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  • महिला शक्ति बनाम राजनीति ,मध्य प्रदेश में टिकट वितरण और भागीदारी, का पूरा लेखा जोखा


    भोपाल । भोपाल मध्य प्रदेश में महिला आरक्षण और राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित न होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे लोकतंत्र के लिए काला अध्याय बताया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष के रवैये से उसकी महिला विरोधी सोच उजागर होती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात बताया है। इसी मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में सियासत तेज हो गई है।

    लोकसभा 2024 के चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी उनतीस सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा किया। भाजपा ने इन सीटों पर छह महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया और सभी छह महिलाओं ने जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस ने उनतीस में से केवल एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा जो रीवा से नीलम अभय मिश्रा थीं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

    राज्यसभा में मध्य प्रदेश की ग्यारह सीटों में से आठ पर भारतीय जनता पार्टी और तीन पर कांग्रेस का प्रतिनिधित्व है। भाजपा के आठ राज्यसभा सांसदों में तीन महिलाएं शामिल हैं। कांग्रेस के तीनों राज्यसभा सांसदों में एक भी महिला प्रतिनिधि नहीं है। यह आंकड़ा संसद के उच्च सदन में महिलाओं की भागीदारी की स्थिति को स्पष्ट करता है।

    विधानसभा चुनाव 2023 में मध्य प्रदेश की दो सौ तीस सीटों में भाजपा ने एक सौ तिरसठ सीटें जीतीं और कांग्रेस ने छियासठ सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट अन्य दल के खाते में गई। दोनों प्रमुख दलों ने कुल छप्पन महिला प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था जिनमें से सत्ताईस महिलाएं विधायक बनीं। भाजपा ने दो सौ तीस सीटों में से केवल सत्ताईस सीटों पर महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया जो लगभग ग्यारह प्रतिशत है। इनमें से इक्कीस महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुंचीं। कांग्रेस ने उनतीस महिलाओं को टिकट दिया जो लगभग तेरह प्रतिशत है लेकिन केवल पांच महिलाएं विधायक बन सकीं।

    इसके विपरीत मध्य प्रदेश की पंचायत व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी काफी मजबूत दिखाई देती है। राज्य की कुल पंचायतों में लगभग दो लाख नब्बे हजार से अधिक महिला जनप्रतिनिधि सक्रिय हैं जो कुल प्रतिनिधियों का इक्यावन प्रतिशत से अधिक है। चौबीस जिला पंचायतों में महिलाएं अध्यक्ष के पद पर हैं। चार सौ चवालीस महिलाएं जिला पंचायत सदस्य हैं। एक सौ उनहत्तर महिलाएं जनपद अध्यक्ष हैं और तीन हजार चार सौ पच्चीस महिलाएं जनपद सदस्य के रूप में काम कर रही हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी मजबूत है लेकिन विधानसभा और संसद स्तर पर उनकी संख्या अभी भी अपेक्षाकृत कम है।

    समग्र रूप से देखा जाए तो मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में पंचायत स्तर पर बेहतर स्थिति है लेकिन विधानसभा लोकसभा और राज्यसभा में राजनीतिक दलों द्वारा महिलाओं को टिकट देने की दर अभी भी सीमित है। यह मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आने वाले चुनावों में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर दबाव और बढ़ने की संभावना है।

  • हॉलीवुड फिल्मों पर भारतीय संस्कृति और विविधता का गहरा प्रभाव…

    हॉलीवुड फिल्मों पर भारतीय संस्कृति और विविधता का गहरा प्रभाव…


    नई दिल्ली। विश्व सिनेमा के मानचित्र पर भारत हमेशा से अपनी सांस्कृतिक विविधता और अनूठी कहानियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। हॉलीवुड के बड़े फिल्मकारों ने समय-समय पर भारत की मिट्टी से जुड़ी कहानियों को पर्दे पर उतारकर न केवल वैश्विक स्तर पर सराहना प्राप्त की है बल्कि कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी अपने नाम किए हैं।
    भारतीय पृष्ठभूमि पर आधारित ये फिल्में दर्शाती हैं कि यहां की कहानियां भाषाई और भौगोलिक सीमाओं को पार कर मानवीय संवेदनाओं को छूने की शक्ति रखती हैं। चाहे वह मुंबई की गलियों का संघर्ष हो या स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली गाथा भारत के बैकड्रॉप में लिखी गई इन पटकथाओं ने हॉलीवुड के तकनीकी कौशल के साथ मिलकर सिनेमा जगत को कुछ ऐसी कालजयी कृतियां दी हैं जिन्हें सदियों तक याद रखा जाएगा।

    इन्हीं ऐतिहासिक फिल्मों में गांधी का नाम सबसे ऊपर आता है जिसने महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग को पूरी दुनिया के सामने जीवंत कर दिया। इस फिल्म ने भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्याय को इतनी कुशलता से प्रस्तुत किया कि इसने कुल आठ ऑस्कर पुरस्कार जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।

    इसी तरह स्लमडॉग मिलेनियर ने मुंबई की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले एक युवक के संघर्ष और उसकी किस्मत की कहानी को इस तरह दिखाया कि यह वैश्विक स्तर पर एक बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई। यह फिल्म भारतीय लेखक के उपन्यास पर आधारित थी और इसने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति के दम पर आठ ऑस्कर अवॉर्ड्स अपने नाम किए थे। यह फिल्में साबित करती हैं कि भारतीय कहानियों में वह गहराई है जो दुनिया के किसी भी कोने के दर्शक को प्रभावित कर सकती है।

    साहित्यिक कृतियों को पर्दे पर उतारने के मामले में लाइफ ऑफ पाई और द जंगल बुक जैसी फिल्मों ने भी जबरदस्त सफलता हासिल की है। पुडुचेरी से शुरू होकर समुद्र की लहरों के बीच एक लड़के और बाघ के जीवित बचने की अद्भुत दास्तान ने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया था।

    वहीं मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के जंगलों की पृष्ठभूमि पर आधारित मोगली की कहानी ने बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी का दिल जीता और अरबों डॉलर का कारोबार किया। इन फिल्मों की सफलता का सबसे बड़ा कारण भारत की वह रहस्यमयी और रोमांचक छवि रही है जिसे हॉलीवुड ने अपनी उन्नत तकनीक के जरिए और भी भव्य बना दिया।

    सच्ची घटनाओं और मानवीय रिश्तों पर आधारित फिल्में जैसे लायन ने भी वैश्विक स्तर पर खूब सुर्खियां बटोरीं। एक छोटे बच्चे के अपने परिवार से बिछड़ने और सालों बाद आधुनिक तकनीक की मदद से अपनी जड़ों को तलाशने की यह यात्रा बेहद भावुक थी। इसके अलावा भारतीय संस्कृति और यहां के आतिथ्य सत्कार को मजाकिया और भावनात्मक रूप से दिखाने वाली फिल्में जैसे द बेस्ट एक्जॉटिक मैरीगोल्ड होटल ने भी विदेशी दर्शकों को भारत के प्रति आकर्षित किया।

    यहां तक कि इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम जैसी साहसिक फिल्मों ने भी अस्सी के दशक में भारत की रहस्यमयी छवि को वैश्विक पटल पर मजबूती से रखा था। यह स्पष्ट है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और यहां के परिवेश ने हॉलीवुड को हमेशा एक उर्वर जमीन प्रदान की है जहां रचनात्मकता और वास्तविकता का संगम देखने को मिलता है।

    भारतीय कहानियों और संस्कृति पर आधारित उन प्रमुख हॉलीवुड फिल्मों का विश्लेषण जिन्होंने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई और प्रतिष्ठित ऑस्कर पुरस्कार जीते।
  • नर्मदापुरम में सनसनीखेज हत्या, खाने को लेकर विवाद में गई जान; पुलिस पर भी हमला

    नर्मदापुरम में सनसनीखेज हत्या, खाने को लेकर विवाद में गई जान; पुलिस पर भी हमला


    नई दिल्ली। नर्मदापुरम जिले के शिवपुर थाना क्षेत्र के ग्राम नाहरकोला में रविवार रात एक शादी समारोह में मामूली बात ने खूनी रूप ले लिया। जानकारी के मुताबिक, शादी में आए एक युवक को खाना खाने के लिए कहने पर विवाद इतना बढ़ा कि चाकूबाजी हो गई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हुए हैं। हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब आरोपियों को पकड़ने पहुंची पुलिस टीम पर भी हमला कर दिया गया।

    शराब के नशे में पहुंचे आरोपी, फिर लौटकर किया हमला

    पुलिस के अनुसार, गांव में रामनारायण के भतीजे की शादी चल रही थी। इसी दौरान अमर सिंह कीर शराब के नशे में वहां पहुंचा। रामनारायण ने उसे खाना खाने के लिए कहा, जिस पर वह भड़क गया और विवाद करने लगा। भीड़ ज्यादा होने के कारण उसे समझाकर घर भेज दिया गया, लेकिन कुछ देर बाद वह अपने बेटे लोकेश कीर के साथ डंडा और चाकू लेकर वापस लौटा और झगड़ा शुरू कर दिया।

    बीच-बचाव करने आए लोगों पर चाकू से वार, एक की मौत

    विवाद बढ़ने पर दूल्हे के चाचा हरिनारायण बीच-बचाव के लिए आगे आए, लेकिन लोकेश ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद दौलत कीर, रामनारायण, जयनारायण और क्षमा कीर सहित अन्य लोग भी बीच में आए, जिन पर आरोपियों ने हमला कर दिया। इस हमले में दौलत कीर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    पुलिस टीम पर हमला, आरक्षक को 9 जगह चाकू लगे

    घटना की सूचना मिलने पर रात करीब 1 बजे पुलिस टीम आरोपियों को पकड़ने पहुंची, लेकिन यहां भी हमला हो गया। आरोपियों ने आरक्षक ओम जाट पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे उन्हें पेट, हाथ और पैर में 9 गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

    दो केस दर्ज, आरोपियों की तलाश जारी

    मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास के दो अलग-अलग केस दर्ज किए हैं। फिलहाल आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

    शादी की खुशियां मातम में बदलीं

    परिवार के मुताबिक, अगले दिन बारात निकलनी थी, लेकिन इस घटना ने पूरे घर की खुशियों को मातम में बदल दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी परिवार के ही सदस्य हैं और उनके बीच पिछले कई सालों से विवाद चल रहा था।

  • भीषण गर्मी के बीच स्कूल टाइम बदला, सिवनी में पारा 41 डिग्री पार

    भीषण गर्मी के बीच स्कूल टाइम बदला, सिवनी में पारा 41 डिग्री पार


    नई दिल्ली। सिवनी जिले में गर्मी ने अप्रैल में ही मई-जून जैसे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन में पहली बार 40 के पार पहुंचा। तेज धूप और उमस भरी गर्मी के चलते आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजारों में ठंडे पेय और रसीले फलों की मांग बढ़ गई है, वहीं अस्पतालों में हीट-वेव से प्रभावित मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।

    लू का अलर्ट, आने वाले दिनों में और बढ़ेगी तपिश

    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में लू चलने की संभावना है, जिससे तापमान में और वृद्धि हो सकती है। 19 अप्रैल को अधिकतम तापमान 41.2°C और न्यूनतम 20.6°C दर्ज किया गया। सुबह से ही तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है, हालांकि रात के समय तापमान में थोड़ी गिरावट से कुछ राहत मिल रही है। पिछले कुछ दिनों में भी तापमान लगातार 40 डिग्री के आसपास बना हुआ है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि गर्मी का असर अभी और बढ़ेगा।

    स्कूलों के समय में बदलाव, बच्चों को राहत

    भीषण गर्मी को देखते हुए कलेक्टर नेहा मीना ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। नए आदेश के तहत नर्सरी (प्ले ग्रुप) से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी शासकीय, अशासकीय, नवोदय, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूल अब सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक संचालित होंगे। हालांकि परीक्षाएं पहले से तय समय के अनुसार ही होंगी। इस निर्णय से बच्चों को तेज धूप और लू के असर से काफी राहत मिलेगी।

    लगातार बढ़ रहा तापमान, सतर्क रहने की जरूरत

    पिछले पांच दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तापमान लगातार बढ़ रहा है 15 अप्रैल को 39.6°C, 16 और 17 अप्रैल को 40.4°C, 18 अप्रैल को 40.0°C और 19 अप्रैल को 41.2°C दर्ज किया गया। इससे साफ है कि जिले में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लोगों से सतर्क रहने और जरूरी एहतियात बरतने की अपील कर रहे हैं।

  • वैश्विक तनाव बेअसर भारतीय दवाओं की बढ़ी मांग ,इंदौर के पीथमपुर एसईजेड ने बनाया रिकॉर्ड

    वैश्विक तनाव बेअसर भारतीय दवाओं की बढ़ी मांग ,इंदौर के पीथमपुर एसईजेड ने बनाया रिकॉर्ड


    इंदौर । वैश्विक तनाव और मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने अपनी मजबूती एक बार फिर साबित कर दी है। मध्यप्रदेश के पीथमपुर स्थित स्पेशल इकोनॉमिक जोन की फार्मा कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जेनेरिक दवाओं के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट संकट और व्यापारिक नीतियों में बदलाव जैसी चुनौतियां सामने हैं।

    वाणिज्यिक और उद्योग विभाग के अंतर्गत आने वाले मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पीथमपुर एसईजेड से कुल 14302 करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात हुआ है। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10.46 प्रतिशत अधिक है जो इस क्षेत्र की लगातार बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। खास बात यह है कि इस एसईजेड में लगभग 70 से 80 प्रतिशत कंपनियां फार्मा सेक्टर से जुड़ी हुई हैं।

    यहां निर्मित जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति दुनिया के कई बड़े बाजारों में की जा रही है जिनमें अमेरिका जर्मनी ऑस्ट्रेलिया यूनाइटेड किंगडम और खाड़ी देश शामिल हैं। इन दवाओं की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा कारण इनकी किफायती कीमत और विश्वसनीय गुणवत्ता है। भारत में बनी जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं जिससे वैश्विक बाजार में इनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता काफी मजबूत हो जाती है।

    भारत को लंबे समय से फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता रहा है और इसका कारण यही है कि यहां कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत और बीमा कंपनियों के दबाव के चलते कई देश सस्ती दवाओं की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय फार्मा कंपनियों को बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिल रहे हैं।

    दिलचस्प बात यह भी है कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के जरिए दवाएं बनवा रही हैं और उन्हें अपने ब्रांड नाम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच रही हैं। इससे न केवल भारतीय कंपनियों को फायदा हो रहा है बल्कि देश की निर्यात क्षमता भी लगातार बढ़ रही है।

    हालांकि इस सकारात्मक स्थिति के बीच कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और समुद्री मार्गों पर असर के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है। कंटेनर समय पर रवाना नहीं हो पा रहे हैं जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर लॉजिस्टिक्स पर पड़ता है लेकिन मांग बनी रहने के कारण निर्यात में गिरावट नहीं आई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो भारतीय जेनेरिक दवाओं का निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है। कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद मेड इन इंडिया फार्मा सेक्टर वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है और आगे भी इसके विस्तार की पूरी संभावनाएं हैं।

  • छिंदवाड़ा में नरवाई जलाने पर सख्ती, 60 एफआईआर दर्ज; प्रशासन सख्त

    छिंदवाड़ा में नरवाई जलाने पर सख्ती, 60 एफआईआर दर्ज; प्रशासन सख्त


    नई दिल्ली। छिंदवाड़ा जिले में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने के मामलों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब तक जिले में कुल 60 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। अलग-अलग तहसीलों में हुई कार्रवाई के तहत चौरई में 15, अमरवाड़ा और बिछुआ में 10-10, उमरेठ में 8, तमिया में 6, चांद और हर्रई में 4-4, परासिया में 2 तथा छिंदवाड़ा तहसील में 1 मामला सामने आया है। इसके अलावा कई किसानों पर जुर्माना भी लगाया गया है।

    कलेक्टर के निर्देश तुरंत कार्रवाई और सख्त निगरानी

    जिले के कलेक्टर हरेन्द्र नारायण ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नरवाई जलाने की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां पर्यावरण और मिट्टी की गुणवत्ता के लिए बेहद नुकसानदायक हैं, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    संयुक्त टीमें करेंगी निगरानी, किसानों को दी जाएगी समझाइश

    कलेक्टर ने कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों को लगातार फील्ड में निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि किसानों को जागरूक किया जाए और उन्हें नरवाई जलाने के नुकसान तथा इसके वैकल्पिक उपायों की जानकारी दी जाए। प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि किसानों को सही दिशा में मार्गदर्शन देना भी है।

    आगे भी जारी रहेगी सख्ती

    प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नरवाई जलाने के मामलों में आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर और जुर्माने की कार्रवाई लगातार की जाएगी, ताकि इस पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सके।

  • बढ़ते पारे के बीच 'पाती' के जरिए सीधे जनता से जुड़े सीएम योगी; सुरक्षा के लिए जारी किए कड़े निर्देश!

    बढ़ते पारे के बीच 'पाती' के जरिए सीधे जनता से जुड़े सीएम योगी; सुरक्षा के लिए जारी किए कड़े निर्देश!


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ रहा है और भीषण गर्मी का असर जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष पाती जारी कर लोगों से सावधानी बरतने और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि बदलते मौसम के इस दौर में सतर्कता और तैयारी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, जिससे लू और गर्मी के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रकृति का चक्र निरंतर चलता रहता है और हर ऋतु अपने साथ अलग परिस्थितियां लेकर आती है। इस समय ग्रीष्म ऋतु अपने चरम की ओर बढ़ रही है और तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि जैसे सर्दी के मौसम में बचाव के उपाय किए जाते हैं, वैसे ही गर्मी के मौसम में भी व्यापक तैयारियां आवश्यक हैं। सरकार की ओर से आमजन की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग में भी तेजी आई है, जिसे ध्यान में रखते हुए पर्याप्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। उत्पादन इकाइयों को उनकी पूरी क्षमता से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रदेश के किसी भी हिस्से में बिजली की कमी न हो।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गर्मी के मौसम में श्रमिकों और खुले में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यस्थलों पर छाया, पेयजल और प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। लू और गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोग समय रहते आवश्यक सावधानियां अपना सकें।

    उन्होंने आगे बताया कि सार्वजनिक स्थानों जैसे सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, थानों और अन्य केंद्रों पर ठंडे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं ताकि आपात स्थिति में तुरंत उपचार मिल सके।

    मुख्यमंत्री ने पशुधन और वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। गोशालाओं और अन्य पशु आश्रयों में पानी, चारा और छाया की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पशुओं को भी इस भीषण गर्मी से सुरक्षित रखा जा सके।

    अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे स्वयं और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें और हल्के तथा सूती वस्त्र पहनें। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। साथ ही उन्होंने पशु पक्षियों के लिए पानी रखने की भी अपील की ताकि इस कठिन मौसम में संवेदनशीलता और मानवता का संदेश आगे बढ़ सके।

  • राष्ट्रपति मुर्मु और पीएम मोदी ने किया ली जे म्युंग का शाही स्वागत!

    राष्ट्रपति मुर्मु और पीएम मोदी ने किया ली जे म्युंग का शाही स्वागत!


    नई दिल्ली। दिल्ली में सोमवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग और उनकी पत्नी किम हे-क्युंग का औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उपस्थित रहे। पूरे समारोह में राजनयिक गरिमा, सांस्कृतिक सौहार्द और पारंपरिक भारतीय आतिथ्य की झलक देखने को मिली। राष्ट्रपति भवन परिसर में आयोजित इस स्वागत कार्यक्रम ने भारत और दक्षिण कोरिया के बीच मजबूत होते संबंधों को एक नई दिशा प्रदान की।

    दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं। उनके आगमन को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान व्यापार, तकनीक, निवेश, रक्षा सहयोग और सांस्कृतिक आदान प्रदान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने पर चर्चा होने की संभावना है।

    राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह के दौरान भारतीय परंपरा के अनुरूप विशेष स्वागत की व्यवस्था की गई थी। बच्चों ने पारंपरिक परिधानों में भारतीय तिरंगा और दक्षिण कोरिया का राष्ट्रीय ध्वज लेकर अतिथियों का स्वागत किया, जिससे माहौल और अधिक सांस्कृतिक रूप से जीवंत हो गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ली और उनकी पत्नी का गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    इस राजकीय यात्रा से पहले भारत के विदेश मंत्री ने भी दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी, जिसमें दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इस बातचीत में विशेष रूप से तकनीकी साझेदारी, आर्थिक सहयोग, नवाचार और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया। दोनों देशों ने भविष्य में आपसी सहयोग को और व्यापक बनाने की इच्छा व्यक्त की।

    दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने अपनी यात्रा के दौरान भारत को एक तेजी से उभरती हुई वैश्विक शक्ति बताया और दोनों देशों के बीच साझेदारी को भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर शांति, विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित मजबूत संबंधों को आगे बढ़ा सकते हैं।

    यह दौरा भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। इस यात्रा से न केवल कूटनीतिक संबंधों में मजबूती आएगी बल्कि व्यापार, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग के नए रास्ते भी खुलने की उम्मीद है।

  • भारत श्रीलंका संबंधों ,को नई मजबूती तमिल समुदाय के लिए हाउसिंग प्रोजेक्ट ,और कई अहम समझौते

    भारत श्रीलंका संबंधों ,को नई मजबूती तमिल समुदाय के लिए हाउसिंग प्रोजेक्ट ,और कई अहम समझौते


    नई दिल्ली । भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने श्रीलंका के दौरे के दौरान कई अहम कार्यक्रमों में भाग लिया। अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने नुवारा एलिया पहुंचकर भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लिए चलाई जा रही आवास परियोजना का जायजा लिया। यह परियोजना भारत द्वारा श्रीलंका में चलाए जा रहे व्यापक विकास सहयोग कार्यक्रम का हिस्सा है जिसका उद्देश्य तमिल समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।

    नुवारा एलिया में उपराष्ट्रपति ने इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट की विभिन्न साइट्स का निरीक्षण किया और वहां चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। यह परियोजना खास तौर पर प्लांटेशन क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय मूल के तमिल परिवारों को बेहतर आवास सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई है। इसके तहत हजारों परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए जा रहे हैं जिससे उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

    इससे पहले उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ साथ सांस्कृतिक और विकासात्मक सहयोग को बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों यानी एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए जो स्वास्थ्य शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देंगे।

    इन समझौतों में मुल्लैतिवु में एक आधुनिक मेडिकल वार्ड कॉम्प्लेक्स का निर्माण शामिल है जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा पूर्वी प्रांत में महिला सशक्तीकरण के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने और विभिन्न अस्पतालों में विशेष यूनिट विकसित करने जैसे कदम भी उठाए जाएंगे। साथ ही कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग क्लस्टर और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेद गांव विकसित करने की योजना भी शामिल है।

    भारत और श्रीलंका के बीच हुई घोषणाओं में भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लिए ओसीआई सुविधा को छठी पीढ़ी तक बढ़ाने का फैसला भी अहम माना जा रहा है। इससे इस समुदाय के लोगों को भारत से जुड़े अधिकार और सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी होगी। इसके अलावा इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट के तीसरे चरण के पूरा होने की घोषणा भी की गई जिसमें हजारों घर बनाए गए हैं।

    रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी सहयोग को बढ़ावा देते हुए नॉर्दर्न रेलवे लाइन पर ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने और विभिन्न प्रांतों में पुलों के निर्माण की घोषणा की गई है। वहीं छात्रों के लिए स्कॉलरशिप बढ़ाने और श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस में शामिल होने की सहमति भी दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।

    यह दौरा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ केवल कूटनीतिक संबंध ही नहीं बल्कि विकास और मानवीय सहयोग को भी प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं का लाभ सीधे तौर पर श्रीलंका के तमिल समुदाय और अन्य स्थानीय नागरिकों को मिलेगा जिससे दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत होंगे।

  • बालाघाट में सर्पदंश से बुजुर्ग की मौत, खुले में शौच के दौरान हुआ हादसा

    बालाघाट में सर्पदंश से बुजुर्ग की मौत, खुले में शौच के दौरान हुआ हादसा


    नई दिल्ली। बालाघाट जिले के चंद्रपुरी गांव में रविवार शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां सर्पदंश से 71 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। मृतक रमेश गोस्वामी खेत की ओर शौच के लिए गए थे, तभी एक जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया। घर लौटकर उन्होंने परिजनों को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान देर रात उन्होंने दम तोड़ दिया।

    खेत में शौच के दौरान डसा सांप, जहर फैलने से मौत

    जानकारी के मुताबिक, रमेश गोस्वामी खेती-मजदूरी कर अपना जीवनयापन करते थे। रविवार शाम खुले में शौच के दौरान सांप ने उनके पैर में डस लिया। परिजन उन्हें आनन-फानन में अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया, लेकिन जहर तेजी से फैल चुका था। रात करीब 12 बजे उनकी मौत हो गई, जिससे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई।

    पुलिस ने किया पोस्टमार्टम, जांच जारी

    सोमवार सुबह अस्पताल चौकी पुलिस ने डॉक्टर की सूचना पर शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस के अनुसार, प्राथमिक जांच में मामला सर्पदंश का ही प्रतीत हो रहा है। मर्ग डायरी संबंधित थाने भेजकर आगे की जांच की जा रही है।

    खुले में शौच के दावों पर उठे सवाल

    इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच मुक्त (ODF) दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में शौचालय की सुविधा या उसका उपयोग सही तरीके से नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते लोगों को खुले में जाना पड़ता है। यही लापरवाही इस दुखद घटना का कारण बनी।

    ग्रामीणों ने की सुविधाएं बढ़ाने की मांग

    घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में शौचालय व्यवस्था को मजबूत किया जाए और लोगों को जागरूक किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।