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  • रीवा में मनरेगा घोटाला उजागर, RTI कार्यकर्ता के नाम फर्जी मस्टर रोल बना भुगतान

    रीवा में मनरेगा घोटाला उजागर, RTI कार्यकर्ता के नाम फर्जी मस्टर रोल बना भुगतान


    रीवा। रीवा जिले की गंगेव जनपद पंचायत अंतर्गत कैथा गांव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि एक RTI और सामाजिक कार्यकर्ता के नाम पर बिना किसी कार्य के फर्जी मस्टर रोल तैयार कर मजदूरी भुगतान दिखाया गया।

    यह मामला ग्राम कैथा निवासी शिवानंद द्विवेदी से जुड़ा है, जिनके खेत में तालाब निर्माण के लिए वर्ष 2023-24 में 3.85 लाख रुपये से अधिक की तकनीकी स्वीकृति दी गई थी। लेकिन लंबे समय तक कार्य शुरू नहीं हुआ, जिसके बाद हितग्राही ने 21 मई 2025 को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कर कार्य शुरू कराने की मांग की।

    आरोप है कि पंचायत ने इस शिकायत को गलत तरीके से समझते हुए वास्तविक निर्माण कार्य शुरू करने के बजाय हितग्राही के नाम पर ही मस्टर रोल जारी कर दिया। जांच में सामने आया कि मस्टर रोल क्रमांक 9296, 9298 और 9299 में शिवानंद द्विवेदी के नाम से 20 दिनों का रोजगार दर्शाया गया, जबकि वास्तव में कोई कार्य हुआ ही नहीं था।

    जिला पंचायत की मनरेगा शाखा द्वारा की गई जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित जॉब कार्ड पर मजदूरी भुगतान के नाम पर 42.28 रुपये दर्शाए गए, जबकि 1617.36 रुपये की राशि बकाया भी दिखा दी गई। यह स्थिति योजना की पारदर्शिता और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

    जांच अधिकारी योगेन्द्र पाण्डेय द्वारा तैयार रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि कार्य स्थल पर किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य के प्रमाण नहीं मिले। न ही वहां मजदूरी करने के फोटो, माप पुस्तिका (मेजरमेंट बुक) या कोई हस्ताक्षरित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।

    इसके बावजूद तत्कालीन उपयंत्री और सहायक यंत्री द्वारा ई-एमबी (eMB) प्रणाली में कार्य का ऑनलाइन सत्यापन कर दिया गया, जिसे जांच रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही और नियमों का उल्लंघन माना गया है।

    पूरे मामले की जांच के बाद ग्राम पंचायत कैथा के सचिव महेश पटेल, तत्कालीन उपयंत्री प्रवीण पाण्डेय और सहायक यंत्री निखिल मिश्रा को वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया गया है। इस संबंध में 31 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भेज दी गई है।

    रिपोर्ट में तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और वैधानिक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इस खुलासे के बाद रीवा जिले के मनरेगा विभाग में हड़कंप की स्थिति है और पूरे मामले की आगे की जांच जारी है।

  • कर्नाटक में सत्ता बदलाव की हलचल तेज, डीके शिवकुमार 3 जून को ले सकते हैं मुख्यमंत्री पद की शपथ

    कर्नाटक में सत्ता बदलाव की हलचल तेज, डीके शिवकुमार 3 जून को ले सकते हैं मुख्यमंत्री पद की शपथ

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से जारी अस्थिरता और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब सरकार गठन की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से सहमति बनने के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार के शपथ लेने की संभावना 3 जून को जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में यह घटनाक्रम राज्य की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहां पार्टी अब संतुलन और स्थिरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।

    राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद से ही सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई थी। कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी के बाद अब डीके शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार बनाने की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है, जिसके बाद शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    सूत्रों के अनुसार डीके शिवकुमार ने अपने पारिवारिक ज्योतिषी से विचार-विमर्श के बाद 3 जून की तारीख को शपथ ग्रहण के लिए उपयुक्त माना है। राजनीतिक और व्यक्तिगत निर्णयों में धार्मिक और ज्योतिषीय परामर्श की परंपरा रखने वाले शिवकुमार के इस फैसले को भी चर्चा का विषय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कार्यक्रम बेहद सादगीपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ-साथ नई सरकार की नींव रखी जाएगी।

    नई सरकार के गठन के साथ ही मंत्रिमंडल को लेकर भी रणनीति तेज हो गई है। पार्टी के भीतर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए उपमुख्यमंत्री पदों के दो नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इनमें एक प्रतिनिधित्व दलित समुदाय से और दूसरा अल्पसंख्यक समुदाय से हो सकता है। इस रणनीति को राज्य के विविध सामाजिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित राजनीतिक समीकरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य सभी प्रमुख वर्गों को साथ लेकर चलना बताया जा रहा है।

    कांग्रेस नेतृत्व आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए नई सरकार में युवाओं और विभिन्न सामाजिक समूहों को अधिक प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार कर रहा है। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए उनके परिवार से भी किसी प्रमुख भूमिका में शामिल किए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इससे पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की कोशिश स्पष्ट रूप से नजर आती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक में यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक दिशा को भी तय करेगा। राज्य में स्थिर सरकार देने की चुनौती के साथ नई टीम को विकास और संगठनात्मक मजबूती दोनों पर ध्यान देना होगा। वहीं कांग्रेस के लिए यह कदम आगामी चुनावों से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल के नामों और शपथ ग्रहण की अंतिम तिथि को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है, जिसके बाद कर्नाटक की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा

  • शिवपुरी में नौतपा के बीच मौसम का कहर, आंधी-बारिश से भारी तबाही

    शिवपुरी में नौतपा के बीच मौसम का कहर, आंधी-बारिश से भारी तबाही

    शिवपुरी।  शिवपुरी जिले में नौतपा के पांचवें दिन शुक्रवार शाम मौसम ने अचानक करवट ले ली, जिससे पूरे क्षेत्र में तेज आंधी, बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचा दी। मौसम के इस बदले मिजाज ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया और कई जगहों पर व्यापक नुकसान की स्थिति बन गई।

    शाम के समय शुरू हुई तेज आंधी के बाद देर रात तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। इस दौरान शिवपुरी शहर सहित कोलारस, बदरवास, पिछोर, करैरा, बैराड़ और रन्नौद क्षेत्रों में इसका व्यापक असर देखा गया। तेज हवाओं के कारण सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे धराशायी हो गए, जिससे कई इलाकों में विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई।

    रन्नौद तहसील के खरेह गांव में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर रही, जहां तेज आंधी के कारण कई मकानों की टीन शेड उड़ गईं और घरों में रखा सामान व अनाज भीग गया। इसी गांव में पंजाब नेशनल बैंक के पास स्थित BSNL का पुराना मोबाइल टावर तेज हवाओं के कारण गिरकर पास के मकान पर जा गिरा। इस हादसे में मकान के दो ट्रैक्टर क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत रही कि घटना के समय वहां कोई मौजूद नहीं था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

    स्थानीय निवासी धर्मेंद्र रघुवंशी ने बताया कि यह टावर 20 साल से अधिक पुराना और जर्जर स्थिति में था। इसे हटाने के लिए पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    इसी तरह सजाई गांव में तेज आंधी के कारण एक विशाल इमली का पेड़ ट्रैक्टर पर गिर गया, जिससे वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बीजरी गांव में भगवत सिंह दांगी के मकान पर नीम का पेड़ गिरने से मकान को भी नुकसान पहुंचा है।

    ठाठी गांव में आकाशीय बिजली गिरने से ग्रामीणों द्वारा रखे गए हजारों कंडों में आग लग गई, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। इसके अलावा तेज हवाओं के कारण कई मकानों की दीवारें भी ढह गईं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया।

    पूरे जिले में आंधी-बारिश के कारण बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रही। शिवपुरी शहर सहित कई ग्रामीण इलाकों में देर रात तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। सड़कों पर गिरे पेड़ों के कारण यातायात भी बाधित हुआ और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    हालांकि राहत की बात यह रही कि इस भीषण प्राकृतिक आपदा में किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन संपत्ति का व्यापक नुकसान हुआ है।

  • नगर निगम चुनाव परिणामों में ‘झाड़ू’ का परचम, 8 में से 5 निगमों पर आम आदमी पार्टी ने दर्ज की शानदार जीत

    नगर निगम चुनाव परिणामों में ‘झाड़ू’ का परचम, 8 में से 5 निगमों पर आम आदमी पार्टी ने दर्ज की शानदार जीत

    नई दिल्ली । पंजाब में हुए स्थानीय नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है, जिसमें सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए अपना दबदबा कायम रखा है। कुल 104 नगर निकायों के परिणामों में पार्टी ने 56 निकायों पर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है, जिसे मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के प्रति जनता के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। इन चुनावों को वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा था, जिसमें मतदाताओं का रुझान एक बार फिर आम आदमी पार्टी के पक्ष में दिखाई दिया है।

    राज्य के आठ प्रमुख नगर निगमों में से पांच पर आम आदमी पार्टी ने एकतरफा जीत दर्ज की है। इनमें बरनाला, मोहाली, मोगा, भटिंडा और बटाला जैसे महत्वपूर्ण नगर निगम शामिल हैं, जहां पार्टी ने मजबूत संगठनात्मक ढांचे और स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रणनीति के दम पर विपक्ष को पीछे छोड़ दिया। वहीं कांग्रेस ने भी इस चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए दूसरे स्थान पर अपनी स्थिति मजबूत की है। पार्टी ने कपूरथला नगर निगम सहित कुल 24 निकायों में जीत हासिल कर यह साबित किया है कि राज्य में उसकी राजनीतिक उपस्थिति अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है, भले ही वह सत्ता की दौड़ में पीछे रह गई हो।

    भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में सीमित लेकिन महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की है। पार्टी ने अबोहर नगर निगम में जीत हासिल की, जबकि पठानकोट नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर भी वह बहुमत से दूर रह गई। शिरोमणि अकाली दल का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा और उसे अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल सका। नगर परिषदों और वार्ड स्तर पर भी आम आदमी पार्टी ने बढ़त बनाए रखी, जहां कुल 75 नगर परिषदों में से 40 पर उसका नियंत्रण स्थापित हुआ। वहीं कांग्रेस 18 परिषदों तक सीमित रही, जबकि अकाली दल और भाजपा को क्रमशः 10 और 4 परिषदों में सफलता मिली।

    वार्ड स्तर के आंकड़े भी राजनीतिक रुझान को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं, जहां कुल 1,977 वार्डों में आम आदमी पार्टी ने 958 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। कांग्रेस को 397, अकाली दल को 192, भाजपा को 172, निर्दलीय उम्मीदवारों को 251 और बहुजन समाज पार्टी को 7 वार्डों में जीत मिली है। नगर पंचायतों के परिणामों में भी आम आदमी पार्टी ने बढ़त बनाए रखी और 21 में से 11 पंचायतों पर नियंत्रण हासिल किया, जबकि कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा को सीमित सफलता से संतोष करना पड़ा। इन परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में आम आदमी पार्टी की पकड़ और मजबूत मानी जा रही है, जबकि विपक्षी दलों के लिए यह नतीजे संगठनात्मक पुनर्गठन और नई रणनीति तैयार करने का संकेत दे रहे हैं, जिससे आने वाले समय में पंजाब की राजनीतिक दिशा और अधिक प्रतिस्पर्धी और दिलचस्प होने की संभावना है।

  • अवैध खनन मामला: जब्त होने थे वाहन, लेकिन भिंड-मुरैना-श्योपुर में जुर्माना लेकर छोड़े गए

    अवैध खनन मामला: जब्त होने थे वाहन, लेकिन भिंड-मुरैना-श्योपुर में जुर्माना लेकर छोड़े गए

    चंबल । चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन के खिलाफ चल रही कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। परिवहन विभाग के उच्च स्तर से मिले पत्र के बाद यह खुलासा हुआ है कि मुरैना, भिंड और श्योपुर जिलों में नियमों के उल्लंघन के बावजूद बड़ी संख्या में वाहनों को जब्त करने के बजाय केवल जुर्माना वसूलकर छोड़ दिया गया।

    परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीर माना जाएगा। पत्र में संबंधित जिलों के अधिकारियों से कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है और यह पूछा गया है कि जब नियमों के तहत वाहन राजसात किए जाने चाहिए थे, तो उन्हें क्यों छोड़ा गया।

    जानकारी के अनुसार, श्योपुर जिले में पिछले छह दिनों में 11 वाहन बिना नंबर प्लेट के पकड़े गए, जिनमें से केवल एक जेसीबी को जब्त किया गया, जबकि बाकी 10 वाहनों को जुर्माना लेकर छोड़ दिया गया। इसी तरह मुरैना में भी 12 ट्रैक्टरों और अन्य 54 वाहनों पर जुर्माना लगाकर उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि केवल दो ट्रैक्टरों को जब्त किया गया।

    भिंड जिले की स्थिति भी इसी तरह चिंताजनक बताई जा रही है, जहां 28 से अधिक बिना नंबर प्लेट वाले वाहन पकड़े गए। इनमें अधिकांश ट्रकों पर केवल 500 रुपये का जुर्माना लगाकर उन्हें छोड़ दिया गया।

    इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि जिन अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए केवल जुर्माना वसूला, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

    परिवहन सचिव ने अपने निर्देश में यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध खनन गतिविधियों में लगे सभी फर्जी, बिना नंबर प्लेट और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को तुरंत जब्त किया जाए और मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत राजसात की कार्रवाई की जाए।

    गौरतलब है कि चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन लंबे समय से एक गंभीर समस्या बना हुआ है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्ती दिखाई है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कार्रवाई की प्रभावशीलता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

    अब इस ताजा खुलासे के बाद यह मामला और अधिक गंभीर हो गया है, क्योंकि यह न केवल नियमों के पालन पर बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर भी सीधा सवाल खड़ा करता है।

  • हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कागजों में दो बार रिटायर किए गए चौकीदार को फिर मिली नौकरी

    हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कागजों में दो बार रिटायर किए गए चौकीदार को फिर मिली नौकरी


    ग्वालियर । ग्वालियर खंडपीठ में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने वन विभाग के एक विवादित और प्रशासनिक मनमानेपन से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने एक दैनिक वेतनभोगी चौकीदार को राहत देते हुए उसके पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है और विभाग द्वारा जारी दो अलग-अलग रिटायरमेंट आदेशों को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।

    यह मामला दतिया वन परिक्षेत्र में कार्यरत साहब सिंह ठाकुर से जुड़ा है, जिन्हें वर्ष 1986 में चौकीदार के पद पर नियुक्त किया गया था। लगभग 31 वर्षों तक सेवा देने के बाद उन्हें वर्ष 2017 में नियमित कर दिया गया था। इसी दौरान उनकी वास्तविक उम्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

    विभाग ने जब उनकी आयु निर्धारण के लिए जिला मेडिकल बोर्ड को अधिकृत किया, तो 7 अप्रैल 2017 को विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल ने वैज्ञानिक जांच के आधार पर उनकी उम्र 50 वर्ष निर्धारित की। इस रिपोर्ट के अनुसार उनकी सेवानिवृत्ति वर्ष 2029 में होनी चाहिए थी।

    हालांकि, इसके बावजूद वन विभाग ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को नजरअंदाज करते हुए अपनी ओर से उनकी उम्र 60 वर्ष मान ली और उन्हें उसी वर्ष 2017 में ही रिटायर करने का आदेश जारी कर दिया। कर्मचारी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां अदालत ने प्रारंभिक रूप से उस पर रोक लगा दी।

    लेकिन इसके बाद विभाग ने एक और विवादित कदम उठाते हुए 17 अप्रैल 2018 को दूसरा आदेश जारी कर दिया, जिसमें उनकी उम्र 62 वर्ष मानकर फिर से सेवा समाप्त करने का प्रयास किया गया। इस तरह कागजों पर एक ही कर्मचारी को दो बार रिटायर दिखा दिया गया।

    मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने वन विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब विभाग ने स्वयं मेडिकल बोर्ड से आयु निर्धारण कराया था, तो उसकी वैज्ञानिक रिपोर्ट को प्रशासनिक अधिकारी मनमाने तरीके से खारिज नहीं कर सकते।

    अदालत ने यह भी कहा कि विभाग किसी भी प्रकार का वैकल्पिक जन्म प्रमाण पत्र या विरोधी मेडिकल रिपोर्ट पेश करने में विफल रहा, जिससे मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर संदेह किया जा सके।

    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट निर्देश दिया कि साहब सिंह ठाकुर को उनकी वास्तविक सेवा अवधि यानी अप्रैल 2029 तक सम्मानपूर्वक नौकरी पर रखा जाए। साथ ही उन्हें बकाया वेतन, एरियर और सभी सेवा लाभ भी तत्काल प्रभाव से दिए जाएं।

    इस फैसले को प्रशासनिक जवाबदेही और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जिसने सरकारी विभागों की मनमानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • शादी समारोह में हत्या केस: ग्वालियर में आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा

    शादी समारोह में हत्या केस: ग्वालियर में आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा


    ग्वालियर । ग्वालियर जिले के सिंधिया नगर स्थित “गड्ढे वाला मोहल्ला” में वर्ष 2024 में हुए चर्चित सोनू आदिवासी हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अठारहवें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पारस कुमार जैन की अदालत ने मामले में पिता-पुत्र समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक आरोपी पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

    यह मामला 25-26 अप्रैल 2024 की दरमियानी रात का है, जब सोनू आदिवासी अपने रिश्तेदार की बेटी की शादी समारोह में शामिल होने के लिए सिंधिया नगर पहुंचा था। शादी का माहौल चल रहा था, लेकिन इसी दौरान पुरानी रंजिश ने एक दर्दनाक वारदात का रूप ले लिया।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोनू शादी समारोह के दौरान टेंट के पीछे स्थित किराना दुकान के पास गया था, तभी पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उसे घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आरोपी उसे धमकाते हुए कह रहे थे कि “तू दूसरों के मामलों में ज्यादा नेता बनता है, आज तुझे सबक सिखाते हैं।”

    जांच में यह सामने आया कि घटना से लगभग 15-20 दिन पहले आरोपियों का किसी अन्य व्यक्ति से विवाद हुआ था, जिसमें सोनू ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया था। इसी बात को लेकर आरोपी उससे रंजिश रखने लगे थे और बाद में इस हत्या की योजना बनाई गई।

    घटना के दौरान अनिल आदिवासी और उसके पिता वीरू आदिवासी ने सोनू के हाथ पकड़ लिए, ताकि वह किसी तरह बचाव न कर सके। इसी बीच मुख्य आरोपी सुनील आदिवासी ने लोहे का धारदार चाकू निकालकर सोनू के सीने और पसलियों पर कई वार कर दिए। हमले के बाद सोनू गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा और शादी समारोह स्थल पर अफरा-तफरी मच गई।

    घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। परिजन घायल सोनू को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन गंभीर आंतरिक चोटों के कारण डॉक्टरों ने उसे बचा नहीं सके और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    इस जघन्य हत्या के मामले में अदालत में पेश गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी पाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह हमला पूर्व नियोजित था और बदले की भावना से किया गया था। फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने राहत की सांस ली है, जबकि पुलिस और प्रशासन ने भी अदालत के निर्णय को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

  • पानी, नमी और फटने से सुरक्षित होंगे नए बैंक नोट, प्लास्टिक करेंसी को लेकर भारत में नई पहल तेज

    पानी, नमी और फटने से सुरक्षित होंगे नए बैंक नोट, प्लास्टिक करेंसी को लेकर भारत में नई पहल तेज

    नई दिल्ली । भारत की मौद्रिक प्रणाली में एक बड़े बदलाव की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है, जहां भारतीय रिजर्व बैंक देश में प्लास्टिक आधारित बैंक नोटों को शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। यह कदम करीब 14 साल पुराने प्रस्ताव को फिर से सक्रिय करने के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर हाल के उच्च स्तरीय बैठकों में गंभीर विचार-विमर्श हुआ है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस संभावित बदलाव को लेकर लोगों और वित्तीय विशेषज्ञों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। यदि यह योजना लागू होती है तो भारतीय करेंसी के स्वरूप और उपयोग प्रणाली में एक ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

    सूत्रों के अनुसार, आरबीआई की हालिया बैठकों में प्लास्टिक नोटों को लेकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की संभावना पर चर्चा की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य मौजूदा कागजी नोटों की छपाई और रखरखाव पर होने वाले भारी खर्च को कम करना बताया जा रहा है। वर्तमान में हर साल बड़ी संख्या में नोट खराब होकर चलन से बाहर हो जाते हैं, जिन्हें फिर से छापने में हजारों करोड़ रुपये का खर्च आता है। इस आर्थिक बोझ को कम करने के लिए पॉलीमर आधारित नोटों को एक व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है, जो लंबे समय तक टिकाऊ हो सकते हैं।

    प्लास्टिक नोटों की सबसे बड़ी खासियत उनकी मजबूती और टिकाऊपन मानी जा रही है। ये नोट पानी, नमी और सामान्य गंदगी से प्रभावित नहीं होते, जिससे इनकी उम्र कागज के नोटों की तुलना में काफी अधिक हो सकती है। इसके अलावा ये नोट फटने से भी अधिक सुरक्षित होते हैं और इन्हें लंबे समय तक उपयोग में लाया जा सकता है। तकनीकी दृष्टि से इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जाने की संभावना है, जिससे जालसाजी पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

    भारत में इससे पहले वर्ष 2012 में कुछ चुनिंदा शहरों में 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का सीमित परीक्षण किया गया था, लेकिन उस समय तकनीकी और परिचालन चुनौतियों के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका था। अब बदलती तकनीक और वैश्विक अनुभवों के आधार पर इस दिशा में फिर से संभावनाएं मजबूत होती दिख रही हैं। दुनिया के कई देश पहले ही प्लास्टिक मुद्रा अपना चुके हैं और इसे अधिक सुरक्षित एवं टिकाऊ विकल्प मानते हैं।

    यदि यह योजना लागू होती है तो यह भारतीय वित्तीय व्यवस्था में एक आधुनिक और तकनीक-आधारित बदलाव का संकेत होगा, जिससे न केवल लागत में कमी आएगी बल्कि मुद्रा प्रबंधन की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है। आने वाले समय में इस पर आरबीआई की आधिकारिक घोषणा और आगे की रूपरेखा पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • ग्वालियर में दर्दनाक सुसाइड: भाई को वीडियो कॉल कर युवक ने खुद को मारी गोली

    ग्वालियर में दर्दनाक सुसाइड: भाई को वीडियो कॉल कर युवक ने खुद को मारी गोली


    ग्वालियर । ग्वालियर शहर के डफरीन सराय इलाके में शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात उस समय सनसनी फैल गई जब नगर निगम में क्रेन ऑपरेटर के पद पर कार्यरत युवक ने अपनी लाइसेंसी राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। यह घटना करीब रात 1 बजे की बताई जा रही है।

    मृतक की पहचान गौरव भदौरिया के रूप में हुई है, जिसने आत्महत्या से पहले अपने बड़े भाई को वीडियो कॉल किया और उसी कॉल के दौरान 315 बोर की राइफल मुंह पर रखकर ट्रिगर दबा दिया। घटना के बाद परिवार और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया।

    जानकारी के अनुसार, गौरव भदौरिया ने आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट भी किया था, जिसमें उसने अपने ही परिवार के कई सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने अपने पिता रणवीर सिंह भदौरिया, मां सत्यवती भदौरिया, बहन नीतू सिकरवार और मामी सीमा परमार पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

    पोस्ट में गौरव ने लिखा कि उसे लगातार पैसे और जमीन में हिस्सा देने का दबाव बनाया जा रहा था। उसने यह भी दावा किया कि उससे 5 लाख रुपए की मांग की गई थी और मांग पूरी न करने पर उसे जहर देकर मारने की धमकी दी गई थी। इसी तनाव और दबाव के चलते वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर हुआ।

    गौरव ने यह भी लिखा कि वह अपनी बहन को पहले ही 2.40 लाख रुपए दे चुका था, इसके बावजूद उससे और पैसे मांगे जा रहे थे और मकान में हिस्सेदारी देने का दबाव बनाया जा रहा था। उसने आरोप लगाया कि इन सभी बातों के कारण वह मानसिक रूप से बेहद परेशान था।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में पुलिस सभी आरोपों और पारिवारिक विवाद के पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।

    परिवार और रिश्तेदारों के बीच इस घटना के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो कॉल की भी जांच की जा रही है, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके।

    फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मामला केवल पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव का है या इसके पीछे कोई और गहरी वजह भी शामिल है।

  • चितौली गांव शोक में डूबा: भजन-कीर्तन के बीच किसान की सर्पदंश से मौत

    चितौली गांव शोक में डूबा: भजन-कीर्तन के बीच किसान की सर्पदंश से मौत


    ग्वालियर । ग्वालियर जिले के बेलगढ़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत चितौली गांव में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां भागवत कथा में भजन-कीर्तन कर रहे एक किसान की सांप के काटने से मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    मृतक की पहचान 50 वर्षीय मदनलाल रावत के रूप में हुई है, जो पिछले एक सप्ताह से लकेश्वरी माता मंदिर में आयोजित भागवत कथा में नियमित रूप से शामिल हो रहे थे। धार्मिक प्रवृत्ति के कारण वे न केवल कथा सुनते थे, बल्कि भजन-कीर्तन में भी सक्रिय भागीदारी निभाते थे।

    जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे कथा के दौरान जब मदनलाल रावत भजन गा रहे थे, तभी अचानक एक जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया। शुरुआत में वहां मौजूद लोगों को इस घटना का अंदाजा नहीं हुआ और कार्यक्रम सामान्य रूप से चलता रहा।

    कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। परिजनों और श्रद्धालुओं ने तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। हालांकि सांप के जहर का असर तेजी से फैल चुका था और तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका।

    देर रात करीब 1 बजे उपचार के दौरान मदनलाल रावत ने दम तोड़ दिया। इस घटना की जानकारी मिलते ही बेलगढ़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम कराया और बाद में परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया।

    इस हादसे ने पूरे चितौली गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का कहना है कि मदनलाल बेहद धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति थे और किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि एक धार्मिक आयोजन के दौरान इस तरह की दर्दनाक घटना घट जाएगी।

    गांव में शोक का माहौल है और लोग इस अप्रत्याशित घटना को लेकर स्तब्ध हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सांपों से सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।