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  • भोपाल में दर्दनाक सड़क हादसा: आयशर की टक्कर से पेट्रोल पंप कर्मचारी की मौत, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

    भोपाल में दर्दनाक सड़क हादसा: आयशर की टक्कर से पेट्रोल पंप कर्मचारी की मौत, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया


    भोपाल । राजधानी भोपाल के खजूरी थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नाइट ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहे एक पेट्रोल पंप कर्मचारी की आयशर वाहन की टक्कर से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान 30 वर्षीय नितेश यादव पुत्र अशोक यादव निवासी आमना खेड़ी के रूप में हुई है। नितेश भैंसा खेड़ी स्थित एक पेट्रोल पंप पर सेल्समैन के पद पर कार्यरत था। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात वह अपनी नियमित ड्यूटी पर था। ड्यूटी समाप्त होने के बाद वह सुबह बाइक से अपने घर लौट रहा था।

    सुबह करीब 10:15 बजे जब नितेश खजूरी सड़क क्षेत्र के पास एक मोड़ से गुजर रहा था, तभी सामने से आ रहे एक आयशर वाहन ने उसकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि नितेश गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दुर्घटना के बाद आयशर चालक वाहन लेकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। इसके बाद चालक को पुलिस के हवाले कर दिया गया। सूचना मिलते ही खजूरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर थाने में खड़ा कर लिया है।

    प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    नितेश यादव की निजी जिंदगी भी जिम्मेदारियों से भरी हुई थी। करीब छह वर्ष पहले उसकी शादी हुई थी और वह दो बच्चों का पिता था। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से उसी के कंधों पर थी। उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पोस्टमॉर्टम के बाद गुरुवार दोपहर शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

    अस्पताल की मर्चुरी के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के सदस्य और रिश्तेदार इस हादसे को लेकर स्तब्ध हैं। मोहल्ले और परिचितों में भी घटना को लेकर शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाह ड्राइविंग के गंभीर खतरे की याद दिलाता है। एक पल की असावधानी ने न केवल एक युवक की जान ले ली, बल्कि उसके परिवार को जीवनभर का दुख दे दिया।

  • मनुआभान टेकरी कांड में बड़ा फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को उम्रकैद, डीएनए साक्ष्यों ने दिलाई सजा

    मनुआभान टेकरी कांड में बड़ा फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को उम्रकैद, डीएनए साक्ष्यों ने दिलाई सजा


    भोपाल । भोपाल के बहुचर्चित मनुआभान टेकरी दुष्कर्म एवं हत्या कांड में आखिरकार न्यायालय का बड़ा फैसला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने मामले के दोनों आरोपियों अविनाश साहू और जस्टिन राज को दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 8-8 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। इस फैसले के साथ वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले का महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय समाप्त हुआ है।

    यह मामला वर्ष 2019 में सामने आया था और उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था। घटना 30 अप्रैल 2019 की है, जब आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा अपनी 16 वर्षीय बुआ और उसके मित्र अविनाश साहू के साथ मनुआभान टेकरी घूमने गई थी। आरोप है कि टेकरी पर दोनों आरोपियों ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और फिर पहचान छिपाने के उद्देश्य से पत्थर से उसका सिर कुचलकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शव को लगभग 100 फीट गहरी खाई में स्थित एक गुफा में छिपा दिया था ताकि किसी को घटना की जानकारी न मिल सके।

    घटना के बाद आरोपी खुद को निर्दोष साबित करने के लिए छात्रा की तलाश का नाटक करते रहे। जब बालिका के लापता होने की सूचना पुलिस को मिली तो कोहेफिजा थाना पुलिस ने पूरी रात सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन शुरुआत में कोई सफलता नहीं मिली। जांच के दौरान पुलिस को अविनाश साहू के बयानों में लगातार विरोधाभास दिखाई दिया। संदेह गहराने पर पुलिस ने उससे गहन पूछताछ की, जिसके बाद उसने पूरी वारदात कबूल कर ली। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने खाई में छिपाया गया छात्रा का शव बरामद किया।

    जांच के दौरान पुलिस ने डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को एकत्रित किया। पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म, हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की सिफारिश भी की थी।

    हालांकि बाद में सीबीआई ने पुलिस की डीएनए रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दोनों आरोपियों को क्लीन चिट देने का प्रयास किया और अदालत में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। लेकिन अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और उससे विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद मामले का ट्रायल जारी रहा और उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान तथा वैज्ञानिक जांच रिपोर्टों का गहन परीक्षण किया गया।

    लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा है। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों की संलिप्तता को स्पष्ट रूप से साबित करते हैं। इसी आधार पर दोनों दोषियों को कठोर सजा सुनाई गई।

    यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों में वैज्ञानिक साक्ष्य और सतत न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सकता है। प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल इस प्रकरण में आया फैसला न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों के विश्वास को भी मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

  • मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी

    मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी


    भोपाल  मानसून की आमद से पहले राजधानी भोपाल में तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने आने लगी है। शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल एमपी नगर में एक साल पहले धंसी सड़क आज भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि थोड़ी सी बारिश होते ही सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है और हजारों वाहन चालकों व राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय भी नहीं हुआ है।

    एमपी नगर स्थित बोर्ड ऑफिस चौराहे और एमपी नगर चौराहे के बीच की सड़क 17 जुलाई 2025 को अचानक धंस गई थी। जांच में सामने आया था कि यह सड़क एक पुराने नाले के ऊपर बनी हुई थी। शुरुआती स्तर पर सड़क की मरम्मत की गई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद आसपास का हिस्सा भी कमजोर पड़ने लगा और फिर सड़क के दूसरे हिस्से में भी धंसाव की आशंका पैदा हो गई। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने स्थायी समाधान के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू करने का निर्णय लिया।

    बताया जाता है कि जिस नाले के ऊपर सड़क बनी हुई है, वह लगभग 50 साल पुराना है। इसे मजबूत बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने रेलवे अंडरपास की तर्ज पर प्री-कास्ट तकनीक से नया स्ट्रक्चर तैयार करने की योजना बनाई। हालांकि यह परियोजना शुरुआत से ही बाधाओं में घिरी रही। दो बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी एजेंसी ने काम में रुचि नहीं दिखाई। दोनों बार टेंडर निरस्त करने पड़े। तीसरी बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सका।

    पिछले चार महीनों से चल रहे इस काम ने क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। ज्योति टॉकीज चौराहे से बोर्ड ऑफिस चौराहे तक आने-जाने वाले लोगों को रोज लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। सड़क की एक लेन बंद होने के कारण ट्रैफिक का दबाव दूसरी सड़कों पर बढ़ गया है। चेतक ब्रिज से आने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।

    स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब बारिश होती है। हाल ही में हुई बारिश के दौरान निर्माणाधीन क्षेत्र में इतना पानी भर गया कि पैदल चलना मुश्किल हो गया। सड़क पर घुटनों तक पानी जमा हो गया और वाहन रेंगते हुए निकलते दिखाई दिए। कई कारें पानी में फंस गईं और लोगों को घंटों जाम तथा अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।

    चिंता की बात यह है कि जिस नई तकनीक के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान खोजा जा रहा था, उसके बावजूद जलभराव की समस्या बरकरार दिखाई दे रही है। सड़क की जिस लेन का निर्माण कार्य पूरा बताया जा रहा है, वहां भी पानी भरने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे परियोजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

    एमपी नगर जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र में रोजाना लाखों लोगों की आवाजाही होती है। अनुमान है कि करीब पांच लाख लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में सड़क निर्माण की धीमी गति और जलनिकासी व्यवस्था की खामियां नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी हैं। मानसून शुरू होने से पहले यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

  • भोपाल में इंजीनियरिंग की बड़ी चूक! फुटपाथ को ही रेलिंग लगाकर किया बंद, पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    भोपाल में इंजीनियरिंग की बड़ी चूक! फुटपाथ को ही रेलिंग लगाकर किया बंद, पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी


    भोपाल भोपाल में एक बार फिर खराब इंजीनियरिंग और बिना जमीनी हकीकत को समझे किए गए विकास कार्यों का मामला सामने आया है। शहर के ऐशबाग क्षेत्र में 90 डिग्री ब्रिज के बाद वार्ड क्रमांक 32 में बनाए गए फुटपाथ को इस तरह रेलिंग से घेर दिया गया है कि अब वह पैदल यात्रियों की सुविधा के बजाय उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है। जिस फुटपाथ का निर्माण लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, वह अब किसी बंद पिंजरे जैसा दिखाई दे रहा है।

    सड़क किनारे किए गए सौंदर्यीकरण कार्य के तहत लगभग तीन फीट ऊंची लोहे की जाली लगाई गई है। इस रेलिंग के कारण राहगीरों का सीधे फुटपाथ पर पहुंचना मुश्किल हो गया है। कुछ चुनिंदा स्थानों पर प्रवेश और निकास के लिए कट पॉइंट बनाए गए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश स्थानों पर ठेला संचालकों और अन्य अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है। परिणामस्वरूप पैदल चलने वाले लोगों को फुटपाथ का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

    कई स्थानों पर स्थिति और भी विचित्र है। फुटपाथ के एक ओर तीन फीट ऊंची लोहे की रेलिंग है, जबकि दूसरी ओर पहले से बनी पक्की दीवार मौजूद है। ऐसे में पैदल यात्री बीच में फंसकर रह जाते हैं और उन्हें सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है, जिसने मूल उद्देश्य को ही समाप्त कर दिया है।

    क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया है कि जब कोई भी सार्वजनिक परियोजना नागरिकों की सुविधा के लिए बनाई जाती है, तो उसकी डिजाइन और उपयोगिता का आकलन किए बिना मंजूरी कैसे दी जाती है। लोगों का कहना है कि बस या सार्वजनिक परिवहन से उतरने वाले यात्री सीधे फुटपाथ तक नहीं पहुंच सकते। इससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है। नागरिकों ने इसे सरकारी धन की बर्बादी और योजना निर्माण में गंभीर लापरवाही करार दिया है।

    मामले के सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया है। निगम के कार्यपालन यंत्री (ईई) एन.के. डेहरिया ने बताया कि संबंधित इंजीनियर से जानकारी मांगी गई है कि यह कार्य किस मद और किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि फुटपाथ के उपयोग में लोगों को दिक्कत हो रही है तो आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने स्वयं स्थल निरीक्षण करने की बात भी कही है।

    वहीं वार्ड की पार्षद आरती अनेजा का कहना है कि क्षेत्र में अतिक्रमण और शराबियों के जमावड़े की समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। ठेकेदार ने आश्वासन दिया था कि रेलिंग लगाने के बावजूद लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी, लेकिन मौके पर पहुंचकर देखने पर स्थिति अलग मिली। पार्षद ने स्पष्ट किया कि यदि वर्तमान डिजाइन लोगों के लिए असुविधाजनक है तो इसमें बदलाव कराया जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि विकास कार्यों में तकनीकी योजना और जमीनी जरूरतों के बीच तालमेल कितना जरूरी है। यदि परियोजनाएं नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के बजाय मुश्किलें खड़ी करने लगें, तो उनकी उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

  • राख’ में भोपाल के प्रसन्न सोनी का दमदार अभिनय, जटिल किरदार ने खींचा ध्यान

    राख’ में भोपाल के प्रसन्न सोनी का दमदार अभिनय, जटिल किरदार ने खींचा ध्यान


    नई दिल्ली अमेजन प्राइम वीडियो की नई क्राइम-थ्रिलर वेब सीरीज ‘राख’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। वर्ष 1978 की पृष्ठभूमि पर आधारित इस सीरीज में एक पुराने अपराध और उससे जुड़े रहस्यों की परतें धीरे-धीरे खोली जाती हैं। इस सीरीज में बॉलीवुड अभिनेता अली फज़ल मुख्य भूमिका में नजर आते हैं, जबकि सोनाली बेंद्रे, आमिर बशीर और राकेश बेदी जैसे अनुभवी कलाकार भी अहम किरदार निभा रहे हैं। इसी मजबूत स्टारकास्ट के बीच भोपाल के युवा रंगकर्मी प्रसन्न सोनी ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
    ‘धनीराम’ का चुनौतीपूर्ण किरदार और गहरी मनोस्थिति

    प्रसन्न सोनी ने इस सीरीज में ‘धनीराम’ का किरदार निभाया है, जो कई परतों वाला और मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद जटिल है। यह किरदार अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर समाज के सामने सामान्य जीवन जीता है और भीतर ही भीतर संघर्षों से जूझता रहता है।  धनीराम समलैंगिक है, लेकिन सामाजिक दबावों के चलते वह अपनी सच्चाई छिपाकर पत्नी के साथ एक पारंपरिक वैवाहिक जीवन भी जीता है। इस दोहरे जीवन को पर्दे पर उतारना प्रसन्न के लिए एक बड़ी अभिनय चुनौती थी। सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि इस सीरीज में धनीराम की पत्नी का किरदार प्रसन्न की वास्तविक जीवन पत्नी भारती ने निभाया है। भारती, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से प्रशिक्षित अभिनेत्री हैं और पहले भी फिल्मों व रंगमंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं।

    अली फज़ल के साथ काम और अभिनय का अनुभव

    प्रसन्न सोनी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में उन्हें अली फज़ल जैसे बड़े कलाकार के साथ स्क्रीन साझा करने का मौका मिला, जो उनके लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि ‘धनीराम’ जैसे किरदार को निभाने के लिए भावनात्मक गहराई और मानसिक स्तर पर तैयारी बेहद जरूरी थी।

    राष्ट्रीय सम्मान की ओर बढ़ता सफर

    हाल ही में प्रसन्न सोनी को वर्ष 2024 के लिए प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह सम्मान संगीत नाटक अकादमी द्वारा देशभर के युवा कलाकारों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। इसके अलावा भोपाल के तबला वादक रामेंद्र सिंह सोलंकी को भी इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है, जिससे मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत हुई है।

    रंगमंच से वेब सीरीज तक का सफर

    प्रसन्न सोनी लंबे समय से रंगमंच से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अभिनय, लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में लगातार काम करते हुए सामाजिक विषयों और मानवीय संवेदनाओं को मंच पर जीवंत किया है। उनकी यही निरंतर साधना उन्हें राष्ट्रीय पहचान तक लेकर आई है। ‘राख’ में मिला यह किरदार उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो रहा है, जो उन्हें आने वाले समय में और बड़े प्रोजेक्ट्स की ओर ले जा सकता है।

  • सीएम मोहन यादव का पूर्व पीएम पर तंज, बोले- अर्थशास्त्री भी नहीं समझ पाए जीरो बैलेंस खाते की ताकत; महू में बनेगा साइबर रिसर्च सेंटर

    सीएम मोहन यादव का पूर्व पीएम पर तंज, बोले- अर्थशास्त्री भी नहीं समझ पाए जीरो बैलेंस खाते की ताकत; महू में बनेगा साइबर रिसर्च सेंटर

    मध्यप्रदेश । भोपाल में आयोजित साइबर सिक्योरिटी और स्टेट डाटा सिक्योरिटी पर राज्य स्तरीय कंसल्टेटिव वर्कशॉप के दौरान मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने साइबर सुरक्षा को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh का नाम लिए बिना उन पर परोक्ष टिप्पणी भी की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहले ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्हें अर्थशास्त्र का बड़ा जानकार माना जाता था, लेकिन जीरो बैलेंस खाते की उपयोगिता और उसके व्यापक सामाजिक प्रभाव को वे भी नहीं समझ पाए थे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खुलवाकर वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी। साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डाटा सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पहले सीमाओं की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता मानी जाती थी, लेकिन डिजिटल युग में नागरिकों का डाटा और ऑनलाइन लेनदेन भी उतने ही संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों द्वारा लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में ठगी जा रही है, जो बेहद गंभीर विषय है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महू में अत्याधुनिक स्टेट डाटा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। यह केंद्र राज्य सरकार और Military College of Telecommunication Engineering के सहयोग से विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में शोध और विशेषज्ञता विकसित करना समय की आवश्यकता है।

    उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा केवल चर्चा का विषय नहीं बल्कि जवाबदेही का मामला है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित विभागों को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के डाटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

    कार्यशाला में एडीजी इंटेलिजेंस साई मनोहर ने साइबर अपराधों से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले 14 वर्षों में साइबर अपराधों में 77 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में हर वर्ष हजारों साइबर शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि साइबर हेल्पलाइन की क्षमता बढ़ाए जाने के बाद अब तक जनता के 137 करोड़ रुपए साइबर ठगी से बचाए जा चुके हैं।

    उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, बैंकिंग फ्रॉड और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साइबर अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या सेना का अधिकारी बताकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

    साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। हालांकि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरकारी सेवा या डाटा सिस्टम पर साइबर हमला होता है तो उसका सीधा असर आम जनता और शासन की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

    कार्यशाला में देशभर के साइबर विशेषज्ञों, रक्षा संस्थानों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। उनके सुझावों के आधार पर राज्य में साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी।

  • मां के सामने छोटे तालाब में डूबा 15 वर्षीय किशोर, अस्पताल में इलाज के दौरान मौत

    मां के सामने छोटे तालाब में डूबा 15 वर्षीय किशोर, अस्पताल में इलाज के दौरान मौत


    मध्यप्रदेश । भोपाल के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसे में 15 वर्षीय किशोर की जान चली गई। छोटे तालाब में नहाने के दौरान गहरे पानी में चले जाने से किशोर डूब गया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान 15 वर्षीय अनस कुरैशी के रूप में हुई है, जो जहांगीराबाद क्षेत्र स्थित बड़ी वाली मस्जिद इलाके का निवासी था। बताया जा रहा है कि अनस मुखबधिर था। शनिवार शाम उसने अपनी मां से पार्क घूमने की इच्छा जताई थी। इसके बाद उसकी मां उसे लिली टॉकीज के पास स्थित पार्क लेकर पहुंची।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पार्क पहुंचने के बाद मां वहीं बैठी रही, जबकि अनस छोटे तालाब के किनारे पानी में उतर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह नहाने के दौरान धीरे-धीरे गहरे हिस्से की ओर चला गया। कुछ ही देर बाद वह पानी में डूबने लगा। बेटे को संकट में देखकर मां ने मदद के लिए आवाज लगाई।

    मां की पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और किशोर को पानी से बाहर निकाला। स्थानीय लोगों की मदद से उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। परिजनों को उम्मीद थी कि समय रहते इलाज मिलने से उसकी जान बच जाएगी, लेकिन डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद देर रात उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

    घटना की सूचना मिलते ही जहांगीराबाद थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि किशोर अपनी मां के साथ पार्क आया था और नहाते समय हादसे का शिकार हो गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है तथा मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    हादसे के बाद परिवार और मोहल्ले में शोक की लहर है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अनस मिलनसार स्वभाव का था और इलाके में सभी उसे जानते थे। उसकी असमय मौत से पूरे क्षेत्र में दुख का माहौल है।

    इस घटना ने एक बार फिर जलाशयों और तालाबों के आसपास सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा बैरिकेड्स और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके। फिलहाल पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।

  • भोपाल में महिला की संदिग्ध मौत से सनसनी: पिता ने पति पर लगाया हत्या का आरोप, पुलिस जांच में जुटी

    भोपाल में महिला की संदिग्ध मौत से सनसनी: पिता ने पति पर लगाया हत्या का आरोप, पुलिस जांच में जुटी


    मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल के कोलार थाना क्षेत्र स्थित बंजारा बस्ती में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने इलाके में सनसनी फैला दी है। मृतका के परिजनों ने महिला के पति पर हत्या का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

    मृतका की पहचान 30 वर्षीय बबीता अहिरवार के रूप में हुई है। घटना गुरुवार रात की बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार रात करीब आठ बजे बबीता का सात वर्षीय बेटा समर्थ अपने नाना के घर पहुंचा और उसने परिवार को बताया कि उसकी मां के साथ कुछ अनहोनी हो गई है। बच्चे की सूचना मिलने के बाद परिवार के सदस्य तत्काल बबीता के घर पहुंचे, जहां वह जमीन पर पड़ी हुई मिली।

    मृतका के पिता हरनाम सिंह का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या की गई है। उनका कहना है कि जब वे मौके पर पहुंचे तो बबीता की चूड़ियां टूटी हुई थीं और उसके शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे। परिजनों का दावा है कि गले पर भी ऐसे निशान थे जो किसी प्रकार के दबाव या संघर्ष की ओर संकेत करते हैं। इसी आधार पर उन्होंने बबीता के पति सुनील अहिरवार पर गला दबाकर हत्या करने का आरोप लगाया है।

    परिजनों के मुताबिक सुनील अहिरवार वेल्डिंग का काम करता है और उसे शराब पीने की आदत है। परिवार का आरोप है कि वह अक्सर नशे की हालत में घर लौटता था, जिससे पति-पत्नी के बीच विवाद होता रहता था। घटना वाली रात भी दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी होने की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस अभी इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।

    जानकारी के अनुसार बबीता और सुनील की शादी करीब नौ वर्ष पहले हुई थी। उनके दो बच्चे हैं, जिनमें सात वर्षीय बेटा और चार वर्षीय बेटी शामिल हैं। बबीता गृहिणी थी और परिवार की देखभाल करती थी। उसकी अचानक हुई मौत के बाद बच्चों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जिसके बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

    कोलार थाना प्रभारी ने बताया कि महिला की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के निष्कर्ष इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

    जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना के समय घर के भीतर वास्तव में क्या हुआ था। चूंकि उस समय बच्चे भी घर में मौजूद थे, इसलिए उनके बयान भी जांच के लिए अहम माने जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों सहित सभी संभावित पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।

  • भोपाल में टैक्सी ड्राइवरों का अनोखा प्रदर्शन: कटोरा लेकर मांगी भीख, बोले- ओला-उबर की नीतियों ने बदहाल किया

    भोपाल में टैक्सी ड्राइवरों का अनोखा प्रदर्शन: कटोरा लेकर मांगी भीख, बोले- ओला-उबर की नीतियों ने बदहाल किया


    मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल में शुक्रवार को ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं से जुड़े ड्राइवरों का एक अनोखा और भावनात्मक प्रदर्शन देखने को मिला। भोपाल टैक्सी चालक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में ड्राइवर बोर्ड ऑफिस चौराहे पर एकत्र हुए और अपनी आर्थिक परेशानियों को उजागर करने के लिए फटे कपड़े पहनकर तथा हाथों में कटोरा लेकर प्रतीकात्मक भीख मांगते नजर आए। प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार, प्रशासन और टैक्सी सेवा संचालित करने वाली कंपनियों का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना था।

    प्रदर्शन के दौरान ड्राइवरों ने ओला, उबर और रेपिडो जैसी ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप था कि कंपनियों की मौजूदा नीतियों और कम किराया दरों ने उन्हें आर्थिक संकट में धकेल दिया है। कई ड्राइवरों ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और वाहन रखरखाव के खर्चों के बीच उन्हें मिलने वाला किराया बेहद कम है, जिससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

    प्रदर्शन में शामिल एक चालक ने भावुक होकर कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वे अपने लिए नए कपड़े तक नहीं खरीद पा रहे हैं। उनका कहना था कि किराए की दरें इतनी कम हैं कि वाहन चलाने के बाद भी पर्याप्त आय नहीं हो पाती। ऐसे में परिवार का भरण-पोषण और वाहन की किस्तों का भुगतान एक साथ करना कठिन हो गया है।

    भोपाल टैक्सी चालक संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष श्रवण कुमार शर्मा ने दावा किया कि वर्तमान समय में ड्राइवरों को औसतन करीब नौ रुपये प्रति किलोमीटर की दर से किराया मिल रहा है, जबकि डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के कारण वाहन संचालन का खर्च लगभग ग्यारह रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच गया है। उनके अनुसार, इस अंतर के कारण ड्राइवरों को प्रतिदिन आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग और आरटीओ द्वारा निर्धारित किराया दरों का पालन कंपनियां नहीं कर रही हैं। उनका कहना है कि जब इन कंपनियों ने भोपाल में अपनी सेवाएं शुरू की थीं, तब निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों का पालन किया जाता था, लेकिन समय के साथ कंपनियों ने अपने स्तर पर किराया संरचना में बदलाव करना शुरू कर दिया। इसके चलते ड्राइवरों की आमदनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उनका आरोप है कि हर बार केवल आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

    टैक्सी चालक संघ ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांग सरकार द्वारा निर्धारित किराया दरों को सख्ती से लागू कराना है। संघ का कहना है कि यदि कंपनियां निर्धारित मानकों के अनुरूप भुगतान करें तो ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

    प्रदर्शन के अंत में संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि बढ़ती लागत और घटती आय के बीच टैक्सी चालकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उनका मानना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो भोपाल में टैक्सी और ऑटो सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।

  • श्रीलंका दौरे के लिए घोषित हुई जूनियर टीम इंडिया, विकेटकीपर-बल्लेबाज अन्वय द्रविड़ को मिली जगह

    श्रीलंका दौरे के लिए घोषित हुई जूनियर टीम इंडिया, विकेटकीपर-बल्लेबाज अन्वय द्रविड़ को मिली जगह

    नई दिल्ली ।  भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ‘द वॉल’ के नाम से मशहूर पूर्व महान कप्तान राहुल द्रविड़ के परिवार से एक और प्रतिभावान खिलाड़ी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी दस्तक दे दी है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की जूनियर चयन समिति ने अगले महीने से शुरू होने वाले श्रीलंका दौरे के लिए भारत की पुरुष अंडर-19 टीम का आधिकारिक तौर पर एलान कर दिया है। इस घोषित टीम में राहुल द्रविड़ के छोटे बेटे अन्वय द्रविड़ को पहली बार भारतीय अंडर-19 वनडे टीम में शामिल किया गया है। 17 वर्षीय युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज को घरेलू क्रिकेट के आयु वर्ग में लगातार बेहतरीन खेल दिखाने का यह सबसे बड़ा पुरस्कार मिला है।

    शरत श्रीधरन की अगुवाई वाली जूनियर राष्ट्रीय चयन समिति ने श्रीलंका के खिलाफ होने वाली तीन वनडे मैचों की सीरीज और दो मल्टी-डे मुकाबलों के लिए दो अलग-अलग टीमों का चयन किया है। आगामी दौरा 4 जुलाई 2026 से श्रीलंका के हंबनटोटा मैदान पर शुरू होने जा रहा है। मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ से जुड़े होनहार खिलाड़ी यशवर्धन सिंह चौहान को चयनकर्ताओं ने इस महत्वपूर्ण दौरे के लिए वनडे टीम की कप्तानी सौंपकर उन पर बड़ा भरोसा जताया है, जबकि लक्ष्य रायचंदानी को टीम का उपकप्तान नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरें इस दौरे के माध्यम से युवा खिलाड़ियों की क्षमता को परखने पर टिकी हैं।

    अन्वय द्रविड़ को मुख्य रूप से 15 सदस्यीय वनडे टीम में बतौर विकेटकीपर-बल्लेबाज शामिल किया गया है, जहां उनके साथ रजत बघेल दूसरे विकेटकीपर के विकल्प के रूप में मौजूद रहेंगे। अन्वय के बड़े भाई समित द्रविड़ भी कर्नाटक की अंडर-19 टीम की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेल चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर जूनियर टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनने का मौका पाने वाले अन्वय अपने परिवार के पहले युवा सदस्य बन गए हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी रूप से सक्षम इस युवा खिलाड़ी में अपने पिता की तरह लंबी और धैर्यपूर्ण पारियां खेलने की अद्भुत क्षमता मौजूद है।

    घरेलू स्तर पर अन्वय द्रविड़ के हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो वे लगातार चयनकर्ताओं के रडार पर बने हुए थे। हाल ही में आयोजित हुई वीनू मांकड़ ट्रॉफी में उन्होंने कर्नाटक अंडर-19 टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी संभालते हुए टीम को क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका अदा की थी। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की छह पारियों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 220 रन बनाए थे। टूर्नामेंट के दौरान हिमाचल प्रदेश के खिलाफ एक बेहद दबाव वाले मैच की दूसरी पारी में उन्होंने नाबाद 82 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली थी, जिसने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर मजबूती से आकर्षित किया था। इससे पूर्व वे अंडर-16 विजय मर्चेंट ट्रॉफी में भी शानदार शतक जमा चुके हैं।

    भारतीय क्रिकेट बोर्ड के राष्ट्रीय चयनकर्ता इस आगामी श्रीलंका दौरे को वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले अंडर-19 विश्व कप की तैयारियों के शुरुआती रोडमैप के रूप में देख रहे हैं। चूंकि अन्वय द्रविड़ की उम्र वर्तमान में केवल 17 वर्ष है, इसलिए वे दो साल बाद होने वाले अगले आईसीसी अंडर-19 विश्व कप में खेलने के लिए पूरी तरह पात्र रहेंगे। ऐसे में श्रीलंका की चुनौतीपूर्ण पिचों और उपमहाद्वीपीय परिस्थितियों में मिलने वाला यह अंतर्राष्ट्रीय अनुभव उनके क्रिकेट कौशल को और अधिक निखारने में बेहद गेम-चेंजर साबित हो सकता है। भारतीय जूनियर टीम जून के अंतिम सप्ताह में पड़ोसी देश श्रीलंका के लिए उड़ान भरेगी।

    प्रतियोगिता के तय कार्यक्रम के अनुसार, भारत और श्रीलंका के बीच पहला वनडे मैच 4 जुलाई को हंबनटोटा में खेला जाएगा, जिसके बाद दूसरा और तीसरा वनडे क्रमशः 6 और 9 जुलाई को इसी मैदान पर आयोजित होगा। सीमित ओवरों की यह सीरीज समाप्त होने के बाद दोनों देशों के बीच गॉल और कोलंबो के ऐतिहासिक मैदानों पर चार दिवसीय मल्टी-डे मैच खेले जाएंगे। भारतीय क्रिकेट के फैंस के साथ-साथ तमाम विश्लेषकों की निगाहें अब यशवर्धन सिंह चौहान की कप्तानी और विकेट के पीछे तथा आगे अन्वय द्रविड़ के प्रदर्शन पर टिकी रहने वाली हैं।