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  • भोपाल में गूंजेगी BRICS देशों की सांस्कृतिक एकता, आज घोषणा पत्र से लेकर भव्य महोत्सव तक कई अहम आयोजन

    भोपाल में गूंजेगी BRICS देशों की सांस्कृतिक एकता, आज घोषणा पत्र से लेकर भव्य महोत्सव तक कई अहम आयोजन


    भोपाल भोपाल में आयोजित BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन गुरुवार को सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 8 अगस्त तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में BRICS सदस्य और भागीदार देशों के प्रतिनिधि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संग्रहालयों के विकास, रचनात्मक उद्योगों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नई मजबूती देना और साझा विरासत के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना है।

    दूसरे दिन कार्य समूहों की ओर से तैयार की गई सिफारिशों पर विचार किया जाएगा, जो आगामी मंत्रिस्तरीय बैठक में संस्कृति मंत्रियों के लिए आधार तैयार करेंगी। इन चर्चाओं के जरिए BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में साझा सहमति विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

    सम्मेलन के दौरान कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर परिसर में तीन विशेष प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इनमें ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट मौसम और प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत शामिल हैं। इन प्रदर्शनों के माध्यम से भारत की समृद्ध पांडुलिपि परंपरा, समुद्री सांस्कृतिक संपर्क, प्राचीन सभ्यताओं के बीच संबंध और सांस्कृतिक कूटनीति की विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। इन प्रदर्शनियों को आम लोगों के लिए भी खोला गया है ताकि नागरिक भी भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देख सकें।

    सम्मेलन में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों के लिए मध्य प्रदेश की पारंपरिक मेहमाननवाजी भी विशेष आकर्षण बनी हुई है। दोपहर और रात्रिभोज में दाल-बाफले, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा तथा कोदो-कुटकी जैसे मिलेट आधारित पारंपरिक व्यंजन परोसे जा रहे हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजनों की भी विशेष व्यवस्था की गई है।

    शाम को रविंद्र भवन में आयोजित होने वाला BRICS सांस्कृतिक महोत्सव सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण रहेगा। इसमें सदस्य और भागीदार देशों के कलाकार अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोककलाओं और विभिन्न देशों की सांस्कृतिक झलकियों से सजा यह कार्यक्रम सांस्कृतिक एकता और वैश्विक सद्भाव का संदेश देगा।

    7 अगस्त को BRICS देशों के संस्कृति मंत्री औपचारिक रूप से सम्मेलन में शामिल होंगे। इस अवसर पर आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में सर्वे भवन्तु सुखिनः की मंगल कामना के साथ भारतीय संगीत की विविध परंपराओं का प्रदर्शन होगा। साथ ही BRICS पीस सॉन्ग के जरिए सदस्य देशों की सांस्कृतिक विविधता और एकता को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग की भव्य प्रस्तुति अमृतस्य मध्य प्रदेश में भीमबेटका, सांची, खजुराहो, उज्जैन, ओंकारेश्वर, नर्मदा और प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति को नृत्य और संगीत के जरिए जीवंत किया जाएगा।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी, जिसमें सांस्कृतिक सहयोग को लेकर साझा घोषणा पत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक के बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची का भ्रमण करेगा, जहां उन्हें बौद्ध विरासत, योग, ध्यान और विशेष लाइट एंड साउंड शो का अनुभव कराया जाएगा। सम्मेलन के समापन के बाद 9 अगस्त को इच्छुक प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रयों के भ्रमण की भी व्यवस्था की गई है, जिससे वे भारत की प्रागैतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से परिचित हो सकें।

  • रेसीडेंशियल भवनों में कमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, भोपाल में बढ़ी हलचल

    रेसीडेंशियल भवनों में कमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, भोपाल में बढ़ी हलचल


    भोपाल । भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को इस महत्वपूर्ण प्रकरण पर सुनवाई होनी है जिसमें याचिकाकर्ता रेसीडेंशियल भूखंडों पर किए गए अवैध निर्माण और उनके व्यावसायिक उपयोग को लेकर अपना पक्ष रखेंगे। मंगलवार को इस मामले में सुनवाई प्रस्तावित थी लेकिन भोपाल से जुड़ी याचिका पर कोई फैसला नहीं हो सका। अब आज होने वाली सुनवाई पर व्यापारियों रहवासियों और प्रशासन की नजरें टिकी हुई हैं।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी के अनुसार मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने देश की विभिन्न राजधानियों के नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने वाले राज्यों को कड़ी फटकार लगाई और कई राज्यों को स्पष्ट चेतावनी भी दी। हालांकि भोपाल से संबंधित याचिका पर विस्तृत सुनवाई नहीं हो सकी थी इसलिए अब बुधवार को इस मामले पर सुनवाई होने की संभावना है।

    भोपाल में यह पूरा विवाद तब तेज हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने आवासीय भवनों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। कई दुकानों और प्रतिष्ठानों को सील किया गया जबकि अनेक व्यापारियों ने कार्रवाई के डर से स्वयं अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे। शहर के कई प्रमुख इलाकों में इस कार्रवाई का व्यापक असर देखने को मिला।

    हालांकि बाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद सरकार ने व्यापारियों को अंतरिम राहत देने का निर्णय लिया। बैठक में मंत्रियों जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे मामले की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का विस्तृत अध्ययन करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित की जाए। यह समिति पूरे प्रकरण की जांच कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। तब तक व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा। सरकार के इस निर्णय के बाद शहर के कई इलाकों में बंद दुकानें दोबारा खुल गईं।

    दूसरी ओर इस फैसले का शहर के कई रहवासी संगठनों ने विरोध किया है। अरेरा कॉलोनी रोहित नगर बावड़ियाकलां और अन्य क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि आवासीय इलाकों में लगातार बढ़ रही व्यावसायिक गतिविधियों से ट्रैफिक पार्किंग शोर और सुरक्षा जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में लोगों ने पैदल मार्च निकालकर नगर निगम की कार्रवाई को अधूरा बताते हुए अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की थी।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि नगर निगम ने जिन प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे उनके खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई पूरी नहीं की गई और बाद में कई प्रतिष्ठान फिर से खुल गए जो सुप्रीम कोर्ट की भावना के अनुरूप नहीं है। उनका मानना है कि नियमों का समान रूप से पालन होना चाहिए और अवैध निर्माण पर किसी भी तरह की ढील नहीं दी जानी चाहिए।

    वहीं भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज व्यापारियों के पक्ष में खड़ा है। संगठन का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण व्यापारियों के सामने व्यावसायिक भूखंडों की भारी कमी है। ऐसे में कई लोग मजबूरी में आवासीय परिसरों से व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। चैंबर ने सरकार से मिक्स लैंड यूज नीति लागू करने और व्यापारियों के लिए स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

    अब सुप्रीम कोर्ट की आज होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माण के मामले में आगे की दिशा क्या होगी। अदालत के फैसले का असर हजारों व्यापारियों रहवासियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है।

  • ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन से पहले सजा भोपाल, विदेशी मेहमानों के स्वागत में VIP रोड और भोज सेतु संवारने की तैयारी

    ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन से पहले सजा भोपाल, विदेशी मेहमानों के स्वागत में VIP रोड और भोज सेतु संवारने की तैयारी

    मध्य प्रदेश  की राजधानी भोपाल 5 अगस्त से शुरू होने वाले ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है। चार दिनों तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए शहर में व्यापक स्तर पर सौंदर्यीकरण और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सम्मेलन 8 अगस्त तक चलेगा, जिसमें ब्रिक्स देशों के साथ कई अन्य मित्र देशों के संस्कृति मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, प्रतिनिधिमंडल और कलाकार भाग लेंगे। विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए शहर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है, जिससे राजधानी का स्वरूप एक बार फिर बड़े वैश्विक आयोजन जैसा दिखाई दे रहा है।

    सम्मेलन के मद्देनजर एयरपोर्ट से लेकर आयोजन स्थल तक प्रमुख मार्गों को आकर्षक बनाया जा रहा है। एयरपोर्ट रोड, गांधी नगर, वीआईपी रोड, भोज सेतु, पॉलीटेक्निक चौराहा और पंडित कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर तक डिवाइडरों पर रंगरोगन किया जा रहा है। सड़क किनारे सफाई, पौधों की देखरेख और सौंदर्यीकरण के साथ शहर की समग्र छवि को बेहतर बनाने का कार्य तेजी से जारी है।

    भोज सेतु इस तैयारी का प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। यहां दोनों ओर मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को दर्शाने वाली आकर्षक पेंटिंग बनाई जा रही हैं। इन कलाकृतियों के माध्यम से प्रदेश की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और पर्यटन स्थलों की झलक प्रस्तुत की जा रही है, ताकि विदेशी प्रतिनिधियों को मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराया जा सके।

    इस सम्मेलन का मुख्य विषय भारतीय दर्शन की भावना ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ पर आधारित है, जिसमें वैश्विक समरसता, सांस्कृतिक संवाद और पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा। आयोजन में ब्राजील, इथियोपिया, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, क्यूबा, थाईलैंड, बेलारूस सहित कई देशों के संस्कृति मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे। इनके अलावा विभिन्न देशों के दूतावासों से जुड़े अधिकारी और सांस्कृतिक विशेषज्ञ भी सम्मेलन में शामिल होंगे।

    सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के कलाकार अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देंगे। मिस्र का राष्ट्रीय लोक नृत्य दल, इंडोनेशिया के गायन और नृत्य कलाकार, रूस के लोक वाद्ययंत्र ऑर्केस्ट्रा, दक्षिण अफ्रीका का संगीत समूह तथा ब्राजील के कलाकार संगीत, मार्शल आर्ट, एक्रोबेटिक्स और लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां देंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक परंपराओं का परिचय मिलेगा।

    प्रशासन ने सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सुरक्षा, यातायात, आतिथ्य और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। आयोजन स्थल के आसपास विशेष निगरानी, साफ-सफाई और सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि विदेशी मेहमानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। शहर के प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर भी आवश्यक सुधार कार्य तेज गति से पूरे किए जा रहे हैं।

    ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 केवल एक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर भी माना जा रहा है। राजधानी भोपाल इस आयोजन के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक समृद्धि, आतिथ्य परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं का परिचय दुनिया के सामने रखेगा। सम्मेलन से प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होने के साथ-साथ सांस्कृतिक सहयोग और पर्यटन को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

  • रिमोट के बटन को लेकर शुरू हुई मामूली तकरार ने लिया खूनी रूप, भोपाल में सिर पर वार लगने से पति अस्पताल में भर्ती

    रिमोट के बटन को लेकर शुरू हुई मामूली तकरार ने लिया खूनी रूप, भोपाल में सिर पर वार लगने से पति अस्पताल में भर्ती

     मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में घरेलू विवाद का एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। टेलीविजन पर मनपसंद चैनल देखने और रिमोट कंट्रोल को लेकर पति-पत्नी के बीच शुरू हुई मामूली कहासुनी देखते ही देखते खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई। तैश में आई पत्नी ने घर में रखे धारदार हंसिए से पति पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    मिली जानकारी के अनुसार यह घटना भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र की है। पीड़ित व्यक्ति पेशे से मजदूर है और अपने परिवार के साथ रहता है। घटना वाले दिन वह काम निपटाकर घर पर टीवी देख रहा था। इसी दौरान उसने रिमोट लेकर अपनी पसंद का चैनल लगा दिया। इस बात पर पत्नी की उससे कहासुनी हो गई। देखते ही देखते दोनों के बीच तकरार इतनी बढ़ गई कि गुस्से में आकर महिला ने पास रखा हंसिया उठाकर पति के सिर और चेहरे पर वार कर दिया।

    अचानक हुए हमले में पति लहूलुहान होकर गिर पड़ा। चीख-पुकार और शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और किसी तरह बीच-बचाव किया। स्थानीय निवासियों ने तत्परता दिखाते हुए गंभीर रूप से घायल पति को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल भी तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया।

    छोला मंदिर पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर घायल पति के बयान दर्ज किए और आरोपी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक पड़ताल में टीवी का चैनल बदलने को लेकर हुआ विवाद ही हमले की मुख्य वजह सामने आया है। दंपती के दो बच्चे हैं और पड़ोसियों के अनुसार उनके बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में कहासुनी होती रहती थी।

    इस घटना के बाद से क्षेत्र में हड़कंप का माहौल है। पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य जुटाए हैं और आरोपी महिला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज


    मध्य प्रदेश। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए राजनीतिक विवाद की गूंज अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शनिवार को इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि संसद परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा साधु वेश धारण कर किया गया सांकेतिक प्रदर्शन भगवान श्रीराम, संत समाज और करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था का अपमान है। इसी के विरोध में भोपाल में बड़ा मार्च निकाला जाएगा।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के अनुसार प्रदर्शन दोपहर में व्यापम चौराहे से शुरू होगा और कांग्रेस कार्यालय तक जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, साधु-संत और सनातन धर्म से जुड़े लोग शामिल होंगे। प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जा सकता है। आयोजकों का कहना है कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं के सम्मान और आस्था से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराना है।

    पूरा विवाद संसद के मानसून सत्र के दौरान उस समय शुरू हुआ जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र और साधु वेश में संसद परिसर पहुंचे। उनके साथ विपक्ष के कुछ अन्य सांसद भी मौजूद थे। विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के उपयोग को लेकर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    हालांकि इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक परंपराओं और संत समाज का अपमान बताया। संगठनों का कहना है कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर साधु वेश धारण कर इस तरह का प्रदर्शन करना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। उनका आरोप है कि इस प्रकार के प्रदर्शन से धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किया गया है।

    दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं था, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर था। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि सार्वजनिक दान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसी मुद्दे को उठाने के लिए सांकेतिक प्रदर्शन किया गया।

    भोपाल में होने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाने की संभावना है। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

    विश्व हिंदू परिषद ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। भोपाल में होने वाला यह प्रदर्शन अब प्रदेश की राजनीति और सामाजिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।

  • मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर

    मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। एक अगस्त से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के नए दाम लागू हो गए हैं। प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 190 से 194 रुपए तक की कमी की गई है। कीमतों में आई इस गिरावट से व्यापारियों की संचालन लागत कम होने की उम्मीद है और आने वाले समय में ग्राहकों को भी खाने-पीने की सेवाओं में राहत मिल सकती है।

    नई दरों के अनुसार राजधानी भोपाल में अब 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 2743 रुपए में उपलब्ध होगा। वहीं इंदौर में इसकी कीमत घटकर 2846 रुपए रह गई है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं। सबसे महंगा कमर्शियल सिलेंडर रीवा में 2991.50 रुपए का मिलेगा। इसके अलावा सिंगरौली और नरसिंहपुर में इसकी कीमत 2989.50 रुपए तथा सतना में 2989 रुपए निर्धारित की गई है। दूसरी ओर शाजापुर प्रदेश का सबसे सस्ता शहर बन गया है, जहां यह सिलेंडर 2749.50 रुपए में मिलेगा।

    होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ने से उनकी लागत काफी बढ़ गई थी। गैस महंगी होने के कारण कई प्रतिष्ठानों को अपने मेन्यू की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी थी। अब गैस सस्ती होने से कारोबारियों को राहत मिलेगी और यदि कीमतें स्थिर रहीं तो आने वाले समय में ग्राहकों को भी इसका फायदा मिल सकता है।

    कैटरिंग व्यवसाय पर भी गैस की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ा था। कारोबारियों के अनुसार लगभग 500 लोगों के भोजन वाले एक आयोजन की लागत में 45 से 50 हजार रुपए तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो गई थी। इसके चलते कई कैटरर्स ने प्रति प्लेट चार्ज बढ़ा दिए थे। अब कमर्शियल एलपीजी सस्ती होने के बाद आयोजन की लागत में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    व्यापारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा था। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दिया और कई शहरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3300 रुपए से अधिक तक पहुंच गई थी। जबकि इससे पहले यही सिलेंडर लगभग 1800 से 2000 रुपए के बीच उपलब्ध था। अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कुछ राहत मिलने के बाद कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

    इस बीच घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए गैस कंपनियों ने महत्वपूर्ण सूचना भी जारी की है। कंपनियां उपभोक्ताओं को एसएमएस भेजकर आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाईसी कराने की अपील कर रही हैं। निर्धारित समय सीमा तक ई-केवाईसी पूरी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू दर पर एलपीजी सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने की अपील कर रही हैं।

    कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आई यह कमी फिलहाल होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। यदि आने वाले महीनों में कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका लाभ कारोबारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।

  • भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग

    भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग


    भोपाल । भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी पीड़ितों के चार संगठनों ने शहर में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठनों का दावा है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के कई इलाकों में लोगों को सीवेज से दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसके चलते जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। संगठनों ने अपनी ओर से कराई गई पानी की जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए कहा कि जांचे गए करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म यानी मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए हैं।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान के अनुसार इस महीने 30 बस्तियों से 63 पानी के नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई गई। इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई। उनका दावा है कि 30 में से 19 क्षेत्रों में लोगों तक दूषित पेयजल पहुंच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बड़ा तालाब से सप्लाई होने वाले पानी के लगभग 90 प्रतिशत नमूने तथा कोलार डैम से आने वाले पानी के करीब 25 प्रतिशत नमूने भी जांच में प्रभावित पाए गए।

    संगठनों का आरोप है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से सटे इलाकों के निवासी लंबे समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि इसके कारण दस्त, उल्टी, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में भी टाइफाइड के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यूनियन कार्बाइड परिसर का भूजल जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुका है। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे।

    वहीं भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में भी पेयजल में मल मिलने की शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को सीवर लाइन और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने निर्धारित समय में काम पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनका दावा है कि वर्षों बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करने तथा पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की भी मांग की।

    हालांकि इस मामले में नगर निगम या संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में संगठनों के दावों की पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • भोपाल में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, राजधानी दो दिन रही थमी, सरकार ने मानी बड़ी मांगें, आंदोलन हुआ खत्म

    भोपाल में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, राजधानी दो दिन रही थमी, सरकार ने मानी बड़ी मांगें, आंदोलन हुआ खत्म


    भोपाल । भोपाल में किसानों के आंदोलन ने दो दिनों तक राजधानी की रफ्तार लगभग थाम दी। मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर नर्मदापुरम हरदा सीहोर समेत कई जिलों से आए हजारों किसानों ने ऐसा दबाव बनाया कि आखिरकार सरकार को बातचीत की मेज पर आना पड़ा। किसान एक के बाद एक 22 बैरिकेड पार करते हुए मुख्यमंत्री निवास से महज एक किलोमीटर पहले तक पहुंच गए। उनके सामने केवल तीन बैरिकेड शेष थे। इसी दौरान सरकार ने वार्ता का रास्ता अपनाया और देर रात आंदोलन समाप्त हो गया।

    आंदोलन के चलते रोशनपुरा न्यू मार्केट और मुख्यमंत्री निवास के आसपास का पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। कई स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी जबकि प्रमुख मार्गों पर स्कूल बसों और गिट्टी से भरे डंपरों को बैरिकेड के रूप में खड़ा कर यातायात रोकने की कोशिश की गई। इसके बावजूद किसानों का काफिला लगातार आगे बढ़ता रहा और पुलिस की अधिकांश रणनीतियां नाकाम साबित हुईं।

    सुबह मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों से संवाद कर समस्याओं का समाधान निकालने की बात कही थी। लेकिन जब प्रदर्शनकारी रोशनपुरा तक पहुंच गए तब सरकार ने कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना विश्वास सारंग और कृष्णा गौर सहित चार मंत्रियों की समिति गठित कर किसान नेताओं से बातचीत शुरू कराई। मंत्रालय में करीब दो घंटे चली चर्चा के बाद सरकार ने कई अहम घोषणाएं कीं।

    सरकार ने मूंग खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का फैसला लिया। इसके साथ ही खाद वितरण की ई टोकन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया। स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 10 अगस्त तक और खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त तक बढ़ा दी गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में खाद वितरण हाईब्रिड व्यवस्था के तहत किया जाएगा जिसमें आधार नंबर मोबाइल नंबर और वितरण का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज रहेगा।

    हालांकि किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है लेकिन उनकी मूल मांग अब भी पूरी नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी मूंग की फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जानी चाहिए और वे इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे। संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि आगे भी जरूरत पड़ी तो आंदोलन दोबारा किया जाएगा।

    इस आंदोलन के दौरान पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए। नर्मदापुरम हरदा इटारसी और भैरूंदा सहित कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश हुई। करीब 60 किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया गया लेकिन बाद में उन्हें छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद किसान बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचने में सफल रहे और सरकार को अंततः वार्ता के लिए मजबूर होना पड़ा।

    इधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकार को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि केंद्र ने मध्य प्रदेश को देश में सबसे अधिक 4.54 लाख टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा कि पहले स्वीकृत कोटे की पूरी खरीदी की जाए उसके बाद अतिरिक्त कोटे पर विचार किया जाएगा।

    करीब दो दिन तक चले इस आंदोलन के बाद देर रात किसानों ने धरना समाप्त कर दिया और वापस लौटना शुरू किया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन खत्म होने के बाद गुरुवार से स्कूल और सामान्य यातायात पूर्ववत संचालित होंगे।

  • भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर

    भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर


    भोपाल । राजधानी भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। शहर की सड़कों पर पहली बार वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो गया है। टिकटिंग सॉफ्टवेयर की सफल टेस्टिंग और खाली बसों के ट्रायल रन के बाद गुरुवार सुबह से इन बसों में आम यात्रियों का सफर भी शुरू हो गया। शुरुआती चरण में तीन प्रमुख रूटों पर 10 एसी ई बसें चलाई जा रही हैं। सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को एयर कंडीशनर सुविधा का लाभ लेने के लिए कोई अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा। न्यूनतम किराया 7 रुपए और अधिकतम 40 रुपए निर्धारित किया गया है जो पहले से संचालित लाल सिटी बसों के बराबर ही है।

    नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होते हुए बैरागढ़ और चिचली तक तथा चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होकर कोच फैक्ट्री तक किया जा रहा है। इसके अलावा कोलार से एमपी नगर के बीच भी तीन बसें चलाई जा रही हैं जिससे शहर के हजारों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    ई बसों की शुरुआत से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा जो रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। कोलार निवासी ममता जोशी ने बताया कि उन्होंने नयापुरा से एमपी नगर तक एसी बस में सफर किया और केवल 17 रुपए किराया लगा। उनके अनुसार सफर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आरामदायक और सुविधाजनक रहा।

    इन इलेक्ट्रिक बसों में आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। पहली बार दिव्यांग यात्रियों के लिए हाइड्रोलिक डोर की व्यवस्था की गई है जिससे व्हीलचेयर या ट्राइसाइकिल के साथ आसानी से बस में चढ़ा और उतरा जा सकेगा। बस के भीतर इतनी जगह भी उपलब्ध कराई गई है कि दो व्हीलचेयर एक साथ खड़ी रह सकें। इसके अलावा प्रत्येक बस में छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनकी निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    भोपाल की ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इन बसों का आकार भी विशेष रूप से तैयार किया गया है। नई इलेक्ट्रिक बसों की लंबाई करीब 9 मीटर है जबकि पुरानी सिटी बसें लगभग 12 मीटर लंबी थीं। कम लंबाई होने के कारण ये बसें संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से संचालित हो सकेंगी और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी।

    फिलहाल शहर में 30 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं जिनमें से पहले चरण में 10 बसों का संचालन शुरू किया गया है। दूसरे चरण में 10 और बसें सड़कों पर उतरेंगी जबकि 15 अगस्त को प्रदेश स्तरीय लोकार्पण कार्यक्रम के बाद सभी 30 बसें नियमित रूप से यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही अगले 10 से 12 दिनों में 20 और नई इलेक्ट्रिक बसें भोपाल पहुंचने की संभावना है जिससे शहर का इलेक्ट्रिक बस बेड़ा और मजबूत होगा।

    इन बसों के संचालन के लिए बैरागढ़ डिपो में आधुनिक चार्जिंग स्टेशन तैयार किए गए हैं जहां 11 चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए गए हैं। इससे नियमित संचालन के दौरान बसों की चार्जिंग में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। नगर निगम का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और शहर के लोगों को सुरक्षित आरामदायक तथा पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी।

  • मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान

    मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान


    भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बुधवार को किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बनी रही। मूंग की शत प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर नर्मदापुरम संभाग से पैदल पहुंचे हजारों किसान राजधानी की सड़कों पर डटे रहे। आंदोलन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। दिनभर चले प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत के बाद देर रात सरकार ने किसानों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई जिसके बाद आंदोलन धीरे धीरे समाप्त होने लगा और किसानों ने सड़कें खाली करना शुरू कर दीं।

    किसानों का कहना था कि मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी न हो। इसके अलावा खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था को भी समाप्त करने की मांग उठाई गई। किसानों का आरोप था कि मौजूदा व्यवस्था के कारण समय पर खाद नहीं मिल पाती जिससे खेती प्रभावित होती है और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर डेरा डाल दिया। बाणगंगा चौराहे समेत कई स्थानों पर किसान देर रात तक जमे रहे। सरकार की ओर से मांगें स्वीकार करने की घोषणा के बाद भी प्रदर्शनकारी तत्काल हटने को तैयार नहीं हुए और लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वापस लौटने की प्रक्रिया शुरू की।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी। कुछ किसानों के कपड़े फट गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारी पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पहुंचे जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद उनका जत्था मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रोशनपुरा चौराहे से मुख्यमंत्री निवास तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कई स्थानों पर बसों और डंपरों से बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए गए ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने विरोध दर्ज कराने के लिए अलग अलग तरीके अपनाए। कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया जबकि कई प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही दाल बाटी बनाकर भोजन तैयार किया। किसानों के समर्थन में बड़ी संख्या में युवा भी पहुंचे जिन्होंने सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना करते हुए हवन किया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी का सामान्य जनजीवन प्रभावित कर दिया और लोगों को घंटों ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

    सरकार ने देर रात जारी बयान में किसानों की कई मांगें स्वीकार करने की घोषणा की। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि प्रदेश सरकार अब 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करेगी। नर्मदापुरम सीहोर और हरदा जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी जाएगी। इसके साथ ही स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है जबकि समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त निर्धारित की गई है। सरकार ने किसानों से आंदोलन समाप्त कर अपने घर लौटने की अपील भी की।

    सरकार की घोषणा के बाद अधिकांश किसानों ने देर रात वापस लौटना शुरू कर दिया और राजधानी की सड़कों पर यातायात धीरे धीरे सामान्य होने लगा। हालांकि किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि घोषित फैसलों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।