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  • व्हाइट हाउस के बाहर फायरिंग से दहशत: 21 वर्षीय नासीर बेस्ट ढेर, खुद को ‘जीसस क्राइस्ट’ बताने का दावा

    व्हाइट हाउस के बाहर फायरिंग से दहशत: 21 वर्षीय नासीर बेस्ट ढेर, खुद को ‘जीसस क्राइस्ट’ बताने का दावा

    नई दिल्ली। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में स्थित व्हाइट हाउस के बाहर शनिवार शाम उस समय दहशत फैल गई जब एक युवक ने सुरक्षा चेकपॉइंट के पास अचानक फायरिंग शुरू कर दी। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए हमलावर को मार गिराया। इस घटना में एक राहगीर भी घायल हुआ है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सुरक्षित रहे।

    सीक्रेट सर्विस के अनुसार, यह घटना 17वीं स्ट्रीट और पेंसिल्वेनिया एवेन्यू के पास हुई, जहां 21 वर्षीय नासीर बेस्ट नामक युवक ने अपने बैग से हथियार निकालकर गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने फायरिंग जारी रखी, जिसके बाद उसे जवाबी कार्रवाई में गोली लगी और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।

    अधिकारियों ने बताया कि घटना के दौरान कोई भी सुरक्षा एजेंट घायल नहीं हुआ। हालांकि, एक राहगीर को गोली लगी है, जिसकी स्थिति को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। मामले की जांच जारी है और अतिरिक्त विवरण जुटाए जा रहे हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, मारा गया युवक मैरीलैंड का रहने वाला था और उसका नाम नासीर बेस्ट था। वह पहले भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर में था और कई बार व्हाइट हाउस के आसपास संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाया गया था। कोर्ट रिकॉर्ड्स के मुताबिक, उसे पहले भी हिरासत में लिया गया था जब उसने वाहनों की एंट्री में बाधा डाली थी और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया था।

    जानकारी के अनुसार, 26 जून 2025 को उसे व्हाइट हाउस के पास ट्रैफिक में बाधा डालने के आरोप में पकड़ा गया था, जबकि 10 जुलाई को वह चेतावनी के बावजूद प्रतिबंधित इलाके में घुस गया था। पूछताछ के दौरान उसने खुद को “जीसस क्राइस्ट” बताया और कथित तौर पर गिरफ्तारी की इच्छा जताई थी।

    सीक्रेट सर्विस का कहना है कि वह व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर प्रतीत हो रहा था और लंबे समय से व्हाइट हाउस के आसपास संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि वह हथियार लेकर इतने संवेदनशील क्षेत्र तक कैसे पहुंचा।

    इस घटना ने व्हाइट हाउस की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा में कोई चूक नहीं हुई और स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया।

  • पश्चिम की गलतफहमी: मोदी को एर्दोगन जैसा मानने की भूल क्यों?

    पश्चिम की गलतफहमी: मोदी को एर्दोगन जैसा मानने की भूल क्यों?



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय लोकतंत्र को लेकर पश्चिमी देशों में लंबे समय से एक बहस चल रही है, जिसमें कई विश्लेषक भारत की राजनीतिक व्यवस्था की तुलना तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और हंगरी के विक्टर ओर्बन जैसे नेताओं से करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह तुलना भारत की जटिल राजनीतिक संरचना को समझने में एक बड़ी भूल है।

    हाल ही में पीएम मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान एक पत्रकार की टिप्पणी और उसके बाद सोशल मीडिया पर उठा विवाद भी इसी बहस को और तेज करता है। पश्चिमी मीडिया के कुछ वर्गों पर आरोप लगते हैं कि वे भारत और मोदी सरकार को लेकर एक नकारात्मक नैरेटिव गढ़ते हैं, जबकि दूसरी ओर भारत एक विशाल और बहुस्तरीय लोकतंत्र के रूप में काम करता है।

    विशेषज्ञ चितिग्य बाजपेयी सहित कई विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिमी देश अक्सर भारत के लोकतंत्र को एक सरल और एकतरफा नजरिए से देखते हैं। जबकि भारत का राजनीतिक ढांचा राज्यों, क्षेत्रीय दलों और सामाजिक विविधता के कारण बेहद जटिल और बहु-स्तरीय है। यह स्थिति तुर्की या हंगरी जैसे देशों से पूरी तरह अलग है, जहां सत्ता संरचना अपेक्षाकृत केंद्रीकृत मानी जाती है।

    विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा की चुनावी सफलता के पीछे केवल राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि कई सामाजिक और आर्थिक कारण भी हैं। इसमें विपक्ष की कमजोरी, संगठनात्मक ढांचे में असंतुलन और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत वैकल्पिक नेतृत्व का अभाव शामिल है। लंबे समय से कांग्रेस जैसे बड़े दल संगठनात्मक संकट से गुजर रहे हैं, जबकि क्षेत्रीय दल भी अपने-अपने राज्यों तक सीमित हो गए हैं।

    इसके साथ ही भाजपा ने “विकास, राष्ट्रवाद और कल्याणकारी योजनाओं” के मिश्रण के जरिए व्यापक जनाधार तैयार किया है, जिसने शहरी, ग्रामीण और गरीब वर्गों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाई है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पश्चिमी मीडिया भारत को अक्सर एक एकल राजनीतिक ब्लॉक की तरह देखता है, जबकि वास्तविकता यह है कि देश में राजनीतिक विविधता बेहद व्यापक है। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के चुनाव परिणाम यह दिखाते हैं कि भारत में राजनीतिक रुझान लगातार बदलते रहते हैं और किसी एक विचारधारा का पूर्ण प्रभुत्व नहीं है।

    हालांकि, यह भी स्वीकार किया जाता है कि भारत में मीडिया स्वतंत्रता, संस्थागत संतुलन और लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर आंतरिक बहस मौजूद है, लेकिन कुल मिलाकर देश का लोकतांत्रिक सिस्टम अब भी प्रतिस्पर्धी और सक्रिय है।

    इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि पश्चिमी देशों द्वारा भारत की तुलना तुर्की या हंगरी जैसे देशों से करना एक अधूरी और सतही समझ को दर्शाता है, जो भारत की जमीनी राजनीतिक वास्तविकता को सही तरह से नहीं पकड़ पाता।

  • कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत

    कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर भारी तनाव देखने को मिला है, जब शनिवार और रविवार की दरमियानी रात रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से बड़ा हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत और 80 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है। पूरे शहर में रातभर हवाई हमले के सायरन गूंजते रहे और कई इलाकों में धुएं का गुबार देखा गया।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि इस हमले में रूस ने ओरेशनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, यह हमला कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा इलाके में किया गया, हालांकि लक्ष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। यह इस मिसाइल का युद्ध में तीसरा उपयोग बताया जा रहा है।

    स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, कीव के कम से कम नौ जिलों में आवासीय भवनों, स्कूलों, सुपरमार्केट और गोदामों को नुकसान पहुंचा है। मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि एक स्कूल इमारत भी प्रभावित हुई, जहां लोग शरण लिए हुए थे। कई जगहों पर रिहायशी इलाकों में भारी तबाही की खबर है।

    रूस ने यह हमला यूक्रेन के ड्रोन हमलों के जवाब में किया है। हमले के दौरान राजधानी कीव के मध्य इलाकों सहित कई हिस्सों में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ।

    ओरेशनिक मिसाइल रूस की अत्याधुनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है, जो मैक 10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज गति से उड़ान भरने में सक्षम है। यह मिसाइल परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है और इसे गहरे बंकरों और मजबूत सैन्य ढांचों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया बताया जाता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 5500 किलोमीटर तक बताई जाती है।

    जानकारों के मुताबिक, इस तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल युद्ध की दिशा और तीव्रता दोनों को और ज्यादा खतरनाक बना देता है। इससे रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव एक नए और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।

  • फार्मा सेक्टर में दिख रही तेज रफ्तार, एक्सपर्ट्स ने बताए 4 ऐसे शेयर जो लंबी अवधि में बन सकते हैं कमाई के बड़े खिलाड़ी

    फार्मा सेक्टर में दिख रही तेज रफ्तार, एक्सपर्ट्स ने बताए 4 ऐसे शेयर जो लंबी अवधि में बन सकते हैं कमाई के बड़े खिलाड़ी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर एक बार फिर मजबूत चर्चा का विषय बन गया है। लंबे समय तक इस सेक्टर को केवल सुरक्षित और स्थिर निवेश का विकल्प माना जाता रहा, जहां निवेशक बाजार की अनिश्चित परिस्थितियों में अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए रुख करते थे। लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदलती दिखाई दे रही हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फार्मा सेक्टर की पारंपरिक छवि बदल रही है और यह क्षेत्र अब केवल डिफेंसिव नहीं बल्कि एक मजबूत ग्रोथ इंजन के रूप में उभरता नजर आ रहा है।

    बीते कुछ वर्षों में भारतीय फार्मा उद्योग ने घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। देश में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत, दवाओं की लगातार बढ़ती मांग और चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते निवेश ने इस उद्योग को नई दिशा दी है। इसके साथ ही भारतीय दवा कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है। यही वजह है कि निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर पर लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    बाजार जानकारों का मानना है कि फार्मा कंपनियां अब केवल पारंपरिक दवा कारोबार तक सीमित नहीं हैं। नई तकनीकों, आधुनिक उपचार पद्धतियों और अनुसंधान आधारित उत्पादों पर लगातार काम हो रहा है। कई कंपनियां रिसर्च और डेवलपमेंट पर पहले से अधिक निवेश कर रही हैं, जिससे आने वाले वर्षों में इनके कारोबार के विस्तार की संभावनाएं मजबूत होती दिखाई दे रही हैं। यही कारण है कि अब इस सेक्टर को लंबे समय की ग्रोथ कहानी के रूप में देखा जाने लगा है।

    विशेषज्ञों द्वारा कुछ चुनिंदा फार्मा कंपनियों पर खास भरोसा जताया गया है। माना जा रहा है कि इन कंपनियों की कारोबारी रणनीति, उत्पाद पोर्टफोलियो और भविष्य की योजनाएं इन्हें अन्य कंपनियों से अलग बना सकती हैं। निवेशकों के बीच ऐसे शेयरों को लेकर उत्साह इसलिए भी देखा जा रहा है क्योंकि स्वास्थ्य क्षेत्र की मांग लगातार बनी रहती है और यह उद्योग आर्थिक परिस्थितियों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होता है।

    दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा जरूरतों में बढ़ोतरी ने भी भारतीय फार्मा उद्योग के लिए नए अवसर तैयार किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियां लागत, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता के मामले में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति में हैं। इसका लाभ आने वाले वर्षों में कारोबार और निवेश दोनों स्तरों पर देखने को मिल सकता है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शेयर बाजार में निवेश करते समय केवल किसी सेक्टर की लोकप्रियता के आधार पर निर्णय लेना उचित नहीं माना जा सकता। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, बाजार में उसकी स्थिति और भविष्य की विकास योजनाओं का मूल्यांकन करना चाहिए। किसी भी निवेश से पहले जोखिम और अवसर दोनों पक्षों को समझना आवश्यक माना जाता है।

    फिलहाल संकेत यही हैं कि फार्मा सेक्टर अब बदलाव के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जिस क्षेत्र को कभी केवल सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता था, वही अब तेज विकास, तकनीकी विस्तार और भविष्य की संभावनाओं के कारण निवेशकों के लिए नए अवसरों का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यह सेक्टर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।

  • भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश

    भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन दिनों चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं, जहां उनकी यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसके बाद रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की गई।

    बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक सहयोग और आपसी हितों पर विस्तार से चर्चा हुई। मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जिनके हित कई वैश्विक मुद्दों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका केवल पारंपरिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक सहयोग में जुड़े हुए देश हैं, जो वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच नियमित संवाद इस साझेदारी को और मजबूत बनाता है।

    वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार संपर्क और संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।

    रूबियो ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह उनका भारत का पहला आधिकारिक दौरा है और वे इस संबंध को और गहराई से समझना चाहते हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को वैश्विक स्तर पर सहयोग का एक मजबूत उदाहरण बताया, जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में प्रभाव डालता है।

    इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई, जिसमें विभिन्न रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा जारी रही। रूबियो सोमवार को आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे, जबकि मंगलवार को वे नई दिल्ली में होने वाली क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भाग लेंगे।

    यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देने और वैश्विक कूटनीति में दोनों देशों की भूमिका को और प्रभावशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • शेयर बाजार से हुई बड़ी कमाई पर सही निवेश रणनीति अपनाने से टैक्स बोझ काफी कम या शून्य तक किया जा सकता है।

    शेयर बाजार से हुई बड़ी कमाई पर सही निवेश रणनीति अपनाने से टैक्स बोझ काफी कम या शून्य तक किया जा सकता है।

    नई दिल्ली। शेयर बाजार में लंबी अवधि तक धैर्य और समझदारी के साथ किया गया निवेश कई लोगों को बड़ी आर्थिक सफलता दिलाता है। वर्षों तक निवेश बनाए रखने के बाद जब निवेशक अपने शेयर बेचकर करोड़ों रुपये का लाभ कमाते हैं, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती टैक्स की होती है। आमतौर पर बड़ी कमाई के साथ भारी टैक्स देनदारी भी जुड़ जाती है, लेकिन आयकर नियमों में ऐसे प्रावधान मौजूद हैं जिनका सही तरीके से उपयोग करके इस टैक्स बोझ को काफी कम किया जा सकता है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में निवेशक टैक्स प्लानिंग के कानूनी विकल्पों की ओर ध्यान दे रहे हैं।

    हाल के समय में एक ऐसी व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है जिसके तहत शेयर बाजार से हुई लंबी अवधि की कमाई पर लगने वाले टैक्स को कम करने या कुछ परिस्थितियों में शून्य तक लाने का अवसर मिल सकता है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिन्होंने लंबे समय तक शेयरों या इक्विटी आधारित निवेश को होल्ड करने के बाद बड़ा लाभ अर्जित किया है। हालांकि इस लाभ का फायदा सभी लोगों को स्वतः नहीं मिलता, बल्कि इसके लिए कुछ निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी होता है।

    नियमों के अनुसार यदि कोई निवेशक अपनी शेयर बिक्री से प्राप्त राशि को निर्धारित समय सीमा के भीतर एक रिहायशी संपत्ति में निवेश करता है, तो उसे टैक्स में राहत मिलने की संभावना बनती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य निवेशकों को केवल टैक्स छूट देना नहीं बल्कि पूंजी को उत्पादक और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों की ओर बढ़ावा देना भी माना जाता है। यही कारण है कि निवेश और संपत्ति निर्माण को एक साथ जोड़कर देखने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।

    हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना भी जरूरी है कि केवल करोड़ों रुपये की कमाई होने भर से टैक्स स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। इसके लिए निवेशक को समय सीमा, निवेश राशि और पात्रता से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन करना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता या प्रक्रिया में चूक करता है, तो उसे टैक्स राहत का लाभ नहीं मिल सकता। कुछ मामलों में छूट वापस भी ली जा सकती है और अतिरिक्त देनदारी का सामना करना पड़ सकता है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े निवेश निर्णय केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि टैक्स प्रबंधन को भी निवेश रणनीति का हिस्सा बनाना चाहिए। कई निवेशक केवल रिटर्न पर ध्यान देते हैं और टैक्स प्रभावों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण अंतिम लाभ उम्मीद से काफी कम हो सकता है। इसलिए निवेश के साथ कानूनी और वित्तीय प्रावधानों की जानकारी रखना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है।

    बदलते निवेश माहौल में अब केवल पैसा कमाना ही पर्याप्त नहीं रह गया है, बल्कि उसे समझदारी से संरक्षित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। सही योजना, समय पर निर्णय और नियमों की स्पष्ट जानकारी के साथ निवेशक अपनी मेहनत की कमाई को अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि अब निवेश जगत में टैक्स प्लानिंग को आर्थिक सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

  • ढाका में US डिफेंस डील पर मंथन, ACSA और GSOMIA समझौते फिर सुर्खियों में

    ढाका में US डिफेंस डील पर मंथन, ACSA और GSOMIA समझौते फिर सुर्खियों में




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    बांग्लादेश में अमेरिका के साथ दो अहम रक्षा समझौतों को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा तेज हो गई है। ये दोनों समझौते ACSA (Acquisition and Cross-Servicing Agreement) और GSOMIA (General Security of Military Information Agreement) कई वर्षों से लंबित हैं, जिन्हें लेकर अब एक बार फिर ढाका में गंभीर मंथन शुरू हो गया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने अमेरिका के साथ इन डिफेंस डील्स को आगे बढ़ाने से परहेज किया था। माना जाता है कि उस समय सरकार ने भारत और चीन के साथ संतुलन बनाए रखने की नीति अपनाई थी, जिसके चलते इन समझौतों पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, अब राजनीतिक बदलाव और नई परिस्थितियों के बीच इन समझौतों के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है।

    ACSA समझौता के तहत अमेरिका और बांग्लादेश के बीच सैन्य लॉजिस्टिक्स सहयोग को मजबूत किया जाता है, जिसमें ईंधन आपूर्ति, उपकरणों की मरम्मत और सैन्य सहायता जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। वहीं GSOMIA के तहत दोनों देशों के बीच संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के सुरक्षित आदान-प्रदान की व्यवस्था बनाई जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये दोनों समझौते लागू होते हैं, तो इससे अमेरिका की बांग्लादेश में सैन्य और रणनीतिक पहुंच और मजबूत हो सकती है। यह कदम बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति को बढ़ाने के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है।

    हालांकि, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि इन समझौतों का अर्थ किसी सैन्य बेस की स्थापना नहीं है, बल्कि यह मुख्य रूप से सहयोग, लॉजिस्टिक्स और सूचना साझाकरण तक सीमित ढांचा है। फिर भी, इस पहल को लेकर क्षेत्रीय भू-राजनीति में नई हलचल देखी जा रही है।

  • नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    नेपाल की बालेन शाह सरकार ने देश के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति शुरू की है, जिसमें भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सीधे नेपाल आने का न्योता दिया गया है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी। इस अपील के बाद क्षेत्रीय पर्यटन और यात्रा उद्योग में हलचल देखी जा रही है।

    नेपाल सरकार की इस नई पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति के तहत भारतीय यूट्यूबर्स, व्लॉगर्स, पॉडकास्ट क्रिएटर्स और डिजिटल कंटेंट निर्माताओं को नेपाल यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है। नेपाली दूतावास (नई दिल्ली) की ओर से 30 मई तक आवेदन मांगे गए हैं और इस पहल को भारतीय क्रिएटर्स से तेजी से प्रतिक्रिया मिल रही है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है जब नेपाल सरकार ने इस तरह सीधे भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन प्रचार के लिए शामिल किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ कुछ ही दिनों में 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि अंतिम तिथि तक यह आंकड़ा 1000 से ज्यादा पहुंच सकता है।

    नेपाल एयरलाइंस और होटल इंडस्ट्री ने भी इस अभियान को समर्थन दिया है। काठमांडू के कई फाइव स्टार होटलों ने चयनित इन्फ्लुएंसर्स के लिए विशेष पैकेज तैयार किए हैं। योजना के तहत चुने गए पांच इन्फ्लुएंसर्स को नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे काठमांडू, पोखरा और चितवन का दौरा कराया जाएगा, जहां वे देश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव करेंगे।

    नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पर्यटन छवि को मजबूत करना है और भारतीय युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाना है।

  • 65 इंजेक्शन, 7 IVF असफलताएं और लंबा इंतजार: 45 की उम्र में मां बनने जा रहीं एक्ट्रेस संभावना सेठ की प्रेरक कहानी

    65 इंजेक्शन, 7 IVF असफलताएं और लंबा इंतजार: 45 की उम्र में मां बनने जा रहीं एक्ट्रेस संभावना सेठ की प्रेरक कहानी

    नई दिल्ली । मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री और मॉडल संभावना सेठ इन दिनों अपनी निजी जिंदगी की एक बड़ी खुशखबरी को लेकर सुर्खियों में हैं। लंबे संघर्ष और भावनात्मक उतार-चढ़ाव के बाद अब वह मां बनने की राह पर हैं। हाल ही में उन्होंने अपने बेबी शावर की खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिनमें उनकी खुशी और भावनाएं साफ झलक रही हैं। 45 वर्ष की उम्र में यह उनके जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण और भावुक मोड़ माना जा रहा है।

    संभावना सेठ पिछले कई वर्षों से मातृत्व की कोशिशों में लगी हुई थीं। करीब दस साल तक चले इस सफर में उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और अपने सपने को पूरा करने की कोशिश जारी रखी। इस दौरान उन्होंने कई बार IVF प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसमें कई प्रयास सफल नहीं हो सके। बताया जाता है कि इस पूरे उपचार और प्रयासों के दौरान उन्हें भारी शारीरिक और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा, जिसमें कई इंजेक्शन और चिकित्सकीय प्रक्रियाएं शामिल थीं। इन कठिन परिस्थितियों ने उनके जीवन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था।

    लगातार असफलताओं और एक गर्भपात के बाद संभावना और उनके पति ने अंततः सरोगेसी का सहारा लेने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का एक नया मोड़ साबित हुआ, जिसने उनकी वर्षों की उम्मीदों को फिर से जीवित कर दिया। सरोगेसी के माध्यम से अब वह अपने जीवन में मातृत्व का अनुभव करने के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं। इस पूरी यात्रा में उनके पति ने हमेशा उनका साथ दिया और किसी भी प्रकार का दबाव न बनाते हुए उन्हें भावनात्मक सहयोग प्रदान किया।

    हाल ही में उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा करते हुए कहा था कि यह उनके जीवन की सबसे खूबसूरत कहानी है, जो अब प्यार, उम्मीद और नए सफर के साथ आगे बढ़ रही है। बेबी शावर की तस्वीरों में उनकी मुस्कान और उत्साह इस बात को दर्शाता है कि लंबे इंतजार के बाद अब उनके जीवन में खुशी का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।

    संभावना सेठ मनोरंजन जगत में अपने अभिनय और रियलिटी शो में मजबूत उपस्थिति के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स और फिल्मों में काम किया है और अपने अलग अंदाज के लिए दर्शकों के बीच पहचान बनाई है। करियर के साथ-साथ उनका यह व्यक्तिगत संघर्ष भी उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद बनाए रखने का संदेश देता है।

    अब जब वह अपने जीवन के इस नए पड़ाव पर पहुंच चुकी हैं, तो उनके चाहने वाले भी इस खुशी में शामिल हो रहे हैं। लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा के बाद मिली यह सफलता उनके लिए किसी नए जीवन की शुरुआत से कम नहीं है।

  • लखनऊ में बसपा बैठक: मायावती बोलीं-जनता का जीवन मुश्किल, संगठन मजबूत करने पर जोर

    लखनऊ में बसपा बैठक: मायावती बोलीं-जनता का जीवन मुश्किल, संगठन मजबूत करने पर जोर



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    लखनऊ में मॉल एवेन्यू स्थित अपने आवास पर रविवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्य स्तरीय बैठक की। इस बैठक में उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं को अहम निर्देश दिए। बैठक में आकाश आनंद और आनंद कुमार समेत प्रदेश के सभी जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

    बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में मायावती ने कहा कि मौजूदा समय में जनता विरोधी नीतियों और छलावे की राजनीति के कारण आम लोगों का आत्मसम्मान के साथ जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाए और जनता तक पार्टी की नीतियों को प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए।

    मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा के पक्ष में जनरुझान बढ़ रहा है और पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में पांचवीं बार सरकार बनाना है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को “हाथी पर बटन दबाना है” के संदेश के साथ पूरी ताकत से चुनावी तैयारियों में जुटना होगा।

    उन्होंने विपक्षी दलों पर बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में जनता से किए गए वादों को भुला दिया जाता है। ऐसी राजनीति से लोगों का भला नहीं हो रहा है, इसलिए जनता को जागरूक करना जरूरी है।

    बसपा सुप्रीमो ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक दबाव और कानून व्यवस्था की समस्याओं के कारण आम जनता का जीवन कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकारों को रोजगार, रोटी, शांति और सामाजिक सौहार्द जैसे मूल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

    मायावती ने यह भी दावा किया कि बसपा शासनकाल में सर्वजन हिताय की नीति के तहत बेहतर कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन कायम रहा था। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज समेत सभी वर्गों को उस समय सम्मान और भागीदारी मिली थी।

    बैठक में संगठनात्मक समीक्षा भी की गई और बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करने की रणनीति तय की गई। साथ ही आगामी चुनावों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया।