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  • PM मोदी को झालमुड़ी खिलाकर फेमस हुए बंगाल के विक्रम को पाक-बांग्लादेश से मिल रही धमकियां…..

    PM मोदी को झालमुड़ी खिलाकर फेमस हुए बंगाल के विक्रम को पाक-बांग्लादेश से मिल रही धमकियां…..


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) के झारग्राम (Jhargram) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के चुनाव प्रचार के दौरान सड़क किनारे के स्टॉल से झालमुड़ी (Jhalmuri) खरीदने का वीडियो वायरल हुआ था। उस स्टॉल के मालिक विक्रम कुमार साहू अचानक चर्चा में आ गए। पीएम मोदी खुद उनके हाथ से तैयार झालमुड़ी खाते दिखे। हालांकि, फेमस होने के साथ ही साहू की मुश्किलें भी शुरू हो गईं। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से उनके मोबाइल पर बार-बार मौत की धमकियां मिल रही हैं। धमकियां टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए आ रही हैं।

    एक वीडियो कॉल में तो साहू को बंदूक दिखाकर धमकाया गया। इससे उनके परिवार में दहशत फैल गई और उन्होंने कुछ दिनों के लिए अपनी दुकान भी बंद कर दी थी। झारग्राम पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साहू के स्टॉल पर यूनिफॉर्म और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों की तैनाती कर दी है। स्टॉल पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स को भी मामले में शामिल किया गया है।


    धमकियां देने वाले फोन नंबर्स की पहचान

    पुलिस अधिकारी के अनुसार, धमकियां देने वाले फोन नंबर्स की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज होने के बाद सुरक्षा के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच शुरू कर दी गई है। साहू ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि धमकियों से वे और उनका परिवार बेहद डरा हुआ था। साहू ने कहा कि शुरुआती दिनों में डर के मारे दुकान बंद रखनी पड़ी, लेकिन अब पुलिस सुरक्षा के साथ वे फिर से अपने काम पर लौट आए हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी का झालमुड़ी खाने का वीडियो न सिर्फ चुनावी अभियान को यादगार बनाया, बल्कि झालमुड़ी जैसे पारंपरिक बंगाली स्ट्रीट फूड को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। विपक्ष ने इसे लेकर निशाना भी साधा। झारग्राम पुलिस का कहना है कि वे हर स्तर पर साहू की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। इस मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी ताकि दोषियों को सजा मिल सके।

  • बंगाल में बड़ा सर्च ऑपरेशन: ईडी ने रंगदारी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर कसा शिकंजा, कई शहरों में एक साथ कार्रवाई

    बंगाल में बड़ा सर्च ऑपरेशन: ईडी ने रंगदारी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर कसा शिकंजा, कई शहरों में एक साथ कार्रवाई


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में गुरुवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। कोलकाता से लेकर मुर्शिदाबाद तक कई ठिकानों पर एक साथ की गई छापेमारी ने कथित रंगदारी और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े नेटवर्क पर जांच एजेंसियों का शिकंजा और कस दिया है। यह कार्रवाई सुबह करीब छह बजे शुरू हुई, जब अलग-अलग टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर दबिश दी और जांच अभियान को तेज कर दिया।

    सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला कथित जबरन वसूली और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच लंबे समय से चल रही थी। जांच एजेंसी को शुरुआती इनपुट्स में ऐसे संकेत मिले थे कि इस नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध धन को इधर-उधर किया गया और उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई। इसी आधार पर कई स्थानों को चिन्हित कर एक साथ कार्रवाई की गई।

    कोलकाता के रॉय स्ट्रीट इलाके में स्थित एक होटल और एक कारोबारी के घर पर जांच टीमों ने छापेमारी की। इसके अलावा शहर के कुछ अन्य हिस्सों में भी तलाशी अभियान चलाया गया, जहां दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की गई। इसी दौरान कोलकाता पुलिस से जुड़े एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर भी जांच एजेंसी की टीमों के पहुंचने की जानकारी सामने आई, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

    वहीं मुर्शिदाबाद जिले के कांडी इलाके में भी एक महत्वपूर्ण ठिकाने पर छापेमारी की गई, जो कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े व्यक्ति का निवास बताया जा रहा है। जांच एजेंसी इस पूरे मामले में आर्थिक लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि धन का प्रवाह किन माध्यमों से और किन लोगों तक पहुंचा।

    जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पूछताछ और प्रारंभिक विश्लेषण के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क में कई संस्थाओं और व्यक्तियों का उपयोग किया गया, जिसके जरिए काले धन को वैध आर्थिक ढांचे में बदलने की कोशिश की गई। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि इस पूरे रैकेट से किन प्रभावशाली लोगों को लाभ मिला और उनका इसमें क्या रोल रहा।

    फिलहाल जांच एजेंसी की टीमें दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड को खंगालने में जुटी हैं। अभी तक इस कार्रवाई को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन यह साफ है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे संभव हैं।

  • बंगालः फाल्टा उपचुनाव में CM शुभेन्दु की पहली सभा…. बोले- कहां है पुष्पा, अब दिखाई नहीं दे रहा?

    बंगालः फाल्टा उपचुनाव में CM शुभेन्दु की पहली सभा…. बोले- कहां है पुष्पा, अब दिखाई नहीं दे रहा?


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Shubhendu Adhikari) ने डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली फाल्टा विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव (Falta By-Election) से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee.) पर करारा हमला बोला है। शनिवार को भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पोंडा के समर्थन में फाल्टा में एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर कई बड़े एलान किए। मुख्यमंत्री बनने के बाद इस क्षेत्र में यह उनकी पहली जनसभा थी।

    शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी के फाल्टा उम्मीदवार जहांगीर खान (Jahangir Khan) को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें घोषित कुख्यात अपराधी करार दिया। उन्होंने कहा, “2019 के चुनाव बाद हुई हिंसा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राज्य के 19 सबसे कुख्यात अपराधियों की सूची जारी की थी। भतीजे के संरक्षण में पलने वाला यह जहांगीर खान उसी सूची में शामिल था। अब इस तथाकथित ‘पुष्पा’ को मेरे भरोसे छोड़ दीजिए, जो अब कहीं दिखाई भी नहीं दे रहा है। वह अब मेरी जिम्मेदारी है और मैं खुद उसका मामला देखूंगा।”


    क्या था ‘पुष्पा’ और ‘सिंघम’ का विवाद?

    चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक 2011 बैच के यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा (IPS Ajay PAl Sharma) ने मतदाताओं को धमकाने की शिकायत के बाद जहांगीर खान के घर और दफ्तर का दौरा किया था। इस पर टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने पलटवार करते हुए कहा था कि “अगर वह सिंघम हैं, तो मैं ‘पुष्पा’ हूं।” मुख्यमंत्री ने इसी बयान पर तंज कसा है।

    मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि जब से बंगाल के राजनीतिक पटल पर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का उदय हुआ है, तब से पिछले एक दशक में डायमंड हार्बर और फाल्टा के लोग स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाए हैं।

    उन्होंने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा, “अब बंगाल का परिदृश्य बदल चुका है। फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई 2026 को होने वाला पुनर्मतदान यहां के लोगों को उनका लोकतांत्रिक अधिकार वापस दिलाएगा। मैं फाल्टा के मतदाताओं से अपील करता हूं कि वे भाजपा उम्मीदवार को 1 लाख से अधिक वोटों के अंतर से विजयी बनाएं।” इसके साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से कानून अपने हाथ में न लेने और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने की अपील की।


    फाल्टा में दोबारा चुनाव क्यों?

    चुनाव आयोग ने फाल्टा में 29 अप्रैल को हुए मतदान को ईवीएम (EVM) से छेड़छाड़ और मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी गंभीर अनियमितताओं की शिकायतों के बाद रद्द कर दिया था।

    भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अभिषेक बनर्जी को घेरते हुए मुख्यमंत्री ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ (Leaps and Bounds) कंपनी से जुड़ी संपत्तियों की फाइलें मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा, “मैंने कोलकाता नगर निगम से फाइलें मांगी थीं। अब मेरे पास दक्षिण 24 परगना जिले के आमताला में एक आलीशान दफ्तर सहित इस कंपनी की 24 संपत्तियों की पूरी सूची और विवरण है। बहुत जल्द इन सभी संपत्तियों के खिलाफ गहन जांच शुरू की जाएगी।”


    5 साल पुराने मामले भी खुलेंगे

    चुनाव के बाद डर के मारे पलायन कर चुके लोगों की वापसी को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकार सभी की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगी, लेकिन यह सशर्त होगी। उन्होंने कहा, “2021 की चुनाव बाद हुई हिंसा में भाजपा के 57 कार्यकर्ताओं की हत्या हुई थी और 12,500 एफआईआर दर्ज की गई थीं। यदि इन फरार लोगों में से किसी का भी नाम उन एफआईआर में आरोपी के रूप में दर्ज है, तो उन्हें घर लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हम उन्हें बालों से घसीटकर जेल की सलाखों के पीछे भेजेंगे।”

    मुख्यमंत्री ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भले ही राजनीतिक अपराध 5 साल या उससे अधिक पुराने क्यों न हों, उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कर अपराधियों को तुरंत जेल भेजा जाए।


    धार्मिक भावनाओं का सम्मान

    अक्टूबर 2025 में दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप में मां काली की खंडित मूर्ति को पुलिस द्वारा कैदी वैन में रखने के विवाद का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा, “जिस पुलिस अधिकारी ने मां काली की मूर्ति को जेल वैन के अंदर रखा, उसके लिए बंगाल में कोई जगह नहीं है। हिंदू देवी-देवताओं के अपमान और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी सभी पुलिस फाइलें दोबारा खोली जाएंगी।”


    विशेष विकास पैकेज का एलान

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फाल्टा की जनता के लिए भाजपा के चुनावी घोषणा-पत्र के वादों से अलग एक विशेष विकास पैकेज देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें सत्ता की कुर्सी सिर्फ बैठने के लिए नहीं बल्कि न्याय के लिए सौंपी है और वे राज्य में न्याय का शासन स्थापित करके रहेंगे।

  • बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर

    बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद नई बीजेपी सरकार (New BJP Government) ने तेज और आक्रामक शुरुआत की है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Shubhendu Adhikari) की पहली कैबिनेट बैठक में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) शासनकाल के कई फैसलों पर CM अधिकारी की कलम तेजी से चली. ममता सरकार द्वारा नियुक्त कई रिटायर्ड IAS-IPS अधिकारियों को सरकारी दफ्तरों से बाहर करने का फैसला लिया गया, जबकि पुरानी नीतियों को पलटते हुए नई दिशा दी गई।

    एक अहम फैसले में अधिकारी सरकार ने BSF को बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 600 एकड़ जमीन तुरंत ट्रांसफर करने का फैसला किया है. इसके अलावा सरकार ने जनगणना शुरू करने, ममता काल की IAS-IPS ट्रेनिंग नीति को बदलने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) को तुरंत लागू करने जैसे बड़े फैसले लिए।

    नए CM शुभेंदु अधिकारी ने साफ संदेश दिया कि अफसरों को ‘येस मैन’ बनने की जरूरत नहीं है और वहीं करें जो ‘राष्ट्र और राज्य हित’ के लिए सर्वोपरि हो. दरअसल ममता राज के ‘मोहरों’ पर चल रही CM अधिकारी की कलम अब बदलाव की नई इबारत लिख रही है।

    मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सुशासन, सुरक्षा और डबल इंजन सरकार का नया सफर देश भर के दूसरे BJP शासित राज्यों में चले विकास के उसी रास्ते पर आगे बढ़ेगा।


    बंगाल सरकार ने सोमवार को पहली कैबिनेट में क्या क्या फैसले लिए.

    1. बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी. इसके साथ ही कई अन्य केंद्रीय कल्याणकारी परियोजनाएं भी इसमें शामिल होंगी. जैसे पीएम जन आरोग्य योजना, किसानों के लिए फसल बीमा देने वाली पीएम फसल बीमा योजना, सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करने के लिए पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम एसएचआरआई) योजना, कारीगरों और शिल्पकारों की मदद करने वाली पीएम विश्वकर्मा योजना, महिलाओं की शिक्षा और सशक्तीकरण के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना और सब्सिडी वाले रसोई गैस कनेक्शन के लिए उज्ज्वला 3.0 योजना. ममता बनर्जी ने इन योजनाओं को राज्य में लागू नहीं किया था।

    2. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था।

    3. भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए केंद्र को जमीन का ट्रांसफर प्रोसेस तुरंत शुरू होगा. कैबिनेट ने चीफ सेक्रेटरी और राज्य के लैंड और लैंड रेवेन्यू डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी को अगले 45 दिनों के अंदर प्रोसेस पूरा करने का अधिकार दिया है.”

    4. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बीजेपी का दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई।

    5.पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य सरकार के अधीन गैर-सांविधिक निकायों, बोर्डों, संगठनों और सार्वजनिक उपक्रमों में नियुक्त सभी मनोनीत सदस्यों, निदेशकों और अध्यक्षों के कार्यकाल को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्देश जारी किया. इसके साथ ही राज्य सरकार ने 60 वर्ष की सामान्य सेवानिवृत्ति आयु के बाद एक्सटेंशन या री-अपॉइंटमेंट पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।

    6. विधानसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर रहे मनोज अग्रवाल को शुभेंदु अधिकारी की BJP सरकार में राज्य का नया चीफ सेक्रेटरी बनाया गया है. सोमवार को जारी एक ऑफिशियल ऑर्डर के मुताबिक वर्तमान चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नरियाला को नई दिल्ली में प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर नियुक्त किया गया है. इसके अलावा एडमिनिस्ट्रेटिव सुधारों के तहत, राज्य के IAS अधिकारी अब दूसरे राज्यों की तरह केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेंगे।

    7. पश्चिम बंगाल सरकार ने 1 जून से बसों में महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा की शुरुआत की है. ये बीजेपी के चुनावी वादे का हिस्सा था।

    8. CM शुभेंदु ने सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए ऊपरी उम्र सीमा में पांच साल की छूट की घोषणा की है. इस घोषणा से अब जनरल कैटेगरी के आवेदकों को मौजूदा उम्र सीमा 40 से 45 साल तक की छूट मिलेगी, और SC, ST और OBC कैटेगरी के लोग मौजूदा उम्र सीमा 43 से 48 साल तक नौकरियों के लिए अप्लाई कर सकेंगे।

    9. अधिकारी सरकार ने पश्चिम बंगाल में तुरंत जनगणना शुरू करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार जनगणना प्रक्रिया के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के 16 जून, 2025 के निर्देश को लागू करने में नाकाम रही थी. मौजूदा सरकार ने पेंडिंग एडमिनिस्ट्रेटिव सर्कुलर को तुरंत लागू कर दिया है।

    10. सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार ममता शासन की किसी भी योजना को बंद नहीं करेगी. हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि हम उन लोगों की पहचान करेंगे और उन्हें हटाएंगे जो इस देश के लोगों के लिए बनी वेलफेयर मदद पाने के हकदार नहीं हैं, जैसे मरे हुए लोग और गैर-भारतीय।

    सीएम अधिकारी ने कहा कि यह सरकार घमंड पर नहीं चलेगी, बल्कि यह सरकार सिद्धांतों पर चलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “डर बाहर, भरोसा अंदर” के संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नई सरकार पश्चिम बंगाल के लोगों की सुरक्षा, भरोसा और विकास पक्का करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • Bengal: चुनाव में करारी हार के बाद TMC में घमासान…. विधायकों ने खोला आलाकमान के खिलाफ मार्चा

    Bengal: चुनाव में करारी हार के बाद TMC में घमासान…. विधायकों ने खोला आलाकमान के खिलाफ मार्चा


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal ) विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) के हाथों मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदरखाने भारी घमासान शुरू हो गया है। इतने सालों तक पार्टी लाइन का सख्ती से पालन करने वाले कई विधायक और दिग्गज नेता अब अपनी ही लीडरशिप के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। पूर्व क्रिकेटर और मंत्री रहे मनोज तिवारी से लेकर सांसद-अभिनेता देव तक ने पार्टी आलाकमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुछ नेताओं ने तो चुनाव में हुई इस हार का सीधा ठीकरा महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के सिर फोड़ दिया है। हार के बाद ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने के फैसले पर भी कई विधायकों ने असहमति जताई है।


    गुटबाजी और ‘लॉबी’ को ठहराया हार का जिम्मेदार

    पार्टी के कई विधायकों ने खुलेआम गुटबाजी को हार की सबसे बड़ी वजह बताया है। मुर्शिदाबाद के हरिहरपारा से टीएमसी विधायक नियामत शेख ने सीधे तौर पर कहा, “पार्टी में सिर्फ लॉबी और गुटबाजी हावी है।” उन्होंने इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। नियामत शेख ने बताया कि उन्होंने बार-बार आलाकमान को मुर्शिदाबाद में बढ़ती गुटबाजी को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आलाकमान पर आरोप लगाया कि जमीनी हकीकत यानी ‘ह्यूमन फैक्टर’ को नजरअंदाज कर सोशल मीडिया और तकनीक पर ज्यादा भरोसा किया गया।

    शेख ने चुनाव से ठीक पहले हुमायूं कबीर को सस्पेंड किए जाने को भी गलत फैसला बताया। हुमायूं कबीर ने बाद में अपनी नई पार्टी (AUJP) बनाई और दो सीटें जीतीं, जिससे मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो गया।


    मुस्लिम वोटों का बंटवारा और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज से टीएमसी विधायक अखरुज्जमां ने भी अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में हार का कारण मुस्लिम वोटों के बंटवारे को माना है। उनका कहना था कि मुसलमानों ने टीएमसी और बीजेपी को छोड़कर बाकी सबको वोट दिया। एक अन्य टीएमसी विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमारा मुस्लिम वोट बैंक बिखर गया, जबकि हिंदू वोट पूरी तरह से एकजुट होकर बीजेपी के पक्ष में चला गया। इस विधायक ने चुनावी रणनीतिकार एजेंसी (I-PAC) पर अत्यधिक निर्भर रहने और उन्हें ‘बिचौलिया’ बना देने पर भी भारी नाराजगी जताई।

    ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर अपनों के ही सवाल
    विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। अब इस फैसले पर पार्टी के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं। हावड़ा के बागनान से चार बार के विधायक अरुणभ सेन ने तंज कसते हुए कहा, “ममता बनर्जी एक बड़ा नाम हैं। लेकिन अगर मैं उनकी जगह होता, तो इतनी बड़ी हार के बाद निश्चित तौर पर इस्तीफा दे देता।”

    एक अन्य विधायक ने कहा कि हमें हार स्वीकार करनी चाहिए। हार न मानने की जिद लोगों के बीच पार्टी की छवि को और खराब कर रही है। हालांकि, वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने ममता बनर्जी का बचाव करते हुए कहा कि इस्तीफा न देने का फैसला ममता का अकेले का नहीं था, बल्कि यह सभी निर्वाचित विधायकों का सर्वसम्मत फैसला था।


    देव और मनोज तिवारी का सीधा हमला

    सांसद देव की नाराजगी: लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले और विधानसभा चुनाव में प्रचार करने वाले अभिनेता देव ने मीडिया से कहा कि वह ‘घाटल मास्टरप्लान’ को लेकर अब झूठ नहीं बोलेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता और अभिषेक बनर्जी ने उन्हें झूठा भरोसा दिया था कि बाढ़ नियंत्रण से जुड़े इस लंबे समय से लटके प्रोजेक्ट को जल्द पूरा किया जाएगा।

    मनोज तिवारी के गंभीर आरोप: चुनाव परिणाम आने के महज दो दिन बाद पूर्व खेल राज्य मंत्री मनोज तिवारी ने एक फेसबुक लाइव में टीएमसी सरकार को ‘भ्रष्ट’ बताते हुए कहा कि इसे सत्ता से उखाड़ फेंकना ही सही था। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी और पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास ने उन्हें सरकार में पूरी तरह किनारे कर दिया था। तिवारी ने बीजेपी को उसकी इस ‘प्रचंड जीत’ के लिए बधाई भी दी।

    वोटर लिस्ट में गड़बड़ी: मालदा के मालतीपुर से विधायक अब्दुर रहीम बोक्सी और केएमसी के डिप्टी मेयर अतिन घोष ने चुनाव आयोग के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को हार का बड़ा कारण बताया। अतिन घोष ने राज्यभर में चल रही भारी सत्ता विरोधी लहर और धार्मिक ध्रुवीकरण को भी हार की वजह बताया।

    पार्टी के खिलाफ बढ़ती बयानबाजी को देखते हुए टीएमसी ने अपने 5 प्रवक्ताओं- रिजू दत्ता, कृष्णेंदु चौधरी, कोहिनूर मजूमदार, पापिया घोष और कार्तिक घोष को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोहिनूर मजूमदार और कृष्णेंदु चौधरी ने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के काम करने के तरीके की आलोचना की थी, जबकि रिजू दत्ता ने चुनाव के बाद हुई हिंसा को रोकने के लिए बीजेपी के उठाए गए कदमों की तारीफ की थी।

  • बंगाल का नया CM कौन…. आज MLAs संग अमित शाह की बैठक पर सभी की नजरें

    बंगाल का नया CM कौन…. आज MLAs संग अमित शाह की बैठक पर सभी की नजरें


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) के नतीजों के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य की कमान किसके हाथों में होगी। भारतीय जनता पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस बरकरार है। इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज कोलकाता में नवनिर्वाचित विधायकों के साथ एक हाई-प्रोफाइल बैठक करने वाले हैं। बैठक के बाद जल्द ही राज्य के अगले सीएम के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा।


    अमित शाह और मोहन चरण माझी को अहम जिम्मेदारी

    पार्टी आलाकमान ने विधायक दल के नेता के चुनाव की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। पश्चिम बंगाल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मुख्य पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) की जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सह-पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे।


    बैठक में कैसे तय होगा विधायक दल का नेता?

    आज होने वाली इस बैठक में दोनों पर्यवेक्षक सभी नवनिर्वाचित विधायकों के साथ विस्तार से चर्चा करेंगे। सूत्रों के अनुसार, शाह व्यक्तिगत स्तर पर और सामूहिक रूप से विधायकों से बात करेंगे ताकि मुख्यमंत्री के नाम पर आम सहमति बनाई जा सके। विधायकों की राय जानने के बाद विधायक दल के नेता और अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। माना जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता शमिक भट्टाचार्य बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं, जिसके बाद इस फैसले को आधिकारिक रूप दिया जाएगा।


    9 मई को होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह

    नए मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। इस बीच राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 मई को नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंच रहे हैं। पीएम मोदी की मौजूदगी पश्चिम बंगाल की राजनीति में होने जा रहे इस बड़े बदलाव को और भी खास बनाएगी।


    रेस में और कौन?

    नंदीग्राम के बाद भवानीपुर में भी जीत का परचम लहराने वाले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे शुभेंदु अधिकारी का नाम इस रेस में सबसे आगे चल रहा है। हालांकि बीजेपी अक्सर अपने फैसलों से चौंकाती रही है। शुभेंदु के अलावा कुछ अन्य नामों पर भी चर्चा गर्म है।

    सुकांत मजूमदार: प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनके शांत स्वभाव और आरएसएस (RSS) के साथ उनके गहरे जुड़ाव को देखते हुए उन्हें एक ‘डार्क हॉर्स’ माना जा रहा है।

    दिलीप घोष: पार्टी को जमीनी स्तर पर खड़ा करने वाले दिलीप घोष का नाम भी चर्चा से बाहर नहीं है। उनका आक्रामक अंदाज कार्यकर्ताओं में जोश भरता है।

    महिला कार्ड या नया चेहरा: महिला वोटरों को साधने के लिए बीजेपी किसी महिला विधायक या फिर केंद्र से किसी अनुभवी चेहरे को भी बंगाल की कमान सौंप सकती है।

    पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया, जिससे राज्य में टीएमसी के लगातार 15 वर्षों के शासन का अंत हो गया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने 80 सीटों पर जीत दर्ज की।

  • बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को…. कौन होगा CM? अमित शाह खुद जाएंगे कोलकाता

    बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को…. कौन होगा CM? अमित शाह खुद जाएंगे कोलकाता


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में भाजपा (BJP) की शानदार जीत के बाद अब नई सरकार के गठन की तैयारी तेज हो गई है। शपथ ग्रहण नौ मई को कोलकाता (Kolkata.) के ब्रिगेड परेड ग्राउंड (Brigade Parade Ground) में सुबह दस बजे होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगते ही तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सूत्रों की मानें तो आठ मई को भाजपा विधायकों की बैठक होगी। इस सबमें सबसे अहम बात है पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का बंगाल जाना।

    अमित शाह (Amit Shah) के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद शायद यह पहला मौका होगा कि जब वह किसी राज्य के नतीजे सामने आने के बाद बतौर पर्यवेक्षक उस राज्य का दौरा करेंगे। भाजपा के इतिहास पर नजर डालें तो यह कोई सामान्य घटना नहीं है। ऐसे में कयासों का दौर शुरू हो चुका है।


    कौन बनेगा बंगाल का मुख्यमंत्री?

    भाजपा ने असम और बंगाल में शानदार जीत दर्ज की है। असम में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) का नाम तय माना जा रहा है। पूरे देश की निगाहें बंगाल पर टिकी हुई हैं। राज्य में सरकार बनाने की कवायद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर जा सकते हैं। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शपथ ग्रहण से पहले गृह मंत्री का दौरा कई मायनों में अहम है। पर्यवेक्षक के रूप में गृह मंत्री दौरे के दौरान कई अहम फैसले कर सकते हैं। इसमें मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्रियों के नाम पर रणनीति बनेगी। बैठक में पश्चिम बंगाल में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं।

    बंगाल के भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने की रेस में शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। वह ममता बनर्जी के कार्यकाल में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें पार्टी ने दो दो सीटों से उतारा था। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों पर टीएमसी को मात दी है। पिछली बार उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था। इस चुनाव में उन्होंने भवानीपुर में भी ममता को ही मात दी है। इससे उनका कद भाजपा में और बड़ा हो गया है। हालांकि अमित शाह के पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद से यह चर्चा जरूर होने लगी है कि अगर सबकुछ सामान्य तरीके से होना होता तो गृह मंत्री खुद बतौर पर्यवेक्षक बंगाल का दौरा नहीं करते।


    शुभेंदु नहीं तो कौन बनेगा बंगाल का CM?

    भारतीय जनता पार्टी ने राज्यों में मुख्यमंत्री चुनने में हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और दिल्ली इसका ताजा उदाहरण हैं। तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए भाजपा ने ऐसे नाम को आगे बढ़ाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अब अमित शाह के दौरे के बाद से सवाल उठ रहा है कि बंगाल में भी भाजपा ऐसा ही कुछ तो नहीं करने जा रही है। हालांकि, बाकी राज्यों की तुलना में बंगाल की स्थिति काफी अलग है। यहां भाजपा को ऐसे नेतृत्व की जरूरत होगी जो पार्टी के भविष्य के हित में हो।

  • बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के निज सहायक की हत्या…. भड़की BJP, अभिषेक बनर्जी पर लगाया आरोप

    बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के निज सहायक की हत्या…. भड़की BJP, अभिषेक बनर्जी पर लगाया आरोप


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में विधायक शुभेंदु अधिकारी (MLA Shubhendu Adhikari.) के निजी सहायक की हत्या का आरोप भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party leaders) नेताओं ने अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) पर लगाया है। अभिषेक, राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) के भतीजे हैं। भाजपा ने कहा है कि इस घटना का जवाब दिया जाएगा। साथ ही पुलिस से कहा है कि हत्या के जिम्मेदारों को कहीं से भी खोज कर लाया जाए।

    भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष आनंद बनर्जी ने कहा, ‘हम लोग ये गुंडागर्दी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। 2021 के चुनाव के बाद हमारे 300 कार्यकर्ताओं को टीएमसी के इन गुंडों ने कत्ल कर दिया, लेकिन हम राष्ट्रीय पार्टी हैं और हमारा अनुशासन है। ये सब हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमने हमने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि टीएमसी वाला जो भड़का रहा है, उसमें मत जाइए। लेकिन आप उन्हें कब तक रोक कर रख सकते हैं? मैं कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दे रहा हूं।’

    उन्होंने कहा, ‘यह एक नियोजित हत्या थी। हमने पुलिस और प्रशासन को कहा है कि अगर पाताल में भी घुसा है, तो भी निकालिए। पश्चिम बंगाल में ये गुंडागर्दी नहीं चलने वाला है।’


    अभिषेक बनर्जी पर लगाए आरोप

    भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने कहा, ‘अभिषेक बनर्जी ने यह हत्या कराई है। वह एक मैसेज देना चाहते हैं कि हम सरकार में भले न हों, लेकिन तुम्हारे ऊपर भारी हैं। लेकिन वह मूर्ख है और हम लोगों के ऊपर भारी नहीं है। इसका जवाब मिलेगा।’

    एक स्थानीय समाचार चैनल से बातचीत में, भाजपा नेता और नवनिर्वाचित विधायक कौस्तव बागची ने कहा, ‘यह एक सुनियोजित हमला था। हमलावरों ने रथ की कार का काफी देर तक पीछा किया और फिर उन पर गोलियों की बौछार कर दी। यह ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की साजिश है। जब तक अपराधियों की पहचान नहीं हो जाती, हम चैन से नहीं बैठेंगे। तब तक हम शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।’

    भाजपा के नव निर्वाचित विधायक तरुणज्योति तिवारी ने कहा, ‘हम शांति का संदेश देते रहे हैं लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने बहुत बड़ी गलती की है।’


    ममता बनर्जी की हार का नतीजा

    भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा, ‘यह शायद भवानीपुर में ममता बनर्जी की हार का नतीजा है… CCTV फुटेज की अभी जांच की जा रही है… चंद्र एक भरोसेमंद इंसान थे, वे नेता प्रतिपक्ष के दफ़्तर के सारे कामकाज देखते थे, हमारे विधायकों के लिए भाई जैसे थे, और कई तरह के दूसरे काम भी संभालते थे… जिस इंसान का BJP से कोई लेना-देना ही नहीं था, उसकी हत्या क्यों की गई? जनता में भारी गुस्सा है… हमने तो शांति चाही थी, लेकिन अब परिवार ज़रूर जवाब मांगेगा… अभी कुछ देर पहले ही, हमारे एक बूथ कार्यकर्ता पर चाकू से हमला किया गया और वह अभी अस्पताल में भर्ती है…।’


    एक्शन में पुलिस

    पश्चिम बंगाल के DGP सिद्ध नाथ गुप्ता ने कहा, ‘हमने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। हमने अपराध में इस्तेमाल हुई 4 पहिया गाड़ी को जब्त कर लिया है, लेकिन ऐसी खबरें आ रही हैं कि गाड़ी की नंबर प्लेट नकली है और उसके साथ छेड़छाड़ की गई है। हमें घटनास्थल से जिंदा कारतूस और चले हुए कारतूस मिले हैं। चश्मदीदों और सबूतों की जांच की जा रही है और आगे की जांच जारी है।’

    यह घटना उत्तरी 24 परगना जिले में मध्यमग्राम क्षेत्र के दोहरिया में हुई, जहां शुभेंदु अधिकारी के सहायक चंद्रनाथ रथ पर हमला किया गया। बाइक पर सवार लोगों ने उन्हें करीब से गोली मार दी। इसके बाद हमलावर फरार हो गए। मामले में अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

  • बंगाल में झटके के बाद ममता बनर्जी की अगली रणनीति क्या?

    बंगाल में झटके के बाद ममता बनर्जी की अगली रणनीति क्या?


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी झटके के बाद ममता बनर्जी अब अपनी सियासत को नए सिरे से साधने की तैयारी में दिख रही हैं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने नतीजों के बाद दिए बयानों में साफ किया है कि वे पीछे हटने के बजाय आक्रामक रुख अपनाए रखेंगी और विपक्षी एकता पर जोर बढ़ाएंगी।

    विपक्षी एकता पर फोकस

    राजनीतिक संकेत बताते हैं कि ममता बनर्जी अब INDIA गठबंधन के साथ तालमेल मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं। केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका बनाए रखने और भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना उनकी प्राथमिकता हो सकती है।

    “फाइटर इमेज” बरकरार रखने की कोशिश

    चुनाव नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत में ममता ने हार को सीधे स्वीकार करने से बचते हुए संघर्ष जारी रखने का संदेश दिया। माना जा रहा है कि यह रुख पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और यह जताने की कोशिश है कि राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

    संसद में मजबूत उपस्थिति का सहारा

    तृणमूल कांग्रेस फिलहाल केंद्र में तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने पश्चिम बंगाल की 42 में से 29 सीटें जीती थीं, जो उसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली बनाती हैं। ऐसे में विपक्षी रणनीति में उसकी भूमिका अहम बनी रह सकती है।

    कैडर को संभालना बड़ी चुनौती

    चुनावी झटके के बाद पार्टी के भीतर संगठन को मजबूत बनाए रखना भी बड़ी प्राथमिकता होगी। इसके लिए ममता बनर्जी राज्यभर का दौरा कर सकती हैं, ताकि कार्यकर्ताओं में एकजुटता बनी रहे और टूट-फूट को रोका जा सके।

    भाजपा की बढ़त रोकने की तैयारी

    बंगाल में भाजपा की मजबूती को देखते हुए आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए अभी से रणनीति बनाना जरूरी हो गया है। विपक्षी खेमे की कोशिश होगी कि कार्यकर्ताओं और समर्थकों को यह भरोसा दिलाया जाए कि एकजुट होकर मुकाबला किया जा सकता है।

    बंगाल के नतीजों ने ममता बनर्जी के सामने नई चुनौतियां जरूर खड़ी की हैं, लेकिन उनके हालिया संकेत बताते हैं कि वे आक्रामक राजनीति, संगठन मजबूती और विपक्षी एकता—इन तीन मोर्चों पर एक साथ काम करने की रणनीति अपना सकती हैं।

  • बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत पर दुनियाभर से आ रही प्रतिक्रियाएं, ट्रंप ने भी PM मोदी को दी बधाई

    बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत पर दुनियाभर से आ रही प्रतिक्रियाएं, ट्रंप ने भी PM मोदी को दी बधाई


    वॉशिंगटन।
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party -BJP)) की ऐतिहासिक जीत के बाद देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को ऐतिहासिक और निर्णायक चुनावी जीत की बधाई दी है।

    व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने बातचीत में बताया कि हाल ही में फोन पर हुई बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि भारत सौभाग्यशाली है कि उसका नेतृत्व आप जैसे नेता के हाथों में है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को इस हालिया ऐतिहासिक और निर्णायक चुनावी जीत के लिए बधाई दी है।


    बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव

    भाजपा की इस जीत के साथ पहली बार पार्टी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की है। यह राज्य लंबे समय से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। इस चुनाव परिणाम के साथ ही राज्य में बनर्जी का करीब 15 साल का शासन समाप्त हो गया है। इसे पीएम मोदी के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उनका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कद और मजबूत हुआ है।


    ‘यह नए युग की शुरुआत’

    जीत की घोषणा के बाद नई दिल्ली में समर्थकों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इसे पश्चिम बंगाल के लिए नए युग की शुरुआत बताया था। उन्होंने कहा कि यह जनादेश भयमुक्त, विकासशील और विश्वास से भरे बंगाल की दिशा में एक निर्णायक कदम है। पीएम मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का उल्लेख करते हुए कहा “अब दशकों का इंतजार खत्म हुआ है और जनता ने उस विजन को साकार करने का अवसर भाजपा को दिया है।”


    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा भारत का प्रभाव

    इस ऐतिहासिक जीत और ट्रंप की बधाई को भारत की बढ़ती वैश्विक साख से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूती मिलेगी और वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका और प्रभावशाली होगी।