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  • शिक्षकों की पात्रता परीक्षा पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में रखेगी पक्ष, शिक्षा मंत्री ने दिया भरोसा

    शिक्षकों की पात्रता परीक्षा पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में रखेगी पक्ष, शिक्षा मंत्री ने दिया भरोसा


    भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ और शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से मुलाकात की और शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर अपनी चिंताओं और सुझावों से अवगत कराया। प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश के शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखे।

    इस पर शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने आश्वस्त किया कि सरकार शिक्षकों के हितों के प्रति पूरी तरह सजग है। उन्होंने कहा कि तकनीकी एवं विधि सम्मत कार्यवाही पूरी होने के उपरांत राज्य सरकार शीघ्र ही उच्चतम न्यायालय में शिक्षकों का पक्ष रखेगी और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में शिक्षकों के विपरीत निर्णय नहीं लिया जाएगा।

    प्रदेश कर्मचारी संघ के प्रवक्ता डॉ. अनिल भार्गव वायु ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से लिया गया है और सरकार का रुख शिक्षकों के हित में ही रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का अधिकार और उनके भविष्य की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।

    प्रतिनिधिमंडल में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़ राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव और प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि यह बैठक शिक्षकों और सरकार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुई।

    मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश के समस्त शिक्षक एकजुट हैं और अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा करते हुए न्याय दिलाने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।

    शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़ ने कहा कि शिक्षकों का पक्ष पूरी मजबूती से रखा जाएगा और हमें पूर्ण विश्वास है कि सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इस आश्वासन को दोहराया और कहा कि सरकार के सकारात्मक रुख ने प्रदेश के शिक्षकों में विश्वास को मजबूत किया है।

    शिक्षकों ने यह स्पष्ट किया कि वे एकजुट हैं और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा मंत्री से यह भी कहा कि पात्रता परीक्षा और उससे जुड़े अन्य मुद्दों में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न की जाए।

    शिक्षकों और सरकार के बीच यह संवाद प्रक्रिया यह संदेश देती है कि राज्य प्रशासन शिक्षकों के हितों के प्रति संवेदनशील है और उनकी समस्याओं का समाधान विधि सम्मत तरीके से सुनिश्चित किया जाएगा। इससे प्रदेश के शिक्षक अपने अधिकारों की रक्षा के प्रति आश्वस्त हैं और सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष के न्यायपूर्ण निर्णय की पूरी उम्मीद रखते हैं।

  • सोमी अली और जेबा बख्तियार के बीच असली दोस्ती और सम्मान का रिश्ता रहा..

    सोमी अली और जेबा बख्तियार के बीच असली दोस्ती और सम्मान का रिश्ता रहा..


    नई दिल्ली:90 के दशक का बॉलीवुड मीडिया और फैंस के लिए एक ऐसा दौर था, जब फिल्मी सितारों की जिंदगी के बारे में केवल मैगजीन और अखबार ही जानकारी देते थे। सोशल मीडिया के आज के दौर से बिल्कुल अलग उस समय, जो छपता वही सच माना जाता था और सितारों के रिश्तों को अक्सर अलग रंग देकर पेश किया जाता था। इसी समय की यादें साझा करते हुए अभिनेत्री सोमी अली ने हाल ही में एक थ्रोबैक पोस्ट के जरिए बताया कि कैसे उन्हें और जेबा बख्तियार को लेकर मीडिया ने झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश की थी।

    सोमी अली ने बताया कि 1993 में उनकी पहली मुलाकात जेबा बख्तियार से हुई थी। दोनों ही पाकिस्तान में जन्मीं थीं, लेकिन सोमी का पालन-पोषण अमेरिका में हुआ। मीडिया ने इसी समानता को आधार बनाकर उनके बीच प्रतिस्पर्धा और टकराव की खबरें छापीं, लेकिन हकीकत इससे पूरी तरह अलग थी। असल जिंदगी में उनके बीच कभी कोई राइवलरी नहीं थी। बल्कि दोनों के बीच सम्मान और समझ का रिश्ता था। सोमी ने बताया कि वह उस पहली मुलाकात को आज भी सकारात्मक अनुभव के रूप में याद करती हैं और जेबा के लिए उनके मन में गहरी इज्जत है।

    सोमी अली ने जेबा बख्तियार की खूब तारीफ करते हुए कहा कि वह बेहद खूबसूरत और अच्छी इंसान हैं और हमेशा खुश रहें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया की बनाई कहानी कभी सफल नहीं हुई, क्योंकि असल जिंदगी में उनके बीच मित्रता और सहयोग का रिश्ता था। इस खुलासे ने 90 के दशक की फिल्मी दुनिया की मीडिया कल्चर और फैन्स तक पहुंचने वाली कहानियों की सच्चाई को उजागर किया।

    जेबा बख्तियार की फिल्मी पहचान की बात करें तो उन्होंने 1991 में रिलीज हुई फिल्म ‘हिना’ से लोकप्रियता हासिल की थी। इस फिल्म में उनके साथ ऋषि कपूर और अश्विनी भावे नजर आए थे और निर्देशन रणदीर कपूर ने किया था। भारत-पाकिस्तान की पृष्ठभूमि पर बनी इस प्रेम कहानी को दर्शकों ने काफी सराहा।

    इस किस्से ने यह साबित किया कि सोशल मीडिया से पहले मीडिया की बनाई अफवाहें और टैब्लॉइड कहानियां कितनी प्रभावशाली और कभी-कभी भ्रामक हो सकती थीं। आज के दौर में फैंस सीधे अपने पसंदीदा सितारों से जुड़ सकते हैं, लेकिन उस समय सच्चाई जानने का कोई दूसरा साधन उपलब्ध नहीं था।

  • पीथमपुर में नाबालिग अपहरण-रेप का आरोपी गिरफ्तार, बस स्टैंड से दबोचा गया!

    पीथमपुर में नाबालिग अपहरण-रेप का आरोपी गिरफ्तार, बस स्टैंड से दबोचा गया!


    पीथमपुर। पीथमपुर के सेक्टर-1 थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में फरार चल रहे आरोपी को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को Eicher Bus Stand के पास से घेराबंदी कर पकड़ा गया। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी बस स्टैंड क्षेत्र में मौजूद है। सूचना मिलते ही टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके पर दबिश दी और आरोपी को हिरासत में ले लिया।

    फरवरी से चल रहा था फरार

    यह मामला फरवरी महीने का है, जब एक नाबालिग के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई गई थी। घटना के बाद से ही आरोपी फरार हो गया था और पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी थी। लंबे समय से फरार आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि आरोपी मानपुर के पास सेजगढ़ का रहने वाला है।

    पीड़िता के बयान के आधार पर गंभीर धाराएं

    जांच अधिकारी चाँदनी सिंगार के अनुसार, नाबालिग पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ अपहरण और दुष्कर्म सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी को अभिरक्षा में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा सके और अन्य पहलुओं की भी जांच हो सके।

    कोर्ट में पेशी की तैयारी

    पुलिस ने बताया कि आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को आज न्यायालय में पेश किया जाएगा। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

     कानून के शिकंजे में अपराधी

    इस कार्रवाई से साफ है कि पुलिस अपराधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए सक्रिय है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ती है।

  • भोपाल में हाई प्रोफाइल केस, EOW में शिकायत दर्ज, 237 प्रोजेक्ट की मंजूरी पर सियासत गरम

    भोपाल में हाई प्रोफाइल केस, EOW में शिकायत दर्ज, 237 प्रोजेक्ट की मंजूरी पर सियासत गरम


    भोपाल । भोपाल में भ्रष्टाचार के मामले में हलचल मची हुई है। पूर्व आईएफएस आजाद सिंह डबास ने 4 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 23 मई 2025 को बिना सिया बैठक के 237 प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई थी। इस प्रक्रिया में करोड़ों के भ्रष्टाचार के संकेत मिलते हैं।

    शिकायत के अनुसार आरोपित अधिकारियों में आईएएस अशोक बर्णवाल नवनीत मोहन कोठारी उमा महेश्वरी आर और श्रीमन शुक्ला शामिल हैं। आजाद सिंह डबास का कहना है कि इन अधिकारियों ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए परियोजनाओं को अनुमति दी। जबकि पर्यावरण मंजूरी से पहले सिया की बैठक बुलाना अनिवार्य होता है।

    पूर्व आईएफएस ने आरोप लगाया कि बिना बैठक के परियोजनाओं को अनुमति देना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार को जन्म देता है। उन्होंने EOW से इन सभी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और जांच करने की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार आरोपित अधिकारियों में तत्कालीन एसीएस पर्यावरण अशोक बर्णवाल प्रमुख सचिव पर्यावरण नवनीत मोहन कोठारी सदस्य सचिव सिया उमा महेश्वरी आर और प्रभारी सदस्य सचिव सिया श्रीमन शुक्ला शामिल थे। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस गैरकानूनी मंजूरी से पर्यावरण और सरकारी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ईओडब्ल्यू की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोप कितने प्रमाणिक हैं। इस मामले ने न केवल सरकारी अधिकारियों बल्कि बड़ी परियोजनाओं की प्रक्रिया पर भी ध्यान खींचा है।

    पूर्व IFS आजाद सिंह डबास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूरी महसूस हुई। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी स्तर के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। उनका यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    राज्य के प्रशासनिक माहौल में इस मामले ने हलचल मचा दी है और ईओडब्ल्यू द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को लेकर जनता और मीडिया में उत्सुकता बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि FIR दर्ज होती है तो यह मामले की गंभीरता को दर्शाएगा और भविष्य में परियोजना मंजूरी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

  • लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं से नोएडा अथॉरिटी और निर्माण कंपनियों पर उठ रहे सवाल..

    लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं से नोएडा अथॉरिटी और निर्माण कंपनियों पर उठ रहे सवाल..


    नई दिल्ली:नोएडा में एक और दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसमें 23 वर्षीय हर्षित भट्ट नामक युवक की मौत हो गई। हर्षित अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने के लिए सेक्टर 94 के एक खाली प्लॉट में गया था। वहां भरे पानी में तैरने के दौरान वह गहरे पानी में डूब गया और बाहर नहीं आ सका। हादसे के समय हर्षित अच्छा तैराक था, लेकिन उसे इस गहरे पानी का अंदाजा नहीं था। दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी सारी कोशिशें नाकाम रहीं। सूचना मिलने पर पुलिस और बचाव दल की टीमें मौके पर पहुंचीं, साथ ही NDRF और SDRF की टीमें भी सहायता के लिए तैनात की गईं, लेकिन तब तक हर्षित की जान नहीं बचाई जा सकी। तीन अन्य छात्र सुरक्षित बाहर निकाले गए, जबकि हर्षित का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

    यह हादसा नोएडा में लगातार बढ़ते सुरक्षा जोखिमों की ओर इशारा करता है। सेक्टर 94 में जिस खाली प्लॉट में यह दुर्घटना हुई, वहां कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था। पहले भी नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही के कारण कई मौतें हुई हैं। कुछ समय पहले आईटी इंजीनियर युवराज मेहता और अन्य लोग इसी तरह के खुले गड्ढों में दुर्घटनाग्रस्त हुए थे। सेक्टर 115 में एक निर्माणाधीन नाले के गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय युवक की मौत भी इसी श्रेणी में आती है।

    स्थानीय लोगों और परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है। हर्षित का परिवार गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहता है और सदमे में है। उन्होंने घर के बाहर स्पष्ट संदेश देकर किसी को अंदर आने से रोका हुआ है। हर्षित एमिटी यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन का छात्र था और युवा जीवन में ही इस तरह के हादसे में खो गया। हादसे ने न केवल परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि नोएडा अथॉरिटी और निर्माण कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खुले गड्ढों और निर्माण स्थलों की निगरानी, चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग की कमी जानलेवा साबित हो सकती है। अधिकारियों ने पहले भी जोखिम वाले स्थानों पर सुरक्षा उपाय करने की बात कही थी, लेकिन कार्रवाई में देरी और नियमानुसार उपायों का अभाव लगातार बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।

  • माता-पिता के विवाद से परेशान युवक ने उठाया खौफनाक कदम, जहर खाया

    माता-पिता के विवाद से परेशान युवक ने उठाया खौफनाक कदम, जहर खाया


    इंदौर। इंदौर के आजाद नगर इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां पारिवारिक कलह से परेशान एक 19 वर्षीय युवक ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। यह घटना बुधवार की बताई जा रही है, जिसने पूरे इलाके में शोक का माहौल बना दिया है।

    मृतक की पहचान अनुराग (19) के रूप में हुई है, जो पवनपुरी पालदा क्षेत्र में किराए के मकान में रहता था। बताया जा रहा है कि वह अपने माता-पिता के बीच चल रहे विवाद से मानसिक रूप से बेहद परेशान था।

    छोटे भाई से बातचीत के बाद उठाया कदम

    पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना से पहले अनुराग की अपने छोटे भाई से फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान उसे पता चला कि उसके पिता ने उसकी मां के साथ मारपीट की है।

    यह बात सुनकर वह काफी आहत हो गया। इसके बाद उसकी अपने पिता से भी बातचीत हुई, जो विवाद में बदल गई। इसी मानसिक तनाव में आकर अनुराग ने जहर खा लिया।

    अस्पताल में तोड़ा द

    घटना के बाद अनुराग की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उसके रिश्तेदार नीरज उसे गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार और आसपास के लोगों में गहरा दुख और सदमा है।

    कामकाजी युवक था, तीन साल से रह रहा था इंदौर में

    पुलिस के मुताबिक, अनुराग मूल रूप से नर्मदापुरम जिले के बिशोनी गांव का रहने वाला था। वह पिछले तीन साल से इंदौर में रहकर एक दाल मिल में काम कर रहा था और अपने परिवार की मदद कर रहा था। परिवार में उसके माता-पिता और एक छोटा भाई हैं। उसके पिता पेशे से ड्राइवर बताए जा रहे हैं।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    आजाद नगर पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि आत्महत्या के पीछे के कारणों को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके।

    पारिवारिक तनाव के गंभीर परिणाम

    यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि पारिवारिक विवाद का असर सिर्फ पति-पत्नी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है। ऐसे मामलों में संवाद और समझदारी बेहद जरूरी होती है।

  • कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश वेतन से वंचित नहीं करने का किया निर्देश

    कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश वेतन से वंचित नहीं करने का किया निर्देश

    जबलपुर । जबलपुर मध्यप्रदेश में गेस्ट फैकल्टी के मातृत्व अवकाश को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले से कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गेस्ट फैकल्टी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता है।

    मामला कटनी जिले के शासकीय तिलक पीजी कॉलेज से जुड़ा है जहां गेस्ट फैकल्टी प्रीति साकेत ने मातृत्व अवकाश का लाभ लेने के प्रयास में याचिका दायर की थी। याचिका के अनुसार कॉलेज के प्रिंसिपल ने उन्हें मातृत्व अवकाश से वंचित कर दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी राज्य सरकार के अधीन कार्यरत संस्थान में 12 महीनों में 80 दिन कार्य करने की शर्त लागू नहीं होगी।

    हाईकोर्ट ने मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 की धारा 5(1) का हवाला देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को 26 हफ्ते की सवेतन छुट्टी का पूरा हक मिलेगा। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संवैधानिक न्यायालय द्वारा भारत के संविधान की मूल भावना और नीति-निर्देशक सिद्धांतों की उपेक्षा नहीं की जा सकती।

    अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश सिर्फ निजी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है बल्कि राज्य के अधीन काम करने वाली गेस्ट फैकल्टी पर भी लागू होता है। कोर्ट के आदेश में कहा गया कि अवकाश के दौरान वेतन रोकना अवैध होगा और यह महिलाओं के अधिकारों का हनन है।

    कोर्ट ने कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता प्रीति साकेत को 26 हफ्ते की सवेतन मातृत्व छुट्टी प्रदान की जाए और उनके वेतन में किसी प्रकार की कटौती न की जाए। अदालत ने इस फैसले को बड़े सामाजिक महत्व का बताया और कहा कि कामकाजी महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण मिलना चाहिए।

    इस फैसले से न केवल याचिकाकर्ता को राहत मिली है बल्कि पूरे राज्य की गेस्ट फैकल्टी और अन्य संस्थानों में कामकाजी महिलाओं को भी यह संदेश गया कि मातृत्व अवकाश के अधिकार से किसी को वंचित नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला कामकाजी महिलाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा और अन्य मामलों में भी समान प्रवृत्ति को बढ़ावा देगा।

    कोर्ट के इस निर्णय ने यह स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश सिर्फ समय की अवधि तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें सवेतन अवकाश का भी अधिकार शामिल है। इससे महिलाओं को नौकरी में बने रहने अपनी स्वास्थ्य और बच्चे की देखभाल करने और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

  • पलक झपकते ही उड़ाए पैसे, दो युवतियों की चालाकी का वीडियो वायरल

    पलक झपकते ही उड़ाए पैसे, दो युवतियों की चालाकी का वीडियो वायरल


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले में बैंक के बाहर दिनदहाड़े हुई चोरी ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करैरा थाना क्षेत्र में दो युवतियों ने मिलकर महज 15–20 सेकंड में एक युवक के बैग से 90 हजार रुपये उड़ा लिए। पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिसमें उनकी प्लानिंग और तरीका साफ नजर आ रहा है।

    बैंक से रकम निकालते ही बने निशाना

    जानकारी के मुताबिक, ग्राम डुमघना निवासी 26 वर्षीय आकाश श्रीवास्तव, जो एसबीआई कियोस्क संचालक हैं, मंगलवार सुबह करीब 11:40 बजे State Bank of India की गांधी रोड स्थित करैरा शाखा पहुंचे थे। उन्होंने अपने कियोस्क खाते से 1 लाख 60 हजार रुपये निकाले और बैग में रखकर बैंक से बाहर निकल गए। लेकिन जैसे ही वह बैंक के गेट तक पहुंचे, पहले से घात लगाए बैठी दो युवतियों ने उन्हें अपना निशाना बना लिया।

    एक ने रोका, दूसरी ने काटा बैग

    CCTV फुटेज के अनुसार, एक युवती अचानक आकाश के सामने आ गई और बातचीत में उलझा लिया। उसने रास्ता रोककर उनका ध्यान भटका दिया। इसी दौरान दूसरी युवती पीछे आकर खड़ी हो गई और ब्लेड से बैग को बेहद सफाई से काट दिया। कुछ ही सेकंड में बैग से 90 हजार रुपये निकाल लिए गए और दोनों युवतियां वहां से आराम से निकल गईं। यह पूरी वारदात इतनी तेजी से हुई कि युवक को भनक तक नहीं लगी।

    CCTV में दिखी पूरी साजिश

    फुटेज में साफ दिख रहा है कि दोनों युवतियां पहले से बैंक के बाहर मौजूद थीं और मौके का इंतजार कर रही थीं। एक युवती ने चप्पल ठीक करने जैसे बहाने से इशारे कर साथी को संकेत दिया, जबकि दूसरी ने चोरी को अंजाम दिया।

    वारदात के बाद दोनों पैदल वहां से निकल गईं। बताया जा रहा है कि वे ई-रिक्शा (टमटम) से बैंक तक पहुंची थीं, जिससे यह पूरी घटना सुनियोजित लग रही है।

    कियोस्क पहुंचने पर हुआ खुलासा

    आकाश को चोरी की जानकारी तब हुई जब वह अपने कियोस्क सेंटर पहुंचे और बैग चेक किया। पैसे गायब देख वह तुरंत बैंक लौटे और CCTV फुटेज की जांच कराई, जिसमें पूरी घटना सामने आ गई।

    पुलिस ने दर्ज किया केस, तलाश जारी

    करैरा थाना प्रभारी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद दो अज्ञात युवतियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही है।

    सतर्कता जरूरी, ऐसे बचें

    इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। बैंक से पैसे निकालते समय बैग को सुरक्षित रखें और अनजान लोगों से दूरी बनाए रखें, ताकि इस तरह की वारदातों से बचा जा सके।

  • दिल्ली में IAS और दानिक्स अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर, प्रशासनिक हलचल..

    दिल्ली में IAS और दानिक्स अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर, प्रशासनिक हलचल..

    नई दिल्ली:दिल्ली में बुधवार देर रात बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल हुआ, जिसमें आईएएस और दानिक्स अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर किए गए। राजधानी के विभिन्न विभागों में 20 से अधिक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिससे सरकारी गलियारों में हलचल मच गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने इसे प्रशासनिक कामकाज में सुधार के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया है।

    इस फेरबदल में सीनियर अफसरों को प्रमुख जिम्मेदारी दी गई। डॉ. नरेंद्र कुमार को फाइनेंस कमिश्नर नियुक्त किया गया, जबकि प्रशांत गोयल को फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया गया। उनके पास डीएफसी और डीएससीएससी के सीएमडी की जिम्मेदारी भी होगी। उत्तर पश्चिम जिले के डीएम सौम्या सौरभ को उद्योग विभाग में तैनात किया गया है। नवलेंद्र कुमार सिंह को जीएसटी एडिशनल कमिश्नर और सोनिका सिंह को डीडीए में कमिश्नर बनाया गया है।

    संसदीय कार्यों में हर्षित जैन को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि मंगल सैनी केंद्रीय कारागार के सुपरिटेंडेंट बनाए गए। ओम प्रकाश सैनी को डीएसएसएसबी में उप सचिव के पद पर तैनात किया गया। इसके अलावा मुकेश कुमार, आशीष शौकीन, मनोज कुमार, भूप सिंह और अश्विनी कुमार को नई तैनाती मिली। कुछ नियुक्तियों में बदलाव किया गया, जैसे कि अमित कुमार की नियुक्ति का आदेश बाद में रद्द कर दिया गया।

    इस व्यापक ट्रांसफर ने प्रशासनिक स्तर पर नई दिशा और जिम्मेदारियों का वितरण स्पष्ट किया। अधिकारियों का कहना है कि इससे विभागों की कार्यक्षमता और जवाबदेही में सुधार की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बड़े पैमाने पर ट्रांसफर यह दर्शाते हैं कि सरकार अधिकारियों की क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर नई तैनाती कर रही है।

    इस कदम का असर न केवल विभागीय कामकाज पर पड़ेगा, बल्कि जनता तक सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है। प्रशासनिक बदलाव के साथ, अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिलने से विभागों में नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आने की संभावना है। इस तरह के फेरबदल से सरकारी कामकाज और उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।

  • 2 हजार के विवाद में महिला पर हमला, सिर पर भगौनी मारकर किया घायल

    2 हजार के विवाद में महिला पर हमला, सिर पर भगौनी मारकर किया घायल


    शिवपुरी।
    शहर की खाटू श्याम कॉलोनी में महज 2000 रुपये के लेन-देन को लेकर हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। पड़ोसियों के बीच शुरू हुई कहासुनी इतनी बढ़ गई कि एक महिला पर जानलेवा हमला कर दिया गया। आरोप है कि पड़ोसी युवक ने महिला के सिर पर भगौनी (रसोई का बर्तन) से वार कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई।

    गाली-गलौज के बाद बढ़ा विवाद

    घटना 8 अप्रैल की शाम की बताई जा रही है। कॉलोनी निवासी रचना (34) अपने घर के बाहर खड़ी थीं, तभी उनके पड़ोसी विकास धाकड़ अपनी मां के साथ वहां पहुंचे। दोनों के बीच पहले से ही पैसों के लेन-देन को लेकर तनाव चल रहा था। आरोप है कि आते ही मां-बेटे ने रचना को अपशब्द कहना शुरू कर दिया। रचना द्वारा विरोध जताने पर विवाद और बढ़ गया और बात हाथापाई तक पहुंच गई। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और आसपास के लोग भी इकट्ठा होने लगे।

    भगौनी से किया हमला, महिला लहूलुहान

    विवाद के दौरान आरोपी विकास धाकड़ घर के अंदर गया और वहां से भगौनी लेकर बाहर आया। इसके बाद उसने रचना के सिर पर जोरदार वार कर दिया। अचानक हुए इस हमले से रचना जमीन पर गिर गईं और उनके माथे से खून बहने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला को पीठ में भी गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने घायल महिला को संभाला।

     पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू

    घटना के बाद रचना सीधे थाने पहुंचीं और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी विकास धाकड़ और उसकी मां के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    छोटी बात, बड़ा विवाद-सतर्क रहने की जरूरत

    यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि छोटे-छोटे आर्थिक विवाद किस तरह बड़े अपराध का रूप ले सकते हैं। समाज में ऐसे मामलों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की जरूरत है, ताकि किसी की जान और सुरक्षा खतरे में न पड़े।