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  • पीएम मोदी से मुलाकात समेत कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे म्यांमार राष्ट्रपति, व्यापार सहयोग पर रहेगा जोर

    पीएम मोदी से मुलाकात समेत कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे म्यांमार राष्ट्रपति, व्यापार सहयोग पर रहेगा जोर

    नई दिल्ली । म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग शनिवार से भारत के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर हो रही इस यात्रा की शुरुआत बिहार के बोधगया से होगी, जो बौद्ध धर्म से जुड़े ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व का केंद्र है। यह दौरा न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को भी नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

    विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 1 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच सहयोग को और व्यापक बनाने पर चर्चा होगी। इस बातचीत में सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, अवसंरचना और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। भारत लंबे समय से अपनी पड़ोसी पहले नीति के तहत म्यांमार के साथ संबंधों को प्राथमिकता देता आया है और यह दौरा उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    इस यात्रा के दौरान म्यांमार के राष्ट्रपति एक बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जहां दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच निवेश और व्यापार अवसरों पर विचार-विमर्श होगा। उनके साथ आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारी नेता शामिल हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि यात्रा का फोकस केवल राजनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्थिक साझेदारी को भी विस्तार देने पर होगा।

    इसके अलावा 2 जून को राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग मुंबई का दौरा करेंगे, जहां वे उद्योग और व्यापार से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और साइट विजिट में भाग लेंगे। इस दौरान भारतीय और म्यांमार कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दौरे दोनों देशों के बीच निवेश माहौल को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    भारत और म्यांमार के संबंध ऐतिहासिक रूप से भी गहरे रहे हैं, क्योंकि दोनों देश न केवल पड़ोसी हैं बल्कि सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से भी जुड़े हुए हैं। भारत की एक्ट ईस्ट नीति और महासागर दृष्टिकोण के तहत म्यांमार को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा जाता है। इस यात्रा से क्षेत्रीय सहयोग, कनेक्टिविटी परियोजनाओं और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इससे पहले भी दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच कई स्तरों पर संवाद होता रहा है, जिससे आपसी विश्वास और सहयोग को मजबूती मिली है। मौजूदा दौरा इसी निरंतरता का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें भविष्य के सहयोग की दिशा तय होने की संभावना है।

  • पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    नई दिल्ली । देश में असंगठित क्षेत्र के आर्थिक सशक्तिकरण और शहरी गरीब तबके के लिए चलाई जा रही पीएम स्वनिधि योजना लगातार महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज कर रही है। इस योजना के तहत अब तक 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जा चुका है, जिससे रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के कारोबार में पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ी है। योजना के तहत किए गए प्रयासों का व्यापक असर यह रहा है कि लाभार्थियों द्वारा अब तक 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए गए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

    इस योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी, जिसका उद्देश्य छोटे और असंगठित व्यापारियों को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना था। समय के साथ यह योजना केवल ऋण सुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल समावेशन और वित्तीय साक्षरता का एक मजबूत माध्यम बन गई है। इसके तहत लाभार्थियों को तीन चरणों में ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को विस्तार दे सकें। योजना की खास बात यह है कि इसमें सरकारी गारंटी के साथ ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे बैंकों और लाभार्थियों दोनों का जोखिम कम होता है।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस योजना के लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थी पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़े हैं, जो देश में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसके साथ ही लाभार्थियों की औसत आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार देखा गया है। कई लाभार्थियों ने बेहतर आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक अपनी पहुंच को भी मजबूत किया है।

    डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इस योजना में कैशबैक प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं, जिसके तहत लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन पर वित्तीय लाभ दिया जाता है। इससे छोटे व्यापारी भी डिजिटल ट्रांजैक्शन अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं और देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। लगभग 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जो इस योजना की सामाजिक समावेशिता को दर्शाता है, जबकि बड़ी संख्या में लाभार्थी वंचित और कमजोर वर्गों से आते हैं।

    सरकार ने इस योजना की उपलब्धियों को देखते हुए इसके विस्तार की घोषणा की है, जिसके तहत इसे अब मार्च 2030 तक जारी रखा जाएगा। इससे अधिक से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को योजना का लाभ मिल सकेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। साथ ही, यूपीआई आधारित क्रेडिट कार्ड सुविधा भी योजना के अगले चरण में शामिल की गई है, जिससे छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सकेगी।

    कुल मिलाकर पीएम स्वनिधि योजना देश में सूक्ष्म ऋण प्रणाली और डिजिटल भुगतान के विस्तार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह न केवल आर्थिक मजबूती का माध्यम बन रही है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में भी प्रभावी साबित हो रही है।

  • सरकारी नौकरी अलर्ट: DRDO-RAC ने निकाली साइंटिस्ट भर्ती, 19 जून तक करें आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया

    सरकारी नौकरी अलर्ट: DRDO-RAC ने निकाली साइंटिस्ट भर्ती, 19 जून तक करें आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया


    नई दिल्ली ।
    देश की रक्षा अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी प्रमुख संस्था डीआरडीओ-आरएसी ने वैज्ञानिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो इंजीनियरिंग और विज्ञान क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 33 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिनमें वैज्ञानिक-ई, वैज्ञानिक-डी और वैज्ञानिक-सी स्तर के पद शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और योग्य उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    इस भर्ती में विभिन्न तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों के लिए पदों का वितरण किया गया है। वैज्ञानिक-ई के दो पदों में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग तथा मैकेनिकल, प्रोडक्शन और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए अवसर उपलब्ध हैं। इसके अलावा वैज्ञानिक-डी के 11 पद कंप्यूटर विज्ञान, एयरोस्पेस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, भौतिकी, रासायनिक इंजीनियरिंग और अन्य संबंधित क्षेत्रों के लिए निर्धारित किए गए हैं। वहीं वैज्ञानिक-सी के 20 पदों में इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, गणित, समुद्र विज्ञान, रिमोट सेंसिंग, फार्माकोलॉजी, फिजियोलॉजी और अन्य वैज्ञानिक विषयों से जुड़े उम्मीदवारों को मौका दिया गया है।

    इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषय में इंजीनियरिंग या विज्ञान में प्रथम श्रेणी स्नातक या मास्टर डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उम्मीदवारों के पास निर्धारित क्षेत्र में अनुभव और अन्य आवश्यक योग्यताएं भी होनी चाहिए, जो पद के अनुसार अलग-अलग तय की गई हैं। आयु सीमा की बात करें तो अधिकतम आयु 35 से 45 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है, जिसकी गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।

    चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्टिंग के बाद व्यक्तिगत साक्षात्कार, दस्तावेज़ सत्यापन और अन्य मूल्यांकन चरणों से गुजरना होगा। अंतिम चयन पूरी तरह से उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और इंटरव्यू प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार आकर्षक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो लगभग 67,700 रुपये से लेकर 1,23,100 रुपये प्रति माह तक होगा। यह वेतन सरकारी वैज्ञानिक पदों के स्तर के अनुसार तय किया गया है और इसके साथ अन्य भत्ते भी लागू हो सकते हैं।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है। उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आधिकारिक पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा और सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 100 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला उम्मीदवारों को शुल्क में छूट दी गई है।

    इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 19 जून तय की गई है और उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। यह अवसर उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो देश की रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं में वैज्ञानिक के रूप में योगदान देना चाहते हैं और एक प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान में करियर बनाना चाहते हैं।

  • राजधानी की जल आपूर्ति व्यवस्था पर हाई लेवल मीटिंग, सीएम रेखा गुप्ता ने तेज राहत और दीर्घकालिक योजना पर जोर

    राजधानी की जल आपूर्ति व्यवस्था पर हाई लेवल मीटिंग, सीएम रेखा गुप्ता ने तेज राहत और दीर्घकालिक योजना पर जोर

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच उत्पन्न जल संकट और पेयजल आपूर्ति की चुनौतियों को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार हर नागरिक तक पर्याप्त पेयजल पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही है और इसके लिए तत्काल राहत उपायों के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल वर्तमान संकट को संभालना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति को स्थायी रूप से नियंत्रित करना भी है, ताकि राजधानी में जल सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण जल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, लेकिन हरियाणा सरकार से मुनक नहर के माध्यम से न्यूनतम 1,000 क्यूसेक जल आपूर्ति बनाए रखने का आश्वासन मिला है, जिससे स्थिति को संतुलित रखने में मदद मिल रही है। इसके अलावा दिल्ली जल बोर्ड द्वारा 980 से अधिक जल टैंकरों के माध्यम से प्रतिदिन हजारों ट्रिप संचालित किए जा रहे हैं, ताकि घनी आबादी और संकरी गलियों वाले क्षेत्रों में भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने छोटे टैंकरों की तैनाती भी बढ़ाई है, जिससे दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सके।

    बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि यमुना में वजीराबाद क्षेत्र के पास जल स्तर में गिरावट के कारण आपूर्ति पर असर पड़ा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से चर्चा की, जिसके बाद जल आपूर्ति को बनाए रखने का आश्वासन प्राप्त हुआ। साथ ही यमुना खादर क्षेत्र में अतिरिक्त बोरवेल स्थापित कर प्रतिदिन 10.5 एमजीडी अतिरिक्त जल उत्पादन की क्षमता विकसित की गई है, जिससे आपूर्ति प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिली है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जल रिसाव और बर्बादी की घटनाओं को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए और कहा कि जल की हर बूंद मूल्यवान है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और अधिकारी स्वयं फील्ड में जाकर स्थिति का निरीक्षण करें। हाल के आंकड़ों के अनुसार जल बोर्ड हेल्पलाइन पर हजारों शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से अधिकांश का समाधान किया जा चुका है, जबकि शेष पर तेजी से कार्य जारी है।

    दीर्घकालिक समाधान के तहत सरकार पाइपलाइन आधारित जल आपूर्ति, नए जल शोधन संयंत्रों की स्थापना, यमुना की सफाई और डी-सिल्टिंग जैसे कार्यों पर भी तेजी से काम कर रही है। इसके साथ ही जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वर्षा जल संचयन संरचनाओं का विस्तार किया जा रहा है और ड्यूल वाटर सप्लाई सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है, ताकि शोधन जल का उपयोग गैर-पेय कार्यों में किया जा सके।

    मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर जोर देते हुए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि केवल आपूर्ति बढ़ाने से नहीं, बल्कि जिम्मेदार उपयोग और संरक्षण से ही जल संकट का स्थायी समाधान संभव है।

  • व्यापारी बनकर पहुंची पुलिस, खुल गया राज: केले की फसल के बीच चल रही थी गांजे की खेती

    व्यापारी बनकर पहुंची पुलिस, खुल गया राज: केले की फसल के बीच चल रही थी गांजे की खेती


    बुरहानपुर  बुरहानपुर जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत शाहपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने केले के खेत में छिपाकर की जा रही गांजे की खेती का भंडाफोड़ करते हुए 10.5 किलोग्राम गांजे के पौधे जब्त किए हैं। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी के निर्देशन में जिलेभर में अवैध मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत शाहपुर थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम बंडसिंगी में एक व्यक्ति अपने केले के खेत में अवैध रूप से गांजे की खेती कर रहा है।

    सूचना की पुष्टि के बाद थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की। पुलिसकर्मी केले के व्यापारी बनकर खेत तक पहुंचे ताकि किसी को शक न हो। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने खेत की जांच की, जहां केले की फसल के बीच गांजे के पौधे लगाए गए थे।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 40 वर्षीय संतोष पिता लक्ष्मण पाटील गुर्जर को हिरासत में लिया। खेत से गांजे के पांच हरे पौधे बरामद किए गए, जिनका कुल वजन लगभग 10 किलो 500 ग्राम पाया गया। पुलिस के अनुसार जब्त किए गए गांजे की अनुमानित बाजार कीमत करीब 50 हजार रुपये है।

    पूछताछ के दौरान आरोपी खेती से संबंधित कोई वैध अनुमति या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम की धारा 8/20 (ए) के तहत मामला दर्ज कर लिया।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी लंबे समय से इस गतिविधि में शामिल था या नहीं तथा कहीं उसका संबंध किसी बड़े नेटवर्क से तो नहीं है। आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस कार्रवाई में थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा के अलावा उपनिरीक्षक अजयसिंह चौहान, शैलेन्द्र तोमर, प्रधान आरक्षक गणेश पाटिल, मनोज मोरे और अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध नशे के कारोबार और मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि समाज को नशामुक्त बनाने के लिए ऐसी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • बुरहानपुर में वन्यजीवों का बढ़ता खतरा: भालू के हमले में किसान घायल, अस्पताल में भर्ती

    बुरहानपुर में वन्यजीवों का बढ़ता खतरा: भालू के हमले में किसान घायल, अस्पताल में भर्ती


    बुरहानपुर  बुरहानपुर जिले में वन्यजीवों और ग्रामीणों के बीच बढ़ता टकराव चिंता का विषय बनता जा रहा है। धूलकोट थाना क्षेत्र के धोंड गांव में शनिवार सुबह एक भालू ने 60 वर्षीय किसान पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल किसान का जिला अस्पताल में उपचार जारी है।

    जानकारी के अनुसार धोंड गांव निवासी रायसिंह पिता मानसिंह शनिवार सुबह अपने खेत पर गए हुए थे। सुबह करीब नौ बजे अचानक एक भालू उनके सामने आ गया और हमला कर दिया। हमले में किसान के पैर और जांघ पर गंभीर चोटें आईं। दर्द और डर के बीच किसान ने जोर-जोर से आवाज लगाई, जिसके बाद आसपास मौजूद ग्रामीण मौके की ओर दौड़े।

    ग्रामीणों के शोर मचाने और भीड़ जुटने पर भालू जंगल की ओर भाग गया। घटना की सूचना तत्काल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा को दी गई। 108 एंबुलेंस की टीम मौके पर पहुंची और घायल किसान को प्राथमिक उपचार प्रदान किया। बाद में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल बुरहानपुर रेफर कर दिया गया।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार भीषण गर्मी और जलस्रोतों के सूखने के कारण वन्यप्राणी जंगलों से बाहर निकलकर रिहायशी क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं। धूलकोट रेंज के अधिकारियों का कहना है कि पानी और भोजन की तलाश में भालू सहित अन्य वन्यजीव खेतों और गांवों के आसपास दिखाई दे रहे हैं, जिससे ऐसी घटनाओं की संभावना बढ़ गई है।

    गौरतलब है कि जिले में पिछले पांच दिनों के भीतर भालू के हमले की यह दूसरी घटना है। इससे पहले उतर्नी गांव में बकरियां चरा रहे एक ग्रामीण पर भी भालू ने हमला किया था। उस घटना में घायल व्यक्ति का उपचार जिला अस्पताल में किया गया था और उसकी हालत अब पहले से बेहतर बताई जा रही है।

    लगातार हो रही घटनाओं के बाद वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। विभाग की टीमें गांवों में पहुंचकर लोगों को जागरूक कर रही हैं और जंगलों या खेतों में अकेले न जाने की सलाह दे रही हैं। साथ ही सुबह और शाम के समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।

    वन विभाग ने ग्रामीणों से अनुरोध किया है कि यदि किसी क्षेत्र में भालू या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो तुरंत विभाग को सूचना दें और खुद उन्हें भगाने का प्रयास न करें। अधिकारियों का मानना है कि जनजागरूकता और सतर्कता से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

    फिलहाल घायल किसान का उपचार जारी है और वन विभाग क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है और लोग वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

  • कचरा निपटान यूनिट के विरोध में ग्रामीणों का हंगामा: डेढ़ घंटे तक रुका प्रशासनिक अमला

    कचरा निपटान यूनिट के विरोध में ग्रामीणों का हंगामा: डेढ़ घंटे तक रुका प्रशासनिक अमला


    बड़वानी । बड़वानी जिले में प्रस्तावित ट्रेंचिंग ग्राउंड को लेकर शनिवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब नगर पालिका की टीम जमीन सीमांकन और कब्जा प्रक्रिया के लिए मौके पर पहुंची। बंधान ग्राम के समीप आमलिया पानी क्षेत्र में कचरा निपटान यूनिट स्थापित किए जाने के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए और प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया।

    जानकारी के अनुसार नगर पालिका का अमला सीएमओ, इंजीनियरिंग टीम और अन्य अधिकारियों के साथ जेसीबी मशीन लेकर निर्धारित स्थल पर पहुंचा था। कार्रवाई की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध इतना बढ़ गया कि प्रशासनिक टीम को बड़वानी-सेंधवा मार्ग किनारे करीब डेढ़ घंटे तक रुकना पड़ा।

    ग्रामीणों ने ट्रेंचिंग ग्राउंड तक जाने वाले मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। सड़क पर पाइप और मोटरसाइकिलें खड़ी कर रास्ता बंद कर दिया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने परियोजना के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रशासन से कार्रवाई रोकने की मांग की। स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।

    ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित स्थल के आसपास पहले से ही आवासीय क्षेत्र विकसित हो रहा है। यहां पंचायत भवन, सामुदायिक भवन और पानी की टंकी जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण भी किया जा चुका है या निर्माणाधीन है। ऐसे में कचरा निपटान यूनिट बनने से पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा होने की आशंका है।

    ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी आपत्तियों और शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने उनकी बातों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। कई बार जनसुनवाई और अन्य प्रशासनिक मंचों पर मामला उठाने के बाद भी समाधान नहीं निकला। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि परियोजना के लिए आवश्यक स्थानीय सहमति भी नहीं ली गई है।

    स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बनने पर पुलिस ने मार्ग खाली कराया और निर्माण कार्य शुरू करवाया। इसके बाद क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई।

    तहसीलदार हितेंद्र भावसार ने बताया कि यहां कचरा निपटान यूनिट विकसित की जा रही है और इससे आसपास के ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। प्रशासन का कहना है कि परियोजना सार्वजनिक हित में है तथा सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।

    फिलहाल क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन ग्रामीणों का विरोध जारी है। प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर आगे भी चर्चा और समाधान की संभावनाएं बनी हुई हैं।

  • खंडवा में संवेदनशील मामला: गोवंश अवशेष मिलने के बाद तनाव, जांच में जुटी पुलिस

    खंडवा में संवेदनशील मामला: गोवंश अवशेष मिलने के बाद तनाव, जांच में जुटी पुलिस


    खंडवा| खंडवा जिले के मुंदवाड़ा ग्राम पंचायत अंतर्गत बड़ियातुला गांव में गोवंश के अवशेष मिलने के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई। शुक्रवार देर रात सामने आए इस मामले के बाद पुलिस और प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को हिरासत में लिया है और पूरे मामले की जांच जारी है।

    जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात करीब 11 बजे गांव के बाहर सड़क किनारे पॉलिथीन में भरे गोवंश के अवशेष फेंके जाने की सूचना मिली। इसी दौरान आसपास के गांवों के कुछ युवक मौके पर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवाओं को देखकर संदिग्ध लोग वहां से भाग निकले और अपनी एक बाइक मौके पर छोड़ गए।

    घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में लोगों की भीड़ जमा हो गई। आक्रोशित लोगों ने मौके पर मौजूद कुछ वाहनों में तोड़फोड़ कर दी। सूचना मिलने पर पुलिस अधिकारी और बल तत्काल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने घटनास्थल से गोवंश के अवशेष और एक बाइक जब्त कर ली है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने रातभर जांच और तलाशी अभियान चलाया। शनिवार सुबह तड़के एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की गई है और चार आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों का पता लगाया जा सके।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जा रही है। जांच के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

    घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पुलिस लगातार निगरानी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अवांछित गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, हालांकि एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन लोगों से संयम बरतने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील कर रहा है।

  • खंडवा में मौसम ने ली करवट: ओंकारेश्वर-हरसूद में झमाझम बारिश, नौतपा की तपिश से मिली राहत

    खंडवा में मौसम ने ली करवट: ओंकारेश्वर-हरसूद में झमाझम बारिश, नौतपा की तपिश से मिली राहत


    खंडवा । खंडवा जिले में नौतपा के पांचवें दिन शनिवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। सुबह करीब साढ़े आठ बजे आसमान में बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ ओंकारेश्वर, मोरटक्का, हरसूद, रोशनी-पटाजन और खालवा क्षेत्र में झमाझम बारिश शुरू हो गई। करीब आधे घंटे तक हुई बारिश ने पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और लू से लोगों को बड़ी राहत पहुंचाई।

    बारिश के साथ चली ठंडी हवाओं से मौसम सुहावना हो गया और तापमान में भी गिरावट महसूस की गई। नौतपा के दौरान लगातार बढ़ रही गर्मी से लोग परेशान थे, लेकिन शनिवार सुबह हुई बारिश ने जनजीवन को राहत दी। कई क्षेत्रों में लोगों ने घरों से बाहर निकलकर मौसम का आनंद लिया।

    मौसम विशेषज्ञ डॉ. सौरव गुप्ता के अनुसार यह बारिश प्री-मानसून गतिविधि का हिस्सा नहीं है, बल्कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण हुई है। उन्होंने बताया कि इस बदलाव से लू का असर कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन गर्मी का दौर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में तापमान में धीरे-धीरे कमी दर्ज की जा सकती है।

    शुक्रवार को जिले का अधिकतम तापमान 42.1 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। मौसम विभाग का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    विशेषज्ञों ने लोगों को गर्मी और लू से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और हल्के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। साथ ही नींबू पानी, छाछ और ओआरएस जैसे पेय पदार्थों का सेवन करते रहने को कहा गया है।

    डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि तेज बुखार, चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की भी सलाह दी गई है।

    बारिश के बाद जिले में मौसम फिलहाल सुहावना बना हुआ है और लोगों को नौतपा की तपिश से अस्थायी राहत मिली है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

  • खरगोन में बड़ा अग्निकांड: कपड़े, ज्वेलरी और फर्नीचर जलकर खाक, दमकल ने दो घंटे बाद पाया काबू

    खरगोन में बड़ा अग्निकांड: कपड़े, ज्वेलरी और फर्नीचर जलकर खाक, दमकल ने दो घंटे बाद पाया काबू


    खरगोन । खरगोन शहर के गायत्री मंदिर क्षेत्र स्थित एक शॉपिंग मॉल में शनिवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक कपड़ा शोरूम से अचानक धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और शोरूम में रखा लाखों रुपये का सामान उसकी चपेट में आ गया। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

    जानकारी के अनुसार आग गायत्री मंदिर क्षेत्र स्थित शॉपिंग मॉल के मल्टी मार्ट कपड़ा शोरूम में लगी। सुबह के समय जब अधिकांश दुकानें बंद थीं, तभी शोरूम की ऊपरी मंजिल से धुआं निकलता दिखाई दिया। मेन रोड से गुजर रहे लोगों ने स्थिति को गंभीर देखते हुए तत्काल शोरूम संचालक अब्दुल लतीफ और नगरपालिका के फायर ब्रिगेड विभाग को सूचना दी। कुछ ही मिनटों में मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। शोरूम संचालक अब्दुल लतीफ का कहना है कि अलसुबह किसी विद्युत खराबी के कारण आग भड़की होगी, जिसने धीरे-धीरे पूरे शोरूम को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगते ही शोरूम में रखे रेडीमेड कपड़े, पैकिंग कार्टून, प्लास्टिक का सामान, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, फर्नीचर और अन्य सामग्री जलने लगी। आग के साथ उठ रहे घने धुएं ने राहत कार्य को और कठिन बना दिया।

    दमकल कर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती शोरूम में प्रवेश करने की थी। भवन में इमरजेंसी गेट की व्यवस्था नहीं होने के कारण अंदर पहुंचना मुश्किल हो गया। ऐसे में दमकल दल ने जेसीबी मशीन की मदद से पहली मंजिल के कांच तोड़कर भीतर जाने का रास्ता बनाया। इसके बाद फायर फाइटर्स ने लगातार पानी की बौछार कर आग को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया।

    करीब दो घंटे तक चले अभियान के दौरान दमकलकर्मियों ने आग को अन्य हिस्सों में फैलने से रोकने में सफलता हासिल की। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो यह आसपास की दुकानों और पूरे मॉल को भी अपनी चपेट में ले सकती थी। राहत की बात यह रही कि घटना सुबह के समय हुई, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

    प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस अग्निकांड में लगभग 10 लाख रुपये के नुकसान की आशंका है। शोरूम में रखा अधिकांश माल पूरी तरह जलकर राख हो गया है। घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों ने भी भवनों में सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाई है।

    यह हादसा एक बार फिर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी उपायों की आवश्यकता को उजागर करता है। इमरजेंसी गेट जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव न केवल राहत कार्य में बाधा बनता है, बल्कि किसी बड़े हादसे की स्थिति में जान-माल का नुकसान भी बढ़ा सकता है। फिलहाल प्रशासन और फायर विभाग आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच में जुटे हैं।