धार्मिक आचार्यों का मानना है कि इस दिन तिल का दान करने से शनि से संबंधित सभी कष्ट समाप्त होते हैं। इसके अलावा, गरीबों को बर्तन, तिल और अन्य सामान दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती हैमौसम को लेकर भी मकर संक्रांति विशेष महत्व रखता है। हालांकि, इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लेकिन अगर मौसम अनुकूल रहा तो गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या गंगा घाटों पर पहुंच सकती है। विशेष रूप से उत्तर भारत के कई इलाकों से लोग इस दिन गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं।
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मकर संक्रांति 2026 पुण्यकाल 16 घंटे का. 15 जनवरी को मनाएं मकर संक्रांति
नई दिल्ली । मकर संक्रांति 2026 के दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 9:19 बजे होगा, लेकिन शास्त्रों के अनुसार पुण्यकाल 16 घंटे तक रहेगा, जो 15 जनवरी तक जारी रहेगा। इस दिन विशेष रूप से स्नान, सूर्य पूजा और दान का महत्व है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति को विशेष दिन माना जाता है क्योंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण की दिशा में प्रवेश करते हैं, जिससे पृथ्वी पर दिन-ब-दिन तापमान बढ़ता है और ऋतु परिवर्तन की शुरुआत होती है। इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है, क्योंकि सूर्यदेव का उत्तरायण में प्रवेश शुभ होता है।कर्मकांडी अमरेंद्र कुमार शास्त्री और ज्योतिषाचार्य पंडित नरोत्तम द्विवेदी के अनुसार, मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाएगा।इस दिन, स्नान, सूर्यदेव की उपासना और तिल का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।मकर संक्रांति से जुड़ी एक पुरानी कथा भी है, जिसके अनुसार भगवान सूर्य, अपने पुत्र भगवान शनि से मिलने मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से सूर्य उत्तर पथगामी होते हैं और पृथ्वी की ओर उनका रुख बदलता है।मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से स्नान का महत्व है, खासकर गंगा या अन्य पवित्र नदियों में। इस दिन को पुण्यकाल माना गया है, और इस दौरान दान करने से व्यक्ति के जीवन में शुभता आती है।धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन सूर्यदेव, भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से नया अन्न, तिल, कम्बल, घी और धार्मिक पुस्तकों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भोजन में खासतौर पर तिल और खिचड़ी बनाई जाती है, जो प्राचीन परंपराओं के अनुसार भगवान को अर्पित की जाती है, फिर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।इसके अलावा, मकर संक्रांति के बाद खरमास का समय समाप्त हो जाएगा, जिसके चलते मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या और 4 फरवरी को पहला वैवाहिक लग्न मुहूर्त भी शुरू होगा। 2026 में मकर संक्रांति का दिन धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं से भरपूर रहेगा। यह दिन सूर्य की उपासना, तिल दान, और अन्य शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त रहेगा। विशेष रूप से इस दिन की महत्वता को समझते हुए श्रद्धालु इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाएंगे। -

5 जनवरी का पंचांग भद्राकाल रहेगाआडल योग नहीं लगेगाजानें शुभ-अशुभ मुहूर्त
नई दिल्ली । 5 जनवरी2026 का पंचांग अनुसारइस दिन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी और यह दिन सोमवार को पड़ेगा। सोमवार को भद्राकाल का साया रहेगाजो रात 8 बजकर 53 मिनट से लेकर अगले दिन 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इस समय किसी भी शुभ कार्य को करने से बचना चाहिएक्योंकि भद्राकाल में किया गया शुभ काम भी अशुभ परिणाम दे सकता है। द्वितीया तिथि सुबह 9 बजकर 56 मिनट तक रहेगीइसके बाद तृतीया तिथि का आगमन होगा। आइए जानते हैं आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त के बारे में।शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त दोपहर 1206 से 1247 तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 536 से 603 तक, अमृत काल मुहूर्त शाम 729 से 858 तक, विजय मुहूर्त दोपहर 210 से 252 तक, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 526 से 620 तक।अशुभ मुहूर्त
राहुकाल सुबह 833 से 951 तक, गुलिक काल दोपहर 145 से 302 तक, यमगण्ड काल सुबह 1109 से 1227 तक, दुर्मुहूर्त दोपहर 1247 से 129 तक।विशेष जानकारी5 जनवरी को आडल योग नहीं लगेगाजो कि एक शुभ योग माना जाता है। सूर्योदय और सूर्यास्त, सूर्योदय सुबह 715, सूर्यास्त शाम 538,।चन्द्रोदय
चन्द्रोदय शाम 749 चन्द्रोदय की अवधि 6 जनवरी की सुबह 856 तक।दिशाशूलरविवार के दिन दिशा शूल पूर्व दिशा में रहेगा। इसका मतलब है कि सोमवार को यदि आप यात्रा पर जाने का सोच रहे हैं तो पूर्व दिशा की यात्रा से बचें। यह दिशा वर्जित मानी जाती है। यदि यात्रा जरूरी होतो दही-जीरा खाकर और दर्पण देखकर यात्रा पर निकलने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं।इस दिन पंचांग में दी गई जानकारी को ध्यान में रखकर अपने कार्यों की योजना बनाना शुभ रहेगा। -

4 जनवरी का पंचांग त्रिपुष्कर और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संगम जानें राहुकाल और शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली । 4 जनवरी 2026 रविवार को कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से माघ का महीना आरंभ हो रहा है। माघ माह को धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक पवित्र और शुभ माना जाता है। इस महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों से मुक्ति प्राप्त होती है। खास बात यह है कि इस दिन त्रिपुष्कर और सर्वार्थ सिद्धि योग का संगम हो रहा है जो किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ समय है।इस दिन नए वाहन की खरीदारी नया घर या व्यापार शुरू करने के लिए यह योग उपयुक्त है। त्रिपुष्कर योग दोपहर 12:29 बजे से लेकर 3:11 बजे तक रहेगा जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग 3:11 बजे से लेकर 5 जनवरी की सुबह 7:15 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक रहती है।
शुभ मुहूर्त के समय पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से लेकर 12:47 बजे तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 5:35 बजे से लेकर 6:02 बजे तक होगा जबकि अमृत काल मुहूर्त दोपहर 1:01 बजे से लेकर 2:27 बजे तक रहेगा। वहीं राहुकाल के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से बचना चाहिए। यह राहुकाल शाम 4:20 बजे से लेकर 5:38 बजे तक रहेगा। इसी तरह यमगण्ड काल दोपहर 12:26 बजे से लेकर 1:44 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 3:02 बजे से लेकर 4:20 बजे तक रहेगा।
सूर्योदय सुबह 7:15 बजे और सूर्यास्त शाम 5:38 बजे होगा। चन्द्रोदय शाम 6:40 बजे होगा और 5 जनवरी की सुबह 8:09 बजे तक रहेगा। इस दिन पश्चिम दिशा की यात्रा से बचना चाहिए क्योंकि दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। यह दिन धार्मिक और शुभ कार्यों के लिए अत्यधिक उपयुक्त है खासकर जब त्रिपुष्कर और सर्वार्थ सिद्धि योग का लाभ लिया जाए।
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31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल
नई दिल्ली/काशी: वर्ष 2025 का समापन एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक संयोग के साथ हो रहा है। आज, बुधवार 31 दिसंबर 2025 को पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे संतान प्राप्ति, संतान की उन्नति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए अमोघ माना जाता है। वैष्णव परंपरा के अनुयायी आज पूरी निष्ठा के साथ भगवान विष्णु की आराधना कर रहे हैं।तिथि और नक्षत्रों की अनूठी गणना
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की अंतिम एकादशी कई मायनों में खास है। आज एकादशी तिथि का क्षय हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अर्धरात्रि के बाद द्वादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, तिथि का यह परिवर्तन आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि करने वाला होता है।तिथि विवरण: एकादशी तिथि आज दिन भर व्याप्त रहेगी। रात 1 बजकर 48 मिनट पर द्वादशी तिथि का आगमन होगा, जो अगले दिन तक प्रभावी रहेगी।नक्षत्र और योग: आज रात 1 बजकर 30 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद चंद्रमा के प्रिय रोहिणी नक्षत्र का आरंभ होगा। वहीं, योग की बात करें तो रात 9 बजकर 13 मिनट तक साध्य योग रहेगा, जो शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसके उपरांत शुभ योग प्रारंभ होगा।चंद्रमा का गोचर: वृषभ राशि में उच्च के होंगे चंद्र
आज ज्योतिषीय दृष्टि से एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे, लेकिन इसके तुरंत बाद वे अपनी उच्च राशि वृषभ में प्रवेश कर जाएंगे। चंद्रमा का अपनी उच्च राशि में होना मन की एकाग्रता, मानसिक शांति और भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि का कारक बनता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थिति संकल्प शक्ति को मजबूत करने वाली होगी।आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त Time Table
किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या नए कार्य की शुरुआत के लिए सही समय का चयन करना अनिवार्य है।
शुभ मुहूर्त Auspicious Timings:ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:24 से 6:19 तक ईश्वर चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:08 से 2:49 तक किसी भी कार्य में सफलता हेतु निशिथ काल: रात 11:57 से 12:52 तक तांत्रिक पूजा और विशेष जप हेतु गोधूलि बेला: शाम 5:32 से 6:00 तक आरती और दीपदान हेतु अशुभ मुहूर्त Inauspicious Timings: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल जैसे समय में महत्वपूर्ण निर्णय लेने या नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए:राहुकाल: दोपहर 12:00 से 1:30 तक गुलिक काल: सुबह 10:30 से 12:00 तक यमगंड: सुबह 7:30 से 9:00 तकपुत्रदा एकादशी का महत्व और उपाय
पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फलदायी माना गया है जो संतान सुख की कामना रखते हैं। भगवान विष्णु के ‘नारायण’ स्वरूप की पूजा आज के दिन की जाती है।विशेष उपाय: आज बुधवार का दिन है इसलिए भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। आज ‘श्री गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ करना अत्यंत लाभकारी रहेगा। यह उपाय न केवल विघ्नों को दूर करता है बल्कि साल के अंतिम दिन भविष्य के लिए मानसिक स्पष्टता और कार्यों में सफलता सुनिश्चित करता है।सावधानी: पंचांग की गणना स्थान के अनुसार कुछ मिनटों के अंतर पर आधारित हो सकती है।अतः किसी भी बड़े अनुष्ठान से पूर्व अपने स्थानीय पंडित या पंचांग का परामर्श अवश्य लें। -

14 जनवरी 2026मकर संक्रांति के साथ कई बड़े त्योहारों का महासंयोग जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
नई दिल्ली । 14 जनवरी 2026मकर संक्रांति और अन्य प्रमुख त्योहारों का महासंयोग 14 जनवरी 2026 एक विशेष दिन साबित होने वाला है क्योंकि इस दिन न केवल मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण व्रत और पर्व भी एक साथ पड़ रहे हैं। भारतीय पंचांग के अनुसार यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्व रखता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे और साथ ही षटतिला एकादशी पोंगल और माघ बिहू जैसे प्रमुख त्योहारों का संगम भी होगा।
मकर संक्रांति का महत्व और शुभ मुहूर्तमकर संक्रांति का पर्व खासतौर पर सूर्य देव की पूजा दान और पुण्य के लिए प्रसिद्ध है। 14 जनवरी 2026 को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और यह दिन विशेष रूप से स्नान दान और पूजा के लिए उत्तम रहेगा। दान और पुण्य का समयदोपहर 0307 बजे से शाम 0602 बजे तक रहेगा।
शुभ कार्यइस अवधि में तिल गुड़ अन्न और वस्त्र दान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना तिल और गुड़ का दान करना तथा पितरों के लिए तर्पण करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।षटतिला एकादशी
माघ माह के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी भी 14 जनवरी को पड़ रही है जो भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन विशेष रूप से तिल का सेवन और तिल से संबंधित धार्मिक कार्य जैसे तिल का उबटन स्नान हवन और दान का महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है और यह संयोग मकर संक्रांति के साथ बहुत लाभकारी माना जाता है।
पोंगल और माघ बिहू
14 जनवरी से पोंगल और माघ बिहू जैसे कृषि पर्वों का भी आरंभ होगा। ये पर्व भारत के विभिन्न हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। पोंगल तमिलनाडु यह चार दिनों तक चलने वाला एक प्रमुख कृषि पर्व है जिसमें सूर्य देव और इंद्र देव की पूजा की जाती है।माघ बिहू असम असम में यह पर्व अग्नि देव की पूजा और नई फसल के स्वागत के रूप में मनाया जाता है।
इस महासंयोग पर क्या करें
इस दिन के धार्मिक महत्व को देखते हुए इन कार्यों को करना विशेष लाभकारी माना जाता हैमहा-दानतिल गुड़ खिचड़ी अन्न और गर्म कपड़ों का दान करें। यह आपके पुण्य को बढ़ाता है और पुराने पापों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।पवित्र स्नान गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि संभव न हो तो घर में गंगाजल और तिल डालकर स्नान करें। तर्पणपितरों की शांति के लिए तिल से तर्पण करना भी अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। यह आपके परिवार के लिए आशीर्वाद का कारण बनता है। -

विघ्नेश्वर चतुर्थी 2025: गणेश जी के मंत्र पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली । आज 24 दिसंबर को विघ्नेश्वर चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है जो विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा से जुड़ा हुआ है। यह पर्व पौष माह की विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है और इसे विघ्नेश्वर चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से जीवन के सारे विघ्न दूर होते हैं और समृद्धि सफलता और सिद्धि की प्राप्ति होती है।विघ्नेश्वर चतुर्थी का शुभ मुहूर्त चतुर्थी मध्याह्न पूजा मुहूर्त
सुबह 11:19 बजे से दोपहर 1:11 बजे तक वर्जित चंद्रोदय काल सुबह 10:16 बजे से रात 9:26 बजे तक इस दौरान चंद्र दर्शन न करें
गणेश जी की पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। पूजा की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। कलश स्थापना करके पंचामृत से भगवान गणेश का अभिषेक करें। इसके बाद वस्त्र जनेऊ चंदन दूर्वा फूल धूप और दीप अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक गुड़ या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश जी के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।
गणेश जी के मंत्र:ॐ गण गणपतये नमः कम से कम 108 बार जाप करें श्री गणेशाय नम: ऊं गं गणपतये नमः वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥गणेश गायत्री मंत्र:
ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥गणेश जी की आरतीजय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।
एक दंत दयावंत चार भुजा धारी माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी। यह आरती भगवान गणेश के गुणों और उनकी कृपा के बारे में है जो भक्तों के जीवन में सुख समृद्धि और शांति लाती है।
विघ्नेश्वर चतुर्थी का महत्वइस दिन का व्रत रखने और गणेश जी की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से नौकरी व्यापार शिक्षा और वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं से राहत मिलती है और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। आज के दिन गणेश जी की पूजा विधि और मंत्रों के जाप से न केवल आशीर्वाद प्राप्त होता है बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है।