Blog

  • रीवा घटना के विरोध में सड़क पर उतरा जैन समाज, सतना में दिखा आक्रोश

    रीवा घटना के विरोध में सड़क पर उतरा जैन समाज, सतना में दिखा आक्रोश


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के सतना में सोमवार को जैन समाज ने रीवा में हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना के विरोध में मौन जुलूस निकाला। यह जुलूस पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, जिसमें समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। लोगों के हाथों में संतों की सुरक्षा से जुड़े पोस्टर थे और पूरे मार्ग में मौन रहकर श्रद्धांजलि और विरोध दर्ज कराया गया। यह जुलूस पन्नीलाल चौक से शुरू होकर सिटी कोतवाली परिसर में समाप्त हुआ।

     जीतू पटवारी समेत सर्व समाज की भागीदारी
    इस मौन जुलूस में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari भी शामिल हुए। उनके साथ सर्व समाज के लोग और बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रहीं। सभी ने मिलकर हादसे में जान गंवाने वाली साध्वियों को श्रद्धांजलि दी और न्याय की मांग उठाई। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का परिणाम है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

     राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
    प्रदर्शन के बाद सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिया को सौंपा। इसमें मांग की गई कि-
    जैन साधु-संतों की सुरक्षा के लिए विशेष नीति बनाई जाए
    रीवा हादसे की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच हो
    यदि साजिश की पुष्टि होती है, तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए

    क्या है पूरा मामला?
    यह घटना रीवा में उस समय हुई जब पैदल विहार कर रही तीन जैन आर्यिका माताओं को एक तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी थी। हादसे में दो साध्वियों की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी कार चालक को गिरफ्तार कर लिया है। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

    न्याय की मांग तेज
    सतना में हुए इस मौन जुलूस ने पूरे क्षेत्र में संवेदनशीलता और न्याय की मांग को और मजबूत कर दिया है। समाज का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

  • नन्हें कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा, वारली आर्ट और पेपर क्राफ्ट में चमके

    नन्हें कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा, वारली आर्ट और पेपर क्राफ्ट में चमके


    मध्य प्रदेश । सागर की पोद्दार कॉलोनी में आयोजित पांच दिवसीय निशुल्क समर कैंप इस बार बच्चों के लिए सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक यादगार सीखने का अनुभव बन गया। इस कैंप में 41 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और हर दिन नई-नई कलात्मक गतिविधियों से अपने हुनर को निखारा। कैंप के दौरान बच्चों ने न सिर्फ रंगों और कागजों से खेलना सीखा, बल्कि अपनी कल्पनाओं को आकार देना भी जाना।

    हर दिन नई कला, नया अनुभ
    इस समर कैंप को इस तरह डिजाइन किया गया था कि बच्चों को हर दिन एक नई कला से परिचित कराया जा सके।
    पहले दिन बच्चों ने पारंपरिक वारली आर्ट की बारीकियां सीखी।
    दूसरे दिन ओरिगामी के जरिए कागज से सुंदर आकृतियां बनाना सीखा।
    तीसरे दिन लीफ आर्ट में पत्तों के माध्यम से क्रिएटिव डिजाइन बनाए गए।
    चौथे दिन पेपर कप क्राफ्ट ने बच्चों की कल्पनाओं को पंख दिए।
    पांचवें दिन आइसक्रीम स्टिक क्राफ्ट के जरिए बच्चों ने मजेदार मॉडल तैयार किए।
    हर गतिविधि में बच्चों की भागीदारी और उत्साह देखने लायक था।

    स्क्रीन टाइम से क्रिएटिविटी की ओर कदम
    कैंप की आयोजक श्रद्धा वर्मा ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को मोबाइल और स्क्रीन टाइम से दूर करके रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। उनका कहना है कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों के मानसिक विकास और आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों ने पूरे कैंप के दौरान अनुशासन और सीखने की गहरी रुचि दिखाई, जो बेहद सराहनीय है।

    समापन पर मिला सम्मान और खुश
    पांच दिवसीय इस समर कैंप का समापन डिजिटल प्रमाणपत्रों के वितरण के साथ हुआ। बच्चों के चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    सागर का यह समर कैंप यह साबित करता है कि अगर बच्चों को सही दिशा और मंच मिले, तो वे रचनात्मकता में नए आयाम छू सकते हैं। यह पहल न केवल कला को बढ़ावा देती है, बल्कि बच्चों को मोबाइल की दुनिया से निकालकर वास्तविक सीख की ओर ले जाती है।

  • अंतरराष्ट्रीय तनाव घटते ही शेयर बाजार में आई तेजी, सेंसेक्स और निफ्टी ने हरे निशान से की शुरुआत

    अंतरराष्ट्रीय तनाव घटते ही शेयर बाजार में आई तेजी, सेंसेक्स और निफ्टी ने हरे निशान से की शुरुआत

    नई दिल्ली ।  सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को सकारात्मक शुरुआत का संकेत दिया। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिसका सीधा असर घरेलू बाजारों पर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय हालात में नरमी के संकेत मिलते ही बाजार में खरीदारी का माहौल बना और प्रमुख सूचकांकों ने मजबूत बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की।

    कारोबार शुरू होते ही बाजार में चौतरफा तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूत स्थिति में नजर आए और शुरुआती सत्र में बाजार ने हरे निशान के साथ उत्साहजनक शुरुआत दर्ज की। बाजार में निवेशकों का रुझान कई प्रमुख सेक्टरों की ओर देखने को मिला, जिससे व्यापक स्तर पर खरीदारी बढ़ी और बाजार का माहौल सकारात्मक बना रहा।

    शुरुआती कारोबार में ऑटो सेक्टर ने सबसे अधिक मजबूती दिखाई। इसके अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, तेल एवं गैस, आधारभूत ढांचा और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कई क्षेत्रों में भी तेजी का रुख देखा गया। बाजार में बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग के शेयरों में भी उत्साह नजर आया, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा व्यापक स्तर पर मजबूत हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों में नरमी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर वैश्विक निवेशकों में चिंता बढ़ी हुई थी। लेकिन अब दोनों देशों के बीच बातचीत और समझौते की संभावनाओं ने बाजार की भावनाओं को सकारात्मक दिशा दी है।

    इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी दर्ज की गई, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है। भारत जैसे आयात आधारित देश के लिए तेल कीमतों में कमी से महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और इसका असर बाजार भावना पर भी सकारात्मक रूप से पड़ता है। यही वजह है कि कच्चे तेल में नरमी को निवेशकों ने अच्छे संकेत के रूप में लिया।

    वैश्विक बाजारों का रुख भी घरेलू बाजार को समर्थन देता दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में अधिकतर प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र के दौरान सकारात्मक माहौल देखने को मिला था, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

    फिलहाल निवेशकों की नजरें वैश्विक घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं पर बनी हुई हैं। यदि आने वाले दिनों में वैश्विक स्तर पर स्थिरता बनी रहती है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है, तो बाजार में यह सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। शुरुआती संकेतों ने फिलहाल निवेशकों के बीच उत्साह और उम्मीद का माहौल जरूर बना दिया है।

  • PM आवास योजना की आड़ में शराब का स्टॉक, आरोपियों की तलाश जारी

    PM आवास योजना की आड़ में शराब का स्टॉक, आरोपियों की तलाश जारी


    मध्य प्रदेश । Sagar जिले के बरोदिया कलां क्षेत्र में आबकारी विभाग ने अवैध शराब कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 26 पेटी शराब जब्त की है। यह कार्रवाई वार्ड क्रमांक-6 में की गई, जहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन मकानों को शराब छिपाने के अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।

    सूचना के अनुसार, मुखबिर से विभाग को जानकारी मिली थी कि दो निर्माणाधीन मकानों में भारी मात्रा में अवैध शराब रखी गई है और इसे अवैध बिक्री के उद्देश्य से छिपाया गया है। सूचना मिलते ही वृत्त प्रभारी मृत्युंजय ठाकुर के नेतृत्व में आबकारी टीम मौके पर पहुंची और दबिश दी गई।

    तलाशी के दौरान दोनों निर्माणाधीन मकानों से कुल 26 पेटी शराब बरामद की गई, जबकि एक अन्य स्थान से गोवा व्हिस्की, बॉम्बे और पावर व्हिस्की सहित लगभग 24.12 लीटर शराब भी जब्त की गई।

    Sagar में सामने आए इस मामले ने अवैध शराब कारोबार के नए तरीकों को उजागर किया है, जहां सरकारी योजनाओं के तहत बन रहे आवासों का उपयोग शराब छिपाने के लिए किया जा रहा था।

    कार्रवाई के दौरान आरोपी मौके से फरार हो गए, जिससे उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। आबकारी विभाग ने संबंधित मामलों में प्रकरण दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

    अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध शराब कारोबार पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आगे भी ऐसी गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।

  • सागर में मौन जुलूस: जैन समाज का विरोध, साध्वियों की सुरक्षा को लेकर उठी मांग

    सागर में मौन जुलूस: जैन समाज का विरोध, साध्वियों की सुरक्षा को लेकर उठी मांग


    मध्य प्रदेश । Sagar में सोमवार को जैन समाज ने रीवा में 20 मई को हुए सड़क हादसे में दो साध्वियों की मौत के विरोध में शांत लेकिन प्रभावशाली मौन जुलूस निकाला। इस घटना के बाद पूरे समाज में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है, जिसके चलते शहर में धार्मिक संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है।

    सुबह करीब 8 बजे समाज के लोग गौराबाई और पार्श्वनाथ मंदिर, कटरा नमकमंडी में एकत्र हुए। इसके बाद सफेद वस्त्रों में पुरुष और पीले-केसरिया वस्त्रों में महिलाएं शांतिपूर्वक कोतवाली थाने तक मौन जुलूस के रूप में पहुंचे। पूरे जुलूस के दौरान लोगों ने किसी नारेबाजी के बजाय गंभीरता और शांति के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।

    कोतवाली पहुंचकर सकल दिगंबर जैन समाज के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर के नाम सिटी मजिस्ट्रेट गगन बिसेन और सीएसपी कश्यप को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सड़क दुर्घटना के दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग के साथ-साथ इस घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई।

    समाज ने इस मौके पर यह भी कहा कि संतों और साध्वियों की सुरक्षा को लेकर अब ठोस और राष्ट्रीय स्तर की नीति बनाई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। ज्ञापन में ‘संत सुरक्षा प्रोटोकॉल’ लागू करने और इसे विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।

    इस आंदोलन का असर केवल शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि Sagar जिले के बांदरी और जरुआखेड़ा जैसे क्षेत्रों में भी देखने को मिला, जहां जैन समाज ने मौन जुलूस निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

    बांदरी में जुलूस के दौरान समाज के लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और थाने पहुंचकर अपनी मांगें रखीं। वहीं जरुआखेड़ा में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए पुलिस चौकी को ज्ञापन सौंपा गया।

    समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि संत समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • खदान बनी मौत का फंदा: पैर फिसलते ही युवक गहराई में समाया, SDERF जुटी

    खदान बनी मौत का फंदा: पैर फिसलते ही युवक गहराई में समाया, SDERF जुटी


    मध्य प्रदेश । Katni जिले के स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम धुरी-बंधी में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जब एक युवक गहरे पानी से भरी खदान में डूब गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर एकत्र हो गए।

    जानकारी के अनुसार, ग्राम धुरी निवासी दुर्गेश कुशवाहा (लगभग 26 वर्ष) रविवार शाम खदान के पास गया था। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह सीधे लगभग 100 फीट गहरी पानी से भरी खदान में गिर गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की और शोर मचाया, लेकिन कुछ ही पलों में वह पानी में समा गया।

    घटना की सूचना मिलते ही स्लीमनाबाद थाना पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कटनी से SDRF टीम को भी बुलाया गया।

    SDRF की चार सदस्यीय विशेषज्ञ टीम प्लाटून कमांडर श्वेता गुप्ता के नेतृत्व में आवश्यक रेस्क्यू उपकरण, बोट और लाइफ जैकेट के साथ मौके पर पहुंची। लेकिन खदान की अत्यधिक गहराई और संकरी संरचना के कारण बचाव कार्य में कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं।

    अंधेरे के कारण रात में रेस्क्यू ऑपरेशन और भी कठिन हो गया। टीम ने टॉर्च और सर्च लाइट की मदद से देर रात तक खोजबीन जारी रखी, लेकिन युवक का कोई सुराग नहीं मिल सका।

    Katni पुलिस और SDRF की टीम पूरी सतर्कता के साथ लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। प्रशासन ने खदान के आसपास सुरक्षा घेरा बनाकर ग्रामीणों की भीड़ को नियंत्रित किया है ताकि बचाव कार्य में बाधा न आए।

    जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और रेस्क्यू टीम के संपर्क में हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और सुबह होते ही अतिरिक्त संसाधनों के साथ सर्चिंग तेज की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर जिले में खनन क्षेत्रों और पानी से भरी पुरानी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • नीट परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, एनटीए और सीबीआई से जवाब तलब किया है। मामले में परीक्षा प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    नीट परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, एनटीए और सीबीआई से जवाब तलब किया है। मामले में परीक्षा प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    नई दिल्ली ।देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में शामिल नीट-यूजी को लेकर एक बार फिर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवाद और अनियमितताओं के आरोपों के बीच मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस मामले में शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और केंद्रीय जांच एजेंसी से जवाब मांगा है। कोर्ट के इस कदम के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजरें अब आगामी सुनवाई पर टिक गई हैं।

    नीट परीक्षा से जुड़े मामले पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि परीक्षा की दोबारा प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र और न्यायिक निगरानी में कराई जाए ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी या विवाद की संभावना न रहे। इसके साथ ही परीक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की भी मांग की गई।

    याचिका में सुझाव दिया गया कि इस समिति का नेतृत्व न्यायपालिका से जुड़े अनुभवी व्यक्ति के हाथों में हो और इसमें तकनीकी तथा जांच से जुड़े विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। इसके पीछे उद्देश्य यह बताया गया कि परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूत बनाया जा सके। साथ ही यह भी मांग रखी गई कि परीक्षा परिणामों को केंद्रवार सार्वजनिक किया जाए ताकि किसी भी असामान्य पैटर्न या संभावित गड़बड़ी की पहचान आसानी से हो सके।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पहले भी सुधार संबंधी सुझाव दिए जा चुके हैं और कई सिफारिशों पर सहमति भी बनी थी, लेकिन इसके बावजूद यदि ऐसी स्थितियां सामने आती हैं तो यह गंभीर विषय है। अदालत ने संबंधित पक्षों को परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सुधारात्मक कदमों और निगरानी संबंधी उपायों की जानकारी शपथ पत्र के रूप में देने का निर्देश दिया है।

    गौरतलब है कि नीट परीक्षा देशभर में मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है और इसमें लाखों छात्र हिस्सा लेते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ा कोई भी विवाद सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। इसी कारण इस मामले को अत्यधिक संवेदनशील माना जा रहा है।

    मामले में जांच एजेंसियां भी सक्रिय हैं और कथित अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और निष्पक्षता पर एक बार फिर व्यापक बहस छेड़ दी है। अब अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट हो सकेगा कि आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी और परीक्षा व्यवस्था में क्या नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • दबंगों ने महंत पर किया हमला, गला दबाकर हत्या की कोशिश का आरोप

    दबंगों ने महंत पर किया हमला, गला दबाकर हत्या की कोशिश का आरोप


    मध्य प्रदेश । Katni जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चिरहुली चांदन में रविवार शाम एक गंभीर हिंसक घटना सामने आई, जहां वेंकटेश्वर मठ की जमीन के सीमांकन के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि मामला मारपीट और जानलेवा हमले तक पहुंच गया।

    जानकारी के अनुसार, प्रयागराज स्थित वेंकटेश्वर मठ के महंत राजेंद्र प्रसाद शुक्ल अपनी संस्था की लगभग 5 एकड़ जमीन के सीमांकन के लिए राजस्व विभाग की टीम और स्थानीय कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे थे। प्रक्रिया शांतिपूर्वक चल रही थी, लेकिन इसी दौरान सटे हुए भूमि मालिकों ने वहां पहुंचकर विवाद शुरू कर दिया।

    आरोप है कि हरि प्रसाद उर्फ भोला पांडेय और अवधेश पांडेय ने जमीन को लेकर आपत्ति जताई और मौके पर गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद विवाद इतना बढ़ा कि उन्होंने फोन कर अपने अन्य परिजनों को भी बुला लिया, जिसके बाद माहौल पूरी तरह हिंसक हो गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाबू पांडेय और सचिन पांडेय ने मौके पर पहुंचकर मठ के सेवादार संतलाल विश्वकर्मा पर लाठी-डंडों और लात-घूसों से हमला कर दिया। घटना के दौरान महंत राजेंद्र प्रसाद शुक्ल ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनका गला दबाकर जान से मारने की कोशिश भी की।

    इस हमले में सेवादार गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनके गले, चेहरे और पैरों पर गंभीर चोटें आई हैं। मौके पर मौजूद अन्य लोगों के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया गया और जान बचाई जा सकी।

    Katni पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर तुरंत कार्रवाई करते हुए चार नामजद आरोपियों हरि प्रसाद उर्फ भोला पांडेय, अवधेश पांडेय, बाबू पांडेय और सचिन पांडेय के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। वहीं इस घटना ने एक बार फिर जमीन विवादों में बढ़ती हिंसा और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • शिक्षा और संस्कृति के संगम की ओर बड़ा कदम, सीबीएसई में मैथिली भाषा शामिल होने से बढ़ा भाषाई गौरव

    शिक्षा और संस्कृति के संगम की ओर बड़ा कदम, सीबीएसई में मैथिली भाषा शामिल होने से बढ़ा भाषाई गौरव

    नई दिल्ली । भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद शिक्षा और सांस्कृतिक जगत में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस फैसले को न केवल एक भाषाई उपलब्धि माना जा रहा है, बल्कि इसे क्षेत्रीय भाषाओं को नई पहचान और मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।

    इस निर्णय के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली भाषा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने की तैयारी की गई है। इसके बाद कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों को मातृभाषा के रूप में मैथिली पढ़ने का अवसर मिलेगा। लंबे समय से क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा व्यवस्था में बेहतर स्थान देने की मांग उठती रही है और इस फैसले को उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    मैथिली भाषा भारतीय संस्कृति और साहित्य की समृद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। मिथिला क्षेत्र की पहचान केवल उसकी सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं रही, बल्कि भाषा और साहित्य के क्षेत्र में भी उसका विशेष योगदान रहा है। ऐसे में शिक्षा के शुरुआती स्तर पर बच्चों को अपनी मातृभाषा से जोड़ने का प्रयास भाषा संरक्षण के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

    इस फैसले को लेकर बिहार में खुशी का माहौल देखा जा रहा है। इसे मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई गौरव के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा यदि बच्चों की मातृभाषा में दी जाए तो उनकी समझने और सीखने की क्षमता अधिक प्रभावी होती है। यही वजह है कि नई शिक्षा व्यवस्था में मातृभाषा आधारित शिक्षा को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है।

    शिक्षा नीति में भी प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा के प्रयोग पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी जड़ों, संस्कृति और स्थानीय पहचान से जोड़ना है। माना जाता है कि जब बच्चे अपनी परिचित भाषा में शिक्षा प्राप्त करते हैं तो उनका बौद्धिक और भावनात्मक विकास अधिक सहज तरीके से होता है।

    मैथिली भाषा को मिला यह स्थान केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा और परंपराओं के अधिक करीब आ सकेंगी। साथ ही यह कदम अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जिससे भारत की भाषाई विविधता और अधिक मजबूत हो सकती है।

    भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती बल्कि समाज की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी होती है। ऐसे में मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में मिला यह नया स्थान आने वाले समय में भाषाई संरक्षण और सांस्कृतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है।

  • कटनी में दुर्लभ कछुओं के गायब होने से हड़कंप, जांच में जुटा प्रशासन

    कटनी में दुर्लभ कछुओं के गायब होने से हड़कंप, जांच में जुटा प्रशासन


    मध्य प्रदेश । Katni में ऐतिहासिक लल्लू भैया की तलैया के गहरीकरण कार्य के दौरान सामने आई एक घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रविवार को खुदाई के दौरान तीन दुर्लभ प्रजाति के कछुए पाए गए थे, जिन्हें तत्काल मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने एक तसले में सुरक्षित रखा था। इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कछुओं को जीवित अवस्था में संभालते हुए देखा जा सकता है।

    लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया। कुछ ही समय में ये तीनों दुर्लभ कछुए अचानक लापता हो गए। न तो उनका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध है और न ही यह स्पष्ट जानकारी कि उन्हें वन विभाग को सौंपा गया या कहीं और ले जाया गया। इस घटना के बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रजाति के जीवों के साथ इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। आशंका जताई जा रही है कि या तो इन कछुओं को अनजाने में कहीं छोड़ दिया गया या फिर उनकी अवैध तस्करी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह घटना सीधे तौर पर वन्यजीव संरक्षण नियमों की अनदेखी को दर्शाती है।

    Katni में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत कछुओं को संरक्षित श्रेणी में रखा गया है। कानून के अनुसार किसी भी जंगली कछुए को नुकसान पहुंचाना, उसे गायब करना या अवैध रूप से अपने पास रखना एक गंभीर अपराध है, जिसमें 3 से 7 वर्ष तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

    नियमों के मुताबिक, यदि किसी भी निर्माण या रिहायशी क्षेत्र में कोई वन्यजीव मिलता है, तो उसकी तुरंत सूचना वन विभाग को देना और सुरक्षित रूप से उन्हें सौंपना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। लेकिन इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं होने से नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार ने स्वीकार किया है कि तलैया की खुदाई के दौरान कछुए मिले थे, लेकिन फिलहाल वे कहां हैं, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

    यह घटना केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं मानी जा रही, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर करती है। अब सवाल यह है कि आखिर ये दुर्लभ कछुए गए कहां और इसके पीछे जिम्मेदार कौन है।