Blog

  • बिहार में बंगले पर सियासत तेज, तेज प्रताप ने नीतीश कुमार को भी नोटिस देने की उठाई मांग

    बिहार में बंगले पर सियासत तेज, तेज प्रताप ने नीतीश कुमार को भी नोटिस देने की उठाई मांग


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर घमासान मचा हुआ है। राज्य सरकार द्वारा 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी विवाद के बीच राबड़ी देवी के बड़े बेटे और जन जन पार्टी के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी निशाने पर लिया है।

    तेज प्रताप यादव ने साफ कहा कि यदि सरकार पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से सरकारी आवास खाली करवाना चाहती है तो यही नियम पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार भी पूर्व मुख्यमंत्री हैं और उन्हें भी सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलना चाहिए। तेज प्रताप ने तंज कसते हुए कहा कि सबसे पहले नीतीश कुमार अपना आवास छोड़ दें, उसके बाद राबड़ी देवी भी बंगला खाली कर देंगी।

    जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि सरकार ने राबड़ी देवी को 15 दिनों के भीतर बंगला खाली करने का निर्देश दिया है तो उन्होंने जवाब दिया कि सरकार को समान नियम अपनाने चाहिए और इसी तरह का नोटिस नीतीश कुमार को भी जारी करना चाहिए। तेज प्रताप का यह बयान ऐसे समय आया है जब बंगला विवाद बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

    इससे पहले राबड़ी देवी की बेटी और राजद नेता रोहिणी आचार्या भी इस मामले में सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आ चुकी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया। रोहिणी ने कहा कि यदि सरकार में हिम्मत है तो वह जबरन बंगला खाली करवाकर दिखाए। उनके अनुसार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने 27 मई को एक आदेश जारी कर 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया। इसके साथ ही राबड़ी देवी को आवास खाली करने के निर्देश दिए गए। यह वही बंगला है जिसमें राबड़ी देवी पिछले करीब दो दशकों से रह रही हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम पर राबड़ी देवी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह बंगला खाली नहीं करेंगी। उनका कहना है कि सरकार चाहे जितना दबाव बनाए लेकिन उन्हें जबरन हटाना आसान नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यदि चाहती है तो बलपूर्वक कार्रवाई करके दिखाए।

    बंगला विवाद अब केवल एक प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है बल्कि यह बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ सरकार नियमों का हवाला दे रही है तो दूसरी ओर राजद इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है तथा विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

  • तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल: 'बिग बॉस' फेम तमिल अभिनेत्री का बड़ा दावा, मुख्यमंत्री विजय समर्थकों की ट्रोलिंग से हुआ मिसकैरेज

    तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल: 'बिग बॉस' फेम तमिल अभिनेत्री का बड़ा दावा, मुख्यमंत्री विजय समर्थकों की ट्रोलिंग से हुआ मिसकैरेज

    नई दिल्ली। दक्षिण भारतीय सिनेमा और तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने पूरी इंडस्ट्री में सनसनी फैला दी है। ‘बिग बॉस तमिल’ से राष्ट्रव्यापी लोकप्रियता हासिल करने वाली अभिनेत्री जूली, जिन्हें मारिया जूलियाना के नाम से भी जाना जाता है, ने तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति जोसेफ विजय पर बेहद संगीन और गंभीर आरोप लगाए हैं।

    चेन्नई में आयोजित एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिनेत्री ने फूट-फूटकर रोते हुए दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री थलपति विजय की पार्टी के समर्थकों द्वारा किए गए अनवरत मानसिक उत्पीड़न और सोशल मीडिया ट्रोलिंग के कारण अपने होने वाले पहले बच्चे को खो दिया है।

    अभिनेत्री का आरोप है कि उन्हें इंटरनेट मीडिया पर इस कदर निशाना बनाया गया और उनके चरित्र पर कीचड़ उछाला गया कि वह अत्यधिक मानसिक तनाव का शिकार हो गईं, जिसके परिणामस्वरूप उनका गर्भपात यानी मिसकैरेज हो गया। इस बयान के सामने आने के बाद से ही राज्य की राजनीति और सिनेमाई हलकों में आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर तेज हो गया है।

    अभिनेत्री जूली ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने राजनीतिक रूप से थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मार्च महीने में उन्होंने अपने खिलाफ हो रहे लगातार ऑनलाइन उत्पीड़न को लेकर चेन्नई पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कुल आठ लोगों को नामजद किया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें पुलिस विभाग की ओर से एक नोटिस प्राप्त हुआ, जिसमें इस मामले को आपराधिक श्रेणी में न रखकर दीवानी मानहानि के अंतर्गत दर्शाया गया था।

    जूली ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ता में हुए परिवर्तन के बाद इस मामले को जानबूझकर कमजोर करने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके द्वारा आवाज उठाने के बाद उनके ऊपर पंद्रह लाख रुपए के एक फर्जी किडनी घोटाले में शामिल होने के मनगढ़ंत आरोप मढ़ दिए गए। अभिनेत्री का सीधा आरोप है कि इस पूरी साजिश के पीछे मुख्यमंत्री की पार्टी के कुछ कट्टर समर्थक और एक कानूनी सलाहकार शामिल हैं, जिन्होंने उनके और उनके पति के खिलाफ बेहद भद्दी और अपमानजनक बातें सोशल मीडिया पर फैलाई हैं।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब मीडिया कर्मियों ने उनसे यह सवाल पूछा कि वह इन गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री से कैसे जोड़ सकती हैं, तो उन्होंने बेहद तीखा जवाब दिया। जूली ने स्पष्ट किया कि वह इस दर्दनाक घटना का इस्तेमाल किसी भी तरह की जन-सहानुभूति बटोरने के लिए नहीं कर रही हैं, बल्कि वह उस कड़वे सच को सामने ला रही हैं जिससे कई महिलाएं गुजर रही हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि केवल सोशल मीडिया की लोकप्रियता के दम पर सत्ता के शीर्ष तक पहुंच जाना काफी नहीं है, बल्कि एक मुख्यमंत्री के रूप में जनता के प्रति उनकी बड़ी जिम्मेदारी बनती है।

    जूली ने कहा कि भले ही मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया हो, लेकिन जब उनकी पार्टी के लोग एक महिला का नाम बिना किसी संकोच के खराब कर रहे थे, तब उन्होंने अपने समर्थकों को पीछे हटने के लिए एक शब्द भी नहीं कहा। मुख्यमंत्री की इस चुप्पी को ही उन्होंने अपनी इस व्यक्तिगत क्षति का सबसे बड़ा कारण माना है। इस बेहद संवेदनशील और विवादित बयान के बाद जहां थलपति विजय के प्रशंसक और पार्टी कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अभिनेत्री के दावों का कड़ा विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने तमिलनाडु की नई सरकार के सामने एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

  • भोजपुरी सिनेमा के महामुकाबले में फिर गरमाया पुराना विवाद, मनोज तिवारी ने रवि किशन की पुरानी फीस को लेकर कसा तीखा तंज

    भोजपुरी सिनेमा के महामुकाबले में फिर गरमाया पुराना विवाद, मनोज तिवारी ने रवि किशन की पुरानी फीस को लेकर कसा तीखा तंज

    नई दिल्ली। क्षेत्रीय सिनेमा के इतिहास में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले भोजपुरी फिल्म जगत के दो सबसे बड़े सूरमाओं के बीच की पुरानी अदावत एक बार फिर से खुलकर सार्वजनिक मंच पर आ गई है। लंबे समय तक एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे मनोज तिवारी और रवि किशन के बीच की खाई राजनीतिक रूप से भले ही पट गई हो, लेकिन अतीत के व्यावसायिक मतभेद आज भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं।

    हाल ही में दिए गए एक बेबाक साक्षात्कार के दौरान मनोज तिवारी ने भोजपुरी सिनेमा के उत्थान और उसकी वैश्विक लोकप्रियता को लेकर कई ऐसे दावे किए हैं, जिससे दोनों कलाकारों के प्रशंसकों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बातचीत के दौरान जब उनसे यह पूछा गया कि इस फिल्म जगत को पुनर्जीवित करने और एक-दूसरे को मुख्यधारा में लाने का असल श्रेय किसे जाता है, तो मनोज तिवारी ने बिना किसी हिचकिचाहट के खुद को भोजपुरी के तीसरे दौर का मार्गदर्शक घोषित कर दिया।

    उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके आने से पहले रवि किशन सहित कई अन्य कलाकार इस फिल्म जगत में सक्रिय तो थे, लेकिन वे कोई खास प्रभाव छोड़ने या इस सिनेमा को एक मुनाफे वाले उद्योग में बदलने में पूरी तरह से असफल साबित हो रहे थे।

    इस वैचारिक जंग में अपने पक्ष को मजबूती से रखने के लिए मनोज तिवारी ने अपनी ऐतिहासिक फिल्म के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों का भी खुलकर हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उनकी बेहद चर्चित फिल्म ने मात्र तीस लाख रुपए के अत्यंत सीमित बजट में बनकर रिकॉर्ड तोड़ कमाई का इतिहास रचा था, जिसने न केवल पूरे देश का ध्यान इस क्षेत्रीय सिनेमा की तरफ आकर्षित किया बल्कि इसी एकलौती फिल्म की ऐतिहासिक सफलता के बाद से भोजपुरी में लगभग दो हजार नई फिल्मों के निर्माण का रास्ता साफ हुआ। अपनी बात को और अधिक आक्रामक मोड़ देते हुए उन्होंने समकालीन कलाकारों की उस दौर की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी की।

    उन्होंने दावा किया कि जब वे सफलता के शिखर पर थे और बतौर मुख्य अभिनेता फिल्मों के लिए प्रतिदिन के हिसाब से एक से डेढ़ लाख रुपए तक की भारी-भरकम फीस ले रहे थे, उस दौर में रवि किशन को पूरी फिल्म के काम के एवज में केवल पच्चीस हजार रुपए ही मिलते थे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि उन्होंने ही इन सभी कलाकारों को यह सिखाया कि किस प्रकार फिल्म उद्योग में अपनी कड़ी मेहनत के लिए सही और बड़ा पारिश्रमिक मांगा जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।

    हालांकि, वर्तमान परिदृश्य की बात करते हुए मनोज तिवारी ने यह भी साफ किया कि समय के साथ अब उनके आपसी संबंधों में काफी बदलाव आ चुका है। वर्तमान में दोनों ही दिग्गज कलाकार भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं और एक ही दल में होने के कारण अब उनके बीच पहले जैसी सीधे तौर पर कोई व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता नहीं बची है। वे दोनों अब अच्छे मित्र के रूप में एक-दूसरे के साथ खड़े दिखाई देते हैं और राजनीतिक रैलियों तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक मंच भी साझा करते हैं।

    परंतु, जब बात भोजपुरी सिनेमा को देश-दुनिया में असली पहचान दिलाने और उसकी रीढ़ बनने की आती है, तो दोनों के बीच की यह वैचारिक जंग और खुद को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी सालों पहले फिल्मों के बॉक्स ऑफिस क्लैश के दौरान हुआ करती थी। इस ताजा बयानबाजी ने यह साफ कर दिया है कि भले ही समय बदल गया हो और दोनों के रास्ते राजनीति में आकर मिल गए हों, लेकिन भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में अपना नाम सबसे ऊपर दर्ज कराने की यह लड़ाई इतनी जल्दी शांत होने वाली नहीं है।

  • ज्येष्ठ मास में आठ साल बाद बना महासंयोग, 'ब्लू मून' और 'माइक्रोमून' के दुर्लभ मिलन से खुला सौभाग्य का द्वार

    ज्येष्ठ मास में आठ साल बाद बना महासंयोग, 'ब्लू मून' और 'माइक्रोमून' के दुर्लभ मिलन से खुला सौभाग्य का द्वार


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सनातन परंपरा और खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से वर्ष का एक अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण संयोग सामने आया है, जहां ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर कई अद्भुत ग्रह-नक्षत्रों की जुगलबंदी देखने को मिली है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार की ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पूरे आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आई है।
    यद्यपि हिंदू पंचांग में अधिकमास की आवृत्ति अमूमन हर तीन वर्ष में हो जाती है, परंतु इसका विशेष रूप से ज्येष्ठ के महीने में आना एक विरल घटना मानी जाती है, जो इससे पूर्व वर्ष 2018 में देखी गई थी। इस बार इस धार्मिक तिथि के साथ कुछ विशेष खगोलीय घटनाएं भी जुड़ गई हैं, जिन्होंने इसके महत्व को कई गुना बढ़ा दिया है।
    मई के महीने में ही दो पूर्णिमा तिथियों के आने के कारण इस चांद को विज्ञान की भाषा में ‘ब्लू मून’ का नाम दिया गया है, जो एक अनूठी प्राकृतिक घटना है। इसके अतिरिक्त, इस समय चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी पर स्थित है, जिसके कारण आकार में यह सामान्य से थोड़ा छोटा दिखाई दे रहा है और वैज्ञानिक शब्दावली में इसे ‘माइक्रोमून’ की संज्ञा दी जा रही है। इस प्रकार धार्मिक आस्था और आधुनिक विज्ञान का यह अनूठा संगम जनमानस के लिए विशेष कौतूहल और कल्याणकारी प्रभाव लेकर आया है।

    पंचांगीय गणना के अनुसार यह विशेष तिथि शनिवार सुबह ग्यारह बजकर अट्ठावन मिनट से प्रारंभ होकर रविवार दोपहर दो बजकर चौदह मिनट तक प्रभावी रही, जिसके चलते उदयातिथि की महत्ता को देखते हुए रविवार को स्नान और दान की पूर्णिमा के रूप में पूर्ण विधि-विधान से मनाया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष कालखंड में पवित्र नदियों में स्नान करने और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की आराधना करने से मनुष्य के जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के आर्थिक संकटों का समूल नाश होता है और बंद किस्मत के दरवाजे पूरी तरह से खुल जाते हैं।

    देश के विभिन्न हिस्सों में सुबह से ही पवित्र घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई, जहां लोगों ने आस्था की डुबकी लगाकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया और अपने परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। इस पावन अवसर पर किए जाने वाले कुछ विशेष उपायों और दान-पुण्य को सीधे तौर पर व्यक्ति की आय में वृद्धि और भाग्य्योदय से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इस महासंयोग के दौरान जरूरतमंदों, निर्धनों और ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देना अक्षय पुण्य फल प्रदाता माना गया है। चूंकि ज्येष्ठ का महीना भीषण गर्मी और तपन के लिए जाना जाता है, इसलिए इस समय ठंडी और शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं का दान ग्रहों के दोष को शांत करने में सहायक होता है। इस दिन आम, खरबूज और तरबूज जैसे रसीले फलों का दान करने से कुंडली में सूर्य और मंगल ग्रह से जुड़े तमाम विकार दूर होते हैं और व्यक्ति के तेज में वृद्धि होती है।

    इसके अलावा, इस तपन भरे मौसम में जल का दान महादान की श्रेणी में रखा गया है, जिसके अंतर्गत राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना, मिट्टी के घड़ों का वितरण करना, शीतल शरबत पिलाना और बेजुबान पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना सर्वोत्तम परोपकार माना गया है। मौसम की तीव्रता को देखते हुए समाज के वंचित वर्गों को जूते, चप्पल और छाते जैसी आवश्यक सामग्रियां भेंट करना भी आने वाले समय में समृद्धि के मार्ग प्रशस्त करता है। ज्योतिषविदों का मानना है कि इस दुर्लभ संयोग में श्रद्धापूर्वक किया गया अन्न और वस्त्र का दान माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रसन्न करता है, जिससे न केवल आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है बल्कि व्यापार और नौकरी में भी उन्नति के नए अवसर प्राप्त होते हैं।
  • सैनिकों की कमी के बीच यूक्रेन का टेक्नोलॉजी दांव, ड्रोन-रोबोट से रूस को दे रहा करारा जवाब

    सैनिकों की कमी के बीच यूक्रेन का टेक्नोलॉजी दांव, ड्रोन-रोबोट से रूस को दे रहा करारा जवाब


    नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब केवल सैनिकों और हथियारों की लड़ाई नहीं रह गया है बल्कि यह तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ताकत का भी बड़ा प्रदर्शन बन चुका है। युद्ध के चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुके इस संघर्ष में यूक्रेन ने सैनिकों की कमी से निपटने के लिए ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब युद्ध के मैदान में बड़ी संख्या में रोबोट और ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं जो दुश्मन के लिए ‘साइलेंट डेथ’ साबित हो रहे हैं।

    जब रूस ने वर्ष 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था तब दुनिया को उम्मीद थी कि यह युद्ध जल्द समाप्त हो जाएगा। लेकिन यूक्रेन के मजबूत प्रतिरोध ने हालात बदल दिए। लगातार जारी संघर्ष के कारण यूक्रेन के सामने प्रशिक्षित सैनिकों की कमी की चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे समय में देश ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया और युद्ध की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया। अब हथियारों और विस्फोटकों से लैस ड्रोन तथा रोबोट रूसी ठिकानों पर सटीक हमले कर रहे हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार इन अत्याधुनिक मशीनों को हजारों किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थानों से संचालित किया जा रहा है। पहले दुश्मन की गतिविधियों और ठिकानों की पहचान की जाती है और फिर बेहद सटीक तरीके से हमले को अंजाम दिया जाता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि केवल इस वर्ष जनवरी महीने में ही 22 हजार से अधिक ड्रोन और रोबोट युद्ध अभियानों में शामिल किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में यूक्रेनी बलों ने बिना किसी सैनिक को सीधे युद्धक्षेत्र में भेजे केवल रोबोट और ड्रोन की मदद से रूसी पोजीशन पर कब्जा कर लिया।

    इन मशीनों की भूमिका केवल हमलों तक सीमित नहीं है। युद्धक्षेत्र में हथियार पहुंचाने से लेकर भोजन और पानी की आपूर्ति तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां अब रोबोट निभा रहे हैं। घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जोखिम वाले इलाकों में बचाव कार्य करने में भी इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इससे सैनिकों की जान बचाने में मदद मिल रही है और युद्ध संचालन अधिक प्रभावी बन रहा है।

    यूक्रेन ने कुछ रोबोटिक सिस्टम को हैवी मशीनगनों से लैस किया है। ये कई दिनों तक छिपे रहकर निगरानी कर सकते हैं और अवसर मिलते ही हमला बोल सकते हैं। इस तकनीकी अभियान में युवा प्रोग्रामर और इंजीनियर भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे संचार व्यवस्था नेविगेशन सॉफ्टवेयर और काउंटर जैमिंग तकनीक को लगातार बेहतर बना रहे हैं ताकि रूसी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली का मुकाबला किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन ने समय रहते ड्रोन और रोबोट तकनीक में निवेश कर बड़ा रणनीतिक लाभ हासिल किया है। एक अनुमान के अनुसार केवल 164 रोबोटों ने ऐसे परिणाम दिए हैं जिनके लिए सामान्य परिस्थितियों में हजारों सैनिकों की आवश्यकता पड़ती। युद्ध के अनुभवी सैनिक भी मानते हैं कि यदि संघर्ष की शुरुआत में यह तकनीक उपलब्ध होती तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। यूक्रेन का यह मॉडल आने वाले समय में दुनिया भर के युद्धों की दिशा और स्वरूप बदल सकता है जहां मशीनें मोर्चे पर होंगी और मानव जीवन का जोखिम कम होगा।

  • IPL 2026: चैंपियन RCB की हुई करोड़ों की कमाई, GT भी मालामाल, जानिए किसे मिला कौन सा अवॉर्ड

    IPL 2026: चैंपियन RCB की हुई करोड़ों की कमाई, GT भी मालामाल, जानिए किसे मिला कौन सा अवॉर्ड

    अहमदाबाद। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का खिताब अपने नाम करने वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) पर इनामों की जमकर बारिश हुई। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में आरसीबी ने गुजरात टाइटन्स (GT) को 5 विकेट से हराकर ट्रॉफी अपने नाम की। इसके बाद आयोजित अवॉर्ड सेरेमनी में विजेता और उपविजेता टीमों के साथ-साथ पूरे सीजन में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया।

    रजत पाटीदार की कप्तानी में आरसीबी ने लगातार दूसरी बार आईपीएल ट्रॉफी जीतते हुए इतिहास रच दिया, जबकि गुजरात टाइटन्स का दूसरा खिताब जीतने का सपना अधूरा रह गया।

    विजेता और उपविजेता टीमों को कितनी मिली प्राइज मनी?
    आईपीएल 2026 में शीर्ष चार टीमों को करोड़ों रुपये की पुरस्कार राशि दी गई।

    चैंपियन – रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु: 20 करोड़ रुपये
    रनर-अप – गुजरात टाइटन्स: 12.50 करोड़ रुपये
    तीसरा स्थान – राजस्थान रॉयल्स: 7 करोड़ रुपये
    चौथा स्थान – सनराइजर्स हैदराबाद: 6.50 करोड़ रुपये

    सीजन के सबसे बड़े स्टार बने वैभव सूर्यवंशी

    राजस्थान रॉयल्स के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने पूरे सीजन में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई बड़े अवॉर्ड अपने नाम किए।

    प्रमुख व्यक्तिगत पुरस्कार
    ऑरेंज कैप (सबसे ज्यादा रन): वैभव सूर्यवंशी – 776 रन, 10 लाख रुपये
    पर्पल कैप (सबसे ज्यादा विकेट): कगिसो रबाडा – 29 विकेट, 10 लाख रुपये
    इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन: वैभव सूर्यवंशी – 10 लाख रुपये
    मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर: 15 लाख रुपये
    सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन: वैभव सूर्यवंशी – टाटा सिएरा कार
    सबसे ज्यादा छक्के: वैभव सूर्यवंशी (72 छक्के) – 10 लाख रुपये
    सबसे ज्यादा डॉट बॉल: मोहम्मद सिराज – 10 लाख रुपये
    बेस्ट कैच ऑफ द सीजन: मनीष पांडे – 10 लाख रुपये
    सबसे ज्यादा चौके: साई सुदर्शन (75 चौके) – 10 लाख रुपये

    ## अन्य विशेष सम्मान

    फेयर प्ले अवॉर्ड: पंजाब किंग्स
    पिच एंड ग्राउंड अवॉर्ड: ईडन गार्डन्स – 50 लाख रुपये

    ## फाइनल मुकाबले के स्टार खिलाड़ी

    फाइनल में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी विशेष पुरस्कार दिए गए।

    प्लेयर ऑफ द मैच: विराट कोहली
    सुपर स्ट्राइकर ऑफ द मैच: वेंकटेश अय्यर
    सुपर सिक्सेस ऑफ द मैच: विराट कोहली
    ऑन द गो-4s ऑफ द मैच: विराट कोहली
    ग्रीन डॉट बॉल ऑफ द मैच: भुवनेश्वर कुमार

    IPL 2026 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज

    1. वैभव सूर्यवंशी (राजस्थान रॉयल्स) – 776 रन
    2. शुभमन गिल (गुजरात टाइटन्स) – 732 रन
    3. साई सुदर्शन (गुजरात टाइटन्स) – 722 रन
    4. विराट कोहली (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु) – 675 रन
    5. हेनरिक क्लासेन (सनराइजर्स हैदराबाद) – 624 रन

    IPL 2026 में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज

    1. कगिसो रबाडा (गुजरात टाइटन्स) – 29 विकेट
    2. भुवनेश्वर कुमार (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु) – 28 विकेट
    3. जोफ्रा आर्चर (राजस्थान रॉयल्स) – 25 विकेट
    4. राशिद खान (गुजरात टाइटन्स) – 21 विकेट
    5. अंशुल कम्बोज (चेन्नई सुपर किंग्स) – 21 विकेट

    IPL 2026 में जहां आरसीबी ने ट्रॉफी जीतकर अपना दबदबा कायम रखा, वहीं वैभव सूर्यवंशी पूरे टूर्नामेंट के सबसे चर्चित और सफल खिलाड़ी बनकर उभरे। बल्लेबाजी, स्ट्राइक रेट और छक्कों के मामले में उनका प्रदर्शन इस सीजन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा।

  • जून 2026 का राशिफल: इन राशियों की चमकेगी किस्मत, मिलेगा आर्थिक लाभ, जानें सभी 12 राशियों का हाल

    जून 2026 का राशिफल: इन राशियों की चमकेगी किस्मत, मिलेगा आर्थिक लाभ, जानें सभी 12 राशियों का हाल


    नई दिल्ली।
    जून 2026 ग्रह-नक्षत्रों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण महीना माना जा रहा है। इस दौरान कई प्रमुख व्रत-त्योहारों के साथ बड़े ग्रहों का राशि परिवर्तन भी होगा, जिसका असर सभी 12 राशियों के जीवन पर देखने को मिलेगा। विशेष रूप से 2 जून को देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में प्रवेश, 8 जून को शुक्र गोचर, 15 जून को सूर्य का मिथुन राशि में आगमन और 21 जून को मंगल का राशि परिवर्तन कई राशियों के लिए नए अवसर लेकर आएगा।

    इन राशियों की आर्थिक स्थिति होगी मजबूत

    वृषभ राशि
    जून का महीना आर्थिक दृष्टि से बेहद लाभकारी रह सकता है। पुराने निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने के संकेत हैं। रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना बनेगी। संपत्ति खरीदने के लिए भी समय अनुकूल रहेगा। नौकरी और व्यवसाय दोनों क्षेत्रों में स्थिरता और लाभ के योग बन रहे हैं।

    कर्क राशि
    बृहस्पति के राशि परिवर्तन का सबसे अधिक लाभ कर्क राशि वालों को मिल सकता है। धन, सम्मान और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और नई योजनाओं में सफलता मिलने की संभावना है। करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

    तुला राशि
    तुला राशि वालों के लिए जून ऊर्जा और प्रगति लेकर आएगा। निवेश से लाभ मिलने के संकेत हैं। नौकरी और व्यापार में नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और आय के नए स्रोत भी बन सकते हैं।

    अन्य राशियों का मासिक हाल

    मेष राशि
    करियर में नए अवसर मिलेंगे और मेहनत का उचित फल प्राप्त होगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए समय अनुकूल रहेगा। स्वास्थ्य संबंधी छोटी परेशानियों से सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
    उपाय: प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें।

    मिथुन राशि

    कार्यस्थल पर मेहनत बढ़ानी होगी। मीडिया, लेखन और संचार क्षेत्र से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। 15 जून के बाद धन लाभ के योग मजबूत होंगे।
    उपाय: शिव मंदिर में जल अर्पित करें।

    सिंह राशि
    यात्राओं से लाभ मिलने की संभावना है। करियर में धीरे-धीरे सुधार होगा, लेकिन जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय लेने से बचें। खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखना आवश्यक होगा।
    उपाय: प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य दें।

    कन्या राशि
    करियर में उन्नति और पदोन्नति के अवसर बन सकते हैं। आर्थिक लाभ मिलेगा, लेकिन खर्च और कर्ज से जुड़े मामलों में सतर्क रहने की आवश्यकता है।
    उपाय: ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।

    वृश्चिक राशि
    यह महीना अवसरों और चुनौतियों का मिश्रण रहेगा। आय बढ़ने के साथ खर्च भी बढ़ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, लेकिन मेहनत का लाभ मिलेगा।
    उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें।

    धनु राशि

    करियर में प्रगति के अवसर मिल सकते हैं, खासकर विदेश से जुड़े मामलों में सफलता मिलने की संभावना है। हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।
    उपाय: ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं गुरुवे नमः’ मंत्र का जाप करें।

    मकर राशि
    माह सामान्य परिणाम देने वाला रहेगा। कार्यों में देरी और रिश्तों में तनाव की स्थिति बन सकती है। आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
    उपाय: शनिवार को जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

    कुंभ राशि

    रिश्तों और आर्थिक मामलों में सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी। बचत करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है और कार्यक्षेत्र में कुछ बाधाएं आ सकती हैं।
    उपाय: शिव मंदिर में जल चढ़ाएं।

    मीन राशि
    खर्चों में बढ़ोतरी और मानसिक दबाव महसूस हो सकता है। करियर में चुनौतियां रहेंगी, लेकिन धैर्य और समझदारी से परिस्थितियों को संभाला जा सकता है।
    उपाय: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।

    जून के प्रमुख ग्रह परिवर्तन

    2 जून: बृहस्पति का कर्क राशि में प्रवेश
    8 जून: शुक्र का कर्क राशि में गोचर
    15 जून: सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश
    21 जून: मंगल का राशि परिवर्तन

    ज्योतिषीय दृष्टि से यह महीना कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति, करियर ग्रोथ और नए अवसर लेकर आ सकता है, जबकि कुछ राशियों को धैर्य और सतर्कता के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी गई है।

  • MP में 20-22 जून के बीच दस्‍तक दे सकता है मानसून, अगले 4 दिन रहेगा आंधी-बारिश का दौर

    MP में 20-22 जून के बीच दस्‍तक दे सकता है मानसून, अगले 4 दिन रहेगा आंधी-बारिश का दौर

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन को लेकर मौसम विभाग ने नया अनुमान जारी किया है। इस बार प्रदेश में मानसून सामान्य समय से 5 से 7 दिन की देरी से पहुंच सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक 20 से 22 जून के बीच होने की संभावना है। वहीं, मानसून आने से पहले प्रदेशभर में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी रहेगा।

    धार-खरगोन में रेड अलर्ट

    मौसम विभाग ने सोमवार को धार और खरगोन जिलों के लिए ओलावृष्टि और तेज बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में आंधी, गरज-चमक, बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का यही मिजाज बना रहेगा।

    नौतपा की तपिश पर बारिश भारी
    नौतपा के सातवें दिन भी प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। लगातार बदलते मौसम के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को प्रदेश का सर्वाधिक तापमान शाजापुर में 41.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    बड़े शहरों में तापमान में गिरावट
    प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी गर्मी का असर कम हुआ है-
    इंदौर – 36.3 डिग्री सेल्सियस
    जबलपुर – 36.4 डिग्री सेल्सियस
    ग्वालियर – 37.5 डिग्री सेल्सियस
    उज्जैन – 37.5 डिग्री सेल्सियस
    भोपाल – 38 डिग्री सेल्सियस

    शाजापुर, राजगढ़ और नरसिंहपुर को छोड़ अधिकांश जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।

    मई में गर्मी भी रिकॉर्ड, बारिश भी ज्यादा
    मई माह में प्रदेश ने दो तरह के मौसम का अनुभव किया। महीने की शुरुआत आंधी और बारिश से हुई, जबकि 18 मई के बाद भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया। इस दौरान खजुराहो में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। 25 मई से शुरू हुए नौतपा के दौरान भी प्रदेश का कोई न कोई जिला आंधी और बारिश से प्रभावित रहा। महीने के अंतिम दिनों में कई जिलों में ओलावृष्टि भी हुई।

    औसत से अधिक हुई मई की बारिश
    मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार मई महीने में प्रदेश में करीब सवा इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में लगभग पौन इंच वर्षा होती है। यानी इस बार औसत से करीब 56 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। हालांकि जून में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि इस बार प्रदेश में मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत का करीब 90 प्रतिशत रह सकती है।

    अगले चार दिन कैसा रहेगा मौसम?
    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 1 से 4 जून तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहेंगी। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। लगातार बारिश के कारण दिन और रात के तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।

  • बढ़ते स्क्रीन टाइम के दौर में आंखों की सुरक्षा का आधार बना विटामिन-ए, विशेषज्ञों ने दी संतुलित आहार की सलाह

    बढ़ते स्क्रीन टाइम के दौर में आंखों की सुरक्षा का आधार बना विटामिन-ए, विशेषज्ञों ने दी संतुलित आहार की सलाह

    नई दिल्ली । आधुनिक जीवनशैली में तेजी से बढ़ते स्क्रीन टाइम और अनियमित खान-पान का असर अब लोगों की आंखों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप और टेलीविजन के सामने लंबे समय तक समय बिताने के कारण आंखों में थकान, सूखापन, जलन, धुंधला दिखाई देना और दृष्टि कमजोर होने जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आंखों की बेहतर देखभाल केवल बाहरी उपायों से नहीं बल्कि संतुलित और पौष्टिक आहार से भी संभव है। विशेष रूप से विटामिन-ए को आंखों की सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में शामिल किया जाता है, जो दृष्टि को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार विटामिन-ए आंखों की रेटिना के सामान्य कार्य में मदद करता है और कम रोशनी या रात के समय देखने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में योगदान देता है। इसके अलावा यह आंखों को संक्रमण और अन्य कई समस्याओं से बचाने में भी सहायक माना जाता है। शरीर में विटामिन-ए की कमी होने पर दृष्टि संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं, इसलिए नियमित रूप से इस पोषक तत्व से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन आवश्यक माना जाता है।

    आहार विशेषज्ञों का कहना है कि गाजर विटामिन-ए का सबसे लोकप्रिय और प्रभावी स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन-ए में परिवर्तित होता है, जो आंखों की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद करता है। नियमित रूप से गाजर का सेवन करने से आंखों को आवश्यक पोषण मिलता है और दृष्टि संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम करने में सहायता मिल सकती है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां भी आंखों की सेहत के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती हैं। पालक, मेथी, सरसों और अन्य हरी सब्जियों में विटामिन-ए के साथ कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आंखों के साथ-साथ पूरे शरीर को पोषण प्रदान करते हैं। इनका नियमित सेवन आंखों को स्वस्थ रखने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मददगार माना जाता है।

    मौसमी फलों में आम भी विटामिन-ए का अच्छा स्रोत है। गर्मियों के मौसम में इसका संतुलित सेवन शरीर को ऊर्जा देने के साथ आंखों के लिए आवश्यक पोषण भी प्रदान करता है। इसके अलावा दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे दही, पनीर और छाछ में भी विटामिन-ए पाया जाता है, जो आंखों की देखभाल में उपयोगी माना जाता है।

    विशेषज्ञों का सुझाव है कि केवल पोषण पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आंखों को आराम देना भी जरूरी है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने के दौरान नियमित अंतराल पर आंखों को विश्राम देना चाहिए। 20-20-20 नियम अपनाना लाभदायक माना जाता है, जिसके तहत हर 20 मिनट बाद लगभग 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखने की सलाह दी जाती है। यह आंखों पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोगों को अपने दैनिक भोजन में विटामिन-ए युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। सही पोषण, संतुलित जीवनशैली और आंखों की नियमित देखभाल के माध्यम से लंबे समय तक बेहतर दृष्टि और स्वस्थ आंखों को बनाए रखा जा सकता है। छोटी-छोटी सावधानियां भविष्य में बड़ी समस्याओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

  • 40 के बाद हड्डियों की कमजोरी से बचना है तो डाइट में शामिल करें ये पोषण से भरपूर चीजें

    40 के बाद हड्डियों की कमजोरी से बचना है तो डाइट में शामिल करें ये पोषण से भरपूर चीजें

    नई दिल्ली । बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई प्रकार के प्राकृतिक बदलाव होने लगते हैं, जिनमें हड्डियों की मजबूती में कमी सबसे प्रमुख समस्याओं में से एक मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार 40 वर्ष की आयु के बाद शरीर की बोन डेंसिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे हड्डियां पहले की तुलना में अधिक कमजोर और संवेदनशील हो सकती हैं। महिलाओं में यह स्थिति मेनोपॉज के बाद और अधिक तेजी से विकसित हो सकती है। हालांकि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।

    हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में कैल्शियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यही कारण है कि दूध और दूध से बने उत्पादों को बोन हेल्थ के लिए सबसे उपयोगी खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। दूध, दही, पनीर और छाछ जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को पर्याप्त कैल्शियम उपलब्ध कराते हैं, जो हड्डियों के निर्माण और उनकी मजबूती बनाए रखने में मदद करता है। नियमित रूप से इनका सेवन करने से उम्र बढ़ने के बावजूद हड्डियों की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां भी बोन हेल्थ के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती हैं। पालक, मेथी, सरसों और बथुआ जैसी सब्जियों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन K जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये सभी तत्व हड्डियों के विकास और उनकी संरचना को मजबूत बनाए रखने में योगदान देते हैं। दैनिक भोजन में हरी सब्जियों को शामिल करने से शरीर को प्राकृतिक रूप से आवश्यक पोषण प्राप्त होता है।

    ड्राई फ्रूट्स भी हड्डियों को मजबूती देने वाले महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थों में शामिल हैं। बादाम, अखरोट और अंजीर जैसे सूखे मेवों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और कई अन्य आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। सीमित मात्रा में इनका नियमित सेवन न केवल हड्डियों बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है।

    तिल के बीज भी कैल्शियम का समृद्ध स्रोत माने जाते हैं। कम मात्रा में सेवन करने पर भी तिल शरीर को पर्याप्त पोषण प्रदान कर सकता है। इसे सलाद, चटनी या अन्य व्यंजनों के माध्यम से आहार में शामिल किया जा सकता है। पारंपरिक भारतीय खानपान में तिल का उपयोग लंबे समय से हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखा जाता रहा है।

    विटामिन डी भी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए उतना ही आवश्यक है जितना कैल्शियम। फैटी फिश में विटामिन डी और ओमेगा-3 फैटी एसिड अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो कैल्शियम के अवशोषण को बेहतर बनाते हैं। जो लोग मछली का सेवन नहीं करते, वे विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों और नियमित धूप के माध्यम से इसकी आवश्यकता पूरी कर सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल खानपान ही नहीं, बल्कि रोजाना हल्की एक्सरसाइज, नियमित वॉक, पर्याप्त पानी का सेवन और संतुलित प्रोटीन युक्त आहार भी हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं धूम्रपान, अत्यधिक शराब, अधिक नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड्स के सेवन से बचना भी जरूरी है। सही आदतों और संतुलित पोषण के माध्यम से बढ़ती उम्र में भी हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखा जा सकता है।