नई दिल्ली। बागपत खाप पंचायत ने समाज सुधार और सांस्कृतिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए बड़े और सख्त फैसले लिए हैं। बड़ौत की खाप पंचायत ने 18 साल से कम उम्र के लड़कों को स्मार्टफोन देने और हाफ पैंट पहनकर बाहर निकलने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही शादियों में फिजूल खर्च और मैरिज होम में समारोह आयोजित करने पर भी पाबंदी की गई है। खाप चौधरियों ने स्पष्ट किया कि ये नियम अब लड़कियों और लड़कों दोनों पर समान रूप से लागू होंगे और इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी पर अनुशासन और सामाजिक संस्कारों का असर बढ़ाना है।
बड़ौत की इस पंचायत में खाप चौधरी सुभाष के नेतृत्व में समाज के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सख्त निर्णय लिए गए। उन्होंने कहा कि आज के युवा हाफ पैंट पहनकर और स्मार्टफोन का दुरुपयोग करके सामाजिक मर्यादा की अवहेलना कर रहे हैं, इसलिए इसे रोकना जरूरी है। पंचायत ने यह भी निर्देश दिया कि विवाह समारोहों को गांव या घर में ही आयोजित किया जाए, ताकि फिजूल खर्च और समय दोनों की बचत हो सके।
खाप पंचायत का यह कदम केवल बागपत तक सीमित नहीं रहेगा। राजस्थान की पंचायतों से प्रेरणा लेकर इसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू कराने की योजना बनाई जा रही है।
बागपत की खाप पंचायत के इस सख्त फैसले ने सामाजिक और सांस्कृतिक मर्यादा के प्रति एक स्पष्ट संदेश दिया है। युवा पीढ़ी को अनुशासन में लाना, फिजूल खर्च रोकना और पारिवारिक व सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना इस कदम का मुख्य उद्देश्य है। खाप पंचायत के अनुसार, नियमों का पालन कराकर ही समाज और संस्कृति को बचाया जा सकता है। यह कदम वेस्ट यूपी में खाप पंचायतों द्वारा युवा और परिवारों पर सकारात्मक प्रभाव डालने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है और इसे पूरे प्रदेश में फैलाने की तैयारी की जा रही है।
