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  • 2029 में लागू हो सकता है महिला आरक्षण बिल…. जानें कानूनी विकल्प

    2029 में लागू हो सकता है महिला आरक्षण बिल…. जानें कानूनी विकल्प


    नई दिल्ली।
    संसद में शुक्रवार को 131वां संविधान संशोधन विधेयक (131st Constitutional Amendment Bill) भले ही दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया हो, लेकिन इससे महिला आरक्षण (Women’s reservation.) की मूल योजना खत्म नहीं हुई है। 2023 में पारित मूल कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम-Women’s Empowerment Worship Act) अभी भी प्रभावी है और 2029 में इसके लागू होने की संभावनाएं बरकरार हैं।

    आपको बता दें कि सरकार ने 131वां संशोधन विधेयक मुख्य रूप से आरक्षण को आसान बनाने के लिए पेश किया था। इसका उद्देश्य 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 816 करना था। इसके विफल होने का मतलब केवल यह है कि फिलहाल सीटों की संख्या बढ़ाने का सरकारी फॉर्मूला रुक गया है, लेकिन महिला कोटा का मुख्य जनादेश अभी भी सुरक्षित है।

    कैसे लागू होगा 2029 में आरक्षण?
    मूल कानून (अनुच्छेद 334A) के तहत आरक्षण लागू करने के लिए दो शर्तें पूरी होनी जरूरी हैं। 2023 में कानून बनने के बाद एक नई जनगणना होनी चाहिए, जो अभी प्रगति पर है। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाना चाहिए। यदि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया 2029 के आम चुनाव से पहले पूरी हो जाती है, तो आरक्षण को लागू करने में कोई कानूनी बाधा नहीं आएगी।

    विकल्प क्या हैं?
    सरकार के पास अब भी दो वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं। सरकार अनुच्छेद 334A में संशोधन कर आरक्षण को ‘परिसीमन’ की शर्त से अलग कर सकती है। इससे मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% कोटा लागू किया जा सकेगा। अनुच्छेद 82 का उपयोग करते हुए 2026 के बाद परिसीमन पर लगा संवैधानिक प्रतिबंध हट जाएगा, जिससे सीटों के समायोजन का रास्ता साफ हो सकता है।

    सरकार के पास अब भी है मौका
    संसद में परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े दो अन्य बिल अभी भी लंबित हैं। सरकार ने इन्हें वापस नहीं लिया है, जिसका मतलब है कि इस लोकसभा के कार्यकाल के दौरान किसी भी समय इन्हें दोबारा चर्चा के लिए लाया जा सकता है। इससे परिसीमन आयोग के गठन का विकल्प खुला हुआ है।

    तकनीकी चुनौतियां
    भले ही तकनीकी रूप से रास्ता खुला हो, लेकिन राह इतनी आसान नहीं है। लोकसभा की 550 सीटों की वर्तमान सीमा को बढ़ाने के लिए सरकार को फिर से संसद में दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा, जो एक बड़ी चुनौती है। जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्गठन राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है। उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद बढ़ सकता है। यदि सरकार सीटों की संख्या बढ़ाए बिना केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं दोबारा तय करती है तो विपक्षी दलों के साथ आम सहमति बनने की उम्मीद ज्यादा है।

  • चीन के 4 कार्गो विमान गुपचुप तरीके से ईरान पहुंचे…. हथियार भेजने का दावा

    चीन के 4 कार्गो विमान गुपचुप तरीके से ईरान पहुंचे…. हथियार भेजने का दावा


    तेहरान।
    मध्य एशिया (Central Asia) में जारी तनाव के बीच एक नई घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कमेंटेटर मारियो नॉफाल (Commentator Mario Nofal.) ने दावा किया है कि चीन के चार कार्गो विमान (Four Cargo Planes) ईरान (Iran) में गुपचुप तरीके से उतरे हैं। उन्होंने दावा किया कि लैंडिंग से पहले विमानों ने अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर दिए जिससे उनकी जानकारी किसी को हासिल ना हो सके। एक दिन पहले ही शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने अमेरिका से वादा किया था कि वह ईरान को हथियारों की कोई सप्लाई नहीं करेंगे।

    अब इस मामले के जानकारों कहना है कि चारों विमानों का इस तरह से लैंडिंग से पहले ट्रांसपॉन्डर बंद करना कोई तकनीकी खामी नहीं हो सकती है। हालांकि इन विमानों को लेकर ना तो ईरान की तरफ से और ना ही चीन की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है। चीन ने ईरान को किसी तरह के सहयोग देने के आरोपों को खारिज किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को कहा कि इस तरह की रिपोर्ट एकदम झूठी हैं। चीन ने ईरान को कोई सैटलाइट हेल्प भी नहीं की है।

    मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि पड़ोसी देशों में अमेरिका के बेस ध्वस्त करने के लिए चीन उनसकी सहायता कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को धमकी दी थी कि वह अगर किसी भी रूप में दखल देता है तो इसके परिणाम बहुत बुरे होंगे। एविएशन एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह से विमानों का ट्रांसपॉन्डर बंद कर लेना सामान्य तो नहीं है। हो सकता है कि किसी ऑपरेशनल या फिर सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया हो।

    जानकारों का कहना है कि लगातार कई विमानों का एक ही पैटर्न पर लैंड करना संदेह बढ़ाता है। अमेरिका और इजरायल के बीच थोड़ा तनाव इस बात से कम होता नजर आ रहा है कि दोनों ही देशों ने दावा किया है कि कमर्शल जहाजों के लिए होर्मुज को खोल दिया गया है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि ईरान के लिए उनकी नाकेबंदी जारी रहेगी।

    वाशिंगटन और तेहरान ने 7 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हालांकि शत्रुता की पुनः शुरुआत की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। अब वार्ता और युद्ध को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। होर्मुज की खबर आने के बाद वैश्विक बाजार में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है।

  • Pakistan के बलूचिस्तान में सेना और विद्रोहियों में हुई भारी गोलीबारी, सैकड़ों घायल

    Pakistan के बलूचिस्तान में सेना और विद्रोहियों में हुई भारी गोलीबारी, सैकड़ों घायल


    इस्लामाबाद ।
    पाकिस्तान (Pakistan) के बलूचिस्तान प्रांत (Balochistan Province) में सेना व बलोच विद्रोहियों (Army and Baloch rebels) में भीषण गोलीबारी चल रही है। स्थिति यह है कि सैन्य अभियानों के बीच खारान, खुजदार और मस्तुंग सहित कई जिलों में हिंसा से विद्रोह और व्यापक हो गया है। सेना-विद्रोहियों में सशस्त्र झड़पों के बीच बड़ी संख्या में सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं। हालांकि, सीमित पहुंच के कारण इन खबरों पर पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बल खामोशी बनाए हैं। जबकि खारान में नया सैन्य अभियान शुरू होने का दावा निवासियों ने किया। सेना ने अलमार्क और किसान जैसे इलाकों में तड़के एक अभियान शुरू कर दिया।

    इस अभियान के दौरान, कुछ अज्ञात हथियारबंद लोगों ने सेना के दस वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया और दोनों पक्षों में गोलीबारी शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने अपने ऊपर ड्रोन उड़ने की भी जानकारी दी, लेकिन हताहतों या अभियान के नतीजों के बारे में कोई भी पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारी इन घटनाक्रमों पर चुप्पी साधे हैं। इसके बाद सोहिंदा में काफी देर तक गोलीबारी होती रही। यह झड़प कई घंटों तक चली। इस दौरान क्षेत्र में ड्रोन उड़ते भी देखे गए।

    बलूचिस्तान के बरखान जिल में अंधाधुंध सैन्य गोलीबारी में आम नागरिकों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। यहां बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने हाल ही में हुई बमबारी और गोलाबारी की निंदा कर इसे सामूहिक सजा का कृत्य बताया है। इस अभियान में कई गैर-लड़ाकों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग शामिल हैं। बीवाईसी ने घटना को बेहद दुखद और निंदनीय त्रासदी बताया।

  • आधी रात को सस्ता हुआ तेल! कच्चे तेल में 10% गिरावट, फिर भी देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस

    आधी रात को सस्ता हुआ तेल! कच्चे तेल में 10% गिरावट, फिर भी देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद भारत में आम लोगों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल 10% तक लुढ़ककर 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने घरेलू कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।

    देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है।

    सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल य
    हां
    अंडमान-निकोबार की राजधानी पोर्टब्लेयर में अब भी सबसे सस्ता ईंधन मिल रहा है।

    यहां पेट्रोल 78.05 रुपये और डीजल 82.64 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जो बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है।

    क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम?
    ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक शिपिंग को फिर से सुचारू करने के संकेत दिए हैं। इस खबर के बाद सप्लाई को लेकर बनी चिंता कम हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

    देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल के रेट (₹/लीटर)

    मुंबई – 104.21
    कोलकाता – 103.94
    चेन्नई – 100.75
    अहमदाबाद – 94.49
    बेंगलुरु – 94.49
    हैदराबाद – 107.46
    जयपुर – 104.72
    लखनऊ – 94.69
    पुणे – 104.04
    चंडीगढ़ – 94.30
    इंदौर – 106.48
    सूरत – 95.00
    नाशिक – 95.50

    डीजल के ताजा रेट (₹/लीटर)

    मुंबई – 92.15
    कोलकाता – 90.76
    चेन्नई – 92.34
    अहमदाबाद – 90.17
    बेंगलुरु – 89.02
    हैदराबाद – 95.70
    जयपुर – 90.21
    लखनऊ – 87.80
    पुणे – 90.57
    चंडीगढ़ – 82.45
    इंदौर – 91.88
    पटना – 93.80
    सूरत – 89.00

    पहले बढ़ चुके हैं दाम
    हाल ही में प्राइवेट कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी की थी। शेल इंडिया ने 1 अप्रैल को पेट्रोल 7.41 रुपये और डीजल 25.01 रुपये प्रति लीटर महंगा किया था।

    वहीं, नायरा ने मार्च में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 5 रुपये तक बढ़ाए थे।

    प्रीमियम फ्यूल भी महंगा
    इंडियन ऑयल ने 1 अप्रैल को XP100 पेट्रोल की कीमत 11 रुपये बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दी थी। इसके अलावा प्रीमियम डीजल ‘एक्स्ट्रा ग्रीन’ भी 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर हो गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू स्तर पर फिलहाल कोई राहत नहीं है। अब सबकी नजर ऑयल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी है—क्या आम आदमी को सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलेगा या इंतजार लंबा चलेगा?

  • भारत-चीन रिश्तों में नई नरमी! SCO मंच पर पहली खास बैठक, जिनपिंग के भारत दौरे के संकेत

    भारत-चीन रिश्तों में नई नरमी! SCO मंच पर पहली खास बैठक, जिनपिंग के भारत दौरे के संकेत


    नई दिल्ली।
    लंबे तनाव के बाद भारत और चीन के रिश्तों में फिर से गर्माहट दिखने लगी है। साल 2024 में पूर्वी लद्दाख विवाद सुलझने के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के तहत अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। 16-17 अप्रैल को हुई इस बैठक को कूटनीतिक रिश्तों में सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

    क्या रही बैठक की अहम बातें?
    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों ने SCO नेताओं के फैसलों को लागू करने और संगठन की भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा की। सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर सहयोग मजबूत करने पर सहमति बनी।

    इस दौरान प्रतिनिधिमंडलों ने विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सिबी जॉर्ज से भी मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग की समीक्षा की गई।

    BRICS और SCO में बढ़ती नजदीकियां
    लद्दाख विवाद सुलझने के बाद भारत और चीन अब BRICS और SCO जैसे मंचों पर मिलकर काम कर रहे हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद लगातार बढ़ रहा है।

    जिनपिंग के भारत दौरे की चर्चा
    बीजिंग ने भारत की BRICS अध्यक्षता का समर्थन किया है। इसी क्रम में चीन के विदेश मंत्री वांग यी मई में भारत आ सकते हैं। वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने की संभावना जताई जा रही है।

    SCO पर भारत का साफ रुख
    भारत SCO को क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग के लिए अहम मंच मानता है, लेकिन उसने साफ किया है कि किसी भी कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट में सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं होगा।

    पीएम मोदी का संदेश
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ऐसी कनेक्टिविटी, जो संप्रभुता का सम्मान नहीं करती, वह टिकाऊ नहीं हो सकती।

    भारत और चीन के बीच बढ़ती बातचीत यह संकेत दे रही है कि दोनों देश तनाव को पीछे छोड़कर सहयोग की नई राह पर बढ़ना चाहते हैं। अब सबकी नजर संभावित उच्चस्तरीय दौरों और आने वाले फैसलों पर टिकी है।

  • क्या भाजपा को पहले से था विधेयक गिरने का अंदाजा, फिर क्यों महिला आरक्षण में संशोधन का खेला दांव

    क्या भाजपा को पहले से था विधेयक गिरने का अंदाजा, फिर क्यों महिला आरक्षण में संशोधन का खेला दांव

    नई दिल्‍ली। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के गिरने के बाद बीजेपी विपक्ष पर आक्रामक है तो वहीं विपक्ष का कहना है कि यह बीजेपी की सोची-समझी साजिश है। बिना संवाद के विशेष सत्र बुलाया गया और फिर विधेयक ना पास होने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा रहा है।
    महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2023 और परिसीमन विधेयक 2026 समेत तीन विधेयकों को पास कराने के लिए पांच राज्यों में चुनाव के बीच ही संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। पहले दिन रात 1 बजे के बाद तक विधेयकों पर चर्चा होती रही। 17 अप्रैल को सरकार ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने की अधिसूचना भी जारी कर दी और फिर शाम को जब वोटिंग हुई तो विधेयक निचले सदन में गिर गया। विधेयक गिरते ही बीजेपी विपक्ष पर आक्रामक हो गई।
    बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस समेत विपक्ष महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है। वहीं कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि यह एक तरह का षड्यंत्र था ताकि बीजेपी विधानसभा चुनाव के बीच बिना ठीक से संवाद किए ऐसी परिस्थितियां बनाए कि विधेयक पारित ना होने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा सके।

    बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में वोटिंग से पहले ही सोशल मीडिया पर अपना संदेश जारी करते हुए कहा विपक्षी सांसदों से भी अपील की थी कि वे विधेयक के पक्ष में वोटिंग करें। वहीं विपक्ष के सांसदों का कहना था कि 2023 में पारित विधेयक को उसी रूप में लागू किया जाए। इसमें संशोधन की जरूरत कहां से पड़ गई अशोक गहलोत ने शुक्रवार को कहा, धानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पूरी सरकार को यह पहले दिन से मालूम था कि संविधान संशोधन विधेयक विपक्ष के सहयोग के बिना पास नहीं हो सकता। इसके बावजूद उन्होंने विपक्षी दलों को विश्वास में नहीं लिया।
    बीजेपी ने किया विपक्ष में फूट डालने का प्रयास- गहलोत

    गहलोत ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे थे, परन्तु इतने महत्वपूर्ण विषय पर प्रधानमंत्री ने सभी विपक्षी पार्टियों को एक साथ बुलाकर बात करने के बजाय अलग-अलग बात कर उनमें फूट डालने का प्रयास किया।

    कैसे गिर गया विधेयक

    सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। विधेयक पर मत विभाजन में 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस विधेयक को पारित करने के लिए 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी।

    विधेयक गिरने का भी फायदा उठाएगी बीजेपी?

    विधानसभा चुनावों में बीजेपी अकसर महिला वोटों के लिए कोई ना कोई दांव खेलती है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि बीजेपी को पहले से पता था कि इस विधेयक को लेकर विपक्ष एकजुट होने का प्रयास करेगा। अगर विधेयक पास होता है तब भी बीजेपी इसे बंगाल चुनाव में मुद्दा बना सकती है। वहीं अगर विधेयक पास नहीं होता है तो वह इसी के बहाने विपक्ष को निशाने पर ले सकती है। अब इस राजनीति की शुरुआत पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से हो चुकी है। यह मुद्दा 2029 के चुनाव में भी भुनाया जा सकता है।

  • आधी रात को पुणे एयरपोर्ट पर फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग….अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा रनवे

    आधी रात को पुणे एयरपोर्ट पर फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग….अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा रनवे


    पुणे।
    भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग (IAF fighter jet Hard Landing) के कारण आधी रात को पुणे एयरपोर्ट (Pune Airport) ही बंद करना पड़ गया। पुणे एयरपोर्ट पर शुक्रवार की रात को इंडियन एयरफोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट की हार्ड लैंडिंग हुई. इसके कारण ही रनवे को बंद कर दिया गया। राहत की बात है कि पायलट सुरक्षित है और किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

    अधिकारियों ने जानकारी दी कि भारतीय वायुसेना का एक फाइटर जेट के हार्ड लैंडिंग से जुड़ी घटना के बाद शुक्रवार को पुणे एयरपोर्ट का रनवे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया. उसने कहा कि रनवे को फिर से चालू करने के प्रयास जारी हैं।

    इंडियन एयरफोर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ‘ भारतीय वायुसेना के एक विमान से जुड़ी घटना के कारण पुणे का रनवे अस्थायी रूप से बंद है. विमान का क्रू सुरक्षित है और किसी भी आम नागरिक की संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है.’ उसने कहा, ‘रनवे को फिर से चालू करने और जल्द से जल्द सामान्य परिचालन शुरू करने के प्रयास जारी हैं.’

    यह पुणे एयरपोर्ट यानी हवाई अड्डा ‘दोहरे उपयोग वाले मॉडल’ पर काम करता है. इसमें आम नागरिकों की कमर्शियल उड़ानों को एक सक्रिय वायु सेना स्टेशन के साथ जोड़ा जाता है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वायुसेना के एक विमान की ‘हार्ड लैंडिंग’ हुई, लेकिन उन्होंने इस बारे में और कोई जानकारी देने से मना कर दिया।

    पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार की रात करीब 10:25 बजे लैंडिंग के दौरान भारतीय वायुसेना का एक लड़ाकू विमान का अंडरकैरिज (पहिए) खराब हो गया. इसके चलते हार्ड लैंडिंग हुई और फिर पूरा रनवे बंद हो गया. उन्होंने कहा, ‘भारतीय वायुसेना के ATC के अनुसार रनवे को साफ करने और सामान्य परिचालन बहाल करने में 4-5 घंटे लगेंगे.’


    केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा

    केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने हवाई अड्डे पर रनवे का परिचालन रोके जाने की पुष्टि की. मुरलीधर मोहोल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘शुक्र है कि विमान का क्रू सुरक्षित है और किसी भी आम नागरिक की संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है. एयरलाइंस को सूचित कर दिया गया है और रनवे पर सामान्य परिचालन बहाल करने में लगभग 5 घंटे लग सकते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘मैं हवाई अड्डे के निदेशक और वायु सेना के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हूं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्थिति जल्द से जल्द सुलझ जाए।

  • दिनभर AC में रहने से स्किन हो रही ड्राई? ये आसान टिप्स बनाएंगे आपकी स्किन को हाइड्रेटेड और ग्लोइंग

    दिनभर AC में रहने से स्किन हो रही ड्राई? ये आसान टिप्स बनाएंगे आपकी स्किन को हाइड्रेटेड और ग्लोइंग

    नई दिल्ली : गर्मी से बचने के लिए आजकल लोग ज्यादातर समय एसी (AC) वाले कमरों में बिताते हैं, चाहे ऑफिस हो या घर। ठंडी हवा भले ही राहत देती है, लेकिन इसका सीधा असर हमारी स्किन पर पड़ता है। लगातार एसी में रहने से त्वचा की नमी धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे स्किन ड्राई, बेजान और खिंची हुई महसूस हो सकती है। कई लोगों को चेहरे पर रूखापन, हल्की सफेद परत और ग्लो कम होने जैसी समस्याएं भी दिखने लगती हैं।

    एसी की ठंडी और सूखी हवा त्वचा की प्राकृतिक नमी को सोख लेती है, जिससे स्किन डिहाइड्रेट हो जाती है। ऐसे में स्किन को सही देखभाल की जरूरत होती है ताकि उसका ग्लो और सॉफ्टनेस बरकरार रहे।

    सबसे पहले स्किन को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए एसी में बैठने से पहले और दौरान हल्का मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। जेल बेस्ड या हयालूरोनिक एसिड युक्त मॉइश्चराइजर स्किन में नमी बनाए रखने में मदद करता है और ड्राईनेस को कम करता है।

    दूसरा और सबसे जरूरी उपाय है पर्याप्त मात्रा में पानी पीना। एसी में रहने पर अक्सर प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर में पानी की कमी स्किन को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। दिनभर में पर्याप्त पानी, नारियल पानी और ताजे फलों के जूस का सेवन त्वचा को अंदर से हाइड्रेट रखता है।

    इसके अलावा स्किन को समय-समय पर हल्के फेस मिस्ट या गुलाब जल से रिफ्रेश करना भी फायदेमंद होता है। यह त्वचा को तुरंत ताजगी देता है और ड्राईनेस कम करता है।

    एसी में लंबे समय तक रहने वाले लोगों के लिए स्किन केयर रूटीन को नियमित रखना बेहद जरूरी है। सही देखभाल से न सिर्फ त्वचा का ग्लो बना रहता है, बल्कि वह हेल्दी और सॉफ्ट भी दिखाई देती है।

  • विपक्ष ने दिया BJP को बड़ा चुनावी मुद्दा… LS में पास नहीं होने दिया महिला आरक्षण बिल

    विपक्ष ने दिया BJP को बड़ा चुनावी मुद्दा… LS में पास नहीं होने दिया महिला आरक्षण बिल


    नई दिल्ली।
    महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) के खिलाफ 230 विपक्षी सांसदों (Opposition MPs) ने वोट किया. लोकसभा (Lok Sabha) में बिल पास नहीं हो सका. इसका असर समझें. भाजपा अब खुल कर कह सकेगी कि हमने महिला हित में अपने प्रयास में कोई कोताही नहीं की. विपक्ष ने ही साथ नहीं दिया. नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने तो यहां तक कहा था कि क्रेडिट भले ले लीजिए, लेकिन इसे पास होने दीजिए. यानी भाजपा अब हमलावर होगी तो विपक्ष बचाव की मुद्रा में रहेगा. विपक्ष कैसे महिलाओं को समझा पाएगा, यह तो विपक्षी रणनीतिकार ही बता पाएंगे. पर, पहली नजर में विपक्ष इस मुद्दे पर फंसा नजर आता है।


    महिलाएं हित-अहित समझती हैं

    महिलाएं अब 50 साल पहले वाली नहीं रहीं. शिक्षित होने के साथ ही वे हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही हैं. इसे ऐसे समझें। 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की कामकाजी (रोजगार + स्वरोजगार) महिलाओं की संख्या लगभग 20 करोड़ (200 मिलियन) के आसपास है, (PLFS 2023-24 के अनुसार). यह संख्या महिलाओं की करीब 50-52 प्रतिशत आबादी में से है. जाहिर है कि कामकाजी महिलाएं थोड़ी-बहुत शिक्षित तो होंगी ही .उन्हें महिला हित-अहित की समझ भी होगी।


    महिलाएं नाराज हो सकती हैं

    अब जरा इन आंकड़ों पर गौर फरमाएं. 2024 के लोकसभा चुनाव में कुल वोट पड़े थे 64,64,20,869 (लगभग 64.64 करोड़). NDA और INDIA गठबंधन के बीच वोटों का अंतर 1,49,57,501 यानी करीब 1.5 करोड़ का था. NDA को 28,26,68,733 (43.80 प्रतिशत) वोट मिले थे एनडीए ने 293 सीटें जीतीं. विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA को 2,67,71,1,232 (41.48 प्रतिशत) वोट मिले. सफलता मिली 234 पर. भाजपा की सीटें 2024 में घट गईं तो उसने ऐसे ही तरीके खोज कर सुधार की कोशिशें शुरू कर दीं।

    भाजपा का योजना बद्ध एक्शन

    2024 और अभी की स्थितियों में कोई बड़ा फर्क नहीं आया है. सिवा इसके कि भाजपा 2814 और 2019 के मुकाबले 2024 में कमजोर पड़ी, लेकिन उसके बाद हुए राज्यों के चुनाव में भाजपा और उसके नेतृत्व में बना एनडीए लगातार जीतता रहा है. एनडीए की लीडर भाजपा ने अपनी कमजोरी खोज कर 2019 से आगे निकलने की रणनीति पर काम कर रही है. विपक्ष अपवाद छोड़ कर आदतन इसे बढ़ाने के बजाय घटाने की जुगत में ही लगा है।

    भाजपा महिला बिल को भुनाएगी

    करीब 4 दशक पहले से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा चल रही है. किसी को अपने हित और हक की बात समझने के लिए इतना वक्त कम नहीं होता. बिल पेश होने के पहले से ही भाजपा यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के अभियान में लग गई है. अब तो वह महिलाओं को यह कह सकेगी कि उसने तो पूरी कोशिश की, पर विपक्ष ने ही पानी फेर दिया. जहां 1.5 करोड़ के अंतर से एनडीए की सरकार बन गई वहां 20-21 करोड़ कामकाजी महिलाओं में 10 प्रतिशत को भी भाजपा ने अपने प्रभाव में ले लिया तो विपक्ष की परेशानी बढ़ सकती है।

    महिलाएं आरक्षण समझती हैं

    महिलाएं परिसीमन नहीं समझतीं. पुरुषों की तरह ही उन्हें भी सिर्फ इतनी ही समझ है कि इधर-उधर से कांट-छांट कर एमपी-एमएलए की सीट बढ़ जाएंगी. बहुसंख्यक महिलाओं को सियासी दांव-पेंच से क्या मतलब! अलबत्ता वे इसे अधिक समझेंगी कि आरक्षण बिल पास हो जाने पर सैकड़ा 33 महिलाएं विधानसभा और लोकसभा में बढ़ जातीं. 543 सीटों वाली लोकसभा में अभी 74 (13.6 प्रतिशत) महिला सांसद हैं. महिला आरक्षण बिल पास हो जाने पर यह संख्या दोगुनी से अधिक होने की बाध्यता रहती .विपक्ष ने रोड़ा अंटका दिया।

    महिलाओं की ताकत सभी जानते

    विपक्ष महिलाओं की ताकत से अनजान नहीं है. बिहार में नीतीश कुमार के साथ महिलाओं की ताकत का एहसास सभी राजनीतिक दलों को है. जेडीयू की साथी भाजपा भी महिलाओं में उतनी पैठ नहीं बना पाई है. नीतीश ने 2005 से ही महिला वोट बैंक तैयार किया है. यह वोट बैंक इतना मजबूत है कि 2024 के संसदीय चुनाव में जब बड़े-बड़े विश्लेषक और चुनावी पंडित मात खा गए. प्रशांत किशोर भी मात खा गए. जेडीयू में कुछ दिन रहने के बावजूद उन्हें यह भान नहीं हुआ कि नीतीश की असली ताकत आधी आबादी यानी महिलाएं हैं. वे जेडीयू के 5 सीटों पर सिमट जाने की शर्त लगाने लगे. उनके बुढ़ापे का मज़ाक़ उड़ाया जाने लगा. विपक्ष उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार बनाता-बताता रहा. इसके बावजूद नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने भाजपा से कम पर लड़ कर भाजपा के बराबर लोकसभा की 12 सीटें जीत लीं।


    राज्यों में दिखी महिलाओं की शक्ति

    दिल्ली, हरियाणा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बंगाल और झारखंड के बाद बिहार में भी विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं की मिली अहमियत उनकी ताकत का इजहार करती है. सबने महिलाओं पर ही दांव लगाया. महिलाओं ने जिन पर ज्यादा भरोसा किया, उन्होंने बाजी मारी ली. बीजेपी ने भी फ्री बीज की रणनीति अपना ली. भाजपा-एनडीए शासित राज्यों में फ्री बीज से एंटी इनकम्बैंसी को प्रो इनकम्बैंसी बदल दिया. ममता और हेमंत सोरेन महिलाओं की बदौलत ही कामयाब हो पाए. नुकसान की समझ होते हुए भी विपक्ष ने यह मौका गंवा दिया.


    भाजपा के जाल में उलझा विपक्ष

    भाजपा ने बड़े कायदे से महिला आरक्षण के मुद्दे को भुना लिया. जानिए, कैसे भुनाया. भाजपा जानती थी कि यह बिल इतने विवादों में रहा है कि इसका पास होना आठवां आश्चर्य ही होगा. दूसरे कि भाजपा अपनी 2/3 बहुमत न होने की सच्चाई से भी वाकिफ थी .फिर भी बिल पेश कर दिया और इसे सियासी इवेंट बना दिया. विपक्ष भाजपा की इस चाल को समझ नहीं पाया. भाजपा और मोदी विरोध के नाम पर विपक्ष ने बिल का विरोध कर एक जरूरी काम को नकार दिया। विपक्ष का दांव उल्टा पड़ गया.

  • नोएडा में श्रमिक सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट…. 1.16 करोड़ जुर्माना भी लगा

    नोएडा में श्रमिक सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट…. 1.16 करोड़ जुर्माना भी लगा


    नोएडा।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के नोएडा और ग्रेटर नोएडा (Noida and Greater Noida) में हाल के श्रमिक प्रदर्शनों, श्रम कानूनों के उल्लंघन और कंपनियों में बढ़ते असंतोष के बीच प्रशासन ने एक साथ कई बड़े कदम उठाए हैं। एक तरफ श्रम विभाग (Labor Department) ने 24 कंपनियों को मैनपावर सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों को राहत देते हुए 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि का ऐलान किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस जांच में प्रदर्शन के पीछे साजिश और बाहरी कनेक्शन के संकेत भी सामने आए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।


    203 मैनपावर एजेंसियों पर गाज

    श्रम विभाग ने गौतमबुद्ध नगर में श्रम कानूनों का पालन न करने वाली 203 मैनपावर सप्लाई एजेंसियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ये एजेंसियां 24 कंपनियों में श्रमिक उपलब्ध कराती थीं, लेकिन जांच में सामने आया कि इन्होंने कर्मचारियों को मिलने वाले कई वैधानिक लाभ नहीं दिए।

    इन एजेंसियों पर 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है और इनके लाइसेंस निरस्त करने के साथ-साथ ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। श्रमिकों के बकाया भुगतान के लिए 1,16,05,067 रुपये का नोटिस भी जारी किया गया है, जबकि अन्य एजेंसियों की पहचान का काम जारी है।
    राकेश द्विवेदी, अपर श्रमायुक्त


    1 मई से लागू होगी 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि

    श्रमिकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर गठित उच्चस्तरीय समिति ने वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश की है। इसके तहत गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी और मई में 7 से 10 तारीख के बीच भुगतान किया जाएगा। यह बढ़ोतरी संविदा और स्थायी दोनों प्रकार के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के वेतन से केवल ईपीएफ और ईएसआई की कटौती ही मान्य होगी, इसके अलावा किसी भी अन्य कटौती पर सख्त कार्रवाई होगी।


    सड़कों पर उतरे कर्मचारी

    नोएडा के सेक्टर-8 स्थित एक कंपनी के बाहर शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। महिला और पुरुष कर्मचारी कंपनी गेट पर इकट्ठा होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कर्मचारियों का कहना था कि लंबे समय से वेतन में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बातचीत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया।

    इसी तरह यमुना सिटी के सेक्टर-24ए स्थित एक बड़ी मोबाइल निर्माण कंपनी में भी कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर आवाज उठाई। शिफ्ट बदलने के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्र हुए और नारेबाजी की, जिसके बाद अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली।


    उच्चस्तरीय समिति का दौरा और निरीक्षण

    श्रमिकों के आंदोलन को देखते हुए शासन द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का दौरा किया और वहां काम कर रहे कर्मचारियों से बातचीत की। समिति के सदस्य डॉ. एमकेएस सुन्दरम ने इकोटेक-3 स्थित एक फैक्ट्री का निरीक्षण किया, जहां कर्मचारियों को दी जा रही सुविधाओं और स्किल डिवेलपमेंट ट्रेनिंग का जायजा लिया गया। इस दौरान यह भी देखा गया कि किस प्रकार कर्मचारी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।


    प्रदर्शन के पीछे साजिश के संकेत, जांच तेज

    श्रमिक प्रदर्शनों को लेकर पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि यह प्रदर्शन अचानक भड़का हुआ गुस्सा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों को क्यूआर कोड के जरिए व्हाट्सऐप ग्रुप से जोड़ा गया था, जिन्हें तमिलनाडु और कर्नाटक से संचालित किया जा रहा था।

    इन ग्रुपों के माध्यम से भड़काऊ संदेश भेजकर श्रमिकों को उकसाया गया। सीसीटीवी फुटेज में 8 से 9 संदिग्ध लोगों को हुलिया बदलकर भीड़ में घुसते हुए देखा गया है। जांच में कुछ मोबाइल नंबर नेपाल से जुड़े पाए गए हैं, जबकि अन्य संदिग्ध कनेक्शनों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि कई आरोपियों की पहचान हो चुकी है और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।