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  • Allu Arjun की फिल्म Raaka के पोस्टर पर Shah Rukh Khan ने किया रिएक्ट, जानें उनकी प्रतिक्रिया!

    Allu Arjun की फिल्म Raaka के पोस्टर पर Shah Rukh Khan ने किया रिएक्ट, जानें उनकी प्रतिक्रिया!

    नई दिल्ली। अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) के जन्मदिन पर मेकर्स ने उनकी फिल्म के नाम की अनाउंसमेंट करने के साथ-साथ उनका पहला लुक भी पोस्ट के जरिए रिलीज कर दिया है। जिसे देखकर उनके फैंस काफी खुश हो गए हैं। आपको बता दें कि, उनकी फिल्म का नाम Raaka रखा गया है। फिल्म कैसे नाम के सामने आने के बाद हर कोई फिल्म के लिए अपनी उत्सुकता दिख रहा है वहीं शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) ने भी इस पर रिएक्ट किया है।

    फिल्म Raaka का पोस्टर
    अल्लू अर्जुन के 44वें जन्मदिन पर निर्देशक एटली (Atlee) ने उनकी मोस्ट अवेटेड फिल्म का नाम और फर्स्ट लुक रिवील किया था। उन्होंने बताया था कि टीम ने इस फिल्म का नाम ‘राका’ रखा है। ‘राका’ के पोस्टर ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। इसके साथ थी उनका पहला लुक भी धमाल मचा रहा है वह काफी अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं ऐसा पहली बार होगा कि अल्लू अर्जुन को एक अलग अंदाज में दिखाई देंगे। पोस्ट देखने के बाद उनके पास उनकी बधाई करते हुए नजर आ रहे हैं साथ ही कई लोग फिल्म पर अपना अपना रिएक्शन दे रहे हैं।

    शाहरुख खान ने भी किया रिएक्ट
    शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) ने अल्लू अर्जुन की फिल्म ‘राका’ का पोस्टर शेयर करते हुए लिखा, ‘पोस्टर बहुत ही मजेदार और दिलचस्प है, बिल्कुल तुम्हारी तरह। मैं यह देखने के लिए एक्साइटेड हूं कि आप लोगों ने क्या तैयार किया है। अगर एटली के शब्दों में कहें तो ये मोस्टर मास माससस माससस!! होगा। ‘राका’ बहुत मजेदार फिल्म लग रही है, ढेर सारी शुभकामनाएं!’

    निर्देशक एटली ने फिल्म के बारे में कहा
    एटली (Atlee) ने इस प्रोजेक्ट को लेकर एक इमोशनल नोट शेयर किया है। उन्होंने बताया कि ‘राका’ का आइडिया उन्हें 18 साल पहले आया था और वह तब से इस फिल्म पर काम कर रहे हैं। उन्होंने लिखा, ‘राका सिर्फ एक फिल्म नहीं है… ये मेरा ही एक हिस्सा है जिसे मैं सालों से अपने साथ लिए घूम रहा हूं। 18 सालों तक, मैंने इस आइडिया को संभालकर रखा और उसे कभी भी धुंधला नहीं पड़ने दिया। इसने मेरी परीक्षा ली, मुझे तराशा, और हर मुश्किल में मेरे साथ रहा। और सच कहूं तो… यह तो बस शुरुआत है।’

    फिल्म की कास्ट रिलीज डेट
    रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म लगभग 800 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में बन रही है। इस फिल्म के जरिए पहली बार पर्दे पर अल्लू अर्जुन और दीपिका पादुकोण की जोड़ी साथ नजर आएगी। वहीं रिलीज डेट की बात करें तो यह सट्टा 2027 में रिलीज हो सकती है।

  • विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर..

    विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर..


    नई दिल्ली:विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए मातृशक्ति की भागीदारी को अनिवार्य बताते हुए Narendra Modi ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है तो महिलाओं को उनके पूर्ण सामर्थ के साथ राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में शामिल करना होगा।

    अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने माताओं, बहनों और बेटियों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि भारत ने आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति तब तक अधूरी रहती है जब तक उसकी आधी आबादी को समान अवसर और प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ही इस लक्ष्य को वास्तविक रूप दे सकती है।

    प्रधानमंत्री ने हाल ही में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए बताया कि यह विधेयक देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक समावेशी और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने इस विषय पर सहमति दिखाई है और व्यापक स्तर पर सकारात्मक माहौल बनता हुआ दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि वर्ष 2029 के चुनावों तक लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जिससे नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।

    उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ समय से विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ इस मुद्दे पर निरंतर संवाद जारी है और अधिकांश दलों ने इसका समर्थन किया है। इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण को लोकतंत्र की मजबूती का संकेत बताते हुए उन्होंने कहा कि जब सभी दल एकजुट होकर किसी महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन के लिए आगे आते हैं तो उसका प्रभाव व्यापक और स्थायी होता है।

    देशवासियों से अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विषय पर जनजागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर विचार करें, चर्चा करें और समाज में सकारात्मक माहौल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने राजनीतिक दलों को भी प्रेरित करने की बात कही ताकि वे पूरे उत्साह के साथ संसद में इस विधेयक को पारित कराने की दिशा में आगे बढ़ें।

    प्रधानमंत्री ने अपने विचारों में यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण केवल एक नीति नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता है। उनका मानना है कि इससे लोकतंत्र अधिक जीवंत, सहभागी और संतुलित बनेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की देरी देश के समग्र विकास के लिए बाधक सिद्ध हो सकती है।

  • इन एक्टर्स के नाम है अनोखा रिकॉर्ड, 1 साल में ही फिल्मों से कमाए 2000 करोड़, एक का नाम जान लगेगा झटका

    इन एक्टर्स के नाम है अनोखा रिकॉर्ड, 1 साल में ही फिल्मों से कमाए 2000 करोड़, एक का नाम जान लगेगा झटका


    नई दिल्ली। फिल्म इंडस्ट्री में बॉक्स ऑफिस पर कमाई और रिकॉर्ड्स का बड़ा महत्व होता है। कई बड़े सितारे सिर्फ एक्टिंग ही नहीं, बल्कि कमाई के रिकॉर्ड बनाने में भी अपने नाम दर्ज कराते हैं। 2023 में कुछ ऐसे ही सुपरस्टार्स हैं जिन्होंने एक साल में फिल्मों से 2000 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर दर्शकों को हैरान कर दिया।

    1. शाहरुख खान: बॉक्स ऑफिस किंग

    इस लिस्ट में पहले नंबर पर हैं शाहरुख खान। साल 2023 में शाहरुख की तीन बड़ी फिल्में रिलीज़ हुईं – पठान, जवान और डंकी। तीनों फिल्में हिट रहीं और वर्ल्डवाइड कलेक्शन 2685 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    पठान: 1055 करोड़
    जवान: 1160 करोड़
    डंकी: 455-470 करोड़

    शाहरुख की ये सफलता उनके फैन फॉलोइंग और शानदार प्रदर्शन का प्रमाण है। बॉक्स ऑफिस पर उनकी फिल्मों का असर हमेशा ही रिकॉर्ड तोड़ने वाला रहा है।

    2. अक्षय खन्ना: 2 फिल्मों में 2100 करोड़

    दूसरे नंबर पर हैं अक्षय खन्ना, जिन्होंने साल 2023 में दो फिल्में रिलीज़ कीं।

    छावा: 809 करोड़
    दिसंबर: 1300 करोड़

    इन दोनों फिल्मों की मिलाकर अक्षय की वर्ल्डवाइड कमाई 2,109 करोड़ रुपये हुई। ये आंकड़ा दिखाता है कि अक्षय कुमार सिर्फ कॉमिक और एक्शन फिल्मों में ही नहीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर सुपरस्टार्स के मुकाम पर भी कायम हैं।

    3. आमिर खान और दंगल

    हालांकि आमिर खान की दंगल ने भी बड़ा रिकॉर्ड बनाया, लेकिन इसका कलेक्शन दो साल में 2070 करोड़ रुपये था। पहले साल दंगल ने 716 करोड़ कमाए और बाद में बाकी की कमाई शामिल हुई।

    4. प्रभास और अल्लू अर्जुन की धमाकेदार कमाई

    अक्षय के करीब हैं प्रभास और अल्लू अर्जुन, जिन्होंने साउथ फिल्मों में बॉक्स ऑफिस धमाका किया।

    बाहुबली 2 (प्रभास): 1788.60 करोड़
    पुष्पा 2 (अल्लू अर्जुन): 1742.10 करोड़
    सिर्फ दो साल में इन फिल्मों ने दर्शकों और निवेशकों दोनों का मन जीत लिया।

    साल 2023 बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री के लिए कमाई और रिकॉर्ड्स का साल साबित हुआ। शाहरुख खान ने 2685 करोड़ की कमाई के साथ सबसे आगे बढ़कर साबित किया कि वे बॉक्स ऑफिस किंग हैं। अक्षय खन्ना ने भी दो फिल्मों में 2100 करोड़ रुपये कमाकर दर्शकों को हैरान कर दिया। प्रभास और अल्लू अर्जुन ने साउथ फिल्मों के दम पर भी बड़े रिकॉर्ड बनाकर बॉक्स ऑफिस की ताकत दिखाई।

  • ईरान युद्ध थमने से क्रिप्टो मार्केट में तेजी…. 3 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंचे Bitcoin के रेट

    ईरान युद्ध थमने से क्रिप्टो मार्केट में तेजी…. 3 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंचे Bitcoin के रेट


    वाशिंगटन।
    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-America War) में सीजफायर के बाद बिटकॉइन की कीमतें (Bitcoin Price) तीन हफ्ते के हाई पर पहुंच गई हैं। न्यूयॉर्क ट्रेडिंग (New York Trading) में बिटकॉइन 5% चढ़कर 72,841 डॉलर तक पहुंच गया, जो 18 मार्च के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, बाद में इसमें हल्की मुनाफावसूली भी देखने को मिली।

    ईथर और अन्य क्रिप्टो में भी उछाल: तेजी सिर्फ बिटकॉइन तक सीमित नहीं रही। ईथेरियम भी 7.5% उछलकर 2,273 डॉलर तक पहुंच गया। यानी पूरे क्रिप्टो मार्केट में निवेशकों का भरोसा लौटा है।

    सीजफायर से बाजार में आई राहत
    डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले रोकने के फैसले ने ग्लोबल मार्केट में पॉजिटिव माहौल बना दिया। इसके बाद शेयर बाजारों में तेजी आई और कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 95 डॉलर से नीचे आ गईं। होर्मूज स्ट्रेट के फिर से खुलने की उम्मीद ने निवेशकों का डर कम किया, जिससे जोखिम वाले ऐसेट्स जैसे क्रिप्टो में खरीदारी बढ़ी।


    खतरा अभी बाकी: टूट सकता है ट्रेंड

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह तेजी स्थायी नहीं भी हो सकती। अगर सीजफायर टूटता है, तो बिटकॉइन फिर से गिरकर 66,000 डॉलर तक जा सकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से बिटकॉइन 60,000 से 75,000 डॉलर के बीच ही झूल रहा है।


    शॉर्ट सेलर्स को झटका

    तेजी ने उन ट्रेडर्स को नुकसान पहुंचाया, जो गिरावट पर दांव लगा रहे थे। डेटा के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 250 मिलियन डॉलर से ज्यादा की शॉर्ट पोजीशन खत्म हो गईं। ब्लूमबर्ग ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया है कि अगर कीमत 73,500 डॉलर के ऊपर टिकती है, तो बिटकॉइन 80,000 डॉलर तक जा सकता है। ब्लॉकचेन डेटा के अनुसार, अभी स्पॉट मार्केट में मांग उतनी मजबूत नहीं है।

    हालांकि, यूएस में लिस्टेड स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स में सोमवार को $471.3 मिलियन का नेट इनफ्लो हुआ। यह पिछले हफ़्ते के $22.3 मिलियन के इनफ्लो से काफी अधिक था। यह संस्थागत निवेशकों की वापसी का शुरुआती संकेत हो सकता है।


    राहत की रैली, पर नजर जरूरी:

    सीजफायर ने क्रिप्टो मार्केट को मजबूती दी है, लेकिन आगे की दिशा पूरी तरह जियो-पॉलिटिकल हालात और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी। फिलहाल, बाजार में तेजी है, लेकिन जोखिम भी बरकरार है।

  • हिन्दी का साउथ में भी दबदबा…. कर्नाटक में 93% छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में किया चयन

    हिन्दी का साउथ में भी दबदबा…. कर्नाटक में 93% छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में किया चयन


    नई दिल्ली।
    हिंदी भाषा (Hindi Language) को लेकर अकसर ही देश में एक वर्ग नॉर्थ बनाम साउथ की डिबेट (North vs. South debate) चलाता रहा है। तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (Chief Minister MK Stalin) तो कई बार केंद्र सरकार पर आरोप लगा चुके हैं कि हिंदी थोपने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन यह भी सच है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंदी स्वाभाविक रूप से बड़ी आबादी द्वारा ना सिर्फ स्वीकार की जा रही है बल्कि उसके महत्व को समझते हुए सीखने के प्रयास भी हो रहे हैं। इसका उदाहरण कर्नाटक स्टेट बोर्ड के नतीजों ने भी प्रस्तुत किया है। कर्नाटक स्कूल बोर्ड के छात्रों में से कुल 93 फीसदी ऐसे रहे हैं, जिन्होंने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी का चयन किया।

    नई शिक्षा नीति के तहत त्रिभाषा फॉर्मूला लागू किया है। इसके अनुसार छात्र अंग्रेजी सीखेंगे। इसके अलावा एक स्थानीय भाषा वे अपने अनुसार चुन सकते हैं। फिर वे तीसरी भाषा के तौर पर अन्य किसी भी भाषा को स्वीकार कर सकते हैं। कर्नाटक में 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में चुना है। कर्नाटक बोर्ड में कुल 8.1 लाख छात्रों ने तीसरी भाषा को चुना है और इनमें से 7.5 लाख लोगों ने हिंदी का ही विकल्प पसंद किया है। कोंकणी, मराठी, उर्दू, अरबी जैसी भाषाओं को भी कुछ छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में चुना है। इस आंकड़े ने हिंदी भाषा की लोकप्रियता को स्थापित किया है।

    हिंदी को लेकर अमित शाह ने जब कहा था कि यह देश की संपर्क भाषा है और इसका विस्तार जरूरी है तो तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने विरोध किया था। उनका कहना था कि हिंदी को थोपा जा रहा है, जबकि देश में तमिल सबसे पुरानी भाषा है। तमिलनाडु के लोगों का मानना है कि उनकी भाषा दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है।


    त्रिभाषा नीति से विरोध खत्म करने की कोशिश, सबको मिलेगा महत्व

    त्रिभाषा नीति के जरिए सरकार ने इसी विरोधाभास को खत्म करने का प्रयास किया है। इसके अलावा भाषा के चलते पैदा होने वाले विवादों में भी इससे कमी आएगी। इस नीति के तहत सरकार ने हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही स्थानीय भाषाओं को भी प्रोत्साहित करने का प्रयास किया है। ऐसे में यदि कर्नाटक में 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी भाषा को तीसरे विकल्प के तौर पर चुना तो यह अच्छी खबर है। पहले जब होम मिनिस्टर अमित शाह ने हिंदी भाषा को लेकर बयान दिया था तो एमके स्टालिन ने आपत्ति जताई थी। हालांकि कुछ सर्वे दावा करते रहे हैं कि तमिलनाडु में भी हिंदी का तेजी से प्रसार हो रहा है।

  • असम के CM के गोमांस वाले बयान पर गरमाई सियासत… अखिलेश बोले- 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'

    असम के CM के गोमांस वाले बयान पर गरमाई सियासत… अखिलेश बोले- 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'


    दिसपुर।
    असम विधानसभा चुनावों (Assam Assembly elections.) के लिए प्रचार अभियान समाप्त हो गया है। मतदान से महज कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के ‘गोमांस सेवन’ पर दिए गये बयान पर राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है। सरमा ने कहा कि गोमांस खाने में कोई रोक नहीं है, लेकिन इसे निजी जगहों तक सीमित रखना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुस्लिम भाई गोमांस खाते हैं, हम उन्हें मना नहीं कर रहे हैं। हम बस यही कहते हैं कि इसे घर के अंदर खाएं, सार्वजनिक स्थानों पर नहीं। मंदिरों के 5 किलोमीटर दायरे में या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर इसका सेवन नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान से सियासी बवाल तेज हो गया है। विपक्ष इसे भाजपा (BJP) की दोहरी नीति बता रहा है।

    दरअसल, यह बयान मुख्यमंत्री के पिछले कई बयानों से बिल्कुल अलग है। कुछ दिन पहले जोरहाट में चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा था कि गाय का मांस खाने वालों को वह नहीं बख्शेंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने तब कहा था कि असम में पशु संरक्षण कानून है, सार्वजनिक रूप से गोमांस खाने पर 3 साल की जेल हो सकती है। मैं गाय का मांस खाने वालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराऊंगा।

    विपक्ष ने बीजेपी के खिलाफ खोला मोर्चा
    मुख्यमंत्री के इस बयान पर विपक्षी दलों ने हमलावर रुख अपनाया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, कि भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ। उन्होंने हिमंता के बयान वाला पोस्टर शेयर करते हुए भाजपा पर निशाना साधा।

    वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) ने भी भाजपा पर तीखा प्रहार किया। पार्टी ने कहा कि ‘गाय माता’ भाजपा के लिए सिर्फ चुनावी हथकंडा है, जिसका इस्तेमाल दंगे और अशांति फैलाने के लिए किया जाता है। आप ने आरोप लगाया कि उत्तर भारत में भाजपा और उसके समर्थक ‘ रक्षा’ के नाम पर हत्याएं करते हैं, वहीं असम के उनके नेता कह रहे हैं कि गोमांस खाओ लेकिन घर में।

    पुराने बयान और कानून का प्रावधान
    बता दें कि इस महीने के शुरू में हिमंता बिस्वा सरमा ने असम जातीय परिषद (एजेपी) की उम्मीदवार कुंकी चौधरी की मां सुजाता गुरुंग चौधरी पर गोमांस खाने और ‘राष्ट्र-विरोधी व सनातनी-विरोधी’ होने का आरोप लगाया था। उन्होंने चुनाव के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। एजेपी ने इन आरोपों को फर्जी और राजनीतिक साजिश बताया है।

    असम पशु संरक्षण अधिनियम, 2021 गायों के वध पर पूर्ण रोक नहीं लगाता, लेकिन सार्वजनिक स्थानों, रेस्तरां और सामुदायिक कार्यक्रमों में गोमांस के सेवन पर प्रतिबंध है। राज्य में दुकानों से गोमांस खरीदा जा सकता है और निजी स्थानों पर इसका सेवन किया जा सकता है। हाल ही में कैबिनेट ने होटलों और सार्वजनिक स्थानों में गोमांस पर और सख्ती की है।

  • छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने का आदेश…. बाम्बे हाईकोर्ट ने गोवा सरकार को लगाई फटकार

    छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने का आदेश…. बाम्बे हाईकोर्ट ने गोवा सरकार को लगाई फटकार


    मुम्बई।
    बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए गोवा (Goa) में स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) की एक प्रतिमा को गिराने का आदेश दे दिया है। इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई है। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने अवैध रूप से स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को हटाने का आदेश देते हुए कहा कि मोरमुगाओ पोर्ट प्राधिकरण (Mormugao Port Authority) की जमीन पर अतिक्रमण रोकने में सरकार ने गंभीर लापरवाही दिखाई है।

    जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित एस जमसांडेकर की पीठ ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुरक्षा की व्यवस्था करें, ताकि प्रतिमा को हटा कर पहले पहले जैसा बनाया जा सके। इससे पहले मोरमुगाओ पोर्ट प्राधिकरण ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया था कि उसकी जमीन पर जबरन घुसकर स्थायी प्रतिमा स्थापित कर दी गई, जबकि इस संबंध में पहले ही पुलिस और अन्य अधिकारियों को शिकायत दी गई थी।


    क्या बोला हाईकोर्ट?

    इसके बाद हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक बड़े बंदरगाह की संपत्ति पर सीधा अतिक्रमण है और राज्य सरकार मूकदर्शक बनी रही। अदालत ने यहां तक कहा कि ऐसा लगता है कि अधिकारियों ने अतिक्रमण करने वालों के साथ परोक्ष रूप से सहयोग किया है। अदालत ने पुलिस के हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय पुलिस ने पहले ही कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई थी, इसके बावजूद कार्यकारी मजिस्ट्रेट, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों ने 19 फरवरी को प्रतिमा के उद्घाटन को रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।


    सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

    HC ने यह भी नोट किया कि उद्घाटन कार्यक्रम में स्थानीय विधायक संकल्प आमोणकर और अन्य राजनीतिक हस्तियां मौजूद थीं। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन और स्थानीय नेताओं के बीच किसी तरह की समझ बनी हुई थी और पोर्ट की जमीन की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि इसी जमीन पर प्रतिमा लगाने के लिए पहले विधायक की ओर से अनुमति मांगी गई थी, जिसे पोर्ट प्राधिकरण ने केंद्र सरकार की भूमि नीति के तहत खारिज कर दिया था।

    HC ने राज्य सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि पोर्ट प्राधिकरण को सार्वजनिक परिसर कानून के तहत ही कार्रवाई करनी चाहिए या अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर रहना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

  • राका के गहरे अर्थ और अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोग से तैयार हो रही एक वैश्विक सिनेमाई पहचान..

    राका के गहरे अर्थ और अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोग से तैयार हो रही एक वैश्विक सिनेमाई पहचान..


    नई दिल्ली:  भारतीय फिल्म जगत के दो सबसे प्रभावशाली सितारों के बीच बढ़ते आपसी तालमेल ने मनोरंजन की दुनिया में एक नई हलचल पैदा कर दी है। बॉलीवुड के शीर्ष अभिनेता ने दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार की आगामी फिल्म के प्रति अपना विशेष समर्थन और उत्साह व्यक्त किया है। राका शीर्षक से बन रही इस फिल्म को लेकर जिस तरह की चर्चाएं गर्म हैं, उसने प्रशंसकों के बीच बेसब्री को चरम पर पहुंचा दिया है। एक प्रतिष्ठित मंच पर की गई इस सराहना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में भारतीय सिनेमा की सीमाएं पूरी तरह समाप्त होने वाली हैं और कला का एक वैश्विक स्वरूप सामने आने वाला है।

    राका शब्द का अर्थ और इसके पीछे का रहस्य फिल्म की सबसे आकर्षक कड़ी माना जा रहा है। सामान्यतः इसे पूर्ण चंद्रमा की आभा से जोड़ा जाता है, लेकिन फिल्म की कहानी में इसके संकेत एक शक्तिशाली और रहस्यमयी नायक की ओर इशारा करते हैं। इस परियोजना का निर्देशन एक ऐसे फिल्मकार कर रहे हैं जिन्होंने हाल के वर्षों में अपनी अनूठी शैली और भव्य प्रस्तुति से बॉक्स ऑफिस के समीकरण बदल दिए हैं। फिल्म के बजट को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, वह इसे देश की सबसे महंगी और महत्वाकांक्षी फिल्मों की श्रेणी में खड़ा करती है। निर्माण कार्य में प्रयुक्त हो रही तकनीक और विशाल स्तर पर तैयार किए गए सेट इस बात का प्रमाण हैं कि दर्शकों को पर्दे पर एक अभूतपूर्व अनुभव मिलने वाला है।

    इस फिल्म के प्रति बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार द्वारा दिखाया गया उत्साह न केवल उनके उदार व्यक्तित्व को दर्शाता है, बल्कि यह फिल्म उद्योग में बढ़ते भाईचारे का भी प्रतीक है। फिल्म जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि जब उत्तर और दक्षिण की प्रतिभाएं इस स्तर पर एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाती हैं, तो उसका सीधा लाभ फिल्म की पहुंच और उसकी सफलता को मिलता है। इस बड़े बजट की फिल्म की पटकथा को बहुत बारीकी से तैयार किया गया है, जिसमें उच्च स्तरीय एक्शन के साथ-साथ भावनाओं का भी गहरा पुट देखने को मिलेगा। फिल्म निर्माण में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा रहा है और विजुअल इफेक्ट्स पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    सिनेमा के दीवानों के लिए यह फिल्म किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होने वाली है। जिस तरह से प्रमुख कलाकारों ने इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी सकारात्मक राय रखी है, उससे फिल्म की साख में भारी इजाफा हुआ है। बड़े निवेश और बेहतरीन निर्देशन के संगम से तैयार हो रही यह फिल्म निश्चित रूप से आने वाले समय में बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए मानक स्थापित करेगी। फिलहाल सभी की निगाहें इस फिल्म की पहली झलक और इसकी रिलीज की तारीख पर टिकी हैं, क्योंकि यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

    भारतीय सिनेमा के दो बड़े सितारों के बीच बढ़ते सहयोग और निर्देशक की भव्य बजट वाली फिल्म राका के अर्थ एवं उसकी तकनीकी विशेषताओं पर केंद्रित एक विशेष लेख।

  • घबराहट और बेचैनी का असली कनेक्शन, दिल और पेट के बीच संबंध

    घबराहट और बेचैनी का असली कनेक्शन, दिल और पेट के बीच संबंध


    नई दिल्ली।आजकल कई लोग अचानक बेचैनी, घबराहट और दिल की तेज़ धड़कन जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। आम धारणा यह है कि यह सब सिर्फ मानसिक तनाव या हृदय रोगों की वजह से होता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है। असल में, पेट और पाचन संबंधी गड़बड़ियां इस तरह के लक्षण पैदा कर सकती हैं। अगर पाचन ठीक नहीं है, तो गैस बनना, पेट में भारीपन महसूस होना या कब्ज जैसी समस्याएं सीधे दिल और मानसिक स्थिति पर असर डाल सकती हैं।

    पाचन की गड़बड़ी और हृदय की प्रतिक्रिया

    जब पेट में अपच या गैस बनती है, तो इसका दबाव सीने और हृदय पर पड़ता है। कई बार लोग इसे हार्ट अटैक का संकेत मानकर घबरा जाते हैं। आयुर्वेद में भी माना गया है कि मन और पेट का गहरा संबंध है। अगर पेट स्वस्थ नहीं है, तो मन अशांत रहता है और दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज़ हो सकती है। साथ ही, बार-बार घबराहट, अपच, पेट फूलना और खट्टी डकार जैसी समस्याएं शरीर में टॉक्सिन बनने का संकेत देती हैं।

    टॉक्सिन और कब्ज: स्वास्थ्य पर गहरा असर

    शरीर में टॉक्सिन बढ़ने से पाचन विकार तेजी से सामने आते हैं। इससे कब्ज, गैस और पेट फूलने की समस्या बार-बार होती रहती है। लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार यह समस्या रहने पर बेचैनी, चिंता और दिल की तेज़ धड़कन जैसी लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे मामलों में शुद्धिकरण और पाचन सुधार बेहद जरूरी है।

    गलत जीवनशैली और पाचन समस्या

    आम तौर पर यह समस्या उन लोगों में ज्यादा दिखाई देती है, जो:

    देर रात भारी भोजन करते हैं।
    खाने के तुरंत बाद टहलने के बजाय बैठ जाते हैं।
    ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी भोजन पसंद करते हैं।
    अधिक मानसिक तनाव या व्यस्त जीवनशैली अपनाते हैं।
    नियमित रूप से अपने पेट की सफाई पर ध्यान नहीं देते।

    ये सभी आदतें पाचन क्रिया को मंद करती हैं और शरीर में टॉक्सिन बढ़ाकर बेचैनी और घबराहट की समस्या को जन्म देती हैं।

    सरल उपाय: पेट स्वस्थ, मन शांत

    इस समस्या से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:

    समय पर खाना खाएं – नियमित भोजन से पाचन सही रहता है।
    खाने के बाद हल्की टहल – गैस और अपच कम होती है।
    देर रात भारी भोजन से बचें – रात का हल्का भोजन पाचन को आसान बनाता है।
    रात को सौंफ और मिश्री – पेट साफ रखने और कब्ज दूर करने में मदद मिलती है।
    पर्याप्त पानी पिएं – शरीर हाइड्रेट रहता है और टॉक्सिन बाहर निकलते हैं।
    हल्का और संतुलित भोजन – ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाने से बचें।
    इन उपायों से न केवल पेट स्वस्थ रहेगा, बल्कि घबराहट, बेचैनी और दिल की असामान्य धड़कन जैसी समस्याएं भी दूर होंगी।

    पेट और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। बार-बार बेचैनी और घबराहट महसूस होने पर सिर्फ तनाव या हृदय की समस्या मानना गलत है। पाचन की सही देखभाल और नियमित जीवनशैली अपनाकर आप इन लक्षणों को कम कर सकते हैं। याद रखें, स्वस्थ पेट = स्वस्थ मन = स्वस्थ दिल।

  • कलियुग की बाधाओं से मुक्त वह दिव्य स्थान जहां प्रकृति और भक्ति के अद्भुत संगम से जीवंत होती है प्राचीन ऋषि परंपरा

    कलियुग की बाधाओं से मुक्त वह दिव्य स्थान जहां प्रकृति और भक्ति के अद्भुत संगम से जीवंत होती है प्राचीन ऋषि परंपरा


    नई दिल्ली /वृंदावन। श्रीधाम वृंदावन की पावन धरा पर एक ऐसा दिव्य स्थान स्थित है जिसे बाहरी दुनिया के शोर और आधुनिकता की चकाचौंध स्पर्श तक नहीं कर पाई है। श्री टटिया स्थान के नाम से विख्यात यह क्षेत्र अध्यात्म का वह केंद्र है जिसके बारे में यह अटूट विश्वास है कि यहां आज तक कलियुग का प्रवेश नहीं हो सका है। यमुना तट के समीप स्थित इस स्थान की सीमा में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को एक अलग ही लोक का अनुभव होता है जहां समय जैसे सदियों पहले ठहर गया हो। यहां की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस पूरे परिसर में कहीं भी सीमेंट या कंक्रीट का निर्माण नहीं है और आज के दौर में भी यहां की जमीन पूरी तरह कच्ची और प्राकृतिक है।

    इस स्थान का इतिहास और परंपरा संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास जी से जुड़ी है जिन्होंने बांके बिहारी जी को अपनी भक्ति से प्रकट किया था। यहां के परिवेश में आज भी वही प्राचीन सादगी देखने को मिलती है जो भारतीय ऋषि परंपरा का मूल आधार रही है। परिसर के भीतर ऊंचे ऊंचे वृक्षों की घनी छांव और चारों ओर फैली प्राकृतिक हरियाली मन को अपार शांति प्रदान करती है। आधुनिक सुख सुविधाओं और विद्युत उपकरणों का त्याग कर यहां रहने वाले संत और साधक पूरी तरह ईश्वर की भक्ति और भजन में लीन रहते हैं। यहां का वातावरण इतना शांत है कि केवल पक्षियों का कलरव और भक्तों के मधुर संकीर्तन की ध्वनियां ही कानों में गूंजती हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान की मिट्टी और कण कण में दिव्य ऊर्जा का वास है। यहां आने वाले भक्त किसी भी प्रकार के दिखावे या आडंबर से दूर रहते हैं। टटिया स्थान में प्रकृति का संरक्षण और जीव सेवा सर्वोपरि है। यहां पेड़ों से गिरी सूखी लकड़ियों का ही उपयोग किया जाता है और किसी भी जीवित वृक्ष को क्षति पहुंचाना वर्जित है। सादगी का आलम यह है कि यहां के निवासी और साधु संत जमीन पर ही बैठकर अपनी साधना पूर्ण करते हैं। यह स्थान उन लोगों के लिए एक जीवंत उदाहरण है जो भौतिकता की दौड़ से थककर वास्तविक शांति और आत्मिक आनंद की खोज में भटक रहे हैं।

    अनुशासन और मर्यादा के मामले में यह स्थान अत्यंत कठोर नियमों का पालन करता है। परिसर के भीतर मोबाइल फोन का प्रयोग या शोर शराबा करना पूरी तरह वर्जित है ताकि साधकों की एकाग्रता में कोई बाधा न आए। यहां की स्वच्छता और सात्विकता को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं आज भी अदृश्य रूप में यहां संचालित हो रही हों। वृंदावन के अन्य व्यावसायिक केंद्रों के विपरीत यह स्थान अपनी मौलिकता और प्राचीनता को संजोए हुए है जो न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है बल्कि भारतीय संस्कृति के संरक्षण का एक सशक्त स्तंभ भी है।