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  • सलीम खान: जो खुद नहीं बने सुपरस्टार, लेकिन बेटे ने कर दिखाया कमाल..

    सलीम खान: जो खुद नहीं बने सुपरस्टार, लेकिन बेटे ने कर दिखाया कमाल..


    नई दिल्ली: सलीम खान का नाम सुनते ही हिंदी सिनेमा के कई क्लासिक फिल्में और सुपरस्टार याद आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सलीम खान खुद एक्टर बनने मुंबई आए थे? बचपन में अनाथ होने के बावजूद उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा और छोटी-छोटी भूमिकाओं से शुरुआत की।

    सलीम अब्दुल रशीद खान के पूर्वज अफगानिस्तान से भारत आए थे और परिवार बाद में इंदौर में बस गया। बचपन में ही माता-पिता का साया खोने के बाद दस साल की उम्र में वह अनाथ हो गए। फिर भी बड़े सपने लेकर मुंबई आए। मरीन ड्राइव के गेस्ट हाउस में 55 रुपये महीने देकर आधा कमरा किराए पर लिया और गुजारे के लिए मॉडलिंग की। 1960 में फिल्म ‘बारात’ से डेब्यू किया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। कई फिल्मों में काम किया, लेकिन एक्टर के तौर पर पहचान नहीं बन पाई। खुद सलीम मानते थे कि वह बड़े एक्टर नहीं हैं, लेकिन किरदार को समझने और गढ़ने में माहिर थे।

    एक्टर के रूप में संघर्ष के बाद सलीम खान ने लेखन की राह चुनी। जावेद अख्तर के साथ उनकी जोड़ी ‘सलीम-जावेद’ बनी, जिसने हिंदी सिनेमा में इतिहास रचा। उनकी लेखनी से बनी फिल्में जैसे जंजीर, दीवार, शोले, डॉन ने अमिताभ बच्चन को ‘एंग्री यंग मैन’ का टाइटल दिलाया और सलीम-जावेद को भी फिल्म इंडस्ट्री में पहचान मिली।

    सलीम खान ने 1964 में सलमा से शादी की। बाद में उन्होंने हेलेन से भी निकाह किया। वक्त के साथ परिवार ने हर रिश्ते को अपनाया और आज उनके बेटे सलमान खान बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में गिने जाते हैं।

    सलीम खान की कहानी यह सिखाती है कि कभी-कभी किस्मत और हुनर अलग-अलग राह चुनते हैं। खुद सुपरस्टार नहीं बने, लेकिन अपने जादुई कलम के दम पर न केवल अमिताभ बच्चन को एंग्री यंग मैन बनाया, बल्कि बेटे सलमान के जरिए बॉलीवुड में एक नई पीढ़ी का सितारा चमकाया।
  • अयोध्या में अमिताभ बच्चन ने दो साल में चौथी जमीन खरीदी

    अयोध्या में अमिताभ बच्चन ने दो साल में चौथी जमीन खरीदी


    मुंबई। अमिताभ बच्‍चन ने भगवान राम की नगरी में एक और जमीन खरीदकर चर्चा बटोर ली है। सदी के महानायक ने पिछले दो वर्षों में यहां चौथी बार निवेश किया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने करीब 10,617 वर्ग मीटर जमीन लगभग 25.20 करोड़ रुपये में खरीदी है।
    यह जमीन The House of Abhinandan Lodha की परियोजना के पास स्थित है और सरयू नदी के तट के नजदीक विकसित हो रहे लक्जरी लैंड प्रोजेक्ट के आसपास बताई जा रही है। इस जमीन की खरीद एबी कॉर्प लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजेश ऋषिकेश यादव ने पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए पूरी की।

    अयोध्या में तेजी से बढ़ रहा निवेश
    राम मंदिर अयोध्‍या के निर्माण और उद्घाटन के बाद से अयोध्या में पर्यटन, कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहा है। इसी वजह से बड़े उद्योगपति और फिल्मी हस्तियां भी यहां रियल एस्टेट में निवेश कर रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अयोध्या सिर्फ धार्मिक पर्यटन ही नहीं बल्कि रियल एस्टेट निवेश का भी बड़ा केंद्र बन सकता है।

    पहले कहां-कहां खरीदी जमीन?
    अमिताभ बच्चन इससे पहले भी अयोध्या में तीन प्लॉट खरीद चुके हैं।
    2024: The Sarayu Project Ayodhya में लगभग 10,000 वर्ग फुट का प्लॉट करीब 14.5 करोड़ रुपये में खरीदा था।

    2025: सरयू नदी के पास ही 25,000 वर्ग फुट का प्लॉट लगभग 40 करोड़ रुपये में लिया।

    2025: उसी क्षेत्र के पास एक और जमीन में निवेश किया गया था, जो सरयू तट के आसपास विकसित हो रही परियोजनाओं से जुड़ी बताई जाती है।

    2026 (नया सौदा): सरयू किनारे के पास लक्जरी प्रोजेक्ट के आसपास 10,617 वर्ग मीटर जमीन 25.20 करोड़ रुपये में खरीदी गई है।

    यूपी से खास जुड़ाव

    अमिताभ बच्चन का उत्तर प्रदेश से पुराना रिश्ता है। उनका पैतृक संबंध Prayagraj से रहा है। ऐसे में अयोध्या में लगातार निवेश को उनके यूपी से भावनात्मक जुड़ाव के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि अयोध्या में तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन के कारण यहां जमीन की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे बड़े निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है।

  • कमल हासन पर लिलिपुट का चौंकाने वाला खुलासा मेरी जिंदगी का दर्द बना अप्पू राजा की कहानी

    कमल हासन पर लिलिपुट का चौंकाने वाला खुलासा मेरी जिंदगी का दर्द बना अप्पू राजा की कहानी

    नई दिल्ली। मिर्जापुर में दद्दा के किरदार से पहचान बनाने वाले वरिष्ठ अभिनेता लिलिपुट ने हाल ही में एक ऐसा खुलासा किया है जिसने फिल्मी दुनिया में चर्चा छेड़ दी है। करीब पांच दशक से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय लिलिपुट का कहना है कि सुपरस्टार कमल हासन ने उनकी असल जिंदगी के दर्द और दिल टूटने की कहानी को अपनी मशहूर फिल्म अप्पू राजा में इस्तेमाल किया था। हालांकि उन्हें इसके लिए कभी कोई क्रेडिट नहीं मिला।

    लिलिपुट जिनका असली नाम एमएम फारुकी है उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी और कमल हासन की दोस्ती फिल्म सागर की शूटिंग के दौरान शुरू हुई थी। उस समय फिल्म की कास्टिंग के दौरान कमल हासन उन्हें ढूंढ रहे थे। जब लिलिपुट पृथ्वी थिएटर पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि कमल हासन खुद उन्हें बुला रहे हैं। पहले तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ और उन्हें लगा कि कोई मजाक कर रहा है।

    जब वे कमल हासन से मिलने उनके होटल पहुंचे तो अभिनेता ने बेहद गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। कमल हासन ने उनसे कहा कि वे फिल्म सागर बना रहे हैं और उसमें उनके किरदार के बराबर का एक खास रोल है जिसके लिए उन्हें कद में छोटा कलाकार चाहिए। इसके बाद उन्होंने लिलिपुट को निर्देशक रमेश सिप्पी से मिलने के लिए कहा।

    फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों कलाकारों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। लिलिपुट के अनुसार कमल हासन अक्सर उनके साथ घंटों बैठकर बातें करते थे। वह उनके जीवन के अनुभवों कॉमा सोच और मनोविज्ञान को समझने की कोशिश करते थे। इतना ही नहीं वे उनकी कई तस्वीरें भी लिया करते थे।

    इसी दौरान लिलिपुट ने अपनी निजी जिंदगी के कई किस्से कमल हासन के साथ साझा किए थे जिनमें उनकी लव स्टोरी और दिल टूटने की कहानी भी शामिल थी। लिलिपुट का दावा है कि कमल हासन ने उन्हीं भावनात्मक अनुभवों को बाद में अपनी कल्ट फिल्म अप्पू राजा के इमोशनल हिस्से में शामिल कर लिया। उनके अनुसार फिल्म में दिखाया गया हार्टब्रेक वाला ट्रैक असल में उनकी ही जिंदगी की कहानी से प्रेरित था।

    हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या कमल हासन ने कभी सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार किया या उन्हें इसका श्रेय दिया तो लिलिपुट ने साफ तौर पर कहा कि ऐसा कभी नहीं हुआ। फिर भी उन्होंने माना कि जिस खूबसूरती से उनकी भावनाओं को पर्दे पर उतारा गया वह काबिले तारीफ था।

    इंटरव्यू में लिलिपुट ने अपने करियर से जुड़ा एक दिलचस्प और भावुक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब वह खुद को अमिताभ बच्चन के लिए अनलकी मानते थे। दरअसल कई बार ऐसा हुआ कि उनके साथ अमिताभ बच्चन की फिल्में शुरू होने से पहले ही बंद हो गईं। इसी वजह से उनके मन में यह अंधविश्वास बैठ गया था।

    जब उन्हें साल 2005 में फिल्म बंटी और बबली में काम करने का मौका मिला तो उन्होंने मजाक में निर्देशक शाद अली से कहा था कि कहीं उनके कारण फिल्म को भी कोई परेशानी न हो जाए। लेकिन शाद अली ने उनकी बात को हंसी में उड़ा दिया और कहा कि वह ऐसी बातों पर विश्वास नहीं करते।

    आखिरकार फिल्म रिलीज हुई और सुपरहिट साबित हुई। इसके साथ ही लिलिपुट का अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का सपना भी पूरा हो गया और उनका पुराना डर भी खत्म हो गया

  • सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन की शादी: सानिया चंडोक संग मुंबई में रचाई जोड़ी, अमिताभ, अंबानी, धोनी-द्रविड़ समेत सितारे हुए शामिल

    सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन की शादी: सानिया चंडोक संग मुंबई में रचाई जोड़ी, अमिताभ, अंबानी, धोनी-द्रविड़ समेत सितारे हुए शामिल


    नई दिल्ली। सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर और सानिया चंडोक की शादी का भव्य समारोह मुंबई में संपन्न हुआ। शादी के फेरे 3 मार्च को आयोजित किए गए, जिसमें बॉलीवुड और क्रिकेट की दुनिया के दिग्गज शामिल हुए। समारोह में अमिताभ बच्चन और उनकी पत्नी जया बच्चन ने शिरकत की, वहीं भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपनी पत्नी साक्षी के साथ उपस्थित रहे।
    इसके अलावा राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले, अजिंक्य रहाणे, सुरेश रैना और हरभजन सिंह जैसे दिग्गज क्रिकेटर्स भी समारोह में मौजूद रहे।

    अर्जुन तेंदुलकर और सानिया चंडोक के प्री-वेडिंग फंक्शन का आयोजन 27 फरवरी को गुजरात के जामनगर में अंबानी परिवार के घर हुआ था। अर्जुन और सानिया ने अगस्त 2025 में सगाई की थी। सानिया चंडोक ग्रैविस ग्रुप के चेयरमैन रवि घई की पोती हैं और मुंबई में मिस्टर पॉज पैट स्पा एंड स्टोर एलएलपी (Mr. Paws Pet Spa & Store LLP) की डायरेक्टर और पार्टनर हैं। यह संस्था 2022 में शुरू की गई थी और यह पालतू जानवरों की ग्रूमिंग, स्किनकेयर और उससे संबंधित सेवाएं प्रदान करती है।

    सानिया का परिवार, घई परिवार, हॉस्पिटैलिटी और फूड वर्ल्ड में जाना-माना नाम है। उनका इंटरकॉन्टिनेंटल होटल्स ग्रुप है, जिसकी मल्टीनेशनल वैल्यू 1.6 लाख करोड़ रुपए (18.43 बिलियन डॉलर) आंकी जाती है। इसके अलावा, चंडोक परिवार फेमस आइसक्रीम ब्रांड ब्रूकलिन क्रीमरी का भी मालिक है।

    शादी समारोह में शामिल हुए मेहमानों और क्रिकेट दिग्गजों ने अर्जुन और सानिया को बधाई दी। समारोह की भव्यता और फंक्शन के दौरान किए गए स्वागत और आयोजन ने इसे और भी यादगार बना दिया।

    इस शादी में क्रिकेट और बॉलीवुड की दुनिया की कई बड़ी हस्तियों का शामिल होना इसे मीडिया और फैंस के लिए खास बना रहा।

    अर्जुन तेंदुलकर, जो अपने पिता सचिन तेंदुलकर की तरह ही क्रिकेट से जुड़े हैं, और सानिया चंडोक की शादी ने मुंबई में और देशभर में फैंस और मीडिया का ध्यान खींचा। इस शादी के आयोजन से दोनों परिवारों के बीच रिश्तों की मजबूती और सामाजिक प्रतिष्ठा का भी पता चलता है।

    इस भव्य शादी समारोह ने क्रिकेट और बॉलीवुड प्रेमियों में खुशी और उत्साह का माहौल पैदा कर दिया। अर्जुन और सानिया की जोड़ी को शुभकामनाएं देते हुए सभी मेहमान और परिवारजन समारोह के हर पल का आनंद लेते नजर आए।

  • कपूर खानदान का वो 'गुमनाम' सितारा, जिसके 30 हिट फिल्मों का रिकॉर्ड रणबीर-ऋषि भी नहीं तोड़ पाए!

    कपूर खानदान का वो 'गुमनाम' सितारा, जिसके 30 हिट फिल्मों का रिकॉर्ड रणबीर-ऋषि भी नहीं तोड़ पाए!

    नई दिल्ली ।हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी किसी दिग्गज परिवार का नाम लिया जाता है, तो ‘कपूर खानदान’ का जिक्र सबसे पहले आता है। पेशावर की गलियों से निकलकर मायानगरी मुंबई के सिंहासन पर बैठने वाले इस परिवार की कई पीढ़ियों ने दर्शकों का मनोरंजन किया है। पृथ्वीराज कपूर से लेकर राज कपूर और आज के दौर के चॉकलेट बॉय रणबीर कपूर तक, हर किसी ने अपनी चमक बिखेरी है। लेकिन, इस चकाचौंध के बीच एक ऐसा नाम कहीं ओझल हो गया, जिसने वास्तव में कपूर परिवार की कामयाबी की पहली ईंट रखी थी। हम बात कर रहे हैं राज कपूर के चाचा और पृथ्वीराज कपूर के छोटे भाई त्रिलोक कपूर की।

    त्रिलोक कपूर केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह अपने दौर के एक ऐसे ‘पावरहाउस’ थे, जिनका रिकॉर्ड आज तक अटूट है। दीवान बशेश्वरनाथ के बेटे त्रिलोक ने जब अभिनय की दुनिया में कदम रखा, तो शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वह सफलता का एक ऐसा शिखर छुएंगे, जहाँ पहुँचने के लिए उनके भतीजे राज कपूर और पोते रणबीर कपूर को भी कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। त्रिलोक कपूर ने अपने करियर में 30 सुपरहिट फिल्में दीं। यह एक ऐसा आंकड़ा है, जिसे कपूर परिवार का कोई भी दूसरा सदस्य आज तक पार नहीं कर पाया है।

    त्रिलोक कपूर का फिल्मी सफर 1928 में शुरू हुआ, जब वे पढ़ाई पूरी कर कोलकाता पहुंचे। वह दौर स्वतंत्रता आंदोलन का था और त्रिलोक भी इससे अछूते नहीं रहे। उन्होंने 1933 में फिल्म ‘चार दरवेश’ से डेब्यू किया। इसके बाद आई फिल्म ‘सीता’, जिसमें उनके बड़े भाई पृथ्वीराज कपूर ‘राम’ बने थे और त्रिलोक ने भी अहम भूमिका निभाई थी। 1930 और 1940 के दशक में उन्होंने इंडस्ट्री पर राज करना शुरू किया, लेकिन उनकी लोकप्रियता का असली सैलाब 1950 के दशक में आया।

    उस दौर में त्रिलोक कपूर ‘पौराणिक फिल्मों’ Mythological Films के बेताज बादशाह बन गए थे। उन्होंने पर्दे पर भगवान के इतने जीवंत किरदार निभाए कि लोग उन्हें असलियत में पूजने लगे थे। खास तौर पर ‘शिव’ के रूप में उनकी छवि घर-घर में लोकप्रिय हो गई थी। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि अगर उस समय सोशल मीडिया होता, तो शायद उनके फॉलोअर्स की संख्या आज के दिग्गजों को मात दे देती।

    जैसे-जैसे वक्त बदला, त्रिलोक कपूर ने खुद को बदला और करैक्टर आर्टिस्ट के रूप में अपनी दूसरी पारी शुरू की। 1970 और 80 के दशक में उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने फिल्म ‘गंगा जमुना सरस्वती’ में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पिता का किरदार निभाया था। इसके अलावा उन्होंने ‘दोस्ताना’, ‘राम तेरी गंगा मैली’ और ‘अल्लाह रखा’ जैसी फिल्मों में भी काम किया।

    त्रिलोक कपूर भले ही आज की पीढ़ी के लिए एक अनसुना नाम हों, लेकिन भारतीय सिनेमा के पन्नों में उनकी कामयाबी स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। उनके बेटे विजय कपूर ने भी निर्देशन के क्षेत्र में हाथ आजमाया, लेकिन जो जादू त्रिलोक कपूर ने पर्दे पर पैदा किया, वह बेमिसाल था। 1988 में इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन अपनी 30 हिट फिल्मों की विरासत को वह पीछे छोड़ गए, जो आज भी कपूर खानदान के गौरवशाली इतिहास का सबसे मजबूत स्तंभ है।

  • फिल्में जिनमें सितारों ने फीस नहीं ली और बनीं यादगार हिट

    फिल्में जिनमें सितारों ने फीस नहीं ली और बनीं यादगार हिट


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की कई फिल्मों ने न सिर्फ दर्शकों के दिलों में जगह बनाई बल्कि अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से भी यादगार साबित हुईं। कम लोग जानते हैं कि इन फिल्मों के लीड एक्टर्स ने अपनी फीस तक नहीं ली और सिर्फ प्यार और जुनून के लिए काम किया। साल 2018 में रिलीज़ हुई फिल्म मंटो में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपने किरदार में ऐसा दम दिखाया कि हर दर्शक उनकी अदाकारी का मुरीद हो गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवाजुद्दीन ने इस फिल्म के लिए कोई फीस नहीं ली थी? उन्होंने सिर्फ अपने किरदार में पूरी तरह डूबकर काम किया। इससे पहले भी नवाजुद्दीन ने हरामखोर जैसी फिल्मों में बिना फीस काम किया था जो उनके पेशेवर समर्पण की मिसाल है।

    वहीं फिल्म भाग मिल्खा भाग में सोनम कपूर ने अपनी परफॉर्मेंस से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इंडस्ट्री की टैलेंटेड अभिनेत्रियों में शुमार सोनम ने इस फिल्म के लिए भी फीस नहीं ली सिर्फ नाम के लिए 11 रुपये स्वीकार किए। फिल्म में उनके काम को क्रिटिक्स और दर्शकों ने दोनों ने सराहा। इस फिल्म में फरहान अख्तर ने भी लीड रोल निभाया और उन्होंने भी बिना किसी फीस के काम किया। फरहान की मेहनत और फिल्म की तकनीकी दक्षता ने इसे बॉक्स ऑफिस पर हिट बनाना सुनिश्चित किया।

    बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की बात करें तो संजय लीला भंसाली की फिल्म ब्लैक में उनके अभिनय को हर किसी ने सराहा। यह फिल्म आज भी आइकॉनिक मानी जाती है और कम लोग जानते हैं कि अमिताभ ने इसके लिए एक भी रुपया फीस नहीं लिया था। उनके समर्पण और किरदार के प्रति ईमानदारी ने फिल्म की सफलता में अहम भूमिका निभाई। सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ फिल्म ओम शांति ओम में दीपिका पादुकोण ने लीड रोल प्ले किया। उनकी परफॉर्मेंस को दर्शकों ने बहुत सराहा लेकिन दीपिका ने इस फिल्म के लिए कोई फीस नहीं ली। उनकी मेहनत और स्क्रीन पर दमदार उपस्थिति ने फिल्म को और भी यादगार बना दिया।

    इसी तरह फिल्म ट्रैप्ड में राजकुमार राव ने एक लड़के का किरदार निभाया जो ऊंची और वीरान इमारत में फंस जाता है। राजकुमार ने इस चुनौतीपूर्ण रोल के लिए कोई भुगतान नहीं लिया। उनकी ईमानदार अदाकारी ने फिल्म के थ्रिल और सस्पेंस को और मजबूती दी। इन कहानियों से यह साबित होता है कि कभी-कभी सितारों का जुनून समर्पण और किरदार के प्रति ईमानदारी पैसे से भी बड़ी होती है। इन फिल्मों ने दर्शकों के दिलों में अपने लिए खास जगह बनाई और यह साबित किया कि अच्छी कहानी बेहतरीन परफॉर्मेंस और एक्टर्स का समर्पण ही असली सफलता की कुंजी है।

  • जब मास्टर राजू के लिए अमिताभ बच्चन को करना पड़ता था घंटों इंतज़ार: 'उस वक्त मेरे पास उनसे ज्यादा काम था'

    जब मास्टर राजू के लिए अमिताभ बच्चन को करना पड़ता था घंटों इंतज़ार: 'उस वक्त मेरे पास उनसे ज्यादा काम था'


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे बहुत कम कलाकार हुए हैं जिनके लिए सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को इंतजार करना पड़ा हो। लेकिन 70 के दशक के मशहूर चाइल्ड आर्टिस्ट राजू श्रेष्ठा जिन्हें दुनिया मास्टर राजू’ के नाम से जानती है एक ऐसे ही कलाकार थे। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान मास्टर राजू ने अपने सुनहरे दौर को याद करते हुए बताया कि एक वक्त ऐसा था जब उनके पास अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा फिल्में और काम हुआ करता था।

    फिल्म फरार’ के सेट का एक मजेदार किस्सा साझा करते हुए मास्टर राजू ने बताया कि अमिताभ बच्चन हमेशा से ही समय के बहुत पाबंद रहे हैं। वह सेट पर वक्त से पहले पहुँच जाते थे लेकिन चूंकि मास्टर राजू उस दौर में हर तीसरी फिल्म का हिस्सा होते थे इसलिए उनके पास समय की भारी कमी रहती थी। राजू ने बताया “मुझे यह कहते हुए हंसी आती है लेकिन उस वक्त अमित जी के पास मुझसे कम काम था। शूटिंग के दौरान मेकर्स मेरे शॉट्स को प्राथमिकता देते थे क्योंकि मुझे अगले शूट के लिए तीन घंटे में निकलना होता था। ऐसे में अमित जी के क्लोज-अप्स पहले ले लिए जाते थे और फिर उन्हें एक तरफ बैठकर तब तक इंतजार करना पड़ता था जब तक मेरे सीन्स पूरे न हो जाएं।”

    इतना ही नहीं मास्टर राजू ने अपनी मां और बिग बी से जुड़ा एक और दिलचस्प वाकया सुनाया। उन्होंने बताया कि फरार’ के सेट पर लंच के दौरान उनकी मां ने अमिताभ बच्चन को डांट लगा दी थी। दरअसल एक सीन के लिए अमित जी के हाथ पर नकली घाव बनाया गया था जिस पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। राजू की मां ने सफाई को लेकर सख्त होते हुए बिग बी से कह दिया था कि वह इसे कवर करें क्योंकि पास में ही सब खाना खा रहे थे।

    मास्टर राजू ने उस दौर के अन्य सुपरस्टार्स पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि उस समय सेट पर देरी से आना एक फैशन’ बन गया था। राजेश खन्ना विनोद खन्ना संजीव कुमार और धर्मेंद्र जैसे बड़े सितारे अक्सर देरी से पहुँचते थे लेकिन पूरी फिल्म इंडस्ट्री में केवल अमिताभ बच्चन ही इकलौते ऐसे अभिनेता थे जो हमेशा अनुशासन में रहते थे। मास्टर राजू का यह बयान उस दौर की याद दिलाता है जब एक बाल कलाकार की व्यस्तता ने बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारे को भी कतार में खड़ा कर दिया था।

  • शहंशाह' के वे दिन जब दरवाजे पर आते थे लेनदार: 90 करोड़ का कर्ज और 55 लीगल केस

    शहंशाह' के वे दिन जब दरवाजे पर आते थे लेनदार: 90 करोड़ का कर्ज और 55 लीगल केस


    नई दिल्ली । अमिताभ बच्चन आज भारतीय सिनेमा के शहंशाह कहे जाते हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब उनके सिर से सफलता का साया पूरी तरह उठ चुका था। 90 के दशक के अंत में बिग बी अपने जीवन के सबसे अंधकारमय दौर से गुजर रहे थे। उनकी कंपनी अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड  दिवालिया हो चुकी थी और उन पर 90 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज था। स्थिति इतनी भयावह थी कि उनके घर और निजी संपत्तियों के जब्त होने का खतरा मंडरा रहा था।

    साल 2013 के एक इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने अपनी उस पीड़ा को साझा करते हुए बताया था कि वह दौर उनके लिए बेहद अपमानजनक था। उनके दरवाजे पर हर दिन लेनदार पैसे मांगने आते थे। जो लोग कभी उनके साथ काम करने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते थे, मुसीबत के वक्त उन्होंने ही बिग बी के प्रति अनादर दिखाना शुरू कर दिया था। उस दौरान उन पर 55 लीगल केस दर्ज थे और उन्होंने स्वीकार किया कि कई लोगों ने उन्हें गुमराह करके गलत दस्तावेजों पर साइन भी करवा लिए थे, जिसका खामियाजा उन्हें अकेले भुगतना पड़ा।

    इस टूटते हुए हौसले के बीच बिग बी को अपने पिता, महान कवि हरिवंश राय बच्चन की दो बातों ने संभाले रखा। पहली सीख थी मन का हो तो अच्छा, मन का न हो तो और भी अच्छा। इसका अर्थ था कि अगर चीजें आपकी योजना के अनुसार नहीं हो रही हैं, तो ईश्वर ने आपके लिए कुछ और भी बेहतर सोच रखा है। दूसरी अहम बात जो उनके पिता ने कही थी वह यह कि जब तक जीवन है, संघर्ष बना रहेगा। इन दो मंत्रों ने अमिताभ को हार मानने के बजाय लड़ने की शक्ति दी।

    अमिताभ बच्चन की सेकेंड इनिंग की शुरुआत फिल्म मोहब्बतें और टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति से हुई, जिसने न केवल उनका कर्ज उतारा बल्कि उन्हें पहले से भी बड़ा स्टार बना दिया। आज उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि इंसान अपने पिता के आदर्शों और खुद के परिश्रम पर भरोसा रखे, तो वह राख से भी उठकर दोबारा अपना साम्राज्य खड़ा कर सकता है।

  • अजित पवार का वायरल वीडियो: रेखा के सामने बोले अमिताभ बच्चन हैं सबसे पसंदीदा अभिनेता..

    अजित पवार का वायरल वीडियो: रेखा के सामने बोले अमिताभ बच्चन हैं सबसे पसंदीदा अभिनेता..


    नई दिल्ली। 28 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार एक विमान दुर्घटना में निधन हो गए। यह घटना पूरे देश में शोक और चिंता की लहर फैलाने वाली थी। वे बारामती में चुनाव प्रचार के लिए जा रहे थे और उनका विमान लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें उनके साथ कुल पांच लोगों की मौत हो गई।

    इसी बीच सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मंच पर अजित पवार, बॉलीवुड की पावर सिंगर आशा भोसले और सदाबहार अभिनेत्री रेखा एक साथ दिखाई दे रहे हैं। वहां मौजूद दर्शकों के सामने जब उनसे उनकी पसंद-नापसंद के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा पसंद अमिताभ बच्चन हैं।

    इसके बाद उन्होंने रेखा को अपनी पसंदीदा अभिनेत्री बताया और साझा किया कि उन्हें अमिताभ-रेखा की फिल्में ‘मुकद्दर का सिकंदर’ और ‘घर’ बेहद पसंद हैं। रेखा इस बात पर मुस्कुरा उठीं और दर्शक भी इस पल को देखकर उत्साहित नजर आए।यह वीडियो अब एक्स (पहले ट्विटर) पर तेजी से शेयर हो रहा है और फैंस अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। कई लोग इसे भावनात्मक और यादगार पल बता रहे हैं, तो कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स इसे चर्चा का विषय बना रहे हैं।

    अमिताभ बच्चन और रेखा की ऑन-स्क्रीन जोड़ी 1970 और 1980 के दशक में बेहद लोकप्रिय थी। दोनों ने ‘सिलसिला’, ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘सुहाग’, ‘गंगा की सौगंध’ और ‘दो अनजाने’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया।

    अजित पवार के निधन पर देश के कई बड़े सितारों ने भी शोक व्यक्त किया। अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार कमल हासन सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। उनके निधन के बाद महाराष्ट्र में तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया और बारामती में उनका अंतिम संस्कार बड़े सम्मान के साथ संपन्न हुआ।

  • परवीन बाबी: बॉलीवुड की चमकती हसीना, अकेलेपन और बीमारी के बीच डूब गई जिंदगी

    परवीन बाबी: बॉलीवुड की चमकती हसीना, अकेलेपन और बीमारी के बीच डूब गई जिंदगी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में शोहरत जितनी तेजी से मिलती है उतनी ही बेरहमी से छिन भी जाती है। इस बात का सबसे दर्दनाक उदाहरण हैं 70 और 80 के दशक की ग्लैमरस और बोल्ड अभिनेत्री परवीन बाबी। पर्दे पर आत्मविश्वास और ग्लैमर की नई परिभाषा गढ़ने वाली परवीन असल जिंदगी में अकेलेपन मानसिक बीमारी और गुमनामी से जूझती रहीं।

    परवीन बाबी का जन्म 4 अप्रैल 1954 को गुजरात के जूनागढ़ में हुआ। एक नवाबी परिवार में जन्मी परवीन ने कम उम्र में ही पिता का साथ खो दिया लेकिन उनका पालन-पोषण अच्छे माहौल में हुआ। 18 साल की उम्र में उन्होंने मॉडलिंग शुरू की। अहमदाबाद में एक शूटिंग के दौरान फिल्ममेकर बी.आर. इशारा की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने परवीन को फिल्मों में कदम रखने का मौका दिया।

    साल 1974 में परवीन नेमजबूर फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखा और अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी बेहद सफल रही। इसके बाद उन्होंनेदीवारअमर अकबर एंथनीनमक हलाल जैसी सुपरहिट और कल्ट फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई।परवीन की निजी जिंदगी भी हमेशा सुर्खियों में रही। उनका नाम अभिनेता डैनी डेन्जोंगपा कबीर बेदी और फिल्ममेकर महेश भट्ट से जुड़ा। महेश भट्ट के साथ उनका रिश्ता सबसे चर्चित रहा लेकिन समय के साथ यह रिश्ता टूट गया और परवीन की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी।

    परवीन पैरानॉइड सिज़ोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं। इस बीमारी में व्यक्ति को भ्रम होने लगता है कि उसके आसपास के लोग उसे नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने कई बार अपने करीबियों और फिल्मी हस्तियों पर गंभीर आरोप लगाए और धीरे-धीरे उन्होंने खुद को दुनिया से अलग कर लिया।22 जनवरी 2005 को परवीन बाबी की मौत हुई। उनके फ्लैट में 2-3 दिन तक दूध और अखबार पड़े रहने के कारण पड़ोसियों को शक हुआ। पुलिस ने जब दरवाजा खोला तो उनका शव बिस्तर पर पड़ा मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनकी मौत मल्टीपल ऑर्गन फेलियर से हुई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उनके पेट में खाने का एक निवाला तक नहीं था यानी वह भूख से भी जूझ रही थीं।

    उनका अंतिम संस्कार मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ क्योंकि उस समय उन्हें पहचानने वाला कोई नहीं था।परवीन बाबी की कहानी केवल एक अभिनेत्री की नहीं है बल्कि यह ग्लैमर और शोहरत के पीछे छिपे अकेलेपन और मानसिक संघर्ष की कड़वी सच्चाई की याद दिलाती है। चमकते सितारे की यह जिंदगी अंत में गुमनामी बीमारी और तन्हाई में समाप्त हुई।