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  • 19 दिसंबर को बदलेगा देश का प्रधानमंत्री? पृथ्वीराज चव्हाण के बयान से सियासी हलचल

    19 दिसंबर को बदलेगा देश का प्रधानमंत्री? पृथ्वीराज चव्हाण के बयान से सियासी हलचल


    नई दिल्‍ली । देश की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया है कि 19 दिसंबर को भारत को नया प्रधानमंत्री मिल सकता है, और इस बार प्रधानमंत्री मराठी समुदाय से होगा। यह बयान उन्होंने पिंपरी-चिंचवड़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया।

    पृथ्वीराज चव्हाण ने इसी महीने यह दावा दूसरी बार दोहराया है। इससे पहले सांगली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी उन्होंने इसी तरह की बात कही थी। चव्हाण का कहना है कि वे लंबे समय तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में काम कर चुके हैं और दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों को गहराई से समझते हैं। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया, जिससे उनके बयान पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

    अमेरिका की घटनाओं से जोड़ा भारत का राजनीतिक भविष्य
    अपने बयान में चव्हाण ने अमेरिका की हालिया राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में एक व्यक्ति द्वारा कई बड़े नेताओं के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन किए गए हैं, जिनके खुलासे जल्द होने वाले हैं। चव्हाण के अनुसार, अमेरिका में प्रस्तावित एक नए कानून के तहत 19 दिसंबर को कई बड़े नाम सार्वजनिक किए जा सकते हैं, जिसका असर वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं पता कि वे नेता कौन हैं, लेकिन इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।

    एपस्टीन फाइल्स का हवाला
    पृथ्वीराज चव्हाण ने अमेरिका में जेफ्री एपस्टीन फाइल्स का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि इन फाइल्स के सामने आने से अमेरिका की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा हो गया है और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्थिति भी इससे प्रभावित हुई है। हाल ही में डेमोक्रेटिक समिति द्वारा ट्रंप और एपस्टीन से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बाद अमेरिका में राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।

    भाजपा ने दावे को बताया अफवाह
    पृथ्वीराज चव्हाण के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका की किसी भी घटना का भारत की सरकार या प्रधानमंत्री से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इस तरह की बातें जानबूझकर फैलाई जा रही अफवाहें हैं।

    भाजपा का आरोप है कि मराठी प्रधानमंत्री बनने और सत्ता परिवर्तन के दावे देश में भ्रम और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हैं। पार्टी ने साफ कहा है कि सरकार पूरी तरह स्थिर है और ऐसे बयानों का कोई आधार नहीं है।

    फिलहाल, पृथ्वीराज चव्हाण के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। जहां कांग्रेस समर्थक इसे संभावित बड़े बदलाव का संकेत बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे निराधार बयानबाजी मान रही है। अब सभी की निगाहें 19 दिसंबर पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि यह दावा महज राजनीतिक बयान था या इसके पीछे कोई बड़ा घटनाक्रम छिपा है।

  • India vs Pakistan Live Score: भारत 200 के पार, चौहान और पटेल क्रीज पर डटे

    India vs Pakistan Live Score: भारत 200 के पार, चौहान और पटेल क्रीज पर डटे


    नई दिल्‍ली । इंतजार की घड़ियां खत्म हो चुकी हैं। अंडर-19 एशिया कप 2025 में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान आमने-सामने हैं। सीनियर टीमों की तरह ही इस मुकाबले में भी जबरदस्त रोमांच देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि भारतीय टीम में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा सितारे भी इस महामुकाबले का आकर्षण बने हुए हैं।

    भारत और पाकिस्तान, दोनों ही टीमों ने टूर्नामेंट की शुरुआत धमाकेदार जीत के साथ की थी। भारत ने मलेशिया को 234 रन के बड़े अंतर से हराया, जबकि पाकिस्तान ने भी मलेशिया को 297 रन से करारी शिकस्त दी। अब इन दोनों बड़ी जीत दर्ज करने वाली टीमों की टक्कर से मुकाबले का रोमांच और बढ़ गया है।

    पिछले मैचों में दोनों टीमों की एक और समानता देखने को मिली थी। भारत की ओर से वैभव सूर्यवंशी ने महज 95 गेंदों में 171 रन की तूफानी पारी खेली थी, जिसमें 14 छक्के शामिल थे। वहीं पाकिस्तान के लिए समीर मिन्हास ने 148 गेंदों पर 177 रन बनाए थे और उनकी पारी में 8 छक्के लगे थे।

    दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों बल्लेबाज अपनी-अपनी टीमों के ओपनर हैं। मौजूदा मुकाबले में भारत का स्कोर 200 रन के पार पहुंच चुका है और चौहान व पटेल क्रीज पर मजबूती से टिके हुए हैं, जिससे टीम इंडिया बड़े स्कोर की ओर बढ़ती नजर आ रही है।

  • दमोह में दिल दहला देने वाला हादसा: चूल्हे की चिंगारी से झोपड़ी में लगी आग, 4 महीने के मासूम की जिंदा जलकर मौत

    दमोह में दिल दहला देने वाला हादसा: चूल्हे की चिंगारी से झोपड़ी में लगी आग, 4 महीने के मासूम की जिंदा जलकर मौत


    मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जहां एक छोटी-सी लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली। देहात थाना क्षेत्र के ग्राम बांसातारखेड़ा के चिथरयाऊ टोला में खेत पर बनी कच्ची झोपड़ी में आग लगने से चार महीने के मासूम बच्चे की जिंदा जलकर मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजन गहरे सदमे में हैं।

    खेत में काम कर रहे थे माता-पिता

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बांसातारखेड़ा निवासी जितेंद्र गौंड गांव के ही किसान शैलेंद्र तिवारी के खेत में सिंचाई का ठेका लेकर काम करता था। खेत की देखरेख के लिए उसने वहीं एक अस्थायी झोपड़ी बना रखी थी, जहां वह अपने परिवार के साथ रहता था।शनिवार की रात जितेंद्र अपनी पत्नी धनाबाई के साथ खेत में पानी देने गया हुआ था। इस दौरान उनका चार महीने का बेटा निशांत झोपड़ी के अंदर सो रहा था। झोपड़ी में चूल्हा जल रहा था जिस पर खाना बनाया गया था।

    चूल्हे की चिंगारी बनी काल
    बताया जा रहा है कि रात के समय चूल्हे से निकली एक चिंगारी झोपड़ी में रखे कपड़ों पर गिर गई। देखते ही देखते आग भड़क उठी। झोपड़ी कच्ची होने और आसपास सूखी घास व अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद होने के कारण आग ने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया। आग लगने के बाद झोपड़ी के अंदर सो रहा मासूम जोर-जोर से रोने लगा। उसकी चीखें सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाया और माता-पिता को सूचना दी।

    अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम

    ग्रामीणों की आवाज सुनते ही जितेंद्र और धनाबाई दौड़ते हुए झोपड़ी की ओर पहुंचे। किसी तरह आग की लपटों के बीच से वे अपने झुलसे हुए बच्चे को बाहर निकाल पाए। आनन-फानन में मासूम को इलाज के लिए जिला अस्पताल दमोह ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इस हादसे में पूरी झोपड़ी जलकर खाक हो गई। परिवार के पास रहने और खाने तक का सामान भी नहीं बचा।

    प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची
    घटना की सूचना मिलते ही देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। देर रात एएसपी सुजीत सिंह भदोरिया, दमोह एसडीएम आर.एल. बागरी और पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। नगर पुलिस अधीक्षक एच.आर. पांडेय ने बताया कि यह एक दुर्घटनाजन्य मामला प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    पोस्टमार्टम के बाद सौंपा जाएगा शव

    मासूम के शव को जिला अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखवाया गया है। प्रशासन के अनुसार, रविवार को तहसीलदार की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। घटना के बाद से परिजन गहरे सदमे में हैं और रात में ही अपने गांव लौट गए थे।

    पीड़ित परिवार को मिलेगी आर्थिक सहायता

    दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने बताया कि घटना बेहद दुखद है। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही शासन की योजनाओं के तहत मिलने वाली मदद भी सुनिश्चित की जाएगी। देहात थाना प्रभारी रचना मिश्रा ने कहा कि मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण चूल्हे की चिंगारी ही सामने आया है।

    गांव में शोक का माहौल

    इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है। हर कोई इस बात से आहत है कि महज चार महीने का मासूम इस तरह काल का शिकार हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में बनी कच्ची झोपड़ियों में आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन मजबूरी में लोग वहीं रहने को विवश होते हैं।

  • SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी: जानिए आपका नाम है या नहीं, ऑनलाइन-ऑफलाइन चेक करने का तरीका

    SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी: जानिए आपका नाम है या नहीं, ऑनलाइन-ऑफलाइन चेक करने का तरीका


    नई दिल्‍ली । पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, गोवा, राजस्थान और लक्षद्वीप में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत फॉर्म भरने की समयसीमा पूरी हो चुकी है। चुनाव आयोग 16 दिसंबर को इन राज्यों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करेगा। आयोग के मुताबिक, केवल पश्चिम बंगाल में करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हो सकते हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में SIR फॉर्म में गड़बड़ियां पाई गई हैं।

    जिन मतदाताओं के फॉर्म अधूरे हैं या जिनका सत्यापन नहीं हो पाया है, उनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं किए जाएंगे। ऐसे मामलों में मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है, जहां पासपोर्ट, डोमिसाइल सर्टिफिकेट और जन्म प्रमाणपत्र जैसे चुनाव आयोग द्वारा मान्य 12 दस्तावेजों के आधार पर जांच के बाद नाम जोड़ा जाएगा।

    मतदाता ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम देख सकते हैं। ऑनलाइन जांच के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट eci.gov.in पर नाम या EPIC नंबर डालकर सर्च किया जा सकता है। वहीं ऑफलाइन जांच के लिए हर पोलिंग स्टेशन पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास ड्राफ्ट लिस्ट उपलब्ध होगी।

    अगर किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, तो वह दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है। चुनाव आयोग ने इसके लिए एक महीने का समय दिया है। दावों की जांच और जरूरत पड़ने पर सुनवाई के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।

  • विशेष वैदिक विवाह और भूत शुद्धि विवाह के गहन आध्यात्मिक और धार्मिक आयाम

    विशेष वैदिक विवाह और भूत शुद्धि विवाह के गहन आध्यात्मिक और धार्मिक आयाम


    नई दिल्ली । भारतीय परंपरा में विवाह को केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं बल्कि सोलह संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। यह वह आधारशिला है जिस पर एक व्यक्ति अपने जीवन के चार पुरुषार्थों धर्म अर्थ काम और मोक्ष को साधने के लिए गृहस्थ जीवन की शुरुआत करता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में विवाह की विधियाँ अलग हो सकती हैं लेकिन उनका मूल उद्देश्य जीवन को धार्मिक आध्यात्मिक और सामाजिक आधार प्रदान करना होता है। साल 2025 में भारतीय विवाह परंपरा के दो विशिष्ट स्वरूपों ने देश और विदेश दोनों जगह चर्चा का केंद्र बनकर इसकी गरिमा को एक बार फिर स्थापित किया। ये थे वैदिक विवाह और योगिक परंपरा से जुड़ा भूत शुद्धि विवाह।

    वैदिक विवाह सनातन धर्म का मूल संस्कार

    वैदिक विवाह हिंदू धर्म का सबसे पुराना और मूल विवाह संस्कार माना जाता है। इसका उल्लेख ऋग्वेद यजुर्वेद और अथर्ववेद जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। 2025 में कई हाई-प्रोफाइल और आम लोगों द्वारा इस पारंपरिक पद्धति को अपनाने से यह चर्चा में रहा। कई आधुनिक जोड़ों ने सादगी मंत्रों की महत्ता और विवाह के आध्यात्मिक उद्देश्य पर ज़ोर देने के लिए इसे चुना जिससे यह साबित हुआ कि सनातन संस्कृति आज भी प्रासंगिक है।

    वैदिक विवाह की विशिष्ट परंपराएं
    सप्तपदी और अग्नि साक्षी: इस विवाह का सबसे केंद्रीय अनुष्ठान सप्तपदी सात फेरे है जिसमें वर और वधू सात पवित्र वचन लेते हैं। ये फेरे पवित्र अग्नि अग्नि देवता को साक्षी मानकर लिए जाते हैं जिन्हें सभी अनुष्ठानों का शुद्धिकर्ता माना जाता है।मंत्रोच्चारण का महत्व विवाह के दौरान उच्चारित होने वाले प्रत्येक मंत्र का अपना विशिष्ट अर्थ होता है जो पति-पत्नी को उनके कर्तव्यों जीवन के लक्ष्य और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का बोध कराता है।उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य केवल संतानोत्पत्ति या सहजीवन नहीं बल्कि धर्म के मार्ग पर चलते हुए गृहस्थ जीवन की शुरुआत करना आपसी सहयोग से धर्म का पालन करना और उत्तम संतान की प्राप्ति माना गया है।

    भूत शुद्धि विवाह: योगिक शुद्धिकरण की अनूठी रीत

    साल 2025 में चर्चा में रहा एक अन्य विशिष्ट अनुष्ठान भूत शुद्धि विवाह है। यह योगिक परंपरा से जुड़ा एक ऐसा अनुष्ठान है जो वैवाहिक रिश्ते की शुरुआत से पहले स्वयं को पूर्ण रूप से शुद्ध करने पर ज़ोर देता है।भूत शुद्धि का अर्थ है पंचभूतों पृथ्वी जल अग्नि वायु और आकाश की शुद्धि। योगिक दर्शन के अनुसार हमारा शरीर इन्हीं पाँच तत्वों से बना है। इस विवाह पद्धति को चुनने वाले जोड़ों का मानना है कि रिश्ते की शुरुआत भौतिक इच्छाओं या सामाजिक दबाव से नहीं बल्कि आत्मिक और मौलिक शुद्धिकरण से होनी चाहिए।

    भूत शुद्धि विवाह की ख़ास परंपराएं

    पंचभूतों का अनुष्ठान: इस विधि में विशिष्ट मंत्रों मुद्राओं और अनुष्ठानों के माध्यम से शरीर के पंच तत्वों को शुद्ध किया जाता है। यह माना जाता है कि तत्वों के शुद्ध होने पर व्यक्ति अपने साथी के साथ केवल शारीरिक या मानसिक स्तर पर नहीं बल्कि ऊर्जा के स्तर पर भी जुड़ता है।आध्यात्मिक तैयारी: विवाह से पूर्व वर और वधू को कुछ विशिष्ट योगिक क्रियाओं और ध्यान में शामिल होना पड़ता है जो उन्हें रिश्ते की पवित्रता और गहराई को समझने के लिए तैयार करती हैं। गहन उद्देश्य यह विवाह शारीरिक और सामाजिक बंधन से ऊपर उठकर एक-दूसरे के आध्यात्मिक विकास में सहायक बनने पर केंद्रित होता है। इसका उद्देश्य गृहस्थ जीवन को मोक्ष की ओर ले जाने का एक माध्यम बनाना है।

    साल 2025 के ये विशेष विवाह इस बात की पुष्टि करते हैं कि आधुनिकता की चकाचौंध में भी भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपराएं न केवल जीवित हैं बल्कि अपनी आध्यात्मिक गहराई और गहन उद्देश्य के कारण आज भी प्रासंगिक हैं। जहाँ वैदिक विवाह ने सनातन धर्म की मूल शक्ति को दर्शाया वहीं भूत शुद्धि विवाह ने विवाह में योग और आध्यात्म के समावेश का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया जिससे ये दोनों पद्धतियाँ साल भर चर्चा का विषय रहीं।

  • यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी: सैलरी, भत्ते, पेंशन और सुविधाओं का पूरा लेखा-जोखा

    यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी: सैलरी, भत्ते, पेंशन और सुविधाओं का पूरा लेखा-जोखा


    नई दिल्‍ली । केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महाराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी अब उत्तर प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्वप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाहके करीबी माने जाने वाले पंकज चौधरी का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है।

    राजनीतिक सफर और प्रोफाइल
    ओबीसी वर्ग की कुर्मी जाति से आने वाले पंकज चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पार्षद के रूप में की थी। इसके बाद वे गोरखपुर के डिप्टी मेयर बने और वर्ष 1991 में पहली बार लोकसभा पहुंचकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। अब तक वे सात बार सांसद चुने जा चुके हैं और दो बार केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

    पंकज चौधरी की कुल संपत्ति करीब 41 करोड़ रुपये बताई जाती है। वे राहत रूह तेल कंपनी के मालिक हैं और उनकी शैक्षणिक योग्यता 12वीं तक है।

    यूपी बीजेपी अध्यक्ष को सैलरी मिलती है या नहीं?
    सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कोई सरकारी या संवैधानिक पद नहीं है। यह पूरी तरह पार्टी का संगठनात्मक पद होता है।
    इस कारण इस पद के लिए सरकार की ओर से कोई तय वेतन, पे-स्केल या सैलरी स्लिप नहीं मिलती।

    फिर कमाई कैसे होती है?
    हालांकि औपचारिक सैलरी नहीं होती, लेकिन भाजपा अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों को मानदेय और प्रशासनिक सहयोग देती है।

    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये मासिक मानदेय मिलने की चर्चा रही है।

    राज्य अध्यक्षों के लिए कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार यूपी बीजेपी अध्यक्ष को भी करीब 1 से 1.5 लाख रुपये प्रति माह मानदेय मिल सकता है।

    इसके अलावा पार्टी कार्यों के लिए अलग से भत्ते और खर्च की व्यवस्था होती है।

    यूपी बीजेपी अध्यक्ष को मिलने वाली सुविधाएं
    सैलरी तय न होने के बावजूद सुविधाओं के मामले में यह पद बेहद प्रभावशाली माना जाता है।

    पूरी तरह फर्निश्ड ऑफिस

    पर्सनल सेक्रेटरी, राजनीतिक सलाहकार और सपोर्ट स्टाफ

    आधिकारिक यात्राओं का पूरा खर्च पार्टी वहन करती है

    हवाई, रेल और सड़क यात्रा की सुविधा

    ड्राइवर सहित वाहन, होटल और भोजन का खर्च

    फर्निश्ड आवास की सुविधा

    निजी स्टाफ की सैलरी भी पार्टी फंड से

    मेडिकल सुविधाएं या तो पार्टी के माध्यम से मिलती हैं या फिर उनके मौजूदा सरकारी पद के नियमों के तहत।

    सांसद और मंत्री के तौर पर अलग आय
    पंकज चौधरी फिलहाल लोकसभा सांसद और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री हैं, इसलिए उन्हें इन पदों से मिलने वाली सैलरी और भत्ते अलग से मिलते रहेंगे।

    सांसद के रूप में:
    मासिक वेतन: 1,24,000 रुपये

    निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: 87,000 रुपये

    कार्यालय खर्च: 75,000 रुपये

    दैनिक भत्ता: 2,500 रुपये

    दिल्ली में मुफ्त सरकारी आवास या 2 लाख रुपये HRA

    इसके अलावा:

    150 टेलीफोन कॉल

    50,000 यूनिट बिजली

    24,000 लीटर पानी

    34 हवाई यात्राएं

    एसी ट्रेन यात्रा की सुविधा

    मंत्री पद का लाभ:
    राज्य मंत्री के रूप में उन्हें लगभग 2.30 लाख रुपये प्रतिमाह का वेतन और भत्ता मिलता है।

    पेंशन का क्या नियम है?
    मंत्री पद छोड़ने पर अलग से कोई पेंशन नहीं मिलती

    पेंशन केवल सांसद या विधायक के रूप में किए गए कार्यकाल पर आधारित होती है

    पूर्व सांसदों को वर्तमान में 31,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जो लंबे कार्यकाल के साथ बढ़ती जाती है

    पंकज चौधरी को भविष्य में पेंशन का लाभ उनके लंबे संसदीय अनुभव के आधार पर मिलेगा, न कि मंत्री या पार्टी अध्यक्ष पद के कारण।

    कुल मिलाकर, यूपी बीजेपी अध्यक्ष का पद वेतन से ज्यादा ताकत, प्रभाव और राजनीतिक जिम्मेदारी का होता है। पंकज चौधरी के लिए यह भूमिका न सिर्फ संगठनात्मक रूप से अहम है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की रणनीति में भी निर्णायक मानी जा रही है।

  • Netflix पर रिलीज होते ही नंबर-1 बनी 6 एपिसोड की ये सीरीज, कॉमेडी-ड्रामा के साथ दिल छू लेने वाली कहानी

    Netflix पर रिलीज होते ही नंबर-1 बनी 6 एपिसोड की ये सीरीज, कॉमेडी-ड्रामा के साथ दिल छू लेने वाली कहानी


    नई दिल्ली/ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने बीते कुछ सालों में मनोरंजन की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। अब दर्शकों को अच्छी कहानी और दमदार परफॉर्मेंस के लिए थिएटर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। Netflix जैसे प्लेटफॉर्म हर हफ्ते नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज करते हैं, जिनमें से कुछ कंटेंट ऐसा होता है जो रिलीज होते ही दर्शकों के दिलों में जगह बना लेता है।ऐसी ही एक नई वेब सीरीज ने इन दिनों Netflix पर धूम मचा रखी है। 12 दिसंबर को रिलीज हुई इस 6 एपिसोड की सीरीज ने आते ही ट्रेंडिंग चार्ट में टॉप पोजिशन हासिल कर ली है। कम एपिसोड, दमदार कहानी और कॉमेडी-ड्रामा का बेहतरीन बैलेंस इसे बाकी कंटेंट से अलग बनाता है।

    रिलीज होते ही क्यों छा गई यह सीरीज?
    आज के समय में दर्शक लंबी-लंबी सीरीज से थोड़ा बोर हो चुके हैं। ऐसे में 6 एपिसोड की यह सीरीज उन्हें एक परफेक्ट बिंज-वॉच ऑप्शन देती है। कहानी न तो बेवजह खिंची हुई है और न ही जरूरत से ज्यादा भारी। यही वजह है कि रिलीज के कुछ ही घंटों में यह Netflix की Top Trending Series की लिस्ट में नंबर-1 पर पहुंच गई। दर्शकों को इसमें कॉमेडी, इमोशन और रियल लाइफ स्ट्रगल का ऐसा मिक्स देखने को मिल रहा है, जिससे वे खुद को जोड़ पा रहे हैं।

    क्या है इस वेब सीरीज की कहानी?
    इस सीरीज की कहानी एक ऐसे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी शादी टूटने की कगार पर है। उसकी और उसकी पत्नी के बीच तलाक का सबसे बड़ा कारण पिता बनने को लेकर मतभेद है। लड़का पिता बनना चाहता है, जबकि उसकी पत्नी इसके लिए तैयार नहीं होती। कई कोशिशों के बाद भी जब दोनों के बीच सहमति नहीं बनती, तो आखिरकार उनका तलाक हो जाता है। तलाक के बाद कहानी एक नया मोड़ लेती है। हालात ऐसे बनते हैं कि उस युवक के अंदर सिंगल फादर बनने की इच्छा जाग उठती है।

    जिम्मेदार बनने की जद्दोजहद
    यह कहानी सिर्फ पिता बनने की चाहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि एक गैर-जिम्मेदार इंसान के लिए जिम्मेदारी उठाना कितना मुश्किल हो सकता है। सीरीज का हीरो खुद मानता है कि वह जिंदगी को हल्के में लेने वाला इंसान रहा है।अब सवाल यह है कि क्या वह वाकई एक अच्छा सिंगल फादर बन पाएगा? क्या वह अपनी आदतों को बदल पाएगा? और क्या समाज, परिवार और खुद से चल रही उसकी लड़ाई में वह टिक पाएगा? इन सभी सवालों के जवाब सीरीज के हर एपिसोड में धीरे-धीरे सामने आते हैं।

    कॉमेडी के साथ इमोशन का तड़का
    इस सीरीज की सबसे बड़ी खासियत इसका नेचुरल ह्यूमर है। कहानी में कई ऐसे सीन हैं जो आपको हंसाएंगे, लेकिन उसी पल कुछ दृश्य ऐसे भी आते हैं जो भावुक कर देते हैं। यही कॉमेडी और ड्रामा का संतुलन दर्शकों को बांधे रखता है। डायलॉग्स सरल हैं, किरदार असली लगते हैं और सिचुएशन्स रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हुई महसूस होती हैं। यही वजह है कि दर्शक इसे रियल और रिलेटेबल बता रहे हैं।

    कम एपिसोड, ज्यादा असर
    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग ऐसी सीरीज पसंद करते हैं, जिन्हें कम समय में देखा जा सके। 6 एपिसोड की यह सीरीज बिना वक्त बर्बाद किए सीधे कहानी पर आती है और हर एपिसोड में कुछ नया देती है। हर एपिसोड खत्म होने के बाद अगला देखने की उत्सुकता बनी रहती है, जो किसी भी अच्छी सीरीज की पहचान होती है। क्यों देखनी चाहिए यह सीरीज? अगर आप- हल्की-फुल्की लेकिन अर्थपूर्ण कहानी पसंद करते हैं कॉमेडी के साथ इमोशनल ड्रामा देखना चाहते हैं कम एपिसोड वाली बिंज-वॉच सीरीज ढूंढ रहे हैं रिलेशनशिप और पेरेंटहुड जैसे विषयों में दिलचस्पी रखते है तो यह वेब सीरीज आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।

  • महाराष्ट्र: सिर से टोपी को लेकर हुआ झगड़ा, बीच-बचाव करने गई गर्भवती महिला के बच्चे की गर्भ में मौत

    महाराष्ट्र: सिर से टोपी को लेकर हुआ झगड़ा, बीच-बचाव करने गई गर्भवती महिला के बच्चे की गर्भ में मौत


    महाराष्ट्र। के कल्याण, मोहने गांव के लहूजीनगर इलाके से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक छोटी सी बात पर शुरू हुई पड़ोसियों की लड़ाई ने एक मासूम की जान ले ली। आरोप है कि लड़ाई रोकने गई एक गर्भवती महिला पर हमला कर उसके पेट में लात मारी गई, जिसके परिणामस्वरूप गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई।

    मामूली बहस बनी जानलेवा हमला
    जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत एक पड़ोसी द्वारा दूसरे के सिर से टोपी उतारने को कहने जैसी मामूली बात पर हुई। यह बहस देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इसी दौरान, जब एक गर्भवती महिला ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो कथित तौर पर आरोपी ने उसके पेट में जोरदार लात मार दी। इस क्रूर हमले के कारण महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और उसके गर्भस्थ शिशु की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई।

    पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
    इस हृदय विदारक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। साथ ही, क्षेत्र में लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाओं के कारण स्थानीय पुलिस की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस द्वारा तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस तरह की घटनाओं का बार-बार होना कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल पर पहुँचकर जाँच शुरू कर दी है।

    अतिरिक्त खबर का अंश (संबंधित जानकारी)
    राजनीतिक बयान: इसी बीच, महाराष्ट्र में राजनीतिक गलियारों से एक खबर यह भी है, जहाँ शिवसेना नेता उदय सामंत ने उद्धव ठाकरे से सवाल किया है, “क्या आपमें कांग्रेस के उपमुख्यमंत्रियों से इस्तीफा मांगने की हिम्मत है?”

    सड़क हादसा: महाराष्ट्र के बीड में एक डीजल टैंकर से कार टकराने के बाद हाइवे पर धुएं का गुबार छा गया, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा।

  • इंदौर-उज्जैन मेट्रोपालिटन रीजन में रतलाम जिला भी होगा शामिल सीएम डॉ. मोहन यादव की अहम बैठक

    इंदौर-उज्जैन मेट्रोपालिटन रीजन में रतलाम जिला भी होगा शामिल सीएम डॉ. मोहन यादव की अहम बैठक


    इंदौर । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में एक अहम बैठक में इंदौर-उज्जैन मेट्रोपालिटन रीजन के विकास की योजनाओं पर चर्चा की। इस बैठक में इंदौर उज्जैन देवास धार और शाजापुर जिलों के विकास कार्यों की समीक्षा की गई। सीएम ने इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट नई बस सेवा आईटी हब और नाइट लाइफ पॉलिसी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार किया।

    इस बैठक में एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है कि रतलाम जिले को भी इंदौर-उज्जैन मेट्रोपालिटन रीजन में शामिल किया जाएगा। इससे पूरे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी और यह क्षेत्र और भी विकसित हो सकेगा। मेट्रो का विस्तार और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास से इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

    मुख्यमंत्री की बैठक में शामिल मुद्दे

    बैठक में इंदौर के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई जैसे कि एबी रोड पर एलिवेटेड कॉरिडोर मास्टर प्लान की अधूरी सड़कों का निर्माण और यातायात की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में किए जाने वाले उपाय। सीएम ने संबंधित विभागों के अधिकारियों से इन समस्याओं का समाधान निकालने का आग्रह किया।

    बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सीएम से कहा “अच्छा हुआ आपने हमें बता दिया कि आप इंदौर के प्रभारी मंत्री नहीं हैं। अधिकारी हमें चमकाते थे कि हम बैठक नहीं कर सकते अब हम इंदौर के विकास के लिए बैठक कर सकेंगे।” इस पर सीएम ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा जो बांटना था बांट दिया और जो नहीं बटा उसे अपने पास रख लिया।

    इंदौर-उज्जैन मेट्रोपालिटन रीजन में रतलाम जिले को शामिल करने की योजना के साथ-साथ इंदौर में मेट्रो बस सेवा और शहर के विकास कार्यों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बैठक में इंदौर की यातायात समस्याओं और बुनियादी ढांचे के विकास पर भी चर्चा की गई। इस बैठक के माध्यम से इंदौर के विकास को और अधिक गति मिलने की संभावना है।

  • भारत की बल्लेबाजी का धमाका: 400+ रनों की ऐतिहासिक पारियां जो वनडे क्रिकेट में बनाती हैं टीम इंडिया को अलग

    भारत की बल्लेबाजी का धमाका: 400+ रनों की ऐतिहासिक पारियां जो वनडे क्रिकेट में बनाती हैं टीम इंडिया को अलग

    नई दिल्‍ली । भारतीय क्रिकेट टीम ने वनडे क्रिकेट में हमेशा अपनी आक्रामक और रणनीतिक बल्लेबाजी से विरोधियों को दबाव में रखा है। बड़े स्कोर बनाने की क्षमता अब टीम इंडिया की पहचान बन चुकी है और चाहे घरेलू मैदान हो या विदेशी पिच, भारतीय बल्लेबाजों ने कई बार 400 से अधिक रन बनाकर इतिहास रचा है।

    8 दिसंबर 2011 को इंदौर में वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम ने 418/5 रन बनाकर शानदार जीत हासिल की। इस पारी में रन रेट 8.36 रहा और भारतीय बल्लेबाजों की तेज और आक्रामक सोच का प्रदर्शन हुआ। इसी तरह, 15 दिसंबर 2009 को राजकोट में श्रीलंका के खिलाफ 414/7 रन की पारी ने टीम की गहराई वाली बल्लेबाजी और बड़े शॉट्स खेलने की क्षमता दिखाई।

    2007 वर्ल्ड कप में पोर्ट ऑफ स्पेन में बरमूडा के खिलाफ भारत ने 413/5 रन बनाकर मुकाबला पूरी तरह एकतरफा कर दिया। इस पारी में भारतीय बल्लेबाजों ने हर दिशा में चौके-छक्कों की बरसात की और अपनी आक्रामक शैली को पूरी दुनिया के सामने दिखाया। वनडे वर्ल्ड कप 2023 में बेंगलुरु में नीदरलैंड्स के खिलाफ 410/4 रन बनाकर टीम ने घरेलू दर्शकों के सामने अपनी दबदबे वाली छवि और मजबूत की।

    10 दिसंबर 2022 को चटगांव में बांग्लादेश के खिलाफ 409/8 रन बनाकर भारतीय बल्लेबाजों ने विदेशी धरती पर भी अपनी परिपक्वता और आक्रामक रणनीति का प्रदर्शन किया। ये ऐतिहासिक पारियां साबित करती हैं कि टीम इंडिया की बल्लेबाजी हमेशा विरोधियों के लिए चुनौती बनी रहती है और बड़े स्कोर बनाने में उसकी विश्वस्तरीय क्षमता को दर्शाती हैं।