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  • भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या के बाद हंगामा, आरोपी को सौंपने की मांग पर तीन घंटे प्रदर्शन

    भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या के बाद हंगामा, आरोपी को सौंपने की मांग पर तीन घंटे प्रदर्शन

    मध्य प्रदेश । की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ इलाके में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले में शनिवार, 17 अक्टूबर को लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। घटना से नाराज लोगों ने बैरागढ़ थाने के बाहर करीब तीन घंटे तक प्रदर्शन किया और आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने थाने के गेट पर धक्का देकर अंदर घुसने की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।

    मामले में 23 वर्षीय आरोपी मोबिन को पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में उसके अपराध स्वीकार करने की बात सामने आई है। हालांकि, मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है।

    घटना 15 अक्टूबर की रात की है, जब बैरागढ़ इलाके में रहने वाली 12 वर्षीय बच्ची घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी तलाश की। अगले दिन, 16 अक्टूबर को बच्ची का शव कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित एक खंडहर में मिला। शव मिलने के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया और लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

    प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ यौन हिंसा और गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि होने की बात सामने आई है। घटनास्थल से जुड़े विवरण के अनुसार, बच्ची के मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था और उसके शरीर के निचले हिस्से पर कपड़े नहीं थे। उसके सामने के दो दांत भी टूटे हुए बताए गए हैं। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    शनिवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी को फांसी देने, उसके मकान पर बुलडोजर चलाने और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में कराने की मांग की। कुछ लोगों ने आरोपी को पुलिस के हवाले करने के बजाय उन्हें सौंपने की मांग भी की। पुलिस ने भीड़ को थाने में प्रवेश करने से रोकने के लिए मुख्य गेट बंद कर दिए।

    प्रदर्शन का असर भोपाल-सीहोर रोड पर भी पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर जाम लगा दिया, जिससे लगभग दो किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। इस दौरान यात्रियों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। थाने के सामने महिलाएं भी धरने पर बैठीं। पुलिस अधिकारियों ने लगातार लोगों को समझाने की कोशिश की और अतिरिक्त बल की मदद से स्थिति संभालने का प्रयास किया।

    मामले में सहायक पुलिस आयुक्त रत्नेश तोमर ने बताया कि पुलिस ने हत्या और बहला-फुसलाकर ले जाने सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। विस्तृत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कानूनी धाराएं जोड़ी जाएंगी।

    पुलिस के अनुसार, घटना के बाद से अधिकारी पीड़ित परिवार के संपर्क में हैं। प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया गया कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी और आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    करीब तीन घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए। इसके बाद परिजन बच्ची का शव अंतिम संस्कार के लिए घर ले गए। एहतियात के तौर पर इलाके में पुलिस बल तैनात रखा गया। घटना की जांच जारी है और विस्तृत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई स्पष्ट होगी।

  • राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा, भोपाल-बैतूल के 8 यात्रियों की मौत और 17 घायल

    राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा, भोपाल-बैतूल के 8 यात्रियों की मौत और 17 घायल

    नई दिल्ली ।राजस्थान के कोटा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर शनिवार सुबह हुए सड़क हादसे में मध्य प्रदेश के भोपाल और बैतूल के आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 यात्री घायल हो गए। यात्रियों से भरा टैंपो ट्रैवलर अनियंत्रित होकर पुलिया से करीब 15 फीट नीचे जा गिरा। वाहन में सवार लोग भोपाल से राजस्थान के खाटूश्यामजी मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बचाव दल को यात्रियों को बाहर निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

    यह दुर्घटना कोटा शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर सिमलिया थाना क्षेत्र में कराड़िया टोल के पास सुबह लगभग छह बजे हुई। हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे। सुबह के समय अंधेरा होने के कारण राहत और बचाव कार्य में कुछ देरी हुई। दुर्घटनाग्रस्त वाहन में कई यात्री फंस गए थे, जिन्हें बाहर निकालने के लिए बचाव दल को काफी प्रयास करना पड़ा।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, टैंपो ट्रैवलर के पुलिया से नीचे गिरने के बाद कई यात्री वाहन के भीतर ही फंस गए थे। कुछ मृतकों के शव सीटों के बीच फंसे हुए थे। उन्हें बाहर निकालने में कठिनाई हुई। वहीं, घायल यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए वाहन की खिड़कियां तोड़नी पड़ीं। हादसे में घायल 17 लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। दुर्घटना में जान गंवाने वालों में महिलाएं और युवा भी शामिल हैं।

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतकों में बैतूल जिले के मुलताई, साईंखेड़ा और पाटन क्षेत्र के निवासी शामिल हैं। इसके अलावा भोपाल के राजीव नगर और शहर के अन्य हिस्सों के लोगों की भी इस हादसे में मौत हुई है। एक ही यात्रा पर निकले लोगों के साथ हुए हादसे से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    दुर्घटना में जान गंवाने वालों की सूची में 25 वर्षीय वैष्णवी गावंडे, 22 वर्षीय त्रिशा गोडकी और 27 वर्षीय सचिन गिरी के नाम शामिल हैं। इनके अलावा 55 वर्षीय कृष्णाराव गोडके और 50 वर्षीय अनिता की भी मौत हुई है। मृतकों में अरुणा, 26 वर्षीय ओम सूर्यवंशी और राजुराम उर्फ राजकुमार भी शामिल हैं, जिनकी उम्र करीब 50 वर्ष बताई गई है।

    अरुणा मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र की निवासी थीं। वैष्णवी गावंडे बैतूल जिले के साईंखेड़ा थाना क्षेत्र के मीरापुर की रहने वाली थीं। त्रिशा गोडकी और कृष्णाराव गोडके का संबंध बैतूल जिले के पाटन क्षेत्र से था। अनिता भोपाल के राजीव नगर स्थित सेक्टर-ए की निवासी थीं, जबकि सचिन गिरी भोपाल के रहने वाले थे। ओम सूर्यवंशी बैतूल जिले के मुलताई थाना क्षेत्र के सरा गांव के निवासी थे। राजुराम उर्फ राजकुमार के पते की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है।

    हादसे में मृतकों की पहचान और उनके पते से संबंधित जानकारी पुलिस की ओर से साझा की गई है। मृतकों में अलग-अलग उम्र के लोगों के शामिल होने से इस दुर्घटना का असर कई परिवारों पर पड़ा है। भोपाल और बैतूल में रहने वाले परिजनों के लिए यह खबर गहरे दुख का कारण बनी है।

    फिलहाल दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि टैंपो ट्रैवलर किस वजह से अनियंत्रित हुआ और पुलिया से नीचे गिर गया। पुलिस हादसे से संबंधित जानकारी जुटा रही है। दुर्घटना में घायल यात्रियों का अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। हादसे के बाद राहत और बचाव दल ने वाहन में फंसे लोगों को निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम किया।

  • भोपाल के बैरागढ़ में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या, कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे खंडहर में मिला शव

    भोपाल के बैरागढ़ में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या, कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे खंडहर में मिला शव

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या का मामला सामने आया है। गुरुवार रात से लापता बच्ची का शव शुक्रवार को कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित एक खंडहरनुमा इमारत से बरामद किया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। बच्ची की मौत की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्ची गुरुवार रात करीब आठ बजे किसी काम से अपने घर से निकली थी। इसके बाद वह वापस नहीं लौटी। काफी समय बीतने के बावजूद जब परिजनों को बच्ची का कोई पता नहीं चला, तो उन्होंने अपने स्तर पर उसकी तलाश शुरू की। आसपास के इलाकों में खोजबीन करने के साथ रिश्तेदारों से भी संपर्क किया गया, लेकिन बच्ची के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

    परिजनों की ओर से तलाश किए जाने के बाद भी जब बच्ची का पता नहीं चला, तो वे देर रात बैरागढ़ थाने पहुंचे और उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद बच्ची की तलाश शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसकी तलाश के साथ उससे जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया।

    शुक्रवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे बने एक खंडहर में बच्ची का शव पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही बैरागढ़ थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। शव मिलने की जानकारी सामने आने के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया गया और मामले की जांच के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

    घटनास्थल पर एफएसएल की विशेष टीम को भी बुलाया गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने खंडहर और उसके आसपास के क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया। टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट समेत अन्य संभावित साक्ष्य एकत्र किए। इन साक्ष्यों की जांच से बच्ची की मौत से जुड़ी परिस्थितियों और घटना में शामिल व्यक्ति के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि घर से निकलने के बाद बच्ची कहां गई और कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित खंडहर तक कैसे पहुंची। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बच्ची के साथ कोई अन्य व्यक्ति था या नहीं। फिलहाल घटना से जुड़े इन पहलुओं पर जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।

    पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है। इसके साथ ही बच्ची के परिजनों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है, ताकि उसके घर से निकलने के बाद की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध साक्ष्यों और लोगों से मिलने वाली जानकारी को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

    बच्ची का शव खंडहर में मिलने के बाद इलाके में चिंता का माहौल है। पुलिस का प्रयास है कि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाया जाए कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस और एफएसएल की टीम मामले की जांच में जुटी हैं। बच्ची की मौत से जुड़े कारणों, घटनास्थल तक पहुंचने की परिस्थितियों और संभावित आरोपी की पहचान को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।

  • ट्विशा शर्मा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, भोपाल की अदालत में सुनवाई पर अंतरिम रोक

    ट्विशा शर्मा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, भोपाल की अदालत में सुनवाई पर अंतरिम रोक

    नई दिल्ली । पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने भोपाल की निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह याचिका ट्विशा के पिता की ओर से दायर की गई है।

    ट्विशा के पिता ने अपनी याचिका में मांग की है कि उनकी बेटी की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई भोपाल के बजाय दिल्ली में कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। साथ ही, याचिका पर आगे विचार किए जाने तक भोपाल की अदालत में चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई का स्थान बदलने को लेकर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

    ट्विशा शर्मा की मौत का मामला उनके परिवार की ओर से घटना पर सवाल उठाए जाने और निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने के बाद चर्चा में आया था। ट्विशा पूर्व मॉडल और अभिनेत्री थीं। उन्होंने मॉडलिंग के अलावा तेलुगु फिल्मों में भी काम किया था। बाद में उन्होंने एमबीए की पढ़ाई पूरी की और कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने लगीं।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्विशा की मुलाकात समर्थ सिंह से एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। दोनों की शादी दिसंबर 2025 में हुई थी। इसके बाद 12 मई को ट्विशा भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। उनकी मौत के बाद मायके पक्ष ने घटना की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की।

    ट्विशा के परिजनों ने उनके पति समर्थ सिंह और ससुराल के अन्य सदस्यों पर दहेज उत्पीड़न तथा मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। उनके पिता नवनिधि शर्मा ने दावा किया था कि शादी से पहले ही समर्थ का व्यवहार ठीक नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हनीमून के दौरान उनकी बेटी के साथ दुर्व्यवहार किया गया था। परिवार की ओर से समर्थ की मां और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह पर भी दहेज के लिए ट्विशा को परेशान करने का आरोप लगाया गया है।

    मामले में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, ट्विशा के सिर, कान और हाथ पर चोट के निशान पाए गए थे। रिपोर्ट में इन चोटों के मौत से पहले लगने की बात सामने आई थी। हालांकि, चोटों की परिस्थितियों और मौत से उनके संबंध को लेकर जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    इस मामले में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, जमानत याचिका में गिरिबाला सिंह की ओर से बहू के व्यवहार और कथित नशे की आदत को लेकर आरोप लगाए गए थे। आवेदन में दावा किया गया था कि ट्विशा को ड्रग्स की लत थी और नशा नहीं मिलने पर उनका व्यवहार असामान्य हो जाता था। ये दावे जमानत आवेदन में लगाए गए आरोप हैं, इन्हें अपने आप में न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

    ट्विशा के भाई हर्षित शर्मा ने भी परिवार की स्थिति को लेकर जानकारी दी थी। उनके मुताबिक, ट्विशा काफी परेशान थीं और उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए नोएडा लौटने की इच्छा जताई थी।
    अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस और भोपाल की अदालत में सुनवाई पर लगी अंतरिम रोक के बाद मामले की आगे की प्रक्रिया संबंधित पक्षों के जवाब पर निर्भर करेगी। दिल्ली में सुनवाई स्थानांतरित करने की मांग पर अंतिम फैसला आना बाकी है। इस बीच, ट्विशा की मौत से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार जारी रहेगा।

  • सोने और चांदी की कीमतों में लौटी तेजी, 24 कैरेट गोल्ड 1.47 लाख रुपये के पार, जानिए दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव

    सोने और चांदी की कीमतों में लौटी तेजी, 24 कैरेट गोल्ड 1.47 लाख रुपये के पार, जानिए दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव

    नई दिल्ली ।भारतीय सर्राफा बाजार में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। एक दिन पहले दोनों कीमती धातुओं के भाव में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन गुरुवार को बाजार में फिर बढ़त लौट आई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमत में करीब 1,420 रुपये प्रति 10 ग्राम तक का इजाफा हुआ। वहीं, चांदी का भाव भी लगभग 1,120 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गया।

    ताजा दरों के मुताबिक, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और जयपुर जैसे शहरों में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,35,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से ऊपर पहुंच गई। वहीं, 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,500 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक दर्ज किया गया। कीमतों में इस बढ़ोतरी के बाद सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अलग-अलग शहरों के भाव जानना महत्वपूर्ण हो गया है।

    राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,510 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। यहां 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,218 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। जयपुर और लखनऊ में भी दोनों श्रेणियों के सोने की कीमतें दिल्ली के समान रहीं। इन शहरों में 24 कैरेट गोल्ड 1,47,510 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,35,218 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,360 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,068 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। कोलकाता और बेंगलुरु में भी सोने की कीमतें मुंबई के समान रहीं। इन दोनों शहरों में 24 कैरेट सोना 1,47,360 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,35,068 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा।

    अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,410 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। यहां 22 कैरेट गोल्ड का भाव 1,35,118 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी सोने की कीमतें अहमदाबाद के समान रहीं। भोपाल में 24 कैरेट सोना 1,47,410 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,35,118 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी बढ़त दर्ज की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले दिन की तुलना में चांदी करीब 1,120 रुपये प्रति किलोग्राम महंगी हुई। इसके बाद अधिकांश शहरों में चांदी का भाव बढ़कर 2,09,460 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया।

    गुरुवार को दर्ज हुए भाव में दिल्ली और जयपुर में सोने की कीमत सबसे अधिक रही, जबकि मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में भाव अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया। अहमदाबाद और भोपाल में सोने की दरें इन दोनों समूहों के बीच रहीं। हालांकि, सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बदलाव के कारण खरीदारी से पहले संबंधित शहर का ताजा भाव जानना जरूरी है। यहां दिए गए आंकड़े 15 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध दरों पर आधारित हैं।

  • विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर भोपाल में जागरूकता अभियान, आरएनटीयू के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक से समझाए एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल के खतरे

    विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर भोपाल में जागरूकता अभियान, आरएनटीयू के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक से समझाए एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल के खतरे

    मध्य प्रदेश। की राजधानी भोपाल के चिकलोद गांव में एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक इस्तेमाल और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी की ओर से विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 और राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को दवाओं के जिम्मेदार उपयोग की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान स्टेशनरी सामग्री का वितरण भी किया गया।

    कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी की प्राचार्य डॉ. दुर्गा पांडेय के मार्गदर्शन में हुआ। इसका समन्वय राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गब्बर सिंह और डॉ. रेखा गुप्ता ने किया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को एंटीबायोटिक दवाओं के सही इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना और संक्रमणों के उपचार में सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी देना था।

    विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना’ रखी गई है। इसी उद्देश्य के अनुरूप कार्यक्रम में दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में फार्मासिस्टों की भूमिका पर जोर दिया गया। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को समझाया कि दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना जरूरी है और बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना नुकसानदायक हो सकता है।

    नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी रोगाणुरोधी प्रतिरोध के कारणों और संभावित दुष्परिणामों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक इस्तेमाल, बिना चिकित्सकीय परामर्श के इनका सेवन और उपचार संबंधी निर्देशों की अनदेखी इस समस्या को बढ़ा सकती है। ऐसी स्थिति में संक्रमणों का उपचार अधिक कठिन हो सकता है। कार्यक्रम में लोगों को इस चुनौती से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई।

    विद्यार्थियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक दवाएं न लें और चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही उनका उपयोग करें। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। दवाओं के इस्तेमाल में सावधानी बरतकर इस समस्या को नियंत्रित करने के प्रयासों में सहयोग किया जा सकता है।

    स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के साथ कार्यक्रम में सामाजिक उत्तरदायित्व को भी महत्व दिया गया। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को स्टेशनरी सामग्री वितरित की। इस गतिविधि के माध्यम से सामुदायिक सहयोग, सामाजिक संवेदनशीलता और जनसेवा के महत्व को सामने रखा गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी का उद्देश्य उन्हें सामाजिक जरूरतों से जोड़ना और जनहित से जुड़े कार्यों के प्रति प्रोत्साहित करना भी था।

    विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.पी. दुबे ने कहा कि जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी शिक्षा के महत्वपूर्ण अंग हैं। उनके अनुसार, इस तरह की पहल विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ती है और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करती है।

    विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी ने भी दवाओं के उचित उपयोग और एंटीबायोटिक के प्रति जागरूकता को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं और उन्हें जनहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं।

    यह कार्यक्रम फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया और मध्य प्रदेश राज्य फार्मेसी परिषद के जनस्वास्थ्य जागरूकता तथा फार्मासिस्टों की सामाजिक भूमिका से जुड़े उद्देश्यों के अनुरूप आयोजित किया गया। इसके माध्यम से जिम्मेदार दवा उपयोग, संक्रमणों की रोकथाम और समुदाय की सहभागिता का संदेश दिया गया।

  • भोपाल में आदिवासी छात्रों के ‘जय जोहार’ नारे पर कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल, मिसरोद थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने मांगी एफआईआर

    भोपाल में आदिवासी छात्रों के ‘जय जोहार’ नारे पर कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल, मिसरोद थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने मांगी एफआईआर


    मध्य प्रदेश। की राजधानी भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। छात्रों के ‘जय जोहार’ के नारे लगाने के दौरान मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर गाली-गलौज करने का आरोप लगा है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया। वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, आदिवासी छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भोपाल में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान वे मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि छात्रों को जबरन पुलिस वाहन में बैठाया गया। जब छात्र वाहन में बैठ रहे थे, तब वे ‘जय जोहार’ के नारे लगा रहे थे।

    इसी दौरान वाहन के बाहर मौजूद मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर छात्रों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और गालियां देने का आरोप लगा।घटनास्थल पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया और वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग के एडीसीपी अनिल कुमार शर्मा ने भी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें निरीक्षक रतन सिंह परिहार आदिवासी छात्रों के संबंध में टिप्पणी करते दिखाई दे रहे थे। वीडियो का संज्ञान लेने के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया। एडीसीपी के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।

    इस घटना पर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नाराजगी जताई है। उन्होंने आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार को गंभीर और निंदनीय बताते हुए संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। सिंघार का कहना है कि आदिवासी छात्रों का अपमान करने के आरोपों की जांच के साथ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।उन्होंने मांग उठाई कि मामले में कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इस तरह उन्होंने घटना को आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है।

    फिलहाल पुलिस ने थाना प्रभारी को निलंबित करने और मामले की जांच शुरू करने की जानकारी दी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि प्रदर्शन के समय वास्तव में क्या हुआ था और वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम में संबंधित अधिकारी की क्या भूमिका रही। मामले में एफआईआर दर्ज होने और जांच के अंतिम निष्कर्षों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

    भोपाल में आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सामने आया यह मामला अब पुलिस विभाग की कार्रवाई और एफआईआर की मांग को लेकर चर्चा में है। एक ओर थाना प्रभारी को निलंबित कर जांच शुरू की गई है, वहीं दूसरी ओर उमंग सिंघार ने कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
  • कोयंबतूर से भोपाल बाइक पर जा रहे 29 वर्षीय युवक की बैतूल में मौत, नेशनल हाईवे-47 पर अज्ञात भारी वाहन ने मारी टक्कर

    कोयंबतूर से भोपाल बाइक पर जा रहे 29 वर्षीय युवक की बैतूल में मौत, नेशनल हाईवे-47 पर अज्ञात भारी वाहन ने मारी टक्कर

    मध्य प्रदेश। के बैतूल जिले में नेशनल हाईवे-47 पर हुए सड़क हादसे में 29 वर्षीय एस. गौतम की मौत हो गई। वह तमिलनाडु के कोयंबतूर के रहने वाले थे और दुबई में नौकरी करते थे। गौतम बाइक से कोयंबतूर से भोपाल जा रहे थे। मंगलवार देर रात रास्ते में एक अज्ञात भारी वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।

    यह दुर्घटना बैतूल बाजार थाना क्षेत्र में झिटापटी यात्री प्रतीक्षालय के पास हुई। हादसे का समय रात करीब 2:30 से 3 बजे के बीच बताया गया है। टक्कर मारने वाले भारी वाहन की पहचान अभी नहीं हो सकी है। पुलिस वाहन और उसके चालक का पता लगाने में जुटी है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गौतम भोपाल में अपने किसी पारिवारिक मित्र से मिलने के लिए निकले थे। वह कोयंबतूर से भोपाल तक लगभग 1,800 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए बाइक से यात्रा कर रहे थे। बताया गया है कि फ्लाइट उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने सड़क मार्ग से जाने का फैसला किया था। हालांकि, दुर्घटना के समय तक वह कितनी देर से लगातार बाइक चला रहे थे, इस संबंध में जानकारी सामने नहीं आई है।

    हादसे की सूचना मिलने के बाद शव को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की एंबुलेंस से बैतूल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मर्चुरी में रखवा दिया गया। फिलहाल पोस्टमार्टम की प्रक्रिया परिवार के सदस्यों के आने के बाद पूरी की जाएगी।

    घटना के बाद भोपाल से गौतम के कुछ परिचित बैतूल पहुंचे। उनके परिवार के सदस्यों के पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। परिजनों के आने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    गौतम के पारिवारिक जीवन को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनके पिता का कुछ वर्ष पहले निधन हो गया था। परिवार में उनकी मां, भाई और भाभी हैं। उनका पालन-पोषण पारिवारिक संघर्षों और कई परेशानियों के बीच हुआ था। वह दुबई में नौकरी करते थे और भोपाल में एक पारिवारिक मित्र से मिलने जा रहे थे।

    बैतूल बाजार थाने के बीट प्रभारी रमन धुर्वे के मुताबिक, दुर्घटना के बाद शव को एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया गया था। फिलहाल पुलिस अज्ञात भारी वाहन की पहचान करने का प्रयास कर रही है। हादसे के कारणों और टक्कर मारने वाले वाहन के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

  • शराब दुकानों के ठेकों और लाइसेंस ट्रांसफर में गड़बड़ी, 2.75 करोड़ की ई-एफडीआर पर बैंक ने उठाए सवाल

    शराब दुकानों के ठेकों और लाइसेंस ट्रांसफर में गड़बड़ी, 2.75 करोड़ की ई-एफडीआर पर बैंक ने उठाए सवाल

    मध्य प्रदेश। में शराब दुकानों के ठेके और लाइसेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया में अनियमितताओं के मामले में आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा को निलंबित कर दिया गया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने 12 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। रायचूरा पर भोपाल में वर्ष 2024-25 के दौरान शराब दुकानों के ठेके आवंटित करने और लाइसेंस हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं करने के आरोप हैं। मामले की जांच के लिए गठित दो सदस्यीय टीम की रिपोर्ट में उनकी भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाई गई थी। इसके बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की।

    मामला 8 अक्टूबर को एक यूट्यूब चैनल पर प्रसारित खबर और 9 अक्टूबर को प्रकाशित समाचार के बाद सामने आया था। आरोपों की पड़ताल के लिए आबकारी विभाग ने दो सदस्यीय जांच दल बनाया। जांच में सात तरह की अनियमितताएं सामने आईं। इनमें 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की ई-एफडीआर, निर्धारित श्रेणी में शामिल नहीं होने वाले बैंक की प्रतिभूति स्वीकार करना, समय पर पूरी राशि जमा नहीं होना और लाइसेंस ट्रांसफर के दौरान निजी खाते की बैंक गारंटी तथा चेक स्वीकार करना शामिल है।

    जांच में सबसे गंभीर मामला AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की ई-एफडीआर से संबंधित पाया गया। रिकॉर्ड में 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की ई-एफडीआर और उसके सत्यापन की रिपोर्ट दर्ज थी। विभाग ने बैंक से इस दस्तावेज की पुष्टि कराई। बैंक ने 12 अक्टूबर को जारी पत्र में स्पष्ट किया कि संबंधित ई-एफडीआर उसके द्वारा जारी नहीं की गई थी। इससे दस्तावेज की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हुए। जांच में यह भी सामने आया कि एफडीआर के सत्यापन के लिए मई 2024 में विभाग की ओर से पत्र जारी किया गया था, लेकिन संबंधित अधिकारी तक पत्र पहुंचने का रिकॉर्ड नहीं मिला। बैंक को सत्यापन के लिए पत्र भेजे जाने का प्रमाण भी फाइल में उपलब्ध नहीं था। इसके बजाय लाइसेंसी जसवंत के ई-मेल से मिली सत्यापन रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई।

    जांच दल ने प्रतिभूति स्वीकार करने की प्रक्रिया में भी नियमों के उल्लंघन की बात कही। संबंधित प्रावधानों के अनुसार, केवल निर्धारित तीन श्रेणियों में आने वाले बैंकों की प्रतिभूतियां स्वीकार की जा सकती थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि AU स्मॉल फाइनेंस बैंक उस समय इन श्रेणियों में शामिल नहीं था, फिर भी उसकी एफडीआर स्वीकार की गई। ठेकेदार ने प्रतिभूति की आधी राशि 1 करोड़ 37 लाख 76 हजार 768 रुपये नकद जमा की थी। शेष आधी राशि 30 अप्रैल 2024 तक जमा होनी थी, लेकिन यह रकम 12 मई 2024 को जमा की गई। यानी निर्धारित समयसीमा से 22 दिन की देरी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस देरी पर नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय राशि स्वीकार कर ली गई।

    मेसर्स मां माइन्स के लाइसेंस ट्रांसफर में भी गड़बड़ियां सामने आईं। फर्म के लाइसेंस हस्तांतरण के लिए 10 जुलाई 2024 को आवेदन मिला था और भोपाल कलेक्टर ने 27 दिसंबर 2024 को आदेश जारी किया। जांच में पाया गया कि साझेदारी से जुड़े दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। एक समझौता पत्र में विजय सिंह को फर्म का साझेदार बताया गया था, जबकि आबकारी पोर्टल पर उपलब्ध पूरक दस्तावेजों में उन्हें साझेदार नहीं बताया गया। नियमों के अनुसार, ट्रांसफर लेने वाली फर्म को पूरी प्रतिभूति जमा करनी थी, लेकिन फर्म के बजाय विजय सिंह की ओर से 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय विजय सिंह का फर्म से कोई दर्ज संबंध नहीं था।

    जांच रिपोर्ट में फर्म के खाते के बजाय विजय सिंह के निजी बैंक खाते के पोस्ट-डेटेड चेक स्वीकार करने पर भी सवाल उठाए गए। विभागीय पत्राचार में कुछ व्यक्तियों को मां माइन्स का साझेदार या लाइसेंसी बताकर पत्र भेजे गए, जबकि उपलब्ध दस्तावेजों में उनके साझेदार होने की पुष्टि नहीं थी। एक मामले में लाइसेंस ट्रांसफर का आवेदन मिलने से पहले ही संबंधित व्यक्ति को हस्तांतरण से जुड़ा पत्र जारी किए जाने का उल्लेख भी किया गया।

    आदेश में इन अनियमितताओं को मध्य प्रदेश राजपत्र में निर्धारित नियमों और आबकारी आयुक्त के निर्देशों का उल्लंघन बताया गया है। विभाग के अनुसार, इन प्रक्रियाओं से सरकारी राजस्व की सुरक्षा जोखिम में पड़ी और अधिकारी ने अपने पद से जुड़े दायित्वों का उचित पालन नहीं किया। इसी आधार पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत रायचूरा को निलंबित किया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है। आदेश में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का भी उल्लेख है।

  • भोपाल के श्रमोदय विद्यालय में बच्चों को परोसी गई छिपकली वाली सब्जी! 13 विद्यार्थी बीमार, अस्पताल में भर्ती

    भोपाल के श्रमोदय विद्यालय में बच्चों को परोसी गई छिपकली वाली सब्जी! 13 विद्यार्थी बीमार, अस्पताल में भर्ती


    भोपाल । भोपाल के रातीबड़ स्थित श्रमोदय विद्यालय के हॉस्टल में भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि आलू की सब्जी में छिपकली मिलने के बावजूद वही सब्जी बच्चों को परोस दी गई, जिसके बाद 13 विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ गई। सभी को जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल सामान्य है।

    घटना में बीमार हुए विद्यार्थी कक्षा छठवीं से नौवीं तक के हैं। जानकारी के अनुसार, हॉस्टल में खाना खाने के बाद बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी। उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल जयप्रकाश (जेपी) अस्पताल ले जाया गया। यहां चिकित्सकों की टीम ने उपचार शुरू किया और सभी विद्यार्थियों को निगरानी में रखा गया।

    घटना सामने आने के बाद हॉस्टल में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और कैंटीन की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। भोजन तैयार करने से लेकर उसे परोसने तक बरती जाने वाली सावधानियों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

    परिजनों ने प्रबंधन की सूचना व्यवस्था पर उठाए सवाल

    बच्चों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि प्रबंधन ने उन्हें घटना की सूचना समय पर नहीं दी। परिवारों को स्कूल के ग्रुप के माध्यम से मामले का पता चला, जिसके बाद वे अपने बच्चों की स्थिति जानने के लिए जेपी अस्पताल पहुंचे।

    परिजनों के मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली थी कि बच्चों को ऐसी सब्जी परोसी गई, जिसमें छिपकली मिली थी। इस मामले ने हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और भोजन की नियमित जांच की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रिंसिपल ने कैंटीन संचालक को थमाया नोटिस

    श्रमोदय विद्यालय की प्रिंसिपल रत्ना दुबे ने बताया कि कैंटीन संचालक की गलती के कारण बच्चों को छिपकली वाली सब्जी परोसी गई। घटना में 13 विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ी थी, जिन्हें इलाज के लिए जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रिंसिपल ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली।

    रत्ना दुबे के अनुसार, फिलहाल सभी विद्यार्थी स्वस्थ हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए कैंटीन संचालक को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं, जेपी अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर रत्नेश जैन ने बताया कि उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद बच्चों को अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया। फिलहाल सभी की हालत सामान्य है और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

    पुलिस जांच में जुटी, तथ्यों के आधार पर होगी कार्रवाई

    मामले की जानकारी मिलने के बाद रातीबड़ थाना पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी रामबाबू सिंह ने बताया कि परिजनों ने शिकायत की है कि बच्चों को छिपकली वाली सब्जी खिलाई गई। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कैंटीन संचालक के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    हॉस्टल में हुई इस घटना ने विद्यार्थियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, रसोई की साफ-सफाई और खाना बांटने से पहले उसकी जांच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब यह देखना होगा कि स्कूल प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदारों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के क्या इंतजाम किए जाते हैं।