया था। उनके अनुसार, उन पर एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट साइन करने का दबाव बनाया जा रहा था, जिससे वे दूसरे प्रोजेक्ट्स में काम न कर सकें। जब उन्होंने इनकार किया, तो उनके मुताबिक उन्हें काम से हटाने और करियर खत्म करने जैसी स्थिति बनाई गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि अचानक उन्हें शो से हटा दिया गया, शूटिंग रोक दी गई और मीडिया में उनके बाहर होने की खबरें चलने लगीं।

    लीगल विवाद और दबाव के आरोप
    शिल्पा ने कहा कि विवाद के दौरान उन्हें भारी-भरकम लीगल नोटिस (12 से 20 करोड़ रुपये तक) मिले, जिससे वे मानसिक दबाव में आ गई थीं। उनके अनुसार, उस समय उन्हें लगा कि उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था।

    “झूठा था केस” वाला बयान
    सबसे बड़ा खुलासा यही रहा कि उन्होंने कहा- उन्होंने प्रोड्यूसर पर जो सेक्शुअल हैरेसमेंट का केस किया था, वह “पूरी तरह सच नहीं था” और उन्होंने वह कदम उस समय की परिस्थितियों और दबाव में उठाया था। यह बयान सामने आने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है, क्योंकि उस समय यह टीवी इंडस्ट्री के सबसे बड़े विवादों में से एक माना गया था।

    आगे क्या कहा?
    शिल्पा शिंदे ने यह भी कहा कि उस पूरे विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच बाद में समझौता हो गया और अब उनके रिश्ते सामान्य हैं। उन्होंने इसे अपने करियर का सबसे मुश्किल दौर बताया।

  • UP: आतंकी शहबाज सिद्धीकी से पूछताछ में बड़ा खुलासा, देश को दहलाने की थी साजिश, बस आदेश का था इंतजार

    UP: आतंकी शहबाज सिद्धीकी से पूछताछ में बड़ा खुलासा, देश को दहलाने की थी साजिश, बस आदेश का था इंतजार

    लखनऊ । जैश आतंकी से कनेक्शन में गिरफ्तार आतंकी शहबाज सिद्धीकी पूछताछ में बड़े खुलासे कर रहा है। उसने दावा किया है कि वह खुद देश में फिदायीन हमला करने को तैयार था। बस उसको पाकिस्तानी जैश (Pakistani Jaish) के आतंकी के इशारे का इंतजार था। इससे संबंधित एटीएस को आरोपी के मोबाइल से भी अहम सुबूत मिले हैं।

    सोशल मीडिया से मिले इनपुट के आधार पर एटीएस ने 18 मई को कासगंज से शहबाज सिद्धीकी को गिरफ्तार किया था। वह पुलवामा हमले से जुड़े जैश के आतंकियों के संपर्क में था। दो दिन पहले ही उसको एटीएस ने कस्टडी रिमांड पर लिया है। सूत्रों के मुताबिक आरोपी के पास से मिले मोबाइल फोन में जैश के आतंकियों से बातचीत की रिकॉर्डिंग व चैट मिली है। इसमें वह पुलवामा हमले को सही बता रहा है और सर्जिकल स्ट्राइक को गलत ठहरा रहा है। भारत में हुई आतंकी घटनाओं को लेकर भी खुशी जाहिर की। पूछताछ में उसने इन सभी बातों को स्वीकारा है।

    शहबाज के नेटवर्क से भारत के कई और लोगों के भी जुड़ने की आशंका
    उसने बताया कि वह भारत में फिदायीन हमला करने के लिए तैयार था। इसको लेकर उसने आतंकियों से बातचीत भी की थी। पाकिस्तानी आतंकी ने उसे भड़काऊ वीडियो भी भेजे थे। ये भी कहा था कि समय आने पर बताया जाएगा कि हमला कहां करना था। जांच एजेंसी को आशंका है कि शहबाज के नेटवर्क से भारत के कई और लोग भी जुड़े हैं, इसलिए उनके बारे में पता करने की जद्दोजहद जारी है। अब जब उसको मुंबई ले जाया जाएगा तो कई सुराग लगने की आशंका है।

  • गुरु गोचर से चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत, अक्टूबर तक धन, सम्मान और सफलता के योग

    गुरु गोचर से चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत, अक्टूबर तक धन, सम्मान और सफलता के योग

    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धन, सुख, सौभाग्य और धर्म का कारक ग्रह माना जाता है। नवग्रहों में गुरु को सबसे शुभ और कल्याणकारी ग्रहों में शामिल किया जाता है। माना जाता है कि बृहस्पति की कृपा सभी राशियों पर रहती है, लेकिन कुछ राशियां ऐसी हैं जिन पर देवगुरु विशेष रूप से मेहरबान रहते हैं।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार 2 जून को बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर रहे हैं। गुरु का यह गोचर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसका प्रभाव कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। विशेष रूप से तीन राशियों के लिए यह समय धन लाभ, मान-सम्मान और तरक्की के नए अवसर लेकर आ सकता है।

    कर्क राशि: उच्च राशि में गुरु का विशेष प्रभाव
    बृहस्पति का गोचर कर्क राशि में ही हो रहा है और ज्योतिष के अनुसार कर्क गुरु की उच्च राशि मानी जाती है। ऐसे में इस राशि के जातकों को इसका विशेष लाभ मिलने की संभावना है। लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं, सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ सकती है और व्यक्तित्व में सकारात्मक निखार देखने को मिलेगा।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कर्क राशि के जातक संवेदनशील और बुद्धिमान माने जाते हैं। गुरु के प्रभाव से उन्हें भूमि, भवन, वाहन और अन्य भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के अवसर मिल सकते हैं। करियर और आर्थिक मामलों में भी अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं।

    धनु राशि: स्वामी ग्रह का मिलेगा भरपूर सहयो
    धनु राशि के स्वामी स्वयं देवगुरु बृहस्पति हैं, इसलिए इस राशि पर गुरु का प्रभाव विशेष रूप से शुभ माना जाता है। गोचर के दौरान धन लाभ के नए स्रोत बन सकते हैं और करियर में उन्नति के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। भाग्य का सहयोग मिलने से कई महत्वपूर्ण कार्य आसानी से पूरे होने की संभावना है।

    धनु राशि के लोग आमतौर पर आशावादी, ज्ञानप्रिय और धार्मिक स्वभाव के होते हैं। शिक्षा, सलाहकार सेवाओं और नेतृत्व से जुड़े क्षेत्रों में इन्हें विशेष सफलता मिल सकती है। कठिन परिस्थितियों में भी ये अपनी समझदारी से रास्ता निकालने में सक्षम रहते हैं।

    मीन राशि: तरक्की और आर्थिक लाभ के संकेत
    मीन राशि भी बृहस्पति के स्वामित्व वाली राशि है। ऐसे में गुरु का गोचर इस राशि के जातकों के लिए भी शुभ परिणाम देने वाला माना जा रहा है। संतान, शिक्षा, प्रेम संबंध और करियर से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नई योजनाओं में सफलता मिलने के योग बन रहे हैं।

    ज्योतिषीय दृष्टि से मीन राशि के जातक शांत, भावुक और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। गुरु के प्रभाव से उनकी अंतर्ज्ञान शक्ति मजबूत रहती है, जिससे वे महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सफल होते हैं। आर्थिक मामलों में भी स्थिरता और प्रगति के संकेत मिल सकते हैं।