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  • ई रिक्शा चालकों के लिए नई मुसीबत मोबाइल ऐप से हो रहा सिस्टम लॉक सवारियां बीच रास्ते उतरने को मजबूर

    ई रिक्शा चालकों के लिए नई मुसीबत मोबाइल ऐप से हो रहा सिस्टम लॉक सवारियां बीच रास्ते उतरने को मजबूर


    भोपाल । भोपाल में ई रिक्शा चालकों के सामने एक नई और गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। शहर के कई इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि मोबाइल ऐप के जरिए ई रिक्शों के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी बीएमएस से छेड़छाड़ की जा रही है जिसके कारण चलते वाहन अचानक बीच सड़क पर बंद हो रहे हैं। इससे न केवल चालकों की रोजी रोटी पर संकट गहरा गया है बल्कि यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में सवारियों को बीच रास्ते उतरना पड़ा जबकि चालकों को वाहन धक्का देकर ले जाना पड़ा।

    बुधवारा निवासी ई रिक्शा चालक तनवीर मोहम्मद खान ने बताया कि वीआईपी रोड पर बच्चों को लेकर जा रहे थे तभी उनका वाहन अचानक बंद हो गया। काफी कोशिशों के बाद भी रिक्शा चालू नहीं हुआ और आखिरकार उसे धक्का देकर ले जाना पड़ा। बाद में सिस्टम अनलॉक कराने के लिए उनसे 200 रुपए भी लिए गए। तनवीर का कहना है कि एक ही दिन में उनका ई रिक्शा चार बार बंद हुआ जिससे पूरे दिन की कमाई लगभग खत्म हो गई। उनका कहना है कि हर महीने लगभग आठ हजार रुपए की बैंक किस्त भरनी होती है लेकिन जब वाहन ही नहीं चलेगा तो किस्त कैसे चुकाई जाएगी।

    इसी तरह रेतघाट क्षेत्र के चालक फरान मोहम्मद खान ने भी बताया कि सवारी छोड़ने के बाद उनका ई रिक्शा अचानक बंद हो गया। उन्होंने मुख्य एमसीबी बंद कर दोबारा चालू करने की कोशिश की जिससे कुछ समय के लिए वाहन चल पड़ा लेकिन थोड़ी देर बाद फिर बंद हो गया। बाद में तकनीकी सहायता मिलने के बाद ही वाहन दोबारा चालू हो सका। फरान के अनुसार दिन में कई बार और रात के समय भी यह समस्या सामने आ रही है जिससे काम करना बेहद मुश्किल हो गया है।

    चालकों का दावा है कि यह समस्या केवल कुछ वाहनों तक सीमित नहीं है बल्कि शहर में बड़ी संख्या में ई रिक्शा प्रभावित हुए हैं। मैकेनिकों की दुकानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। जिन लोगों को तकनीकी जानकारी है वे किसी तरह सिस्टम को अनलॉक कर लेते हैं जबकि बाकी चालक घंटों तक परेशान होते रहते हैं। इससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है और कई लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    जानकारी के अनुसार गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध BAT BMS नाम का एक ऐप ब्लूटूथ के माध्यम से आसपास मौजूद कुछ ई रिक्शों के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को खोज सकता है। यदि किसी वाहन का सिस्टम पर्याप्त सुरक्षा या पासवर्ड से सुरक्षित नहीं है तो उससे जुड़े कुछ नियंत्रण विकल्प सामने आ सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि सभी मामलों में इसी ऐप का दुरुपयोग हुआ है या नहीं लेकिन इस संभावना को गंभीरता से जांचा जा रहा है।

    पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ अब पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित ई रिक्शा मॉडलों में सुरक्षा संबंधी कौन सी तकनीकी कमजोरियां मौजूद थीं और उनका किस तरह गलत इस्तेमाल किया गया। यदि यह आशंका सही साबित होती है तो यह केवल भोपाल ही नहीं बल्कि देशभर में ई रिक्शा सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन निर्माताओं को मजबूत साइबर सुरक्षा और सुरक्षित बीएमएस सिस्टम विकसित करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने होंगे ताकि चालकों की आजीविका और यात्रियों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सके।

  • ई रिक्शा चालकों को निशाना बना रहे हाईटेक ठग मोबाइल ऐप से लॉक कर देते हैं बैटरी फिर अनलॉक करने के नाम पर वसूलते हैं पैसे

    ई रिक्शा चालकों को निशाना बना रहे हाईटेक ठग मोबाइल ऐप से लॉक कर देते हैं बैटरी फिर अनलॉक करने के नाम पर वसूलते हैं पैसे


    भोपाल । मध्य प्रदेश के भोपाल और उज्जैन में ई रिक्शा चालकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी का एक नया तरीका सामने आया है जिसने हजारों चालकों की चिंता बढ़ा दी है। मोबाइल ऐप के जरिए ई रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम तक पहुंच बनाकर वाहन को बीच रास्ते में बंद कर दिया जाता है। इसके बाद आरोपी खुद को मैकेनिक बताकर मौके पर पहुंचता है और कुछ ही मिनटों में बैटरी दोबारा चालू करने के बदले दो सौ से चार सौ रुपये तक वसूल लेता है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है जबकि पूरे नेटवर्क और तकनीकी खामियों की जांच जारी है।

    उज्जैन में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगातार कई ई रिक्शा चलते चलते अचानक बंद हो गए। हर बार एक युवक मौके पर पहुंचता और खुद को मैकेनिक बताकर कुछ ही देर में वाहन चालू कर देता। शुरुआत में चालकों को यह सामान्य तकनीकी खराबी लगी लेकिन जब एक जैसी घटनाएं बार बार होने लगीं तो ई रिक्शा एसोसिएशन को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई और चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई।

    बुधवार शाम लोटी स्कूल तिराहे पर एक ई रिक्शा अचानक बंद हुआ। कुछ देर बाद एक युवक वाहन ठीक करने के नाम पर तीन सौ रुपये मांगने पहुंचा। पहले से सतर्क चालक ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पूछताछ में उसकी पहचान रीतेश भानूपा के रूप में हुई। जांच में खुलासा हुआ कि वह मोबाइल में उपलब्ध एक बैटरी मैनेजमेंट ऐप के जरिए ब्लूटूथ से आसपास मौजूद ई रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम तक पहुंच बनाता था। जहां सुरक्षा के लिए पासवर्ड नहीं लगा होता था वहां से वह बैटरी लॉक कर देता और बाद में पैसे लेकर उसे दोबारा चालू कर देता था।

    इस तरह की घटनाएं केवल उज्जैन तक सीमित नहीं रहीं। भोपाल के पुराने शहर में भी कई ई रिक्शा बीच रास्ते में अचानक बंद हो गए। चालकों का आरोप है कि बैटरी लॉक होने के बाद उन्हें कंपनी के सर्विस सेंटर तक जाना पड़ा जहां अनलॉक करने के नाम पर उनसे अतिरिक्त पैसे लिए गए। इससे उनकी रोजी रोटी प्रभावित हुई और यात्रियों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी। कई जगह विवाद की स्थिति भी बन गई।

    ई रिक्शा चालकों का कहना है कि वाहन अचानक बंद होने से दिनभर की कमाई पर असर पड़ता है। स्कूल के बच्चों को लाने ले जाने वाले चालकों और रोजाना सवारी ढोने वालों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कई चालकों ने बताया कि एक ही दिन में उनकी गाड़ी कई बार बंद हुई जिससे काम पूरी तरह ठप हो गया।

    पुलिस के अनुसार संबंधित मोबाइल ऐप सामान्य रूप से उपलब्ध है और यदि ई रिक्शा की बैटरी का ब्लूटूथ पासवर्ड से सुरक्षित नहीं है तो कुछ मॉडलों में उसका दुरुपयोग किया जा सकता है। इसी वजह से अब कई कंपनियां ब्लूटूथ के लिए पासवर्ड सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी बैटरी का सुरक्षा पासवर्ड तुरंत सक्रिय कराएं और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को वाहन या मोबाइल सिस्टम तक पहुंच न दें।

    पुलिस पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने चालकों को इस तरीके से निशाना बनाया गया और सुरक्षा में कहां चूक हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक जितनी सुविधाजनक है उतनी ही सतर्कता की भी मांग करती है। समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाकर ही इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सकता है।

  • नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर लोग भोपाल की जर्जर मल्टियों में बारिश बन रही आफत कचरा सीलन और गिरती इमारतों ने बढ़ाई चिंता

    नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर लोग भोपाल की जर्जर मल्टियों में बारिश बन रही आफत कचरा सीलन और गिरती इमारतों ने बढ़ाई चिंता


    भोपाल । देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले भोपाल की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है। राजधानी के नेहरू नगर स्थित शबरी नगर मल्टी में रहने वाले हजारों लोगों की जिंदगी हर दिन बदबू गंदगी जर्जर इमारतों और हादसे के डर के बीच गुजर रही है। यहां रहने वाले परिवारों का कहना है कि यदि मजबूरी न होती तो कोई भी इंसान इस जगह रहने के बारे में सोच भी नहीं सकता। बारिश का मौसम शुरू होते ही उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं और हर तेज बारिश उनके लिए नई आफत लेकर आती है।

    मल्टी में रहने वाली महिलाओं का कहना है कि सुबह घर का दरवाजा खोलते ही कचरे की दुर्गंध उनका स्वागत करती है जबकि रातें इस चिंता में गुजरती हैं कि कहीं कमजोर हो चुकी दीवारें या छत भरभराकर न गिर जाएं। कई घरों में बारिश के दौरान छत से लगातार पानी टपकता है जिससे बेडरूम रसोई और पूरे घर में सीलन फैल जाती है। लोगों का कहना है कि कई बार सीवेज का गंदा पानी भी घरों तक पहुंच जाता है जिससे बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।

    शबरी नगर में करीब चालीस से अधिक बहुमंजिला इमारतें हैं जिनमें एक हजार से ज्यादा परिवार रहते हैं। इनमें कुछ इमारतें करीब बीस वर्ष पुरानी हैं जबकि कई पंद्रह वर्ष पहले बनाई गई थीं। समय के साथ इन भवनों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि जगह जगह दरारें दिखाई देती हैं। कई दीवारों में पेड़ उग आए हैं। छतों पर घास और झाड़ियां फैल चुकी हैं। कई स्थानों पर प्लास्टर झड़ चुका है और लोहे की सरिया बाहर नजर आने लगी है। लोगों का कहना है कि हल्का सा झटका भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम नियमित रूप से टैक्स और अन्य शुल्क तो वसूलता है लेकिन सफाई और रखरखाव की ओर कोई ध्यान नहीं देता। नालियां जाम रहती हैं सड़कों पर पानी भर जाता है और जगह जगह कचरे के ढेर लगे रहते हैं। खुले बिजली बोर्ड बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं जबकि टूटे पाइप और खराब सीवेज व्यवस्था ने हालात और खराब कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वादे करने जरूर आते हैं लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्याएं फिर अनदेखी कर दी जाती हैं।

    यह समस्या केवल शबरी नगर तक सीमित नहीं है। अर्जुन नगर श्याम नगर राहुल नगर और बीडीए के अंजली कॉम्प्लेक्स सहित शहर की कई सरकारी मल्टियों में रहने वाले लोग भी इसी तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। जर्जर भवनों खुले नालों गंदगी और जलभराव के कारण हजारों परिवार असुरक्षित माहौल में रहने को मजबूर हैं।

    इधर भोपाल की महापौर मालती राय का कहना है कि नगर निगम जर्जर इमारतों की पहचान कर रहा है और जहां भवन रहने योग्य नहीं हैं वहां लोगों को खाली करने की सूचना दी जा रही है। साथ ही सीवेज सफाई जल निकासी और गंदगी की समस्या दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि रहवासियों का कहना है कि उन्हें अब आश्वासनों से ज्यादा जमीन पर दिखाई देने वाले काम का इंतजार है क्योंकि उनकी सबसे बड़ी जरूरत सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन है।

  • IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और रिटायर्ड IPS पिता पर भोपाल में FIR कुक से मारपीट और गाली गलौज के आरोप जांच शुरू

    IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और रिटायर्ड IPS पिता पर भोपाल में FIR कुक से मारपीट और गाली गलौज के आरोप जांच शुरू


    नई दिल्ली। भोपाल में आईपीएल क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके पिता रिटायर्ड स्पेशल डीजी शैलेष सिंह के खिलाफ कुक से कथित मारपीट और गाली गलौज के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। रातीबड़ थाना पुलिस ने शिकायत और प्रारंभिक जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

    शिकायतकर्ता रीवा निवासी विपेंद्र सिंह तोमर ने आरोप लगाया है कि उन्हें परिचित के माध्यम से भोपाल बुलाया गया था। उनके अनुसार उन्हें शैलेष सिंह के घर खाना बनाने की नौकरी का प्रस्ताव दिया गया था और भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा भी दिया गया था। तय वेतन के साथ रहने और खाने की व्यवस्था का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने काम शुरू किया।

    विपेंद्र का आरोप है कि काम शुरू करने के कुछ ही समय बाद उनसे लगातार काम कराया जाने लगा। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने काम छोड़ने की इच्छा जताई तो उनके साथ गाली गलौज की गई। शिकायत के अनुसार उनका मोबाइल भी छीन लिया गया और उन्हें जबरन काम करने के लिए कहा गया। पीड़ित का कहना है कि वह डरकर कमरे में चला गया था लेकिन बाद में उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई।

    शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस दौरान शैलेष सिंह उनके बेटे शशांक सिंह और एक कर्मचारी ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने शरीर और चेहरे पर चोट आने का भी दावा किया है। घटना के बाद विपेंद्र ने रोते हुए एक वीडियो भी जारी किया जिसमें उन्होंने अपने साथ हुई कथित घटना का जिक्र किया। हालांकि वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    रातीबड़ थाना पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद फरियादी और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर शैलेष सिंह शशांक सिंह और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

    इस मामले में एक और पहलू भी सामने आया है। इससे पहले विदिशा निवासी एक युवक ने भी रिटायर्ड अधिकारी शैलेष सिंह के खिलाफ नौकरी के दौरान कथित रूप से बंधक बनाने मारपीट करने और धमकी देने जैसी शिकायत दर्ज कराई थी। उस शिकायत में भी मोबाइल और सामान वापस नहीं करने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि उन आरोपों की कानूनी स्थिति और अंतिम निष्कर्ष अलग जांच प्रक्रिया का विषय हैं।

    क्रिकेट की बात करें तो शशांक सिंह ने आईपीएल में पंजाब किंग्स सहित कई टीमों का प्रतिनिधित्व किया है। उन्हें 2024 सीजन में शानदार प्रदर्शन के बाद पहचान मिली थी जबकि 2026 का सीजन उनके लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने इस सीजन में सीमित रन बनाए और टीम के लिए अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके।

    फिलहाल इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच जारी है। आरोपों की सत्यता का अंतिम फैसला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • भोपाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान राम मंदिर दान मामले की निष्पक्ष जांच की मांग इंडोनेशिया मॉडल का किया जिक्र

    भोपाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान राम मंदिर दान मामले की निष्पक्ष जांच की मांग इंडोनेशिया मॉडल का किया जिक्र


    नई दिल्ली। भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राम मंदिर से जुड़े दान विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के धाम से जुड़ा कोई भी मामला केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं होता बल्कि यह पूरे सनातन समाज की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार यदि किसी ने भगवान के धाम में रहकर अनुचित कार्य किया है तो उसे कानून के साथ साथ ईश्वर का भी महादंड मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच पहले से विशेष जांच एजेंसियां और एसआईटी कर रही हैं इसलिए बिना तथ्यों के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए। जब उनसे राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े आरोपों और कुछ नामों पर एफआईआर नहीं होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है इसलिए जांच एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से अपना काम करने देना चाहिए।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सनातन परंपरा से जुड़े लोगों के मन में इस पूरे प्रकरण को लेकर पीड़ा है। उन्होंने बताया कि विदेश यात्रा के दौरान भी उनसे इस विषय पर चर्चा हुई थी और उन्होंने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में भी इस मुद्दे का उल्लेख किया था। उनके अनुसार भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा का विषय है इसलिए इससे जुड़े मामलों में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

    मंदिरों के प्रबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में कुछ धर्म विरोधी ताकतें ऐसा माहौल तैयार कर रही हैं जिससे मंदिरों और संत समाज पर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों की सेवा और प्रबंधन ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए जो पूरी निष्ठा के साथ सनातन परंपरा भगवान और धार्मिक मूल्यों के प्रति समर्पित हों। इससे मंदिरों की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे।

    अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत के मुसलमानों के संदर्भ में इंडोनेशिया का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी होने के बावजूद वहां धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समरसता देखने को मिलती है। उनके अनुसार वहां पांच वक्त की नमाज पढ़ने वाले लोग दीपावली जैसे त्योहार भी मनाते हैं और रामकथा जैसे धार्मिक आयोजनों में भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में भी सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने की जरूरत है।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भोपाल में हबीबगंज स्थित कैंसर हीलर सेंटर के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि समय पर जांच और बेहतर इलाज से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञों समाजसेवियों जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार यह सेंटर भोपाल सहित आसपास के जिलों के मरीजों को आधुनिक कैंसर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • महज 3 साल 9 महीने की जुड़वां बहनों ने रचा इतिहास दुनिया की सबसे कम उम्र की फीमेल ड्रमर बनकर लंदन में जीता सम्मान

    महज 3 साल 9 महीने की जुड़वां बहनों ने रचा इतिहास दुनिया की सबसे कम उम्र की फीमेल ड्रमर बनकर लंदन में जीता सम्मान


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जुड़वां बहनें सान्वी नाहर और समन्वी नाहर ने बेहद कम उम्र में ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है। महज 3 वर्ष 9 माह की उम्र में दोनों बच्चियों ने दुनिया की सबसे कम उम्र की फीमेल ड्रमर बनने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया है। इस उपलब्धि के लिए उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन की ओर से सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह ब्रिटेन की संसद के हाउस ऑफ कॉमंस में आयोजित हुआ जहां दोनों बच्चियों को प्रमाण पत्र मेडल और ट्रॉफी प्रदान की गई।

    सान्वी और समन्वी ने 21 मार्च 2026 को निर्धारित नियमों के अनुसार ड्रम सेट पर एक विशेष ट्रैक को लगातार 1 मिनट 20 सेकंड तक सफलतापूर्वक बजाकर यह रिकॉर्ड बनाया। उनकी प्रस्तुति का मूल्यांकन करने के बाद वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार किया और दोनों का नाम अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया। उनकी उपलब्धि संस्था के डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधिकारिक प्रकाशनों में भी शामिल की गई है।

    बच्चियों की मां डॉ निकिता नाहर ने बताया कि ड्रमिंग संगीत की सबसे कठिन विधाओं में गिनी जाती है। इसमें दोनों हाथों और दोनों पैरों का एक साथ तालमेल बनाना पड़ता है। सामान्य तौर पर बच्चों को पांच वर्ष की आयु के बाद ही ड्रम सीखने की सलाह दी जाती है लेकिन सान्वी और समन्वी ने सवा तीन साल की उम्र से ही इसकी शुरुआत कर दी थी। नियमित अभ्यास और समर्पण की बदौलत उन्होंने बहुत कम समय में ऐसा कौशल विकसित किया कि विश्व रिकॉर्ड बना डाला।

    इस उपलब्धि के पीछे उनके प्रशिक्षक युग नामदेव की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। बच्चियों के माता पिता उन्हें ड्रम सिखाने के लिए कई संगीत शिक्षकों के पास पहुंचे लेकिन लगभग सभी ने इतनी कम उम्र का हवाला देते हुए प्रशिक्षण देने से इनकार कर दिया। ऐसे समय में युग नामदेव ने इस चुनौती को स्वीकार किया और दोनों बच्चियों को शुरुआती स्तर से प्रशिक्षण देना शुरू किया। मात्र दो महीने में दोनों ने ड्रम की मूल तकनीकों पर अच्छी पकड़ बना ली और बाद में एक स्कूल कार्यक्रम में उनकी प्रस्तुति ने सभी को प्रभावित किया। इसी प्रस्तुति का वीडियो वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तक पहुंचा और रिकॉर्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

    रिकॉर्ड के लिए दोनों बहनों ने करीब एक महीने तक प्रतिदिन एक ही ट्रैक का लगातार अभ्यास किया। आखिरकार उन्होंने निर्धारित समय तक बिना रुके प्रस्तुति देकर सभी शर्तें पूरी कर लीं। आवश्यक वीडियो और दस्तावेज भेजने के बाद उनका रिकॉर्ड स्वीकृत हो गया।

    सान्वी और समन्वी चिकित्सक परिवार से संबंध रखती हैं। उनके दादा डॉ अक्षय नाहर ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं जबकि पिता डॉ सक्षम नाहर सर्जन और मां डॉ निकिता नाहर दंत चिकित्सक हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने बच्चियों की रुचि को पहचानकर उन्हें सही वातावरण और लगातार प्रोत्साहन दिया। प्रशिक्षक युग नामदेव के अनुसार इतनी कम उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली यह भारत की पहली जुड़वां फीमेल ड्रमर हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा को सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास मिले तो उम्र कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती।

  • भोपाल में बंद मकान से रिटायर्ड दंपती के शव मिलने से सनसनी शरीर पर चोट के निशान हत्या के एंगल से जांच शुरू

    भोपाल में बंद मकान से रिटायर्ड दंपती के शव मिलने से सनसनी शरीर पर चोट के निशान हत्या के एंगल से जांच शुरू


    भोपाल । भोपाल के ऐशबाग थाना क्षेत्र में एक बंद मकान से रिटायर्ड दंपती के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। दो दिन तक घर से बाहर नहीं निकलने और मकान से तेज दुर्गंध आने पर किराए पर रहने वाले छात्रों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो पति पत्नी मृत अवस्था में मिले। शवों पर चोट के निशान मिलने के बाद पुलिस ने हत्या की आशंका सहित सभी पहलुओं से जांच शुरू कर दी है।

    मृतकों की पहचान 64 वर्षीय हेमंत बारीक और उनकी 62 वर्षीय पत्नी शकुंतला बारीक के रूप में हुई है। हेमंत बारीक भारतीय रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे जबकि उनकी पत्नी शकुंतला बारीक कस्तूरबा अस्पताल में नर्स के पद से रिटायर हुई थीं। दंपती ऐशबाग के सुदामा नगर स्थित अपने मकान में रहते थे। मकान के एक हिस्से में कुछ छात्र किराए पर रहते हैं। दंपती की कोई संतान नहीं थी।

    छात्रों के अनुसार पिछले दो दिनों से दोनों घर से बाहर नहीं निकले थे। शुक्रवार को मकान से तेज दुर्गंध आने लगी तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बंद मकान का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। अंदर दोनों के शव पड़े मिले जिनकी स्थिति काफी खराब हो चुकी थी।

    एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि शव पूरी तरह से डीकंपोज हो चुके हैं और उनके शरीर पर चोट के निशान भी मिले हैं। फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस हत्या की संभावना से भी इनकार नहीं कर रही है और सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।

    पुलिस ने घटनास्थल को सील कर फॉरेंसिक टीम को जांच के लिए बुलाया है। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। साथ ही एक्सरे और अन्य वैज्ञानिक परीक्षण भी कराए जा रहे हैं ताकि मौत के कारणों का स्पष्ट पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आएगी।

    परिजनों से पूछताछ में पता चला कि शकुंतला बारीक ने बुधवार को आखिरी बार अपनी भाभी से फोन पर बातचीत की थी। उस दौरान उन्होंने बताया था कि उनके पति की आंख में परेशानी है और वह उन्हें कस्तूरबा अस्पताल लेकर जा रही हैं। बातचीत में उन्होंने किसी तरह के खतरे या विवाद का जिक्र नहीं किया था। हालांकि परिजनों के अनुसार पति पत्नी के बीच अक्सर घरेलू विवाद होते रहते थे लेकिन उनकी किसी से पुरानी रंजिश की जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल पुलिस आसपास के लोगों और परिजनों से पूछताछ कर रही है। साथ ही घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है ताकि मामले की सच्चाई जल्द सामने आ सके।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल राहुल गांधी के पोस्टर पर विवाद दिग्विजय सिंह का वीडियो वायरल मंत्री का ऑटो चलाना बना चर्चा का विषय

    मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल राहुल गांधी के पोस्टर पर विवाद दिग्विजय सिंह का वीडियो वायरल मंत्री का ऑटो चलाना बना चर्चा का विषय


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार को कई घटनाएं चर्चा का विषय बनी रहीं। छतरपुर में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर लगे पोस्टर में राहुल गांधी के हाथ में संविधान की उलटी प्रति दिखाई देने से पार्टी विपक्ष के निशाने पर आ गई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा जिसमें वह एक मशहूर फिल्मी डायलॉग पूरा नहीं कर सके। दूसरी ओर प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग का ऑटो चलाते हुए वीडियो भी लोगों का ध्यान खींचता रहा।

    छतरपुर में कांग्रेस ने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर प्रेस वार्ता आयोजित की थी। हालांकि कार्यक्रम के मुद्दों से ज्यादा चर्चा मंच पर लगे पोस्टर और बैनर की हुई। पोस्टर में राहुल गांधी के हाथ में संविधान की प्रति उलटी दिखाई दे रही थी। वहीं एक अन्य बैनर में उनके चेहरे पर केक लगा हुआ नजर आया। कांग्रेस नेताओं ने इसे प्रिंटिंग की तकनीकी गलती बताया लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे पर पार्टी की आलोचना की।

    इसी बीच भोपाल में मीसाबंदियों के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले पर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संविधान की सबसे अधिक अनदेखी और दुरुपयोग कांग्रेस के शासनकाल में हुआ है। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद पोस्टर विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।

    उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी एक कार्यक्रम के दौरान अलग कारण से सुर्खियों में रहे। कार्यक्रम की एंकर ने पहले उनसे फिल्मों के शौक के बारे में पूछा जिस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि सिनेमा का शौक किसे नहीं होता। इसके बाद उनसे मशहूर फिल्मी डायलॉग ये ढाई किलो का हाथ पूरा करने के लिए कहा गया। सवाल सुनकर दिग्विजय सिंह हंस पड़े लेकिन उन्होंने डायलॉग पूरा करने के बजाय बात को टाल दिया। इसके बाद उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जाने लगा।

    इधर प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। अपने विधानसभा क्षेत्र में मीसाबंदी रहे बुजुर्ग रामकुमार पटेल से मुलाकात करने पहुंचे सारंग ने कुछ समय के लिए ऑटो की ड्राइविंग सीट संभाली और ऑटो चलाया। उन्होंने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया जिसके बाद यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    इन घटनाओं के बीच राजनीतिक गलियारों में प्रशासनिक हलचल की भी चर्चा रही। बताया जा रहा है कि एक विभाग में नए डायरेक्टर के रूप में पदभार संभालने वाले युवा आईएएस अधिकारी ने लंबे समय से प्रभाव रखने वाले एक अधिकारी की जिम्मेदारियों और प्रभाव को सीमित करना शुरू कर दिया है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और यह चर्चा राजनीतिक तथा प्रशासनिक हलकों तक सीमित है।

    कुल मिलाकर प्रदेश की राजनीति में एक ही दिन पोस्टर विवाद नेताओं के वायरल वीडियो और प्रशासनिक चर्चाओं ने सियासी माहौल को गर्माए रखा।

  • MLA रेस्ट हाउस विवाद ने लिया नया मोड़ आरोपी पक्ष ने थाने में पिटाई का लगाया आरोप अब होगी पुलिस जांच

    MLA रेस्ट हाउस विवाद ने लिया नया मोड़ आरोपी पक्ष ने थाने में पिटाई का लगाया आरोप अब होगी पुलिस जांच


    नई दिल्ली। भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित एमएलए रेस्ट हाउस के बाहर कांग्रेस विधायक दिनेश गुर्जर के बेटे देवराज सिंह गुर्जर से कथित मारपीट के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। घटना में आरोपी बनाए गए लक्की यादव की मां ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत कर पुलिस कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। शिकायत के बाद पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

    आरोपी पक्ष की ओर से की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घटना के दौरान पहले उनके बेटों के साथ एमएलए रेस्ट हाउस के बाहर मारपीट की गई। इसके बाद अरेरा हिल्स थाने में भी पुलिस की मौजूदगी में उनके बेटों के साथ कथित रूप से मारपीट हुई। शिकायत में कहा गया है कि दोनों युवकों के शरीर पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण उनकी शिकायत पर तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई।

    पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने शिकायत मिलने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    दूसरी ओर विधायक पुत्र देवराज सिंह गुर्जर ने भी पूरे घटनाक्रम को लेकर अपना पक्ष रखा है। उनके अनुसार 24 जून की रात वह मालवीय नगर स्थित एमएलए रेस्ट हाउस स्थित अपने आवास की बालकनी में टहल रहे थे। इसी दौरान घर के बाहर कुछ युवक शराब पी रहे थे। उन्हें वहां से हटने के लिए कहने पर विवाद शुरू हो गया।

    देवराज का आरोप है कि विरोध करने पर चारों युवक उनके घर की सीढ़ियों तक पहुंच गए और शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगे। मना करने पर उनके साथ मारपीट और छीनाझपटी की गई। उन्होंने बताया कि शोर सुनकर उनके दोस्त मौके पर पहुंचे और बीच बचाव कर उन्हें बचाया। आरोप है कि जाते समय युवक उन्हें धमकी देकर वहां से चले गए।

    घटना के बाद देवराज ने जेपी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया और अरेरा हिल्स थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उनकी शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।

    अब आरोपी पक्ष की ओर से लगाए गए नए आरोपों के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। पुलिस दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान क्या हुआ और किस पक्ष के आरोप सही हैं। फिलहाल पुलिस ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है और कहा है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा

    सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार की गई प्रमिला तिवारी के खिलाफ कई अन्य पीड़ित भी सामने आए। जांच आगे बढ़ी तो एक ऐसे फर्जी भर्ती रैकेट का खुलासा हुआ जिसने सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के भरोसे और सपनों दोनों को निशाना बनाया।

    जानकारी के अनुसार गिरोह बेरोजगार युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। आरोप है कि युवाओं से दो लाख से पांच लाख रुपये तक की रकम वसूली जाती थी और बदले में उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए जाते थे। इन नियुक्ति पत्रों में एम्स, वन विभाग, रेलवे, बैंक और नगर निगम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में नियुक्ति दर्शाई जाती थी। कई युवाओं को तो भारतीय वन सेवा अधिकारी, बैंक क्लर्क और रेलवे कर्मचारी तक नियुक्त किए जाने का दावा किया गया।

    मामले को और गंभीर बनाता है फर्जी दस्तावेजों का स्वरूप। जांच में ऐसे नियुक्ति पत्र सामने आए हैं जिनमें लोक निर्माण विभाग से संबंधित भर्ती दिखाते हुए मंत्री के कथित फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। आरोप है कि जालसाजों ने दस्तावेजों को इतना वास्तविक बनाने की कोशिश की कि पीड़ितों को किसी प्रकार का संदेह न हो। यही वजह रही कि कई युवा लंबे समय तक खुद को चयनित कर्मचारी मानते रहे और बाद में ठगी का शिकार होने का पता चला।

    पीड़ितों के अनुसार गिरोह भरोसा जीतने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। युवाओं को सरकारी कार्यालयों के आसपास बुलाया जाता था ताकि उन्हें लगे कि पूरी प्रक्रिया वैध है। गिरोह के अन्य सदस्य खुद को पहले से चयनित कर्मचारी बताकर विश्वास पैदा करते थे। वे दावा करते थे कि उनकी नियुक्ति भी इसी माध्यम से हुई है, जिससे नए अभ्यर्थी आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे।

    जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। प्रमिला तिवारी और उसके सहयोगियों के पास बेरोजगार युवाओं की शैक्षणिक जानकारी और मोबाइल नंबर पहले से उपलब्ध थे। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि युवाओं का व्यक्तिगत डाटा कहीं से अवैध रूप से प्राप्त किया गया था। अब पुलिस इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि आखिर यह संवेदनशील जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची।

    टीटी नगर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी नियुक्ति पत्रों, बैंक लेनदेन और आरोपियों के नेटवर्क की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने युवाओं को अब तक ठगी का शिकार बनाया गया है।

    यह मामला बेरोजगारी की समस्या का फायदा उठाकर युवाओं के साथ किए जा रहे संगठित अपराध की गंभीर तस्वीर पेश करता है। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सरकारी नौकरी से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें और किसी भी व्यक्ति को नौकरी दिलाने के नाम पर रकम न दें।