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  • भोपाल में बच्चों के लिए नई पहल: शुरू होगा ‘लिटिल रीडर्स क्लब’, कहानी, क्विज और क्रिएटिव एक्टिविटी से बढ़ेगा पढ़ने का शौक

    भोपाल में बच्चों के लिए नई पहल: शुरू होगा ‘लिटिल रीडर्स क्लब’, कहानी, क्विज और क्रिएटिव एक्टिविटी से बढ़ेगा पढ़ने का शौक


    नई दिल्ली। भोपाल में बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से दूर कर किताबों की दुनिया से जोड़ने और उनमें पढ़ने की आदत विकसित करने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल शुरू की जा रही है। शहर की प्रतिष्ठित स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी, न्यू मार्केट में 14 जून (रविवार) से ‘लिटिल रीडर्स क्लब’ का शुभारंभ किया जाएगा। यह क्लब 4 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य उन्हें कहानियों, पुस्तकों और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित करना है।

    लाइब्रेरी प्रबंधन के अनुसार, इस क्लब को विशेष रूप से बच्चों की उम्र के अनुसार दो समूहों में बांटा गया है। ‘लिटिल बड्स’ समूह में 4 से 8 वर्ष के बच्चों को कहानी सुनाने, चित्र पुस्तकों की दुनिया से परिचित कराने और प्रारंभिक पठन गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। वहीं ‘पेज टर्नर्स’ समूह (9 से 14 वर्ष) के बच्चों के लिए पुस्तक पठन के साथ-साथ संवादात्मक चर्चा, विचार-विमर्श और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर जोर दिया जाएगा।

    शुभारंभ कार्यक्रम 14 जून को शाम 5 बजे आयोजित किया जाएगा, जिसमें बच्चों के लिए कई रोचक गतिविधियां शामिल होंगी। इनमें ‘बुक जैकेट डिजाइन’ के तहत बच्चे अपनी पसंदीदा किताब का नया कवर तैयार करेंगे और उस पर आकर्षक परिचय लिखेंगे। इसके अलावा ‘बुक पिच’ गतिविधि में बच्चे विज्ञापन विशेषज्ञ की तरह अपनी पसंदीदा पुस्तक को प्रस्तुत करेंगे, जिससे उनकी अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

    कार्यक्रम में कहानी वाचन, पुस्तक चर्चा, चित्रकला, क्राफ्ट, शब्द और पहेली खेल, रचनात्मक लेखन, रोल प्ले, क्विज प्रतियोगिता और समूह गतिविधियां भी शामिल होंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, कल्पनाशक्ति, टीमवर्क और संचार कौशल को विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

    लाइब्रेरी के प्रबंधक यतीश भटेले ने बताया कि यह क्लब हर 15 दिनों में नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा, ताकि बच्चों में लगातार पढ़ने की आदत विकसित हो सके। क्लब का संचालन तूलिका श्री और अनीर्बन चक्रवर्ती करेंगे, जो लंबे समय से साहित्य और बाल गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।

    इस पहल को लेकर अभिभावकों में भी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि आज के डिजिटल युग में बच्चों को किताबों से जोड़ना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में यह क्लब बच्चों के मानसिक विकास और रचनात्मक सोच को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • भोपाल ब्रेकिंग: बैरागढ़ रोड पर पटाखा दुकान में भीषण आग, 70 फीट तक उठीं लपटें, लगातार धमाकों से दहला इलाका

    भोपाल ब्रेकिंग: बैरागढ़ रोड पर पटाखा दुकान में भीषण आग, 70 फीट तक उठीं लपटें, लगातार धमाकों से दहला इलाका


    नई दिल्ली। भोपाल में शुक्रवार तड़के एक बड़ा हादसा उस समय टल गया जब बैरागढ़ रोड स्थित हलालपुरा इलाके में एक पटाखा दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। यह हादसा सुबह करीब 3 बजे हुआ, जब पूरा इलाका गहरी नींद में था। आग लगते ही दुकान के अंदर रखे पटाखों में लगातार विस्फोट शुरू हो गए, जिससे पूरा क्षेत्र तेज धमाकों से गूंज उठा और आसपास के लोग दहशत में आ गए।

    आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें आसमान में करीब 70 फीट तक उठती दिखाई दीं। लगातार हो रहे धमाकों के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया और आसपास की सड़कों तक पटाखों के टुकड़े उड़कर गिरने लगे। यह दुकान हलालपुरा क्षेत्र में स्थित सुंदर वन गार्डन के ठीक सामने है, जो मुख्य सड़क से सटी हुई है। दिन के समय इस मार्ग पर भारी ट्रैफिक रहता है और आसपास वाहन भी खड़े रहते हैं, लेकिन गनीमत रही कि घटना देर रात हुई, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

    सूचना मिलते ही फतेहगढ़, बैरागढ़, गांधीनगर सहित कई फायर स्टेशनों से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फायर फाइटर्स ने आग बुझाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन लगातार हो रहे धमाकों के कारण राहत कार्य में कठिनाई आई। करीब साढ़े तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, हालांकि सुबह 7 बजे तक भी दुकान से धुआं उठता रहा।

    फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दुकान में बड़ी मात्रा में पटाखों का भंडारण किया गया था, जो पूरी तरह जलकर खाक हो गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। घटना स्थल के पास ही एक पेट्रोल पंप भी स्थित है, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई थी।

    स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर एक तरफ की सड़क को बंद कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित रहा। साथ ही बिजली विभाग ने एहतियातन इलाके की बिजली सप्लाई भी बंद कर दी, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।

    फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हादसा शॉर्ट सर्किट से हुआ या किसी अन्य वजह से।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाकों की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। वहीं, प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने की बात कही है।

  • जेल कॉलोनी हत्याकांड का खुलासा: फॉरेंसिक सबूतों ने खोली साजिश की परतें, दोषियों को मिली फांसी

    जेल कॉलोनी हत्याकांड का खुलासा: फॉरेंसिक सबूतों ने खोली साजिश की परतें, दोषियों को मिली फांसी


    मध्यप्रदेश। भोपाल की एक सुरक्षित मानी जाने वाली जेल कॉलोनी में वर्ष 1996 में हुई नाबालिग बालिका की हत्या का मामला मध्य प्रदेश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। प्रारंभिक जांच में यह एक रहस्यमयी घटना प्रतीत हो रही थी, लेकिन पुलिस की पड़ताल, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने धीरे-धीरे पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठा दिया। अंततः अदालत ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।

    घटना के बाद जब पुलिस ने जांच शुरू की तो आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ की गई। इसी दौरान कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं, जिन्होंने जांच को नई दिशा दी। प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस ने संदिग्धों से पूछताछ की और उनके बयानों में कई विरोधाभास पाए।

    जांच आगे बढ़ने पर एक महत्वपूर्ण बरामदगी ने मामले को स्पष्ट करने में बड़ी भूमिका निभाई। पुलिस को ऐसी वस्तु मिली जिसने घटनास्थल और आरोपियों के बयानों के बीच संबंध स्थापित किया। इसके बाद संदिग्धों से गहन पूछताछ की गई, जिसमें महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

    फॉरेंसिक जांच इस मामले की सबसे अहम कड़ी साबित हुई। वैज्ञानिक परीक्षणों के दौरान घटनास्थल और बरामद सामग्री से मिले साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में ऐसे प्रमाण मिले जिन्होंने अपराध की गंभीरता और आरोपियों की संलिप्तता को मजबूत आधार प्रदान किया। विशेषज्ञों की राय और वैज्ञानिक परीक्षणों के निष्कर्षों ने जांच एजेंसियों को अदालत में मजबूत केस प्रस्तुत करने में मदद की।

    जांच में यह भी सामने आया कि अपराध के बाद कथित रूप से सबूतों को छिपाने और घटनाक्रम को भ्रमित करने की कोशिश की गई थी। हालांकि पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित कर उनकी वैज्ञानिक जांच कराई, जिससे मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियां जुड़ती चली गईं।

    मामला अदालत पहुंचने पर अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, बरामद सामग्री, वैज्ञानिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने सभी तथ्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और विश्वसनीय हैं। न्यायालय ने अपने निर्णय में अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों को अत्यंत गंभीर माना।

    18 फरवरी 1997 को सत्र न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। बाद में मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय में भी हुई, जहां निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया। न्यायालय ने इसे दुर्लभतम श्रेणी अर्थात ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामलों में शामिल माना।

    यह मामला आज भी इस बात का उदाहरण माना जाता है कि जटिल आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक जांच, फॉरेंसिक साक्ष्य और सुसंगत पुलिस पड़ताल किस प्रकार न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। साथ ही यह भी दर्शाता है कि गंभीर अपराधों में न्यायालय साक्ष्यों के आधार पर कठोरतम दंड देने से पीछे नहीं हटता।

  • यूका फैक्ट्री का कचरा हटने से भोपाल से मिटा गैस त्रासदी का कलंक, अब जमीन का करेंगे प्रबंधनः CM मोहन यादव

    यूका फैक्ट्री का कचरा हटने से भोपाल से मिटा गैस त्रासदी का कलंक, अब जमीन का करेंगे प्रबंधनः CM मोहन यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal gas tragedy) को प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण बताया. कहा कि इस भयानक घटना ने नागरिकों और पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया।

    CM यादव विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहां ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान की शुरुआत की गई। सीएम यादव ने कहा, “भोपाल गैस त्रासदी प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण है. यह सबसे भयानक घटना थी जिसने आम नागरिकों और पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया।


    फैक्ट्री के कचरे का हुआ सफल निपटारा

    मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पड़े कचरे का निपटारा कर दिया है. उन्होंने आगे कहा, “इससे भोपाल की धरती से गैस त्रासदी का कलंक मिट गया है. अब राज्य सरकार यूनियन कार्बाइड की जमीन के सही प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    बता दें कि 2-3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से बेहद जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था. इसमें कम से कम 5,479 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग अपंग हो गए. इसे दुनिया की सबसे बुरी औद्योगिक त्रासदियों में से एक माना जाता है।


    ग्रीन एनर्जी और वन्यजीवों का सह-अस्तित्व

    CM यादव ने कहा कि राज्य में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई अहम पहल की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित ऊर्जा के लिए सौर, पवन, बायोमास और जलविद्युत परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, और सांची, खजुराहो व अन्य जगहों पर बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं।

    वन्यजीव संरक्षण के साथ सह-अस्तित्व का बेहतरीन उदाहरण पेश करने का जिक्र करते हुए यादव ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि राज्य में तेंदुओं को लाने के अलावा असम से जंगली भैंसें भी लाई गई हैं.

    उन्होंने कहा, “पर्यावरण संरक्षण की मूल अवधारणा हमारी सनातन संस्कृति में निहित है. 5 तत्वों से बनी इस सृष्टि के संरक्षण के लिए हर तत्व का महत्व हमारी पूजा-पद्धति, खान-पान और प्रार्थनाओं में मौजूद है. सनातन संस्कृति में एक पेड़ को दस पुत्रों के बराबर माना जाता है. पर्यावरण संरक्षण हमारी जीवनशैली में झलकता है.”

    यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है. यादव ने कहा कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत राज्य में नदियों, कुओं, बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण का पवित्र कार्य चल रहा है.

    इस मौके पर वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार और वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक बरनवाल समेत कई अन्य लोग मौजूद थे. अहिरवार ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हवा, पानी और पेड़ों को बचाना बहुत जरूरी है।

  • भोपाल का पानी RO से भी ज्यादा शुद्ध? मेयर मालती राय ने प्लांट में खुद पिया पानी

    भोपाल का पानी RO से भी ज्यादा शुद्ध? मेयर मालती राय ने प्लांट में खुद पिया पानी

    भोपाल । भोपाल में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत और गंदे पानी की शिकायतों को लेकर चल रहे विवाद के बीच नगर निगम ने लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की है। इसी कड़ी में मंगलवार को भोपाल की मेयर मालती राय ने अरेरा हिल्स स्थित वॉटर फिल्ट्रेशन प्लांट का औचक निरीक्षण किया और वहां पहुंचकर खुद ट्रीटेड पानी का गिलास पीकर उसकी शुद्धता का दावा किया।

    मेयर मालती राय ने कहा कि अपर लेक से सप्लाई होने वाला पानी पूरी तरह सुरक्षित है और यह RO से भी बेहतर गुणवत्ता का है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और निगम के जल सप्लाई सिस्टम पर भरोसा रखने की अपील की। निरीक्षण के दौरान भाजपा पार्षद रवींद्र यति और नगर निगम के अधिकारी भी मौजूद रहे।

    अधिकारियों ने मेयर को जानकारी दी कि एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब में पानी के सैंपल की जांच की गई है, जिसमें पीएच लेवल, टीडीएस, टर्बिडिटी और बैक्टीरियल सेफ्टी सभी मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। नगर निगम का दावा है कि अब तक 20 हजार से अधिक पानी के सैंपल की जांच की जा चुकी है और सभी रिपोर्ट संतोषजनक रही हैं।

    हालांकि दूसरी ओर शहर में लो-प्रेशर और गंदे पानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। अधिकारियों ने माना कि बार-बार बिजली कटौती होने से पंपिंग सिस्टम प्रभावित होता है, जिसके कारण कई इलाकों में पानी का दबाव कम हो जाता है। सिस्टम को दोबारा शुरू करने में समय लगने से सप्लाई प्रभावित हो रही है।

    नगर निगम के आंकड़े भी शहर की जल व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर रहे हैं। निगम के अनुसार 1 जनवरी से अब तक 5,610 पाइपलाइन लीकेज सुधारे गए हैं। इसका मतलब है कि पिछले करीब पांच महीनों में रोज औसतन 38 पाइपलाइन लीकेज सामने आए हैं।

    इसके अलावा नगर निगम ने 15 हजार से अधिक सीवेज चैंबरों की सफाई भी कराई है ताकि जलभराव और ओवरफ्लो जैसी समस्याओं को रोका जा सके। बावजूद इसके विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट का पानी भले शुद्ध हो, लेकिन पुरानी और बार-बार टूटने वाली पाइपलाइनें घरों तक पहुंचते-पहुंचते पानी को दूषित कर सकती हैं। मेयर के इस निरीक्षण और दावे के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नगर निगम पानी की गुणवत्ता के साथ वितरण व्यवस्था को सुधारने के लिए कितनी तेजी से काम करता है।

  • NGT का बड़ा आदेश: भोपाल में प्रदूषण रोकने के लिए 100 दिन की विंटर एक्शन प्लान तैयारी अनिवार्य

    NGT का बड़ा आदेश: भोपाल में प्रदूषण रोकने के लिए 100 दिन की विंटर एक्शन प्लान तैयारी अनिवार्य


    भोपाल । भोपाल की लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल NGT ने मध्यप्रदेश सरकार और नगर निगम को सख्त निर्देश जारी किए हैं। एनजीटी ने कहा है कि राजधानी में सर्दियों के दौरान एयर क्वालिटी इंडेक्स कई बार 300 के पार पहुंच जाता है, जो गंभीर स्थिति का संकेत है। इसी को देखते हुए ठंड शुरू होने से पहले 100 दिन का विस्तृत विंटर एक्शन प्लान तैयार करने के आदेश दिए गए हैं।

    एनजीटी ने स्पष्ट कहा है कि अगर अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली सर्दियों में वायु प्रदूषण की स्थिति और भी भयावह हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद पीएम 2.5 और धूल के महीन कण स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं और ये हार्ट अटैक, स्ट्रोक, अस्थमा तथा अन्य श्वसन रोगों का बड़ा कारण बन रहे हैं।

    मामले में याचिकाकर्ता राशिद नूर खान ने बताया कि विशेषज्ञों ने खुले में कचरा, पत्तियां, बायोमास और फसल अवशेष जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। साथ ही पारंपरिक अलाव को भी प्रदूषण का बड़ा कारण बताया गया है, जिसके विकल्प के रूप में एलपीजी और इलेक्ट्रिक हीटर को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

    एनजीटी ने अपने निर्देशों में खुले में कचरा जलाने, लकड़ी और कोयले के तंदूरों के उपयोग तथा निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल पर सख्त नियंत्रण लगाने को कहा है। इसके अलावा होटल, ढाबों और रेस्तरां में लकड़ी-कोयले के उपयोग को सीमित करने की सिफारिश भी की गई है। ट्रिब्यूनल ने शहर में भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने, ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और लो-इमिशन जोन विकसित करने जैसे उपायों पर जोर दिया है।

    साथ ही ई-रिक्शा, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है, ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सके। निर्माण स्थलों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए ग्रीन नेट लगाना अनिवार्य करने, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने और नागरिकों की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
    नगर निगम को नियमित सड़क सफाई, पानी का छिड़काव और डिवाइडरों की सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर कदम की निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाएगी, जो लगातार कार्रवाई की समीक्षा करेगी।

  • भोपाल में IPS अधिकारी की बेटी ने की आत्महत्या , घर में फांसी लगाकर दी जान

    भोपाल में IPS अधिकारी की बेटी ने की आत्महत्या , घर में फांसी लगाकर दी जान


    भोपाल । भोपाल में एक दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है, जहां एक IPS अधिकारी की नाबालिग बेटी ने आत्महत्या कर ली। यह घटना हबीबगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत पॉश इलाके चार इमली की बताई जा रही है, जहां छात्रा ने अपने घर पर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी।

    जानकारी के अनुसार मृतिका 12वीं कक्षा की छात्रा थी और अपने परिवार के साथ रहती थी। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और तत्काल हबीबगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    मृतिका की पहचान IPS अधिकारी संजीव कंचन की बेटी के रूप में हुई है, जो वर्तमान में पुलिस मुख्यालय PHQ में AIG के पद पर पदस्थ हैं। इस घटना के बाद परिवार और आसपास के लोगों में गहरा शोक फैल गया है।

    पुलिस को शुरुआती जांच में मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिससे आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और हर एंगल से मामले की पड़ताल की जा रही है।

    जांच के तहत पुलिस मृतिका के मोबाइल फोन को खंगाल रही है, साथ ही उसके संपर्कों और हाल की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ जारी है ताकि घटना के पीछे की वजहों का पता लगाया जा सके।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के बाद ही इस पूरे मामले में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। फिलहाल इस घटना ने पूरे शहर में शोक और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

  • MP Police Bharti 2026: प्रधान आरक्षक और ASI भर्ती की फिजिकल परीक्षा 7 से 9 जून तक, आधार e-KYC अनिवार्य

    MP Police Bharti 2026: प्रधान आरक्षक और ASI भर्ती की फिजिकल परीक्षा 7 से 9 जून तक, आधार e-KYC अनिवार्य

    भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश पुलिस भर्ती 2026 के तहत प्रधान आरक्षक कंप्यूटर और सहायक उप निरीक्षक कंप्यूटर के कुल 89 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण की घोषणा कर दी गई है। चयनित उम्मीदवारों की शारीरिक दक्षता परीक्षा 7 से 9 जून तक आयोजित की जाएगी।

    यह फिजिकल टेस्ट भोपाल के लाल परेड ग्राउंड और जबलपुर के परेड ग्राउंड तथा 6वीं वाहिनी विसबल रांझी में संपन्न होगा। इस चरण में अभ्यर्थियों की 800 मीटर दौड़ सहित शारीरिक दक्षता से जुड़े अन्य परीक्षण किए जाएंगे। इसके साथ ही दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।

    सहायक पुलिस महानिरीक्षक चयन एवं भर्ती गोपाल सिंह धाकड़ ने जानकारी दी कि ऑनलाइन परीक्षा के बाद अगले चरण के लिए सूचना पत्र जारी कर दिए गए हैं। उम्मीदवार मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट से अपना सूचना पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी अभ्यर्थियों को तय तारीख और स्थान पर ही उपस्थित होना अनिवार्य होगा और इसमें किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है।

    भर्ती प्रक्रिया के दौरान आधार e-KYC का सत्यापन भी अनिवार्य किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सभी उम्मीदवारों को अपना आधार कार्ड साथ लाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका आधार नंबर लॉक न हो। इसके बिना सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकेगी। इसके अलावा दस्तावेज परीक्षण के लिए अभ्यर्थियों को अपने सभी मूल प्रमाण पत्र और उनकी स्वयं प्रमाणित छायाप्रति साथ लाना जरूरी होगा।

    गौरतलब है कि इस भर्ती के लिए परीक्षा 24 और 25 मार्च 2026 को आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम 8 मई 2026 को मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जारी किया जा चुका है। अब चयनित उम्मीदवार शारीरिक दक्षता परीक्षा के अगले चरण में शामिल होंगे, जो अंतिम चयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • MP: भोपाल में IPS अधिकारी की नाबालिग बेटी की लगाई फांसी…. जांच में जुटी पुलिस

    MP: भोपाल में IPS अधिकारी की नाबालिग बेटी की लगाई फांसी…. जांच में जुटी पुलिस


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के पॉश और हाई-प्रोफाइल इलाके ‘चार इमली (High-profile area ‘Char Imli’)’ में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक वरिष्ठ IPS अधिकारी की नाबालिग बेटी (Minor Daughter) ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. मृतका की उम्र 17 वर्ष थी और वह 11वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी कर इस साल 12वीं में पहुंची थी।

    जानकारी के मुताबिक मृतका अपने परिवार के साथ चार इमली स्थित सरकारी आवास में रहती थी. घटना के समय परिवार के सदस्य घर में ही मौजूद थे. इसी दौरान छात्रा अपने कमरे में गई और फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

    हबीबगंज थाना प्रभारी संजीव चौकसे ने बताया कि फिलहाल मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है. हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की जांच की जा रही है. छात्रा के मोबाइल फोन की जांच की जा रही है. इसके अलावा उसके दोस्तों, परिचितों और संपर्क में रहने वाले लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है. यह पता लगाया जा सके कि छात्रा किसी मानसिक तनाव या अन्य परेशानी से गुजर रही थी या नहीं।

    पुलिस क पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
    पुलिस ने बताया कि घटना के बाद से ही परिवार गहरे सदमे में है. इसके बावजूद, पुलिस हर पहलू को स्पष्ट करने के लिए परिवार के सदस्यों, घरेलू सहायकों और मृतका के करीबी दोस्तों से पूछताछ कर रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही समय और स्थिति को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी. फिलहाल जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • भोपाल से स्विट्जरलैंड तक पहुंची फ्लेवर्ड आइस्ड टी, एमएसएमई की वैश्विक पहचान पर सरकार ने जताई खुशी

    भोपाल से स्विट्जरलैंड तक पहुंची फ्लेवर्ड आइस्ड टी, एमएसएमई की वैश्विक पहचान पर सरकार ने जताई खुशी

    मध्य प्रदेश /भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जहां मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal से तैयार की गई फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की पहली खेप यूरोप के प्रमुख देश Switzerland के लिए निर्यात की गई है। यह कदम न केवल भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है, बल्कि देश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की गुणवत्ता और नवाचार क्षमता को भी मजबूत करता है। इस उपलब्धि को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा है कि भारतीय एमएसएमई अब वैश्विक मानकों पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं और लगातार नए बाजारों में अपनी जगह बना रहे हैं।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार यह निर्यात कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के सहयोग से संभव हुआ है, जिसने मध्य प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। इस पहल को भारत के निर्यात आधारित विकास मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो न केवल उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाता है बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने में भी मदद करता है।

    इस अवसर पर यह भी बताया गया कि पिछले एक दशक में भारत के चाय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे देश के पारंपरिक उत्पादों की वैश्विक मांग और स्वीकार्यता में लगातार बढ़ोतरी हुई है। सरकार का मानना है कि भारतीय चाय और उससे जुड़े उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी अलग पहचान बनाई है, जिसका श्रेय बेहतर गुणवत्ता, विविधता और निरंतर सुधार को जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार फ्लेवर्ड आइस्ड टी जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद भारत के निर्यात क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रहे हैं। इससे न केवल किसानों और छोटे उत्पादकों को लाभ मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह कदम “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” जैसे अभियानों को भी मजबूती देता है, जिनका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

    आने वाले समय में ऐसे और उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत की खाद्य प्रसंस्करण क्षमता और निर्यात हिस्सेदारी दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है। यह उपलब्धि देश के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, जो यह दर्शाती है कि भारतीय उत्पाद अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक उपभोक्ताओं की पसंद भी बन रहे हैं।