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  • बैन विवाद पर रणवीर सिंह की टीम की सफाई, बोले- सोच-समझकर रखी चुप्पी

    बैन विवाद पर रणवीर सिंह की टीम की सफाई, बोले- सोच-समझकर रखी चुप्पी


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच फिल्म डॉन 3 को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। Federation of Western India Cine Employees यानी FWICE द्वारा रणवीर सिंह को बैन किए जाने के बाद अब पहली बार उनकी टीम की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। रणवीर के प्रवक्ता ने साफ किया है कि अभिनेता ने इस पूरे विवाद पर जानबूझकर चुप्पी बनाए रखी थी, क्योंकि वे निजी और पेशेवर मामलों को सार्वजनिक बहस का हिस्सा नहीं बनाना चाहते थे।

    रणवीर सिंह की टीम की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अभिनेता फिल्म इंडस्ट्री और डॉन 3 फ्रैंचाइजी से जुड़े सभी लोगों का सम्मान करते हैं। बयान के मुताबिक, रणवीर का मानना है कि प्रोफेशनल बातचीत और व्यक्तिगत रिश्तों को गरिमा, परिपक्वता और आपसी सम्मान के साथ संभाला जाना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने विवाद के दौरान सामने आई अटकलों और चर्चाओं पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं समझा।

    टीम ने यह भी कहा कि रणवीर का पूरा ध्यान फिलहाल अपने काम और आने वाले प्रोजेक्ट्स पर है। उन्होंने कभी भी विवाद को हवा देने या किसी पर सार्वजनिक टिप्पणी करने की कोशिश नहीं की। बयान में यह भी जोड़ा गया कि अभिनेता डॉन 3 से जुड़े सभी कलाकारों और निर्माताओं की सफलता की कामना करते हैं और आगे भी धैर्य और शांति बनाए रखेंगे।

    दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब अप्रैल 2026 में फरहान अख्तर की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह के खिलाफ FWICE में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रणवीर ने कंपनी के साथ तीन फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था और उनमें से एक फिल्म प्री-प्रोडक्शन स्टेज में पहुंच चुकी थी। लेकिन शूटिंग शुरू होने से करीब तीन सप्ताह पहले अभिनेता ने अचानक फिल्म छोड़ दी, जिससे प्रोडक्शन हाउस को लगभग 45 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

    FWICE के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद रणवीर सिंह को हर 10 दिन के अंतराल पर तीन नोटिस भेजे गए थे। इसके बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संगठन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभिनेता को बैन करने का फैसला लिया। संगठन ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से अपील की है कि जब तक नुकसान की भरपाई नहीं होती, तब तक रणवीर के साथ काम न किया जाए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने बॉलीवुड इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच समझौता होता है या विवाद और बढ़ता है।

  • LPG उपभोक्ताओं को बड़ी राहत…. PNG कनेक्शन लेने पर सरेंडर नहीं होगा सिलेंडर, बदला नियम!

    LPG उपभोक्ताओं को बड़ी राहत…. PNG कनेक्शन लेने पर सरेंडर नहीं होगा सिलेंडर, बदला नियम!


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं (Domestic LPG consumers) को राहत देने के लिए एलपीजी सप्लाई और वितरण नियमों में बड़ा बदलाव किया है. केंद्र सरकार ने 25 मई 2026 को ‘लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) संशोधन आदेश 2026’ को अधिसूचित किया. इस संशोधन का उद्देश्य उन उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा देना है, जिन्होंने PNG कनेक्शन ले लिया है।

    ऐसे में नए नियमों के तहत पीएनजी लेने पर अब उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन हमेशा के लिए सरेंडर करने की मजबूरी नहीं होगी।

    दरअसल, मिडिल ईस्ट संकट के चलते एलपीजी सिलेंडरों को लेकर चल रही वेटिंग को कम करने के लिए सरकार लोगों को लगातार पीएनजी कनेक्शन लेने की सलाह दे रही है. इसको लेकर हाल ही में सरकार ने पीएनजी कनेक्शन के आवेदन पर 7 दिनों के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. इस बीच सरकार पीएनजी कनेक्शन लेने वालों को और सुविधा देने जा रही है।

    पेट्रोल-डीजल के स्टॉक पर सरकार का बड़ा बयान
    अब नए नियमों के तहत एलपीजी उपभोक्ताओं के पास दो विकल्प होंगे. पहला, यदि किसी उपभोक्ता ने PNG कनेक्शन ले लिया है तो वह 30 दिनों के भीतर अपने एलपीजी कनेक्शन को बंद कराने के लिए आवेदन कर सकता है. दूसरा, उपभोक्ता चाहें तो भविष्य में एलपीजी कनेक्शन दोबारा शुरू कराने के लिए ट्रांसफर वाउचर प्राप्त कर सकते हैं.

    सरकार के अनुसार यह ट्रांसफर वाउचर उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा जो नौकरी, पढ़ाई या अन्य कारणों से ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित होते रहते हैं जहां PNG की सुविधा उपलब्ध नहीं है. ऐसे मामलों में उपभोक्ता भविष्य में गैर-PNG क्षेत्र में जाने पर आसानी से अपना एलपीजी कनेक्शन फिर से बहाल करा सकेंगे।

    यह नई व्यवस्था विशेष रूप से ट्रांसफरेबल नौकरी करने वाले कर्मचारियों, प्रवासी परिवारों, किराएदारों, छात्रों और उन परिवारों के लिए लाभकारी मानी जा रही है जो समय-समय पर शहर बदलते रहते हैं।

    सरकार का कहना है कि इस संशोधन से उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी और उन्हें बार-बार नए एलपीजी कनेक्शन लेने की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा. साथ ही PNG और LPG दोनों सुविधाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामला….. पति समर्थ में पूछताछ में उगले राज…. जानिए क्या हुआ था उस रात?

    ट्विशा शर्मा मौत मामला….. पति समर्थ में पूछताछ में उगले राज…. जानिए क्या हुआ था उस रात?


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) में मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध मौत के मामले में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने कमान संभाल ली है. सोमवार को सीबीआई ने भोपाल पुलिस से केस डायरी और तमाम दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर नए सिरे से एफआईआर दर्ज की है. इस बड़े घटनाक्रम के बीच, भोपाल की कटारा हिल्स पुलिस की 7 दिन की रिमांड में मौजूद ट्विशा के पति समर्थ सिंह (Samarth Singh) से हुई पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, समर्थ पूछताछ में ज्यादातर वही जवाब दे रहा है, जो शुरुआत से उसकी मां गिरीबाला सिंह कहती आई हैं. उसने पूरी घटना के पीछे ट्विशा के बदले हुए व्यवहार और उनके ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े होने को वजह बताया है. समर्थ ने बताया कि शादी के बाद शुरुआती दिनों में उसके और ट्विशा के बीच रिश्ते पूरी तरह सामान्य थे. विवाद की शुरुआत 17 अप्रैल से हुई, जब ट्विशा को पता चला कि वह प्रेग्नेंट है. इसके बाद उसका व्यवहार अचानक बदल गया।

    समर्थ ने पुलिस के सामने दावा किया कि ट्विशा अक्सर खुद के ग्लैमर वर्ल्ड (मॉडलिंग और एक्टिंग) से जुड़े होने की दुहाई देती थी. वह कहती थी कि वह एक साधारण घरेलू महिला वाली जिंदगी नहीं जी सकती और यह उसके लिए बेहद मुश्किल है. समर्थ के अनुसार, इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर कहासुनी होने लगी थी।

    पूछताछ में समर्थ ने अप्रैल महीने की एक घटना का जिक्र करते हुए दोनों के बीच बढ़ती दूरियों की बात कही. समर्थ ने बताया, ‘अप्रैल में हमें एक साथ बेंगलुरु जाना था. लेकिन ऐन वक्त पर ट्विशा ने जाने से मना कर दिया और कहा कि उसे अपने भाई के पास अजमेर जाना है।

    समर्थ के मुताबिक, वह अकेले बेंगलुरु चला गया और ट्विशा अजमेर के लिए निकल गई. लेकिन बाद में उसे पता चला कि ट्विशा अजमेर में सिर्फ एक दिन रुकी और उसे बिना बताए दिल्ली चली गई. इस बात को लेकर जब समर्थ ने आपत्ति जताई, तो दोनों के बीच विवाद और ज्यादा बढ़ गया।


    12 मई की रात को क्या हुआ था?

    ट्विशा की मौत वाली रात यानी 12 मई की कहानी बयां करते हुए समर्थ ने पुलिस को बताया कि उस दिन सब कुछ सामान्य दिख रहा था. उसने दावा किया कि रात को खाना खाने के बाद दोनों कुछ देर सोसाइटी के पार्क में टहले और फिर घर लौटकर टीवी देखने लगे।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक समर्थ ने दावा करते हुए कहा, ‘कुछ देर बाद मैं सोने चला गया, जबकि ट्विशा नीचे जाकर अपने परिजनों से फोन पर बात करने लगी. देर रात मेरी मां गिरिबाला सिंह ने मुझे जगाया और कहा कि ट्विशा की मां का फोन आया था कि वह फोन नहीं उठा रही है।

    समर्थ के मुताबिक, जब दोनों ने घर में ट्विशा को ढूंढना शुरू किया, तो वह छत पर फंदे से लटकी मिली. समर्थ का दावा है कि उसने और उसकी मां ने मिलकर ट्विशा को फंदे से नीचे उतारा, CPR दिया और तुरंत भोपाल AIIMS लेकर भागे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


    घटना के बाद कहां छिप गया था समर्थ?

    घटना के बाद फरार हुए समर्थ ने पुलिस को बताया कि वह एक हफ्ते से ज्यादा समय तक जबलपुर में छिपा रहा. पकड़े जाने के डर से उसने अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया था ताकि पुलिस उसकी लोकेशन ट्रेस न कर सके. समर्थ के इस कबूलनामे के बाद अब भोपाल पुलिस और सीबीआई के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि फरारी के दौरान जबलपुर में समर्थ को किसने पनाह दी और उसकी मदद की? हालांकि, समर्थ ने अपने मददगारों के नाम उगलने से इनकार कर दिया है।

    गौरतलब है कि 33 वर्षीय मॉडल-अभिनेत्री ट्विशा शर्मा के परिवार ने आरोप लगाया है कि ससुराल वालों ने उनकी बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि उसे जान देनी पड़ी. भोपाल पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु), 85 (क्रूरता) और 3(5) (साझा इरादा) के साथ दहेज निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. दूसरी तरफ, ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा को ड्रग्स की लत थी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद द्विशा का दिल्ली एम्स के जरिए दूसरी बार पोस्टमार्टम कराया गया है।


    सुप्रीम कोर्ट ने भी लिया संज्ञान

    इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई की. अदालत ने कहा कि एक महिला की असामयिक मौत बेहद गंभीर विषय है और इसकी सच्चाई सामने आना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले में अफवाहों और अटकलों से बचना चाहता है. अदालत ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बेटी को खोने का दर्द असहनीय होता है और अदालत परिवार की पीड़ा को समझती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं पर भी चिंता जताई और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जांच एजेंसियों को अत्यंत जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए।

  • चारधाम यात्रा : अब तक 22 लाख तीर्थयात्री कर चुके हैं दर्शन…. 5 हफ्तों में 92 श्रद्धालुओं की मौत

    चारधाम यात्रा : अब तक 22 लाख तीर्थयात्री कर चुके हैं दर्शन…. 5 हफ्तों में 92 श्रद्धालुओं की मौत


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) के शुरुआती 5 हफ्तों में विभिन्न स्वास्थ्य कारणों की वजह से 92 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा 45 मौतें केदारनाथ (Kedarnath) में हुईं, जबकि बदरीनाथ (Badrinath) में 24, यमुनोत्री में 13 और गंगोत्री (Gangotri) में 10 तीर्थयात्रियों ने अपनी जान गंवाई। इनत तमाम चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोमवार शाम तक 22 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं।

    केदारनाथ में सबसे अधिक 44 मौतें
    उत्तराखंड के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, केदारनाथ में सबसे अधिक 44 मौतें दर्ज की गई हैं। बदरीनाथ में 24 , मुनात्री और गंगोत्री में क्रमशः 13 और 10 श्रद्धालुओं की मौतें हुई हैं। ये मौतें विभिन्न स्वास्थ्य कारणों से हुई हें। इनमें ऊंचाई से संबंधित बीमारियां और हृदय गति रुकना शामिल हैं। एक अन्य व्यक्ति की मौत केदारनाथ में प्राकृतिक आपदा के कारण हुई है।


    चारधाम यात्रा में 92 पहुंचा मौतों का आंकड़ा

    इस साल चारधाम यात्रा में मौतों का आंकड़ा 92 पर पहुंच गया है। आंकड़े बतलाते हैं कि सोमवार शाम सात बजे तक 22 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधामों के दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं। केदारनाथ में सबसे अधिक 8.72 लाख श्रद्धालु पहुंचे। इसके बाद बदरीनाथ में 6.13 लाख, गंगोत्री और यमुनोत्री में क्रमश: 3.85 एवं 3.87 लाख श्रद्धालु पहुंचे।


    अलर्ट मोड पर आपदा प्रबंधन विभाग

    उच्च हिमालयी क्षेत्र की इस यात्रा को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम प्रतिकूल होने पर हर एक श्रद्धालु की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। इतना ही नहीं सिक्खों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।


    गंगा दशहरा के मौके पर लगाई आस्था की डुबकी

    इस बीच गंगा दशहरा के मौके पर सोमवार को हरिद्वार में गंगा किनारे बहुत से श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। लोगों ने नियम-कानून के साथ गंगा जी में स्नान किया। माना जाता है कि इस पवित्र मौके पर गंगा में नहाने से सारे पाप धुल जाते हैं। गंगा दशहरा पर्व उस घटना का प्रतीक है जब गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई थीं। इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थीं। शास्त्रों के मुताबिक गंगा दशहरा गंगा नदी के धरती पर आगमन की याद में मनाया जाता है।

  • अफ्रीका में इबोला के प्रकोप के बाद भारत सरकार अलर्ट मोड पर … कोविड जैसे प्रोटोकॉल लागू

    अफ्रीका में इबोला के प्रकोप के बाद भारत सरकार अलर्ट मोड पर … कोविड जैसे प्रोटोकॉल लागू


    नई दिल्ली।
    अफ्रीका (Africa) के कुछ हिस्सों में इबोला (Ebola) के प्रकोप के मद्देनजर भारत सरकार (Government of India) अलर्ट मोड पर नजर आ रही है। खबर है कि विमानन नियामक डीजीसीए ने एयरलाइनों से विभिन्न उपायों को लागू करने के लिए कहा है। इनमें उड़ान के दौरान उद्घोषणाएं करना और प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों से अनिवार्य रूप से स्व-घोषणा प्रपत्र या सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरवाना शामिल है।


    भारत में क्या है स्थिति

    सरकार ने सोमवार को कहा कि देश में अब तक इबोला वायरस (Ebola Virus) के संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा (JP Nadda) ने भारत में बीमारी के किसी भी प्रसार को रोकने के लिए तैयारियों और निगरानी के उपायों की समीक्षा की। नड्डा ने अधिकारियों को देश भर में हवाई अड्डों, बंदरगाहों और भूमि सीमा पार करने सहित देश के सभी प्रवेश बिंदुओं पर इबोला स्क्रीनिंग व्यवस्था को पूरी तरह से सतर्क और मजबूत रखने का निर्देश दिया।

    WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला के प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता वाला सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया है जिसके बाद केंद्र सरकार ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं।


    यहां के यात्रियों को भरने होंगे फॉर्म

    नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने इबोला रोग के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को लेकर SOP जारी की है। युगांडा और कांगो के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क रखने वाली एयरलाइनों को यात्रियों को विमान से उतारने से पहले स्व-घोषणा प्रपत्रों को अनिवार्य रूप से भरवाना और एकत्र करना होगा।


    सूची में ये एयरलाइन्स

    एअर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एमिरेट्स, एयर फ्रांस, एतिहाद एयरवेज और इजिप्टएयर उन 13 एयरलाइनों में शामिल हैं, जो कांगो से यात्रियों को ले जाने वाली एयरलाइनों की सूची में हैं। युगांडा से यात्रियों को ले जाने वाली 17 एयरलाइनों की सूची में एअर इंडिया, इंडिगो और केएलएम शामिल हैं।


    ये लक्षण दिखने पर तुरंत करना होगा सूचित

    एयरलाइनों को उड़ान के दौरान यह उद्घोषणा करना भी अनिवार्य किया गया है कि इबोला रोग के वर्तमान खतरे को देखते हुए, बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, चकत्ते, रक्तस्राव जैसे लक्षण वाले किसी भी यात्री को आगमन पर तुरंत चालक दल और आव्रजन/चिकित्सा इकाई को सूचित करना चाहिए।

    विमान में संदिग्ध मामलों के लिए, डीजीसीए ने कहा कि अन्य उपायों के अलावा, यात्री को विमान के पिछले हिस्से में भेजा जाना चाहिए और यदि संभव हो तो संबंधित यात्री के आगे और बगल की तीन पंक्तियां खाली रखी जानी चाहिए। एयरलाइनों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके पास तीन तह वाले मास्क, एक बार उपयोग में लाये जाने वाले दस्ताने, पीपीई किट, सैनिटाइजर के पर्याप्त भंडार हो।


    शुरू हुई जांच

    गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने सोमवार को कहा कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला के प्रकोप के मद्देनजर अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर युगांडा, कांगो और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की जांच की जा रही है। पानसेरिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग प्रभावित अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की कड़ी निगरानी कर रहा है। अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाम छह बजे से सुबह 10 बजे के बीच युगांडा, कांगो और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की गहन जांच की जा रही है।

  • पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम का असर…. अब दवाओं से लेकर खाने-पीने तक, हर चीज होगी महंगी!

    पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम का असर…. अब दवाओं से लेकर खाने-पीने तक, हर चीज होगी महंगी!


    नई दिल्ली।
    पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Price) में दनादन बढ़ोतरी (Hike) हो रही है. महज 10 दिन में ही तेल कंपनियों (Oil Companies) ने चार बार इनमें बढ़ोतरी की है और इस दौरान फ्यूल प्राइस 7 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ चुका है. लगातार पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel Price) महंगा होने से देश में महंगाई का बड़ा खतरा खड़ा हो रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि इसका असर जल्द ही उन जगहों पर दिखना शुरू हो सकता है, जहां देश के आम लोगों को सबसे ज्यादा तकलीफ होगी. इसकी वजह है ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो जाएगा और ऐसा होने से खाने-पीने की चीजों से लेकर किराने का सामान, दवाएं, ट्रैवलिंग समेत रोजमर्रा की जरूरत के सामानों के दाम बढ़ सकते हैं।


    10 दिन 4 बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल

    देश में तेल कंपनियों ने 15 मई को चार साल बाद पहली बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया था और इनकी कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. इसके बाद 19 मई को फिर फ्यूल बम फूटा और ईंधन की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया. बात यहीं नहीं रुकी और 23 मई को 97 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए.

    इसके बाद 25 मई को तेल कंपनियों ने चौथी बढ़ोतरी करते हुए पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया. इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल 100 रुपये के पार निकल गया और 1 लीटर के लिए 102.12 रुपये खर्च करने पड़ेंगे, जबकि डीजल बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है।


    ट्रांसपोर्टेशन लागत के साथ बढ़ेगी महंगाई

    पेट्रोल-डीजल का महंगा होना, महंगाई के जोखिम को बढ़ाने वाला साबित होता है. इसका उदाहरण बीते 15 मई को ही मिल गया, जबकि Petrol-Diesel-CNG Hike की खबर के बाद अचानक अमूल और मदर डेयरी जैसी कंपनियों ने अपने पैकेज्ड दूध को महंगा कर दिया. यही नहीं मुंबई में ब्रेड महंगी हो गई और टैक्सी यूनियनों ने यात्री किराए में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी.

    देश में पेट्रोल-डीजल बम फूटने के बाद परिवहन उद्योग ने भी अब औपचारिक रूप से ईंधन की बढ़ती लागत को दूसरे व्यवसायों पर डालना शुरू कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि महंगे डीजल का प्रभाव पेट्रोल पंपों पर ही नहीं, बल्कि तमाम दूसरी चीजों से होते हुए इकोनॉमी तक असर डालेगा. ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (AITWU) ने चेतावनी दी है कि डीजल की बढ़ती कीमतों (Diesel Price Hike) के कारण देश भर में ट्रांसपोर्टेशन संचालन प्रभावित होता जा रहा है.

    रिपोर्ट की मानें, तो एसोसिएशन ने बीते 20 मई से राष्ट्रव्यापी फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर (FAF) लागू किया है, जिससे ट्रांसपोर्टरों को डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर माल ढुलाई दरों को बढ़ाने की अनुमति होगी.


    आम ग्राहकों पर होगा सीधा असर

    Petrol-Diesel महंगा होने और ट्रांसपोर्टरों को माल ढुलाई रेट्स बढ़ाने की अनुमति से FMCG कंपनियों, मैन्युफैक्चरर्स, रिटेल विक्रेताओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और फूड सप्लायर्स के लिए लॉजिस्टिक्स लागत में सीधी बढ़ोतरी हो सकती है और इसकी भरपाई के लिए कंपनियां बोझ आखिर में सीधे ग्राहकों पर ही डालेंगी, यानी उनके लिए तमाम सामान महंगे हो जाएंगे.


    FAF से कैसे महंगी होगी माल ढुलाई

    AITWU के मुताबिक, सिर्फ डीजल ही ट्रक के परिचालन लागत का लगभग 65% हिस्सा है. इसी को लेकर एसोसिएशन के फैसले पर नजर डालें, तो साफ किया गया था कि 15 मई के प्राइस हाइक से ऊपर डीजल की कीमतों में हर 1 रुपये की वृद्धि के लिए माल ढुलाई रेट ऑटोमैटिक 0.65% बढ़ जाएगा. यानी अगर डीजल की कीमत 10 रुपये बढ़ती है, तो माल ढुलाई की लागत 6.5 फीसदी बढ़ जाएगी. बता दें कि अब तक डीजल 7 रुपये से ज्यादा महंगा हो चुका है. संगठन ने ये भी साफ किया कि इसका उद्देश्य डीजल की बढ़ती लागत की भरपाई करना है।


    क्या कुछ महंगा होने वाला है!

    Diesel Price Hike के चलते माल ढुलाई की लागत बढ़ने से ग्राहकों द्वारा यूज की जाने वाली रोजमर्रा की चीजों के दाम पर सबसे ज्यादा और पहले असर दिखेगा. इनमें सब्जियां, फल, दूध, डेयरी प्रोडक्ट्स, दवाएं, एफएमसीजी वस्तुओं शामिल हैं. इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से निर्माण सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और ई-कॉमर्स डिलीवरी भी लागत की भरपाई ग्राहकों की जेब से करेंगी. क्योंकि ये सभी सामान, दुकानों और गोदामों तक पहुंचने से पहले ट्रकों के माध्यम से ले जाए जाते हैं।


    पहले रुपया अब पेट्रोल-डीजल ने रुलाया

    पहले से ही देश में डॉलर के मुकाबले लगातार टूटते जा रहे भारतीय रुपये ने महंगाई के जोखिम को बढ़ा दिया था, क्योंकि विदेशों से आयात किए जाने वाले सामनों का पेमेंट डॉलर में ही किया जाता है और रुपया कमजोर होने से ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. वहीं अब पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने से महंगाई का खतरा और भी बढ़ गया है।

    साफ तौर पर कहें, ये मामला सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का तगड़ा बम फूटने के संकेत हैं, जिसकी शुरुआत दूध समेत कई चीजों से पहले ही हो चुकी है।

  • एशिया से लेकर यूरोप तक…. रिकॉर्डतोड़ गर्मी से लोग परेशान….ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में भी लू का कहर

    एशिया से लेकर यूरोप तक…. रिकॉर्डतोड़ गर्मी से लोग परेशान….ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में भी लू का कहर


    नई दिल्ली।
    दुनिया इस समय भीषण गर्मी (Extreme heat) और लगातार बढ़ते तापमान की चुनौती का सामना कर रही है। भारत (India) में जहां कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है, वहीं यूरोप, एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो (El Niño) और जलवायु परिवर्तन (Climate change) के कारण हीटवेव (Heatwaves) अब पहले से ज्यादा खतरनाक, लंबी और जल्दी आने लगी हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जो गर्मी पहले जून-जुलाई में देखने को मिलती थी, अब वह मई महीने में ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। कई देशों में स्कूलों, खेल आयोजनों और सार्वजनिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। कुछ जगहों पर मौतों और स्वास्थ्य संकट की घटनाएं भी सामने आई हैं।


    ब्रिटेन में गर्मी ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

    ब्रिटेन में मई महीने का अब तक का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया। देश के मौसम विभाग के अनुसार लंदन के क्यू गार्डन्स में तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने 1922 और 1944 के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी गर्मी आमतौर पर जुलाई या अगस्त में देखने को मिलती है, लेकिन इस बार मई में ही लोगों को झुलसा देने वाली गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी से बचने के लिए लोग पार्कों, फव्वारों और स्विमिंग पूल का सहारा लेते नजर आए।


    फ्रांस में 350 से ज्यादा शहरों में तापमान का रिकॉर्ड टूटा

    फ्रांस में भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। देश के 350 से ज्यादा शहरों में मई महीने के तापमान के रिकॉर्ड टूट गए हैं। कई इलाकों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। सरकार ने कई क्षेत्रों में हाई टेम्परेचर अलर्ट जारी किया है और लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने की सलाह दी गई है। पेरिस में एक रनिंग इवेंट के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अधिकारियों का मानना है कि तेज गर्मी इसका एक बड़ा कारण हो सकती है।


    स्पेन में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंचने का अनुमान

    स्पेन भी इस समय भीषण हीटवेव का सामना कर रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हालात ऐसे हैं कि रात में भी तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जा रहा, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल रही। विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए।


    वियतनाम में हाल बेहाल

    एशिया में वियतनाम भी गर्मी की मार झेल रहा है। कई इलाकों में तापमान 39 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है। लोगों को दोपहर 10 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।


    इन देशों में भी गर्मी का कहर

    थाईलैंड – बैंकॉक और अन्य इलाकों में अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य अलर्ट जारी किए गए हैं।
    फिलीपींस – स्कूलों को ऑनलाइन मोड में चलाने तक की नौबत आई क्योंकि तापमान बेहद ज्यादा बढ़ गया।
    मेक्सिको – लगातार हीटवेव के कारण कई राज्यों में लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं।
    चीन – उत्तरी और मध्य चीन के कई हिस्सों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी दर्ज की गई है।
    पाकिस्तान – सिंध और पंजाब के कई इलाकों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है।


    क्या है भारत का हाल?

    देश में नौतपा के पहले दिन सोमवार को उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य भारत तक प्रचंड गर्मी के साथ उमस से लोग बेहाल रहे। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में चिलचिलाती धूप के साथ गर्म लू चलती रही। दिन के साथ रातें भी गर्म रहीं। अभी 4-5 दिन झुलसा देने वाली गर्मी के आसार हैं। वहीं तमिलनाडु में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (RMC) ने मंगलवार को राज्य के आठ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से दक्षिण-पूर्व अरब सागर तक बने वायुमंडलीय परिसंचरण तंत्र का असर राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिलेगा।

  • ट्रंप ने फिर दी धमकी…. बोले- डील नहीं हुई तो पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा अमेरिका

    ट्रंप ने फिर दी धमकी…. बोले- डील नहीं हुई तो पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा अमेरिका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) के साथ जारी शांति वार्ता (Peace talks) के बीच डील को लेकर बड़ी धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि ईरान (Iran) के साथ या तो बड़ी और बेहतर परिणामों वाली डील होगी या फिर कोई भी डील नहीं होगी। इतना ही नहीं ट्रंप ने डील न होने की स्थिति में फिर से युद्ध शुरू करने की भी धमकी दी।

    उन्होंने कहा कि अब अगर डील नहीं होती है, तो अमेरिका पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा। इसके साथ ही ट्रंप ने अरब देशों से अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने की अपील की, जिसमें कुछ देश पहले से शामिल हैं। बता दें, ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में सामने आई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हो रही शांति वार्ता लगातार लंबी खिंचती जा रही है। ईरान और अमेरिका दोनों ही तरफ से अच्छे संकेत दिए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

    ईरान के साथ लंबी खिंचती बातचीत के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कोई भी नहीं चाहता कि पश्चिम एशिया का युद्ध फिर से शुरू हो। इसलिए बेहतर है कि डील हो जाए। सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने शनिवार को मध्य-पूर्व के राष्ट्राध्यक्षों के साथ हुई अपनी बातचीतों का ब्यौरा भी साझा किया। उन्होंने बताया खाड़ी देशों के नेताओं, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगान के साथ मिलकर इस संकट को सुलझाने के लिए बातचीत की है। उम्मीद है कि यह जल्दी ही सुलझ जाएगा, लेकिन इसके साथ ही ट्रंप ने अपील की यह सभी देश अब्राहम अकॉर्ड पर भी हस्ताक्षर करें। इतना ही नहीं ट्रंप ने कहा कि अगर ऐसा होता है, तो ईरान भी अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर कर सकता है।


    एक-दो देशों को छोड़कर बाकी देशों को समस्या नहीं होनी चाहिए: ट्रंप

    सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने इस्लामिक देशों के अब्राहम अकॉर्ड को स्वीकार न करने के डर को भी महत्व दिया। उन्होंने कहा, “संभव है कि एक या दो देशों के बाद ऐसा न करने का कारण हो, हम उसे स्वीकार भी करेंगे। लेकिन अधिकांश देशों को इसके लिए तैयार होना होगा। इससे ईरान के साथ होने वाला समझौता और भी ज्यादा ऐतिहासिक हो जाएगा। यह समझौता संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को, सूडान और कजाकस्तान के लिए वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक बूम साबित हुआ है। इस संघर्ष के दौर में भी इन देशों को इसका फायदा मिला है।”


    क्या हैं अब्राहम अकॉर्ड्स?

    अब्राहम अकॉर्ड्स अमेरिका द्वारा बनाए गए समझौतों की एक लिस्ट है। इसका प्रमुख उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच के राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाना है। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू हुए इस समझौते पर सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और मोरक्को ने हस्ताक्षर किए थे। सूडान ने भी इसको सहमति दी है, लेकिन अभी तक उसकी संसद ने इस पर हामी नहीं भरी है। वहीं, अमेरिका का करीबी माने जाने वाला सऊदी अरब भी अभी तक इस समझौते से दूरी बनाए हुए है। हालांकि, सऊदी क्राउन प्रिंस ने इस समझौते में शामिल होने के लिए एक शर्त रखी थी। उन्होंने कहा था कि वह इसमें शामिल होने के लिए तैयार हैं, बशर्ते इसमें दो-राष्ट्र समाधान को लेकर स्पष्टता हो।

    दरअसल, अरब देशों और इस्लामिक देशों की दुनिया में अब्राहम अकॉर्ड्स को फिलिस्तीन के साथ धोखे के तौर पर देखा जाता है। इसलिए ज्यादातर देश इससे कन्नी काटते हुए नजर आते हैं। इस समझौते के बाद देशों को इजरायल के साथ सामान्य संबंधों पर राजी होना पड़ता है, जिससे उनकी जनता इस पर नाराज हो सकती है। पाकिस्तान जैसे देश के लिए तो यह समझौता और भी ज्यादा परेशानी पैदा करने वाला है, क्योंकि वह तो इजरायल को देश के रूप में मान्यता ही नहीं देते हैं।

  • सीने की बेचैनी नहीं मामूली बात: दिल की चेतावनी को समय पर समझना बन सकता है जीवनरक्षक कदम

    सीने की बेचैनी नहीं मामूली बात: दिल की चेतावनी को समय पर समझना बन सकता है जीवनरक्षक कदम

    नई दिल्ली । बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के दौर में हृदय संबंधी बीमारियां तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। पहले जहां दिल की बीमारियां बढ़ती उम्र के साथ जुड़ी मानी जाती थीं, वहीं अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। हार्ट अटैक एक ऐसी गंभीर स्थिति है जो कई बार अचानक सामने आती है और मरीज तथा परिवार दोनों को संभलने का मौका तक नहीं देती। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर कई बार पहले ही कुछ संकेत देने लगता है, जिन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में यह संकेत सामान्य शारीरिक परेशानी की तरह लगते हैं, जिसके कारण लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। सबसे सामान्य और गंभीर संकेत सीने में दर्द, दबाव या जकड़न महसूस होना माना जाता है। कई बार यह दर्द धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने लगता है। दर्द बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े, कोहनी और पीठ तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति को सामान्य दर्द समझकर टालना खतरनाक साबित हो सकता है।

    इसके अलावा अचानक सांस लेने में कठिनाई होना या बिना ज्यादा मेहनत के सांस फूलना भी दिल से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है। कई लोगों को अचानक चक्कर आने लगते हैं या शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है। कुछ मामलों में मतली, उल्टी या पेट में असहजता भी देखने को मिलती है, जिसके कारण लोग इसे गैस या पाचन से जुड़ी समस्या मान लेते हैं। अचानक ठंडा पसीना आना और चेहरे की रंगत फीकी पड़ जाना भी ऐसे संकेत हैं जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।

    विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं और बुजुर्गों में कई बार हार्ट अटैक के लक्षण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आते। यही कारण है कि इन वर्गों में अधिक सतर्कता की आवश्यकता होती है। अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण लगातार कुछ मिनटों तक बने रहें या तेजी से बढ़ने लगें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी हो जाता है। देरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।

    हृदय रोगों से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव सबसे अहम कदम माना जाता है। रोजाना नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और तनाव से दूरी हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फलों, हरी सब्जियों, साबुत अनाज और पौष्टिक भोजन को दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए। तला-भुना और अत्यधिक नमक या चीनी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर रखना फायदेमंद हो सकता है। धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन हृदय के लिए गंभीर जोखिम बढ़ाते हैं, इसलिए इन आदतों से बचना जरूरी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच कराना अब आवश्यकता बन चुका है। समय पर जांच और सतर्कता न केवल बीमारियों की पहचान आसान बनाती है, बल्कि एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की दिशा भी तय करती है।

  • नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी

    नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में नौतपा की शुरुआत के साथ भीषण गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और तेज धूप लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य लोगों की तुलना में पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बढ़ती गर्मी शरीर के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में लापरवाही कई बार बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा के दौरान शरीर पर हीट स्ट्रेस तेजी से बढ़ता है। अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है। इसका सीधा असर शरीर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। खासतौर पर डायबिटीज, हार्ट, किडनी, अस्थमा और मोटापे से पीड़ित लोगों में जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि डॉक्टर इन मरीजों को समय रहते सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    डायबिटीज के मरीजों में गर्मी का असर कई तरह से दिखाई देता है। शरीर में पानी की कमी होने पर ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित हो सकता है। कई बार डिहाइड्रेशन के कारण शुगर अचानक बढ़ या घट सकती है, जिससे मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। इसके अलावा इंसुलिन की कार्यक्षमता पर भी अधिक तापमान असर डाल सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को समय-समय पर पानी पीने और शुगर की नियमित जांच करते रहने की सलाह दी जा रही है।

    किडनी रोगियों के लिए भी नौतपा का समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिक पसीना निकलने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और पहले से मौजूद समस्या गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना ऐसे मरीजों के लिए बेहद जरूरी है।

    हार्ट मरीजों के लिए भी बढ़ती गर्मी चिंता का विषय है। अत्यधिक तापमान शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र पर दबाव डालता है। कई मामलों में हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन की स्थिति बन सकती है, जिससे दिल पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इसी तरह अस्थमा और सांस संबंधी मरीजों में गर्म हवा और वातावरणीय बदलाव सांस लेने में परेशानी बढ़ा सकते हैं।

    डॉक्टरों की सलाह है कि नौतपा के दौरान दोपहर में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। हल्के और सूती कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने, तला-भुना भोजन कम खाने और शरीर को ठंडा रखने जैसे छोटे उपाय बड़ी समस्याओं से बचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही सावधानी और संतुलित दिनचर्या अपनाकर भीषण गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।