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  • दहेज प्रताड़ना केस में 8 साल बाद गिरफ्तारी, कार्यक्रम के कार्ड ने खोल दिया फरार पिता-पुत्र का राज

    दहेज प्रताड़ना केस में 8 साल बाद गिरफ्तारी, कार्यक्रम के कार्ड ने खोल दिया फरार पिता-पुत्र का राज


    ग्वालियर । ग्वालियर पुलिस ने दहेज प्रताड़ना के एक बहुचर्चित मामले में आठ वर्षों से फरार चल रहे पिता-पुत्र को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बचने के लिए गुजरात के अलग-अलग शहरों में अपनी पहचान और ठिकाने बदल-बदलकर रह रहे थे। लगातार की जा रही तलाश के बावजूद पुलिस उनके करीब नहीं पहुंच पा रही थी लेकिन एक पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड ऐसा सुराग बना जिसने उनकी फरारी का अंत कर दिया।

    महिला सुरक्षा डीएसपी शिखा सोनी के अनुसार नवविवाहिता की शिकायत पर महिला थाने में उसके पति मंगल सिंह उर्फ पुतुआ राजावत और ससुर सुरेश सिंह राजावत के खिलाफ दहेज प्रताड़ना सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि विवाह के बाद दोनों ने कार और नकदी की मांग करते हुए महिला पर लगातार दबाव बनाया और प्रताड़ित कर उसे घर से निकाल दिया।

    मामला दर्ज होने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था लेकिन जमानत मिलने के बाद वे फरार हो गए। इसके बाद से पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी रही। संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी गई लेकिन दोनों हर बार पुलिस को चकमा देकर स्थान बदल लेते थे।

    आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए महिला थाना प्रभारी रश्मि भदौरिया के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी। टीम पिछले चार दिनों से गुजरात में संभावित ठिकानों पर लगातार कार्रवाई कर रही थी। दो दिन पहले पुलिस एक ऐसे ठिकाने पर पहुंची जहां आरोपी कुछ समय पहले तक रह रहे थे लेकिन वहां से वे निकल चुके थे। तलाशी के दौरान पुलिस को एक पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड मिला जिसमें भिंड का पता दर्ज था। यही कार्ड जांच का सबसे अहम सुराग साबित हुआ।

    पुलिस ने तुरंत रणनीति बदलते हुए भिंड में निगरानी शुरू की और सोमवार रात कार्यक्रम स्थल पर दबिश दी। वहां दोनों आरोपी मौजूद मिले जिन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे गिरफ्तारी से बचने के लिए हर कुछ महीनों में अपना ठिकाना बदल लेते थे और वर्षों बाद पहली बार किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने अपने गांव पहुंचे थे। इसी चूक की वजह से वे पुलिस के हत्थे चढ़ गए।

    अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान किन लोगों ने दोनों आरोपियों को शरण दी और उन्हें पुलिस से बचाने में मदद की। यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पूरी कार्रवाई में एएसआई संतपाल सिंह, वीर सिंह राजावत, प्रधान आरक्षक असीम कृष्ण यादव, मुकेश यादव, आरक्षक अंकुर शर्मा, राजदीप जाट और महिला आरक्षक काजल जादौन की अहम भूमिका रही। पुलिस मंगलवार को दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी। यह कार्रवाई लंबे समय से लंबित मामले में बड़ी सफलता मानी जा रही है और फरार आरोपियों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई का अहम उदाहरण भी है।

  • नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली । नीट परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर देश भर में जारी उथल-पुथल के बीच राज्य सरकारों का रुख बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि आंदोलन में भाग लेने वाले सामान्य और निर्दोष छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कठोर प्रशासनिक कदम नहीं उठाया जाएगा। हालांकि राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक रुख में यह भी साफ कर दिया गया है कि आपराधिक इतिहास रखने वाले या हिंसा में संलिप्त लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

    राज्य सरकार द्वारा जारी औपचारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि नीट परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रमों और छात्र असंतोष पर काफी गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया है। गहन समीक्षा के बाद प्रशासन ने यह तय किया है कि जो युवा या विद्यार्थी केवल अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे थे, उनके खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और न ही उन्हें बेवजह परेशान किया जाएगा। लेकिन इस सुरक्षा का दायरा केवल निर्दोष विद्यार्थियों तक ही सीमित रहेगा और पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले तत्वों पर कानून का शिकंजा कसता रहेगा।

    प्रशासनिक स्तर पर यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के हालिया दिशानिर्देशों और न्यायिक टिप्पणियों के अनुरूप उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने भी हाल ही में विभिन्न याचिकाओं पर विचार करते हुए साफ कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए, जबकि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर जांच एजेंसियां नियमानुसार कार्रवाई जारी रख सकती हैं। इसी के तहत राज्य के गृह विभाग ने अपने पुलिस बलों को निर्देश दिए हैं कि वे पुराने दर्ज मामलों की समीक्षा करें और छात्रों की पहचान सुनिश्चित करके ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाएं।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों और अव्यवस्था के सिलसिले में पुलिस में मामला दर्ज किया गया था। इस दर्ज मुकदमे की कड़ी में जांच एजेंसियों ने व्यापक छानबीन की है और अब तक कई संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने या पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर हमला करने का प्रयास किया था।

    उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल से पहले पूर्वोत्तर राज्य असम और पड़ोसी राज्य बिहार की सरकारों ने भी इसी तरह का उदार रुख अपनाया था। दोनों राज्यों ने घोषणा की थी कि परीक्षा में धांधली के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों और आम नागरिकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकारों का मानना है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किए गए प्रदर्शनों पर दंडात्मक रुख अपनाना उचित नहीं है, बशर्ते उसमें किसी असामाजिक तत्व की साजिश शामिल न हो।

    देशव्यापी स्तर पर नीट परीक्षा को लेकर मचा बवाल जुलाई के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय स्तर पर हुए बड़े घटनाक्रमों के बाद थमता नजर आया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद त्यागने के बाद विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के दो दौर की सकारात्मक बातचीत हुई थी। उस वार्ता के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों ने यह सहमति व्यक्त की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को निरस्त किया जाएगा, पुलिसिया उत्पीड़न रोका जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कानून लाया जाएगा। अब राज्य सरकारें उसी समझौते और न्यायिक आदेशों का क्रियान्वयन कर रही हैं।

  • कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं

    कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई से जुड़ा एक अलग तरह का मामला सामने आया है। आमतौर पर महिलाओं और छात्राओं के साथ छेड़छाड़ या उत्पीड़न की शिकायतों पर कार्रवाई करने वाली एंटी रोमियो टीम ने इस बार दो युवतियों को पुरुषों से कथित छेड़छाड़, अभद्र टिप्पणियां और अश्लील इशारे करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    यह घटना वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र की बताई गई है। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब पांच बजे चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर के नीचे दो युवतियों के राह चलते पुरुषों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों राहगीरों की ओर अश्लील टिप्पणियां कर रही थीं और आपत्तिजनक इशारे कर रही थीं। सूचना मिलते ही एंटी रोमियो स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों महिलाओं को हिरासत में ले लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मौके पर पहुंचने पर दोनों युवतियों ने अपना चेहरा ढका हुआ था। प्रारंभिक पूछताछ और मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी लेने के बाद उन्हें थाने लाया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर कथित अश्लील हरकतों और अभद्र व्यवहार से जुड़े आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

    जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि गिरफ्तार की गई दोनों महिलाएं बिहार की रहने वाली हैं। हालांकि उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एंटी रोमियो स्क्वॉड का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, अभद्रता या उत्पीड़न की घटनाओं को रोकना है। कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है और शिकायत मिलने पर आरोपी के महिला या पुरुष होने के आधार पर कार्रवाई में कोई भेदभाव नहीं किया जाता। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार या किसी व्यक्ति को असहज करने वाली गतिविधियों के मामलों में निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।

    वाराणसी की यह घटना इसलिए चर्चा में है क्योंकि एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई इस बार महिलाओं के खिलाफ हुई है। हालांकि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में लगाए गए आरोपों की जांच विधिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। प्रशासन ने लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित व्यवहार बनाए रखने और किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की है, ताकि सभी नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

  • शादी का वादा कर बनाया शारीरिक संबंध, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करता रहा आरोपी गिरफ्तार

    शादी का वादा कर बनाया शारीरिक संबंध, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करता रहा आरोपी गिरफ्तार


    इंदौर । इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म और बाद में आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक कथित शोषण करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    हीरानगर थाना पुलिस के अनुसार 27 वर्षीय युवती ने गौरी नगर निवासी हर्ष उर्फ राज चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में युवती ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले दोनों की पहचान हुई थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया।

    पीड़िता का आरोप है कि 7 मार्च 2023 को आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह उसे अपने एक परिचित के घर भी ले गया, जहां भी उसके साथ संबंध बनाए गए। युवती का कहना है कि वह शादी के भरोसे आरोपी पर विश्वास करती रही।

    शिकायत के अनुसार जब युवती ने शादी की बात दोहराई तो आरोपी का व्यवहार बदल गया। उसने कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी लगातार उसका शोषण करता रहा।

    युवती ने पुलिस को बताया कि इस वर्ष जनवरी में शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके दौरान आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भी वह कथित रूप से फोन कर धमकियां देता रहा और मिलने के लिए दबाव बनाता रहा।

    लगातार मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से परेशान होकर युवती ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के साथ वह हीरानगर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की भी जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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    Indore, Crime, RapeCase, MadhyaPradesh, Police, Arrest, Hiranagar, CrimeNewsइंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म और बाद में आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक कथित शोषण करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    हीरानगर थाना पुलिस के अनुसार 27 वर्षीय युवती ने गौरी नगर निवासी हर्ष उर्फ राज चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में युवती ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले दोनों की पहचान हुई थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया।

    पीड़िता का आरोप है कि 7 मार्च 2023 को आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह उसे अपने एक परिचित के घर भी ले गया, जहां भी उसके साथ संबंध बनाए गए। युवती का कहना है कि वह शादी के भरोसे आरोपी पर विश्वास करती रही।

    शिकायत के अनुसार जब युवती ने शादी की बात दोहराई तो आरोपी का व्यवहार बदल गया। उसने कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी लगातार उसका शोषण करता रहा।

    युवती ने पुलिस को बताया कि इस वर्ष जनवरी में शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके दौरान आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भी वह कथित रूप से फोन कर धमकियां देता रहा और मिलने के लिए दबाव बनाता रहा।

    लगातार मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से परेशान होकर युवती ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के साथ वह हीरानगर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की भी जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी पर मप्र में प्रदर्शन, विधानसभा में धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक

    दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी पर मप्र में प्रदर्शन, विधानसभा में धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक


    भोपाल।
    दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में मंगलवार को मध्य प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। प्रदेशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच विधानसभा में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर कांग्रेस विधायक देर रात तक धरने पर बैठे हुए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी उनके साथ धरने में शामिल हैं।

    मंगलवार को जीतू पटवारी लोकभवन के सामने धरने पर बैठे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को वहां से हटाकर वाहन में बैठा लिया। कुछ देर बाद वे सीधे विधानसभा पहुंचे और धरना दे रहे विधायकों का समर्थन किया।

    दरअसल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया था। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसी के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी प्रदेश में प्रदर्शन किया।

    विधानसभा में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना जारी

    मंगलवार को शाम तक विधानसभा की कार्यवाही के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। कुछ विधायक विरोध जताने के लिए फर्श पर भी लेट गए। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने धरना खत्म कराने की कोशिश की लेकिन विधायक नहीं माने। बाद में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी बातचीत के लिए पहुंचे। इस दौरान उनकी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से तीखी बहस हुई और कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की।

    भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, कटनी, खंडवा, हरदा, शाजापुर, टीकमगढ़, रतलाम, डबरा और खरगोन समेत कई जिलों में कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन, रैली और नारेबाजी की। कुछ जगह चक्काजाम और पुलिस से धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। देर रात तक अधिकांश जिलों में प्रदर्शन समाप्त हो गए, जबकि विधानसभा में कांग्रेस विधायकों का धरना जारी है।

  • सीतापुर में रिश्तों का खौफनाक अंत, शराब के विवाद में 65 वर्षीय मां की हत्या, आरोपी बेटा गिरफ्तार

    सीतापुर में रिश्तों का खौफनाक अंत, शराब के विवाद में 65 वर्षीय मां की हत्या, आरोपी बेटा गिरफ्तार

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। इमलिया सुल्तानपुर थाना क्षेत्र के बेनियापुर गांव में शराब पीने के लिए पैसे नहीं मिलने पर एक बेटे पर अपनी 65 वर्षीय मां की हत्या करने का आरोप लगा है। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने पहले मां के साथ मारपीट की और फिर उनका सिर दीवार से टकरा दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी पूरी रात घर में शव के पास बैठा रहा और सुबह स्वयं ग्राम प्रधान को फोन कर मां की मौत की सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान सावित्री देवी के रूप में हुई है, जो अपने बेटे त्रिभुवन के साथ रहती थीं। उनके पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। ग्रामीणों के मुताबिक त्रिभुवन लंबे समय से शराब का आदी था और इसी वजह से करीब दस वर्ष पहले उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई थी। बताया जा रहा है कि घटना वाली रात वह नशे की हालत में घर पहुंचा और मां से शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगा। सावित्री देवी द्वारा पैसे देने से इनकार किए जाने पर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठा।

    आरोप है कि विवाद के दौरान त्रिभुवन ने अपनी मां के साथ बेरहमी से मारपीट की और उनका सिर दीवार से टकरा दिया। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी ने किसी को सूचना नहीं दी और पूरी रात घर में ही मौजूद रहा। अगले दिन सुबह उसने गांव के प्रधान को फोन कर बताया कि उसकी मां की मौत हो गई है और अंतिम संस्कार कराने की बात कही।

    ग्राम प्रधान जब मौके पर पहुंचे तो उन्होंने सावित्री देवी का शव आंगन में पड़ा देखा। शव के सिर के पास खून के निशान थे, जिससे मामला संदिग्ध लगा। इसके बाद प्रधान ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और घर की दीवार पर भी खून के निशान पाए, जिससे यह आशंका और मजबूत हुई कि महिला का सिर दीवार से टकराया गया था।

    प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी शराब के नशे में अपनी मां के साथ मारपीट करता था। पुलिस को जानकारी मिली है कि घटना से दो दिन पहले भी उसने कथित रूप से सावित्री देवी के साथ हिंसा की थी। महिला के शरीर पर पुराने चोटों के निशान मिलने की बात भी सामने आई है, जिनकी पुष्टि पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय जांच के आधार पर की जाएगी।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपी त्रिभुवन को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि होगी। साथ ही घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, फोरेंसिक जांच और आरोपी से पूछताछ के आधार पर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • लपीएल के छठे सीजन के आगाज से पहले क्रिकेट जगत में मची खलबली, खेल भ्रष्टाचार मामले में विशेष जांच इकाई की बड़ी कार्रवाई

    लपीएल के छठे सीजन के आगाज से पहले क्रिकेट जगत में मची खलबली, खेल भ्रष्टाचार मामले में विशेष जांच इकाई की बड़ी कार्रवाई

    नई दिल्ली । लंका प्रीमियर लीग (एलपीएल) 2026 के छठे सीजन के आधिकारिक आगाज से ठीक पहले क्रिकेट जगत को झकझोर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रतियोगिता की वर्तमान चैंपियन टीम जाफना किंग्स के सह-मालिक को कथित मैच फिक्सिंग और भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों के तहत पुलिस विभाग द्वारा हिरासत में लिया गया है। इस सनसनीखेज कार्रवाई को खेल संबंधी अपराधों की रोकथाम के लिए गठित विशेष जांच इकाई ने अंजाम दिया है। इस बड़ी गिरफ्तारी के कारण टी20 लीग की शुचिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसने उद्घाटन समारोह के ठीक पहले पूरे टूर्नामेंट के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।

    श्रीलंका पुलिस विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, जाफना किंग्स फ्रेंचाइजी के प्रबंधकीय ढांचे से जुड़े एक प्रमुख साझीदार को खेलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है। विशेष जांच दल इस वित्तीय और प्रशासनिक हेराफेरी के नेटवर्क की विस्तृत पड़ताल कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस मामले के तार अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी और खेल को अवैध रूप से प्रभावित करने वाले बड़े सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस जांच के दायरे में कुछ अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और संदिग्धों के आने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है, जिससे इस रैकेट का पूर्ण भंडाफोड़ हो सके।

    यह संपूर्ण विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब टूर्नामेंट का पहला उद्घाटन मुकाबला कोलंबो के ऐतिहासिक सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब ग्राउंड पर खेला जाना निर्धारित था। यह मैच पूर्व चैंपियन जाफना किंग्स और गॉल गैलेंट्स के बीच खेला जाना था, जो पिछले सीजन के फाइनल मुकाबले का पुनरावृत्ति भी है। आयोजकों और स्थानीय क्रिकेट बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस प्रशासनिक विवाद और पुलिस कार्रवाई के बावजूद पूर्व निर्धारित खेल कार्यक्रम में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा और सभी मैच योजना के अनुसार ही आयोजित होंगे। हालांकि, मैदान के बाहर हुई इस कानूनी कार्रवाई ने खेल प्रेमियों और प्रायोजकों के बीच एक अनिश्चितता का माहौल अवश्य निर्मित कर दिया है।

    उल्लेखनीय है कि खेल अपराधों और भ्रष्टाचार को रोकने के मामले में श्रीलंका के पास वैश्विक स्तर पर सबसे कठोर और सख्त कानूनी ढांचा मौजूद है। देश में खेल से संबंधित अपराधों की रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग और किसी भी प्रकार की अनैतिक हेराफेरी को एक गैर-जमानती और गंभीर श्रेणी के अपराध के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो दोषियों के लिए भारी आर्थिक दंड के साथ-साथ दीर्घकालिक कारावास की सजा का स्पष्ट प्रावधान है। इस सख्त कानून के कारण ही विशेष जांच इकाई को इस स्तर पर त्वरित कार्रवाई करने के अधिकार प्राप्त हुए हैं।

    इस अभूतपूर्व घटनाक्रम ने न केवल लंका प्रीमियर लीग बल्कि संपूर्ण टी20 फ्रेंचाइजी क्रिकेट की साख को एक बड़ा झटका दिया है। जिस वैश्विक प्रतियोगिता की शुरुआत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उच्च स्तरीय खेल प्रतिस्पर्धा के रूप में होनी चाहिए थी, वह अब कानूनी और आपराधिक जांच के घेरे में आ चुकी है। खेल विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मामले में ठोस साक्ष्य सामने आते हैं और आरोप सही साबित होते हैं, तो यह वैश्विक मंच पर लीग की विश्वसनीयता, ब्रांड वैल्यू और भविष्य के निवेश को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित कर सकता है। फिलहाल देश की सर्वोच्च खेल जांच एजेंसी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है।

  • फर्जी पहचान, शादी और करोड़ों के सपनों का जाल! खुद को IAS बताने वाली महिला पर ठगी और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    फर्जी पहचान, शादी और करोड़ों के सपनों का जाल! खुद को IAS बताने वाली महिला पर ठगी और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से कथित फर्जी पहचान के जरिए शादी करने का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला ने स्वयं को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बताकर युवक से विवाह किया। बाद में जब उसके दावों की सत्यता पर सवाल उठे तो पति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार, युवक और महिला की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। बातचीत के दौरान महिला ने स्वयं को IAS अधिकारी बताया और दावा किया कि एक न्यायिक मामले के कारण उसकी नियुक्ति लंबित है। युवक का आरोप है कि महिला और उसके परिजनों ने भी इसी बात की पुष्टि करते हुए भरोसा दिलाया कि मामला समाप्त होते ही वह प्रशासनिक सेवा में कार्यभार संभाल लेगी। इन दावों पर विश्वास करने के बाद दोनों ने विवाह कर लिया।

    शिकायत में कहा गया है कि विवाह के शुरुआती दिनों के बाद महिला का व्यवहार बदलने लगा। पति का आरोप है कि उसने परिवार के बहुमूल्य आभूषण और अन्य कीमती सामान अपने कब्जे में ले लिया। आरोप यह भी है कि बाद में परिवार पर बड़ी धनराशि की मांग का दबाव बनाया गया और आर्थिक लाभ के लिए जमीन बेचने का सुझाव दिया गया। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो कथित रूप से झूठे मुकदमों में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

    पति ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि एक रात महिला ने कथित रूप से उसका गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया। उसने तत्काल पुलिस सहायता ली, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर मामले को सुलझाने का प्रयास भी किया गया। हालांकि विवाद समाप्त नहीं हुआ और बाद में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।

    मामले में दर्ज प्राथमिकी में महिला के साथ उसके पिता, भाई और एक अन्य रिश्तेदार को भी नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सभी ने मिलकर महिला की पहचान और नौकरी को लेकर गलत जानकारी देकर विवाह कराया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं और क्या अन्य लोगों के साथ भी इसी प्रकार की घटनाएं हुई हैं।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच और दर्ज मुकदमे के आधार पर महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य प्रमाण जुटाए जा रहे हैं। साथ ही नामजद अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन पहचान और वैवाहिक संबंधों में तथ्यों के सत्यापन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से बनने वाले संबंधों में व्यक्तिगत और पेशेवर दावों की पुष्टि करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों और धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम किया जा सके। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

  • विवादों और सदमे के बीच थमीं रॉब डीपरिंक की सांसें: यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद फीफा कप से बाहर हुए रेफरी की मौत से खेल जगत स्तब्ध

    विवादों और सदमे के बीच थमीं रॉब डीपरिंक की सांसें: यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद फीफा कप से बाहर हुए रेफरी की मौत से खेल जगत स्तब्ध

    नई दिल्ली । फुटबॉल जगत अभी दक्षिण अफ्रीका के युवा मिडफील्डर जेडन एडम्स के आकस्मिक निधन के गहरे सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि फीफा विश्व कप 2026 के बीच एक और दुखद खबर ने खेल प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। विश्व कप के लिए वीडियो असिस्टेंट रेफरी की सूची से बाहर किए गए नीदरलैंड के विख्यात फुटबॉल रेफरी रॉब डीपरिंक का 38 वर्ष की आयु में असामयिक निधन हो गया है। डच रेफरी के इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है, हालांकि उनकी मृत्यु के वास्तविक कारणों का खुलासा अभी तक नहीं किया गया है।

    दिवंगत रेफरी रॉब डीपरिंक का करियर शानदार रहा था और वह वर्ष 2017 से नीदरलैंड की शीर्ष घरेलू फुटबॉल लीग ‘एरेडिविजी’ में रेफरी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हाल ही में संपन्न हुए यूरो कप 2024 में भी उन्होंने वीएआर अधिकारी के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी प्रतिभा को देखते हुए ही फीफा ने उन्हें 2026 के महाकुंभ के लिए वीएआर अधिकारियों की मुख्य सूची में शामिल किया था। लेकिन टूर्नामेंट के आगाज से करीब एक महीने पहले लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस द्वारा एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के संगीन मामले में की गई उनकी गिरफ्तारी के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं।

    इस गंभीर आपराधिक मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फीफा और डच फुटबॉल एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाया और डीपरिंक को विश्व कप की रेफरी टीम से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया था। हालांकि, बाद में स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, जिसके चलते इस कानूनी मामले को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया था। मामले के बंद होने के बाद डीपरिंक ने अपनी बेगुनाही साबित होने पर राहत की सांस ली थी, लेकिन विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित मंच से बाहर किए जाने के फैसले से वह मानसिक रूप से काफी निराश और तनाव में चल रहे थे।

    नीदरलैंड फुटबॉल संघ ने इस दुखद घटनाक्रम पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए एक आधिकारिक शोक संदेश जारी किया है। संघ ने अपने बयान में कहा कि रॉब डीपरिंक के असामयिक निधन की खबर से पूरा खेल जगत स्तब्ध है और देश ने न केवल एक अत्यंत सम्मानित खेल अधिकारी खोया है, बल्कि एक बेहद सहृदय और समर्पित साथी को भी गंवा दिया है। विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च शासी निकाय फीफा ने भी डच फुटबॉल संघ और दिवंगत रेफरी के पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। खेल इतिहास में इस विश्व कप को खिलाड़ियों और अधिकारियों की अप्रत्याशित क्षति के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।

  • सात साल के रिश्ते का दावा बना विवाद की वजह, युवती की शादी रोकने के लिए पोस्टर अभियान चलाने वाला युवक दोस्तों समेत गिरफ्तार

    सात साल के रिश्ते का दावा बना विवाद की वजह, युवती की शादी रोकने के लिए पोस्टर अभियान चलाने वाला युवक दोस्तों समेत गिरफ्तार

    नई दिल्ली । तेलंगाना के राजन्ना सिरसिल्ला जिले में एक प्रेम प्रसंग उस समय बड़ा विवाद बन गया, जब एक युवक ने कथित तौर पर युवती की शादी रुकवाने के उद्देश्य से पूरे गांव में पोस्टर चिपका दिए। पोस्टरों में उसने युवती के साथ अपने संबंध का दावा किया और विवाह रुकवाने की अपील जैसी बातें सार्वजनिक कर दीं। इस घटना के सामने आने के बाद गांव में हलचल मच गई और मामला पुलिस तक पहुंच गया।

    बताया गया कि युवक का दावा है कि उसका युवती के साथ पिछले करीब सात वर्षों से प्रेम संबंध था। इस बीच युवती के परिवार ने उसका विवाह दूसरे युवक से तय कर दिया। युवक का आरोप है कि दोनों परिवार उनके रिश्ते के बारे में जानते थे, लेकिन इसके बावजूद शादी का फैसला लिया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि युवती की इच्छा के विपरीत विवाह कराया जा रहा था।

    आरोप है कि युवक ने अपनी बात सार्वजनिक करने के लिए पोस्टर तैयार करवाए। इन पोस्टरों में उसने अपनी और युवती की तस्वीरों के साथ दूल्हे की तस्वीर भी प्रकाशित कर दी। इतना ही नहीं, पोस्टरों में दूल्हे और उसके परिवार से जुड़ी निजी जानकारी भी शामिल कर दी गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया। इसके बाद देर रात गांव के प्रमुख चौराहों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर ये पोस्टर लगा दिए गए।

    अगली सुबह जब ग्रामीणों की नजर इन पोस्टरों पर पड़ी तो पूरे क्षेत्र में इस घटना की चर्चा शुरू हो गई। पोस्टरों में प्रकाशित निजी जानकारी और लगाए गए आरोपों को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इस घटना से विवाह समारोह से जुड़े परिवारों में भी चिंता का माहौल बन गया।

    मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी युवक को हिरासत में लिया गया। इसके साथ ही इस पूरी घटना में सहयोग करने के आरोप में उसके पांच साथियों को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    जांच के दौरान पुलिस यह भी पता लगा रही है कि पोस्टर कहां तैयार किए गए, उन्हें किसने छापा और पूरी योजना में किन-किन लोगों की भूमिका रही। इसके अलावा पोस्टरों में निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने के पहलू की भी अलग से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्तिगत विवाद या संबंध को सार्वजनिक करते हुए किसी व्यक्ति की निजी जानकारी बिना अनुमति के साझा करना गंभीर कानूनी मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में निजता के अधिकार, मानहानि और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। इसलिए किसी भी विवाद का समाधान कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि व्यक्तिगत विवादों का समाधान कानून और संवाद के माध्यम से करें तथा किसी भी परिस्थिति में ऐसा कदम न उठाएं जिससे किसी अन्य व्यक्ति की निजता, प्रतिष्ठा या सुरक्षा प्रभावित हो।