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  • दिग्विजय बोले- 'मुझसे बड़ा सनातनी बताओ', राम मंदिर और EVM मुद्दे को लेकर BJP पर साधा निशाना

    दिग्विजय बोले- 'मुझसे बड़ा सनातनी बताओ', राम मंदिर और EVM मुद्दे को लेकर BJP पर साधा निशाना


    राजगढ़। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को राजगढ़ में अपनी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के दौरान भाजपा पर चंदा चोरी, वोट चोरी और धार्मिक स्थलों में कथित अनियमितताओं को लेकर निशाना साधा। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन की खरीद-फरोख्त पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की। ईवीएम के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि चुनाव हारने से उन्हें फर्क नहीं पड़ता, लेकिन चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए। आजम खान से अपनी मित्रता का जिक्र करते हुए उन्होंने उन्हें अच्छा राजनेता भी बताया।

    जिला मुख्यालय पर रात्रि विश्राम के बाद दिग्विजय सिंह ने मां जालपा देवी के दर्शन किए और नेवज नदी की पूजा की। इसके बाद उनकी यात्रा कालीपीठ मार्ग स्थित दंड जोड़ के भगवान बाबा रामदेव मंदिर पहुंची, जहां उन्होंने प्रेस वार्ता की। सिंह ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म की मूल भावना, धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण करना है। उनके मुताबिक, चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे भी इसी लड़ाई का हिस्सा हैं।

    राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन की खरीद पर उठाए सवाल

    दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के चंदे और ट्रस्ट की जमीन से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर के आसपास जमीनों की कीमतें बढ़ने के दौरान कुछ मामलों में भाजपा नेताओं ने सस्ती कीमत पर जमीन खरीदी और 24 घंटे के भीतर उसे राम मंदिर ट्रस्ट को बेच दिया।

    एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि दो करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन अगले ही दिन ट्रस्ट को 18 करोड़ रुपये में बेच दी गई। सिंह ने कहा कि इस मामले में जांच की मांग की गई थी और एसआईटी को प्रमाण सौंपे जाने की बात भी सामने आई, लेकिन जांच नहीं हुई।

    उन्होंने चंदा संग्रह में गड़बड़ी की शिकायत करने वाले आरएसएस के पूर्व प्रचारक महिपाल सिंह का भी उल्लेख किया। वैष्णोदेवी ट्रस्ट, केदारनाथ, ओरछा और उज्जैन के धार्मिक स्थलों का जिक्र करते हुए उन्होंने दान की राशि के पारदर्शी इस्तेमाल की जरूरत बताई।

    EVM पर बोले- हार गए तो हार गए, बैलेट पेपर से चुनाव कराइए

    ईवीएम के विरोध और बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर कांग्रेस की हार से जुड़े सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनका मुद्दा चुनाव में जीत या हार नहीं, बल्कि मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता है। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिक के रूप में मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में होना और अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देना उसका अधिकार है।

    उन्होंने वीवीपैट की पर्ची मतदाता को हाथ में नहीं दिए जाने पर सवाल उठाया और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती दी। सिंह ने कहा, “चुनाव हार गए तो हार गए, चलेगा, कोई बात नहीं। आप बैलेट पेपर से पूरा चुनाव करा दीजिए। जब आप कह रहे हैं कि बैलेट पेपर से कांग्रेस हार रही है, तो हराइए।”

    बोले- भाजपा में मुझसे बड़ा सनातनी बताओ

    भाजपा नेताओं के इस सवाल पर कि उनकी सरकार के समय उन्हें भगवान राम की याद क्यों नहीं आई, दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने रामलीला पूजन में चंदा दिया था और गौ सेवा आयोग का गठन किया था। उन्होंने अपने गृह क्षेत्र राघौगढ़ के 400 साल पुराने राघवजी मंदिर का भी उल्लेख किया।

    इसके बाद उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि कोई ऐसा व्यक्ति बताया जाए, जो उनसे ज्यादा धार्मिक हो। उन्होंने आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद में भी ऐसा व्यक्ति बताने की बात कही।

    सिंह ने दावा किया कि उनकी यात्रा में ऐसे लोग भी शामिल हो रहे हैं, जो किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं। उनके मुताबिक, कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं और आरएसएस के लोगों के संदेश भी आए हैं। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद के बावजूद इन लोगों ने राम मंदिर में चंदे की कथित गड़बड़ी को लेकर उनके सवालों का समर्थन किया है।

    आजम खान को बताया मित्र, बोले- अच्छा राजनेता मानता हूं

    समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के कांग्रेस में आने की संभावना से जुड़े सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि आजम खान से उनकी अच्छी मित्रता है और वह उन्हें अच्छा राजनेता मानते हैं।

    उन्होंने कहा कि आजम खान ने विश्वविद्यालय शुरू किया और अपनी संपत्ति उसमें लगा दी। यूपीए सरकार के दौरान विश्वविद्यालय को मंजूरी दिलाने में उन्होंने अपनी ओर से जितनी मदद संभव थी, की थी। सिंह ने कहा कि आजम खान जिस पार्टी में रहना चाहें, रह सकते हैं। समाजवादी पार्टी उनके गठबंधन का हिस्सा है और वे एक-दूसरे के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते।

    नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बारे में पूछे गए सवाल पर भी दिग्विजय सिंह ने उन्हें अपना मित्र बताया। उन्होंने कहा कि वे विजयवर्गीय को काफी समय से जानते हैं।

    राहुल गांधी की महारैली पर भी रखी बात

    दिल्ली में एक नवंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी की ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो नेता दिल्ली जा सकते हैं, वे वहां जाएं और जो नहीं जा सकते, वे उनकी यात्रा में शामिल हों। उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा पहले से निर्धारित थी, इसलिए वह दिल्ली नहीं जा रहे हैं। सिंह ने वोट चोरी को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इसका असर नागरिकों के अधिकारों पर पड़ता है।

    राजगढ़ में भैंस चोरी का मुद्दा भी उठाया

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने राजगढ़ जिले में भैंस चोरी की घटनाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि जिले में भैंस चोरी के मामले बढ़ रहे हैं और जिन लोगों की भैंस चोरी हुई हैं, उनमें अधिकतर कांग्रेसी हैं। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि चोरी हर जगह बढ़ रही है।

    सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा में दिग्विजय सिंह के साथ उनकी पत्नी अमृता सिंह, पूर्व ऊर्जा मंत्री एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह, पूर्व विधायक हेमराज कल्पोनी, बापू सिंह तंवर, यात्रा प्रभारी चंदर सिंह सौंधिया, रामचंद्र दांगी सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे। यात्रा का जगह-जगह फूलों से स्वागत किया गया।

  • ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा का इंडिया गठबंधन पर हमला, गुरु प्रकाश ने बताया लोकतंत्र का मजाक

    ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा का इंडिया गठबंधन पर हमला, गुरु प्रकाश ने बताया लोकतंत्र का मजाक


    नई दिल्ली ।बिहार में इंडिया गठबंधन के प्रस्तावित ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम और रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने विपक्षी गठबंधन के इस आयोजन पर सवाल उठाते हुए इसे निराधार और तर्कहीन आंदोलन बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लोकतंत्र के नाम पर ऐसा कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिसका कोई औचित्य नहीं है। वहीं, जनता दल यूनाइटेड के एमएलसी नीरज कुमार ने भी विपक्षी गठबंधन की एकजुटता और उसकी राजनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

    गुरु प्रकाश ने कहा कि इंडिया गठबंधन का प्रस्तावित ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम कोई मॉक पार्लियामेंट नहीं है, बल्कि लोकतंत्र का मजाक है। उनके मुताबिक, विपक्ष झूठ और निराधार दावों के आधार पर आंदोलन खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कई बार अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है और संविधान पीठ भी संबंधित विषय को संवैधानिक बता चुकी है। ऐसे में इस मुद्दे पर आंदोलन करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं बनता।

    भाजपा प्रवक्ता ने विपक्षी गठबंधन के भीतर आपसी तालमेल की कमी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन में न तो समन्वय दिखाई देता है और न ही सहयोग की भावना है। उनके अनुसार, प्रस्तावित रैली राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन की हठधर्मिता का परिणाम है। उन्होंने विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि गठबंधन के नेताओं के बीच एकराय का अभाव नजर आता है।

    रैली की प्रस्तावित तारीख एक नवंबर को लेकर भी गुरु प्रकाश ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह तारीख सिख समुदाय के इतिहास से जुड़ी संवेदनशील घटनाओं की याद दिलाती है। उनके मुताबिक, वर्ष 1984 में दिल्ली में सिख समुदाय की महिलाओं और अन्य लोगों के साथ हुई घटनाओं को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी ऐतिहासिक संवेदनशीलता के बावजूद इसी दिन कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर देना विपक्ष की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

    इंडिया गठबंधन की रैली को यूट्यूबर ध्रुव राठी का समर्थन मिलने के सवाल पर भी गुरु प्रकाश ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ध्रुव राठी, नेहा बोरा और अन्य लोगों की विचारधारा को लेकर सवाल उठाए। गुरु प्रकाश ने कहा कि जनता को यह समझना चाहिए कि इन लोगों की वैचारिक पृष्ठभूमि क्या है। उन्होंने नेहा बोरा के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वह विपक्षी गठबंधन की रैली के मंच पर दिखाई देती हैं, तो इससे गठबंधन की संवैधानिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठेंगे।

    गुरु प्रकाश ने शरजील इमाम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वह भारतीय संविधान को फासीवादी दस्तावेज बताते रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के समर्थन को लेकर इंडिया गठबंधन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान के प्रति विपक्षी गठबंधन की निष्ठा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    दूसरी ओर, जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने भी इंडिया गठबंधन की राजनीतिक सक्रियता पर सवाल उठाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावों का उल्लेख करते हुए पूछा कि वहां विपक्षी गठबंधन की एकजुटता कहां दिखाई दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन की वास्तविक राजनीतिक स्थिति उसके अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन और आपसी तालमेल से स्पष्ट होती है।

    नीरज कुमार ने संसद के स्थान पर मॉक पार्लियामेंट आयोजित करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को संसद में बैठकर काम करने के लिए चुनती है। ऐसे में विपक्ष को संसद के बाहर समानांतर आयोजन करने के बजाय अपनी मांगों को सदन में उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री विपक्ष की सहमति से संसद का विशेष सत्र बुलाने की बात कह रहे हैं। ऐसे में विपक्ष को स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी वास्तविक मांग क्या है।

    नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर देश में राजनीतिक अराजकता का माहौल तैयार करना चाहता है। इस दौरान उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जेडीयू के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ की ओर से सरदार पटेल के सम्मान में प्रतियोगिता आयोजित की गई है। उन्होंने देशी रियासतों के एकीकरण, प्रशासनिक ढांचे के निर्माण और सामाजिक सद्भाव स्थापित करने में पटेल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

  • MP से भाजपा ने हरदीप पुरी को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार तो भड़की कांग्रेस…. की आलोचना

    MP से भाजपा ने हरदीप पुरी को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार तो भड़की कांग्रेस…. की आलोचना


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में राज्यसभा (Rajya Sabha) की एक सीट पर 12 नवंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) को उम्मीदवार घोषित किया है। प्रत्याशी के रूप में पुरी के नाम की घोषणा के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर जबरदस्त तरीके से हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jeetu Patwari) से लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार एवं अन्य कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले के लिए भाजपा की कड़ी आलोचना की है और पूछा है कि आखिर पुरी ने भाजपा की ऐसी कौन सी नस दबा रखी है, जिसके चलते पार्टी को ब्लैकमेल होना पड़ रहा है।

    इस बारे में मीडिया से बातचीत करते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने एपस्टीन फाइल्स के संदर्भ में पुरी का नाम सामने आने का उल्लेख किया और भाजपा से पूछा कि नैतिकता की बात करने वाली पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजने का निर्णय कैसे ले सकती है। सिंघार ने कहा कि भाजपा महिलाओं की सुरक्षा और लाडली बहना योजना की बात करती है, लेकिन उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसे विवादों के बीच पुरी को उम्मीदवार बनाने का आधार क्या है।


    ‘MP से कोई दलित, आदिवासी, ओबीसी नहीं मिला’

    उन्होंने सवाल किया कि राज्यसभा भेजने के लिए क्या भारतीय जनता पार्टी को मध्यप्रदेश से दलित, आदिवासी तथा अन्य पिछड़ा वर्ग का कोई योग्य नेता नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पुरी को उम्मीदवार बनाए जाने से मध्यप्रदेश के साथ भाजपा के कथित भेदभाव का मुद्दा फिर सामने आया है। विपक्ष के नेता ने कहा कि भाजपा की इस राजनीति से स्पष्ट है कि वह मध्यप्रदेश को अपने राजनीतिक प्रयोगों की प्रयोगशाला समझती है।


    ‘आखिर किससे ब्लैकमेल हो रही है भाजपा’

    इस बारे में शेयर की अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में पुरी ने लिखा, ‘आखिर किससे ब्लैकमेल हो रही है भाजपा? ‘एपस्टीन फाइल्स’ में जिसका नाम सामने आया हो, उस हरदीप सिंह पुरी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा का टिकट देना भाजपा के खौफ को साफ दर्शाता है। उत्तर प्रदेश से टिकट न देकर मध्यप्रदेश की सीट को अपने निजी स्वार्थों के लिए इस्तेमाल करना यह साबित करता है कि भाजपा ने मध्यप्रदेश को अपनी प्रयोगशाला (लैब) समझ रखा है। हम मध्यप्रदेश को भाजपा की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे। लोकतंत्र के हत्यारों को सत्ता की गद्दी से उखाड़ फेंकने का वक्त आ गया है।’


    पटवारी बोले- कहीं कुछ तो जरूर है…

    उधर कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि हरदीप सिंह पुरी को सत्ता में शामिल रखने के पीछे की विवशता बता रही है कि कहीं कुछ तो ऐसा जरूर है, जिसने भाजपा की नस दबा रखी है। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह बताना ही चाहिए, पुरी के नाम से जुड़े एपस्टीन प्रकरण पर उठे सवालों का जवाब, देश को आखिर कब मिलेगा? उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘मध्यप्रदेशवासियो, मत के मद में डूबी भाजपा राज्य के साथ, आपके वोट का भी खुला अपमान कर रही है। कांग्रेस इसका विरोध करती है।’


    दिग्विजय के बेटे बोले- एपस्टीन के दोस्त को राज्यसभा भेजा

    उधर इसी मुद्दे को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बेटे और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘एक कहावत है कि “Partners in crime are the best kind of friends!” (जुर्म में साथ देने वाले दोस्त सबसे अच्छे दोस्त होते हैं) भाजपा एक दुराचारी को राज्यपाल बनाती है और नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण एवं तस्करी के अंतरराष्ट्रीय अपराधी जेफरी एप्स्टीन के मित्र हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजती है।’


    ‘एप्स्टीन की दोस्ती- जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी’

    आगे उन्होंने लिखा, ‘क्या भाजपा के पास मध्य प्रदेश में एक भी ऐसा योग्य नेता नहीं था, जिसे राज्यसभा भेजा जा सकता था? और अगर नहीं था, तो हरदीप सिंह पुरी ही क्यों? आखिर ऐसी कौन-सी नस थी, जो हरदीप सिंह पुरी के हाथ में थी? मध्य प्रदेश की जनता जानना चाहती है। एप्स्टीन की मित्रता— जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी।’


    घोषित बाल यौन अपराधी है जेफ्री एप्स्टीन

    बता दें कि जेफ्री एप्स्टीन एक घोषित अमेरिकी बाल यौन अपराधी है, और कांग्रेस इस साल की शुरुआत से ही अमेरिका में जारी ‘एप्स्टीन फाइल्स’ में पुरी का नाम होने का दावा करते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। कांग्रेस का दावा है कि अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध ‘एप्स्टीन फाइल्स’ के अनुसार, 2014 से 2017 के बीच एप्स्टीन और पुरी के बीच कम से कम 62 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था तथा 14 बैठकें हुईं थीं। हालांकि पुरी मुख्य विपक्षी दल के आरोपों को पहले खारिज कर चुके हैं। पुरी ने कहा था कि वह एप्स्टीन से कुछ मौकों पर जरूर मिले थे, लेकिन उसके साथ उनकी बातचीत और उसके अपराधों से कोई वास्ता नहीं है। इसके बाद ये मुद्दा हाल ही में उस वक्त एकबार फिर चर्चा में आ गया, जब अमेरिकी न्याय विभाग ने इस साल 21 अक्टूबर को इसी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज जारी किए थे, जिनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन की 2014 की तस्वीरों को भी शेयर किया गया था।

    12 नवंबर को होना है राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव
    इससे पहले भाजपा महासचिव तरुण चुग की ओर से बुधवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति ने श्री पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है। पुरी का राज्यसभा का मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। वह इस समय उत्तर प्रदेश से उच्च सदन के सदस्य हैं। यह सीट पूर्व केन्द्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई है। इस सीट के लिए नामांकन की प्रक्रिया 26 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और दो नंवबर तक चलेगी। तीन नवंबर को नामांकन पत्राें की जांच होगी और पांच नवंबर तक नाम वापस लिये जा सकेंगे।

  • बंगाल में अपने ही मंत्री पर भड़के BJP विधायक, बोले- हत्या के आरोपियों के साथ मंच साझा करना शर्मनाक

    बंगाल में अपने ही मंत्री पर भड़के BJP विधायक, बोले- हत्या के आरोपियों के साथ मंच साझा करना शर्मनाक


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भाजपा के भीतर 2020 में हुई पार्टी नेता मनीष शुक्ला की हत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में है। बैरकपुर से भाजपा विधायक कौस्तुव बागची ने अपनी ही पार्टी के श्रम एवं परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह पर सवाल उठाए हैं। बागची ने कुछ तस्वीरों और वीडियो का हवाला देते हुए पूछा कि मनीष शुक्ला हत्याकांड में जिन लोगों के नाम सामने आए थे, उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता मंच कैसे साझा कर सकते हैं। उन्होंने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी की बात भी कही है।

    2020 में हुई थी मनीष शुक्ला की हत्या
    भाजपा नेता मनीष शुक्ला की 4 अक्टूबर 2020 को टीटागढ़ में भाजपा कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच सीआईडी ने की थी और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अब कौस्तुव बागची ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेताओं उत्तम दास और प्रशांत चौधरी के साथ अर्जुन सिंह की मौजूदगी पर आपत्ति जताई है।

    बागची का दावा है कि मनीष शुक्ला के पिता ने हत्या के मामले में इन दोनों के नाम आरोपियों के तौर पर लिए थे। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों के साथ पार्टी नेताओं की तस्वीरें सामने आने से उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में लोगों के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम मामले में आने और अदालत में दोष सिद्ध होने के बीच अंतर है।

    अर्जुन सिंह से निजी नाराजगी नहीं, लेकिन साथ मंच साझा करने पर आपत्ति
    कौस्तुव बागची ने कहा कि अर्जुन सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उनसे उनकी कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। उनकी आपत्ति उन लोगों के साथ मंच साझा करने को लेकर है, जिनके नाम मनीष शुक्ला हत्याकांड में सामने आने का दावा किया जा रहा है।

    बागची ने कहा कि वह इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, मुख्य सचिव, सीआईडी के महानिदेशक और बैरकपुर पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखने की बात कही है।

    BJP में शामिल करने का भी कर रहे विरोध
    बागची ने उत्तम दास और प्रशांत चौधरी को भाजपा में शामिल किए जाने का भी विरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर वह भाजपा के प्रदेश मुख्यालय के सामने खुद को आग लगा लेंगे। इससे पहले भी उन्होंने इस मुद्दे पर सिर मुंडवाकर विरोध जताने की बात कही थी।

    उनके बयान से पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। हालांकि, दोनों व्यक्तियों की भाजपा में औपचारिक सदस्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया जरूरी होगी।

    अर्जुन सिंह और उत्तम दास ने क्या कहा?
    अर्जुन सिंह ने बागची के आरोपों को ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि राजनीति कैसे करनी है।” वहीं, उत्तम दास ने मंत्री के साथ अपनी मौजूदगी को निजी संबंधों से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि वह काफी समय पहले तृणमूल कांग्रेस से अलग हो चुके हैं और उन्होंने भाजपा में शामिल होने की इच्छा नहीं जताई है।

    TMC ने भी BJP पर साधा निशाना
    इस विवाद पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने भी भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सार्वजनिक रूप से तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को पार्टी में शामिल नहीं करने की बात करती है, लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं करती।

    इस तरह मनीष शुक्ला हत्याकांड को लेकर भाजपा के भीतर उठे सवालों ने बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब इस मामले में संबंधित नेताओं की आगे की प्रतिक्रिया और बागची की प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

  • मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा बनाएगी 4-5 नामों का पैनल, वनथी श्रीनिवासन समेत कई नेता चर्चा में

    मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा बनाएगी 4-5 नामों का पैनल, वनथी श्रीनिवासन समेत कई नेता चर्चा में

    मध्य प्रदेश: में राज्यसभा की खाली हुई एक सीट पर उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर हुई भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया गया। बैठक में 4 से 5 नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजने पर चर्चा हुई। हालांकि, पार्टी ने अभी तक उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    संभावित नामों में तमिलनाडु भाजपा की पूर्व विधायक वनथी श्रीनिवासन का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। इसके अलावा मध्य प्रदेश भाजपा के कुछ नेताओं के नामों पर भी चर्चा हो रही है। उम्मीदवार के चयन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। बैठक में राज्यसभा उपचुनाव के साथ संगठनात्मक गतिविधियों और आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारियों पर भी मंथन हुआ।

    यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के राज्यसभा से इस्तीफे के बाद खाली हुई है। वह अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। उनके इस्तीफे के बाद इस सीट पर उपचुनाव के जरिए नए सदस्य का चयन किया जाना है। इसी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए भाजपा संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार कर रही है।

    मध्य प्रदेश भाजपा के जिन नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं, उनमें पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक आशीष अग्रवाल, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद गोटिया, प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बरुआ और पूर्व मंत्री रंजना बघेल शामिल हैं। हालांकि, इन नामों को लेकर भी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    राज्यसभा उपचुनाव में विधानसभा के विधायकों की संख्या महत्वपूर्ण होगी। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे, इसलिए चुनावी गणित में 229 विधायकों की भूमिका का आकलन किया जा रहा है। बीना विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति पर भी नजर रहेगी। वह खुद को कांग्रेस में बताती हैं, जबकि भाजपा के कार्यक्रमों में भी नजर आती रही हैं। ऐसे में उनकी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही दोनों दलों की प्रभावी संख्या का सटीक आकलन हो सकेगा।

    बैठक में भाजपा ने आगामी राजनीतिक अभियानों को लेकर भी योजना बनाई। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत भोपाल, इंदौर और जबलपुर में बड़ी रैलियां आयोजित करने पर चर्चा हुई। इन कार्यक्रमों में एक लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भी कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है।

    केंद्र सरकार की योजनाओं और मध्य प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए मंत्रियों के नेतृत्व में विशेष टीमें गठित करने और केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों से सांसदों को जोड़ने की व्यवस्था पर विचार हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार के तीन साल के कामकाज को जनता के सामने रखने की रणनीति भी चर्चा का हिस्सा रही। मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के कामकाज को सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी मंथन किया गया।

    बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे और 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी के विरोध में निंदा प्रस्ताव पारित किए जाने की जानकारी भी सामने आई। राज्यसभा उम्मीदवार के चयन के साथ भाजपा ने संगठनात्मक गतिविधियों और राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारियों पर भी ध्यान केंद्रित किया।

  • खड़गे की टिप्पणी पर देशभर में भाजपा का प्रदर्शन, पटना में पुतला दहन कर कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग

    खड़गे की टिप्पणी पर देशभर में भाजपा का प्रदर्शन, पटना में पुतला दहन कर कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस बयान के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने 26 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन शुरू किए। पार्टी ने सभी राज्यों के मुख्यालयों पर विरोध जताने का ऐलान किया है। बिहार की राजधानी पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने खड़गे का पुतला जलाकर कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी की और उनसे बिना शर्त माफी मांगने की मांग की।

    यह विवाद रविवार को पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खड़गे के भाषण से जुड़ा है। कार्यक्रम में भीड़ की ओर से आई एक आवाज के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर खड़गे की टिप्पणी का वीडियो सामने आया। इसके बाद भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं ने इसे व्यक्तिगत मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में सम्मान से जुड़ा मामला बताया है।

    भाजपा ने इस टिप्पणी के खिलाफ देशभर में विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ नारे लगाए। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के दिवंगत माता-पिता को लेकर बार-बार अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना कांग्रेस की वैचारिक स्थिति और हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब तक खड़गे बिना शर्त माफी नहीं मांगते, तब तक पार्टी का विरोध जारी रहेगा।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी खड़गे की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल किसी व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत और लोकतांत्रिक राजनीति की गरिमा का सवाल जुड़ा है। राजनाथ सिंह के मुताबिक, लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना करने और सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान व्यक्तिगत मर्यादा का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस पर वैचारिक रूप से कमजोर होने का आरोप लगाया और कहा कि जनता ऐसे व्यवहार का जवाब देगी।

    जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने तीसरी बार प्रधानमंत्री चुना है और वे करोड़ों लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। झा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास ठोस राजनीतिक मुद्दों की कमी है, जिसके कारण ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में पहले राजनीतिक मर्यादा का महत्व था, लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कटुता और गाली-गलौज की संस्कृति बढ़ी है।

    पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने भी टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके दिवंगत पिता के बारे में अपमानजनक बातें कहना राजनीतिक बहादुरी नहीं है। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधियों की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन आलोचना के नाम पर व्यक्तिगत हमले और दिवंगत परिजनों को निशाना बनाना उचित नहीं है।

    खड़गे की टिप्पणी को लेकर भाजपा और एनडीए नेताओं की नाराजगी के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। भाजपा ने माफी की मांग को अपने विरोध का प्रमुख मुद्दा बनाया है और देशभर में प्रदर्शन की घोषणा की है। इस विवाद ने कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी को और तेज कर दिया है।

  • वोट बचाओ रैली पर राहुल गांधी का बीजेपी पर तंज, बोले- अगले सात दिन भी इसी जोश से प्रचार करते रहिए

    वोट बचाओ रैली पर राहुल गांधी का बीजेपी पर तंज, बोले- अगले सात दिन भी इसी जोश से प्रचार करते रहिए


    नई दिल्ली ।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी और उसके सहयोगी दल खुद ही इस रैली का प्रचार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कटाक्ष किया कि सत्तारूढ़ दल अगले सात दिनों तक भी इसी उत्साह और लगन के साथ प्रचार जारी रखे।

    राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से इस रैली और मार्च में शामिल होने की अपील की। विपक्षी दलों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों के खिलाफ आवाज उठाना है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर उठा रहे हैं।

    राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सवाल उठाने वालों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि अब देश इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगा। उन्होंने मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया।

    उन्होंने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों सहित लोकतंत्र को लेकर चिंतित नागरिकों से रैली में पहुंचने की अपील की। राहुल गांधी के मुताबिक, वोट नागरिकों का अधिकार है और इसकी सुरक्षा के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। विपक्ष इस अभियान के जरिए मतदाता सूची की प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता का सवाल उठा रहा है।

    रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच इसकी तारीख पर भी विवाद सामने आया है। कार्यक्रम 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होना प्रस्तावित है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से इस तारीख पर पुनर्विचार करने की मांग की है। बीजेपी का कहना है कि 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी है और इस दिन राजनीतिक रैली आयोजित करने से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

    बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर इस तारीख के चयन को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने सिख समुदाय और व्यापारियों की भावनाओं का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा। इस तरह रैली का मुद्दा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के साथ-साथ तारीख को लेकर राजनीतिक विवाद का विषय भी बन गया है।

    राहुल गांधी ने बीजेपी की आपत्ति के बीच अपने बयान में सत्तारूढ़ दल और उसके सहयोगियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे रैली का प्रचार जोर-शोर से कर रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि बीजेपी अगले सात दिनों तक भी इसी तरह प्रचार करती रहे, ताकि कार्यक्रम की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।

    ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के जरिए विपक्ष मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, बीजेपी ने आयोजन की तारीख को लेकर आपत्ति जताई है। ऐसे में 1 नवंबर को होने वाला यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। रैली में भागीदारी और दोनों पक्षों की आगे की प्रतिक्रियाओं पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।

  • हैदराबादः भगवान राम की मूर्ति हटाने का विरोध.. BJP बोली – कांग्रेस का तेलंगाना में भी होगा UP जैसा हाल

    हैदराबादः भगवान राम की मूर्ति हटाने का विरोध.. BJP बोली – कांग्रेस का तेलंगाना में भी होगा UP जैसा हाल


    हैदराबाद।
    तेलंगाना (Telangana) की राजधानी हैदराबाद (Hyderabad) में एक चौराहे से भगवान राम की मूर्ति (Lord Ram – Idol) हटाने जाने का भाजपा (BJP) ने विरोध किया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के ऊपर राम विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस फैसले के बाद उन्हें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस ने इसी तरह से भगवान राम की मूर्ति हटाई थी। उसके बाद कांग्रेस वहां से साफ हो गई। यही हाल तेलंगाना में भी होने वाला है। बता दें, यह मूर्ति दशहरा के पहले कुछ हिंदु संगठनों द्वारा लगाई गई थी। बाद में इन संगठनों ने चौराहे का नाम बदलने की अपील की थी।

    दशहरे के कार्यक्रम के पूरा होने के बाद कुछ हिंदू समूहों ने चौराहे का नाम बदलने की अपील करते हुए मूर्ति को यहीं स्थापित रखने पर जोर दिया। प्रशासन को इसकी जानकारी मिलने के बाद नगर प्रशासन ने ट्रस्ट को मूर्ति हटाने का आदेश जारी कर दिया। सोशल मीडिया पर भी भगवान राम की मूर्ति हटाए जाने का वीडियो तेजी के साथ वायरल हो रहा है।


    प्रशासन ने दिया सुप्रीम कोर्ट का हवाला
    हिंदू संगठनों की तरफ से किए जा रहे विरोध के बीच नगर प्रशासन ने कानून का हवाला दिया। प्रशासन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के नियम का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों, फुटपाथों और सार्वजनिक ऊपयोग की जगह पर गैर कानूनी रूप से मूर्तियां स्थापित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।


    भाजपा बोली- कांग्रेस का उत्तर प्रदेश जैसा हाल होगा
    भारतीय जनता पार्टी के तेलंगाना अध्यक्ष एन रामचंद्र राव ने कहा कि कांग्रेस को अब जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस सरकार ने भगवान राम की प्रतिमा को हटाने की कोशिश की है। इससे पहले भी 1949 में पंडित नेहरू की सरकार ने प्रतिमा को हटा दिया था। बाद में कांग्रेस उत्तर प्रदेश से गायब हो गई। अब कांग्रेस सरकार ने बशीरबाग में भी अपनी हरकत को दोहराया है। फिर वही हाल कांग्रेस का इंतजार कर रहा है। लोग न भूलते हैं और न ही माफ करते हैं।

    इस घटनाक्रम का भाजपा और विश्व हिंदू परिषद की तरफ से विरोध किया गया। भाजपा के तेलंगाना सोशल मीडिया हैंडल पर कांग्रेस को हिंदू विरोधी मानसिकता का करार दिया गया। पोस्ट में लिखा गया, “कांग्रेस सरकार की हिंदू-विरोधी मानसिकता एक बार फिर सबके सामने आ गई है। हैदराबाद में बशीरबाग मंदिर के पास, दशहरा के पावन अवसर पर हिंदू संगठनों द्वारा स्थापित प्रभु श्री राम की मूर्ति को हटाना, करोड़ों भक्तों का सीधा अपमान है। उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल तक, जनता ने हमेशा राजनीतिक अहंकार को कुचला है। तेलंगाना की जनता न तो माफ करेगी और न ही चुप बैठेगी।”

    बता दें, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा समेत कई हिंदु संगठन इस चौराहे का नाम बशीबाग से बदलकर श्रीराम चौक करने की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। मूर्ति के हटाए जाने के बाद विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता रविनुथला शशिधर ने कहा कि भविष्य में मंदिर में 108 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब हैदराबाद समेत राज्य के कई शहरों के पुराने नाम बहाल किए जाएंगे।

  • यूपी विधान परिषद चुनाव में फर्जी वोटिंग के आरोपों से गरमाया माहौल, दोपहर 12 बजे तक 24 फीसदी मतदान

    यूपी विधान परिषद चुनाव में फर्जी वोटिंग के आरोपों से गरमाया माहौल, दोपहर 12 बजे तक 24 फीसदी मतदान


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर हो रहे चुनाव के दौरान शुक्रवार को कई जगह हंगामे और मारपीट की घटनाएं सामने आईं। मुजफ्फरनगर में राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के सामने समाजवादी पार्टी और भाजपा के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। फतेहपुर में दोनों दलों के समर्थकों के बीच जमकर मारपीट हुई। वहीं गोरखपुर में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप लगा है। चुनाव के दौरान फर्जी वोटिंग और मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले।

    मुजफ्फरनगर में विवाद उस समय बढ़ गया जब राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के सामने सपा और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी मारपीट में बदल गई। सपा समर्थकों का आरोप था कि मंत्री वोट डालने के दौरान कई लोगों को लेकर मतदान केंद्र के अंदर गए। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    फतेहपुर में खागा तहसील क्षेत्र के विजयीपुर ब्लॉक परिसर के बाहर शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे हंगामा हुआ। सपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेताओं पर फर्जी वोटिंग कराने का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे को दौड़ाकर पीटने लगे। करीब आधे घंटे तक चले विवाद के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराया। इस घटना ने चुनाव के दौरान सुरक्षा और मतदान केंद्रों के आसपास व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

    गोरखपुर में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप सामने आया। बताया गया कि वह मतदान केंद्र के बाहर मीडिया को बयान दे रहे थे। इसी दौरान उनके साथ विवाद हुआ। उधर अलीगढ़ में राज्यमंत्री सुरेंद्र दिलेर के मतदान केंद्र के अंदर जाने को लेकर सपा समर्थकों और एजेंटों ने आपत्ति जताई। यहां भाजपा प्रत्याशी के एजेंट बनकर पहुंचे दो युवकों को पकड़े जाने की भी जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं को लेकर संबंधित पक्षों के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    वाराणसी में मछलीशहर से सपा विधायक रागिनी सोनकर ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक यानी डीआईओएस पर धमकी देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि स्कूलों की मान्यता रद्द करने और शिक्षकों की नौकरी खत्म करने जैसी बातें कही जा रही हैं। दूसरी ओर इटावा के सैफई में सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने अपनी पत्नी सरला यादव के साथ मतदान किया। उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ी और कुछ मतदाताओं के वोट नहीं पड़ पाने का मुद्दा उठाया। शिवपाल ने कहा कि जहां भी अनियमितता हुई है वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी के बयान को भी अनुशासनहीनता के दायरे में बताया और कहा कि इस पर फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे।

    उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक खंड की छह और स्नातक खंड की पांच सीटों पर कुल 152 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इन सीटों के लिए 14.28 लाख मतदाता पंजीकृत हैं और मतदान कराने के लिए 2697 केंद्र बनाए गए हैं। शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक 24.09 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। बरेली-मुरादाबाद क्षेत्र में मतदान का स्तर अपेक्षाकृत अधिक बताया गया जबकि लखनऊ और वाराणसी समेत कई क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत इससे कम रहा। मतदान शाम चार बजे तक निर्धारित है और मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। कानपुर कानपुर देहात और उन्नाव में इस चरण में मतदान नहीं हो रहा है। इन क्षेत्रों में चुनाव वर्ष 2029 में प्रस्तावित है। चुनावी प्रक्रिया के बीच सामने आए विवादों के कारण अब प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है।

  • इंदौर गरबा विवाद में बीजेपी नेता कमल सिंह चौहान पर पॉक्सो की धाराएं, एफआईआर में नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप

    इंदौर गरबा विवाद में बीजेपी नेता कमल सिंह चौहान पर पॉक्सो की धाराएं, एफआईआर में नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप


    मध्य प्रदेश:
    के इंदौर में गरबा आयोजन के दौरान नाबालिग लड़की के साथ कथित अभद्रता का मामला सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष कमल सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 7 और 8 के साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 और 75(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में लड़की ने आरोप लगाया है कि चौहान ने उसका हाथ पकड़ा, खींचा और सीने पर हाथ मारते हुए धक्का दिया। दूसरी ओर, चौहान ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

    यह मामला विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो में आयोजित मां कनकेश्वरी गरबा उत्सव से जुड़ा है। घटना 15 और 16 अक्टूबर की दरमियानी रात की बताई गई है। शिकायत 17 वर्षीय लड़की ने 17 अक्टूबर को दर्ज कराई। आयोजन के दौरान लड़की को धक्का दिए जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया। इसके बाद पार्टी ने भी चौहान से जवाब मांगा और उन्हें तीन दिन के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया।

    एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, लड़की की छोटी बहन गरबा आयोजन में शामिल थी। गरबा करते समय उसे प्यास लगी तो बड़ी बहन ने उसे पानी पिलाया। इस दौरान छोटी बहन का पास बड़ी बहन के पास ही रह गया। वह पास लौटाने के लिए अपनी बहन को आवाज लगा रही थी। इसी बीच कमल सिंह चौहान वहां पहुंचे और उससे पूछने लगे कि वह पास क्यों बदल रही है।

    लड़की ने शिकायत में बताया कि उसने चौहान को स्पष्ट किया कि वह पास नहीं बदल रही, बल्कि उसकी बहन का पास उसके पास रह गया है। आरोप है कि इसके बाद चौहान ने उसका हाथ गलत तरीके से पकड़ा और खींचा। लड़की के मुताबिक, उन्होंने उसके सीने पर हाथ मारते हुए जोर से धक्का भी दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि चौहान ने कहा कि यहां हजारों लड़कियां आती हैं और उन्हें मालूम है कि वे क्या करती हैं। लड़की ने कहा कि इस तरह छुआ जाना उसे अच्छा नहीं लगा। उसने अपने पिता के साथ भी गलत व्यवहार किए जाने का आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

    मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 7 और 8 लगाए जाने की वजह भी शिकायत में दर्ज आरोपों से जुड़ी है। धारा 7 के तहत बच्चे के साथ यौन मंशा से शारीरिक संपर्क बनाने या ऐसा कृत्य करने का आरोप आने पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें कपड़ों के ऊपर से किया गया संपर्क भी परिस्थितियों और कथित मंशा के आधार पर शामिल हो सकता है। धारा 8 में इस अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। दोष सिद्ध होने पर तीन से पांच साल तक की कैद और जुर्माना लगाया जा सकता है।

    इसके अलावा, बीएनएस की धारा 74 महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने की नीयत से हमला करने या आपराधिक बल के इस्तेमाल से संबंधित है। धारा 75 यौन उत्पीड़न से जुड़े कृत्यों को परिभाषित करती है, जब
    कि इसकी उपधारा 75(2) में संबंधित अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। इन धाराओं के तहत कार्रवाई का आधार शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।

    उधर, कमल सिंह चौहान ने वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वह पिछले दस वर्षों से गरबा आयोजन में सेवा दे रहे हैं और अब तक ऐसी घटना नहीं हुई। चौहान का दावा है कि लड़की के पिता शराब पीकर आयोजन में आए थे। उनके मुताबिक, वह पिता को समझाने पहुंचे थे, तभी लड़की बीच में आ गई और उनसे बहस करने लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की ने गाली भी दी और समझाने के बावजूद नहीं मानी। चौहान ने कहा कि जब उन्होंने उसे बाहर निकाला, तब यह घटना हुई।

    चौहान ने यह भी कहा कि यदि उनके व्यवहार से किसी को बुरा लगा है तो वह माफी मांगते हैं। उन्होंने लड़की से भी माफी मांगने की बात कही और मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तथा नगर अध्यक्ष से मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाए। फिलहाल, मामला दर्ज होने के बाद आरोपों की जांच और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।