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  • बंगाल में झटके के बाद ममता बनर्जी की अगली रणनीति क्या?

    बंगाल में झटके के बाद ममता बनर्जी की अगली रणनीति क्या?


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी झटके के बाद ममता बनर्जी अब अपनी सियासत को नए सिरे से साधने की तैयारी में दिख रही हैं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने नतीजों के बाद दिए बयानों में साफ किया है कि वे पीछे हटने के बजाय आक्रामक रुख अपनाए रखेंगी और विपक्षी एकता पर जोर बढ़ाएंगी।

    विपक्षी एकता पर फोकस

    राजनीतिक संकेत बताते हैं कि ममता बनर्जी अब INDIA गठबंधन के साथ तालमेल मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं। केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका बनाए रखने और भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना उनकी प्राथमिकता हो सकती है।

    “फाइटर इमेज” बरकरार रखने की कोशिश

    चुनाव नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत में ममता ने हार को सीधे स्वीकार करने से बचते हुए संघर्ष जारी रखने का संदेश दिया। माना जा रहा है कि यह रुख पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और यह जताने की कोशिश है कि राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

    संसद में मजबूत उपस्थिति का सहारा

    तृणमूल कांग्रेस फिलहाल केंद्र में तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने पश्चिम बंगाल की 42 में से 29 सीटें जीती थीं, जो उसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली बनाती हैं। ऐसे में विपक्षी रणनीति में उसकी भूमिका अहम बनी रह सकती है।

    कैडर को संभालना बड़ी चुनौती

    चुनावी झटके के बाद पार्टी के भीतर संगठन को मजबूत बनाए रखना भी बड़ी प्राथमिकता होगी। इसके लिए ममता बनर्जी राज्यभर का दौरा कर सकती हैं, ताकि कार्यकर्ताओं में एकजुटता बनी रहे और टूट-फूट को रोका जा सके।

    भाजपा की बढ़त रोकने की तैयारी

    बंगाल में भाजपा की मजबूती को देखते हुए आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए अभी से रणनीति बनाना जरूरी हो गया है। विपक्षी खेमे की कोशिश होगी कि कार्यकर्ताओं और समर्थकों को यह भरोसा दिलाया जाए कि एकजुट होकर मुकाबला किया जा सकता है।

    बंगाल के नतीजों ने ममता बनर्जी के सामने नई चुनौतियां जरूर खड़ी की हैं, लेकिन उनके हालिया संकेत बताते हैं कि वे आक्रामक राजनीति, संगठन मजबूती और विपक्षी एकता—इन तीन मोर्चों पर एक साथ काम करने की रणनीति अपना सकती हैं।

  • बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत पर दुनियाभर से आ रही प्रतिक्रियाएं, ट्रंप ने भी PM मोदी को दी बधाई

    बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत पर दुनियाभर से आ रही प्रतिक्रियाएं, ट्रंप ने भी PM मोदी को दी बधाई


    वॉशिंगटन।
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party -BJP)) की ऐतिहासिक जीत के बाद देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को ऐतिहासिक और निर्णायक चुनावी जीत की बधाई दी है।

    व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने बातचीत में बताया कि हाल ही में फोन पर हुई बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि भारत सौभाग्यशाली है कि उसका नेतृत्व आप जैसे नेता के हाथों में है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को इस हालिया ऐतिहासिक और निर्णायक चुनावी जीत के लिए बधाई दी है।


    बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव

    भाजपा की इस जीत के साथ पहली बार पार्टी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की है। यह राज्य लंबे समय से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। इस चुनाव परिणाम के साथ ही राज्य में बनर्जी का करीब 15 साल का शासन समाप्त हो गया है। इसे पीएम मोदी के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उनका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कद और मजबूत हुआ है।


    ‘यह नए युग की शुरुआत’

    जीत की घोषणा के बाद नई दिल्ली में समर्थकों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इसे पश्चिम बंगाल के लिए नए युग की शुरुआत बताया था। उन्होंने कहा कि यह जनादेश भयमुक्त, विकासशील और विश्वास से भरे बंगाल की दिशा में एक निर्णायक कदम है। पीएम मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का उल्लेख करते हुए कहा “अब दशकों का इंतजार खत्म हुआ है और जनता ने उस विजन को साकार करने का अवसर भाजपा को दिया है।”


    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा भारत का प्रभाव

    इस ऐतिहासिक जीत और ट्रंप की बधाई को भारत की बढ़ती वैश्विक साख से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूती मिलेगी और वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका और प्रभावशाली होगी।

  • बंगाल में ममता का अभेद्य दुर्ग ढहाया….BJP की इस प्रचंड जीत का UP पर क्या होगा असर?

    बंगाल में ममता का अभेद्य दुर्ग ढहाया….BJP की इस प्रचंड जीत का UP पर क्या होगा असर?


    नई दिल्ली।
    बंगाल और असम (Bengal and Assam) में बीजेपी (BJP) की यह प्रचंड जीत 2026 की राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट (Turning point) है. 4 मई 2026 के ये नतीजे न केवल पूर्वी भारत का भूगोल बदल रहे हैं, बल्कि इनका सीधा असर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सियासी समीकरणों पर पड़ना तय है. पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के अभेद्य दुर्ग को ढहाने के बाद ‘भगवा’ खेमे में जो उत्साह है, उसकी गूंज अब लखनऊ के सियासी गलियारों तक भी सुनाई दे रही है?

    पश्चिम बंगाल में बीजेपी की यह ‘ऐतिहासिक’ जीत महज एक राज्य की जीत नहीं है बल्कि यह 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए एक ‘लॉन्चपैड’ तैयार कर दिया है. बीजेपी ने जिस तरह बंगाल में ममता बनर्जी को मात दी है, उससे अखिलेश यादव के चैलेंज से निपटने में नई ऊर्जा मिलेगी।

    उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए फॉर्मूले से बीजेपी को तगड़ा झटका दिया था. बीजेपी ने दो साल में कमबैक किया है. ऐसे में बंगाल में ममता की हार विपक्ष के लिए बड़ा झटका है तो बीजेपी के लिए यूपी में ‘बुस्टर डोज’ की तरह है, जो सपा-कांग्रेस के लिए किसी सियासी टेंशन से कम नहीं है?


    बंगाल में ममता का सियासी किला ध्वस्त

    बंगाल चुनाव में अखिलेश यादव की पूरी तरह ममता बनर्जी के पक्ष में खड़े थे. यही वजह है कि बंगाल चुनाव के नतीजों को यूपी की सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है. क्योंकि अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं. बंगाल जैसे कठिन राज्य में जीत ने बीजेपी कैडर को यह संदेश दिया है कि ‘अजेय’ कुछ भी नहीं है।

    सियासत में कॉन्फिडेंस जरूरी है, लेकिन ओवर-कॉन्फिडेंस अक्सर घातक साबित होते हैं. अखिलेश यादव के लिए संकेत है कि उन्हें चुनावी आकलन में अधिक संतुलन और सतर्कता बरतनी होगी. 2024 के लोकसभा चुनाव में 37 लोकसभा सीटें जीतने के बाद अखिलेश यादव, उत्साह और आत्मविश्वास से लबरेज हैं, लेकिन कई बार उनका आत्मविश्वास, अतिआत्मविश्वास में बदलता दिखता है. बंगाल में ममता बनर्जी का ओवर-कॉन्फिडेंस ही महंगा पड़ा है।


    बंगाल चुनाव का यूपी की सियासत पर असर?

    बंगाल में मिली सफलता के बाद योगी आदित्यनाथ अब 2027 के लिए और भी अधिक आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेंगे. बंगाल के नतीजों ने साबित कर दिया कि बीजेपी का ‘हिंदुत्व कार्ड’ ने विपक्ष के सारे समीकरण को ध्वस्त कर दिया है।

    बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बहुल सीटों पर सेंधमारी ने ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाले नैरेटिव को धार देने के लिए ‘धार्मिक ध्रुवीकरण’ की बिसात बिछाई. इसका नतीजा था कि 30 फीसदी मुस्लिम बंगाल में होने के बाद भी बीजेपी जीतने में सफल रही है. बीजेपी अब सपा के ‘सामाजिक न्याय’ के जवाब में ‘सांस्कृतिक एकीकरण’ को और मजबूती से पेश करेगी।

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव, जो अक्सर ममता बनर्जी को अपनी ‘बड़ी बहन’ और आदर्श मानते रहे हैं, उनके लिए बंगाल में टीएमसी की हार यह बड़ा झटका है. उत्तर प्रदेश में भाजपा उसी सियासी मॉडल को और आक्रामक तरीके से 2027 के विधानसभा चुनाव मैदान में उतर सकती है।

    सपा का पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूला से 2024 में बीजेपी को मात देने में सफल रहे थे. बंगाल चुनाव के बाद बीजेपी यूपी में सपा के पीडीए फॉर्मूले को काउंटर करने के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए बंगाल मॉडल को आजमाने का दांव चल सकती है।


    धार्मिक ध्रवीकरण के दांव से पीडीए को मात

    बीजेपी उत्तर प्रदेश में 2014 के बाद से लेकर लगातार जीतती आ रही थी, लेकिन उसे 2024 में अखिलेश ने बड़ा झटका दिया था. ऐसे में बीजेपी के लिए सत्ता की हैट्रिक लगाना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन पीएम मोदी की अगुवाई में जिस तरह पार्टी कमबैक कर रही है, उससे यूपी में भी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को सियासी हौसला मिला है। बंगाल में बीजेपी ने जिस तरह घुसपैठ के मुद्दे को हिंदुत्व के साथ जोड़ा, वो सियासी संजीवनी बना. अब वही फॉर्मूला यूपी में 2027 के लिए ‘ब्लूप्रिंट’ बनेगा।

  • बंगाल में BJP को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद…. रिजल्ट बाद हिंसा से निपटने की तैयारियां शुरू…

    बंगाल में BJP को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद…. रिजल्ट बाद हिंसा से निपटने की तैयारियां शुरू…


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद के बीच भाजपा (BJP) ने चुनाव बाद की स्थितियों से निपटने के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। परिणाम जो भी हों, पार्टी के निर्वाचित विधायक बिना बुलाए अपना क्षेत्र नहीं छोंड़ेंगे। स्थानीय संगठन के नेताओं को भी नतीजों के बाद कुछ दिन तक अपने ही क्षेत्र में रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विरोधी खेमे की किसी भी तरह का संभावित हिंसा से निपटा जा सके।

    वर्ष 2021 में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पश्चिम बंगाल में कई हिंसक घटनाएं हुईं थी। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निशाना बनाया था। इसी को देखते हुए भाजपा अपने समर्थकों की सुरक्षा के लिए सतर्कता बरत रही है।

    सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने नतीजे आने के बाद की स्थितियों के लिए पूरे संगठन को जरूरी निर्देश दिए हैं। उसके निर्वाचित विधायक भी बिना बुलाए कोलकाता नहीं पहुंचेंगे। संगठन के प्रमुख लोग भी कुछ दिनों तक अपने क्षेत्रों में ही रहेंगे और सुरक्षा स्थितियों पर नजर रखेंगे। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने भी अगले आदेश तक बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की विभिन्न क्षेत्रों में तैनाती सुनिश्चित की है।

    भाजपा ने अपने नेताओं से कहा है कि नतीजे आने के बाद भी उसका वार रूम काम करेगा और वहां पर हर क्षेत्र की स्थिति के बार में जानकारी दी जा सकेगी, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। पार्टी नेता इस बारे में लगातार बैठकें कर भावी स्थितियों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। दो मई को कोलकाता में होने वाली पार्टी की बड़ी बैठक में मुख्य मुद्दा मतगणना को लेकर रहेगा, लेकिन उसके बाद की स्थिति को लेकर भी चर्चा संभव है।


    मतगणना केंद्रों पर गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं : चुनाव आयोग

    पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में किसी भी मतगणना केंद्र पर किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी की जा रही है। सीईओ ने स्ट्रांगरूमों में ईवीएम से कथित छेड़छाड़ और गड़बड़ियों के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया।

    कोलकाता में गुरुवार को मतगणना केंद्रों पर जमकर हंगामा हुआ था। तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता और प्रत्याशी कुणाल घोष व शशि पांजा ने धरना दिया था। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर के सखावत स्कूल में बने मतगणना केंद्र में पहुंच गई थीं।


    टीएमसी की याचिका पर आज होगी सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट शनिवार को तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें बंगाल में मतगणना केंद्रों पर सिर्फ केंद्रीय कर्मियों की पर्यवेक्षकों के तौर पर तैनाती के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी गई थी। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ सुनवाई करेगी।

  • बंगाल में हिंदुत्व को लेकर सियासी संग्राम शुरू, ‘जय महाकाली’ बनाम ‘जय श्रीराम’ का गूंज रहा नारा

    बंगाल में हिंदुत्व को लेकर सियासी संग्राम शुरू, ‘जय महाकाली’ बनाम ‘जय श्रीराम’ का गूंज रहा नारा


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय पहचान और वर्चस्व की लड़ाई में बदलती नजर आ रही है। ऊपर से चुनावी शोर और आरोप-प्रत्यारोप भले ही हावी हों, लेकिन भीतर ही भीतर हिंदुत्व की लहर एक अहम भूमिका निभाती दिख रही है। यह ऐसा कारक बन चुका है, जो स्थापित राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दे रहा है और सत्ता के समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।

    राज्य की राजनीति अब पारंपरिक मुद्दों से आगे बढ़कर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है। यह मुकाबला एक तरह से शक्ति उपासना और ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच खिंचती रेखा जैसा बन गया है, जहां हर रैली और बयान का अलग राजनीतिक अर्थ निकाला जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिर दौरों को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक सांस्कृतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिणेश्वर, बेलूर मठ, मतुआ धाम और कालीघाट जैसे प्रमुख स्थलों पर उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को नया आयाम दिया है। इसके चलते राज्य में ‘जय महाकाली’ के साथ ‘जय श्रीराम’ का नारा भी तेजी से राजनीतिक पहचान का हिस्सा बनता जा रहा है।

    भाजपा का मानना है कि पहले चरण के मतदान में मतदाताओं की सक्रियता बदलाव के संकेत दे रही है। पार्टी रणनीतिकार इसे मौन मतदाता की प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं, जो भविष्य के परिणामों को प्रभावित कर सकती है। चुनावी रणनीति के स्तर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद मैदान में उतरकर कमान संभाली है। कोलकाता में लगातार सक्रिय रहते हुए वे उन क्षेत्रों पर फोकस कर रहे हैं, जहां पहले भाजपा की पकड़ कमजोर मानी जाती थी। उनके साथ संगठनात्मक स्तर पर सुनील बंसल बूथ प्रबंधन को मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी स्थिति बेहतर करने की कोशिश कर रही है।

    जिन सीटों पर मुकाबला होना है, वे तृणमूल कांग्रेस का गढ़ मानी जाती हैं। पिछले चुनाव में भाजपा यहां सीमित सफलता हासिल कर सकी थी, लेकिन इस बार पार्टी को माहौल अपने पक्ष में बदलता नजर आ रहा है। सुरक्षा और चुनाव के बाद भी केंद्रीय बलों की मौजूदगी को लेकर दिए गए संदेश को भाजपा समर्थकों के लिए भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस चुनौती का जवाब अपनी अलग रणनीति से देने का प्रयास किया है। उन्होंने बंगाली अस्मिता और धार्मिक समावेश को केंद्र में रखते हुए प्रचार तेज किया है। मंदिरों में जाकर वे यह संदेश दे रही हैं कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बाहरी नजरिये से नहीं समझा जा सकता।

    इस रणनीति में अभिषेक बनर्जी की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। वे युवाओं को जोड़ने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं और भाजपा के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रहे हैं। तृणमूल के अन्य नेता भी जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर चुनावी विमर्श को धार्मिक मुद्दों से हटाकर विकास, अधिकार और केंद्र-राज्य संबंधों की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में यह चुनाव अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रतीकों, पहचान और विचारधाराओं की टकराहट का रूप ले चुका है, जहां हर पक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।

  • बंगाल के उत्तर 24 परगना में PM मोदी की रैली से पहले भारी हिंसा… पत्थरबाजी-बमबाजी और फायरिंग में 3 घायल

    बंगाल के उत्तर 24 परगना में PM मोदी की रैली से पहले भारी हिंसा… पत्थरबाजी-बमबाजी और फायरिंग में 3 घायल


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के उत्तर 24 परगना जिले (North 24 Parganas district) में रविवार रात को भारी हिंसा भड़क गई। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की सोमवार को होने वाली जनसभा से कुछ घंटे पहले हुई। मामले में जगद्दल पुलिस स्टेशन के सामने तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress- TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के समर्थक आपस में भिड़ गए। इस संघर्ष में पत्थरबाजी, बमबाजी और फायरिंग की खबरें सामने आई हैं।

    हिंसा की शुरुआत प्रधानमंत्री के दौरे के लिए लगाए गए राजनीतिक झंडों और पोस्टरों को फाड़ने से हुई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि टीएमसी समर्थकों ने जगद्दल इलाके में उनके प्रचार सामग्री का अपमान किया। इसके बाद दोनों पक्षों के समर्थक पुलिस स्टेशन के सामने जमा हो गए। वहां उनके बीच तीखी बहस हुई और फिर मारपीट शुरू हो गई। स्थानीय पुलिस इस स्थिति को संभालने में काफी मशक्कत करती दिखी।

    इस संघर्ष के दौरान भाटपारा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार और विधायक पवन सिंह के आवास पर बम फेंके गए। विधायक के घर पर हुए इस हमले से पूरे इलाके में दहशत फैल गई और संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा। इस धमाके में तीन लोग घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    भाजपा उम्मीदवार पवन सिंह ने कहा कि यह विवाद पिछले दिन एक नुक्कड़ सभा के दौरान शुरू हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पार्षद के नेतृत्व में टीएमसी के लोगों ने भाजपा के कार्यक्रमों में बाधा डाली। पवन सिंह के मुताबिक, जब वे पुलिस स्टेशन से शिकायत करके घर लौट रहे थे, तब उन पर पत्थरों और बमों से हमला किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस दौरान हुई फायरिंग में एक सीआईएसएफ (CISF) जवान के बाएं पैर में गोली लग गई।

    दूसरी ओर, भाटपारा से टीएमसी उम्मीदवार अमित गुप्ता ने इन आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि विवाद अचला बागान वार्ड में शुरू हुआ था। उनके मुताबिक, टीएमसी कार्यकर्ता शांति से झंडे लगा रहे थे, तभी गुड्डू और पिंटू सिंह नाम के व्यक्तियों ने उनके कार्यकर्ता बिट्टू के साथ मारपीट की और पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की। अमित गुप्ता ने आरोप लगाया कि जब वे शिकायत करने पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ मिलकर स्टेशन के अंदर ही टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया।

    प्रधानमंत्री की रैली को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अब हाई अलर्ट पर हैं। जगद्दल और भाटपारा इलाकों में अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है ताकि हिंसा और न बढ़े। पुलिस ने बमबाजी और झड़पों के संबंध में मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल इलाके में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगा रही हैं।

  • हम एक ठो गलती काम किए… बंगाल में पीएम मोदी को 10 रुपये की झालमुड़ी खिलाने वाले को किस बात का मलाल है?

    हम एक ठो गलती काम किए… बंगाल में पीएम मोदी को 10 रुपये की झालमुड़ी खिलाने वाले को किस बात का मलाल है?

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल के झारग्राम शहर में झालमुड़ी की दुकान लगाने वाले विक्रम ने सपने भी नहीं सोचा था कि एक दिन देश के प्रधानमंत्री उसके पास 10 रुपये की झालमुड़ी खाने आएंगे. अब वह काफी खुश हैं. पीएम ने उनसे 10 मिनट तक बातचीत की. वीडियो टीवी चैनलों पर छाया हुआ है. सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है.
    आम ग्राहकों की तरह दुकानदार विक्रम ने पीएम से यह भी पूछा कि आप प्याज तो खाते हैं न? हालांकि उसे अब एक बात का मलाल है.

    पीएम के जाने के बाद मीडिया ने उसे घेर लिया. विक्रम ने बताया कि पीएम जब आए थे तब क्या-क्या बातचीत हुई. झालमुड़ी वाले ने बताया कि पीएम ने कहा झालमुड़ी बनाओ. मैं पैसे नहीं मांग रहा था, लेकिन वह बोले कि नहीं-नहीं कितना हुआ? फिर पैसा हम रख लिए. मेरी मम्मी और पापा का नाम पूछे. पूछे कि कहां के रहने वाले हैं. मैंने कहा कि मैं बिहार का हूं. बोले- बिहार में कहां? मैंने बताया कि गया का हूं. मैंने बताया कि गरीबी के कारण 9वीं तक ही पढ़ पाया. पीएम ने पूछा कि कितने का रोजगार कर लेते हो. दुकानदार विक्रम साव ने बताया हजार-1200 रुपये का.
    झालमुड़ी वाले को मलाल किस बात का है?

    हां, विक्रम ने बताया कि पीएम ने कुछ भी राजनीतिक बातचीत नहीं की.

    आगे उन्होंने अफसोस या कहिए इस बात का मलाल जाहिर किया कि वह यही गलती कर गए कि कोई सिग्नेचर (पीएम का) नहीं लिए. विक्रम बोले, ‘हम एक ठो यही गलती काम किए. कोई सिग्नेचर-उग्नेचर नहीं लिए.’

    आगे आप वीडियो में देखिए कि पीएम कैसे झालमुड़ी की दुकान पर आते हैं, ऑर्डर करते हैं, प्याज के लिए दुकानदार पूछता है, पीएम 10 रुपये देते हैं और बाद में दुकानदार की तारीफ करने के साथ ही महिलाओं के साथ झालमुड़ी बांटकर खाते हैं.

    विक्रम के पिता का नाम उत्तम और माता का नाम सुनीता देवी है. उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री मेरी दुकान में आए, मसाला-मुड़ी खाए, यही बड़ी बात है.

    हां, वीडियो के आखिर में देखिए. पीएम बगल में खड़ी एक महिला को झालमुड़ी खिलाने के लिए हाथ पर रखते हैं. वह प्रणाम की मुद्रा में झालमुड़ी लेती हैं और कहती हैं कि प्रसाद है सर. इसके बाद वह झालमुड़ी को अपने सिर पर चढ़ा लेती हैं. इसी तरह आसपास खड़ी महिलाएं पीएम के हाथों झालमुड़ी खाकर काफी खुश दिखीं.
  • बंगाल में रैलियों के बीच देसी अंदाज में दिखे PM मोदी…. स्ट्रीट फूड झालमुड़ी का लुत्फ उठाया

    बंगाल में रैलियों के बीच देसी अंदाज में दिखे PM मोदी…. स्ट्रीट फूड झालमुड़ी का लुत्फ उठाया


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चुनावी रैलियों (Election Rallies) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का देसी अंदाज देखने को मिला. पीएम मोदी ने रविवार को झाड़ग्राम में अपना काफिला रुकवाया और वहां के मशहूर स्ट्रीट फूड ‘झालमुड़ी’ (Famous street food ‘Jhalmuri’) का लुत्फ उठाया.

    जब पीएम मोदी का काफिला झाड़ग्राम की एक छोटी सी दुकान के पास रुका और खुद प्रधानमंत्री गाड़ी से उतरकर झालमुड़ी के स्टाल की ओर बढ़े, तो वहां मौजूद लोगों ने उन्हें घेर लिया.

    प्रधानमंत्री ने इस पल की तस्वीरें और वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर भी शेयर किए. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘रविवार की व्यस्तता के बीच पश्चिम बंगाल में चार जनसभाओं के दौरान, मैंने झाड़ग्राम में कुछ स्वादिष्ट मसालेदार झालमुड़ी का स्वाद चखा.’


    पीएम मोदी और दुकानदार के बीच हुई बातचीत

    पीएम मोदी- भाई, हमें अपना झालमुड़ी खिलाओ. कितने का होता है आपका झालमुड़ी
    दुकानदार- आप कितने का खाएंगे?
    पीएम मोदी- अच्छे वाला कितने का होता है?
    दुकानदार- 10 या 20 रुपए.
    पीएम मोदी- हां जो भी है बना दो.
    दुकानदार- झाल थोड़ा खाएंगे आप?
    पीएम मोदी- हां खाएंगे बिल्कुल खाएंगे. कितना, 10 रुपए देना है, नहीं भाई ऐसा नहीं.
    दुकानदार- प्याज खाते हैं सर आप?
    पीएम मोदी- हां प्याज खाते हैं, बस दिमाग नहीं खाते.
    दुकानदार- आपसे मिलकर हमें बहुत खुशी हुई।

    प्रधानमंत्री ने अपनी जेब से पैसे निकाले और दुकानदार को दिए तो दुकानदार हिचक रहा था. लेकिन पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि वो पैसे ले. इसके बाद पीएम मोदी ने वहां मौजूद लोगों के साथ मिलकर झालमुड़ी खाई।


    नमक नहीं खाते प्रधानमंत्री

    दुकानदार ने जब पूछा कि क्या वो झालमुड़ी में सबकुछ डालें, तो पीएम मोदी ने अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए जवाब दिया, ‘निमक (नमक) को छोड़कर सब कुछ.’ उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कारणों से वो नमक नहीं खा रहे हैं।

    बता दें कि पीएम मोदी ने आज बंगाल के पुरुलिया, मेदिनीपुर और बांकुड़ा में विशाल जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्हें टीएमसी पर जमकर निशाना साधा और दावा किया कि इस बार बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है।

  • बंगाल में भगवान राम की प्रतिमा तोड़ी.. सिर काट ले गए बदमाश… गरमाई सियासत

    बंगाल में भगवान राम की प्रतिमा तोड़ी.. सिर काट ले गए बदमाश… गरमाई सियासत


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के नंदीग्राम में भगवान राम की प्रतिमा (Lord Rama Statue) के साथ तोड़फोड़ की घटना सामने आई है, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के प्रमुख चेहरे शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम नवमी के उत्सव से ठीक पहले रात के अंधेरे में अज्ञात लोगों ने वेटुरिया बस स्टैंड पर लगभग तैयार हो चुकी भगवान राम की मूर्ति का सिर काटकर ले गए। यह घटना पूर्वी मेदिनीपुर जिले (East Medinipur district) के नंदीग्राम के बूथ नंबर 122, ब्लॉक-2 में हुई है। अधिकारी ने इसे हिंदू आस्था पर हमला करार देते हुए कहा कि राज्य में ऐसे कृत्य अब आम हो गए हैं।

    शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी सरकार हिंदुओं के खिलाफ है और वोट बैंक की राजनीति के लिए गुंडों को बचा रही है। अधिकारी ने इसे जिहादियों की ओर से की गई कार्रवाई बताया और कहा कि तुष्टिकरण की नीति के कारण ऐसे हमले बढ़ रहे हैं। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया जिसमें क्षतिग्रस्त प्रतिमा दिखाई गई है। उन्होंने सनातनियों से एकजुट होकर इस सरकार को विदा करने का आह्वान किया, क्योंकि ऐसी घटनाएं हिंदू त्योहारों से पहले स्थिति को बिगाड़ रही हैं।


    चुनावी माहौल और गरमाया

    यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भी अहम है, जहां शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। नंदीग्राम वह स्थान है जहां 2021 में उन्होंने ममता बनर्जी को हराकर बड़ा उलटफेर किया था। अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार हिंदू देवी-देवताओं और मंदिरों पर हमलों को रोकने में नाकाम है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसी घटनाएं चुनावी माहौल को प्रभावित कर रही हैं। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी किया है।

    इस घटना ने राज्य में धार्मिक और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने इसे सनातन धर्म पर लगातार हमलों की श्रृंखला बताया और कहा कि ममता बनर्जी की सरकार के कारण स्थिति बदतर हो रही है। उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी कि अगर दोषियों को सजा नहीं मिली तो स्थिति और बेकाबू हो सकती है। यह मामला अब चुनाव प्रचार में एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जहां भाजपा हिंदू भावनाओं को केंद्र में रखकर टीएमसी पर हमलावर है।

  • बंगाल में पकड़े गए बांग्लादेश के दो आरोपी, युवा नेता हादी की हत्या में बताए जा रहे शामिल

    बंगाल में पकड़े गए बांग्लादेश के दो आरोपी, युवा नेता हादी की हत्या में बताए जा रहे शामिल


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सीमा के पास पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन पर बांग्लादेश के युवा नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शरिफ उस्मान हादी की हत्या में शामिल होने का आरोप है।

    पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बोंगांव सीमा क्षेत्र में छापेमारी कर दोनों संदिग्धों को पकड़ा। पुलिस के मुताबिक आरोपी भारत में छिपे हुए थे और मौका मिलते ही वापस बांग्लादेश भागने की योजना बना रहे थे।

    गुप्त सूचना के बाद हुई कार्रवाई

    पुलिस को सूचना मिली थी कि बांग्लादेश में गंभीर अपराध करने के बाद दो लोग अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए हैं। इसके बाद STF ने बोंगांव इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया।

    7 और 8 मार्च की रात छापेमारी कर दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी पहचान राहुल उर्फ फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों पर हत्या और वसूली जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं।

    मेघालय सीमा से भारत में घुसे

    जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी मेघालय सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे। इसके बाद वे अलग-अलग जगहों पर घूमते रहे और अंत में पश्चिम बंगाल के बोंगांव इलाके में पहुंच गए।

    पुलिस को शक है कि वे कुछ समय तक सीमा के पास छिपे रहने के बाद फिर से बांग्लादेश भागने की योजना बना रहे थे।

    ढाका में हुई थी गोली मारकर हत्या

    जानकारी के अनुसार 12 दिसंबर को ढाका के बिजयनगर इलाके में शरिफ उस्मान हादी पर उस समय हमला किया गया था जब वह रिक्शा से यात्रा कर रहे थे। हमलावरों ने करीब से गोली चलाई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

    बेहतर इलाज के लिए 15 दिसंबर को उन्हें एयर एंबुलेंस से सिंगापुर भेजा गया, लेकिन 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।

    हत्या के बाद ढाका में प्रदर्शन

    हादी की मौत के बाद ढाका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनके समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग की थी। उस समय मोहम्मद यूनुस ने इस घटना के बाद राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया था।

    बताया जाता है कि हादी को फरवरी 2026 के राष्ट्रीय चुनाव में ढाका-8 सीट से संभावित उम्मीदवार माना जा रहा था।

    आगे की जांच जारी

    पुलिस ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या की साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे और भारत में आने के बाद आरोपियों ने किन लोगों से संपर्क किया।