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  • Allu Arjun के जन्मदिन पर रिलीज हुआ ‘Raaka’ का पोस्टर, नए अवतार में दिखे एक्टर

    Allu Arjun के जन्मदिन पर रिलीज हुआ ‘Raaka’ का पोस्टर, नए अवतार में दिखे एक्टर


    नई दिल्ली।अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) ने अपने जन्मदिन पर फैंस को खास तोहफा दिया। उनकी नई फिल्म का नाम Raaka घोषित किया गया और साथ ही फिल्म का पहला लुक पोस्टर भी जारी किया गया। इससे पहले इस फिल्म को ‘AA22xA6’ के नाम से जाना जा रहा था।

    फिल्म को मिला नया नाम और पोस्टर

    पोस्टर में अल्लू अर्जुन का अवतार बेहद चौंकाने वाला और अलग है। इस किरदार में उनके हाथ भेड़िए जैसी फर से ढके हुए हैं और बड़े नुकीले पंजे नजर आ रहे हैं। उनके चेहरे पर तीखी, काजल वाली आंखें, आधे गंजे और रफ हेयरस्टाइल ने इस लुक को और भी रहस्यमयी बना दिया है।

    दीपिका पादुकोण का सोशल मीडिया अपडेट

    फिल्म का पोस्टर दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया। इससे साफ हो गया कि इस फिल्म में अल्लू अर्जुन के साथ दीपिका पादुकोण भी नजर आएंगी।

    फिल्म का बजट 700-800 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है और इसे सन पिक्चर्स प्रोड्यूस कर रही है। टीम जल्द ही मुंबई के स्टूडियो में नया शूटिंग शेड्यूल शुरू करेगी और प्रोडक्शन पूरे साल जारी रहने की उम्मीद है।

    आलू अर्जुन का करियर और नई फिल्म की उम्मीद

    अल्लू अर्जुन ने 2003 में फिल्म गंगोत्री से करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया, जैसे आर्या, बनी, देशमुदुरु, सरैनोडु और अला वैकुंठपुरमुलु।

    पुष्पा: द राइज फिल्म में उनके किरदार और स्टाइल को दर्शकों ने खूब सराहा। इस फिल्म ने उन्हें पूरे भारत में सुपरस्टार बना दिया। अब उनकी नई फिल्म Raaka भी लोगों का ध्यान खींच रही है और उनके अनोखे अवतार ने फैंस के उत्साह को और बढ़ा दिया है।

  • 9 से 23 अप्रैल तक प्रदेश में 8वां पोषण पखवाड़ा, बच्चों के मस्तिष्क विकास पर खास जोर

    9 से 23 अप्रैल तक प्रदेश में 8वां पोषण पखवाड़ा, बच्चों के मस्तिष्क विकास पर खास जोर

    भोपाल। मध्यप्रदेश में 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक 8वां पोषण पखवाड़ा मनाया जाएगा जिसमें इस वर्ष बच्चों के मस्तिष्क विकास को केंद्र में रखते हुए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस बार पखवाड़े की थीम जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क का अधिकतम विकास निर्धारित की गई है जो बाल विकास के सबसे महत्वपूर्ण चरण को रेखांकित करती है।

    पोषण पखवाड़े का शुभारंभ 9 अप्रैल को प्रदेशभर के आंगनवाड़ी केन्द्रों और समुदाय स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जाएगा। इस दौरान “पोषण पर चर्चा” कार्यक्रम आयोजित कर आम लोगों को मातृ एवं शिशु पोषण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। अभियान का उद्देश्य परिवार और समाज को बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के प्रति जागरूक बनाना है।

    इस पखवाड़े में गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जन्म से तीन वर्ष तक के बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए प्रारंभिक प्रोत्साहन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा जबकि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही परिवारों को बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने और उनके समग्र विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार मानव मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास जीवन के पहले छह वर्षों में ही हो जाता है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए इस अभियान में ऐसे व्यवहारों और गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को मजबूत बनाते हैं।

    पोषण पखवाड़े के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनमें स्वास्थ्य शिविर पोषण संबंधी कहानी वाचन दादी-नानी के अनुभव साझा कार्यक्रम स्थानीय खाद्य सामग्री से पौष्टिक व्यंजन प्रतियोगिता और जंक फूड के दुष्प्रभावों पर जागरूकता रैली शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों के विकासात्मक मील के पत्थरों की पहचान माता-पिता के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल सत्र और आंगनवाड़ी केन्द्रों को सशक्त बनाने के प्रयास भी किए जाएंगे।

    22 अप्रैल को पंखुड़ी पोर्टल के माध्यम से आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए सामुदायिक सहयोग और दान अभियान चलाया जाएगा जबकि 23 अप्रैल को पोषण मेला आयोजित कर जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

    प्रदेश के सभी जिलों में इस अभियान के तहत रैलियां पोषण वाटिका निर्माण प्रश्नोत्तरी पोस्टर और नारा लेखन प्रतियोगिता तथा सोशल मीडिया अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही इन गतिविधियों की जानकारी पोषण अभियान के जन-आंदोलन डैशबोर्ड पर दर्ज की जाएगी जिससे इसकी निगरानी और प्रभाव का आकलन किया जा सके।

    इस अभियान को सफल बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य पंचायत जनजातीय कार्य नगरीय प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग मिलकर काम करेंगे। यह समन्वित प्रयास सुनिश्चित करेगा कि पोषण पखवाड़ा केवल एक कार्यक्रम न होकर एक जन-आंदोलन के रूप में सामने आए।

    कुल मिलाकर यह पहल प्रदेश में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और स्वस्थ समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जिसमें परिवार समाज और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी से सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जाएगा।

  • एमपी में भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का बड़ा एक्शन, इंदौर में 2 इंजीनियर और नरसिंहपुर में बाबू गिरफ्तार

    एमपी में भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का बड़ा एक्शन, इंदौर में 2 इंजीनियर और नरसिंहपुर में बाबू गिरफ्तार


    नरसिंहपुर इंदौर। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही है। आए दिन सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जा रहे हैं जिससे शासन-प्रशासन की छवि पर सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामले इंदौर और नरसिंहपुर से सामने आए हैं जहां लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    इंदौर में लोकायुक्त टीम ने लोक निर्माण विभाग के दो इंजीनियरों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। जानकारी के अनुसार बालकुमार जैन और धीरेंद्र नीमा नामक इंजीनियरों ने एक भुगतान के बदले 6 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने योजना बनाकर दोनों को 90 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया। कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

    वहीं नरसिंहपुर में भी जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर पालिका में पदस्थ बाबू संजय तिवारी को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि बाबू ने पेवर ब्लॉक लगाने वाले एक ठेकेदार से बिल भुगतान के एवज में 38 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया और आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया।

    दोनों मामलों में लोकायुक्त पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

    प्रदेश में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह साफ होता है कि भ्रष्टाचार की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है। आम नागरिकों और ठेकेदारों को अपने काम के लिए रिश्वत देने पर मजबूर होना पड़ता है जिससे सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। हालांकि लोकायुक्त की सक्रियता से ऐसे मामलों का खुलासा हो रहा है लेकिन इन घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है। डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देकर और भुगतान व्यवस्था को पूरी तरह ऑनलाइन बनाकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    फिलहाल इंदौर और नरसिंहपुर में हुई इन कार्रवाइयों ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती जारी है लेकिन इसे जड़ से खत्म करने के लिए लगातार निगरानी और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई आम लोगों के लिए राहत की खबर जरूर है लेकिन साथ ही यह भी दर्शाती है कि अभी इस दिशा में लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

  • एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब फेल ही नहीं पास छात्र भी सुधार सकेंगे अंक, ‘द्वितीय परीक्षा’ से मिलेगा दूसरा मौका

    एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब फेल ही नहीं पास छात्र भी सुधार सकेंगे अंक, ‘द्वितीय परीक्षा’ से मिलेगा दूसरा मौका


    नई दिल्ली/भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल म.प्र. भोपाल ने इस वर्ष से परीक्षा प्रणाली में अहम बदलाव करते हुए पारंपरिक पूरक परीक्षा व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर अब द्वितीय परीक्षा शुरू की जा रही है जिसमें फेल और पास दोनों ही प्रकार के छात्र शामिल हो सकेंगे। यह परीक्षा 7 मई 2026 से आयोजित होगी।

    नई व्यवस्था के तहत छात्र केवल अनुत्तीर्ण विषयों के लिए ही नहीं बल्कि अपने अंक सुधारने के उद्देश्य से भी किसी विषय में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। बोर्ड का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों को अपने परिणाम बेहतर करने का अधिक अवसर मिलेगा।

    पहले की व्यवस्था में हाईस्कूल 10वीं में अधिकतम दो विषय और हायर सेकेंडरी 12वीं में एक विषय में फेल छात्र ही पूरक परीक्षा दे सकते थे। लेकिन अब इस नई द्वितीय परीक्षा प्रणाली में सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान किया गया है।

    नियमों के अनुसार जो छात्र किसी विषय में फेल हैं उनके लिए उस विषय की परीक्षा देना अनिवार्य होगा। वहीं पास छात्र अपनी इच्छा से किसी भी विषय में शामिल होकर अपने अंक सुधार सकते हैं। इसे छात्रों के लिए राहतभरा कदम माना जा रहा है।

    जारी टाइमटेबल के मुताबिक 12वीं की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित होगी जबकि 10वीं की परीक्षा 7 मई से 19 मई 2026 के बीच होगी। सभी परीक्षाएं निर्धारित केंद्रों पर कराई जाएंगी।

    बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि द्वितीय परीक्षा के बाद जारी अंकसूची मुख्य परीक्षा के समान ही होगी। छात्र के दोनों परिणामों में से जो बेहतर होगा वही अंतिम रूप से मान्य किया जाएगा जिससे उन्हें सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।

    द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के सात दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.mpbse.nic.in पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

  • बड़वानी के मोहिपुरा में महसूस किए गए भूकंप के झटके, 3.4 तीव्रता दर्ज, घरों से बाहर निकले लोग

    बड़वानी के मोहिपुरा में महसूस किए गए भूकंप के झटके, 3.4 तीव्रता दर्ज, घरों से बाहर निकले लोग


    बड़वानी । बड़वानी जिले के अंजड़ थाना क्षेत्र स्थित ग्राम मोहिपुरा में बुधवार दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.4 दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि करीब दो मिनट तक धरती में कंपन होता रहा, जिससे ग्रामीणों में घबराहट फैल गई और लोग तुरंत अपने घरों से बाहर निकल आए।

    गांव के निवासी लोकेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि वे दोपहर में अपने घर पर सो रहे थे, तभी अचानक तेज झटका महसूस हुआ। समय देखा तो 12:48 बजे थे। इसके बाद वे तुरंत बाहर आए और आसपास के लोगों से पूछताछ की, तब पता चला कि यह भूकंप के झटके थे। उन्होंने कहा कि इस तरह का अनुभव गांव में पहली बार हुआ है।

    भूकंप के दौरान ग्रामीणों ने अपने घरों में रखे बर्तन, फर्नीचर और पंखों को हिलते हुए देखा। इंदिरा सागर पावर स्टेशन की भूकंप वेधशाला और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की वेबसाइट पर भी इसी समय भूकंप दर्ज किया गया है।

    जिला मुख्यालय पर संचालित भूकंप केंद्र की सिस्मोमीटर मशीन में भी इस हलचल को 3.4 रिक्टर स्केल पर रिकॉर्ड किया गया। केंद्र के ऑपरेटर हुकुम कुमार के अनुसार, एमईक्यू माइक्रोअर्थक्विक मशीन 24 घंटे सक्रिय रहती है और नर्मदा नगर पुनासा, खंडवा स्थित सेंटर से प्रतिदिन सुबह रिपोर्ट जारी की जाती है।

    उन्होंने बताया कि बुधवार दोपहर अंजड़ क्षेत्र में दर्ज इस भूकंपीय हलचल की तीव्रता 3.4 रही, जिसे एमईक्यू मशीन ने रिकॉर्ड किया। यह मशीन लगभग 40 से 50 किलोमीटर के दायरे में जमीन की हलचल को मापने में सक्षम है।

  • एक्ट्रेस Zareen Khan की मां का हुआ निधन, लंबे समय से बीमार थीं Parveen Khan

    एक्ट्रेस Zareen Khan की मां का हुआ निधन, लंबे समय से बीमार थीं Parveen Khan


    नई दिल्ली। एक्ट्रेस जरीन खान (Zareen Khan) की मां Parveen Khan का निधन हो गया है। वह काफी लंबे समय से बीमार थीं और आज बुधवार, 8 अप्रैल को ही उन्होंने आखिरी सांस ली। जरीन खान की टीम ने उनकी मां के निधन की खबर की पुष्टि की। जरीन खान की मां पिछले कुछ साल में कई बार गंभीर रूप में बीमार हुईं और अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा था। वहीं इस बार उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा दिया और एक्ट्रेस को अकेला छोड़ गईं।

    टीम ने जारी किया ऐसा स्टेटमेंट
    इस खबर की पुष्टि तब हुई जब एक्ट्रेस की टीम ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके इसके बारे में सबको जानकारी दी। जरीन खान के मैनेजर पीयूष जैन ने स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें कहा, ‘सूचित किया जाता है कि हमारी प्रिय श्रीमती परवीन खान, जरीन खान और सना खान की मां का 8 अप्रैल को निधन हो गया। वह शांतिपूर्वक स्वर्ग सिधार गईं।’ जैसे ही ये खबर सामने आई फैंस और बॉलीवुड के गलियारों में मातम छा गया है।

    मुंबई के वर्सोवा में हो गया अंतिम संस्कार
    बता दें सुबह 10 बजे मुंबई के वर्सोवा में जरीन खान की मां का अंतिम संस्कार कर दिया गया। एक्ट्रेस जरीन कई बार सोशल मीडिया पर अपनी मां के बारे में बात करती नजर आईं। वह फैंस से उनके लिए दुआएं करने को कहती थीं और हाल बताती थीं। जरीन ने मां की देखभाल के लिए कई बार सोशल मीडिया से ब्रेक लिया था।

    पहले ही छोड़ कर चले गए थे पिता
    जरीन खान ने एक एक इंटरव्यू में बताया था कि, उन्होंने और उनके परिवार ने काफी कुछ देखा हैं। उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया था कि, मां और छोटी बहन का ख्याल रखने के लिए उन्हें स्कूल के बाद सीधे नौकरी करनी पड़ी थी। एक्ट्रेस ने पिंकविला’ से बात करते हुए कहा था कि, वो एक शाम थी, जिसने हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। पापा हमें छोड़कर चले गए। हमारे पास कोई पैसे नहीं थे। एक रात हम सब परिवार के साथ थे, और अचानक मेरी मां फूट-फूट कर रोने लगीं। मैंने उन्हें शांत करने की कोशिश की और समझाया कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है, मैं सब संभाल लूंगी।

  • आरबीआई ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर रखा स्थिर, होम लोन ब्याज दरों में राहत की उम्मीद

    आरबीआई ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर रखा स्थिर, होम लोन ब्याज दरों में राहत की उम्मीद


    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने के निर्णय से होम लोन ब्याज दरों में फिलहाल स्थिरता बनी रहने की उम्मीद जताई जा रही है। इस फैसले को रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे घर खरीदने वालों और डेवलपर्स दोनों को राहत मिल सकती है। मौद्रिक नीति में यह स्थिरता ऐसे समय आई है, जब वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियां अनिश्चित बनी हुई हैं।

    रियल एस्टेट क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में स्थिरता से होम लोन की लागत नियंत्रित रहेगी, जिससे घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों को वित्तीय दबाव से कुछ राहत मिलेगी। साथ ही डेवलपर्स को भी परियोजनाओं की लागत और मांग के बीच संतुलन बनाने का अवसर मिलेगा। निर्माण लागत में लगातार हो रही वृद्धि के बावजूद स्थिर ब्याज दरें बाजार को सहारा देने में मददगार साबित हो सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्रीय बैंक का यह कदम बाजार में विश्वास बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ब्याज दरों में बार-बार उतार-चढ़ाव से जहां खरीदारों की योजनाएं प्रभावित होती हैं, वहीं स्थिर दरें उन्हें दीर्घकालिक निवेश के लिए प्रेरित करती हैं। इससे हाउसिंग सेक्टर में मांग बनी रहने की संभावना बढ़ जाती है, जो पूरे रियल एस्टेट इकोसिस्टम के लिए जरूरी है।

    हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मौजूदा स्थिति को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल प्रतीक्षा और निगरानी की रणनीति अपनाई है, लेकिन वैश्विक घटनाक्रम और महंगाई के दबाव के आधार पर आगे की नीतियों में बदलाव हो सकता है।

    इस बीच, रियल एस्टेट सेक्टर को सप्लाई चेन में बाधाओं और बढ़ती निर्माण लागत जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन परिस्थितियों का असर विशेष रूप से किफायती और मिड-इनकम हाउसिंग सेगमेंट पर पड़ सकता है, जहां मांग और लागत के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी ढांचे को देखते हुए मध्यम अवधि में इस क्षेत्र में स्थिरता और विकास की उम्मीद बनी हुई है।

    केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर 4.6 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान भी जताया है। यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था में संतुलित विकास की संभावना है, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है।
  • दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन, CSAS पोर्टल पर आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जानें

    दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन, CSAS पोर्टल पर आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जानें


    नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में एडमिशन 2026 की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। इस साल भी अंडरग्रेजुएट एडमिशन CUET UG स्कोर के आधार पर होगा। छात्र अपनी कॉलेज और कोर्स प्रेफरेंस CSAS (Common Seat Allocation System) पोर्टल के जरिए भरेंगे और इसी के आधार पर सीट अलॉटमेंट होगा।

    DU Admission 2026 की प्रक्रिया कब शुरू होगी?

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, DU में UG एडमिशन प्रक्रिया मई के तीसरे हफ्ते से शुरू हो सकती है। इसके साथ ही CSAS पोर्टल भी एक्टिव कर दिया जाएगा। छात्र CUET रिजल्ट आने के बाद इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे।

    CSAS पोर्टल क्या है?

    CSAS पोर्टल DU का ऑनलाइन एडमिशन सिस्टम है। इसमें छात्र CUET देने के बाद रजिस्ट्रेशन करेंगे। यही प्लेटफॉर्म कॉलेज और कोर्स अलॉटमेंट के लिए इस्तेमाल होता है।

    रजिस्ट्रेशन स्टेप्स:

    DU की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करें।
    पर्सनल डिटेल्स और शैक्षणिक जानकारी भरें।
    जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें।
    नया इंटरफेस खुलेगा, जिसमें कॉलेज और कोर्स प्रेफरेंस भरनी होगी।
    अंतिम चरण में फीस ऑनलाइन जमा करनी होगी।
    DU Admission प्रक्रिया के मुख्य चरण

    DU में एडमिशन तीन मुख्य चरणों में होता है:

    रजिस्ट्रेशन: छात्र CSAS पोर्टल पर लॉगिन कर रजिस्ट्रेशन करेंगे।
    प्रेफरेंस फिलिंग: छात्र अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स का चयन करेंगे।
    सीट अलॉटमेंट: CUET स्कोर, मेरिट और भरी गई प्रेफरेंस के आधार पर सीट अलॉट की जाएगी। सीट मिलने के बाद छात्रों को सीट स्वीकार कर फीस जमा करनी होगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी है।

    महत्वपूर्ण बातें
    CUET स्कोर इस साल भी एडमिशन का आधार रहेगा।
    CSAS पोर्टल पर सही समय पर रजिस्ट्रेशन और प्रेफरेंस भरना जरूरी है।
    फीस जमा करना भी पूरी तरह ऑनलाइन होगा।
    सीट अलॉटमेंट पूरी तरह मेरिट और प्रेफरेंस आधारित होगी।

  • आईपीएल 2026: डीसी के खिलाफ GT का पलड़ा भारी, दिल्ली करेगी मुकाबले में हिसाब बराबर

    आईपीएल 2026: डीसी के खिलाफ GT का पलड़ा भारी, दिल्ली करेगी मुकाबले में हिसाब बराबर


    नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 (आईपीएल 2026) के 14वें मुकाबले में बुधवार को दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) और गुजरात टाइटंस (जीटी) आमने-सामने होंगी। अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाने वाला यह मैच दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि टीम अपने घरेलू मैदान पर गुजरात के खिलाफ जीत दर्ज कर जीत-हार का समीकरण बराबर करना चाहती है।

    दोनों टीमों का रिकॉर्ड

    गुजरात टाइटंस ने 2022 में लीग में कदम रखा था। पिछले चार सीजन में दोनों टीमों के बीच अब तक 7 मैच खेले गए हैं।

    गुजरात ने 4 मैच जीते हैं, जबकि
    दिल्ली ने 3 मुकाबले अपने नाम किए हैं।

    सीजनवार मुकाबले:

    2022: गुजरात ने डीसी को 14 रन से हराया।
    2023: दोनों टीमों ने एक-एक मैच जीता; गुजरात 6 विकेट से, दिल्ली 5 विकेट से विजयी।
    2024: डीसी ने दोनों मैचों में जीत हासिल की; 6 और 4 विकेट से।
    2025: गुजरात ने दोनों मैच जीते; 7 और 10 विकेट से।

    इस हिसाब से गुजरात का अब तक का रिकॉर्ड दिल्ली के मुकाबले थोड़ा बेहतर रहा है। बुधवार का मैच दिल्ली को बराबरी करने का मौका देगा।

    आईपीएल 2026 में फॉर्म

    दिल्ली कैपिटल्स शानदार फॉर्म में नजर आ रही है।

    सीजन के दोनों मैचों में डीसी ने जीत दर्ज की।
    पहला मैच: लखनऊ सुपर जायंट्स को 6 विकेट से हराया।
    दूसरा मैच: होम ग्राउंड पर मुंबई इंडियंस को 6 विकेट से हराया।

    इस प्रदर्शन के साथ डीसी अंकतालिका में चौथे स्थान पर है।

    वहीं, गुजरात टाइटंस के लिए यह सीजन मुश्किल से शुरू हुआ।

    जीटी अपने शुरुआती दो मैचों में हार का सामना कर चुकी है।
    अंकतालिका में गुजरात नौवें स्थान पर है।
    डीसी के खिलाफ बुधवार का मुकाबला गुजरात के लिए सीजन की पहली जीत दर्ज करने का अवसर होगा।
    मैच की अहमियत

    दिल्ली कैपिटल्स को अपने घरेलू मैदान का फायदा है। टीम अपनी दो जीत के साथ आत्मविश्वास में है और बुधवार को गुजरात के खिलाफ जीत दर्ज कर पुराने मुकाबलों का समीकरण बराबर करना चाहेगी। गुजरात टाइटंस भी कम नहीं हैं। वे सीजन की अपनी पहली जीत हासिल करने के लिए आक्रामक खेल दिखाने की तैयारी में हैं।

    दोनों टीमों के बीच इतिहास और वर्तमान फॉर्म को देखते हुए यह मुकाबला रोमांचक होने वाला है। फैंस की नजरें इस मुकाबले पर होंगी, क्योंकि जीत किसी भी टीम के सीजन के टोन को बदल सकती है।

  • आर्टेमिस II मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने सुरक्षित तरीके से देखा सूर्य ग्रहण, सोलर ग्लासेज का उपयोग अनिवार्य बताया

    आर्टेमिस II मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने सुरक्षित तरीके से देखा सूर्य ग्रहण, सोलर ग्लासेज का उपयोग अनिवार्य बताया


    नई दिल्ली। अंतरिक्ष से सूर्य ग्रहण देखना जितना रोमांचक अनुभव है, उतना ही संवेदनशील भी है, क्योंकि इस दौरान आंखों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। हाल ही में आर्टेमिस II मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने सूर्य ग्रहण का अद्भुत दृश्य देखा, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सोलर व्यूइंग ग्लासेज के उपयोग की आवश्यकता को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा। यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि चाहे पृथ्वी हो या अंतरिक्ष, सूर्य को सीधे देखना हमेशा सावधानी की मांग करता है।

    इस मिशन में शामिल अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच, जेरेमी हैनसन, रीड वाइजमैन और विक्टर ग्लोवर ने ओरियन स्पेसक्राफ्ट से सूर्य ग्रहण का अवलोकन किया। उन्होंने विशेष सोलर एक्लिप्स ग्लासेज पहनकर ग्रहण के आंशिक चरणों को देखा, ताकि आंखों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। वैज्ञानिकों के अनुसार, केवल पूर्ण सूर्य ग्रहण के कुछ क्षणों को छोड़कर बाकी समय सूर्य को सीधे देखना आंखों के लिए अत्यंत खतरनाक होता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि सूर्य की तेज रोशनी और हानिकारक विकिरण आंखों की रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही कारण है कि सामान्य धूप के चश्मे सूर्य ग्रहण देखने के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते। सोलर व्यूइंग ग्लासेज विशेष रूप से इस उद्देश्य के लिए बनाए जाते हैं और ये अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होते हैं, जो आंखों को सुरक्षित रखते हैं।

    आंशिक और वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान सावधानी और भी आवश्यक हो जाती है, क्योंकि इन स्थितियों में सूर्य पूरी तरह ढका नहीं होता। ऐसे में पूरे समय सोलर ग्लासेज पहनना जरूरी होता है। यदि चश्मे में किसी प्रकार की खरोंच या क्षति हो, तो उनका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। बच्चों को ग्रहण दिखाते समय विशेष निगरानी की आवश्यकता होती है, ताकि वे बिना सुरक्षा के सूर्य की ओर न देखें।

    इसके अलावा, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि सोलर ग्लासेज पहनकर भी कैमरा, दूरबीन या टेलीस्कोप के माध्यम से सूर्य को नहीं देखना चाहिए। इन उपकरणों के जरिए सूर्य की किरणें और अधिक तीव्र होकर आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे उपकरणों के लिए अलग से विशेष सोलर फिल्टर का उपयोग करना अनिवार्य होता है।

    यदि सोलर व्यूइंग ग्लासेज उपलब्ध न हों, तो अप्रत्यक्ष तरीके से ग्रहण देखना एक सुरक्षित विकल्प है। पिनहोल प्रोजेक्टर जैसी सरल विधि के माध्यम से सूर्य की छवि को कागज या दीवार पर प्रोजेक्ट करके बिना किसी जोखिम के ग्रहण का आनंद लिया जा सकता है। इस तकनीक में सीधे सूर्य को देखने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे आंखों की सुरक्षा बनी रहती है।