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  • भोपाल महिला आयोग में चौंकाने वाले वैवाहिक विवाद नौकरी के बाद बढ़ी दूरियां कहीं तलाक की मांग तो कहीं जान का खतरा

    भोपाल महिला आयोग में चौंकाने वाले वैवाहिक विवाद नौकरी के बाद बढ़ी दूरियां कहीं तलाक की मांग तो कहीं जान का खतरा


    भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान वैवाहिक जीवन से जुड़े कई गंभीर और संवेदनशील मामले सामने आए हैं। सोमवार को हुई सुनवाई में कुल 30 लंबित मामलों पर चर्चा की गई जिनमें दो प्रकरण विशेष रूप से चर्चा का विषय बने। एक मामले में पति ने आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारी बनने के बाद उसकी पत्नी उसे छोड़कर मायके चली गई जबकि दूसरे मामले में पति और पत्नी ने एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। इन मामलों की अभी जांच और सुनवाई जारी है तथा आयोग दोनों पक्षों की बात सुनकर समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है।

    पहले मामले में एक सरकारी कॉलेज के प्रोफेसर ने आयोग के समक्ष कहा कि उनकी पत्नी को असिस्टेंट डायरेक्टर टीसीपी के पद पर नियुक्ति मिलने के बाद उनके व्यवहार में बदलाव आ गया। पति का कहना है कि करीब 20 वर्ष के वैवाहिक जीवन के बाद पत्नी बेटे को साथ लेकर मायके चली गई और अब तलाक चाहती है। सुनवाई के दौरान पत्नी उपस्थित नहीं हुई जबकि पति ने आयोग से भावुक अपील करते हुए कहा कि वह आज भी अपनी पत्नी के साथ रहना चाहता है और जरूरत पड़ने पर मायके में भी रहने को तैयार है।

    पति ने यह भी कहा कि उनका बेटा आईवीएफ प्रक्रिया से हुआ है और यदि रिश्ते में लगातार मानसिक प्रताड़ना होती तो परिवार इस कठिन प्रक्रिया से नहीं गुजरता। उन्होंने यह भी बताया कि पत्नी के अलग होने के बाद उनकी मां को पैरालिसिस का दूसरा अटैक आया है और इस उम्र में अकेले जीवन बिताना उनके लिए बेहद कठिन होगा।

    दूसरे मामले में पति ने आयोग के सामने दावा किया कि उसकी पत्नी के दूसरी महिला के साथ संबंध हैं और उसे अपनी जान का खतरा महसूस होता है। पति ने आरोप लगाया कि उसने कथित बातचीत सुनी है जिसमें उसे रास्ते से हटाने जैसी बातें कही गईं। उसने आयोग से सुरक्षा की मांग भी की।

    वहीं पत्नी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना घरेलू हिंसा और निजी जीवन में हस्तक्षेप जैसे गंभीर आरोप लगाए। महिला का कहना है कि शादी के बाद लगातार उससे सोना नकदी और अन्य सामान की मांग की जाती रही। उसने आरोप लगाया कि उसके निजी फोटो और वीडियो बिना अनुमति रिकॉर्ड किए गए और उन्हें सार्वजनिक करने की कोशिश की गई जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।

    महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसे कई बार कमरे में बंद रखा गया उसके साथ मारपीट की गई और उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भपात कराया गया। उसका कहना है कि वह लंबे समय से अकेले रह रही है और उसके खर्च का जिम्मा मायके वाले उठा रहे हैं। दूसरी ओर पति ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उसके पास अपने पक्ष में पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य हैं जिन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है।

    महिला आयोग ने दोनों मामलों में संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए हैं और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग का कहना है कि निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों मामलों में अंतिम निर्णय आना बाकी है।

  • हबीबगंज पुलिस की दो बड़ी चूक कोर्ट में उजागर, एक केस 5 साल गलत कोर्ट में चला, पॉक्सो में दो आरोपी बरी

    हबीबगंज पुलिस की दो बड़ी चूक कोर्ट में उजागर, एक केस 5 साल गलत कोर्ट में चला, पॉक्सो में दो आरोपी बरी


    मध्य प्रदेश। भोपाल की हबीबगंज थाना पुलिस की विवेचना में हुई गंभीर लापरवाहियां अदालत में उजागर हुई हैं। दो अलग-अलग मामलों में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत ने एक मामले में पांच वर्षों से चल रहे ट्रायल को निरस्त कर किशोर न्याय बोर्ड भेजने के निर्देश दिए, जबकि दूसरे पॉक्सो प्रकरण में विवेचना की गंभीर खामियों के चलते दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इन दोनों मामलों ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और दस्तावेजी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

    पहला मामला वर्ष 2021 के एक मारपीट प्रकरण से जुड़ा है। पुलिस ने घटना के समय 17 वर्षीय किशोर को बालिग मानकर गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ नियमित सत्र न्यायालय में चालान पेश कर दिया। इसके बाद करीब पांच वर्षों तक नियमित अदालत में ट्रायल चलता रहा। जब मामला अंतिम बहस के दौर में पहुंचा तो बचाव पक्ष ने अदालत के सामने किशोर की वास्तविक उम्र से जुड़े दस्तावेज पेश किए।

    सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि गिरफ्तारी से पहले ही किशोर के आधार कार्ड की प्रति थाने में जमा कराई जा चुकी थी, जिसमें उसकी जन्मतिथि 14 मार्च 2004 दर्ज थी। इसके बावजूद पुलिस ने उसे बालिग बताते हुए नियमित अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जबकि कानून के अनुसार मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था।

    अदालत ने जन्मतिथि की पुष्टि के लिए माता-पिता और संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के बयान दर्ज किए। मूल जन्म रजिस्टर के आधार पर यह प्रमाणित हुआ कि घटना के समय किशोर की उम्र 17 वर्ष से कुछ अधिक थी। इसके बाद अदालत ने नियमित न्यायालय में चल रही कार्यवाही समाप्त करते हुए थाना प्रभारी को सभी दस्तावेज किशोर न्याय बोर्ड में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वहीं सह-आरोपी के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी।

    दूसरा मामला 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के आरोप से जुड़ा था। विशेष पॉक्सो अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच में कई गंभीर कमियां सामने आईं। विवेचना अधिकारी ने दावा किया कि पीड़िता को बेंगलुरु से बरामद किया गया था, लेकिन इस कार्रवाई से संबंधित कोई आधिकारिक रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। इतना ही नहीं, बेंगलुरु की स्थानीय पुलिस को भी बरामदगी की सूचना नहीं दी गई थी।

    अदालत ने यह भी पाया कि कथित बरामदगी पंचनामे पर मुख्य आरोपी के हस्ताक्षर तक नहीं कराए गए। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और बचाव पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

    अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पीड़िता द्वारा आरोप लगाने के बावजूद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी तत्काल नहीं की गई। रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता की बरामदगी के तीन दिन बाद आरोपी को केवल नोटिस देकर गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी भी कई दिन बाद हुई। इस देरी और जांच प्रक्रिया की कमियों ने अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर कर दिया।

    इन दोनों मामलों ने स्पष्ट किया है कि विवेचना में छोटी-सी लापरवाही भी न्यायिक प्रक्रिया को वर्षों तक प्रभावित कर सकती है। अदालत के फैसलों ने यह संदेश दिया है कि जांच एजेंसियों के लिए कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेजी साक्ष्य और निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है, क्योंकि जांच में हुई त्रुटियों का सीधा असर न्याय मिलने की प्रक्रिया पर पड़ता है।

  • मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड पर घमासान तेज, गैर-मुस्लिम नियुक्तियों के खिलाफ शिया समुदाय की भी खुली नाराजगी

    मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड पर घमासान तेज, गैर-मुस्लिम नियुक्तियों के खिलाफ शिया समुदाय की भी खुली नाराजगी


    मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। अब तक सुन्नी उलेमा और मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद पहली बार शिया समुदाय ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। भोपाल के करोंद स्थित आल-ए-मोहम्मद शिया जामा मस्जिद के इमाम-ए-जुमा मौलाना सैयद अज़हर हुसैन रिजवी ने साफ कहा कि वक्फ की जमीनें और संपत्तियां मुस्लिम समाज की अमानत हैं, इसलिए इनके संचालन और प्रबंधन में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता।

    मौलाना रिजवी का कहना है कि वक्फ की संपत्तियां वर्षों पहले नवाबों, राजाओं और समाज के संपन्न लोगों ने गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों की शिक्षा, आवास तथा सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से दान की थीं। ऐसे में इन संपत्तियों से जुड़े फैसले भी मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के हाथों में ही होने चाहिए। उनके मुताबिक वक्फ केवल संपत्ति का मामला नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें बाहरी दखल उचित नहीं है।

    उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नए वक्फ बोर्ड में शिया समुदाय के किसी भी प्रतिनिधि को स्थान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि प्रदेश के मुस्लिम समाज में शिया समुदाय भी महत्वपूर्ण हिस्सा है और बोर्ड में कम से कम एक शिया आलिम या प्रतिनिधि को शामिल किया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं होने से समाज के एक बड़े वर्ग में निराशा है।

    मौलाना रिजवी ने उन लोगों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए जिन्होंने नए वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के स्वागत का समर्थन किया। उनका कहना है कि यदि कोई धार्मिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसे फैसलों का समर्थन करता है तो यह मुस्लिम समाज की भावनाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि धार्मिक मामलों में समाज की भावनाओं और विश्वास का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।

    दरअसल हाल ही में शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम द्वारा वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत के बाद मुस्लिम समाज के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिली थी। इस मुद्दे पर पहले भी कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था। जुमे की नमाज के दौरान लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया था, जबकि कुछ धार्मिक पदाधिकारियों ने भी इस फैसले पर असहमति जताई थी।

    मौलाना रिजवी ने मुस्लिम समाज से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों की एक बड़ी वजह आपसी एकता की कमी भी है। यदि समाज संगठित रहता तो ऐसे विवादों की स्थिति नहीं बनती। उन्होंने सभी मतभेद भुलाकर समाजहित में एक साथ खड़े होने की आवश्यकता बताई।

    इधर यह मामला अब कानूनी दिशा भी पकड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा के बाद मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने जबलपुर हाईकोर्ट में केविएट दायर कर दी है। बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल का कहना है कि यदि इस मामले में कोई याचिका दायर होती है तो अदालत किसी भी आदेश से पहले बोर्ड का पक्ष भी अवश्य सुने। ऐसे में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लगातार गहराता दिखाई दे रहा है।

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    Waqf Board, Madhya Pradesh, Shia Community, Bhopal News, Waqf Controversy मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। अब तक सुन्नी उलेमा और मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद पहली बार शिया समुदाय ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। भोपाल के करोंद स्थित आल-ए-मोहम्मद शिया जामा मस्जिद के इमाम-ए-जुमा मौलाना सैयद अज़हर हुसैन रिजवी ने साफ कहा कि वक्फ की जमीनें और संपत्तियां मुस्लिम समाज की अमानत हैं, इसलिए इनके संचालन और प्रबंधन में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता।

    मौलाना रिजवी का कहना है कि वक्फ की संपत्तियां वर्षों पहले नवाबों, राजाओं और समाज के संपन्न लोगों ने गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों की शिक्षा, आवास तथा सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से दान की थीं। ऐसे में इन संपत्तियों से जुड़े फैसले भी मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के हाथों में ही होने चाहिए। उनके मुताबिक वक्फ केवल संपत्ति का मामला नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें बाहरी दखल उचित नहीं है।

    उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नए वक्फ बोर्ड में शिया समुदाय के किसी भी प्रतिनिधि को स्थान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि प्रदेश के मुस्लिम समाज में शिया समुदाय भी महत्वपूर्ण हिस्सा है और बोर्ड में कम से कम एक शिया आलिम या प्रतिनिधि को शामिल किया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं होने से समाज के एक बड़े वर्ग में निराशा है।

    मौलाना रिजवी ने उन लोगों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए जिन्होंने नए वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के स्वागत का समर्थन किया। उनका कहना है कि यदि कोई धार्मिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसे फैसलों का समर्थन करता है तो यह मुस्लिम समाज की भावनाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि धार्मिक मामलों में समाज की भावनाओं और विश्वास का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।

    दरअसल हाल ही में शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम द्वारा वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत के बाद मुस्लिम समाज के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिली थी। इस मुद्दे पर पहले भी कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था। जुमे की नमाज के दौरान लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया था, जबकि कुछ धार्मिक पदाधिकारियों ने भी इस फैसले पर असहमति जताई थी।

    मौलाना रिजवी ने मुस्लिम समाज से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों की एक बड़ी वजह आपसी एकता की कमी भी है। यदि समाज संगठित रहता तो ऐसे विवादों की स्थिति नहीं बनती। उन्होंने सभी मतभेद भुलाकर समाजहित में एक साथ खड़े होने की आवश्यकता बताई।

    इधर यह मामला अब कानूनी दिशा भी पकड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा के बाद मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने जबलपुर हाईकोर्ट में केविएट दायर कर दी है। बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल का कहना है कि यदि इस मामले में कोई याचिका दायर होती है तो अदालत किसी भी आदेश से पहले बोर्ड का पक्ष भी अवश्य सुने। ऐसे में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लगातार गहराता दिखाई दे रहा है।

  • 116 करोड़ की इमारतों में बंद लिफ्ट 5 करोड़ की साइकिलें बेकार स्मार्ट सिटी की हकीकत ने चौंकाया

    116 करोड़ की इमारतों में बंद लिफ्ट 5 करोड़ की साइकिलें बेकार स्मार्ट सिटी की हकीकत ने चौंकाया


    भोपाल । भोपाल स्मार्ट सिटी मिशन को देश की सबसे महत्वाकांक्षी शहरी विकास योजनाओं में शामिल किया गया था। आधुनिक सुविधाओं से लैस राजधानी बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में शुरू हुई इस परियोजना पर अब तक एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कई बड़े सवाल खड़े कर रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब सत्तारूढ़ दल के विधायक भगवानदास सबनानी ने भी खुलकर कहा है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर का नुकसान हुआ और बदले में नागरिकों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल सकीं।

    जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में विधायक की नाराजगी के बाद सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि कई परियोजनाएं या तो अधूरी हैं या फिर रखरखाव के अभाव में अपनी उपयोगिता खो चुकी हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए आवासीय टावर इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। करीब 116 करोड़ रुपये की लागत से बने तीन 13 मंजिला टावरों में सरकारी कर्मचारियों को फ्लैट आवंटित किए गए लेकिन कुछ ही समय में लिफ्ट बंद हो गईं और रखरखाव की जिम्मेदारी तय नहीं होने से रहवासी परेशान हैं। अग्निशमन व्यवस्था डोर कैमरे पार्क और अन्य सुविधाएं भी उचित देखरेख के अभाव में प्रभावित हो रही हैं।

    स्मार्ट सिटी क्षेत्र में लगभग 49 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हाट बाजार भी सवालों के घेरे में है। तीन मंजिला इमारत में सैकड़ों दुकानें बनाई गईं लेकिन पार्किंग और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वर्षों पहले दुकानों का वादा किया गया था लेकिन आज तक उन्हें आवंटन नहीं मिला।

    करीब 31 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहा स्मार्ट दशहरा मैदान भी अब तक अधूरा पड़ा है। धीमी निर्माण गति के कारण यह स्थान असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। लगातार टेंडर प्रक्रिया के बावजूद परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

    स्मार्ट सिटी की सबसे चर्चित योजनाओं में शामिल सार्वजनिक साइकिल परियोजना भी पूरी तरह विफल साबित हुई। वर्ष 2018 में लगभग 5 करोड़ 36 लाख रुपये खर्च कर खरीदी गई 500 साइकिलें अब धूल खा रही हैं। जिन साइकिल ट्रैक पर इन्हें चलाया जाना था वे भी कई स्थानों पर उखड़ चुके हैं। अब दोबारा नई एजेंसी नियुक्त करने और नए सिरे से काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है जिससे अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ेगा।

    इसी तरह स्मार्ट सिटी क्षेत्र में विकसित किए गए बड़े व्यावसायिक प्लॉट भी अपेक्षित खरीदार नहीं जुटा सके हैं। कुल 42 प्लॉटों में से केवल 18 ही बिक पाए हैं जबकि शेष खाली पड़े हैं। विधायक का सुझाव है कि बड़े प्लॉटों को छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाए ताकि छोटे और मध्यम व्यापारी भी निवेश कर सकें और परियोजना को गति मिल सके।

    शहर में लगाए गए स्मार्ट पोल भी अपनी घोषित सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सके। वाईफाई ई वाहन चार्जिंग और पब्लिक एड्रेस सिस्टम जैसी सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। पांच करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई स्मार्ट डस्टबिन परियोजना भी विफल रही। इसके अलावा हजारों पेड़ों की कटाई पर्यावरण को लेकर चिंता का विषय बनी हुई है जबकि कई खाली सरकारी परिसरों पर दोबारा अवैध कब्जों की शिकायतें सामने आ रही हैं।

    हालांकि सदर मंजिल जैसे कुछ प्रोजेक्ट बेहतर उपयोग के उदाहरण बने हैं जहां ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण कर उसे निजी संचालन के माध्यम से राजस्व से जोड़ा गया है। लेकिन समग्र तस्वीर यह संकेत देती है कि स्मार्ट सिटी मिशन में केवल निर्माण कार्य पर्याप्त नहीं है बल्कि समय पर रखरखाव जवाबदेही और योजनाओं के प्रभावी संचालन पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। भोपाल का अनुभव यह बताता है कि विकास केवल करोड़ों रुपये खर्च करने से नहीं बल्कि नागरिकों तक सुविधाएं पहुंचाने से सफल माना जाएगा।

  • हमीदिया अस्पताल में मेडिकल चमत्कार: 10.2 किलो ओवरी ट्यूमर के साथ गर्भवती का सफल ऑपरेशन, स्वस्थ शिशु का हुआ जन्म

    हमीदिया अस्पताल में मेडिकल चमत्कार: 10.2 किलो ओवरी ट्यूमर के साथ गर्भवती का सफल ऑपरेशन, स्वस्थ शिशु का हुआ जन्म


    मध्य प्रदेश । भोपाल के हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञों ने 10.2 किलोग्राम वजन के विशाल ओवरी ट्यूमर से पीड़ित गर्भवती महिला का सफल सिजेरियन ऑपरेशन किया। इस दुर्लभ और जोखिमभरी सर्जरी में पहले 2.6 किलोग्राम वजन के स्वस्थ शिशु का सुरक्षित जन्म कराया गया और इसके तुरंत बाद उसी ऑपरेशन के दौरान महिला की ओवरी से 10.2 किलोग्राम का ट्यूमर भी सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। ऑपरेशन के बाद मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा उनकी स्थिति स्थिर और संतोषजनक बताई जा रही है।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह मामला चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यंत जटिल था क्योंकि एक ओर महिला गर्भवती थी और दूसरी ओर उसकी ओवरी में असामान्य रूप से बड़ा ट्यूमर मौजूद था। ऐसी स्थिति में मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान को गंभीर खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों ने ऑपरेशन से पहले पूरी योजना तैयार की और हर चरण को बेहद सावधानी से पूरा किया ताकि किसी प्रकार की जटिलता उत्पन्न न हो।

    इस सफल शल्य चिकित्सा का नेतृत्व गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा वाधवानी के मार्गदर्शन में किया गया। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी सिंह और डॉ. अदिति खरे ने सर्जरी को अंजाम दिया। वहीं एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. तृप्ति वत्सल्य, डॉ. जितेन्द्र कुमार और डॉ. देवांशु सराफ ने संभाली। ऑपरेशन के दौरान विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी पूरी टीम के साथ समन्वय बनाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    चिकित्सकों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान इतने बड़े ओवरी ट्यूमर के साथ सफल प्रसव और ट्यूमर को एक ही ऑपरेशन में निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा रहता है। इसके अलावा गर्भस्थ शिशु पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। लेकिन अनुभवी डॉक्टरों की टीम, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और सटीक रणनीति की बदौलत यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा।

    यह सफलता न केवल हमीदिया अस्पताल की विशेषज्ञता को दर्शाती है बल्कि यह भी साबित करती है कि सरकारी अस्पतालों में जटिल से जटिल मामलों का भी उच्च स्तर पर सफल इलाज संभव है। डॉक्टरों की समर्पित टीम और बेहतर चिकित्सा प्रबंधन के कारण मां और नवजात दोनों को नया जीवन मिला है। यह उपलब्धि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है।

  • एमपी में लोकसभा सीटों का बड़ा विस्तार संभव, भोपाल-इंदौर समेत 15 नई सीटों का प्रस्ताव, बदल सकता है चुनावी गणित

    एमपी में लोकसभा सीटों का बड़ा विस्तार संभव, भोपाल-इंदौर समेत 15 नई सीटों का प्रस्ताव, बदल सकता है चुनावी गणित


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश की राजनीति आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकती है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की एक अध्ययन रिपोर्ट में भविष्य के परिसीमन के दौरान राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या 29 से बढ़ाकर 44 किए जाने का सुझाव दिया गया है। यानी मध्य प्रदेश को 15 नई लोकसभा सीटें मिल सकती हैं। हालांकि परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम परिसीमन प्रस्ताव नहीं बल्कि प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया एक अध्ययन मॉडल है।

    रिपोर्ट में देशभर में मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 824 करने और बड़े संसदीय क्षेत्रों को दो या तीन हिस्सों में विभाजित करने की सिफारिश की गई है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश में लगभग 52 प्रतिशत सीटें बढ़ने की संभावना जताई गई है। यदि भविष्य में इस दिशा में फैसला होता है तो राज्य के चुनावी और राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार भविष्य का परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए मतदाताओं की संख्या, भौगोलिक क्षेत्रफल, शहरीकरण, अनुसूचित जाति और जनजाति की आबादी, सामाजिक और भाषाई विविधता तथा मतदान प्रतिशत जैसे कई मानकों को भी महत्व देने का सुझाव दिया गया है। परिषद का मानना है कि इससे सांसद और मतदाताओं के बीच संपर्क बेहतर होगा तथा निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलित विकास संभव हो सकेगा।

    सबसे अधिक असर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, रीवा और छिंदवाड़ा जैसे बड़े संसदीय क्षेत्रों पर पड़ सकता है। इन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और शहरी विस्तार भी तेजी से हो रहा है। वहीं नए जिले मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा भी भविष्य के परिसीमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    रिपोर्ट में मालवा-निमाड़ और महाकौशल क्षेत्रों में सबसे अधिक बदलाव की संभावना जताई गई है। मालवा-निमाड़ की मौजूदा नौ लोकसभा सीटों में इंदौर, उज्जैन, धार और खरगोन जैसे बड़े क्षेत्रों का विभाजन कर सीटों की संख्या 13 तक पहुंच सकती है। इसी तरह महाकौशल क्षेत्र की छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला और बालाघाट जैसी सीटों का पुनर्गठन कर यहां लोकसभा सीटों की संख्या चार से बढ़ाकर आठ किए जाने की संभावना बताई गई है।

    यदि मध्य प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 44 होती है तो राष्ट्रीय राजनीति में राज्य की भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। संसद में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने के साथ केंद्र सरकार में राज्य की भागीदारी भी मजबूत हो सकती है। वहीं राजनीतिक दलों को नए परिसीमन के अनुसार संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति में व्यापक बदलाव करने पड़ सकते हैं क्योंकि कई संसदीय क्षेत्रों की सीमाएं बदल जाएंगी।

    रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार नए परिसीमन की स्थिति में भोपाल, इंदौर, नागदा, बीना, ग्वालियर शहर, सीहोर, मऊगंज और लांजी जैसे क्षेत्रों में भाजपा की स्थिति मजबूत रह सकती है। वहीं पांढुर्णा, सरदारपुर, बड़वानी, डिंडौरी और उमरिया जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस को नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि यह केवल अध्ययन आधारित आकलन है और अंतिम निर्णय भविष्य में होने वाले आधिकारिक परिसीमन पर निर्भर करेगा।

  • भोपाल में निकली रॉयल एनफील्ड बाइक रैली, हेलमेट और ट्रैफिक नियमों के पालन का दिया प्रेरक संदेश

    भोपाल में निकली रॉयल एनफील्ड बाइक रैली, हेलमेट और ट्रैफिक नियमों के पालन का दिया प्रेरक संदेश


    भोपाल । भोपाल में रविवार को रॉयल एनफील्ड की ओर से आयोजित भव्य बाइक रैली ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इस विशेष आयोजन की शुरुआत पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने अपने कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर की। रैली में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे करीब 100 अनुभवी बाइकर्स और बाइकिंग समुदाय के सदस्यों ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल बाइक राइड करना नहीं बल्कि आम लोगों को सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन के प्रति जागरूक करना था।

    रैली निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए आईएसबीटी तक पहुंची। पूरे सफर के दौरान सभी बाइकर्स ने ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए अनुशासित तरीके से राइडिंग की। हर राइडर ने हेलमेट पहनकर सुरक्षित यात्रा का संदेश दिया और लोगों से भी जिम्मेदारी के साथ वाहन चलाने की अपील की। सड़क पर मौजूद लोगों ने भी इस अनोखी रैली को उत्साह के साथ देखा और बाइकर्स का अभिवादन किया।

    कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र राजस्थान उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी रॉयल एनफील्ड प्रेमी शामिल हुए। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बाइकिंग समुदाय के बीच सुरक्षित राइडिंग की संस्कृति को मजबूत करना और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करना था। रैली के दौरान सभी प्रतिभागियों ने यह संदेश दिया कि रोमांच और जिम्मेदारी दोनों साथ साथ चल सकते हैं यदि ट्रैफिक नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन किया जाए।

    रैली में शामिल पुणे के राइडर एरॉन डक्रूज ने बताया कि वह विशेष रूप से इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने भोपाल पहुंचे हैं। उनके अनुसार इस तरह के आयोजन केवल बाइकिंग का उत्सव नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम भी हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वाहन चलाते समय हमेशा हेलमेट पहनें गति सीमा का पालन करें और सड़क पर स्वयं के साथ दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

    भोपाल के राइडर सैफ खान ने बताया कि उनका राइडर्स ग्रुप शहर में लंबे समय से सक्रिय है और उसमें 200 से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। उनका समूह नियमित रूप से सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार बाइकिंग को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित करता है। उन्होंने कहा कि उनका एक ही संदेश है सेफ राइड सेफ लाइफ। उनका मानना है कि ट्रैफिक नियमों का पालन करके ही दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

    आज के समय में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसे जागरूकता अभियान बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बाइक रैली के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि सुरक्षित सफर केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर वाहन चालक का नैतिक दायित्व भी है। यदि सभी लोग हेलमेट पहनें ट्रैफिक संकेतों का पालन करें और जिम्मेदारी के साथ वाहन चलाएं तो सड़क हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

  • भोपाल में होटल बना रणक्षेत्र: हथियारबंद बदमाशों ने मचाया आतंक, होटल कर्मचारियों को भी बेरहमी से पीटा

    भोपाल में होटल बना रणक्षेत्र: हथियारबंद बदमाशों ने मचाया आतंक, होटल कर्मचारियों को भी बेरहमी से पीटा


    भोपाल । भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र में शनिवार रात उस समय दहशत फैल गई जब बंगरसिया भोजपुर रोड स्थित एक होटल में 10 से 15 हथियारबंद बदमाश अचानक घुस आए। तलवार चाकू हॉकी और बेसबॉल बैट से लैस हमलावरों ने होटल के भीतर जमकर उत्पात मचाया और चार युवकों पर जानलेवा हमला कर दिया। बीच बचाव करने पहुंचे होटल के शेफ और अन्य कर्मचारियों को भी नहीं बख्शा गया। पूरी घटना होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई जिससे अब पुलिस आरोपियों की पहचान में जुटी है।

    हमले में 24 वर्षीय लीलाधर कुशवाहा गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें तत्काल एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उनकी मेडिकल लीगल केस रिपोर्ट तैयार की गई जिसमें 10 से 12 लोगों के समूह द्वारा धारदार हथियारों से हमला किए जाने का उल्लेख किया गया है। एक अन्य घायल युवक का भी उपचार कराया गया है।

    घायल लीलाधर के अनुसार वह अपने तीन साथियों के साथ मंडीदीप स्थित फैक्ट्री में ड्यूटी पूरी करने के बाद रात में खाना खाने होटल जा रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार से बाइक चला रहे कुछ युवकों ने उन्हें टक्कर मार दी। विरोध करने पर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। जान बचाने के लिए चारों युवक होटल के भीतर चले गए लेकिन कुछ ही मिनटों बाद बड़ी संख्या में बदमाश हथियार लेकर वहां पहुंच गए।

    आरोप है कि हमलावरों ने होटल में घुसते ही युवकों पर हमला शुरू कर दिया। इसके बाद लीलाधर को घसीटकर बाहर ले जाया गया और उनकी गर्दन सहित शरीर के कई हिस्सों पर धारदार हथियारों से वार किए गए। मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है। पीड़ित का कहना है कि यदि उसने किसी तरह बचाव नहीं किया होता तो उसकी जान भी जा सकती थी।

    घटना के दौरान होटल में मौजूद ग्राहकों और कर्मचारियों में अफरा तफरी मच गई। हमलावरों ने होटल के अंदर तोड़फोड़ भी की और बीच बचाव करने पहुंचे कर्मचारियों के साथ मारपीट की। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरों में साफ दिखाई दे रही है जिसमें हथियार लेकर होटल में घुसते और हमला करते बदमाश नजर आ रहे हैं। पीड़ित पक्ष ने यह फुटेज पुलिस को सौंप दी है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद मिसरोद थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और घायलों के बयान दर्ज किए। थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार ने बताया कि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज और पीड़ितों के बयान के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा। फिलहाल पुलिस हमले के पीछे की वजह और शामिल सभी आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।

  • हॉस्टल कारोबार की रंजिश ने लिया हिंसक रूप, आठ युवकों ने बरसाए पत्थर, पुलिस जांच में जुटी

    हॉस्टल कारोबार की रंजिश ने लिया हिंसक रूप, आठ युवकों ने बरसाए पत्थर, पुलिस जांच में जुटी


    भोपाल । राजधानी भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र स्थित पटेल नगर में शुक्रवार देर रात एक हॉस्टल पर हुए पथराव से इलाके में हड़कंप मच गया। करीब आठ युवकों ने अचानक हॉस्टल पर पत्थर बरसाकर दहशत फैला दी। पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू करते हुए कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस ने शांति भंग की आशंका के आधार पर कुछ लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की हैभोपाल ।

    हॉस्टल संचालक दुर्गेश तिवारी और शिवम सिंह ने आरोप लगाया है कि यह हमला कारोबारी रंजिश के चलते कराया गया। उनका कहना है कि क्षेत्र में हॉस्टल संचालन को लेकर प्रतिस्पर्धा है और दूसरे हॉस्टल संचालक पुष्पराज यादव उनके व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने अपने साथियों के जरिए हॉस्टल पर हमला करवाया। हालांकि पुलिस ने फिलहाल इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्रवार रात कुछ युवक अचानक हॉस्टल के बाहर पहुंचे और बिना किसी विवाद के पथराव शुरू कर दिया। कुछ मिनट तक लगातार पत्थर फेंके गए जिससे हॉस्टल परिसर में अफरा तफरी मच गई। घटना में भवन की खिड़कियों और अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

    घटना की सबसे अहम कड़ी सीसीटीवी फुटेज बनी है जिसमें कथित आरोपी पत्थर फेंकते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अब इन फुटेज के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान करने और उनकी भूमिका तय करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

    पिपलानी थाना पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। फरियादियों के विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों का भी परीक्षण किया जा रहा है। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने घटना के बाद कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इनमें से कुछ लोगों के खिलाफ शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका को देखते हुए प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय के माध्यम से जेल भेजा गया है। वहीं पुलिस का कहना है कि यदि जांच में पथराव और साजिश के आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।

  • दोस्ती के नाम पर बुलाया, फिर बीच रास्ते लूट ली कार, भोपाल में युवक के साथ वारदात से सनसनी

    दोस्ती के नाम पर बुलाया, फिर बीच रास्ते लूट ली कार, भोपाल में युवक के साथ वारदात से सनसनी


    भोपाल । राजधानी भोपाल में दोस्ती के भरोसे बुलाए गए एक युवक के साथ लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। कोहेफिजा थाना क्षेत्र में परिचित युवकों ने पहले युवक को देर रात ढाबे पर बुलाया और फिर लौटते समय सुनसान इलाके में उसके साथ मारपीट कर कार लूटकर फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ लूट का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और दो संदिग्धों से पूछताछ भी की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार पंचवटी कॉलोनी निवासी 27 वर्षीय सौरव सीतलानी को उसके परिचित आदित्य ने गुरुवार देर रात परवलिया स्थित एक ढाबे पर भोजन करने के लिए बुलाया था। वहां पहले से आदित्य के साथ बाबर उर्फ मंडी मोइन और बुशरा मौजूद थे। सभी ने साथ बैठकर खाना खाया और इसके बाद तड़के करीब तीन बजे सौरव अपनी टाटा टियागो कार से सभी को लेकर भोपाल की ओर रवाना हुआ।

    जब कार मनुआभान टेकरी के पास पहुंची तो आदित्य ने अपने एक दोस्त से मिलने की बात कहकर वाहन रुकवाया। जैसे ही कार रुकी माहौल अचानक बदल गया। आरोप है कि चारों युवकों ने सौरव के साथ गाली गलौज शुरू कर दी और देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। इसी दौरान बाबर उर्फ मंडी ने सौरव को थप्पड़ मारकर कार की चाबी छीन ली और उसे धक्का देकर वाहन से नीचे उतार दिया। इसके बाद सभी आरोपी कार लेकर मौके से फरार हो गए और पीड़ित सड़क पर ही छूट गया।

    घटना के बाद सौरव ने तुरंत पुलिस से संपर्क कर पूरी जानकारी दी। शिकायत के आधार पर कोहेफिजा थाना पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ लूट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुख्य आरोपी बाबर उर्फ मंडी के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और उसका आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।

    पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। साथ ही आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। शुरुआती जांच में दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है जबकि फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

    पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लूटी गई कार बरामद करने का प्रयास किया जाएगा। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है ताकि वारदात के पीछे की पूरी साजिश का खुलासा किया जा सके।