Tag: administration

  • झांसी में एंबुलेंस संचालकों की मनमानी: 30 किमी शव ले जाने के लिए मांगे 6000 रुपए, परिजनों ने DM से लगाई गुहार

    झांसी में एंबुलेंस संचालकों की मनमानी: 30 किमी शव ले जाने के लिए मांगे 6000 रुपए, परिजनों ने DM से लगाई गुहार



    झांसी। मेडिकल कॉलेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस के बाहर एंबुलेंस संचालकों की मनमानी का गंभीर मामला सामने आया है। एक गरीब परिवार से मात्र 30 किलोमीटर दूर शव ले जाने के लिए 6000 रुपए की मांग की गई, जबकि दूसरी एंबुलेंस 1200 से 1500 रुपए में जाने को तैयार थी।

    परिजनों ने 4000 रुपए देने की बात कही, लेकिन एंबुलेंस चालक 6000 रुपए पर अड़ा रहा। अंततः परिजनों ने डीएम ऑफिस में फोन कर अपनी पीड़ा बताई, जिसके बाद मामला 4000 रुपए में तय हुआ और शव को रवाना किया गया।

    ट्रेन के बाथरूम में मिला शव
    मृतक महेंद्र सिंह (47), बबीना क्षेत्र के ठकरास मोहल्ले के रहने वाले थे और अहमदाबाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। वे अहमदाबाद से साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन से घर लौट रहे थे। यात्रा के दौरान ट्रेन के बाथरूम में उनकी तबीयत बिगड़ गई और वहीं उनकी मौत हो गई।ट्रेन जब झांसी स्टेशन पहुंची तो जीआरपी ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया।

    बबीना ले जाने को लेकर विवाद
    पोस्टमार्टम के बाद शव को बबीना ले जाने को लेकर एंबुलेंस संचालकों में मनमानी वसूली का आरोप लगा। परिजनों का कहना है कि बाहर खड़ी एंबुलेंस 1200–1500 रुपए में जाने को तैयार थी, लेकिन अंदर मौजूद संचालक अधिक पैसे की मांग पर अड़े रहे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    गरीब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
    मृतक के परिवार में पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी हैं। सभी अभी अविवाहित हैं। पिता की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर बताई जा रही है।

    प्रशासन पर उठे सवाल
    यह कोई पहला मामला नहीं है जब पोस्टमार्टम हाउस के बाहर एंबुलेंस संचालकों पर मनमानी वसूली के आरोप लगे हों। दूर-दराज से आने वाले परिजनों से कई गुना अधिक किराया वसूलने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन व्यवस्था सुधारने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

  • उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती

    उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Ujjain में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच प्रशासन ने ईंधन बचत की दिशा में एक अनोखी और अनुकरणीय पहल शुरू की है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचत अपील और मुख्यमंत्री Mohan Yadav के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
    अब सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारी अलग-अलग वाहनों की बजाय एक ही ट्रैवलर बस में यात्रा कर रहे हैं। बुधवार को संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त सहित करीब 15 अधिकारी एक साथ बस में बैठकर 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र के निरीक्षण के लिए पहुंचे।
    पहले स्थिति यह थी कि हर दिन विभिन्न विभागों के अधिकारी 15 अलग-अलग इनोवा वाहनों से निरीक्षण के लिए निकलते थे, जिससे भारी मात्रा में ईंधन खर्च होता था। अनुमान के अनुसार, केवल एक दिन के निरीक्षण में लगभग 6750 रुपये तक का ईंधन खर्च हो जाता था।
    नई व्यवस्था के तहत अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा कर रहे हैं, जिससे खर्च में भारी कमी आई है। ट्रैवलर बस के उपयोग से यह पूरा सफर अब लगभग 250 रुपये के डीजल खर्च में पूरा हो रहा है, हालांकि बस का दैनिक किराया करीब 4100 रुपये है।
    प्रशासन का कहना है कि इस पहल से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था पर भी दबाव घटेगा। पहले कई वाहनों के काफिले से सड़कों पर जाम जैसी स्थिति बन जाती थी, अब एक ही वाहन से यात्रा होने पर यह समस्या कम हो गई है।
    निरीक्षण के दौरान अधिकारी सुबह 6 बजे से घाटों और प्रस्तावित एप्रोच रोड का जायजा लेते हैं और कई किलोमीटर पैदल भी चलते हैं। इस दौरान निर्माण कार्यों की समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
    सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि यह निर्णय न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे टीम भावना भी मजबूत होगी। सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे तो समन्वय बेहतर होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी आसान होगी।
    कलेक्टर ने इसे एक अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था आगे चलकर अन्य जिलों के लिए भी मिसाल बन सकती है।

  • US रिपोर्ट में दावा: ट्रंप प्रशासन के लिए ‘रेड फ्लैग’ हो सकते हैं जनरल मुनीर, ईरान से करीबी रिश्तों पर सवाल

    US रिपोर्ट में दावा: ट्रंप प्रशासन के लिए ‘रेड फ्लैग’ हो सकते हैं जनरल मुनीर, ईरान से करीबी रिश्तों पर सवाल


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को लेकर अमेरिकी खुफिया तंत्र में चिंता जताई गई है।
    एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके ईरान के सैन्य नेतृत्व से पुराने संबंध डोनाल्ड ट्रंप के संभावित प्रशासन के लिए जोखिम बन सकते हैं। यह दावा Fox News की रिपोर्ट और अमेरिकी एजेंसियों के आकलन में सामने आया है।

    ईरान से गहरे संबंधों पर चिंता

    रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल मुनीर के ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों से लंबे समय से व्यक्तिगत रिश्ते रहे हैं। इनमें कासिम सुलेमानी और होसैन सलामी जैसे नाम शामिल बताए गए हैं। इन संबंधों को अमेरिकी हितों के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है।

    ‘बैकडोर डिप्लोमेसी’ में भूमिका

    बताया जा रहा है कि मौजूदा हालात में मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पर्दे के पीछे मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। उनका प्रयास दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और बातचीत को आगे बढ़ाने का बताया गया है।

    ट्रंप की तारीफ, एजेंसियों की चिंता

    रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर मुनीर की तारीफ करते हुए उन्हें अपना ‘पसंदीदा फील्ड मार्शल’ कहा है। हालांकि, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि उनकी यह दोहरी भूमिका भविष्य में अमेरिकी रणनीतिक हितों को प्रभावित कर सकती है।

    पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड पर सवाल

    रिपोर्ट में पाकिस्तान के पिछले रिकॉर्ड को लेकर भी चिंता जताई गई है, खासकर अफगानिस्तान में उसकी भूमिका को लेकर।

    विश्लेषकों का कहना है कि इस्लामाबाद का इतिहास उसे पूरी तरह भरोसेमंद सहयोगी के रूप में स्थापित नहीं करता।

    विशेषज्ञों की चेतावनी

    विशेषज्ञ बिल रोगियो ने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान पर आंख बंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि मुनीर के ईरानी सैन्य ढांचे से संबंध भविष्य में रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव बना हुआ है और पाकिस्तान की भूमिका पर नई बहस छिड़ गई है।

  • चंबल राजघाट में अवैध रेत उत्खनन पर वन विभाग और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग, टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा

    चंबल राजघाट में अवैध रेत उत्खनन पर वन विभाग और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग, टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा


    चंबल।  अवैध रेत उत्खनन की लगातार शिकायतों के बीच चंबल के राजघाट क्षेत्र में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने अचानक पेट्रोलिंग की। टीम का मकसद रेत माफियाओं को रंगे हाथों पकड़ना था, लेकिन मौके पर कोई भी ट्रैक्टर-ट्रॉली या लोडर मशीन नहीं मिली, जिससे टीम को बैरंग लौटना पड़ा।

    जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों और प्रशासनिक शिकायतों के आधार पर वन विभाग और पुलिस ने राजघाट क्षेत्र में छापामार कार्रवाई और पेट्रोलिंग की योजना बनाई थी। हालांकि, पूरी टीम के पहुंचने पर इलाका सुनसान मिला और रेत से जुड़े किसी भी वाहन या गतिविधि के प्रमाण नहीं मिले।

    माफियाओं को पहले ही मिली भनक
    देवरी घड़ियाल सेंचुरी के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि टीम ने राजघाट और चंबल किनारे पेट्रोलिंग की, लेकिन वहाँ कोई अवैध रेत लदे वाहन या मशीन नहीं मिली। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कार्रवाई की सूचना पहले ही रेत माफियाओं तक पहुंच गई थी, जिसके कारण मौके पर कोई भी वाहन नहीं मिला।

    अधिकारियों का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन रोकने के लिए नियमित पेट्रोलिंग और निगरानी जारी रहेगी। हालांकि, इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि माफिया प्रशासन की छापामारी और निगरानी के प्रति सतर्क हैं।

    प्रशासन की अगली रणनीति
    वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम अब राजघाट और आसपास के इलाकों में और सघन निगरानी करेगी। अधिकारियों ने कहा कि अगले दौर की कार्रवाई में अवैध रेत लदे वाहनों और मशीनों की त्वरित पहचान के लिए ड्रोन और अन्य तकनीकी साधनों का भी उपयोग किया जाएगा।साथ ही, प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अवैध रेत उत्खनन की सूचना तुरंत पुलिस या वन विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम

    भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम


    इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई 23 मौतों ने प्रशासन और सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। जिस इलाके में कुछ दिन पहले तक मातम पसरा हुआ था वहां अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। ज़मीन के नीचे से लेकर अदालत के गलियारों तक इस त्रासदी का असर साफ दिख रहा है। प्रशासनिक स्तर पर जहां सुधार कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं वहीं न्यायिक मोर्चे पर भी मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अहम सुनवाई प्रस्तावित है।

    भागीरथपुरा की सड़कों पर इन दिनों भारी हलचल है। पुलिस चौकी के सामने की मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी गलियों तक जेसीबी मशीनें लगातार खुदाई में जुटी हैं। कई जगह पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को हटाकर नई पाइप डाली जा रही हैं तो कहीं ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने का काम चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि नर्मदा जल आपूर्ति लाइन और सीवरेज व्यवस्था को पूरी तरह अलग किया जा रहा है ताकि दूषित पानी की समस्या भविष्य में दोबारा न हो।हालांकि इन सुधार कार्यों के चलते स्थानीय लोगों को फिलहाल भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह खुदी सड़कों कीचड़ और अधूरे भराव के कारण आवाजाही मुश्किल हो गई है। दोपहिया वाहन चालकों बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को वैकल्पिक रास्तों से निकलना पड़ रहा है। बावजूद इसके क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह असुविधा उन्हें मंजूर है अगर इससे भविष्य में किसी और परिवार को अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके की पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था वर्षों से बदहाल थी। इसको लेकर कई बार शिकायतें भी की गईं लेकिन समय रहते प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों का कहना है कि यदि पहले ही सुधार कार्य किए गए होते तो शायद 23 निर्दोष लोगों की जान नहीं जाती।स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस त्रासदी की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। अब तक कुल 440 लोग दूषित पानी से बीमार होकर अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से 413 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है जबकि 27 मरीज अब भी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 8 मरीज आईसीयू में हैं और 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इलाके में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि किसी भी नए मामले को समय रहते पकड़ा जा सके।

    न्यायिक स्तर पर भी मामला तूल पकड़ चुका है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दूषित पेयजल से जुड़ी पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने प्रशासन के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए थे कि यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।भागीरथपुरा की यह त्रासदी अब केवल एक स्थानीय हादसा नहीं रही बल्कि यह सिस्टम की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुकी है।

  • इंदौर में बीआरटीएस हटाने में अधिकारी दिखा रहे हैं बहाने, हाई कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी

    इंदौर में बीआरटीएस हटाने में अधिकारी दिखा रहे हैं बहाने, हाई कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी


    इंदौर। इंदौर में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम बीआरटीएस को हटाने के मामले में अधिकारियों की बहानेबाजी पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने यह कहते हुए सख्त चेतावनी दी कि आदेशों को हल्के में मत लीजिए, हमें सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर मत करिए। इस मामले में अब हाई कोर्ट सतत निगरानी करेगा और अधिकारियों के कामकाजी तरीकों पर पैनी नजर रखेगा।

    क्या है मामला

    सोमवार को कोर्ट की सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि बीआरटीएस हटाने के बाद डिवाइडर की जगह एलिवेटेड ब्रिज का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए पीडब्ल्यूडी लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि जिस ब्रिज के नाम पर डिवाइडर का काम रोका जा रहा है उसका कार्य केवल कागजों पर चल रहा है और सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं और यह मामला लगातार लटका हुआ है। कोर्ट ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अधिकारियों का रवैया बिल्कुल असंतोषजनक है और वह कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। कोर्ट ने इस पर सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी, जिससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

    कोर्ट की प्रतिक्रिया

    कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि वह अब मामले की निगरानी करेगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। अदालत ने अधिकारियों से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करने को कहा और कहा कि यदि इस प्रक्रिया में और देरी होती है तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। कोर्ट का यह आदेश अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे न हटें और काम को जल्द पूरा करें। यह मामला बीआरटीएस को हटाने और उसके स्थान पर डिवाइडर और अन्य संरचनाओं के निर्माण से जुड़ा है जो शहर के यातायात सुधार के लिए अहम है। हालांकि प्रशासन द्वारा किए गए विलंब से नगरवासियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

  • इंदौर: भागीरथपुरा में 11 जनवरी से मिलेगा पीने योग्य नर्मदा जल

    इंदौर: भागीरथपुरा में 11 जनवरी से मिलेगा पीने योग्य नर्मदा जल


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हो रही बीमारियों और मौतों के मामलों के बाद प्रशासन ने नर्मदा पेयजल आपूर्ति को सुनिश्चित करने का दावा किया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि 11 जनवरी से इस क्षेत्र के नागरिकों को पीने योग्य नर्मदा पानी मिलना शुरू हो जाएगा। नर्मदा जल की लाइनों को पूरी तरह से साफ किया जा चुका है और पानी के सैंपल लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच भी की जा रही है।

    कलेक्टर के अनुसार, गुरुवार रात को भागीरथपुरा में नर्मदा पेयजल पाइपलाइन को प्रेशर से क्लोरीन द्वारा फ्लश किया गया था। इसके बाद पानी के सैंपल लिए गए और उनका परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण की रिपोर्ट मिलने के बाद 11 जनवरी से लोगों को नर्मदा जल पीने के लिए उपलब्ध होगा।कलेक्टर ने यह भी कहा कि फिलहाल क्षेत्र के सभी बोरिंग में क्लोरीन डाला जा चुका है और इन्हें केवल घरेलू उपयोग के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बीच, प्रशासन द्वारा टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई भी की जा रही है ताकि लोगों को पानी की समस्या से राहत मिल सके।

    भागीरथपुरा में नर्मदा जल आपूर्ति की व्यवस्था को लेकर स्थानीय निवासियों में उम्मीद जगी है। लंबे समय से यहां के लोग दूषित पानी से हो रही स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और अब प्रशासन की ओर से सुधार के प्रयासों से उम्मीद जताई जा रही है कि जल समस्या जल्द हल हो जाएगी।नर्मदा जल की आपूर्ति से पहले, भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए पाइप लाइनों की मरम्मत और सफाई का काम जोरों से चल रहा है। फिलहाल, कलेक्टर और प्रशासन का कहना है कि 11 जनवरी तक नर्मदा जल क्षेत्रवासियों को सुरक्षित, शुद्ध और पीने योग्य पानी उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

  • इंदौर दूषित पानी से 18 मौतें. 3 मरीज वेंटिलेटर पर. प्रशासन ने की कार्रवाई

    इंदौर दूषित पानी से 18 मौतें. 3 मरीज वेंटिलेटर पर. प्रशासन ने की कार्रवाई


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण पिछले कुछ दिनों में 18 मौतें हो चुकी हैं. और अब तक 429 लोग अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। बुधवार तक 330 मरीजों को छुट्टी मिल चुकी है. लेकिन 99 मरीज अभी भी इलाजरत हैं। अस्पतालों में ICU में मरीजों की संख्या बढ़ी है. जिनमें से 3 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। इस गंभीर स्थिति ने इलाके के लोगों को खौफ में डाल दिया है. और अब वे टैंकर और आरओ के पानी पर निर्भर हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बुधवार को क्षेत्र का निरीक्षण किया. और सीवरेज तथा नर्मदा पाइपलाइन के लीकेज को ठीक करने के निर्देश दिए। इलाके में पानी की सप्लाई टेस्टिंग की जा रही है. और लोगों को पानी उबालकर और छानकर पीने की सलाह दी जा रही है।
    स्वास्थ्य विभाग ने 61 टीमों का गठन किया था. जिनमें से 5013 घरों का सर्वे किया गया। इस सर्वे के माध्यम से 24786 लोगों को उचित सलाह दी गई और घर-घर दवाइयां भी वितरित की गईं। इसके साथ ही. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ICMR के सर्वे में पाया गया कि इलाके की 17 गलियां संक्रमित पाई गई हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी की. और कहा कि इंदौर की छवि को इस घटना ने गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पानी हर नागरिक कामौलिक अधिकार है और यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो दोषीअधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही. मुआवजे की राशि पर भी उचित निर्देश दिए जा सकते हैं।
    वहीं. कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन की योजना बनाई है। पार्टी की अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने पूरे प्रदेश में कैंडल मार्च आयोजित करने कीघोषणा की है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मंगलवार को प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की। इंदौर में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों के सिलसिले ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है. और प्रशासन की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

  • MP: अशोकनगर में कुख्यात सट्टा किंग के 3 मंजिला होटल पर चला प्रशासन का बुलडोजर

    MP: अशोकनगर में कुख्यात सट्टा किंग के 3 मंजिला होटल पर चला प्रशासन का बुलडोजर

    अशोकनगर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अशोकनगर (Ashoknagar) में प्रशासन ने होटल आजाद पैलेस (Hotel Azad Palace) पर बुलडोजर (Bulldozer) चला दिया। बिना अनुमति निर्माण और नियमों के उल्लंघन के कारण तीन मंजिला होटल के अगले और पिछले हिस्से को जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौजूद रही। मौके पर ड्रोन भी तैनात किए गए थे। यह होटल आजाद खान नाम के शख्स का बताया जाता है। आजाद खान जेल में बंद है। इससे पहले उसके फार्म हाउस पर भी कार्रवाई की जा चुकी है।


    क्या आरोप?

    आजाद खान पर ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क चलाने का आरोप है। उसका नाम कई आपराधिक मामलों में भी सामने आया है। ये सारे प्रकरण जांच की केंद्र और न्यायिक दायरे में हैं। प्रशासन की मुख्य कार्रवाई उसके तीन मंजिला होटल आजाद पैलेस पर हुई। नगर पालिका की टीम ने पुलिस के साथ मिलकर होटल के अवैध हिस्सों को जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए होटल के आसपास की दुकानों को बंद करा दिया गया था।


    क्या बोला प्रशासन?

    एसडीएम सुब्रत त्रिपाठी ने कहा- होटल आजाद पैलेस, आजाद खान और शाहिद खान का है जिन पर 5 लाख रुपये बकाया भी है। यह होटल नगर निगम की मंजूरी के बिना अवैध रूप से चलाया जा रहा था। नगर निगम ने उन्हें तीन नोटिस जारी किए थे। अब होटल के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों का कोलुआ में एक और फार्महाउस भी था, जिसे बिना इजाजत के बनाया गया था।


    100 पुलिसकर्मी रहे तैनात, ड्रोन से निगरानी

    साथ ही आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई थी। मौके पर लगभग 100 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। ड्रोन और वीडियो कैमरों की निगरानी में जेसीबी ने होटल के अगले और पिछले हिस्सों को जमींदोज कर दिया।


    वित्तीय गड़बड़ी का भी आरोप

    बताया जाता है कि आजाद खान की भूमिका कथित सट्टा नेटवर्क तब उजागर हुई थी जब गुना और अशोकनगर पुलिस ने कुछ सटोरियों के बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की। जांच में सामने आया कि आरोपी सट्टा के साथ ही एक कोऑपरेटिव सोसाइटी की आड़ में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितताएं भी कर रहा था। आरोपी आजाद खान की मुश्किलें तब बढ़ गईं जब देहात थाना क्षेत्र में दो भाइयों की आत्महत्या के मामले में उस पर उकसाने का आरोप लगा।


    आलीशान फार्म हाउस पर भी हो चुका है ऐक्शन

    इसके बाद पुलिस ने आजाद खान को गिरफ्तार कर के उसे जेल भेज दिया। आजाद खान की गिरफ्तारी के समय वह घायल अवस्था में लंगड़ाते हुए देखा गया था। इससे पहले प्रशासन ने कोलुआ गांव के पास स्थित उसके दो मंजिला आलीशान फार्म हाउस पर भी कार्रवाई की थी। प्रशासन का कहना था कि वह बिना मंजूरी के सड़क के बहुत करीब बना था। अब सारे आरोप न्यायिक कार्यवाही और जांच के दायरे में बताए जाते हैं।


    भाई पर भी आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप

    इतना ही नहीं, आजाद खान के भाई राशिद खान उर्फ चिन्ना पर भी आरोप है कि उसने आत्महत्या करने वाले भाइयों के परिवार को धमकाया और राजीनामे का दबाव बनाया। मौजूदा वक्त में सरकार ने आजाद खान की केबीएन साख सहकारी संस्था के सभी लेनदेन पर रोक लगा दी है। मंत्री विश्वास सारंग ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई ने शहर में खलबली मचा दी है।

  • सतना में मंदाकिनी नदी पर अवैध उत्खनन जल संसाधन विभाग की आड़ में हो रहा है काले कारोबार

    सतना में मंदाकिनी नदी पर अवैध उत्खनन जल संसाधन विभाग की आड़ में हो रहा है काले कारोबार


    सतना । सतना जिले में मंदाकिनी नदी जो कि धार्मिक सांस्कृतिक और पर्यावरणीय आस्था की प्रतीक मानी जाती है एक बार फिर अवैध उत्खनन के चलते विवादों में आ गई है। मोहकमगढ़ पुल के नीचे भारी मशीनों से नदी का सीना छलनी किया जा रहा था जो एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। खास बात यह है कि यह उत्खनन जल संसाधन विभाग की परियोजना के नाम पर किया जा रहा था।

    सूत्रों के अनुसार जल संसाधन विभाग द्वारा मंदाकिनी नदी में घाट निर्माण के लिए सीमित खनन की अनुमति ली गई थी। लेकिन पीपीएस कंपनी के ठेकेदार ने इस अनुमति का दुरुपयोग करते हुए नदी किनारे से पत्थर और मुरुम का अवैध उत्खनन शुरू कर दिया। आरोप हैं कि यह सब कार्य जल संसाधन विभाग के एसडीओ पुष्पेंद्र खरे के मौखिक निर्देश पर हो रहा था।

    प्रशासन की कार्रवाई और संदिग्ध पहलू

    स्थानीय लोगों द्वारा सूचना मिलने पर चित्रकूट तहसीलदार मौके पर पहुंचे और खनन में लगे पोकलैंड मशीन को जप्त कर लिया। हालांकि ट्रक मौके से गायब हो गए जिससे यह संदेह पैदा हो गया कि मामले में पहले से सूचना थी और यह पूरी घटना किसी संरक्षण के तहत हो रही थी। सबसे हैरान करने वाली बात तब सामने आई जब प्रशासन के अधिकारियों के मौके पर पहुंचते ही संबंधित जिम्मेदारों के मोबाइल फोन बंद हो गए। यह घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि क्या यह पूरी प्रक्रिया पूर्व नियोजित और विभागीय मिलीभगत का हिस्सा है?

    इस मामले में प्रशासन की निष्क्रियता और जिम्मेदार अधिकारियों की संलिप्तता के आरोप उभर रहे हैं। यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या आस्था और पर्यावरण से जुड़े इस अहम स्थान की अवैध उत्खनन के चलते हानि हो रही है? क्या सरकारी योजनाओं की आड़ में इस तरह के काले कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है?