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  • देश में फिर सक्रिय हुआ मानसून…. 19 राज्यों में एक सप्ताह भारी बारिश के आसार… अलर्ट जारी

    देश में फिर सक्रिय हुआ मानसून…. 19 राज्यों में एक सप्ताह भारी बारिश के आसार… अलर्ट जारी


    नई दिल्ली।
    दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) एक बार फिर देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिया हुआ है। इसके प्रभाव से उत्तराखंड से लेकर ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश हुई है। उत्तराखंड में अलग-अलग घटनाओं में 3 बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हो गई है, जबकि असम के गुवाहाटी में भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन सदस्य समेत चार जिंदा दफन हो गए। मौसम विभाग ने सक्रिय मानसून के चलते 7 सितंबर तक हिमाचल प्रदेश और हरियाणा समेत कम से कम 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी (Heavy rain warning) दी है। छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में तेज बारिश होने की संभावना है।


    भूस्खलन के कारण जनहानि

    हल्द्वानी से मिली जानकारी के मुताबिक, अल्मोड़ा जिले के हवालबाग ब्लॉक के वडयूड़ा गांव में सोमवार रात भूस्खलन की चपेट में आए घर में सो रही एक महिला और उसके दो बच्चों की दबने से मौत हो गई। जिले के धार की तूनी क्षेत्र में देर रात पहाड़ी से आए मलबे की चपेट में आने से दो लोगों की जान चली गई, जबकि भीमताल बाईपास पर नाले में बहने से चार साल की बच्ची की जान चली गई।


    नदी के उफान में बह गईं मां-बेटी

    देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में मंगलवार तड़के बरसाती रपटे में आए तेज बहाव से दो गाड़ियां बह गई। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोगों को बचा लिया गया। कोटद्वार में कोल्हू नदी के उफान में महिला और उसकी एक साल की बेटी बह गई।


    उत्तराखंड में नदियां उफनाई, रास्ते बंद

    उत्तराखंड में कई नदियां उफान पर हैं। ऊधमसिंह नगर जिले में बारिश से सभी नदियों का जल स्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नानकसागर बांध से 4000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शारदा नदी का जलस्तर मंगलवार को एक लाख क्यूसेक से अधिक होने के कारण बैराज पर चार पहिया वाहनों का संचालन रोक दिया गया। दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 1,48,813 क्यूसेक दर्ज किया गया।


    जम्मू-कश्मीर में बारिश से कई रास्ते बाधित

    जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में मंगलवार को भारी बारिश हुई। पुंछ जिले में कई नाले उफान पर आ गए। पुंछ-मेंढर मार्ग पर गांव मंगनाड़ में मंगनाड़ नाले के उफान पर आने से मार्ग करीब दो घंटे बाधित रहा। इससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कठुआ जिले के बिलावर और रामकोट क्षेत्रों में भी बारिश हुई। पिछले 24 घंटे में कठुआ में 73 मिलीमीटर, कटड़ा में 62, पुंछ में 38.5 मिमी बारिश हुई।


    नदी का जलस्तर बढ़ा, 6 बच्चों समेत 10 फंसे

    जम्मू-कश्मीर के ही राजोरी जिले में मंगलवार को हुई भारी बारिश के बीच विभिन्न इलाकों में नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इसी दौरान बढून क्षेत्र में जमौला नदी में जलस्तर बढ़ने से 6 बच्चों समेत 10 लोग नदी के बीच फंस गए। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने तत्काल संयुक्त बचाव अभियान चलाकर सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जमौला नदी में पानी बढ़ने से कुछ लोग अचानक उसमें फंस गए थे। पुलिस जवानों और एसडीआरएफ टीम ने तुरंत पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। संयुक्त टीम ने सावधानीपूर्वक कार्रवाई करते हुए नदी में फंसे 10 लोगों, जिनमें 6 बच्चे भी शामिल थे, को सुरक्षित बाहर निकाला।


    कालका-शिमला ट्रैक 13 तक बंद

    हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर ब्रिज नंबर 57 के पास मिट्टी बहने से नैरो गेज ट्रेनों का संचालन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने इस ट्रैक पर चलने वाली सभी ट्रेनों को 13 सितंबर तक रद्द कर दिया है। क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और ट्रैक को सुरक्षित बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।

  • एमपी में अगले 4 दिन तेज बारिश के आसार, सतना-रीवा समेत 17 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में अगले 4 दिन तेज बारिश के आसार, सतना-रीवा समेत 17 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया और ट्रफ के असर से अगले चार दिन प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश होने का अनुमान है। मंगलवार को उमरिया और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है, जबकि सतना, रीवा, पन्ना समेत 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। लगातार बारिश को देखते हुए मैहर में मंगलवार को भी सभी शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी रहेगी।

    4 सितंबर तक कई संभागों में बारिश

    IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया और ट्रफ के कारण 4 सितंबर तक जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर, भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग में बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 1 और 2 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में तेज बारिश होगी। 3 सितंबर को भोपाल और ग्वालियर संभाग में भारी बारिश की संभावना है, जबकि 4 सितंबर को सिस्टम पश्चिम की ओर बढ़ते हुए उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग को प्रभावित करेगा।

    आज 17 जिलों में अलर्ट

    मंगलवार को उमरिया और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, कटनी, मैहर, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, जबलपुर, मंडला, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश हो सकती है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    मैहर में आज भी स्कूल बंद

    मैहर में लगातार भारी बारिश और नदी-नालों के उफान को देखते हुए कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने 1 सितंबर को सभी शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित किया है। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने सोमवार देर रात आदेश जारी किया।

    डैमों में 70% से ज्यादा पानी

    लगातार बारिश से प्रदेश के ज्यादातर डैमों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। अधिकांश बांधों में 70% तक पानी पहुंच चुका है और कुछ के गेट भी खोले गए हैं। हालांकि इंदौर और उज्जैन संभाग के डैमों की स्थिति अभी अपेक्षाकृत कमजोर है।

    भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर 1666.50 फीट तक पहुंच गया है। अब यह फुल टैंक लेवल से सिर्फ 0.30 फीट खाली है। बड़ा तालाब भरने के बाद भदभदा डैम के गेट खोले जाएंगे। इससे कलियासोत डैम का जलस्तर भी बढ़ेगा।

    अब तक 27.7 इंच बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक 702.9 मिमी यानी 27.7 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 782.6 मिमी यानी 30.8 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अभी 3.1 इंच बारिश कम हुई है। ओवरऑल बारिश सामान्य से 10% कम है। पूर्वी हिस्से में 5% और पश्चिमी हिस्से में 15% कम बारिश दर्ज की गई है।

    39 जिलों में 2 से 57% तक कम बारिश

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल मिलाकर 5% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ समेत जिलों में 4% से 53% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 4% से 53% तक कम बारिश हुई है।

    16 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    IMD के मुताबिक अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा…. भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अलर्ट जारी

    नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा…. भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अलर्ट जारी


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में 26 अगस्त को आई त्रासदी के बाद रविवार को भोटेकोशी नदी (Bhote Koshi River) का जलस्तर फिर बढ़ गया। इससे बाढ़ की नई चेतावनी जारी की गई है। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचावकर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बाढ़ में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 780 हो गई है, जबकि 2,202 लोग अभी लापता हैं।

    राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार को कहा कि भोटेकोशी नदी (Bhote Koshi River) का जलस्तर फिर बढ़ने से लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। उधर, बाढ़ प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। 20 हजार से ज्यादा बचावकर्मियों ने आपदा के पांचवें दिन रविवार को भी लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया।

    नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल (Foreign Minister Shishir Khanal) ने बताया कि अब तक 9500 लोगों को बचाया जा चुका है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित तीन जिलों के विभिन्न स्कूलों के 238 छात्र और 18 शिक्षक अभी लापता हैं।


    चीन की ओर बनी झील से खतरा

    माना जा रहा है कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर पराडिगखड पशुतांगखेड़ा में भूस्खलन के कारण यह बाढ़ आई थी। भोटेकोशी में पानी बढ़ने से घर, सड़कें और पुल बह गए। नेपाल में नए सिरे से बाढ़ की आशंका तब बढ़ी जब ढहने के बाद चीन की ओर झील बन गई। हालांकि, चीनी मीडिया के अनुसार, शनिवार को झील का आकार घटने लगा, जिससे खतरा घटा है।

    भारतीय टीम मदद में जुटी: बाढ़ के कारण एक दर्जन जलविद्युत प्रोजेक्ट में फंसे होने की आशंका है। इन्हें बचाने में भारत की 11 सदस्यीय टीम मदद कर रही है। त्रिशूली जलविद्युत परियोजना में सुरक्षाबल भारतीय सुरंग विशेषज्ञों की मदद से लोगों को निकालने में जुटे हैं। बारिश के बावजूद अभियान जारी है।


    गंडक-कोसी भी उफनाई
    पटना। नेपाल में तीन दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण गंडक और कोसी नदी में एक बार फिर उफान आ गया है। पिछले 24 घंटे में दोनों नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसी आशंका है कि सोमवार दोपहर तक पश्चिमी एवं पूर्वी चंपारण, सारण और गोपालगंज से यह पानी गुजरेगा।


    149 भारतीयों को बचाया

    नेपाल में बाढ़ के बाद 149 भारतीयों को बचाया गया है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को इन लोगों की सूची जारी की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में तैनात भारतीय फोरेंसिक टीम से भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने मुलाकात की। टीम मृतकों के डीएनए नमूनों की जांच करेगी।

  • उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील…. नेपाल तबाही के बाद CM ने किया अलर्ट

    उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील…. नेपाल तबाही के बाद CM ने किया अलर्ट


    देहरादून।
    नेपाल (Nepal) में फ्लैश फ्लड (Flash flood) से भारी तबाही के बाद अब उत्तराखंड (Uttarakhand) में 13 ग्लेशियल झीलों (Glacial lakes) को संवेदनशील माना गया है. इन झीलों से पहाड़ी इलाकों में खतरे की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने झीलों की नियमित निगरानी करने को कहा है. साथ ही सुरक्षा के इंतजाम मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

    मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन को जरूरी कदम उठाने को कहा है. उन्होंने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी करने के निर्देश दिए. इन इलाकों में आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने को कहा गया है. जरूरत के हिसाब से इनकी संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

    सीएम धामी ने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों का व्यापक सर्वे कराने को कहा है. इन झीलों की स्थिति की नियमित जांच होगी. पानी के स्तर पर भी नजर रखी जाएगी. झीलों के आकार में होने वाले बदलाव को भी रिकॉर्ड किया जाएगा।

    इसके अलावा झीलों के आसपास के पहाड़ी इलाकों की स्थिति की भी जांच होगी. संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी. इससे किसी भी आपदा की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सकेगा.


    सेंसर और वार्निंग सिस्टम होंगे मजबूत

    मुख्यमंत्री ने संवेदनशील इलाकों में आधुनिक सेंसर लगाने पर जोर दिया है. पानी का स्तर मापने वाले उपकरण भी लगाए जाएंगे. संचार व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा. इन तकनीकी संसाधनों से खतरे की जानकारी समय पर मिल सकेगी.

    अधिकारियों को सुरक्षित निकासी के रास्तों की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए हैं. स्थानीय स्तर पर चेतावनी व्यवस्था मजबूत की जाएगी. राहत और बचाव की तैयारियों को भी बेहतर किया जाएगा. आपदा की स्थिति में लोगों को जल्द सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।

    नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ के बाद उत्तराखंड में भी आपदा को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है. इसी को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सभी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बैठक की गई.

    बैठक में आपदा से निपटने की तैयारियों की समीक्षा हुई. जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में संभावित खतरे वाले इलाकों की नियमित निगरानी करने को कहा गया. किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि दिखने पर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देने के निर्देश दिए गए।


    चार झीलों का सर्वे पूरा

    राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में कुल 13 ग्लेशियल झीलों को संवेदनशील चिन्हित किया गया है. इनमें से चार झीलों का सर्वे पहले ही पूरा किया जा चुका है।

    बाकी संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वे कराया जाएगा. इन झीलों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी. चमोली जिले की सरस्वती ताल और उत्तरकाशी जिले की केदारताल के सर्वे के लिए जल्द विशेषज्ञों की टीम भेजी जाएगी।

    संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे के बारे में जानकारी दी जाएगी. उन्हें आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया जाएगा. लोगों को सुरक्षित स्थान और निकासी के रास्तों की जानकारी दी जाएगी।

    सरकार का जोर आपदा से पहले तैयारी मजबूत करने पर है. नियमित निगरानी और समय पर चेतावनी से बड़े खतरे को कम करने की कोशिश की जा रही है. संवेदनशील ग्लेशियल झीलों पर नजर रखने के साथ राहत और बचाव व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

  • Weather: मानसून फिर हुआ सक्रिय…. दिल्ली समेत देश के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट

    Weather: मानसून फिर हुआ सक्रिय…. दिल्ली समेत देश के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    मौसम विभाग (IMD) ने 14 अगस्त को उत्तर-पश्चिम (North-west), मध्य, पूर्व, पूर्वोत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत (South India) के कई इलाकों (Rain) में बारिश का अनुमान जताया है. इस दौरान कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy Rain) हो सकती है. वहीं, कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ मौसम खराब रहने की आशंका है।

    तटीय पश्चिम बंगाल (Coastal West Bengal) के ऊपर बना डिप्रेशन अगले 24 घंटे में उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड की ओर जा सकता है. इसके प्रभाव से पूर्वी भारत के कई हिस्सों में तेज बारिश हो सकती है. मॉनसून ट्रफ भी सक्रिय है और अपनी सामान्य स्थिति के आसपास बनी हुई है।


    दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत में बारिश

    दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 14 अगस्त को ज्यादातर इलाकों में बारिश होने का अनुमान है. हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर रुक-रुककर बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है. आने वाले दिनों में भी इन इलाकों में बारिश का दौर जारी रह सकता है.


    यूपी में 14 से 18 अगस्त तक होगी बारिश

    उत्तर प्रदेश में भी मानसून सक्रिय रहेगा. पूर्वी यूपी में 14 से 18 अगस्त तक ज्यादातर इलाकों में बारिश का अनुमान है, जबकि पश्चिमी यूपी में 15 और 16 अगस्त को कई जगहों पर बारिश हो सकती है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 अगस्त तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है. पश्चिमी यूपी में 14 से 18 अगस्त के बीच भी कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. कई इलाकों में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा.


    हिमाचल और उत्तराखंड के लिए भी अलर्ट

    हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 19 अगस्त तक कई से ज्यादातर इलाकों में बारिश होने का अनुमान है. 14 अगस्त को दोनों राज्यों में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. हिमाचल प्रदेश में बहुत भारी बारिश की भी आशंका है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी मौसम गीला रहने की संभावना है. 14 अगस्त को यहां कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. पूर्वी राजस्थान में भी भारी बारिश का अनुमान है, जबकि पश्चिमी राजस्थान में छिटपुट बारिश हो सकती है.


    मध्य भारत में भी भारी बारिश का दौर

    छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मॉनसून का असर तेज रहेगा. 14 अगस्त को छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में ज्यादातर जगहों पर बारिश हो सकती है. पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई इलाकों में बारिश का अनुमान है. पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. छत्तीसगढ़ में स्थिति ज्यादा गंभीर रह सकती है. यहां भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है. लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।


    बंगाल, झारखंड और ओडिशा में बारिश

    पूर्वी भारत में गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा 14 अगस्त को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रह सकते हैं. इन राज्यों में कई से ज्यादातर स्थानों पर बारिश होने और कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है. तटीय पश्चिम बंगाल के ऊपर बना डिप्रेशन उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड को प्रभावित कर सकता है. इन इलाकों में बारिश के साथ गरज, बिजली और तेज झोंके वाली हवाएं चल सकती हैं. गंगीय पश्चिम बंगाल में थंडरस्क्वॉल की स्थिति भी बन सकती है, जहां हवा की रफ्तार 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है.


    पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत में भी बारिश

    पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई से ज्यादातर इलाकों में बारिश हो सकती है. अरुणाचल प्रदेश तथा असम और मेघालय में कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना है. नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी बारिश हो सकती है. कई स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा रहेगा. पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र में कई इलाकों में बारिश हो सकती है. गुजरात क्षेत्र में भी ज्यादातर स्थानों पर बारिश का अनुमान है और कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. मराठवाड़ा तथा सौराष्ट्र और कच्छ में छिटपुट से कुछ इलाकों में बारिश होने की संभावना है।


    दक्षिण भारत में भी खूब बरसेगा मॉनसून

    दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक और केरल में कई से ज्यादातर इलाकों में बारिश होने का अनुमान है. केरल और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के कुछ हिस्सों में गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने की आशंका है. आईएमडी के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 40-50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है।

    बंगाल की खाड़ी में समुद्र में रहेगा हलचल
    बंगाल की खाड़ी में भी मौसम खराब रहने की संभावना है. 14 अगस्त की सुबह तक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और इससे लगे ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों पर 45-55 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. हवा के झोंकों की रफ्तार 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. इन क्षेत्रों के आसपास समुद्र के उग्र रहने की आशंका को देखते हुए आईएमडी ने मछुआरों को उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों के पास या समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है।

  • खराब मौसम ने अमरनाथ यात्रा पर लगाया ब्रेक…. भारी बारिश-भूस्खलन का अलर्ट

    खराब मौसम ने अमरनाथ यात्रा पर लगाया ब्रेक…. भारी बारिश-भूस्खलन का अलर्ट


    जम्मू।
    अगर आप 19 जुलाई को अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) पर निकलने वाले थे, तो यह खबर आपके लिए है. खराब मौसम (Bad Weather) के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) को फिलहाल रोक दिया है. पहलगाम (Pahalgam) और बालटाल (Baltal), दोनों रास्तों से किसी भी श्रद्धालु को आगे जाने की अनुमति नहीं होगी. जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप में श्रद्धालुओं को रोक दिया गया है. खराब मौसम ने इस बार अमरनाथ यात्रा की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

    प्रशासन ने 19 जुलाई 2026 से यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया है. यह रोक यात्रा के दोनों प्रमुख मार्गों पहलगाम और बालटाल पर लागू रहेगी. प्रशासन के मुताबिक, मौसम विभाग ने अगले कुछ समय के लिए खराब मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है. पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश, फिसलन और भूस्खलन जैसी स्थितियों की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्राथमिकता है, इसलिए जोखिम उठाने की बजाय यात्रा को फिलहाल रोकना जरूरी समझा गया।

    इस फैसले के बाद जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास बेस कैंप में मौजूद श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई. उन्हें बेस कैंप में ही रुकने और प्रशासन के अगले निर्देश का इंतजार करने को कहा गया है।

    हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ पहुंचते हैं. लेकिन ऊंचाई वाले इस इलाके में मौसम कुछ ही घंटों में बदल जाता है. ऐसे में प्रशासन समय-समय पर मौसम और रास्तों की स्थिति की समीक्षा करता है. अगर हालात अनुकूल नहीं होते, तो यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है।

    अधिकारियों ने कहा है कि जैसे ही मौसम साफ होगा, उसी हिसाब से फैसला लिया जाएगा. तब तक श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें. यानी फिलहाल बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालुओं को थोड़ा इंतजार करना होगा. मौसम की मार थमेगी, रास्ते सुरक्षित होंगे, तभी यात्रा दोबारा आगे बढ़ेगी।


    राजौरी में बारिश ने बिगाड़े हालात

    जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं. तेज बारिश के चलते जिले के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जबकि कई निचले इलाकों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है. जिला प्रशासन ने लोगों से बिना जरूरत यात्रा न करने, नदियों और नालों से दूर रहने तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. प्रशासन का कहना है कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और हालात पर नजर रखी जा रही है।


    उत्तराखंड में भी बारिश की वजह से यात्रा पर असर

    लगातार हो रही बारिश का असर उत्तराखंड की तीर्थ यात्राओं पर भी पड़ा है. रुद्रप्रयाग जिले में गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर शुक्रवार को पहाड़ी से बोल्डर और मलबा गिरने के कारण रास्ता कुछ समय के लिए बंद हो गया था. हालांकि राहत एवं बचाव दलों ने मलबा हटाकर पैदल मार्ग फिर से खोल दिया, लेकिन सुरक्षा कारणों से घोड़ा-खच्चर और डोली सेवा फिलहाल स्थगित रखी गई है. प्रशासन लगातार मार्ग की निगरानी कर रहा है।

    वहीं, पिथौरागढ़ जिले में कैलाश-मानसरोवर यात्रा भी प्रभावित हुई है. गरबाधार क्षेत्र में भूस्खलन के कारण गुंजी मार्ग बंद हो गया. इसके चलते 50 श्रद्धालुओं वाले चौथे जत्थे को धारचूला बेस कैंप पर ही रोक दिया गया. प्रशासन का कहना है कि रास्ता सेफ होने के बाद ही यात्रियों को आगे भेजा जाएगा।

    राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों (DEOC) को 24 घंटे एक्टिव रखने, राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने और भूस्खलन संभावित मार्गों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं. साथ ही चारधाम यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करें. भारी बारिश के दौरान नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।

  • देशभर में सक्रिय हुआ मानसून…. दिल्ली-यूपी समेत 18 राज्यों में आज भारी बारिश का अलर्ट!

    देशभर में सक्रिय हुआ मानसून…. दिल्ली-यूपी समेत 18 राज्यों में आज भारी बारिश का अलर्ट!


    नई दिल्ली।
    देशभर में मानसून (Monsoon) अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और कई राज्यों में इसका असर लगातार तेज होता जा रहा है. इसी बीच मौसम विभाग ने 10 जुलाई के लिए दिल्ली (Delhi), उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सहित 18 राज्यों में भारी बारिश (Heavy rain), तेज आंधी और खराब मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है. विभाग के अनुसार कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. ऐसे में लोगों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने और मौसम से जुड़ी आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले 48 घंटे के दौरान बारिश का दौर और तेज हो सकता है. दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना है. कई स्थानों पर जलभराव, यातायात प्रभावित होने और पेड़ गिरने जैसी घटनाएं भी सामने आ सकती हैं।


    पहाड़ी राज्यों में बढ़ सकता है खतरा

    हिमालयी राज्यों में लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन, चट्टानें गिरने और नदियों-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है. पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. प्रशासन भी संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए है.


    पूर्वी भारत में बिजली गिरने का खतरा

    पूर्वी भारत के कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है. मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है.


    देश के 18 राज्यों में बारिश और तेज आंधी का अलर्ट

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 10 जुलाई के लिए देश के 18 राज्यों में भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की है. प्रभावित राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, महाराष्ट्र और केरल शामिल हैं. विभाग के अनुसार कई इलाकों में 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. वहीं, कुछ राज्यों में बड़े आकार के ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है।


    मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी

    समुद्र और नदी किनारे रहने वाले लोगों के साथ-साथ मछुआरों को भी सतर्क रहने को कहा गया है. विभाग ने खराब मौसम को देखते हुए समुद्र में नहीं जाने और नदी तटीय क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह जारी की है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. इसके साथ ही मानसून ट्रफ उत्तर-पश्चिम राजस्थान से उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है. यही प्रणाली कई राज्यों में लगातार बारिश और तेज हवाओं की वजह बन रही है।


    किन राज्यों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर?

    मौसम विभाग के अनुसार 10 जुलाई को दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत कुल 18 राज्यों में कहीं भारी तो कहीं बहुत भारी बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक का दौर देखने को मिल सकता है. कई जिलों के लिए अलग-अलग स्तर के अलर्ट भी जारी किए गए हैं. आगे हम राज्यवार और जिला स्तर पर जानेंगे कि 10 जुलाई को कहां सबसे ज्यादा बारिश की संभावना है, किन जिलों में तेज आंधी चल सकती है और किन इलाकों में लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत होगी।

  • पूरे देश में सक्रिय हुआ मानसून….. आज दिल्ली-NCR समेत 20 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट

    पूरे देश में सक्रिय हुआ मानसून….. आज दिल्ली-NCR समेत 20 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    मानसून (Monsoon) देश के सभी राज्यों में पहुंच चुका है। गुजरात (Gujarat) में शुक्रवार रात और शनिवार सुबह तेज बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। गुजरात (Gujarat) के मेंडरडा इलाके (Mendarda) में समधियाला गांव के पास बाढ़ के पानी में चार गाड़ियां फंस गईं, जिसमें से 19 लोगों का बचाया गया। महाराष्ट्र (Maharashtra) के भिवंडी में बाजार में करीब 3 फीट तक पानी भर गया। दुकानें बंद हो गईं। लोग कमर तक डूबकर सड़क पार कर रहे हैं।

    राजस्थान के जयपुर में तेज बारिश के बाद सवाई मानसिंह हॉस्पिटल के माइनर ओटी में पानी भर गया। यहां से मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। मध्य प्रदेश के भोपाल-इंदौर समेत 26 से ज्यादा जिलों में शुक्रवार को तेज बारिश हुई। उज्जैन में दो दिन पहले पुलिया पार करते समय बाइक समेत बहे पंचायत सहायक का शव भी बरामद हुआ है। उत्तर प्रदेश के 20 जिलों में बारिश हुई। कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पानी भर गया। कारें-बाइक आधी डूब गईं।

    वहीं जम्मू-कश्मीर में शनिवार सुबह रामनगर-उधमपुर रोड पर कौघा के पास भूस्खलन (लैंडस्लाइड)से सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर और मलबा आ गया, जिसके कारण रास्ता बंद कर दिया गया। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग स्थित केदारघाटी में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से जेसीबी और उसके दो कर्मचारी नदी के तेज बहाव में फंस गए। एसडीआरएफ और जल पुलिस की टीम ने तत्काल बचाव अभियान चलाकर चालक और उसके सहयोगी को सुरक्षित बाहर निकाला।


    किन 20 राज्यों के लिए आंधी-बारिश का अलर्ट हुआ जारी?

    मौसम विभाग ने रविवार के लिए 20 राज्यों में आंधी-बारिश और तूफान को लेकर अलर्ट जारी किया है। बारिश की चेतावनी वाले राज्यों में दिल्ली से लेकर यूपी-बिहार और राजस्थान सहित पंजाब-हरियाणा भी शामिल है। 61 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अलर्ट भी जारी किया गया है। अगले चार दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून गुजरात, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ेगा। विभाग के अनुसार, अगले चार-पांच दिनों तक मध्य भारत में मानसून सक्रिय रहेगा।


    दिल्ली एनसीआर के लिए मौसम विभाग ने यलो अलर्ट किया जारी

    दिल्ली एनसीआर के कई इलाकों में भी शनिवार को बारिश हुई, जिससे लोगों की गर्मी से राहत मिली। दिन के ज्यादातर समय आसमान में बादल छाए रहे और सुबह के समय हवा में नमी 77 प्रतिशत थी। मौसम विभाग ने रविवार के लिए भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी-तूफान की संभावना है।


    मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट, स्कूल-कॉलेज बंद कराए

    बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने मुंबई में स्कूल और कॉलेज दोपहर के सत्र के लिए बंद करा दिए हैं। मौसम विभाग ने यहां बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। बीएमसी ने नागरिकों से यह भी अपील की है कि वे घर से तभी निकलें जब बहुत जरूरी हो। इस बीच मुंबई के ठाणे शहर के कलवा इलाके में शनिवार सुबह भारी बारिश के दौरान दो-पहिया वाहनों पर पेड़ गिरने से दो लोग घायल हो गए। दहिसर ईस्ट और अंधेरी वेस्ट के बीच मेट्रो में तकनीकी खराबी के कारण पीक आवर्स में ट्रेनों की सर्विस डेढ़ घंटे प्रभावित रही। लाइन 2-ए पर दहिसर ईस्ट और कंदरपाड़ा मेट्रो स्टेशनों के बीच भी तकनीकी खराबी के कारण परिचालन प्रभावित हुआ।


    हिमाचल : लाहौल में सड़क बही नीलकंठ झील यात्रा रुकी

    हिमाचल प्रदेश में लाहौल घाटी में उफनाए चोखंग नाले ने मूरिंग-नैनगार सड़क का करीब 200 मीटर हिस्सा बहा दिया। इससे प्रसिद्ध नीलकंठ झील यात्रा रोक दी गई है। रामपुर के गानवी खड्ड पर बना अस्थायी पुल भी बह गया, जिससे कई पंचायतों का संपर्क कट गया। कुल्लू में ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ने पर राफ्टिंग पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। चंबा-तीसा मार्ग भूस्खलन से कुछ समय के लिए बंद रहा, जबकि 12 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।


    भारी बारिश से उड़ानों पर असर, पांच विमान दूसरे हवाई अड्डों पर उतारे गए

    मुंबई में शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा। खराब मौसम, कम दृश्यता और सुरक्षित लैंडिंग में दिक्कत के कारण मुंबई आने वाली पांच उड़ानों को दूसरे हवाई अड्डों की ओर मोड़ना पड़ा। हवाई अड्डे के सूत्रों के अनुसार, इनमें इंडिगो की तीन और एअर इंडिया की दो उड़ानें शामिल थीं। इसके अलावा 17 अन्य उड़ानों के पायलटों ने भी मौसम की स्थिति को देखते हुए मार्ग में बदलाव किया।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, सात जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट; सड़कों पर बही बाइकें, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

    एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, सात जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट; सड़कों पर बही बाइकें, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात


    मध्य प्रदेश :
    में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और इसके साथ ही कई जिलों में भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने बालाघाट और डिंडौरी में अति भारी वर्षा तथा देवास, हरदा, बैतूल, पांढुर्णा और छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई स्थानों पर जलभराव, तेज बहाव और यातायात बाधित होने जैसी स्थितियां सामने आई हैं।

    प्रदेश में मानसून अब जबलपुर, भोपाल, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, सागर और इंदौर संभाग के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले एक-दो दिनों में मानसून उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के शेष क्षेत्रों को भी पूरी तरह कवर कर लेगा। इसके साथ ही प्रदेशभर में बारिश की गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई गई है।

    सीहोर जिले के आष्टा में मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद सड़कें नदी जैसी दिखाई देने लगीं। कई इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया और तेज बहाव के कारण सड़क किनारे खड़ी मोटरसाइकिलें बहने लगीं। स्थानीय लोगों ने वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का प्रयास किया, जबकि कई स्थानों पर आवागमन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। इस घटना के वीडियो भी व्यापक रूप से सामने आए, जिनमें बारिश की तीव्रता स्पष्ट दिखाई दे रही है।

    बालाघाट में बुधवार तड़के से लगातार हो रही बारिश ने किसानों के लिए राहत लेकर आई है। लंबे इंतजार के बाद अच्छी वर्षा मिलने से अब खेतों में बोनी का कार्य तेज होने की उम्मीद है। हालांकि प्रशासन ने लोगों को आकाशीय बिजली, तेज हवाओं और भारी वर्षा के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश को देखते हुए कुछ सरकारी सेवाओं के संचालन समय में भी बदलाव किया गया है।

    मौसम विभाग ने भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, सतना, सिवनी, मंडला, सीधी, सिंगरौली और कई अन्य जिलों में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना व्यक्त की है। वहीं प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया गया है।

    लगातार वर्षा के कारण कई स्थानों पर जोखिम भरी घटनाएं भी सामने आई हैं। खरगोन जिले में तेज बहाव के बावजूद यात्रियों से भरी एक निजी बस को पुलिया पार कराए जाने का मामला चर्चा में रहा। दूसरी ओर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आकाशीय बिजली गिरने और तेज बहाव की घटनाओं में जनहानि की भी सूचना मिली है। प्रशासन ने लोगों से नदी, नालों और पुल-पुलियों को पार करने में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

    मौसम विभाग के अनुसार जून महीने में प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने के संकेत हैं। प्रदेश की वार्षिक औसत वर्षा का बड़ा हिस्सा जुलाई में ही दर्ज होता है और इसी अवधि में खेती-किसानी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बारिश होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में वर्षा का यह क्रम बना रहता है तो कृषि गतिविधियों को गति मिलेगी, हालांकि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों पर लगातार निगरानी बनाए रखना आवश्यक होगा।

  • तेजी से आगे बढ़ रहा मानसून…. 25 राज्यों में 18 जून तक आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट

    तेजी से आगे बढ़ रहा मानसून…. 25 राज्यों में 18 जून तक आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    तेजी से आगे बढ़ रहे दक्षिण्-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) और उत्तरी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से मौसम (Weather:) में व्यापक बदलाव आया है। पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) से तटीय कर्नाटक तक गरज और चमक के साथ बारिश हुई है। साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों में 50-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान ने भी कहर बरपाया है। बिहार में बिजली गिरने से 10 लोगों की जान चली गई है, पंजाब में भी वर्षा जनित घटनाओं में 3 लोगों की जान चली गई है। मौसम में यह बदलाव कम से कम 18 जून तक जारी रहने की प्रबल संभावना है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर, हापुड़, बिजनौर, शामली, मुरादाबाद, संभल, हाथरस और मथुरा में आंधी-तूफान और गरज के साथ बारिश हुई। हरियाणा के गोहाना, सोनीपत और रोहतक समेत कई जिलों में भी ऐसा ही हाल रहा। राजस्थान के डीग, भरतपुर, बयाना और धौलपुर में भी तेज हवाएं चलीं और छिटपुट बारिश दर्ज की गई। बिहार में बारिश के दौरान बिजली गिरने से खगड़िया में पांच लोगों की मौत हो गई और 7 लोग झुलस गए, जबकि भागलपुर, मधेपुरा, सहरसा और भोजपुर जिलों में भी वज्रपात से एक-एक लोगों की जान चली गई।

    जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, चंडीगढ़, पंजाब और छत्तीसगढ़ में भी व्यापक वर्षा हुई। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, झारखंड, ओडिशा और तटीय कर्नाटक में भारी बारिश दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश में रोहतांग सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। कुल्लू और लाहौल घाटी में झमाझम बारिश दर्ज की गई। केरल में कुछ जगहों पर 12-20 सेमी तक वर्षा रिकॉर्ड की गई। असम, बंगाल, त्रिपुरा और तमिलनाडु में कुछ जगहों पर 7-11 सेमी वर्षा हुई। मध्य प्रदेश, कोंकण, महाराष्ट्र और गुजरात में कुछ जगहों पर 40-60 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। उधर, विदर्भ में कई जगहों पर लू जैसी स्थिति रही और रातें गर्म रहीं।


    18 तक उत्तर-पश्चिम में बदला रहेगा मौसम

    मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 18 जून तक अलग-अलग स्थानों पर गरज और चमक के साथ बारिश होने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया है। इस दौरान कुछ जगहों पर बिजली भी गिर सकती है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और पूर्वोत्तर भारत के असम समेत सभी राज्यों में भी अगले तीन से चार दिनों तक 40-50 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई है।


    बदरीनाथ हाईवे पांच घंटे बंद रहा

    उत्तराखंड में बदरीनाथ हाईवे पर भनेरपाणी में पहाड़ी से भूस्खलन होने पर करीब पांच घंटे तक वाहनों की आवाजाही ठप रही। इस दौरान हाईवे के दोनों ओर करीब 2,000 तीर्थयात्री फंसे रहे। बाद में कार्यदायी संस्था एनएचआईडीसीएल की जेसीबी ने मलबे का निस्तारण किया। इसके बाद शुक्रवार सुबह आठ बजे वाहनों की आवाजाही सुचारु हो पाई। भनेरपाणी में थोड़ी बारिश होने पर भी मलबा और पत्थर हाईवे पर गिर रहे हैं।


    पूर्वी उत्तर प्रदेश की दहलीज पर मानसून

    दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वी-उत्तरी उत्तर प्रदेश की सीमा के करीब पहुंच गया है। आईएमडी के अनुसार, शुक्रवार को मानसून प. बंगाल और बिहार के कुछ और भागों एवं ओडिसा व झारखंड के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है। अगले 2-3 दिनों में मानसून के मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाकी हिस्सों, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। इस तरह, तीन दिन की देरी से केरल पहुंचा मानसून 9 दिनों के भीतर ही 19 राज्यों तक पहुंच गया है।


    अल नीनो का साया

    मौसम विभाग के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में इस समय अल नीनो की स्थितियां सक्रिय हैं। मौसम विभाग ने कहा कि समुद्र की सतह के बढ़ते तापमान का असर अब हमारे वायुमंडल पर भी दिखने लगा है। महासागर और वायुमंडल की यह साझा प्रणाली अब पूरी तरह से अल नीनो के लक्षणों को दर्शा रही है। आने वाले महीनों में अल नीनो का प्रभाव और अधिक गहराने की आशंका है। आमतौर पर अल नीनो के सक्रिय होने से भारत में कम बारिश या सूखे जैसे हालात पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। भारत में इससे पहले आखिरी बार अल नीनो की स्थितियां साल 2023 में देखी गई थीं।