Tag: Amitabh Bachchan

  • जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में लेट गए थे किशोर कुमार, और बन गया सदाबहार सुपरहिट गाना

    जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में लेट गए थे किशोर कुमार, और बन गया सदाबहार सुपरहिट गाना


    नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं, जो कलाकारों की प्रतिभा और उनके जुनून को नई पहचान देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा महान गायक किशोर कुमार और फिल्म ‘शराबी’ के मशहूर गीत ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ से जुड़ा हुआ है। यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बहुत कम लोग जानते हैं।

    साल 1984 में निर्देशक प्रकाश मेहरा अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘शराबी’ का निर्माण कर रहे थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे और उनके किरदार की भावनाओं को दर्शाने के लिए गीतकार अंजान ने एक बेहतरीन गीत लिखा था। संगीतकार बप्पी लहरी ने इस गीत को मधुर धुन से सजाया। अब जरूरत थी ऐसी आवाज की, जो इस गीत की आत्मा को जीवंत कर सके, और इसके लिए चुना गया नाम था किशोर कुमार।

    जब किशोर कुमार के सामने यह गीत रिकॉर्डिंग के लिए रखा गया, तो उन्होंने शुरुआत में इसे गाने से इनकार कर दिया। रिकॉर्डिंग स्टूडियो में मौजूद लोग हैरान रह गए। कुछ देर बाद उन्होंने गीत की स्थिति और उसके भाव को गहराई से समझा। उन्हें बताया गया कि पर्दे पर अमिताभ बच्चन एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जो शराब के नशे में है और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहा है।

    यहीं से किशोर कुमार की रचनात्मकता सामने आई। उन्होंने कहा कि यदि इस गीत में एक शराबी का वास्तविक एहसास पैदा करना है, तो वह इसे सामान्य तरीके से खड़े होकर नहीं गाएंगे। उनकी शर्त थी कि रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें लेटने दिया जाए ताकि वे उस मानसिक और शारीरिक स्थिति को महसूस कर सकें, जिसमें फिल्म का पात्र दिखाई देगा।

    स्टूडियो में मौजूद सभी लोग उनकी यह बात सुनकर चौंक गए। हालांकि, किशोर कुमार अपनी बात पर अड़े रहे। आखिरकार उनकी इच्छा पूरी करने के लिए रिकॉर्डिंग रूम में एक बड़ी टेबल मंगवाई गई। किशोर कुमार उस पर लेट गए, माइक को उसी हिसाब से सेट किया गया और फिर रिकॉर्डिंग शुरू हुई।

    इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया। आशा भोसले के साथ किशोर कुमार ने ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ को अपनी आवाज दी और गीत में ऐसा जादू भर दिया कि वह रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान आशा भोसले भी किशोर कुमार के इस अनोखे अंदाज को देखकर हैरान रह गई थीं।

    यह गीत न केवल फिल्म ‘शराबी’ की पहचान बना, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय युगल गीतों में भी शामिल हो गया। दशकों बाद भी जब यह गाना बजता है, तो श्रोता उसी उत्साह और भावनाओं के साथ इसे सुनते हैं। किशोर कुमार की यही विशेषता थी कि वह केवल गीत नहीं गाते थे, बल्कि उसे जीते थे। शायद यही कारण है कि उनकी आवाज और उनके गाए गीत आज भी करोड़ों दिलों में जीवित हैं।

  • समस्याओं को सुलझाने का आसान तरीका बताया, अमिताभ बच्चन का अनुभव आया सामने

    समस्याओं को सुलझाने का आसान तरीका बताया, अमिताभ बच्चन का अनुभव आया सामने


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन एक बार फिर अपने अनुशासन और कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अपने हालिया ब्लॉग में बताया कि वह देर रात तक काम करते हैं और कई बार सुबह 4 बजे तक अपने प्रोजेक्ट्स में व्यस्त रहते हैं। 83 साल की उम्र में भी उनका काम के प्रति समर्पण पहले जैसा ही मजबूत है। ब्लॉग में उन्होंने फैंस को भी स्वास्थ्य का ध्यान रखने और गर्मी में हाइड्रेटेड रहने की सलाह दी।

    ‘प्रॉब्लम हमेशा प्रॉब्लम रहती है’  बिग बी का जीवन मंत्र
    अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में समस्याओं को लेकर एक गहरी सोच साझा की। उनके अनुसार,
    “प्रॉब्लम की अच्छी बात यह है कि वे बाद में भी प्रॉब्लम ही रहती हैं, इसलिए उन्हें तुरंत हल करने का दबाव नहीं होना चाहिए।” उनका कहना है कि हर समस्या हमें कुछ नया सिखाती है और समय के साथ हम उनसे निपटना सीखते हैं। यह अनुभव इंसान को अधिक समझदार बनाता है।

    पॉजिटिविटी और कॉन्फिडेंस पर जोर
    उन्होंने आगे लिखा कि जीवन में केवल समस्याओं को हल करना ही जरूरी नहीं, बल्कि अनिश्चितताओं को स्वीकार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
     बिग बी के अनुसार, कॉन्फिडेंस और पॉजिटिविटी ही वह आधार हैं, जिनसे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है। उनका मानना है कि अनिश्चितताएं ही जीवन को दिलचस्प और जीने योग्य बनाती हैं।

    लगातार सक्रिय है करियर
    वर्क फ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन जल्द ही फिल्म सेक्शन 84 में नजर आ सकते हैं। इसके अलावा वह बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट कल्कि 2898 एडी -पार्ट 2 का भी हिस्सा हैं, जिसमें उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाया है। पहले भाग में उनके अभिनय की काफी सराहना हुई थी, और दूसरे पार्ट से भी दर्शकों को बड़ी उम्मीदें हैं।

    एक प्रेरणा बने हुए हैं बिग बी
    समय बदल गया है, उम्र बढ़ गई है, लेकिन अमिताभ बच्चन का काम करने का जुनून और जीवन को देखने का नजरिया आज भी उतना ही मजबूत है। उनका यह संदेश कि “समस्याएं जीवन का हिस्सा हैं” हर उम्र के लोगों के लिए एक सीख की तरह है।

  • 15 साल के वैभव की धमाकेदार पारी पर बिग बी हुए इम्प्रेस, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

    15 साल के वैभव की धमाकेदार पारी पर बिग बी हुए इम्प्रेस, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज


    नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में अपने शानदार प्रदर्शन से सुर्खियां बटोर रहे युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी ने न सिर्फ क्रिकेट फैंस को प्रभावित किया है, बल्कि बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन भी उनके खेल के कायल हो गए हैं। वैभव की धमाकेदार पारियों के बाद सोशल मीडिया पर उनकी चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, अमिताभ बच्चन ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करते हुए वैभव सूर्यवंशी की जमकर सराहना की। उन्होंने 15 वर्षीय इस युवा खिलाड़ी की प्रतिभा को “अद्भुत” बताया और उनकी बल्लेबाजी की तुलना करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में लिखा कि इस उम्र में तो लोग सामान्य खेल भी ठीक से नहीं खेल पाते, जबकि वैभव बड़े मंच पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।

    बिग बी के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। जहां कई फैंस ने अमिताभ बच्चन की तारीफ की, वहीं कुछ लोगों ने इस पोस्ट पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी दीं। हालांकि अमिताभ बच्चन अक्सर अपने विचारों और ट्वीट्स को लेकर चर्चा में रहते हैं, और एक बार फिर उन्होंने सुर्खियां बटोर ली हैं।

    दूसरी ओर, वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन IPL 2026 में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने हाल ही में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मात्र 37 गेंदों में 103 रनों की विस्फोटक पारी खेली थी। इसके बाद गुजरात टाइटन्स के खिलाफ क्वालिफायर मुकाबले में भी उन्होंने 47 गेंदों में 96 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

    भले ही उनकी टीम को गुजरात के खिलाफ जीत नहीं मिली, लेकिन वैभव की बल्लेबाजी ने सभी का दिल जीत लिया। कम उम्र में इतने बड़े मंच पर इस तरह का प्रदर्शन उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा साबित कर रहा है।

    अमिताभ बच्चन का यह रिएक्शन भी इस बात का संकेत है कि वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ क्रिकेट जगत ही नहीं, बल्कि फिल्म और मनोरंजन जगत में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।

  • “परवीन बाबी को लगता था अमिताभ बच्चन उनकी हत्या करना चाहते हैं” – पूजा भट्ट का बड़ा खुलासा

    “परवीन बाबी को लगता था अमिताभ बच्चन उनकी हत्या करना चाहते हैं” – पूजा भट्ट का बड़ा खुलासा


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की सबसे ग्लैमरस और चर्चित अभिनेत्रियों में गिनी जाने वाली परवीन बाबी की जिंदगी जितनी चमकदार पर्दे पर नजर आती थी उतनी ही दर्द और अकेलेपन से भरी हुई असल जिंदगी में थी। अब अभिनेत्री पूजा भट्ट ने परवीन बाबी को लेकर कुछ ऐसे खुलासे किए हैं जिन्होंने एक बार फिर बॉलीवुड के उस दर्दनाक दौर की याद दिला दी है।

    महेश भट्ट की बेटी और अभिनेत्री पूजा भट्ट ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में परवीन बाबी के आखिरी दिनों को याद करते हुए कहा कि वह मानसिक रूप से बेहद परेशान थीं। पूजा ने बताया कि उन्हें आज भी वह समय याद है जब परवीन बाबी को यह डर सताने लगा था कि अमिताभ बच्चन उन्हें मारना चाहते हैं।

    पूजा भट्ट ने पत्रकार विक्की लालवानी को दिए इंटरव्यू में कहा कि जब परवीन बाबी विदेश से लौटकर आई थीं तब वह स्टारडस्ट मैगजीन के ऑफिस में बैठकर लगातार जेरॉक्स मशीन का इस्तेमाल कर रही थीं और अमिताभ बच्चन के खिलाफ इंटरव्यू दे रही थीं। पूजा के मुताबिक परवीन बाबी को लगता था कि अमिताभ बच्चन अभी भी उनकी हत्या करना चाहते हैं।

    इतना ही नहीं पूजा ने यह भी खुलासा किया कि परवीन बाबी खाने-पीने की चीजों को लेकर बेहद डरी हुई रहती थीं। उन्हें शक था कि फिल्म इंडस्ट्री के लोग उनके खाने में जहर मिला रहे हैं। यही वजह थी कि वह सिर्फ अंडे खाती थीं क्योंकि उन्हें वही सुरक्षित लगता था।

    हालांकि पूजा भट्ट ने यह भी साफ कहा कि वह डॉक्टर नहीं हैं इसलिए किसी बीमारी को लेकर दावा नहीं कर सकतीं लेकिन इतना जरूर था कि परवीन बाबी मानसिक रूप से ठीक नहीं थीं। बाद में जांच में सामने आया था कि वह सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं।

    परवीन बाबी और अमिताभ बच्चन ने साथ में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया था जिनमें दीवार अमर अकबर एंथोनी काला पत्थर शान और नमक हलाल जैसी फिल्में शामिल हैं। दोनों की ऑनस्क्रीन जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। एक समय उनके अफेयर की अफवाहें भी उड़ी थीं लेकिन दोनों कलाकारों ने इन खबरों को कभी स्वीकार नहीं किया।

    1980 के दशक में परवीन बाबी ने अमिताभ बच्चन के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अमिताभ बच्चन एक अंतरराष्ट्रीय गैंग का हिस्सा हैं और उनका अपहरण कर उनके कान में माइक्रोचिप लगाने की कोशिश की गई है। हालांकि जांच के दौरान अमिताभ बच्चन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।

    पूजा भट्ट ने परवीन बाबी के व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि वह बेहद खूबसूरत और दिलदार इंसान थीं। पूजा ने बताया कि जब उनके पिता महेश भट्ट उन्हें परवीन बाबी के घर लेकर जाते थे तब वह हमेशा उन्हें प्यार से मिलती थीं और गिफ्ट दिया करती थीं। पूजा आज भी वह परफ्यूम नहीं भूल पाईं जो परवीन बाबी ने उन्हें दिया था।

    जनवरी 2005 में परवीन बाबी का निधन हो गया था। वह सिर्फ 50 साल की थीं। उनकी मौत ने पूरे फिल्म जगत को झकझोर दिया था। बताया जाता है कि उनका शव कई दिनों तक मुंबई के कूपर अस्पताल के मुर्दाघर में लावारिस पड़ा रहा था। बाद में महेश भट्ट आगे आए और उन्होंने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई।

    परवीन बाबी की कहानी आज भी बॉलीवुड की सबसे दर्दनाक कहानियों में गिनी जाती है जहां शोहरत के पीछे छिपा अकेलापन और मानसिक संघर्ष साफ दिखाई देता है।

  • जलसा के बाहर हंगामा: अमिताभ बच्चन के दीदार के इंतजार में फैन बेहोश, ‘दर्शन’ कल्चर पर भड़के लोग

    जलसा के बाहर हंगामा: अमिताभ बच्चन के दीदार के इंतजार में फैन बेहोश, ‘दर्शन’ कल्चर पर भड़के लोग




    नई दिल्ली(New Delhi)। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित बंगले जलसा के बाहर रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया। भीषण गर्मी में अमिताभ बच्चन की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार कर रहा एक फैन अचानक बेहोश हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसकी मदद की और पानी डालकर उसे होश में लाया।

    जानकारी के मुताबिक, हर रविवार की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में फैंस अमिताभ बच्चन के वीकली अपीयरेंस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक अधेड़ उम्र का फैन गर्मी और भीड़ के बीच अचानक गिर पड़ा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि समय रहते उसे राहत मिल गई और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

    इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए वीडियो के कमेंट सेक्शन में कई यूजर्स ने इस तरह की भीड़ और “दर्शन संस्कृति” पर सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों ने लिखा कि “ये कोई भगवान नहीं हैं”, तो कुछ ने भीड़ को गैरजरूरी बताया।

    वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने फैन के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि भीषण गर्मी में इस तरह घंटों इंतजार करना खतरनाक हो सकता है और ऐसी भीड़ पर नियंत्रण जरूरी है।

    बताया जा रहा है कि अमिताभ बच्चन हर रविवार अपने फैंस से जलसा के बाहर मिलते हैं और उनके साथ तस्वीरें भी साझा करते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने ब्लॉग में फैंस के प्रति आभार जताते हुए उनके साथ अच्छे व्यवहार की बात भी कही थी।

    इस घटना के बाद एक बार फिर फैंस की सुरक्षा और इस तरह के सार्वजनिक जमावड़े को लेकर बहस तेज हो गई है।

  • बॉलीवुड का ऐतिहासिक डुएट: किशोर कुमार बनाम मोहम्मद रफी की जादुई जुगलबंदी

    बॉलीवुड का ऐतिहासिक डुएट: किशोर कुमार बनाम मोहम्मद रफी की जादुई जुगलबंदी


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुनहरे दौर में जब मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे दिग्गज गायक एक साथ किसी गाने में अपनी आवाज देते थे, तो वह सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि इतिहास बन जाता था। ऐसा ही एक यादगार किस्सा फिल्म दोस्ताना (1980) से जुड़ा है, जिसमें अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा मुख्य भूमिकाओं में थे।

    इस फिल्म के मशहूर डुएट गीत “सलामत रहे दोस्ताना हमारा” की रिकॉर्डिंग के दौरान स्टूडियो में एक दिलचस्प माहौल देखने को मिला। बताया जाता है कि मोहम्मद रफी समय पर स्टूडियो पहुंच गए थे और उन्होंने गाने की रिहर्सल भी पूरी तैयारी के साथ की थी। उनकी क्लासिकल और मधुर आवाज ने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित कर दिया था।

    लेकिन जब किशोर कुमार स्टूडियो पहुंचे तो उन्होंने माहौल को गंभीर बनाने के बजाय हल्का-फुल्का कर दिया। वे रफी साहब के साथ मजाक-मस्ती करने लगे, जिससे कई लोगों को लगा कि वह गाने को लेकर गंभीर नहीं हैं। उस समय कई लोगों को लगा कि रफी साहब अपनी परफॉर्मेंस से बाजी मार लेंगे।

    हालांकि, जैसे ही रिकॉर्डिंग शुरू हुई, पूरा माहौल बदल गया। पहले मोहम्मद रफी ने अपने हिस्से को बेहद खूबसूरती और गहराई के साथ गाया। लेकिन जब किशोर कुमार की बारी आई, तो उनकी आवाज ने स्टूडियो में मौजूद हर शख्स को हैरान कर दिया। उनकी गायकी में जो ऊर्जा, भाव और सहजता थी, उसने गाने को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

    संगीतकार पंडित रोनू मजुमदार के अनुसार, उस दिन दोनों ही दिग्गजों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन किशोर कुमार की आवाज में एक अलग तरह का जादू था, जिसने माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी परफॉर्मेंस को कई लोग उस दौर की सबसे यादगार रिकॉर्डिंग्स में से एक मानते हैं।

    फिल्म दोस्ताना के अन्य गीत भी सुपरहिट साबित हुए और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन यह डुएट गाना आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि इसमें दो महान गायकों की अद्भुत टक्कर और संगीत की असली ताकत देखने को मिली।

  • अस्पताल में भर्ती होने की अफवाहों पर अमिताभ बच्चन का जवाब, बिग बी ने ब्लॉग और ट्वीट से बताया अपना हाल

    अस्पताल में भर्ती होने की अफवाहों पर अमिताभ बच्चन का जवाब, बिग बी ने ब्लॉग और ट्वीट से बताया अपना हाल



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    बॉलीवुड के महानायक Amitabh Bachchan को लेकर मंगलवार देर रात सोशल मीडिया पर अचानक अफवाहें फैल गईं कि उन्हें गंभीर हालत में मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि उनके बेटे Abhishek Bachchan अस्पताल में उनके साथ मौजूद हैं। हालांकि इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं पाई गई।

    सोशल मीडिया पर फैली अफवाहें
    मंगलवार शाम से ही सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि अमिताभ बच्चन की तबीयत बिगड़ गई है और उन्हें 16 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ यूट्यूब वीडियो और अनऑफिशियल रिपोर्ट्स में भी इसी तरह के दावे किए गए, जिससे फैंस के बीच चिंता फैल गई।

    बिग बी का जवाब
    इन अफवाहों के बीच देर रात Amitabh Bachchan ने अपने ब्लॉग और ट्वीट के जरिए अपनी सेहत का संकेत दिया। उन्होंने अपने पोस्ट में स्पष्ट किया कि वे ठीक हैं और सभी खबरें केवल अफवाह हैं। उनके ब्लॉग पोस्ट से यह भी साफ हुआ कि वे अपनी दिनचर्या और लेखन में सक्रिय हैं।

    रूटीन चेकअप की बात सामने आई
    सूत्रों के अनुसार, अमिताभ बच्चन अस्पताल रूटीन चेकअप के लिए गए थे और जांच के बाद घर लौट आए। उनकी तबीयत को लेकर किसी तरह की गंभीर स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे फैंस ने राहत की सांस ली है।

    सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं बिग बी
    83 वर्षीय Amitabh Bachchan लगातार सोशल मीडिया और अपने ब्लॉग के जरिए फैंस से जुड़े रहते हैं। वे अक्सर अपनी कविताएं, विचार और जीवन से जुड़ी बातें साझा करते रहते हैं।वर्क फ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन हाल ही में फिल्मों Vettaiyan और Kalki 2898 AD में नजर आए थे। इसके अलावा वे कई बड़े प्रोजेक्ट्स की शूटिंग में भी व्यस्त रहे हैं।फिलहाल साफ है कि अमिताभ बच्चन स्वस्थ हैं और उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबरें पूरी तरह गलत साबित हुई हैं।

  • राज कुमार की अनोखी आदत का हुआ खुलासा, मूडी नेचर के कारण अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा कठिन थे संभालना

    राज कुमार की अनोखी आदत का हुआ खुलासा, मूडी नेचर के कारण अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा कठिन थे संभालना

    नई दिल्ली ।
    राज कुमार सबको जानी कहकर बात करते थे। आपने फिल्मों में भी कई बार देखा होगा कि वह सामने वाले किरदार को जानी बोलते थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राज, जानी क्यों बोलते थे। इसके पीछे की वजह काफी अलग है और खास भी। फिल्ममेकर केसी बोकादिया ने इसका खुलासा किया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज कुमार को हैंडल करना अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा मुश्किल होता था।

    क्यों सबको जानी बोलते थे राज कुमार

    केसी ने इंडिया टीवी से बात करते हुए कहा, ‘उनके कुत्ते का नाम जानी था, यही वजह है कि वह सबको जानी कहते थे। अच्छी बात यह है कि उन्होंने कभी मुझे इस नाम से नहीं बुलाया और मुझे सिर्फ बोकादिया साब बोलते थे।’ हालांकि उन्होंने यह भी क्लीयर किया कि राज के इरादे इसके पीछे नेगेटिव नहीं थे। वह अपने डॉग को काफी प्यार करते थे और उन्हें ये शब्द काफी पसंद था इसलिए वे सबको जानी बोलते थे।
    राज कुमार को कैसे अपनी फिल्म के लिए मनाया
    केसी ने आगे बताया कि कैसे उनकी फिल्म पुलिस और मुजरिम के लिए उन्होंने राज कुमार को लिया था। वह बोले, मैंने उन्हें एक शाम को फोन किया। हमने फिर अगले दिन मुहर्रत शॉट प्लान किया। अगर वह किसी इंसान का चेहरा नहीं जानते तो वह फिल्म नहीं करते। फिल्म की स्टोरी उनके लिए दूसरे नंबर पर होती थी। अब जैसे ही उन्होंने फोन उठाया मैंने कहा राज साहब, मैं आपको एक लाइन कहना चाहता हूं। वह मान गए। उन्हें हैंडल करना, अमिताभ बच्चन को हैंडल करने से काफी मुश्किल होता था। बच्चन कैलकुलेटिव इंसान हैं और राज साहब मूडी थे।
    अमिताभ बच्चन से ज्यादा मुश्किल था राज कुमार को हैंडल करना
    वह आगे बोले, ‘कैलकुलेटिव इंसान को समझाना आसान होता है, लेकिन जब बात मूडी इंसान की आती है तो ये उनकी मूड पर डिपेंड करता है जो हर समय बदलता रहता है। एक गाय भी तभी दूध देती है जब उसका मन हो, नहीं तो नहीं। तो मेरे सीन के डिसक्रिप्शन को पढ़कर उन्होंने कहा कि ये अच्छा है। मैंने फिर उनसे तुरंत मूवी करने की रिक्वेस्ट की। उन्होंने मुझे कहा कि वह मुझे ना नहीं कह सकते हैं।’
    राज कुमार को ज्यादा पैसे किए ऑफर
    केसी ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि उन्हें कितना पैसा चाहिए तो उन्होंने कहा लास्ट टाइम तुमने कितना दिया था? मैंने कहा 21 लाख तो उन्होंने मुझे ज्यादा अमाउंट देने को कहा तो मैंने 24 लाख कहा और फिर तुरंत मैंने 25 लाख का ऑफर दिया। इसके साथ मैंने उनसे एक और फेवर मांगा और रिक्वेस्ट किया कि आप अगली सुबह ही मुझे ज्वाइन करोगे क्योंकि मुहूर्त अगले दिन का शेड्यूल है।’
    पुराना आउटफिट पहन दिया था मुहूर्त शॉट
    राज ने फिर पूछा कि इतनी जल्दी कॉस्ट्यूम कैसे तैयार होंगे तो मैंने उन्हें कहा कि आप पिछले 25-30 साल से वैसे ही लग रहे हो तो न्यू कॉस्ट्यूम की क्या जरूरत। मुझे बस आपसे मुहूर्त शॉट चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि राज फिर आए और उन्होंने वही येलो कलर का कोट पहना है जो उन्होंने नीले गगन के तले पहना था, हमराज फिल्म में।

  • बिग बी की रातों की कहानी: काम और नींद के बीच संघर्ष, मिडनाइट रूटीन ने खींचा ध्यान

    बिग बी की रातों की कहानी: काम और नींद के बीच संघर्ष, मिडनाइट रूटीन ने खींचा ध्यान


    नई दिल्ली ।  बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता Amitabh Bachchan एक बार फिर अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता और निजी अनुभवों को लेकर चर्चा में हैं। 83 वर्ष की उम्र में भी लगातार काम करने की उनकी आदत अब उनकी दिनचर्या और नींद पर असर डाल रही है। हाल ही में उन्होंने अपने ब्लॉग के माध्यम से इस बात का खुलासा किया कि व्यस्त कार्य शेड्यूल के चलते उनकी रातों की नींद प्रभावित हो रही है और उनका रूटीन पूरी तरह बदल चुका है।

    अपने ब्लॉग में उन्होंने लिखा कि कई बार रात देर तक काम करने के कारण नींद सामान्य समय पर नहीं आ पाती। उन्होंने यह भी साझा किया कि डॉक्टर अक्सर उन्हें पर्याप्त नींद लेने की सलाह देते हैं, क्योंकि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कम से कम सात घंटे की नींद जरूरी होती है। इसके बावजूद उनका काम और जिम्मेदारियां उन्हें लगातार व्यस्त रखती हैं, जिससे उनका सोने का पैटर्न प्रभावित हो गया है।

    उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए यह भी बताया कि रात के शांत समय में काम करना और विचारों में खोए रहना अब उनकी आदत बन चुकी है। जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब वे अपने काम और डिजिटल माध्यमों से जुड़े रहते हैं। इसी दौरान उन्हें संगीत सुनने का भी समय मिलता है, जिसे वे मानसिक शांति का सबसे बड़ा साधन मानते हैं।

    उन्होंने विशेष रूप से शास्त्रीय और वाद्य संगीत का जिक्र किया, जिसमें स्लाइड गिटार और सितार जैसी धुनें उन्हें गहरी शांति देती हैं। उनके अनुसार, यह संगीत केवल मनोरंजन नहीं बल्कि आत्मा को सुकून देने वाला अनुभव है, जो थकान और मानसिक दबाव को कम करने में मदद करता है।

    अपने विचारों में उन्होंने संगीत को मानवता की एक साझा भाषा भी बताया। उनके अनुसार दुनिया के किसी भी कोने में जाएं, संगीत के सुर एक जैसे ही होते हैं और यही बात इसे सबसे अनोखा बनाती है। उनका मानना है कि संगीत न केवल भावनाओं को जोड़ता है बल्कि इंसान को भीतर से संतुलित भी रखता है।

    काम के मोर्चे पर भी Amitabh Bachchan लगातार सक्रिय हैं। वे जल्द ही एक बड़े फिल्म प्रोजेक्ट के सीक्वल में नजर आने वाले हैं, जिसमें उनका किरदार फिर से दर्शकों के सामने आएगा। इस फिल्म ने पहले भाग में बड़ी सफलता हासिल की थी और अब इसके अगले अध्याय को लेकर भी काफी उत्साह देखा जा रहा है।

    83 साल की उम्र में भी उनकी ऊर्जा और समर्पण यह दिखाते हैं कि उनके लिए अभिनय केवल पेशा नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा है। हालांकि नींद और स्वास्थ्य को लेकर उनकी चिंता भी सामने आई है, लेकिन उनका काम के प्रति जुनून अभी भी पहले जैसा ही मजबूत है।

    उनकी यह कहानी सिर्फ एक अभिनेता की दिनचर्या नहीं, बल्कि उस समर्पण की झलक है जो उम्र के साथ भी कम नहीं होता। यह दिखाता है कि कैसे एक कलाकार अपने जुनून और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहता है, चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।

  • दोस्ती के खातिर संसद पहुंचे थे बिग बी, लेकिन सियासी साजिशों और आरोपों ने तीन साल में ही करा दी ग्लैमर की दुनिया में वापसी।

    दोस्ती के खातिर संसद पहुंचे थे बिग बी, लेकिन सियासी साजिशों और आरोपों ने तीन साल में ही करा दी ग्लैमर की दुनिया में वापसी।


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमिताभ बच्चन का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, लेकिन उनके जीवन का एक अध्याय ऐसा भी है जिसे वह अक्सर एक कड़वी याद की तरह देखते हैं। साल 1984 में जब देश एक बड़े राजनीतिक बदलाव से गुजर रहा था, तब अपनी गहरी दोस्ती और भावनात्मक जुड़ाव के कारण अमिताभ बच्चन ने फिल्मी पर्दे की चकाचौंध छोड़ राजनीति की ऊबड़-खाबड़ गलियों में कदम रखा था। उन्होंने अपने जन्मस्थान इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया और एक अनुभवी राजनेता को रिकॉर्ड मतों से शिकस्त देकर संसद में अपनी जगह बनाई। उस वक्त ऐसा लगा था कि जनता का यह अपार प्रेम उन्हें राजनीति के शिखर पर ले जाएगा, लेकिन जल्द ही उन्हें यह महसूस होने लगा कि फिल्म के सेट और संसद के गलियारों के बीच एक गहरी खाई है जिसे पार करना उनके बस की बात नहीं थी।

    राजनीति के उस छोटे से सफर में अमिताभ बच्चन ने जमीनी हकीकत को बहुत करीब से देखा। उन्होंने महसूस किया कि ग्रामीण भारत के लोग कितने सीधे और सरल हैं, जो अपने नेता को देवता की तरह पूजते हैं। हालांकि, व्यवस्था के भीतर की पेचीदगियों और हर तरफ से आने वाले सवालों ने उन्हें बेचैन करना शुरू कर दिया था। उनके लिए यह समझना मुश्किल हो रहा था कि किस तरफ बात करनी है और विरोधियों के तीखे हमलों का जवाब कैसे देना है। उन्होंने बाद के वर्षों में स्वीकार किया कि वह राजनीति के लिए बने ही नहीं थे और उनका वहां जाना पूरी तरह से एक भावुक निर्णय था। वह दो साल उनके जीवन के लिए बहुत कीमती रहे क्योंकि उन्होंने वहां से भारत की असली आत्मा को समझा, लेकिन इसके बदले उन्हें जो मानसिक शांति खोनी पड़ी, वह बहुत बड़ी कीमत थी।

    अमिताभ बच्चन के राजनीतिक करियर का दुखद अंत तब हुआ जब बोफोर्स घोटाले की आग ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया। इस विवाद में उनका नाम भी घसीटा गया, जिसने महानायक की बेदाग छवि को जनता की नजरों में संदिग्ध बना दिया। उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया था और विरोधियों के लगातार बढ़ते दबाव के बीच उन्होंने 1987 में अपने पद से इस्तीफा देना ही बेहतर समझा। यह मामला उनके जीवन पर एक काले साये की तरह करीब ढाई दशक तक मंडराता रहा। हालांकि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद साल 2012 में उन्हें पूरी तरह निर्दोष घोषित कर दिया गया, लेकिन यह न्याय मिलने में बहुत देर हो चुकी थी। उनके माता-पिता उनकी बेगुनाही देखे बिना ही दुनिया से चले गए, जिसका दुख आज भी उनके शब्दों में झलकता है।

    अपने उस दौर को याद करते हुए अमिताभ बच्चन ने इसे ‘नरक’ के समान बताया था। उन्होंने साझा किया कि किस तरह उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाया गया और कई बड़े नेताओं ने उन्हें अपनी जान के खतरे तक की चेतावनी दी थी। जिस इंसान ने कभी राजनीति में आने का सपना भी नहीं देखा था, उसे व्यवस्था के सबसे क्रूर रूप का सामना करना पड़ा। इस कड़वे अनुभव के बाद उन्होंने कसम खा ली कि वह फिर कभी सक्रिय राजनीति का हिस्सा नहीं बनेंगे। आज जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं, तो वह उन दो सालों को एक ऐसी सीख मानते हैं जिसने उन्हें यह समझा दिया कि हर सफल अभिनेता एक सफल राजनेता नहीं हो सकता और हर मैदान हर किसी के लिए नहीं बना होता।