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  • गर्भावस्था में क्यों जरूरी है फोलिक एसिड? जानिए ‘प्रेग्नेंसी विटामिन’ का पूरा महत्व..

    गर्भावस्था में क्यों जरूरी है फोलिक एसिड? जानिए ‘प्रेग्नेंसी विटामिन’ का पूरा महत्व..

    नई दिल्ली। गर्भावस्था का समय महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण माना जाता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनका सीधा असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों पर पड़ता है। ऐसे में संतुलित और पोषक आहार की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। इन्हीं पोषक तत्वों में फोलिक एसिड को विशेष स्थान दिया जाता है, जिसे अक्सर “प्रेग्नेंसी का विटामिन” कहा जाता है।

    फोलिक एसिड, विटामिन बी-9 का एक सिंथेटिक रूप है, जबकि इसका प्राकृतिक स्रोत फोलेट कहलाता है। यह शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है और रक्त निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है। गर्भावस्था के दौरान जब शिशु का तेजी से विकास होता है, तब यह पोषक तत्व उसकी वृद्धि में अहम भूमिका निभाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने बच्चे के सबसे महत्वपूर्ण विकास चरण होते हैं। इसी समय भ्रूण के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का निर्माण होता है। फोलिक एसिड इस प्रक्रिया में सहायक होता है और न्यूरल ट्यूब को सही तरीके से विकसित करने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर बच्चे में जन्म के समय विकास संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

    फोलिक एसिड की कमी केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकती है। इसकी कमी से शरीर में कमजोरी, थकान, एनीमिया और सिरदर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर गर्भधारण से पहले ही फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं ताकि शरीर पहले से तैयार हो सके।

    यह पोषक तत्व कई प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और मेथी, दालें, चना, मूंग और मसूर इसके अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा संतरा, अनार जैसे फल और बादाम-अखरोट जैसे सूखे मेवे भी शरीर में फोलिक एसिड की पूर्ति करते हैं।

    पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों में भी गर्भावस्था के दौरान विशेष आहार पर जोर दिया गया है। इस अवधि को संतुलित भोजन और सही जीवनशैली का समय माना जाता है, जिसमें शरीर को आवश्यक पोषण देने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन महत्वपूर्ण होता है। सही आहार न केवल मां के स्वास्थ्य को बनाए रखता है, बल्कि शिशु के समुचित विकास में भी मदद करता है।

    आज के समय में फोलिक एसिड को गर्भावस्था का अनिवार्य हिस्सा माना जाता है। यह न केवल बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास को मजबूती देता है, बल्कि मां को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसलिए इसे “प्रेग्नेंसी का विटामिन” कहा जाता है, क्योंकि यह आने वाले जीवन की नींव को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • बुधवार व्रत कब और कैसे शुरू करें? जानिए गणेश कृपा पाने के अचूक नियम और चमत्कारी लाभ

    बुधवार व्रत कब और कैसे शुरू करें? जानिए गणेश कृपा पाने के अचूक नियम और चमत्कारी लाभ

    नई दिल्ली| सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है और बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान गणेश और बुध देव की पूजा के लिए शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे मन से इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करता है, उसके जीवन से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि आज के समय में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार व्रत का पालन करते हैं।

    अगर आप बुधवार व्रत शुरू करने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए सबसे शुभ समय किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से माना जाता है। इस दिन विधिवत संकल्प लेकर व्रत की शुरुआत करनी चाहिए। मान्यता है कि व्रत को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए, इसलिए 7, 11 या 21 बुधवार का संकल्प लेकर ही व्रत शुरू करें। व्रत पूर्ण होने के बाद उद्यापन करना भी जरूरी माना गया है, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।

    बुधवार व्रत की पूजा विधि भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के ईशान कोण में गंगाजल छिड़ककर एक स्वच्छ चौकी स्थापित करें और उस पर हरे रंग का कपड़ा बिछाएं। इस चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर पंचामृत से उनका अभिषेक करें और बुध देव का ध्यान करें। पूजा के दौरान कुमकुम, हल्दी, चंदन, फूल, सिंदूर आदि अर्पित करें और विशेष रूप से 11 दूर्वा चढ़ाना न भूलें। गणेश जी को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं, इसके बाद व्रत कथा सुनें और आरती करें। शाम के समय पुनः पूजा कर सात्विक भोजन ग्रहण करें।

    व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक माना गया है। इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और केवल एक समय ही भोजन करना उचित होता है। व्रत में दही, हरी मूंग दाल का हलवा, फल और दूध का सेवन किया जा सकता है। साथ ही इस दिन किसी भी महिला या बेटी का अपमान करने से बचना चाहिए, अन्यथा गणेश जी की कृपा से वंचित रहना पड़ सकता है।

    बुधवार व्रत रखने से व्यक्ति को तीव्र बुद्धि, करियर में सफलता, आर्थिक मजबूती और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है। इतना ही नहीं, कुंडली में बुध ग्रह के अशुभ प्रभाव भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। आस्था और नियमों के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है।

  • 8वां वेतन आयोग: महंगाई के बीच सैलरी बढ़ाने की मांग तेज, जानिए कैसे तय होती है कर्मचारियों की तनख्वाह

    8वां वेतन आयोग: महंगाई के बीच सैलरी बढ़ाने की मांग तेज, जानिए कैसे तय होती है कर्मचारियों की तनख्वाह

    नई दिल्ली| देशभर में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत में लगातार हो रही वृद्धि के कारण अब कर्मचारी सैलरी में बड़े इजाफे की मांग कर रहे हैं। शिक्षक, पोस्टमैन समेत कई वर्गों का कहना है कि मौजूदा वेतन उनकी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है, ऐसे में सरकार को वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव करना चाहिए।

    कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने की है। फिटमेंट फैक्टर वह अहम फॉर्मूला होता है, जिसके जरिए पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 गुना रखा गया था, लेकिन अब कर्मचारी इसे बढ़ाकर 3.5 गुना या उससे अधिक करने की मांग कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में सीधा बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

    सैलरी तय करने का गणित केवल फिटमेंट फैक्टर तक सीमित नहीं होता। इसके साथ महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे कई भत्ते भी जुड़े होते हैं, जो कुल वेतन को प्रभावित करते हैं। महंगाई भत्ता खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बढ़ती कीमतों के असर को संतुलित करने के लिए दिया जाता है। जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती है, DA में भी वृद्धि की जाती है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलती है।

    इसके अलावा, पे मैट्रिक्स सिस्टम के तहत हर कर्मचारी का एक लेवल तय होता है। इसी लेवल के आधार पर उसकी बेसिक सैलरी और प्रमोशन के बाद होने वाली बढ़ोतरी निर्धारित होती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस बार वेतन तय करते समय परिवार के वास्तविक खर्च को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि सैलरी मौजूदा आर्थिक हालात के अनुरूप हो।

    8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को क्या फायदा मिल सकता है, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि अगर मांगों को माना गया, तो खासकर निचले स्तर के कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उनकी क्रय शक्ति भी बढ़ेगी, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक रूप से पड़ सकता है।

    हालांकि, अंतिम फैसला केंद्र सरकार के हाथ में है और वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल, लाखों कर्मचारियों की नजर इस पर टिकी है कि सरकार उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।

  • छत्तीसगढ़ में 32 लाख राशन कार्ड पर संकट: 31 अक्टूबर तक E-KYC नहीं तो नवंबर से बंद होगा मुफ्त राशन

    छत्तीसगढ़ में 32 लाख राशन कार्ड पर संकट: 31 अक्टूबर तक E-KYC नहीं तो नवंबर से बंद होगा मुफ्त राशन

    नई दिल्ली|Chhattisgarh के राशन कार्डधारकों के लिए एक बेहद अहम और सतर्क करने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन लोगों ने अभी तक अपने राशन कार्ड की E-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं कराई है, उन्हें 31 अक्टूबर के बाद बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। खाद्य विभाग के मुताबिक, यदि निर्धारित समय सीमा तक E-KYC नहीं कराई गई, तो नवंबर से ऐसे लाखों परिवारों को मिलने वाला मुफ्त राशन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 32 लाख राशन कार्डधारकों ने अब तक E-KYC नहीं कराई है। विभाग को आशंका है कि इनमें बड़ी संख्या में फर्जी या डुप्लीकेट कार्ड शामिल हो सकते हैं। यही वजह है कि सरकार अब इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ देने की दिशा में काम कर रही है। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जो लोग इस प्रक्रिया को नजरअंदाज कर रहे हैं, उन्हें राशन वितरण प्रणाली से बाहर किया जा सकता है।

    E-KYC की प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता लाना और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है। कई मामलों में यह सामने आया है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर कई राशन कार्ड बने होते हैं या ऐसे लोग भी लाभ उठा रहे होते हैं जो इसके पात्र नहीं हैं। इससे असली जरूरतमंदों को नुकसान होता है। E-KYC के जरिए आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल सही लोगों को ही सरकारी सहायता मिले।

    E-KYC कराने की प्रक्रिया काफी सरल रखी गई है। इसके लिए राशन कार्डधारकों को अपने परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड के साथ नजदीकी राशन दुकान पर जाना होगा। वहां बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिसमें फिंगरप्रिंट या अन्य पहचान के जरिए मिलान किया जाता है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होती है, आपकी E-KYC सफल मानी जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि परिवार के हर सदस्य का सत्यापन जरूरी है, तभी राशन कार्ड पूरी तरह सक्रिय रहेगा।

    यदि कोई व्यक्ति 31 अक्टूबर तक E-KYC नहीं कराता है, तो उसका राशन कार्ड निष्क्रिय (Inactive) कर दिया जाएगा। ऐसे में नवंबर से उसे मुफ्त राशन जैसे चावल, नमक और शक्करका लाभ नहीं मिल पाएगा। इतना ही नहीं, बाद में कार्ड को दोबारा सक्रिय कराने के लिए नई प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, जो समय लेने वाली हो सकती है।

    खाद्य विभाग ने सभी राशन कार्डधारकों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और जल्द से जल्द E-KYC की प्रक्रिया पूरी कर लें। यह कदम न सिर्फ उनके राशन को सुरक्षित रखेगा, बल्कि पूरे सिस्टम को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में भी मदद करेगा।

  • ग्लोबल टेंशन से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद..

    ग्लोबल टेंशन से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद..

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को निवेशकों के लिए दिन कमजोर साबित हुआ। बाजार खुलने से लेकर बंद होने तक दबाव बना रहा और अंत में प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। दिनभर की ट्रेडिंग में लगातार बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में आ गए।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स में करीब 416 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में ही बाजार की कमजोरी के संकेत मिल गए थे, जो पूरे दिन जारी रहे। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के चलते निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। तेल की कीमतें 100 डॉलर के आसपास पहुंचने से उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ता है।

    तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ता है, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी कारण निवेशकों ने शेयरों में खरीदारी कम कर दी और बिकवाली का रुख अपनाया।

    सेक्टरवार बात करें तो बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। कई बड़े शेयरों में गिरावट के कारण पूरे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा। हालांकि कुछ एनर्जी और मेटल शेयरों में हल्की खरीदारी जरूर देखने को मिली, लेकिन वह बाजार को संभाल नहीं सकी।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में शुरुआत में स्थिरता दिखी, लेकिन बाद में ये भी दबाव में आ गए। इससे यह साफ हुआ कि केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि व्यापक बाजार भी वैश्विक संकेतों से प्रभावित हुआ है।

    एशियाई बाजारों में भी आज मिश्रित रुख रहा, जहां कुछ बाजारों में गिरावट देखने को मिली और कुछ में हल्की मजबूती रही। वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के कारण निवेशक फिलहाल सतर्कता बरत रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को सोच-समझकर और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ ही फैसले लेने की सलाह दी जा रही है।

  • फिनटेक सेक्टर में नया ट्रेंड: शुरुआती कंपनियों में गिरावट, बड़े सौदों पर बढ़ा निवेश

    फिनटेक सेक्टर में नया ट्रेंड: शुरुआती कंपनियों में गिरावट, बड़े सौदों पर बढ़ा निवेश

    नई दिल्ली।भारत के फिनटेक सेक्टर की कहानी इस साल की पहली तिमाही में एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंची है। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में इस सेक्टर में करीब 513 मिलियन डॉलर की फंडिंग दर्ज की गई, जो पिछले साल की तुलना में हल्की बढ़त दिखाती है। हालांकि यह बढ़ोतरी सिर्फ 2 प्रतिशत की रही, लेकिन असली बदलाव फंडिंग के तरीके में देखने को मिला।

    पहले जहां दर्जनों छोटे-बड़े निवेश राउंड होते थे, वहीं अब तस्वीर बदल गई है। इस बार कुल 99 की जगह सिर्फ 45 फंडिंग डील्स हुईं। यानी निवेशक अब कम सौदों में ज्यादा पैसा लगाने की रणनीति अपना रहे हैं। औसतन निवेश राशि भी पहले से काफी बढ़ गई है, जिससे साफ है कि ध्यान अब मजबूत और स्थापित कंपनियों पर ज्यादा है।

    इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण लेट-स्टेज कंपनियां हैं, जहां निवेश 273 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया—जो पिछली तिमाही से दोगुने से भी ज्यादा है। इसके उलट शुरुआती स्टार्टअप्स को मिलने वाली फंडिंग में गिरावट आई है, जो यह दिखाती है कि जोखिम लेने की बजाय अब निवेशक सुरक्षित विकल्प चुन रहे हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि पूरे निवेश का बड़ा हिस्सा सिर्फ एक ही क्षेत्र—ऑनलाइन लेंडिंग—को मिला, जो लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि ऐसे मॉडल ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं जिनकी कमाई पहले से साबित हो चुकी है और जिनमें स्थिरता दिखती है।

    अगर भौगोलिक बदलाव की बात करें तो इस बार मुंबई ने बड़ा उछाल दिखाया है। कुल फंडिंग का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा मुंबई की कंपनियों को मिला, जबकि बेंगलुरु का हिस्सा घटकर करीब 30 प्रतिशत रह गया। पहले तस्वीर इसके उलट थी, जहां बेंगलुरु आगे रहता था।

    इस बदलाव की एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि मुंबई में बैंकिंग, एनबीएफसी और बीमा कंपनियों का मजबूत नेटवर्क मौजूद है, जिससे फिनटेक कंपनियों को तेजी से स्केल करने में मदद मिल रही है।

  • राष्ट्रपति मुर्मु के आगमन से शिमला में बढ़ी हलचल, सुरक्षा और स्वागत के कड़े इंतजाम..

    राष्ट्रपति मुर्मु के आगमन से शिमला में बढ़ी हलचल, सुरक्षा और स्वागत के कड़े इंतजाम..

    नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला इन दिनों राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन को लेकर विशेष चर्चा में है। उनके पांच दिवसीय प्रवास के चलते पूरे शहर में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। यह दौरा राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें कई आधिकारिक, शैक्षणिक और विकास से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं।

    राष्ट्रपति मुर्मु का यह दौरा 27 अप्रैल से 1 मई तक निर्धारित है। इस दौरान वे शिमला और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। उनके आगमन के सम्मान में राजभवन में विशेष स्वागत समारोह का आयोजन किया गया है, जहां राज्य के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग शामिल होंगे। यह कार्यक्रम राष्ट्रपति के प्रवास की शुरुआत को औपचारिक रूप से चिह्नित करता है।

    अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रपति शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड का दौरा करेंगी, जहां वे सैन्य प्रशिक्षण और तैयारियों की समीक्षा करेंगी। इसके अलावा वे पालमपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी, जहां विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की जाएगी और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी उपलब्धियों को सराहा जाएगा।

    राष्ट्रपति मुर्मु सोमवार को मशोबरा स्थित राष्ट्रपति निवास पहुंचीं, जो उनके प्रवास के दौरान उनका अस्थायी आवास बना हुआ है। यह स्थान अपनी ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है और लंबे समय से देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के प्रवास का हिस्सा रहा है।

    दौरे के कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति 29 अप्रैल को अटल टनल का निरीक्षण करेंगी। यह परियोजना हिमाचल प्रदेश की प्रमुख आधारभूत संरचना उपलब्धियों में से एक मानी जाती है और राज्य के विकास में इसकी अहम भूमिका है। इसके बाद 30 अप्रैल को वे पालमपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी और उसी दिन शाम को मशोबरा स्थित निवास पर “एट होम” कार्यक्रम में शामिल होंगी, जहां विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े आमंत्रित अतिथि उनसे मुलाकात करेंगे।

    1 मई को राष्ट्रपति का अंतिम कार्यक्रम शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड का दौरा होगा, जिसके बाद वे राजधानी दिल्ली के लिए रवाना होंगी। यह पूरा दौरा प्रशासनिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें रक्षा, शिक्षा और विकास तीनों क्षेत्रों की गतिविधियों की समीक्षा और सहभागिता शामिल है।

    मशोबरा स्थित राष्ट्रपति निवास का ऐतिहासिक महत्व भी विशेष है। यह भवन लगभग 174 वर्ष पुराना है और अपनी यूरोपीय स्थापत्य शैली के कारण जाना जाता है। पहले इसे रिट्रीट बिल्डिंग के नाम से जाना जाता था, जो अब देश के प्रमुख राष्ट्रपति आवासों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।

  • कम समय में बड़ा स्वाद: बूंदी रायता से पाएं गर्मी में राहत और ताजगी..

    कम समय में बड़ा स्वाद: बूंदी रायता से पाएं गर्मी में राहत और ताजगी..

    नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में खाने की थाली में कुछ ऐसा होना जरूरी होता है जो शरीर को ठंडक दे और खाने को हल्का बना दे। ऐसे समय में दही से बनी चीजों की मांग बढ़ जाती है क्योंकि यह न सिर्फ स्वाद बढ़ाती हैं बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा रखने में भी मदद करती हैं। इन्हीं में से एक आसान और लोकप्रिय विकल्प है बूंदी रायता, जो हर उम्र के लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है।

    बूंदी रायता अपनी सादगी और झटपट बनने वाली रेसिपी के लिए जाना जाता है। यह एक ऐसी डिश है जिसे कम समय में तैयार किया जा सकता है और यह खाने के साथ परफेक्ट साइड डिश के रूप में काम करता है। खासकर मसालेदार खाने के साथ इसका स्वाद और भी बेहतर महसूस होता है, क्योंकि यह स्वाद को संतुलित करता है और पेट को ठंडक देता है।

    इस रेसिपी को बनाने के लिए सबसे पहले ताजा दही को अच्छे से फेंटना होता है ताकि वह मुलायम और क्रीमी हो जाए। इसके बाद इसमें थोड़ा पानी मिलाकर इसकी मोटाई को संतुलित किया जाता है। ऐसा करने से रायता हल्का और खाने में आसान बनता है। इसके बाद इसमें पहले से तैयार या हल्की तली हुई बूंदी डाली जाती है, जो इस डिश की मुख्य सामग्री होती है।

    अब इसमें स्वाद के अनुसार नमक मिलाया जाता है। कई लोग इसमें काला नमक और भुना हुआ जीरा भी डालते हैं, जिससे इसका स्वाद और अधिक बढ़ जाता है। चाहें तो इसमें बारीक कटी हरी मिर्च या धनिया भी मिलाया जा सकता है, जो इसे ताजगी और सुगंध प्रदान करता है। सभी सामग्री को अच्छे से मिलाने के बाद इसे कुछ मिनट के लिए रखा जाता है, ताकि बूंदी दही को अच्छे से सोख ले और स्वाद और निखर जाए।

    बूंदी रायता सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। दही में मौजूद पोषक तत्व पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जबकि बूंदी इसे हल्का और एनर्जी देने वाला बनाती है। गर्मी के दिनों में यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में भी सहायक होता है।

    इस रेसिपी की खासियत यह है कि इसे किसी भी खाने के साथ आसानी से परोसा जा सकता है। चाहे रोजमर्रा का भोजन हो या कोई खास अवसर, बूंदी रायता हर प्लेट में एक अलग ही स्वाद जोड़ देता है। इसकी आसान तैयारी और शानदार स्वाद इसे हर घर की पसंदीदा डिश बना देता है।

  • गर्म मौसम में यूरिन जलन की समस्या? ये घरेलू तरीके देंगे आराम..

    गर्म मौसम में यूरिन जलन की समस्या? ये घरेलू तरीके देंगे आराम..

    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम अपने साथ कई तरह की शारीरिक परेशानियां लेकर आता है। तेज धूप, अधिक पसीना और शरीर में पानी की कमी के कारण लोग अक्सर डिहाइड्रेशन की समस्या का सामना करते हैं। इसी वजह से यूरिन में जलन जैसी समस्या भी काफी आम हो जाती है, जो कई लोगों के लिए असहज स्थिति पैदा कर देती है।

    डॉक्टरों के अनुसार, जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो पेशाब गाढ़ा हो जाता है। यही गाढ़ा यूरिन मूत्र मार्ग में जलन और असहजता का कारण बनता है। इसके अलावा, बैक्टीरियल इंफेक्शन, गलत खान-पान और साफ-सफाई की कमी भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं।

    हालांकि राहत की बात यह है कि कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे जरूरी उपाय है पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना। नियमित अंतराल पर पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और यूरिन पतला होकर जलन कम करता है।

    इसके साथ ही नारियल पानी और छाछ का सेवन भी शरीर के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। ये दोनों पेय शरीर को ठंडक देते हैं और अंदरूनी संतुलन बनाए रखते हैं। नींबू पानी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है, जिससे यूरिन संबंधी समस्याओं में राहत मिल सकती है।

    जौ का पानी भी एक पारंपरिक और प्रभावी उपाय माना जाता है, जो मूत्र मार्ग की जलन को शांत करने में मदद करता है। यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में भी सहायक होता है और गर्मी के प्रभाव को कम करता है।

    गर्मी के दिनों में खान-पान पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। ज्यादा मसालेदार, तला-भुना या जंक फूड शरीर में गर्मी बढ़ाते हैं, जिससे यूरिन जलन की समस्या और अधिक बढ़ सकती है। ऐसे में हल्का और संतुलित आहार लेना बेहतर होता है।

    साफ-सफाई का ध्यान रखना भी इस समस्या से बचाव में अहम भूमिका निभाता है। शरीर के संवेदनशील हिस्सों की स्वच्छता बनाए रखना और सूती, आरामदायक कपड़े पहनना संक्रमण के खतरे को कम करता है।

    अगर जलन के साथ बुखार, बदबूदार पेशाब या खून जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह किसी गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है, जिसके लिए तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी होता है।

  • आज का राशिफल 28 अप्रैल: 4 राशियों पर बरसेगी हनुमान जी की कृपा, 3 को रहना होगा सतर्क

    आज का राशिफल 28 अप्रैल: 4 राशियों पर बरसेगी हनुमान जी की कृपा, 3 को रहना होगा सतर्क

    नई दिल्ली। मंगलवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है, क्योंकि आज ग्रहों की स्थिति कई राशियों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दे रही है। माना जा रहा है कि आज का दिन मंगल ग्रह की ऊर्जा और धार्मिक आस्था से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार विशेष प्रभाव लेकर आया है। चंद्रमा की चाल का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा।

    आज के दिन कुछ राशियों के लिए परिस्थितियां बेहद अनुकूल बनती दिख रही हैं। वृषभ, कन्या, सिंह और मकर राशि के जातकों के लिए समय सकारात्मक संकेत दे रहा है। इन लोगों को कार्यक्षेत्र में सफलता, आर्थिक लाभ और पारिवारिक जीवन में संतुलन मिलने की संभावना है। मेहनत का फल मिलने के योग बन रहे हैं और रुके हुए कार्य आगे बढ़ सकते हैं।

    इन राशियों पर मानसिक रूप से भी सकारात्मक प्रभाव रहेगा, जिससे निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी। कई मामलों में अचानक लाभ या नए अवसर मिलने की संभावना भी बन रही है। सामाजिक जीवन में सम्मान और पहचान बढ़ने के संकेत भी नजर आ रहे हैं।

    दूसरी ओर, कुछ राशियों को आज विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मेष, तुला और कुंभ राशि के जातकों को आज अपने निर्णयों में सतर्क रहना होगा। आर्थिक मामलों में बिना सोच-समझ के कदम उठाने से नुकसान हो सकता है। साथ ही रिश्तों में गलतफहमी या वाद-विवाद की स्थिति भी बन सकती है, इसलिए संवाद में संयम रखना जरूरी है।

    इन राशियों को सलाह दी जाती है कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले अच्छी तरह विचार करें और भावनाओं में बहकर कोई कदम न उठाएं। कार्यस्थल पर भी धैर्य और समझदारी के साथ स्थिति को संभालना जरूरी होगा।

    बाकी राशियों के लिए आज का दिन मिश्रित परिणाम लेकर आया है। कुछ जगहों पर अवसर मिलेंगे, तो कुछ जगहों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में संतुलन बनाए रखना और परिस्थितियों को समझदारी से संभालना महत्वपूर्ण रहेगा।

    धार्मिक दृष्टि से मंगलवार का दिन हनुमान जी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने और सच्चे मन से प्रार्थना करने से मानसिक शांति मिलती है और बाधाओं में कमी आती है। कई लोग इस दिन व्रत या पूजा के माध्यम से अपने दिन को शुभ बनाने का प्रयास करते हैं।