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  • जबलपुर में प्रदर्शन हुआ उग्र: कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बरसाया पानी

    जबलपुर में प्रदर्शन हुआ उग्र: कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बरसाया पानी


    जबलपुर मध्यप्रदेश के जबलपुर में सोमवार को ट्रेड डील के विरोध को लेकर यूथ कांग्रेस ने बड़ा प्रदर्शन किया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट घेराव के लिए रैली निकाली, लेकिन पुलिस ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए बैरिकेडिंग कर दी। जैसे ही प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।

    घंटाघर पर भिड़ंत, वाटर कैनन से रोकने की कोशिश

    घंटाघर क्षेत्र में करीब आधे घंटे तक हालात तनावपूर्ण बने रहे। फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियों से प्रदर्शनकारियों पर लगातार पानी की तेज बौछारें की गईं, लेकिन इसके बावजूद कार्यकर्ता पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। माहौल काफी देर तक गरमाता रहा।

    100 से ज्यादा कार्यकर्ता हिरासत में

    पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए सख्ती बरती और प्रदेश अध्यक्ष सहित यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब समेत 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। प्रदर्शन में विधायक लखन घनघोरिया सहित कई स्थानीय नेता और बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता शामिल हुए थे। प्रशासन ने पहले से ही कलेक्ट्रेट और आसपास के प्रमुख मार्गों पर भारी बैरिकेडिंग और पुलिस बल तैनात कर रखा था।

    यूथ कांग्रेस का सरकार पर आरोप

    यूथ कांग्रेस ने प्रस्तावित यूएस ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। संगठन का कहना है कि इस डील से किसानों और मजदूरों को नुकसान पहुंचेगा, इसलिए इसे जनविरोधी बताया गया।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर में इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने महंगाई, गैस सिलेंडर की कीमतों और विदेश नीति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।

    तनावपूर्ण माहौल के बीच शांत कराया गया प्रदर्शन

    प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती रही और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को लगातार प्रयास करने पड़े। अंततः गिरफ्तारियों और वाटर कैनन के उपयोग के बाद हालात काबू में आए।

  • जलियांवाला बाग शहीदों को राष्ट्रपति और पीएम ने दी श्रद्धांजलि, बताया अमर बलिदान

    जलियांवाला बाग शहीदों को राष्ट्रपति और पीएम ने दी श्रद्धांजलि, बताया अमर बलिदान

    नई दिल्ली। देशभर में आज जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और उनके अद्वितीय बलिदान को भावपूर्ण स्मरण के साथ नमन किया गया। इस अवसर पर द्रौपदी मुर्मू और नरेंद्र मोदी ने शहीदों को याद करते हुए कहा कि उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा को मजबूत करने वाला एक अमर अध्याय है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि जलियांवाला बाग में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों का बलिदान देश के इतिहास में सदैव अमर रहेगा। उन्होंने कहा कि इस दर्दनाक घटना ने स्वतंत्रता के प्रति देशवासियों में नई चेतना और दृढ़ संकल्प का संचार किया, जिसने पूरे राष्ट्र को एकजुट किया। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र सदैव इन शहीदों का ऋणी रहेगा और उनकी देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शहीदों का साहस और त्याग भारतीयों की अदम्य भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उन वीरों ने जिस दृढ़ता के साथ अत्याचार का सामना किया, वह आज भी देशवासियों को न्याय, स्वतंत्रता और गरिमा के मूल्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उस समय की क्रूर घटनाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी और देश में जागरूकता तथा संघर्ष की भावना को और मजबूत किया। उन्होंने समाज को एकजुट रहने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश भी दिया।

    इस अवसर पर अमित शाह ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह घटना औपनिवेशिक शासन की क्रूरता का सबसे भयावह उदाहरण थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उन्होंने कहा कि इस घटना ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी और देश में क्रांतिकारी चेतना को बढ़ाया।

    उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के बाद देश में स्वतंत्रता की लौ और तेज हुई, जिसने भगत सिंह और ऊधम सिंह जैसे अनेक महान क्रांतिकारियों को प्रेरित किया।जलियांवाला बाग हत्याकांड भारतीय इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक है, जिसने देश कोएकजुट कर स्वतंत्रता संग्राम को नई गति दी। यह घटना आज भी साहस, बलिदान और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक मानी जाती है और हर पीढ़ी को प्रेरित करती है।

  • यात्रा और ऑफिस रूटीन में भी पाएं ग्लोइंग स्किन, बस अपनाएं ये आसान स्किन केयर हैक्स

    यात्रा और ऑफिस रूटीन में भी पाएं ग्लोइंग स्किन, बस अपनाएं ये आसान स्किन केयर हैक्स


    नई दिल्ली। आज के समय में ऑफिस जाना ट्रैवल करना और उसके साथ-साथ अपनी स्क्रीन का ध्यान रखना काफी मुश्किल हो जाता है। अगर आप ट्रैवलिंग के साथ-साथ अपने स्क्रीन का ध्यान रखना चाहती हैं तब यह खबर आपके लिए काफी जरूरी है। जब भी हम कहीं बाहर जाते हैं, तो सोचते हैं कि अपने बैग में ऐसा क्या-क्या रखें। जिससे कि हमारा चेहरा फ्रेश और सुंदर बना रहा। तो चलिए आपको इससे जुड़ी खास जानकारी देते हैं।

    फेस क्लींजर या फेस वॉश
    सबसे जरूरी होता है कि अगर आप बाहर जा रहे हैं तब चेहरे की खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए जरूरी होता है स्किन को साफ रखना, ऑयल, दिनभर की धूल-मिट्टी और मेकअप को हटाने के लिए अच्छा फेस क्लींजर या फेस वॉश होना जरूरी है। इसलिए आप अपने स्किन टाइप के हिसाब से क्लींजर और फेस वॉश को रख सकती हैं। जो आपकी काफी मदद करेगा।

    फेस मास्क
    ऑफिस जाते समय या फिर आप कहीं और ट्रेवल कर रही हैं धूप और धूल की वजह से फेस पर गंदगी की परत जम जाती है। इसके लिए फेस मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। जब आप बाहर जाएं, तो बैग में फेस मास्क जरूर रख लें। यह ब्यूटी प्रोडक्ट आपके बहुत काम आएगा।

    लिप बाम
    फेस के साथ-साथ होंठों की देखभाल करना जरूरी है। फटे और ड्राय होंठ बहुत दर्द होते हैं और हमारा लुक भी खराब कर देते हैं। इसलिए लिप बाम को अपने पास जरूर रखना चाहिए। ताकि ये आपके होंठों की देखभाल सही ढंग से करें।

    मॉइस्चराइजिंग क्रीम
    स्किन को कोमल और मुलायम बनाने के लिए आपके पास मॉइस्चराइजिंग क्रीम होना जरूरी है। इसलिए इसको बाहर जाते समय मॉइस्चराइजिंग क्रीम ले जाना न भूलें। के साथ ही अगर आप रात में ट्रेवल कर रही हैं तो कोई नाइट क्रीम या फिर सीरम जरूर अपने पास रखें।इससे आपका फेस अगली सुबह फ्रेश और ग्लोइंग रहेगा।

  • खंडवा के गुड़ी वन परिक्षेत्र में अतिक्रमणकारियों का दुस्साहस और वन कर्मी पर जानलेवा हमला

    खंडवा के गुड़ी वन परिक्षेत्र में अतिक्रमणकारियों का दुस्साहस और वन कर्मी पर जानलेवा हमला


    मध्यप्रदेश/खंडवा जिले के गुड़ी वन परिक्षेत्र में अतिक्रमणकारियों के बढ़ते दुस्साहस ने प्रशासनिक तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीलाईखेड़ा के जंगलों में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा करने की नियत से पहुंचे करीब तीस से चालीस हमलावरों ने वन विभाग की टीम पर हिंसक हमला कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब विभाग के कर्मचारी नियमित गश्त और सूचना के आधार पर जंगल की सुरक्षा के लिए मौके पर पहुंचे थे। अतिक्रमणकारियों का समूह सुनियोजित तरीके से वन भूमि को कृषि भूमि में बदलने की तैयारी कर रहा था और उनके पास जंगल की जमीन साफ करने के उपकरण भी मौजूद थे।

    वन विभाग के अमले ने जैसे ही उन्हें रोकने की कोशिश की तो स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। जंगल में अवैध खेत तैयार करने की जिद पर अड़े इन लोगों ने सरकारी ड्यूटी पर तैनात चौकीदार रामदास को अपना निशाना बनाया। हमलावरों ने न केवल उनके साथ गाली गलौज की बल्कि शारीरिक रूप से भी उन पर टूट पड़े। इस हिंसक झड़प में हमलावरों ने चौकीदार का गला दबाने और उन्हें नाखूनों से घायल करने जैसी क्रूर हरकतें कीं। इस दौरान वर्दी फाड़ दी गई और मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों को भी जान से मारने की धमकी दी गई। यह हमला इतना अचानक और उग्र था कि शुरुआती क्षणों में कर्मचारियों को अपनी जान बचाना भारी पड़ गया।

    अतिक्रमणकारियों की यह भीड़ पड़ोसी जिलों बड़वानी खरगोन और बुरहानपुर से संगठित होकर यहां पहुंची थी। जंगलों के बीच जमीन कब्जाने का यह सिलसिला नया नहीं है लेकिन जिस तरह से हमलावरों ने कानून को अपने हाथ में लिया उससे वन कर्मियों के बीच भारी आक्रोश और भय का माहौल व्याप्त है। घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद वन विभाग का अतिरिक्त अमला और पुलिस बल सक्रिय हुआ जिसके बाद हमलावर वहां से भाग खड़े हुए। इस संबंध में पिपलौद पुलिस थाने में नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार आमाखुजरी क्षेत्र में लगभग पचास हेक्टेयर वन भूमि पर वर्तमान में अतिक्रमण का बड़ा संकट मंडरा रहा है। यहां बड़ी संख्या में लोग बुवाई की तैयारी कर रहे हैं जो पर्यावरण और वन संपदा के लिए एक अपूरणीय क्षति साबित हो सकती है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते इन बाहरी तत्वों पर नकेल नहीं कसी गई तो घने जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। फिलहाल घायल कर्मचारी का उपचार कराया जा रहा है और पुलिस प्रशासन के सहयोग से पूरे क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी हिंसक वारदात को टाला जा सके और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

  • किचन का देसी जादू: मटर के छिलकों से बनती है लाजवाब सब्जी, जानें आसान रेसिपी

    किचन का देसी जादू: मटर के छिलकों से बनती है लाजवाब सब्जी, जानें आसान रेसिपी


    नई दिल्ली। मटर में काफी प्रोटीन होता है इसलिए लोग उसे खाना ज्यादा पसंद करते हैं। हम मटर से काफी कुछ बनाते है जैसे सब्जी, पराठा और निमोना। आमतौर पर लोग मटर को तो इस्तेमाल कर लेते हैं, पर उसके छिलकों को फेंक देते हैं। लोगों को लगता है कि मटर के छिलके किसी काम के नहीं हैं। पर ये सच नहीं हैं। मटर के छिलके से भी आप स्वादिष्ट सब्जी बना सकते हैं तो चलिए इसकी रेसिपी जानते हैं।

    सेहत के लिए भी अच्छी है ये सब्जी
    मटर के छिलकों की सब्जी काफी अच्छी होती है। यह रेसिपी न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इसमें फाइबर और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। तो चलिए इसके बारे में सारी जानकरी जानते हैं।

    बनाने के लिए सामग्री
    2 कप मटर के ताजे छिलके
    1 प्याज (बारीक कटा हुआ)
    1 टमाटर (कटा हुआ)
    2 हरी मिर्च
    1/2 चम्मच जीरा
    1/2 चम्मच हल्दी पाउडर
    1 चम्मच धनिया पाउडर
    1/2 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
    नमक स्वादानुसार
    2 चम्मच तेल
    हरा धनिया (गार्निश के लिए)

    बनाने की विधि
    सबसे पहले मटर के छिलकों को अच्छी तरह धो लें और उनके किनारों के सख्त धागे निकाल दें। अब इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। इसके बाद इसको थोड़ी देर के लिए पानी में उबाल लें। इसके बाद एक कढ़ाई में तेल गरम करें और उसमें जीरा डालें। जब जीरा चटकने लगे, तो उसमें कटा हुआ प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें।

    इसके बाद हरी मिर्च डालें। इसके बाद उसमें हल्दी पाउडर डालें और टमाटर डाल कर नरम होने तक पकाएं।इसके साथ ही आप इसमें स्वाद अनुसार नमक भी डालें। फिर धनिया पाउडर, लाल मिर्च डालकर मसाले को अच्छे से भून लें।

    जब मसाले से तेल अलग होने लगे, तब इसमें कटे हुए मटर के छिलके डाल दें।छिलकों को मसाले में अच्छी तरह मिलाएं और ढककर धीमी आंच पर 10–15 मिनट तक पकने दें।

    बीच-बीच में चलाते रहें ताकि सब्जी जले नहीं। अगर जरूरत लगे तो थोड़ा पानी भी डाल सकते हैं।जब छिलके नरम हो जाएं और मसाले अच्छी तरह मिल जाएं, तब गैस बंद कर दें। ऊपर से हरा धनिया डालकर गार्निश करें।

  • लेमन ग्रास: सेहत और स्किन के लिए वरदान, जानिए इसके सेवन के हैरान करने वाले फायदे

    लेमन ग्रास: सेहत और स्किन के लिए वरदान, जानिए इसके सेवन के हैरान करने वाले फायदे


    नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में हल्के, ताजगी देने वाले और सेहतमंद पेय की जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे में लेमन ग्रास (Lemongrass) एक ऐसी औषधीय जड़ी-बूटी है, जो न सिर्फ स्वाद में सुगंधित होती है बल्कि शरीर को अंदर से स्वस्थ रखने में भी मदद करती है। आयुर्वेद में इसे प्राकृतिक डिटॉक्स और हीलिंग हर्ब माना गया है।

    भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा भी इसके औषधीय गुणों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसके लाभों को अपनाएं और इसे अपने घरों में आसानी से उगाएं।

    क्या है लेमन ग्रास की खासियत?

    लेमन ग्रास एक सुगंधित घास है, जिसे आसानी से घर के गमले या बगीचे में उगाया जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पर्यावरण को भी शुद्ध करने में मदद करती है और साथ ही सेहत को कई तरह से लाभ पहुंचाती है।

    लेमन ग्रास के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

    1. इम्युनिटी बूस्टर
    लेमन ग्रास में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा कम होता है।

    2. पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद
    यह पाचन शक्ति को बेहतर बनाती है, भूख बढ़ाती है और पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस और अपच में राहत देती है।

    3. त्वचा को रखे साफ और स्वस्थ
    इसके एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण त्वचा को साफ रखने में मदद करते हैं। यह मुंहासे, फंगल इंफेक्शन और त्वचा की सूजन में भी उपयोगी है।

    4. सर्दी-जुकाम और बुखार में राहत
    लेमन ग्रास की चाय पीने से सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याओं में आराम मिलता है। यह शरीर को गर्माहट और राहत प्रदान करती है।

    5. तनाव कम करने में सहायक
    इसकी सुगंध और चाय मानसिक तनाव को कम करने में मदद करती है और मन को शांत रखती है।

    6. शरीर का डिटॉक्स
    लेमन ग्रास शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे शरीर अंदर से साफ रहता है।

    अन्य संभावित लाभ

    आयुर्वेद के अनुसार लेमन ग्रास का उपयोग जोड़ों के दर्द, पीरियड्स की समस्याओं और कमजोरी में भी लाभकारी माना गया है। इसके अलावा इसके कुछ गुणों पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को लेकर भी शोध जारी है।

    कैसे करें सेवन?

    लेमन ग्रास का सबसे आम उपयोग इसकी चाय के रूप में किया जाता है। इसकी पत्तियों को पानी में उबालकर चाय तैयार की जाती है, जिसे दिन में एक या दो बार पीना फायदेमंद माना जाता है।

    लेमन ग्रास एक प्राकृतिक, सुगंधित और औषधीय जड़ी-बूटी है, जो शरीर को डिटॉक्स करने, इम्युनिटी बढ़ाने और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करती है। सही तरीके से इसका सेवन करने पर यह सेहत के लिए एक सरल लेकिन प्रभावी घरेलू उपाय साबित हो सकती है।

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम को विकसित और समावेशी भारत की मजबूत नींव बताया गया

    नारी शक्ति वंदन अधिनियम को विकसित और समावेशी भारत की मजबूत नींव बताया गया


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में देशभर से आईं विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित महिलाओं ने भाग लेकर महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक नए युग की शुरुआत का संदेश दिया। सम्मेलन में महिलाओं ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जोरदार स्वागत करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया तथा इसके लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

    सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करेगा और उन्हें राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

    कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से नीतियों में संवेदनशीलता और संतुलन आएगा, जिससे समाज के सभी वर्गों के हितों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सकेगा। वक्ताओं का मानना था कि जब महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आती हैं, तो निर्णय अधिक समावेशी और समाज के वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होते हैं।

    प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि यह पहल लंबे समय से प्रतीक्षित थी और अब इसके लागू होने से महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सशक्त बनने का नया अवसर मिलेगा। इससे न केवल लोकतंत्र मजबूत होगा, बल्कि देश के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

    सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने महिला सशक्तीकरण को केवल एक नीति नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देकर ही विकसित भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान यह भावना स्पष्ट रूप से सामने आई कि मातृशक्ति को सशक्त बनाकर ही राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी और समाज में समानता तथा न्याय का वातावरण स्थापित होगा।

    नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को महिला नेतृत्व के एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां देश की महिलाएं विकास की मुख्यधारा में और अधिक प्रभावी रूप से अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

  • आशा भोसले ने मॉरीशस जाने से पहले तलत अजीज के साथ रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत।

    आशा भोसले ने मॉरीशस जाने से पहले तलत अजीज के साथ रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत।

    नई दिल्ली:महान पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन के बाद संगीत जगत में शोक की गहरी लहर है और देशभर के कलाकार उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी क्रम में प्रसिद्ध गायक तलत अजीज ने एक बेहद भावुक स्मृति साझा करते हुए बताया कि मॉरीशस जाने से पहले आशा जी ने उनके लिए आखिरी बार एक गीत की पंक्ति गुनगुनाई थी, जो अब उनकी यादों में हमेशा के लिए बस गई है।

    तलत अजीज ने कहा कि आशा भोसले जैसी महान कलाकार का जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने बताया कि कुछ ही समय पहले उनकी आशा जी से बातचीत हुई थी। उस दौरान जब वह मॉरीशस जाने वाले थे, तब आशा जी ने उनसे कहा था कि लौटने के बाद जरूर मिलना। इसी दौरान उन्होंने अपनी तबीयत ठीक न होने के बावजूद उनके लिए एक पंक्ति गुनगुनाई, जिसे वह अपने जीवन की सबसे अनमोल यादों में से एक मानते हैं।

    उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि आशा भोसले का स्वभाव अत्यंत स्नेहपूर्ण और सहज था। वह हर किसी से प्रेम और सम्मान के साथ पेश आती थीं। उनके साथ उनका रिश्ता बेहद खास था और वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें उनके साथ समय बिताने और उनसे जुड़ने का अवसर मिला।

    संगीत जगत के अन्य कलाकारों ने भी आशा भोसले को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व और गायकी की सराहना की। कलाकारों का कहना है कि उनकी आवाज में एक अद्भुत मिठास और गहराई थी, जो हर गीत को खास बना देती थी। उन्होंने अपने लंबे करियर में हर शैली के गीतों को नई ऊंचाई दी और अपनी बहुमुखी प्रतिभा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

    कुछ कलाकारों ने यह भी कहा कि आशा भोसले ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने जीवन में जो मुकाम हासिल किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने न केवल संगीत को जिया, बल्कि हर गीत में भावनाओं को इस तरह पिरोया कि वह सीधे लोगों के दिलों तक पहुंच गया।

    गायकों और कलाकारों के अनुसार, आशा भोसले के गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं और आने वाले समय में भी उनकी यह विरासत कायम रहेगी। उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक मानक स्थापित किया है कि किस तरह अपने अलग अंदाज और समर्पण से पहचान बनाई जाती है।

    आशा भोसले का योगदान भारतीय संगीत जगत में सदैव अमिट रहेगा और उनकी आवाज हमेशा लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी।

  • आयुर्वेदिक रहस्य: सुबह जीरा पानी पीने से क्या बदलती है सेहत? जानें सही तरीका

    आयुर्वेदिक रहस्य: सुबह जीरा पानी पीने से क्या बदलती है सेहत? जानें सही तरीका


    नई दिल्ली। आयुर्वेद में जीरे को केवल मसाला नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक औषधि माना गया है। जीरा पानी को “डाइजेस्टिव टॉनिक” कहा जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पेट की अग्नि (मेटाबॉलिज्म) को सक्रिय करता है और शरीर में जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है।

    आज के समय में फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए लोग जीरा पानी, मेथी पानी, अजवाइन पानी और सौंफ पानी जैसी घरेलू औषधियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। खासतौर पर जीरा पानी को वजन घटाने और पेट की समस्याओं में बेहद असरदार माना जा रहा है।

    जीरा पानी बनाने का सही तरीका क्या है?

    जीरा पानी बनाने के लिए सबसे पहले एक चम्मच जीरा रातभर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को हल्का उबाल लें, ताकि जीरे के पोषक तत्व पानी में अच्छे से मिल जाएं। उबालने के बाद जब पानी हल्का गुनगुना रह जाए, तभी इसका सेवन करना चाहिए। ध्यान रखें कि पानी न बहुत ज्यादा गर्म हो और न ठंडा, क्योंकि गुनगुना पानी शरीर द्वारा जल्दी अवशोषित किया जाता है और इसका प्रभाव बेहतर होता है।

    कब और कैसे करें सेवन?

    आयुर्वेद के अनुसार जीरा पानी का सबसे सही समय सुबह खाली पेट माना गया है। सुबह उठकर सबसे पहले इसे पीने से पाचन तंत्र सक्रिय हो जाता है और दिनभर पेट से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं।

    यदि कोई व्यक्ति खाली पेट नहीं पी सकता, तो इसे भोजन के बाद भी लिया जा सकता है। लेकिन इसे धीरे-धीरे, घूंट-घूंट कर पीना चाहिए ताकि यह शरीर में सही तरीके से अवशोषित हो सके।

    जीरा पानी के प्रमुख फायदे

    जीरा पानी नियमित रूप से पीने से शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं-

    पाचन तंत्र मजबूत होता है
    पेट फूलना और गैस की समस्या में राहत मिलती है
    मेटाबॉलिज्म तेज होता है
    शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं
    वजन घटाने में मदद मिलती है
    गर्मियों में पेट की जलन और एसिडिटी कम होती है

    आयुर्वेद में इसे एक प्राकृतिक डिटॉक्स ड्रिंक माना गया है, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है।

    गलत तरीके से सेवन से हो सकता है नुकसान

    विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग जल्दी परिणाम पाने के चक्कर में दिनभर जीरा पानी पीते रहते हैं या बहुत अधिक मात्रा में इसका सेवन कर लेते हैं। यह तरीका सही नहीं है। अत्यधिक सेवन से शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ सकता है और अपेक्षित लाभ भी नहीं मिलते।

    जीरा पानी एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी घरेलू उपाय है, जिसे सही तरीके से अपनाकर पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। सुबह की यह छोटी सी आदत लंबे समय में शरीर को मजबूत और ऊर्जावान बनाने में मदद कर सकती है।

  • सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर किया लॉन्च

    सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर किया लॉन्च

    नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में श्री बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर जारी किया। इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव, स्वामी चिदानंद सरस्वती, फिल्म के निर्देशक शरद सिंह ठाकुर सहित कई प्रमुख गणमान्य व्यक्ति और कलाकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का माहौल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से ओतप्रोत नजर आया।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह फिल्म केवल एक मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और मानवता के मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों पर आधारित फिल्में समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं।

    सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन और उनके विचारों को याद करते हुए कहा कि उनका दिव्य व्यक्तित्व आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बाबा की शिक्षाएं सरलता, करुणा, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं और समाज को दिशा देने का कार्य करती हैं।

    उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संत परंपरा और सनातन संस्कृति के मूल्यों को सहेजना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की आध्यात्मिक फिल्मों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति जागरूक किया जा सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, निर्देशक और निर्माण टीम की सराहना करते हुए उन्हें इस प्रयास के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह फिल्म समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी और लोगों को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करेगी।

    इस आयोजन को उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो संत परंपरा के महान व्यक्तित्वों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।