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  • बैतूल में शीतल झिरी परियोजना का विरोध, ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

    बैतूल में शीतल झिरी परियोजना का विरोध, ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


    बैतूल । बैतूल जिले में माचना नदी पर प्रस्तावित शीतल झिरी मध्यम सिंचाई परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। सेहरा ग्रामीण संघर्ष मोर्चा और विभिन्न जनजातीय संगठनों ने कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर ज्ञापन सौंपा और परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। उनका आरोप है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया संविधान की पांचवीं अनुसूची भू-अर्जन अधिनियम 2013 और पेसा एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करती हुई आगे बढ़ाई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार शीतल झिरी परियोजना के लिए 23 मार्च 2026 को भूमि अर्जन की प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस प्रक्रिया में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और न ही उनका पक्ष सुना गया। इस अधिसूचना के बाद से स्थानीय लोग चिंतित हैं और उन्हें डर है कि उनकी पारंपरिक जमीनें और कृषि योग्य भूमि नुकसान में आ सकती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना का लाभ केवल कुछ बड़े हितधारकों को मिलेगा और आम ग्रामीण तथा जनजातीय समुदाय इसके दुष्प्रभाव झेलेंगे।

    स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि शीतल झिरी परियोजना के तहत प्रस्तावित बांध और जलाशय से उनके खेत और घर प्रभावित हो सकते हैं। इस कारण से उन्होंने विरोध स्वरूप कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए और इस परियोजना के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का स्वतंत्र अध्ययन कराया जाए।

    सेहरा ग्रामीण संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे लंबे समय से परियोजना के प्रभावों को लेकर सरकार और प्रशासन के संपर्क में हैं लेकिन उनकी चिंताओं को अनसुना किया गया। इस परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों का जीवन खेती और स्थानीय पारिस्थितिकी प्रणाली सीधे प्रभावित होगी। ग्रामीणों का कहना है कि पेसा एक्ट के तहत उनकी स्वीकृति और पारंपरिक अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    ज्ञापन सौंपने के बाद ग्रामीणों ने जोर देकर कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाएंगे। यदि प्रशासन ने उनकी बात नहीं सुनी और अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करने को तैयार हैं।

    कलेक्टर कार्यालय ने प्रारंभिक प्रतिक्रिया में कहा कि ज्ञापन प्राप्त हुआ है और इसे संबंधित विभागों के पास भेजकर जांच करवाई जाएगी। प्रशासन ने आश्वस्त किया कि ग्रामीणों की चिंता को ध्यान में रखते हुए परियोजना की अधिग्रहण प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि शीतल झिरी परियोजना जैसे सिंचाई और जल प्रबंधन प्रयास ग्रामीणों और स्थानीय पारिस्थितिकी पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए परियोजना के क्रियान्वयन से पहले स्थानीय समुदायों की सहमति पर्यावरणीय अध्ययन और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है।

    बैतूल में यह विरोध प्रदर्शन न केवल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर सवाल उठाता है बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि ग्रामीण और जनजातीय समुदाय अपनी पारंपरिक जमीनों और अधिकारों की सुरक्षा के लिए सतर्क और सजग हैं। प्रशासन और सरकार पर यह जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से इस तरह के विकास परियोजनाओं को लागू करें।

    ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी भूमि और जीवन-यापन की सुरक्षा करना है और वे किसी भी प्रकार की हिंसा में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाए और न्यायसंगत समाधान निकाला जाए।

  • मुलताई स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ते समय यात्री की मौत, पुलिस जांच में जुटी

    मुलताई स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ते समय यात्री की मौत, पुलिस जांच में जुटी


    बैतूल । बैतूल जिले के मुलताई रेलवे स्टेशन पर मंगलवार दोपहर ट्रेन में चढ़ते समय एक यात्री की दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, सिकंदराबाद-जयपुर एक्सप्रेस के ठहराव के दौरान महाराष्ट्र के अमरावती जिले के दर्यापुर निवासी सलीम खान (42) पानी लेने के लिए ट्रेन से नीचे उतरे। इसी दौरान उनकी नज़र फिसल गई और वह ट्रैक पर गिर गए।

    पुलिस ने बताया कि हादसा बहुत जल्दी और अचानक हुआ। ट्रेन ठहरी थी लेकिन सलीम खान की गिरने की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत उठाया नहीं जा सका। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने शोर मचाया और रेलवे कर्मचारियों को सूचना दी। रेलवे और पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुँची और सलीम खान को प्राथमिक सहायता दी, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

    हादसे के बाद स्टेशन पर हड़कंप मच गया। यात्री और रेलवे कर्मचारी घटना स्थल पर जमा हुए। रेलवे पुलिस ने ट्रैक और प्लेटफार्म की जांच की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दुर्घटना किसी तकनीकी या सुरक्षा कारण से तो नहीं हुई। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार यह एक व्यक्तिगत हादसा था, जिसमें यात्री की असावधानी और ट्रेन से उतरने के दौरान फिसलने की वजह से मौत हुई।

    रेलवे पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के परिजन और स्थानीय प्रशासन को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने पूरे मामले में रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन पर सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं, लेकिन यात्रियों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

    रेलवे यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेन से उतरते समय किसी भी प्रकार की जल्दबाज़ी या असावधानी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। रेलवे स्टेशन पर चेतावनी बोर्ड और कर्मचारियों की मौजूदगी होती है, लेकिन यात्रियों की सतर्कता भी बेहद महत्वपूर्ण है।

    स्थानीय लोगों ने कहा कि सलीम खान का यह हादसा काफी दुखद है और रेलवे स्टेशन पर ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए और कड़े उपाय किए जाने चाहिए। यात्रियों को ट्रेन के रुकने और चलने की स्थिति में प्लेटफार्म पर सावधानी से चलने के निर्देश दिए जाने चाहिए।

    मुलताई स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते समय या उतरते समय यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने समय-समय पर चेतावनी जारी की है, लेकिन असावधानी से होने वाली घटनाओं को रोकना चुनौतीपूर्ण होता है। इस हादसे ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाया है।

    रेलवे प्रशासन ने कहा कि घटना की पूरी जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव के लिए अतिरिक्त सतर्कता और सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। यात्रियों से अपील की गई है कि ट्रेन के चलने या रुकने के समय प्लेटफार्म पर सावधानी बरतें और कभी भी ट्रेन से भागते हुए या जल्दी में उतरते हुए जोखिम न लें।

    इस घटना ने मुलताई रेलवे स्टेशन और आसपास के यात्रियों में सुरक्षा के प्रति चेतना बढ़ा दी है। रेलवे और पुलिस मिलकर जांच और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के दुखद हादसे रोके जा सकें।

  • ईरान में फंसे सभी भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित और नियंत्रित मार्गों से देश वापसी का उच्च स्तरीय अलर्ट जारी

    ईरान में फंसे सभी भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित और नियंत्रित मार्गों से देश वापसी का उच्च स्तरीय अलर्ट जारी


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें सभी भारतीय नागरिकों से आग्रह किया गया है कि जितनी जल्दी संभव हो, तय किए गए सुरक्षित और अधिकृत मार्गों से देश छोड़ दें। इसके साथ यह चेतावनी भी दी गई है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर बिना दूतावास की अनुमति और समन्वय के बढ़ने का प्रयास न करें। यात्रा के दौरान नागरिकों को लगातार दूतावास के संपर्क में रहने और किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबर तथा ईमेल आईडी का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

    इससे पहले जारी की गई सलाह में नागरिकों को 48 घंटे तक सुरक्षित स्थानों पर रहने की हिदायत दी गई थी। हालात की संवेदनशीलता के मद्देनजर अब सरकार ने अधिक सतर्कता बरतते हुए देश छोड़ने पर जोर दिया है। यह कदम अमेरिकी और ईरानी तनाव के बीच क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए उठाया गया है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के लिए सीजफायर का ऐलान हुआ था, लेकिन इसे पूरी तरह सुरक्षित स्थिति नहीं माना जा रहा है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के समय ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक थे, जिनमें छात्र, कामगार और पेशेवर शामिल हैं। अब तक करीब 1,800 नागरिक सुरक्षित भारत लौट चुके हैं, जबकि बाकी नागरिकों की सुरक्षित वापसी के प्रयास जारी हैं। अमेरिकी चेतावनी और क्षेत्रीय तनाव ने हालात को और भी संवेदनशील बना दिया है।

    एडवाइजरी में नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और अफवाहों से दूर रहें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि यात्रा के सभी मार्ग अधिकृत और सुरक्षित हों। किसी भी जोखिमपूर्ण गतिविधि से बचना अत्यंत आवश्यक है। सरकार स्थिति की निरंतर निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।

  • मिस्टर इंडिया की मासूम टीना, हुजान खोदाईजी अब 43 साल की और दो बेटियों की मां।

    मिस्टर इंडिया की मासूम टीना, हुजान खोदाईजी अब 43 साल की और दो बेटियों की मां।

    नई दिल्ली। बॉलीवुड की कल्ट फिल्म मिस्टर इंडिया में 6 साल की मासूम बच्ची ने टीना का किरदार निभाकर लोगों के दिलों में जगह बना ली थी। यह छोटी सी बच्ची हुजान खोदाईजी थीं, जिनकी भोली-भाली आँखें और मासूम चेहरे ने फिल्म में विशेष छाप छोड़ी। फिल्म 1987 में रिलीज़ हुई थी, और इसके 38 साल बाद अब हुजान का बदल चुका रूप फैंस के लिए चौंकाने वाला साबित हुआ। सोशल मीडिया पर उनकी हाल की तस्वीरें सामने आने के बाद फैंस को उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया।

    हुजान खोदाईजी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत इसी फिल्म से की थी और यह उनकी पहली और आखिरी फिल्म साबित हुई। जब मिस्टर इंडिया की शूटिंग हुई, तब हुजान केवल 6 साल की थीं। बाल कलाकारों में आमतौर पर बड़े होने के बाद भी फिल्मी करियर बनाने की कोशिश होती है, लेकिन हुजान ने सिर्फ एक फिल्म के बाद इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया। अब वह 43 साल की हैं और दो बेटियों की मां हैं।

    हुजान ने अभिनय की दुनिया से दूरी बनाए रखी और ग्लैमर और चकाचौंध से दूर एक सादे जीवन को अपनाया। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म की शूटिंग के बाद उन्हें लोगों का ध्यान आकर्षित करने से शर्मिंदगी होती थी। उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद वह मद्रास चली गईं और अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जीने लगीं। इसके बाद उन्होंने कुछ विज्ञापन किए, लेकिन लाइमलाइट का ध्यान उन्हें कभी पसंद नहीं आया।

    आज के समय में हुजान खोदाईजी मार्केटिंग क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने एडवरटाइजिंग कंपनी में सफल करियर बनाया है और पेशेवर रूप से विज्ञापन एग्जीक्यूटिव के रूप में काम कर रही हैं। सोशल मीडिया पर उनका प्रोफाइल प्राइवेट है, जिससे यह साफ होता है कि वह अपने निजी जीवन को प्राथमिकता देती हैं और फिल्मी दुनिया में वापसी की इच्छा नहीं रखतीं।

  • सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में कहा कि धार्मिक प्रथाओं में अंधविश्वास की समीक्षा करना न्यायपालिका का अधिकार है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में कहा कि धार्मिक प्रथाओं में अंधविश्वास की समीक्षा करना न्यायपालिका का अधिकार है।

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विषय पर चल रही समीक्षा याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि धार्मिक प्रथाओं में अंधविश्वास और असंवैधानिक प्रथाओं की समीक्षा करना न्यायपालिका का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि अदालत धर्म विशेषज्ञ नहीं है, लेकिन यदि कोई प्रथा मानवता, संविधान और न्याय की मूल भावना के खिलाफ जाती है, तो उस पर समीक्षा करना न्यायपालिका का संवैधानिक कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट ने उदाहरण के तौर पर सती प्रथा, मानव बलि और नरभक्षण जैसी प्रथाओं का जिक्र किया और स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर अंधविश्वास को हमेशा अपरिवर्तनीय नहीं माना जा सकता।

    सुनवाई इस 2018 के निर्णय के पुनरीक्षण से जुड़ी है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 10 से 50 वर्ष आयु की महिलाओं का प्रवेश रोकना असंवैधानिक है। अब यह समीक्षा याचिका नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष है, जो व्यापक संवैधानिक सवालों पर विचार कर रही है कि धार्मिक अभ्यासों पर न्यायिक हस्तक्षेप किस हद तक संभव और उचित है। अदालत ने यह भी कहा कि केवल यह मान लेना कि सरकार का निर्णय अंतिम होगा, सही नहीं है और कोर्ट के पास यह देखने का अधिकार है कि कोई प्रथा अंधविश्वास पर आधारित है या नहीं।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि धार्मिक स्वतंत्रता संवैधानिक रूप से सुरक्षित है और अदालत को केवल धार्मिक विश्वास के आधार पर समीक्षा नहीं करनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि धार्मिक स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 25 आदि के तहत संतुलित रूप से देखा जाएगा और यदि कोई प्रथा मूलभूत अधिकारों के खिलाफ है तो न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।

    विशेष सुनवाई में कुछ न्यायाधीशों ने कहा कि यदि कोई प्रथा केवल धार्मिक मान्यता पर आधारित है और संवैधानिक मूल्यों को चुनौती देती है, तो उसकी समीक्षा अवश्य होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान जरूरी है, लेकिन यह असीमित नहीं है, और अदालत के पास यह शक्ति सुरक्षित है कि वह सामाजिक और नैतिक मूल्यों के अनुरूप न्याय सुनिश्चित करे।

    सबरीमाला मामला लंबे समय से महिलाओं के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संवेदनशील संतुलन से जुड़ा हुआ है। समीक्षा सुनवाई के निर्णायक चरण में सुप्रीम कोर्ट का यह रुख न्यायिक परंपरा, मूल्यों और संविधान की व्याख्या की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव: बाला बच्चन ने जताई भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका

    राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव: बाला बच्चन ने जताई भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका


    बड़वानी । मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस बीच कांग्रेस के पूर्व गृहमंत्री और राजपुर विधायक बाला बच्चन ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए राज्यसभा चुनाव में षड्यंत्र की आशंका जताई। बाला बच्चन का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस को राज्यसभा पहुंचने से रोकने के लिए अपनी रणनीति के तहत विधायकों की खरीद-फरोख्त कर रही है।

    बाला बच्चन बुधवार को बड़वानी पहुंचे और मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पहले भी भाजपा ने विधायकों की खरीद-फरोख्त कर सरकारें बनाई हैं। उन्होंने याद दिलाया कि मध्य प्रदेश में 27 विधायकों की खरीद-फरोख्त के जरिए सरकार बनाई गई थी और यह प्रयोग अन्य राज्यों में भी होते रहे हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की संभावना है, जिसे रोकने के लिए कांग्रेस पूरी तरह सतर्क है।

    पूर्व गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी की ओर से घोषित प्रत्याशी के पक्ष में सभी विधायक मतदान करेंगे और उनके विजयी होने के लिए पूरी सक्रियता के साथ काम करेंगे। बाला बच्चन ने जोर देकर कहा कि बड़वानी जिले के तीनों कांग्रेस विधायक पूरी तरह से पार्टी के साथ हैं और किसी भी प्रकार की बाहरी राजनीति से प्रभावित नहीं होंगे। उनका कहना था कि कांग्रेस पूरे राज्य में अपने विधायकों को संभालने और राज्यसभा में पूर्ण बहुमत सुनिश्चित करने के लिए सजग और अलर्ट है।

    बाला बच्चन ने यह भी कहा कि भाजपा की कथित षड्यंत्रपूर्ण गतिविधियों से लोकतंत्र कमजोर होता है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने और विधायकों की स्वतंत्र भूमिका सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बाला बच्चन का यह बयान राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गर्मी को और बढ़ा सकता है।

    पूर्व गृहमंत्री ने मीडिया से कहा कि कांग्रेस के विधायक अपने मताधिकार का प्रयोग निष्पक्ष और पार्टी लाइन के अनुसार करेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का उम्मीदवार विजयी होगा और पार्टी अपने विधायकों के साथ मजबूती से खड़ी है।

    राज्यसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। बाला बच्चन के बयान ने भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी लड़ाई को और अधिक गर्म कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पूरी तरह अपने विधायकों को जुटाकर राज्यसभा में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखेगी।

    इस प्रकार, बाला बच्चन ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह राज्यसभा चुनाव में अपने हित साधने के लिए षड्यंत्र कर रही है, जबकि कांग्रेस पूरी सजगता और सक्रियता के साथ अपने प्रत्याशी को विजयी बनाने की योजना में लगी हुई है। यह बयान मध्य प्रदेश की राजनीतिक पटल पर आगामी राज्यसभा चुनाव की सख्त लड़ाई और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।

  • कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के लिए सात सीटों पर उम्मीदवार बदले।

    कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के लिए सात सीटों पर उम्मीदवार बदले।


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारी अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है और सियासी गतिविधियाँ तेज हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस ने दूसरे चरण के चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवार सूची में फेरबदल किया है। महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी नई सूची में कुल आठ उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनमें से सात पुराने उम्मीदवारों की जगह ले रहे हैं। हावड़ा सीट पर पार्टी ने प्रणब भट्टाचार्य को नया उम्मीदवार घोषित किया है।

    कांग्रेस ने नाकाशिपारा से गोलाम किबरिया मंडल की जगह ताहिर एसके को, छपरा से रहीदुल मंडल की जगह आसिफ खान को और मिनाखां (एससी) से बरनाली नस्कर की जगह आसिफ खान को टिकट दिया है। मंदिर बाजार (एससी) से कौशिक बैद्य के स्थान पर चांद सरदार, रैना (एससी) से अनिक साहा के स्थान पर पम्पा मलिक, केतुग्राम से मोफिरुल कासिम के स्थान पर एसके अबू बक्कर और औसग्राम (एससी) से निशा बराल के स्थान पर तापस बराल को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने इस बदलाव को चुनावी रणनीति के तहत किया है और सभी नए उम्मीदवारों को विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए मैदान में उतारा गया है।

    इस बीच, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर वोटिंग होगी। चुनाव नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी। चुनाव के मद्देनजर राज्य सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इस बार अब तक की सबसे बड़ी अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। लगभग 2,400 अर्धसैनिक कंपनियों के 2,40,000 जवानों को तैनात किया गया है।

    महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी इस चुनाव में रिकॉर्ड स्तर पर की गई है। करीब 20,000 महिला अर्धसैनिक जवानों को चुनाव ड्यूटी में लगाया गया है, ताकि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके। चुनाव के दौरान संवेदनशील और संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी रखी जाएगी, और सभी दलों की निष्पक्ष भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

    पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की यह स्थिति दर्शाती है कि राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने के साथ-साथ सुरक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया की तैयारी में भी पूरी गंभीरता दिखा रहे हैं। कांग्रेस का यह उम्मीदवार फेरबदल उसके चुनावी अभियान को तेज करने और राज्य के मतदाताओं तक प्रभावी संदेश पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • AC कोच में पर्स छीनकर भागा शातिर चोर, फिल्मी अंदाज में पुलिस से बचता रहा

    AC कोच में पर्स छीनकर भागा शातिर चोर, फिल्मी अंदाज में पुलिस से बचता रहा


    जबलपुरमध्य प्रदेश के जबलपुर में पुलिस और एक शातिर अंतरराज्यीय चोर के बीच मंगलवार शाम ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, मानो किसी फिल्म का सीन हो। एसी कोच में महिला का पर्स छीनकर भगा उत्तरदायी पुलिस से बचने के लिए खितौला रेलवे स्टेशन के पास एक काई से भरे तालाब में कूद गया और करीब 5 घंटे तक पानी के भीतर छिपा रहा। हैरानी की बात यह रही कि वह सांस लेने के लिए कमल की नाल का इस्तेमाल करता रहा।
    ट्रेन में वारदात, फिर कूदकर भागा आरोपी

    घटना Rewa-Itwari Express की है, जहां एसी कोच में एक महिला का पर्स छीनने की कोशिश के दौरान आरोपी आरपीएफ की नजर में आ गया। जैसे ही ट्रेन सिहोरा रोड स्टेशन के पास धीमी हुई, आरोपी चेन पुलिंग कर ट्रेन से कूद गया और मौके से भागने लगा। आरपीएफ जवानों ने पीछा किया तो वह खितौला क्षेत्र के एक गहरे तालाब में जा कूदा।

    तालाब में छिपकर बनाया अनोखा प्लान

    पुलिस और गोताखोरों की टीम ने जब तलाश शुरू की, तो आरोपी कहीं नजर नहीं आया। बाद में पता चला कि उसने खुद को पूरी तरह पानी में डुबो रखा था और केवल कमल की नाल के जरिए सांस ले रहा था। घनी काई और अंधेरे की वजह से उसे ढूंढना बेहद मुश्किल हो गया। करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने उसे पकड़ लिया।

    ‘सनी’ नाम से खुली पहचान की गुत्थी

    गिरफ्तारी के बाद आरोपी लगातार पुलिस को गुमराह करता रहा। उसने अपना नाम बबलू और पता चंडीगढ़ बताया। लेकिन आरपीएफ थाना प्रभारी को शक हुआ और उन्होंने पुराने रिकॉर्ड खंगाले। जैसे ही उन्होंने उसे ‘सनी’ नाम से पुकारा, आरोपी घबरा गया और अपनी असली पहचान बता दी।

    400 से ज्यादा चोरियों का मास्टरमाइंड

    पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी का असली नाम Harvinder Singh है, जिसकी उम्र 32 साल है और वह उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है। वह देशभर में 400 से ज्यादा चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि वह 2017 में अपने इलाके में निर्दलीय पार्षद भी रह चुका है।

    ट्रेन में चोरी का मास्टर प्लान

    आरोपी का तरीका भी बेहद शातिर था। वह अक्सर एसी कोच को निशाना बनाता था और बिना टिकट सफर करता था। टीसी से बचने के लिए बाथरूम में छिप जाता और मौका मिलते ही यात्रियों के कीमती सामान पर हाथ साफ कर देता। 2018 में उसके पास से करीब 70 लाख रुपए के हीरे-जवाहरात भी बरामद किए गए थे।

    कई राज्यों की पुलिस को थी तलाश

    हरविंदर सिंह के खिलाफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में मामले दर्ज हैं। वह हर वारदात के बाद सिम बदल लेता था और पहचान छिपाने के लिए कोई आईडी अपने पास नहीं रखता था। फिलहाल पुलिस और आरपीएफ उससे अन्य मामलों में पूछताछ कर रही है।

  • 94 वर्ष की आयु में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन, नोएडा स्थित आवास में अंतिम दर्शन।

    94 वर्ष की आयु में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन, नोएडा स्थित आवास में अंतिम दर्शन।


    नई दिल्ली। भारतीय राजनीति की वरिष्ठ और सम्मानित नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का आज सुबह 4 बजे निधन हो गया। 94 वर्ष की आयु में उनकी यह विदाई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण हुई। उन्हें 8 अप्रैल को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। उनका पार्थिव शरीर नोएडा स्थित उनके आवास में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जिसके बाद आज शाम 5 बजे उन्हें निजामुद्दीन स्थित शवदाह गृह में सुपर्द-ए-खाक किया जाएगा।

    मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और राज्य स्तर से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कई बार लोकसभा सदस्य के रूप में उत्तर प्रदेश के मेरठ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और बाद में 2004 से 2016 तक छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की सदस्य रहीं। अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई और नीति निर्माण में योगदान दिया।

    मोहसिना किदवई ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में कई केंद्रीय मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उनके मंत्रालयों में ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, परिवहन और शहरी विकास शामिल थे। उनके नेतृत्व में इन क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों का कार्यान्वयन हुआ।

    कांग्रेस पार्टी में उनका योगदान भी उल्लेखनीय रहा। वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सदस्य रहीं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव के रूप में पार्टी संगठन और रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने युवा नेताओं को मार्गदर्शन दिया और पार्टी के निर्णयों एवं नीतियों के निर्माण में सक्रिय योगदान दिया।

    मोहसिना किदवई की राजनीतिक यात्रा लंबी और प्रभावशाली रही। उन्होंने हमेशा महिला और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी। उनकी नीति और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें पार्टी और संसद में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। उनकी अचानक विदाई से भारतीय राजनीति और कांग्रेस पार्टी एक सम्मानित नेता को खो चुकी है।

  • जबलपुर में एक साल बाद कब्र से निकाला गया शव, हाईकोर्ट ने जताई सख्ती

    जबलपुर में एक साल बाद कब्र से निकाला गया शव, हाईकोर्ट ने जताई सख्ती


    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक साल पुराने मामले ने नया मोड़ ले लिया है। गयासुद्दीन कुरैशी का शव बुधवार को हाईकोर्ट के आदेश के बाद कब्र से निकाला गया। पूरी प्रक्रिया एसडीएम अधारताल की स्वीकृति में कराई गई और शव को गवाहों के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां उसी दिन जांच कराई जानी है।

    हाईकोर्ट का सख्त रुख: “देरी बर्दाश्त नहीं होगी”

    मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें Justice Vivek Agarwal और Justice AK Singh शामिल थे, ने स्पष्ट कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है। कोर्ट ने आदेश दिया था कि बुधवार दोपहर 1 बजे तक शव को कब्र से निकालकर उसी दिन पोस्टमार्टम कराया जाए। साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए कि पूरी प्रक्रिया मजिस्ट्रेट की निगरानी में हो।

    परिवार को भी दिए गए थे निर्देश

    कोर्ट ने मृतक के परिवार पत्नी, पुत्र और भाई को सुबह 11 बजे एसडीएम के समक्ष उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता कसीमुद्दीन कुरैशी समय पर उपस्थित नहीं होता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    सड़क हादसे के बाद हुई थी मौत, भाई ने जताई हत्या की आशंका

    गयासुद्दीन कुरैशी 26 मार्च 2025 को सड़क हादसे में घायल हुए थे। पहले उनका इलाज जबलपुर में और बाद में नागपुर में कराया गया, जहां 27 मार्च को उनकी मौत हो गई। इसके बाद बिना विस्तृत जांच के शव को दफना दिया गया था।
    हालांकि, मृतक के भाई कसीमुद्दीन कुरैशी ने मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई। उनका कहना है कि डिस्चार्ज रिपोर्ट में सीने पर चोट के निशान थे, जिससे मामले में संदेह पैदा हुआ। पुलिस से शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने पर उन्होंने जनवरी 2026 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

    सुनवाई में दोनों पक्षों ने रखे तर्क

    राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता वीर विक्रांत सिंह ने कहा कि अपीलकर्ता जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील अभिनव उमाशंकर तिवारी ने मौत को संदिग्ध बताते हुए पोस्टमार्टम की मांग की। अन्य पक्षों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त और अधिवक्ता मयंक शर्मा भी उपस्थित रहे।

    अब पोस्टमार्टम से खुलेगा राज

    इस पूरे मामले में अब सबसे अहम कड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट होगी, जिससे यह साफ हो सकेगा कि गयासुद्दीन की मौत सामान्य दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई साजिश थी।

    पुलिस जांच पर भी उठे सवाल

    मृतक के भाई का आरोप है कि हादसे के बाद पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम के शव को दफना दिया, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने पहले जबलपुर एसपी से जांच की मांग की थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।