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  • 40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह

    40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह


    बहरामपुर । TMC के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी जैसी मस्जिद’ (Babri Mosque) बनाने का ऐलान कर बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने भी मस्जिद के निर्माण में हस्तक्षेप करने के इनकार कर दिया है। इसके बाद अब शिलान्यास समारोह को भव्य बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। समारोह स्थल को एक विशाल कार्यस्थल में बदल दिया गया है जहां शनिवार को बाबरी जैसी मस्जिद का शिलान्यास होगा। जानकारी के मुताबिक समारोह में सऊदी अरब के मौलवियों के आने की संभावना है। वहीं यहां हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों ने समारोह से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

    इससे पहले TMC ने हुमायूं कबीर को पार्टी से निकाल दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए इस तरह के आयोजनों के खिलाफ चेतावनी भी जारी की है। हालांकि कबीर राजनीतिक घटनाक्रम और प्रशासनिक दबाव से बेपरवाह दिखे। कबीर ने पत्रकारों से कहा है कि शनिवार को मोरादघी के पास 25 बीघा जमीन पर लगभग तीन लाख लोग इकट्ठा होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कई राज्यों के धार्मिक नेताओं ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है। कबीर ने बटुआ, “सऊदी अरब से दो काजी सुबह कोलकाता हवाई अड्डे से एक विशेष काफिले में पहुंचेंगे।”

    60-70 लाख रुपए खानपान में खर्च
    राज्य के एकमात्र उत्तर-दक्षिण मुख्य राजमार्ग एनएच-12 के किनारे स्थित विशाल आयोजन स्थल पर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। भीड़ के लिए शाही बिरयानी बनाने के लिए मुर्शिदाबाद की सात खानपान एजेंसियों को अनुबंध दिया गया है। विधायक के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि मेहमानों के लिए लगभग 40,000 पैकेट और स्थानीय लोगों के लिए 20,000 पैकेट बनाए जा रहे हैं, जिससे सिर्फ भोजन का खर्च 30 लाख रुपए से अधिक हो जाएगा। उन्होंने कहा, “आयोजन स्थल का बजट लगभग 60-70 लाख रुपए होगा।”

    मंच पर 400 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था
    धान के खेतों के ऊपर बना मुख्य मंच इस विशाल आयोजन का सबसे स्पष्ट प्रतीक बन गया है। करीबी सहयोगी ने बताया कि 150 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा यह मंच लगभग 400 मेहमानों के बैठने की क्षमता के साथ 10 लाख रुपए की अनुमानित लागत से बनाया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि लगभग 3,000 स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने, मार्गों को नियंत्रित करने और NH-12 पर अवरोधों को रोकने के लिए तैनात किए गए हैं। इनमें से 2,000 ने शुक्रवार सुबह से ही काम शुरू कर दिया था।

    कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा समारोह
    कबीर ने कहा कि समारोह पूर्वाह्न 10 बजे कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा, जिसके बाद दोपहर में आधारशिला समारोह होगा। उन्होंने कहा, “औपचारिकताएं दो घंटे पहले शुरू हो जाएंगी। पुलिस के निर्देशानुसार शाम चार बजे तक मैदान खाली कर दिया जाएगा।”

    3000 पुलिसकर्मी तैनात
    इस बीच शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिला पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था और NH-12 पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हुमायूं कबीर की टीम के साथ कई दौर की चर्चा की। जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बेलडांगा और रानीनगर थाना क्षेत्र में लगभग 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा।

  • आलोचना के बीच प्रशंसा: “ट्रंप नोबेल पुरस्कार के हकदार” – पूर्व अधिकारी का बयान

    आलोचना के बीच प्रशंसा: “ट्रंप नोबेल पुरस्कार के हकदार” – पूर्व अधिकारी का बयान


    नई दिल्‍ली । भारत-रूस कूटनीति को लेकर अमेरिका के पूर्व पेंटागन अधिकारी(Pentagon officials) ने अपने ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(Donald Trump) पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन(Vladimir Putin) को नई दिल्ली में जो गर्मजोशी और सम्मान मिला, उसका श्रेय रूस नहीं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जाता है। माइकल रुबिन (Michael Rubin)के अनुसार ट्रंप ने ही भारत और रूस को एक-दूसरे के और करीब धकेला, और इसके लिए वे नोबेल पुरस्कार के हकदार हैं।

    ट्रंप को दिया ‘नोबेल’ का सुझाव
    मीडिया से बातचीत में रुबिन ने कहा कि पुतिन की भारत यात्रा मॉस्को के नजरिए से बेहद सकारात्मक रही और भारत द्वारा दिया गया सम्मान दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिला। उन्होंने कहा- मैं यह तर्क दूंगा कि भारत और रूस को जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप ने एक-दूसरे के करीब लाया है, उसके लिए वे नोबेल पुरस्कार के हकदार हैं।

    रुबिन ने यह भी सवाल उठाया कि पुतिन की यात्रा के दौरान हुए समझौतों में से कितने वास्तविक सहयोग में तब्दील होंगे और कितने ऐसे हैं जो भारत की उस नाराजगी से उपजे हैं जो हाल के समय में ट्रंप के रवैये के कारण बनी है- चाहे वह पीएम मोदी के प्रति उनका व्यवहार हो या भारत के व्यापक हितों के प्रति उदासीनता।

    अमेरिका में दो धाराएं- ट्रंप का दावा’ बनाम ‘ट्रंप की अक्षमता
    रुबिन ने बताया कि अमेरिका में इस घटनाक्रम को लेकर दो बिल्कुल अलग नजरिए हैं। उन्होंने कहा, यदि आप डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक हैं, तो आप इसे ‘मैंने कहा था न’ वाले चश्मे से देखते हैं। लेकिन यदि आप उन 65 प्रतिशत अमेरिकियों में से हैं जो ट्रंप को पसंद नहीं करते, तो यह सब डोनाल्ड ट्रंप की भारी कूटनीतिक अक्षमता का नतीजा दिखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों को पीछे धकेल दिया और कई फैसले ऐसे लिए जिन पर पाकिस्तान, तुर्किये और कतर जैसी देशों की चापलूसी या कथित प्रलोभनों का असर दिखा।

    ट्रंप के दौर की तीखी आलोचना: ‘रणनीतिक नुकसान’
    रुबिन के अनुसार वॉशिंगटन के कई विशेषज्ञ इस बात से हैरान हैं कि ट्रंप ने कैसे अमेरिका–भारत की बढ़ती रणनीतिक एकजुटता को कमजोर कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे, बल्कि भारत–रूस निकटता को अपनी विदेश नीति की दूरदर्शिता साबित करने में इस्तेमाल करेंगे।

    ‘भारत को नसीहत देना बंद करे अमेरिका’
    पुतिन द्वारा भारत को निरंतर ऊर्जा आपूर्ति देने के वादे पर टिप्पणी करते हुए रुबिन ने कहा कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक अनिवार्यताओं को समझने में लगातार विफल रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीयों ने नरेंद्र मोदी को इसलिए चुना है कि वे भारतीय हितों का प्रतिनिधित्व करें। भारत दुनिया की सबसे आबादी वाला देश है, जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, और उसे ऊर्जा चाहिए। अमेरिका को भारत को लेक्चर देना बंद कर देना चाहिए।

    उन्होंने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि स्वयं अमेरिका भी तब रूस से ऊर्जा खरीदता है जब विकल्प सीमित हों। रुबिन ने सवाल उठाया कि यदि अमेरिका नहीं चाहता कि भारत रूसी ईंधन खरीदे, तो वह भारत को सस्ते दाम पर और पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराने के लिए क्या कर रहा है? उन्होंने तीखे अंदाज में कहा- यदि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, तो सबसे अच्छा यह होगा कि हम चुप रहें, क्योंकि भारत को अपनी सुरक्षा और जरूरतों को पहले रखना ही पड़ेगा।

  • भोपाल मेट्रो: तेज रफ्तार ट्रायल रन, मैन्युअल टिकटिंग और दिसंबर से कमर्शियल शुरुआत का काउंटडाउन

    भोपाल मेट्रो: तेज रफ्तार ट्रायल रन, मैन्युअल टिकटिंग और दिसंबर से कमर्शियल शुरुआत का काउंटडाउन


    भोपाल / राजधानी भोपाल अब उन चुनिंदा शहरों में शामिल होने जा रही है जहां आधुनिक मेट्रो रेल लोगों की यात्रा को आसान बनाएगी। दिसंबर में इसके कमर्शियल रन की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है और मेट्रो रेल सेफ्टी कमिश्नर CMRS भी परियोजना को हरी झंडी दे चुके हैं। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके उद्घाटन के लिए भोपाल पहुंच सकते हैं। उद्घाटन से पहले ट्रायल रन और टिकटिंग सिस्टम को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है।

    60–120 किमी प्रति घंटा की स्पीड से हो रहा ट्रायल रन

    सुभाष नगर से एम्स तक लगभग 6 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर इन दिनों मेट्रो कोच लगातार ट्रैक पर दौड़ रहे हैं ट्रायल रन के दौरान मेट्रो की न्यूनतम गति 30 किमी प्रति घंटा और अधिकतम गति 80 किमी प्रति घंटा रखी जा रही है। तकनीकी परीक्षण के दौरान इसे 100–120 किमी प्रति घंटा तक भी चलाया जा रहा है ताकि आपात स्थिति या अधिक भार की परिस्थितियों में इसकी दक्षता कोपरखा जा सके। स्पीड कंट्रोल, ब्रेकिंग सिस्टम, सिग्नलिंग और ट्रेन-टू-ट्रैक कम्युनिकेशन की पूरी जांच की जा रही है
    टिकटिंग में बड़ा बदलाव: अब ऑनलाइन नहीं, मैन्युअल सिस्टम
    भोपाल मेट्रो का टिकटिंग सिस्टम शुरुआती चरण में ऑनलाइन नहीं होगा। यात्रियों को वैसे ही टिकट लेना होगा जैसे रेलवे स्टेशन पर लिया जाता है। दरअसल, मेट्रो के लिए ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम (AFC) तैयार करने का काम तुर्किए की कंपनी ‘असिस गार्ड’ को मिला था, लेकिन विवादों और देरी की वजह से इसका टेंडर अगस्त में रद्द कर दिया गया। इसके बाद नई कंपनी के चयन प्रक्रिया में दो से तीन महीने का समय लग सकता है। टेंडर रद्द होने के बाद इंदौर में भी मैन्युअल टिकट को ही विकल्प बनाया गया है। चूंकि दोनों शहरों की मेट्रो परियोजनाएं एक ही संरचना पर चल रही हैं, इसलिए भोपाल में भी यही मॉडल अपनाना पड़ेगा। अधिकारियों के अनुसार, मैन्युअल टिकट सिस्टम चलाने के लिए आवश्यक स्टाफ की तैनाती शुरू कर दी गई है।

    AFC सिस्टम क्यों जरूरी था?

    AFC सिस्टम के तहत कार्ड या QR-आधारित टिकट से गेट ऑटोमेटिक खुलते हैं, जिससे भीड़ नियंत्रण और राजस्व प्रबंधन आसान होता है। ‘असिस गार्ड’ को टिकटिंग से लेकर गेट के ऑटोमेशन और उसके संपूर्ण मेंटेनेंस की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन टेंडर खत्म होने के कारण अब नई कंपनी इन कामों को संभालेगी। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक भोपाल मेट्रो मैन्युअल टिकटिंग सिस्टम पर ही चलेगी।

    किराए पर अंतिम मंथन-मिनिमम 20 और मैक्सिमम 80 रुपए

    मेट्रो कॉर्पोरेशन ने फेयर कलेक्शन कमेटी का गठन कर दिया है और किराए को लेकर लगभग अंतिम निर्णय लिया जा चुका है। हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन इंदौर मेट्रो जैसा मॉडल ही लागू करने की तैयारी है। जानकारी के अनुसार- पहले 7 दिन: फ्री यात्रा पहले 3 महीने: टिकट पर 75%, 50% और 25% की क्रमशः छूट -छूट खत्म होने पर न्यूनतम किराया: 20 रुपए  अधिकतम किराया: 80 रुपए पूरी ऑरेंज लाइन चालू होने के बाद इंदौर में भी मेट्रो शुरू होने पर यही मॉडल लागू किया गया था। भोपाल में फिलहाल ऑरेंज लाइन का पहला चरण ही चलाया जाएगा, जिसमें सुभाष नगर से एम्स तक 6.22 किमी दूरी शामिल है।

    परियोजना के फेज-6 किलोमीटर अभी, 16 किलोमीटर बाद में

    ऑरेंज लाइन का पूरा रूट एम्स से करोंद तक करीब 16 किलोमीटर का है। पहला फेज सुभाष नगर से एम्स तक लगभग तैयार है और इसी पर दिसंबर से मेट्रो चलाई जाएगी। दूसरा फेज सुभाष नगर से करोंद तक है, जिसके अगले 2–3 साल में पूरा होने की उम्मीद है।

    भोपाल बन रहा है मेट्रो सिटी

    भोपाल के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी। ट्रैफिक दबाव वाले क्षेत्रों में मेट्रो आने से लोगों को तेज, सुरक्षित और पर्यावरण-हितैषी परिवहन मिलेगा। राजधानी को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने में भी यह कदम बेहद अहम साबित होगा।

  • छत्तीसगढ़ में आरआई प्रमोशन परीक्षा घोटाला: पति-पत्नी ने मिलकर दी परीक्षा, फेल पटवारी को पास किया गया

    छत्तीसगढ़ में आरआई प्रमोशन परीक्षा घोटाला: पति-पत्नी ने मिलकर दी परीक्षा, फेल पटवारी को पास किया गया


    रायपुर ।
    छत्तीसगढ़ में राजस्व निरीक्षक आरआई प्रमोशन परीक्षा में हुए बड़े घोटाले ने राज्य प्रशासन और पुलिस को हिलाकर रख दिया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ईओडब्ल्यू की जांच में यह सामने आया है कि प्रमोशन परीक्षा में व्यापक हेराफेरी की गई थी जिसमें 18 से ज्यादा लोग शामिल थे। इस मामले की जांच के तहत 19 नवंबर को सात जिलों में 19 ठिकानों पर दबिश दी गई और कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए। इन सबूतों के आधार पर ईओडब्ल्यू ने अपराध दर्ज कर लिया है और अब जांच तेज कर दी गई है।
    जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताए
    ईओडब्ल्यू की जांच में यह सामने आया है कि राजस्व निरीक्षक प्रमोशन परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं की गईं। इसमें कुछ ऐसे मामले भी पाए गए हैं जहां पति-पत्नी और भाई-भाई को एक ही परीक्षा केंद्र पर पास-पास बैठाकर नकल करने का मौका दिया गया। ऐसा करने से यह संदेह पैदा हुआ कि यह घोटाला किसी बड़े नेटवर्क द्वारा संचालित किया जा रहा था जिसमें कई लोग शामिल थे।

    एक और चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब एक फेल हुए पटवारी को बाद में परीक्षा में पास दिखा दिया गया। इस घोटाले में पटवारियों को अनुचित तरीके से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दिलवाने का मामला सामने आया है जिससे यह साफ हो गया कि परीक्षा में नियमों का उल्लंघन कर परिणामों में हेराफेरी की गई थी।

    आरोपितों की गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

    इस घोटाले के आरोप में 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। इनमें से दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। बाकी आठ आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस जल्द ही कदम उठाने वाली है। ईओडब्ल्यू ने इस घोटाले में संलिप्त 18 से ज्यादा लोगों की पहचान की है और माना जा रहा है कि जांच के दौरान और भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

    घोटाले में पति-पत्नी की संलिप्तता

    एक मामले में पति-पत्नी ने साथ बैठकर परीक्षा दी जिससे नकल करने में सुविधा हो। इस तरह की अनियमितताओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि परीक्षा और उसके परिणामों को प्रभावित करने के लिए बड़ी साजिश रची गई थी। इस मामले में आरोपितों ने प्रमोशन परीक्षा के पूरे प्रक्रिया को धोखाधड़ी से प्रभावित किया और निर्दोष उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाया।

    बडी कार्रवाई की संभावना

    आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ईओडब्ल्यू की जांच अभी जारी है और इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इसके अलावा, ईओडब्ल्यू द्वारा पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद और भी जानकारी मिल सकती है जिससे घोटाले के पीछे की सच्चाई और सामने आ सकती है। छत्तीसगढ़ में इस बड़े घोटाले ने राज्य सरकार के सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब जनता और प्रशासन दोनों को यह देखने का इंतजार है कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को सजा दी जाती है या नहीं।

    राजस्व निरीक्षक प्रमोशन परीक्षा घोटाले ने यह साबित कर दिया है कि कुछ लोग सरकारी पदों पर पहुंचने के लिए गलत रास्ते अपनाने से नहीं चूकते। अब यह देखना होगा कि ईओडब्ल्यू इस मामले में कितनी बड़ी कार्रवाई करती है और घोटाले में शामिल सभी लोगों को सजा मिलती है। ऐसे घोटाले न केवल प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि जनता के विश्वास को भी हिला देते हैं।

  • इंदौर में घरेलू नौकर ने चुराया 5 लाख का हीरा जड़ा ब्रेसलेट, पुलिस ने नौकर समेत दलाल और सुनार को गिरफ्तार किया

    इंदौर में घरेलू नौकर ने चुराया 5 लाख का हीरा जड़ा ब्रेसलेट, पुलिस ने नौकर समेत दलाल और सुनार को गिरफ्तार किया


    इंदौर । इंदौर के माणिकबाग रोड स्थित एक महिला कारोबारी के घर से घरेलू नौकर ने हीरे से जड़ा पांच लाख रुपये का ब्रेसलेट चुरा लिया। यह घटना इंदौर के भंवरकुआं थाना क्षेत्र की है जहाँ महिला कारोबारी आरती सांघी के घर से चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया। महिला के मुताबिक यह ब्रेसलेट उसकी सास ने उपहार स्वरूप दिया था। घटना के समय वह नहाने जा रही थीं और तभी चोरी की गई। पुलिस ने गहन जांच के बाद घरेलू नौकर दलाल और सुनार को गिरफ्तार कर लिया है और चोरी किया गया ब्रेसलेट भी बरामद कर लिया है।

    चोरी की घटना और पुलिस जांच

    भंवरकुआं थाना क्षेत्र के टीआई के मुताबिक माणिकबाग रोड निवासी आरती सांघी ने घर में हुई चोरी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई। आरती की गीता भवन नाम से गिफ्ट की दुकान है और घर में चोरी किए गए ब्रेसलेट को उसकी सास ने उन्हें उपहार के तौर पर दिया था। इस ब्रेसलेट की कीमत करीब पांच लाख रुपये थी और यह हीरे से जड़ा हुआ था। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और क्राइम ब्रांच को मामले की जांच सौंप दी।

    गुरुवार को आरती द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। सबसे पहले पुलिस ने शक के आधार पर घर के घरेलू नौकर गणपत पुत्र जोगड़ा कामता को गिरफ्तार किया। गणपत ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसने चोरी किया हुआ ब्रेसलेट राहुल वाघले नाम के एक व्यक्ति को बेचा था जो उसे धानगली इलाके में स्थित सुनार दिलीप इंदरलाल रघुवंशी के पास ले गया था। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राहुल व दिलीप को भी गिरफ्तार कर लिया और ब्रेसलेट बरामद कर लिया।

    तीन गिरफ्तार ब्रेसलेट बरामद

    पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है गणपत कामता जो घरेलू नौकर था राहुल वाघले दलाल और दिलीप इंदरलाल रघुवंशी सुनार । इन तीनों के खिलाफ चोरी धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि ब्रेसलेट चोरी करने के बाद गणपत ने राहुल की मदद से उसे सुनार दिलीप को बेच दिया था जिससे उन्हें ब्रेसलेट आसानी से बिक गया। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने ब्रेसलेट को भी जब्त कर लिया है, जिसे अब आरती सांघी को सौंप दिया जाएगा। पुलिस ने यह भी कहा कि यह एक संगठित चोरी का मामला था जिसमें घरेलू नौकर के साथ-साथ अन्य लोग भी शामिल थे।

    वृद्धा से चेन लूटने वाले तीन बदमाश गिरफ्तार

    इसके अलावा पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। राजेंद्रनगर पुलिस ने तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने एक वृद्धा से दो तोला वजनी सोने की चेन लूटी थी। यह घटना स्कीम-108 क्षेत्र में हुई थी जब कंचन पाटीदार नाम की वृद्धा से चेन छीन ली गई थी। पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में प्रेम शिंदे आकाश परिहार और रियान रशीद शाह शामिल हैं। इन तीनों पर आरोप है कि उन्होंने वृद्धा को घेर कर उसका आभूषण लूटा था।

    पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा को लेकर चिंताएं

    इन दोनों घटनाओं ने इंदौर में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों की चिंता को और बढ़ा दिया है। हालांकि पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है, लेकिन शहर में चोरी और लूट जैसी वारदातों में वृद्धि देखी जा रही है। स्थानीय लोग और व्यापारी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से बेहतर सुरक्षा इंतजामों की मांग कर रहे हैं। इंदौर पुलिस का कहना है कि वह लगातार आपराधिक गतिविधियों पर नज़र बनाए हुए हैं और शहर में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, पुलिस ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

    इंदौर में घरेलू नौकर द्वारा की गई चोरी और बाद में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया कि चोरी की घटनाएं कभी भी किसी से भी हो सकती हैं। पुलिस ने अपनी तेज़ी से कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और चोरी किए गए ब्रेसलेट को बरामद किया। वहीं दूसरी ओर वृद्धा से चेन लूटने वाले तीन बदमाशों की गिरफ्तारी भी एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। अब, यह देखना होगा कि पुलिस आगे इन वारदातों पर किस तरह नियंत्रण पाती है और शहरवासियों को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • कटनी में थाने से कुछ ही कदम की दूरी पर एटीएम उखाड़ ले गए चोर, पुलिस गश्त व्यवस्था पर उठे सवाल

    कटनी में थाने से कुछ ही कदम की दूरी पर एटीएम उखाड़ ले गए चोर, पुलिस गश्त व्यवस्था पर उठे सवाल



    कटनी ।
    मध्य प्रदेश के कटनी जिले के माधव नगर थाना क्षेत्र में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है जहां थाने से चंद कदम की दूरी पर स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एटीएम को चोर उखाड़कर ले गए। यह घटना रात के दो बजे की बताई जा रही है, जब इलाके में गश्त करने वाली पुलिस भी चोरों के हत्थे चढ़ने से बच नहीं पाई। इस घटना ने न केवल पुलिस की रात्रि गश्त व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि यह सवाल भी खड़े किए हैं कि थाना और एटीएम के बीच की दूरी इतनी कम होने के बावजूद इस वारदात को अंजाम कैसे दिया गया।

    इस घटना के बारे में जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि चोरों की पहचान की जा सके। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एटीएम में कितने पैसे थे। घटना के बाद से स्थानीय लोग और व्यवसायी भी हैरान हैं और इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    पुलिस की लापरवाही और गश्त व्यवस्था पर सवाल

    कटनी जिले में इस तरह की वारदात को लेकर पुलिस की गश्त व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस द्वारा रात्रि गश्त को लेकर कई बार सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की बात की जाती रही है, लेकिन इस घटना ने उन दावों को धराशायी कर दिया है। घटना स्थल की सुरक्षा में किसी भी तरह के गार्ड की तैनाती नहीं की गई थी जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि एटीएम की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। इसके साथ ही एटीएम के आसपास की लाइटिंग भी कमजोर थी, जिससे रात के समय में अंधेरे का फायदा चोरों ने उठाया।

    एटीएम की सुरक्षा में चूक

    इस वारदात के दौरान यह बात भी सामने आई कि एटीएम की सुरक्षा को लेकर बैंक की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया था। एटीएम में पैसे भरने या उसकी निगरानी के लिए कोई गार्ड तैनात नहीं था और ना ही एटीएम की सुरक्षा के लिए कोई अन्य ठोस कदम उठाए गए थे। सुरक्षा गार्ड की गैरमौजूदगी ने चोरों को एटीएम उखाड़ने का मौका दिया। इस घटना के बाद बैंक अधिकारियों की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि वह मामले की गंभीरता से जांच करेंगे और भविष्य में सुरक्षा के और बेहतर इंतजाम किए जाएंगे।

    पुलिस की प्रतिक्रिया और जांच

    कटनी पुलिस अब इस मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस ने इलाके के आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा, पुलिस चोरों के खिलाफ सुराग जुटाने के लिए इलाके में पूछताछ भी कर रही है। हालांकि अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जल्द ही कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को पकड़ा जाएगा।

    स्थानीय लोगों की चिंता

    इस घटना के बाद से कटनी जिले के स्थानीय लोग भी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि एटीएम और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाएं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि अगर इस तरह की वारदात थाने के पास हो सकती है तो अन्य जगहों पर क्या स्थिति होगी? इससे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

    कटनी में माधव नगर थाने के पास स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र का एटीएम उखाड़कर ले जाने की घटना ने न केवल पुलिस की गश्त व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं बल्कि यह भी दिखाया है कि इस तरह की घटनाओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों की आवश्यकता है। इस घटना से यह भी साफ हो गया है कि एटीएम और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा में अधिक सतर्कता की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। पुलिस को अब इस मामले को गंभीरता से लेकर चोरों को पकड़ने के लिए हर संभव प्रयास करना होगा ताकि इलाके में लोगों का विश्वास फिर से बहाल किया जा सके।

  • मध्य प्रदेश में होम गार्ड्स का 79वां स्थापना दिवस, CM मोहन यादव ने किया सम्मानित

    मध्य प्रदेश में होम गार्ड्स का 79वां स्थापना दिवस, CM मोहन यादव ने किया सम्मानित


     मध्य प्रदेश  में आज होम गार्ड्स और नागरिक सुरक्षा संगठन का 79वां स्थापना दिवस राज्य स्तरीय समारोह के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और होम गार्ड कार्यालय पहुँचकर परेड निरीक्षण किया। परेड टीम ने मुख्यमंत्री को सलामी दी जिसके बाद उन्होंने जवानों के साहस, अनुशासन और सेवा भावना की सराहना की।

    उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मान
    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अदम्य साहसिक कार्य सम्मान पुरस्कार देने की घोषणा की और बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और जवानों को सम्मानित भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा-हर परिस्थिति, हर चुनौती में सबसे आगे रहने वाला अनुशासित समूह-होम गार्ड है। राज्य को गर्व है कियह बल हर जिम्मेदारी को निष्ठा से निभाता है।

    10 रेस्क्यू टीमों को 51 हजार का पुरस्कार
    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बताया कि 2014 में NDRF के गठन के बाद से यह बल लगातार बेहतरीन काम कर रहा है। इंदौर में NDRF और SDRF के जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसका उपयोग आने वाले उज्जैन सिंहस्थ में किया जाएगा। सीएम ने घोषणा की कि 10 रेस्क्यू टीमों को 51-51 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा।

    होम गार्ड्स के लिए स्थायी आवास के आदेश
    जवानों की आवासीय जरूरतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने होम गार्ड कर्मियों के लिए स्थायी आवास निर्माण के निर्देश भी जारी किए। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि हर होम गार्ड को सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए।

  • नोबेल तो नहीं… मगर ट्रंप को मिला शांति पुरस्कार, इतने खुश हुए…खुद ही उठाकर पहन लिया

    नोबेल तो नहीं… मगर ट्रंप को मिला शांति पुरस्कार, इतने खुश हुए…खुद ही उठाकर पहन लिया


    वाशिंगटन।
    नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) की मांग कर रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को नोबेल तो नहीं लेकिन फीफा शांति पुरस्कार (FIFA Peace Prize) जरूर मिल गया है। फुटबॉल की वैश्विक संस्था (FIFA) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने नए फीफा शांति पुरस्कार (FIFA Peace Prize) से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार खेल से इतर वैश्विक शांति को ध्यान में रखकर बनाया गया है और ट्रंप इसके पहले विजेता हैं।


    फीफा ने क्यों दिया यह पुरस्कार

    डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि फीफा द्वारा इस साल से शुरू किया जा रहा है शांति पुरस्कार ट्रंप को ही मिलेगा। वैसे बी फीफा के वर्तमान अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को ट्रंप का करीबी माना जाता है। वह कई बार खुले तौर पर इस बात को कह चुके हैं कि गाजा संघर्ष में युद्धविराम करवाने के लिए ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना ही चाहिए।

    फीफा के अगले विश्वकप के लिए आयोजित किए जा रहे एक कार्यक्रम में जियानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए ट्रंप को यह पुरस्कार देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “यह आपके लिए एक सुंदर मेडल है, जिसे आप जहां चाहें, वहां पहन सकते हैं।” इसके बाद ट्रंप ने तुरंत ही इसे अपने गले में डाल लिया। इसके साथ ही ट्रंप को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया, जिसमें ट्रंप को ‘दुनिया में शांति और एकता बढ़ाने में योगदान’ देने वाला बताया गया।

    इसके अलावा जियानी ने ट्रंप को एक सोने की ट्राफी भी भेंट की। इस पर आगे ट्रंप का नाम लिखा हुआ था। उन्होंने कहा, “आप इस शांति पुरस्कार के योग्य हैं, अपनी कोशिशों और उपलब्धियों के लिए।

    फीफा शांति पुरस्कार मिलने के बाद ट्रंप उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा, “यह मेरे जीवन के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है।” इसके बाद उन्होंने अपने परिवार, खासतौर पर अपनी पत्नी मेलानिया का धन्यवाद दिया और मेजबान देशों कनाडा और मेक्सिको के नेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह तीनों देशों के लिए बेहतर रहेगा।

  • यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत

    यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत


    न्यूयॉर्क।
    संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) (United Nations General Assembly (UNGA) ने रूस पर दबाव बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। इसमें रूस से यूक्रेनी बच्चों को तुरंत और बिना शर्त वापस लौटाने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मानवीय संकट पर केंद्रित है, जहां कथित तौर पर हजारों बच्चों को जबरन रूसी क्षेत्र में निर्वासित किया गया है। इस महत्वपूर्ण मसौदा प्रस्ताव पर बुधवार को मतदान हुआ, जिसमें भारत ने मतदान से परहेज किया।

    193 सदस्यीय महासभा में ‘यूक्रेनी बच्चों की वापसी’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को 91 देशों ने समर्थन दिया, 12 देशों ने इसका विरोध किया और 57 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत के साथ-साथ बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, मिस्र, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका ने भी वोटिंग से परहेज किया। बता दें कि यह प्रस्ताव रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले पेश किया गया था। भारत ने फिलहाल वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।


    प्रस्ताव में क्या कहा गया?

    प्रस्ताव में युद्ध के बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जताई गई, विशेषकर उन यूक्रेनी बच्चों की स्थिति पर जिन्हें 2014 के बाद अपने परिवारों से अलग कर रूस-नियंत्रित इलाकों में ले जाया गया या रूस भेजा गया।


    महासभा ने रूस से मांग की कि वह-

    – जबरन ले जाए गए सभी यूक्रेनी बच्चों को तुरंत, सुरक्षित और बिना शर्त वापस भेजे।
    – बच्चों के जबरन निर्वासन, परिवारों से अलगाव, नागरिकता बदलने, दत्तक ग्रहण या फॉस्टर केयर में रखने जैसी सभी कार्रवाइयों को तुरंत रोके।
    – इस तरह के मामलों में जिम्मेदार लोगों की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करे।

    प्रस्ताव ने रूस द्वारा 2022 के बाद किए गए उन कानूनी बदलावों पर भी आपत्ति जताई, जिनसे यूक्रेनी अनाथ बच्चों या अभिभावक-विहीन बच्चों को रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है।

    यूक्रेन का दावा: 20000 से अधिक बच्चों के मामले की जांच
    यूक्रेन की उप विदेश मंत्री मारियाना बेट्सा ने महासभा में मसौदा प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 तक 6395 बच्चों की जबरन ट्रांसफर/डेपोर्टेशन की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20,000 से अधिक मामलों की जांच जारी है।


    रूस का जवाब: झूठे आरोपों से भरा प्रस्ताव

    रूस की उप स्थायी प्रतिनिधि मारिया जाबोलोत्स्काया ने मसौदा प्रस्ताव को झूठे आरोपों से भरा बताया। उन्होंने कहा कि कई बच्चे युद्ध क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले गए हैं या अपने परिवारों से बिछड़ गए थे, जिसे उल्लंघन नहीं माना जा सकता। यूक्रेनी शरणार्थियों के लिए रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना स्वेच्छिक और बिना किसी दबाव के है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के पक्ष में हर वोट झूठ, युद्ध और टकराव के समर्थन में है, जबकि विरोध में दिया गया हर वोट शांति के पक्ष में है।


    यूएन महासभा अध्यक्ष की टिप्पणी

    यूएन महासभा की अध्यक्ष अन्नालेना बैरबॉक ने कहा कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद से महासभा ने लगातार अपनी आठ अलग-अलग प्रस्तावों में रूस से तत्काल और बिना शर्त वापसी की मांग की है। उन्होंने कहा- यूक्रेनी बच्चों का मामला खाली संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। यह पूरी स्थिति रूस के आक्रमण का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से न सिर्फ यूक्रेन बल्कि अन्य क्षेत्रों और वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।

  • IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा

    IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा


    नई दिल्ली।
    हमारा प्यारा भारत (India) इस समय पर हवाई यात्रा संकट (Air Travel Crisis) का सामना कर रहा है। तेज रफ्तार ट्रेनों के जरिए और भी कम समय में यात्रा करने का सपना देखने वाला आम आदमी (Common man) इस समय इंडिगो (IndiGo Airline) के ठप्प होने से परेशान है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडियो (IndiGo Airline) ने पिछले कुछ समय में 1 हजार से ज्यादा उड़ानों को रद्द कर दिया है, जिसकी वजह से देश भर के एयरपोर्ट्स रेलवे स्टेशन की तरह नजर आने लगे हैं। चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई है और लोग अपने गंतव्य तक जाने के लिए परेशान नजर आ रहे हैं।

    अंतर्देशीय उड़ानों का सबसे बड़ा नेटवर्क चलाने वाली इंडिगो एयरलाइन के इस संकट के पीछे कोई एक कारण नहीं है। इसके पीछे एक के बाद एक आए कई बदलाव शामिल हैं। तो आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि हजारों की संख्या में लोग एयरपोर्ट पर ही फंसते नजर आए।


    कैसे बढ़ा संकट?

    इंडिगो एयरलाइन शुरुआत से ही फ्लाइट्स के लेट होने की समस्या का सामना कर रही थी। शुरुआत ने एयरलाइन ने इसके पीछे छोटी तकनीकी खराबियां, सर्दियों के लिए फ्लाइट की नई टाइमिंग, एयरपोर्ट पर भीड़ और मौसम को जिम्मेदार बताया था। हालांकि, इसको एयरलाइन को असली झटका तब लगा जब सरकार की तरफ से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नामक नए नियम लागू कर दिए गए, जिनका मकसद पायलटों को थकान से बचाना था।


    सरकार ने जारी किए नए नियम

    पहले से ही स्टाफ की कमी के साथ ज्यादा उड़ानों का संचालन कर रही इंडिगो के लिए यह नियम एक बड़ी परेशानी बनकर आए। हालांकि, सरकार ने यह कदम पायलट और एयरलाइन की भलाई के लिए ही उठाया था। लेकिन पहले से ही फंसी हुई इंडिगो के लिए यह नियम झेल पाना आसान नहीं था। इन नियमों की वजह से बड़ी संख्या में पायलट अनिवार्य आराम पर चले गए, जिससे स्टाफ की भारी कमी हो गई। इसकी वजह से कई फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी।


    एयरबस 320 की चेतावनी

    फ्लाइट्स की छोटी तकनीकी खराबियों, सरकार के नए नियमों से परेशानी का सामना कर रही इंडिगो एयरलाइन के लिए असली खतरा तब सामने आया जब एयरबस 320 की चेतावनी के बाद देर रात उड़ाने प्रभावित होना शुरू हुईं। रात के 12 बजे के बाद नए नियम लागू हो गए, इसकी वजह से बहुत सारी फ्लाइट्स कैंसिल करने का सिलसिला शुरू हो गया।


    इंडिगो का बड़ा आकार

    भारत में सबसे ज्यादा उड़ानों का परिचालन करने वाली इंडिगो के लिए उसका बड़ा आकार ही संकट का कारण बन गया है। हालांकि, एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ और लगातार रद्द होती उड़ानों के बीच सरकार ने नए नियमों में कुछ राहत दी है। डीजीसीए ने शुक्रवार को नया आदेश जारी करके एक महत्वपूर्ण नियम वापस ले लिया। इसके मुताबिक अब पायलट्स की सप्ताहिक आराम को छुट्टी में नहीं बदला जा सकता है। सरकार द्वारा हटाए गए इस नियम से एयरलाइन को पायलट रोटेट करने में आसानी होगी, जिससे कुछ दबाव कम होने की उम्मीद है।

    इंडिगो भले ही इस नियम के हटने के बाद स्थिरता की उम्मीद कर रही हो, लेकिन पायलट संघ इससे नाराज नजर आता है। पायलट संघों का आरोप है कि इंडिगो के मैनेजमेंट ने समय रहते इन नियमों और परेशानियों के लिए तैयारी नहीं की। संघ के मुताबिक इंडिगो के मैनेजमेंट को इस बात की जानकारी थी कि सरकार ऐसे नियम लागू करने वाली है। इसके लिए नई भर्ती की जानी चाहिए थी, लेकिन एयरलाइ्ंस ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने पहले से ही कम स्टाफ को और कम कर दिया, जिससे समस्या बिगड़ गई।

    कई विशेषज्ञों का कहना है कि इंडिगो ने इस संकट को बढ़ावा देकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इससे सरकार द्वारा लागू किए गए नियमों में ढिलाई ली जा सके। हालांकि, पायलट संघ ने इसे पायलट और हवाई यात्रियों की सुरक्षा के संकट से जोड़ा है।

    कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन परेशानी आम आदमी को ही हो रही है। देश भर के एयरपोर्ट्स पर इस समय भारी भीड़ मची हुई है। हर दिन एयरलाइन की तरफ से सैकड़ों फ्लाइट्स को कैंसिल किया जा रहा है, जिसकी वजह से एयरपोर्ट पर स्टेशन जैसे हालात बने हुए हैं। सरकार का मानना है कि 10 फरवरी 2026 तक पूरी तरह से स्थिरता लाई जा सकती है।