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  • कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ में 19 मौतों के बाद भाजपा विधायक सजल घोष के ‘नसीब’ वाले बयान पर विवाद

    कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ में 19 मौतों के बाद भाजपा विधायक सजल घोष के ‘नसीब’ वाले बयान पर विवाद

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के दौरान 19 लोगों की मौत के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। इस हादसे पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक सजल घोष के बयान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि कोई नहीं जानता कि रात में क्या हो सकता है। उन्होंने हादसे को नसीब से जोड़ते हुए यह भी कहा कि कोई भी व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकती।

    सजल घोष ने कहा कि ऐसी घटनाओं में गलतियां हो सकती हैं और किसी भी व्यवस्था को सौ फीसदी सुरक्षित नहीं माना जा सकता। उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह नसीब की बात है और कोई नहीं बता सकता कि रात में क्या होने वाला है। उनके इस बयान के बाद हादसे के समय की व्यवस्थाओं और जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    विधायक ने कहा कि किसी दुर्घटना को पूरी तरह रोक पाना हमेशा संभव नहीं होता। उन्होंने अमेरिका में राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी सुरक्षा व्यवस्था हर परिस्थिति में पूरी तरह सफल नहीं रही है। उन्होंने भारत के दो प्रधानमंत्रियों की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि गलतियां हो जाती हैं और दुर्घटनाओं को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    सजल घोष ने यह भी कहा कि अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि चोरबागान पंडाल में हुई भगदड़ के लिए गलती किस स्तर पर हुई। उनके मुताबिक, अगर बारिश नहीं हुई होती तो संभव है कि ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने किसी तरह की जानकारी छिपाने की कोशिश किए जाने की बात से भी इनकार किया। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों के आधार पर ही सामने आ सकेगा।

    घटना के बाद सात लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान, उनकी भूमिका और उन पर लगाए गए आरोपों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

    विधायक ने पीड़ित परिवारों को दी जा रही आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मृतकों में से दो लोग उनके विधानसभा क्षेत्र के निवासी थे। उनके अनुसार, राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा घायलों को पांच लाख रुपये की सहायता और उनके इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही गई है।

    इस हादसे ने दुर्गा पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने वाले आयोजनों में प्रवेश और निकास की व्यवस्था, भीड़ की निगरानी तथा मौसम से जुड़ी परिस्थितियों को संभालना महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, चोरबागान पंडाल में इन व्यवस्थाओं में कहां कमी रही, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

    सजल घोष के बयान को लेकर उठे विवाद के बीच हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और घायल हुए श्रद्धालुओं की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण बनी हुई है। परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा के साथ-साथ दुर्घटना के कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं। जांच से जुड़े तथ्यों के स्पष्ट होने के बाद ही यह निर्धारित हो सकेगा कि भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन कदमों की आवश्यकता है।

  • महुआ मोइत्रा ने उठाई सत्ता परिवर्तन की मांग, कपिल सिब्बल के बयान पर भाजपा और विपक्ष के बीच बढ़ा टकराव

    महुआ मोइत्रा ने उठाई सत्ता परिवर्तन की मांग, कपिल सिब्बल के बयान पर भाजपा और विपक्ष के बीच बढ़ा टकराव

    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार पर निशाना साधते हुए सत्ता परिवर्तन की मांग की है। इससे पहले राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल भी इसी मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना कर चुके हैं। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने के आरोप लगाए हैं।

    महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने बयान में कहा कि विपक्ष सत्ता परिवर्तन चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो सरकार अपने ही निहत्थे नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए कथित रूप से अवैध तरीके से हिरासत में लेती है और उन्हें जेल भेजने के लिए पुलिस तंत्र का इस्तेमाल करती है, उसे सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने हिरासत की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उनका यह बयान चुनावी अनियमितताओं के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आया है।

    इससे पहले कपिल सिब्बल ने भी सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया था कि वे बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि विपक्षी दल अराजकता फैलाने के लिए युवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    राजनाथ सिंह ने लखनऊ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि लोकतंत्र किसी को भी अराजकता फैलाने या संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में कथित चुनावी अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

    रक्षा मंत्री के आरोपों का जवाब देते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि सत्ता परिवर्तन की मांग कांग्रेस या विपक्षी दलों की ओर से नहीं, बल्कि देश की जनता की ओर से उठ रही है। उन्होंने अपने बयान में मौजूदा सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। सिब्बल ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के नारों के साथ सत्ता में आई सरकार ने बाद में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित किया और मतदाता सूची में हेरफेर किया। उन्होंने कहा कि अब सरकार के जाने का समय आ गया है। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।

    इस राजनीतिक विवाद में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष की टिप्पणियां देश को अस्थिर करने के कथित एजेंडे की ओर संकेत करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव सुधारों, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर या युवाओं के भविष्य के लिए नहीं, बल्कि किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करने के लिए प्रयास कर रहा है।

    नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में सत्ता परिवर्तन जैसे शब्दों के इस्तेमाल को विपक्ष की मंशा से जोड़ते हुए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने का आरोप लगाया। उन्होंने विपक्ष की राजनीति को कथित तौर पर अर्बन नक्सल एजेंडे से भी जोड़ा। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनता के जनादेश से होकर गुजरता है, न कि अराजकता के माध्यम से। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और देश की जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देंगी।

    सत्ता परिवर्तन को लेकर यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है, जब चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विवाद जारी है। विपक्ष सरकार की कार्यशैली और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश बता रही है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का मुद्दा और प्रमुख हो गया है।

  • यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी की तैयारी तेज, पीएम मोदी की संभावित 12 रैलियों और 133 सीटों पर खास नजर

    यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी की तैयारी तेज, पीएम मोदी की संभावित 12 रैलियों और 133 सीटों पर खास नजर

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को गति देने की रणनीति बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित प्रदेश दौरों, विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास तथा संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने की योजना पर काम किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नवंबर 2026 के मध्य से प्रधानमंत्री के उत्तर प्रदेश दौरे शुरू हो सकते हैं। चुनाव की घोषणा से पहले करीब 12 कार्यक्रमों और रैलियों के जरिए जनता तक सरकार के कामकाज और विकास योजनाओं को पहुंचाने की तैयारी है।

    प्रधानमंत्री के संभावित कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रदेश की 18 कमिश्नरियों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। पार्टी की योजना केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की उपलब्धियों को सामने रखने की है। इसके लिए विकास योजनाओं, परिवहन सुविधाओं, धार्मिक पर्यटन और निवेश से जुड़ी परियोजनाओं को प्रमुखता दिए जाने की संभावना है। हालांकि, रैलियों और दौरों का अंतिम कार्यक्रम अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है।

    विकास परियोजनाओं को चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। संभावित कार्यक्रमों में वाराणसी अर्बन रोपवे, कानपुर मेट्रो के अगले चरण और आगरा मेट्रो के नए भूमिगत स्टेशनों का उद्घाटन शामिल हो सकता है। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के शिलान्यास की संभावना भी जताई गई है। इन परियोजनाओं के जरिए शहरी परिवहन और कनेक्टिविटी से जुड़े कामों को जनता के सामने रखने की योजना है।

    इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर परिसर की चारदीवारी और संग्रहालय, जेवर में एचसीएल-फॉक्सकॉन की सेमीकंडक्टर इकाई, चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे और वाराणसी के गंजारी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से जुड़े कार्यक्रमों पर भी विचार किया जा रहा है। नोएडा में एक्वा लाइन मेट्रो के सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक विस्तार, जेवर एयरपोर्ट के कार्गो हब और वृंदावन के बांके बिहारी कॉरिडोर से संबंधित परियोजनाएं भी संभावित एजेंडे में शामिल बताई गई हैं।

    संगठन के स्तर पर बीजेपी की नजर 133 विधानसभा सीटों पर है। वाराणसी में प्रस्तावित बैठक में काशी और गोरक्ष प्रांत की इन सीटों को लेकर रणनीति पर चर्चा हो सकती है। बूथ कार्यकर्ताओं से संपर्क, विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ बैठकें और सरकार के कामकाज की जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर देने की योजना है।

    पार्टी करीब 12 हजार विस्तारकों की तैनाती की तैयारी भी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रत्येक 15 बूथ पर एक विस्तारक लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ लगभग 80 हजार संगठनात्मक बैठकें आयोजित करने की योजना बताई गई है। कमजोर बूथों और उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां पार्टी को अपनी संगठनात्मक स्थिति मजबूत करने की जरूरत महसूस होती है।

    चुनावी अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका रहने की संभावना है। नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी, केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह और हेमा मालिनी सहित अन्य नेताओं को भी प्रचार अभियान में शामिल किया जा सकता है। संगठन से जुड़े नितिन नवीन और विनोद तावड़े समेत अन्य नेताओं की जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

    दिसंबर 2026 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषंगिक संगठनों के संगठन प्रभारियों के उत्तर प्रदेश में प्रवास की संभावना भी जताई गई है। यह अभियान करीब तीन महीने तक चल सकता है। इस दौरान जनसंपर्क, सामाजिक संपर्क और संगठनात्मक समन्वय पर ध्यान दिए जाने की बात कही गई है।इस तरह बीजेपी की तैयारी में प्रधानमंत्री की संभावित रैलियों, विकास परियोजनाओं, वरिष्ठ नेताओं के प्रचार और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने जैसे कई पहलू शामिल हैं। हालांकि, प्रस्तावित कार्यक्रमों और परियोजनाओं से जुड़े आयोजनों की अंतिम तारीखों तथा विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

  • रिजीम चेंज के बयान पर सियासी घमासान, राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए सत्ता परिवर्तन की साजिश के आरोप

    रिजीम चेंज के बयान पर सियासी घमासान, राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए सत्ता परिवर्तन की साजिश के आरोप

    नई दिल्ली ।देश में एसआईआर और चुनाव सुधारों को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन के बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष के नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार बदलने के लिए अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव के जरिए सरकार बदलना है।

    लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई चुनाव सुधार, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल विपक्ष की मंशा को स्पष्ट करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग उसी तरह भारत में भी सत्ता बदलने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर सरकार बदलने और दूसरे देशों से प्रेरणा लेने संबंधी बयान दिए जा रहे हैं।

    भाजपा सांसद संबित पात्रा ने भी वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के बयान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन को मौजूदा संघर्ष का उद्देश्य बताने से विपक्ष की मंशा सामने आती है। एसआईआर के मुद्दे पर दिए गए बयानों को लेकर भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह आंदोलन केवल चुनावी प्रक्रिया में सुधार के लिए है या इसके पीछे सरकार बदलने का व्यापक राजनीतिक उद्देश्य भी है।

    विवाद की शुरुआत 15 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए बयानों के बाद हुई। इसमें प्रशांत भूषण के साथ सीजेपी नेता अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल हुई थीं। प्रशांत भूषण ने कहा था कि यदि सरकार की कथित बर्बरता जारी रहती है, तो सरकार बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई नागरिक समाज और युवाओं के नेतृत्व में लड़ी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि वे ‘रिजीम चेंज’ चाहते हैं।

    इससे पहले 14 अक्टूबर को नेहा बोरा ने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर एक संदेश दिया था। इसमें उन्होंने बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि वहां धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ चल रही लड़ाई और भारत में युवाओं की ओर से मोदी सरकार के खिलाफ किए जा रहे संघर्ष के बीच समानता है। उनके इस बयान को भी मौजूदा राजनीतिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

    राजनाथ सिंह के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष चुनाव के माध्यम से सरकार बदलने की बात करता है। उन्होंने 1977 में हुए सत्ता परिवर्तन का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि उस समय भी सरकार नहीं बदली थी क्या। खेड़ा के अनुसार, विपक्ष का उद्देश्य आंदोलन और चुनावों के जरिए सत्ता परिवर्तन करना होता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की मांग करना विपक्ष की राजनीतिक भूमिका का हिस्सा है। उन्होंने भाजपा नेताओं के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार बदलने के लिए चुनावी प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है।

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक संघर्ष को ‘दिमागी नक्सलियों’ और देशभक्त भारतीयों के बीच की लड़ाई बताया। साथ ही उन्होंने इसे संविधान में विश्वास रखने वालों और अराजकतावादियों के बीच का संघर्ष करार दिया।

    ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल, बांग्लादेश के आंदोलन के संदर्भ और सरकार बदलने की मांग को लेकर भाजपा तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर भाजपा नेता इन बयानों को अराजकता और सत्ता परिवर्तन की साजिश से जोड़ रहे हैं, वहीं कांग्रेस का कहना है कि चुनाव के जरिए सरकार बदलना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।

  • राहुल गांधी से लेकर अभिजीत दीपके तक, विरोध प्रदर्शनों पर BJP की जवाबी रणनीति की तैयारी

    राहुल गांधी से लेकर अभिजीत दीपके तक, विरोध प्रदर्शनों पर BJP की जवाबी रणनीति की तैयारी


    नई दिल्‍ली । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं से बातचीत के लिए तैयार है। साथ ही, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के रुख का राजनीतिक जवाब देने तथा चुनाव आयोग के कामकाज पर तथ्य आधारित जानकारी सामने रखने की तैयारी भी की जा रही है। हालांकि, भाजपा ने अपनी रणनीति को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिया है कि मौजूदा हालात से निपटने के लिए बातचीत और राजनीतिक स्तर पर जवाब देने, दोनों विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इस बीच, विपक्षी गठबंधन INDIA, कांग्रेस से जुड़े संगठनों और अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से विरोध जारी रहने की संभावना है।

    चुनाव आयोग के मुद्दे पर फैक्टशीट तैयार करने की चर्चा

    रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए एक फैक्टशीट तैयार कर रही है। पार्टी की रणनीति में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के आरोपों का राजनीतिक जवाब देना भी शामिल बताया गया है। हालांकि, किसी भाजपा नेता ने सार्वजनिक रूप से इन तैयारियों की पुष्टि नहीं की है।

    अखबार से बातचीत में पार्टी से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि देश में कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है और प्रदर्शन सहित सभी गतिविधियां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के दायरे में होनी चाहिए। सूत्र ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है और इसके लिए महाभियोग की प्रक्रिया अपनानी होती है।

    प्रदर्शनकारियों के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन का दावा

    रिपोर्ट में भाजपा से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चुनाव आयोग ने SIR के मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की कोशिश की है। वहीं, सरकार ने दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में प्रदर्शनकारियों से निपटते समय संयम बरता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन रखने की कोशिश की गई।

    भाजपा से जुड़े एक सूत्र ने रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति का हवाला देते हुए कहा कि सरकार विरोध के अधिकार के खिलाफ नहीं है। पार्टी का तर्क है कि निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन होने से लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है और आम नागरिकों को होने वाली परेशानी भी कम की जा सकती है। ये दावे पार्टी से जुड़े सूत्रों के हैं; सरकार की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक रणनीति जारी नहीं की गई है।

    INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर लग सकता है विराम

    पिछले सप्ताह से विपक्षी गठबंधन INDIA के नेता दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, माकपा महासचिव एमए बेबी ने कहा कि उन्हें कांग्रेस की ओर से फोन आया था। कांग्रेस का मानना था कि सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने और याचिका दाखिल करने के बाद मंगलवार को नए मार्च या प्रदर्शन की जरूरत नहीं है।

    हालांकि, गठबंधन के साझा प्रदर्शन पर विराम लगने की स्थिति में भी कांग्रेस से जुड़े कुछ संगठन अपना विरोध जारी रख सकते हैं। इनमें भारतीय युवा कांग्रेस और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के नाम शामिल हैं। ऐसे में दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की आगे की दिशा इन संगठनों के फैसलों पर भी निर्भर करेगी।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने पुलिस को दिया 24 घंटे का समय

    अभिजीत दीपके से जुड़ी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सक्रिय है। सोमवार को पार्टी के प्रतिनिधि दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग लेकर पहुंचे थे। पार्टी ने पुलिस को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया था।

    सीजेपी नेता सौरभ दास ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक अधिकार है और उनकी पार्टी इसी अधिकार के तहत प्रदर्शन करना चाहती है। उन्होंने कहा कि पुलिस अक्सर प्रदर्शन की अनुमति के लिए पहले से संपर्क करने की बात कहती है, इसलिए इस बार तारीख और समय तय करने का फैसला पुलिस पर छोड़ा गया है।

    पार्टी पदाधिकारी आशुतोष रांका ने भी कहा था कि सीजेपी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पुलिस से समय मांग रही है। उनके मुताबिक, अनुमति मिलने पर पार्टी 24 घंटे के भीतर निर्धारित स्थल पर जुटने के लिए तैयार है।

    मंगलवार को नए ऐलान पर नजर

    सीजेपी की ओर से पुलिस को दिया गया 24 घंटे का समय मंगलवार को पूरा होने की बात कही जा रही है। ऐसे में पार्टी की अगली घोषणा पर नजर रहेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस से जुड़े छात्र और युवा संगठन विरोध जारी रखने का फैसला कर सकते हैं, भले ही INDIA गठबंधन के स्तर पर साझा प्रदर्शन न हो।

    फिलहाल भाजपा की ओर से बातचीत और राजनीतिक जवाब की संभावित रणनीति की खबरें सामने आई हैं, लेकिन पार्टी ने आधिकारिक तौर पर अपने अगले कदमों का खुलासा नहीं किया है। दिल्ली में आगे विरोध प्रदर्शन किस रूप में जारी रहेंगे, यह संबंधित दलों और संगठनों के फैसलों के साथ-साथ पुलिस की अनुमति पर भी निर्भर करेगा।

  • राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया संकल्प पत्र, गांवों में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाएं बढ़ाने का वादा

    राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया संकल्प पत्र, गांवों में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाएं बढ़ाने का वादा


    नई दिल्ली । 
    राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश भाजपा कार्यालय के नए सभागार में इस दस्तावेज को जारी करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने का वादा किया। संकल्प पत्र में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाओं को प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गांवों में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीणों को अपनी सामान्य जरूरतों के लिए शहरों की ओर न जाना पड़े।

    संकल्प पत्र जारी करने के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों जैसी सुविधाएं विकसित करने के पक्ष में है। उनका कहना था कि गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। इससे लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए शहरों तक पहुंचने की मजबूरी कम हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार करने को पार्टी ने अपने विकास संबंधी वादों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

    भजनलाल शर्मा ने गांवों से शहरों की ओर बढ़ते पलायन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शहरों का विस्तार हुआ है और कई जगह उनका दायरा 40 से 50 किलोमीटर तक बढ़ गया है। ऐसे में शहरों के भीतर भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि गांवों में ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तो ग्रामीणों को 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय करके शहरों तक आने की जरूरत कम होगी। इससे वे अपने गांव में रहते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।

    संकल्प पत्र में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इन दोनों क्षेत्रों को ग्रामीण जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया। स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और बड़े अस्पतालों की उपलब्धता से जुड़े दूरी के मानकों पर काम करने की बात कही गई है। हालांकि, स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों की संख्या, उनके बीच निर्धारित दूरी तथा स्थापना की समयसीमा का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं किया गया है।

    ग्रामीण युवाओं के लिए खेल सुविधाओं का विस्तार भी भाजपा के प्रमुख वादों में शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पंचायत स्तर पर खेल मैदान विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य गांवों में युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस घोषणा के जरिए पार्टी ने पंचायत स्तर पर खेल के अवसर बढ़ाने की बात रखी है।

    संकल्प पत्र जारी होने से पहले कार्यक्रम के मंच पर एक अप्रत्याशित घटना भी हुई। संगठन महामंत्री अजेय कुमार का स्वागत करने के लिए पहुंचे सोशल मीडिया संयोजक हीरेन कौशिक अचानक फिसलकर नीचे गिर गए। इस घटना से मंच पर मौजूद लोग कुछ समय के लिए चौंक गए। इसके बाद प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया और अन्य कार्यकर्ताओं ने उन्हें संभाला। घटना के बाद हीरेन कौशिक ने संगठन महामंत्री का स्वागत किया।

    कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन महामंत्री अजेय कुमार, प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया, सह प्रभारी कुलदीप चहल और कविता पाटीदार सहित पार्टी के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। पंचायत चुनाव से पहले जारी संकल्प पत्र में ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल सुविधाओं को केंद्र में रखा गया है। इन वादों के साथ गांवों में बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने और शहरों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य सामने रखा गया है। इन घोषणाओं को लागू करने की विस्तृत रूपरेखा और समयसीमा की जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।

  • सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भाजपा का हमला, संबित पात्रा बोले- दिल्ली में आगजनी और हिंसा की कोशिश की गई

    सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भाजपा का हमला, संबित पात्रा बोले- दिल्ली में आगजनी और हिंसा की कोशिश की गई

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर हो रही गतिविधियां भारत की वास्तविक तस्वीर पेश नहीं करतीं। उन्होंने दावा किया कि देश में शांति और सुशासन का माहौल है, जबकि दिल्ली के एक हिस्से में कुछ अराजक तत्व अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पात्रा ने प्रदर्शन को फ्लॉप शो बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव पूरी तरह विफल रहा।

    संबित पात्रा ने कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हो रहा है और टेलीविजन तथा सोशल मीडिया पर जो दिखाया जा रहा है, उसे भारत की पूरी कहानी नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, देश में शांति बनी हुई है और सुशासन के साथ व्यवस्था आगे बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी के एक कोने में अराजक तत्वों की ओर से अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश की जा रही है। भाजपा प्रवक्ता ने प्रदर्शन को लेकर कहा कि यह पूरी तरह फ्लॉप रहा और इसका उद्देश्य सफल नहीं हुआ।

    प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में पात्रा ने आरोप लगाया कि इसके जरिए देश और राजधानी को बंधक बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आगजनी कराने, मारपीट की स्थिति पैदा करने और सड़कों पर संघर्ष कराने का प्रयास किया गया था। हालांकि, ये सभी बातें भाजपा प्रवक्ता के आरोपों के रूप में सामने आईं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों के समर्थन में किसी अलग जांच रिपोर्ट या आधिकारिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।

    भाजपा प्रवक्ता ने अपने बयान में लोकतंत्र और भीड़तंत्र के बीच अंतर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान राजधानी को बंधक बनाने की कोशिश सफल नहीं हुई और इसे भीड़तंत्र पर लोकतंत्र की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जिस तरह की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया गया था, वह सफल नहीं हो सकी। उन्होंने प्रदर्शन के आयोजन और उसके प्रभाव को लेकर अपनी पार्टी का विरोध स्पष्ट किया।

    सीजेपी का यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई थी। प्रदर्शन को लेकर भाजपा की प्रतिक्रिया इसी घटनाक्रम के संदर्भ में आई है। संबित पात्रा ने अपने बयान में प्रदर्शन को देश की व्यापक स्थिति का प्रतिनिधि मानने से इनकार किया और कहा कि जंतर-मंतर पर दिखाई दे रही गतिविधियां भारत की कहानी नहीं हैं।

    भाजपा की ओर से जारी इस प्रतिक्रिया में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा, व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए। पात्रा ने दावा किया कि देश में शांति और सुशासन कायम है तथा राजधानी में कथित अराजक गतिविधियों के जरिए स्थिति बिगाड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने दोहराया कि प्रदर्शन अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सका। इस तरह सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर भाजपा ने राजनीतिक विरोध दर्ज कराया और आगजनी, मारपीट तथा राजधानी को बंधक बनाने की कथित कोशिशों का आरोप लगाया। इन आरोपों के संबंध में उपलब्ध विवरण में विपक्ष या प्रदर्शन आयोजकों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

  • कमलनाथ ने भाजपा पर ओबीसी का 27% आरक्षण खत्म करने का आरोप लगाया, सुप्रीम कोर्ट जाने और विधानसभा में नया कानून लाने की मांग

    कमलनाथ ने भाजपा पर ओबीसी का 27% आरक्षण खत्म करने का आरोप लगाया, सुप्रीम कोर्ट जाने और विधानसभा में नया कानून लाने की मांग

    मध्य प्रदेश । में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में हाई कोर्ट के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में उनकी सरकार की ओर से दिया गया 27 प्रतिशत आरक्षण भाजपा सरकारों के कार्यकाल में समाप्त हो गया। कमलनाथ ने कहा कि आरक्षण की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन वर्ष 2020 से प्रदेश की सत्ता में रही भाजपा सरकारों ने इस मामले में अदालत के सामने ओबीसी वर्ग का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा।

    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग से जुड़ी याचिकाएं खारिज कर दीं। साथ ही, जिन 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां रोककर रखी गई थीं, उन पर तीन महीने के भीतर नियुक्तियां करने के निर्देश दिए। इस फैसले के बाद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई। कमलनाथ ने फैसले के संदर्भ में भाजपा सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने ओबीसी वर्ग के हित में आरक्षण का प्रावधान किया था, लेकिन बाद की सरकारों ने इसे सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए।

    कमलनाथ ने कहा कि वर्ष 2019 में उनकी सरकार ने मध्य प्रदेश विधानसभा में कानून पारित कर ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया था। उनके मुताबिक, यह फैसला संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए लिया गया था। उन्होंने भाजपा नेताओं के उन बयानों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें कांग्रेस सरकार पर जल्दबाजी में आरक्षण लागू करने का आरोप लगाया जा रहा है। कमलनाथ ने ऐसे बयानों को भ्रामक बताते हुए कहा कि इससे अदालत के आदेश की गलत व्याख्या होने की स्थिति बनती है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 से प्रदेश में भाजपा की सरकारें हैं और पिछले छह वर्षों के दौरान ओबीसी की वास्तविक जनसंख्या से जुड़े सही आंकड़े अदालत के सामने नहीं रखे गए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह न्यायालय में इस मामले को मजबूती से प्रस्तुत करे। कमलनाथ के अनुसार, भाजपा नेताओं के बयानों से यह सवाल उठता है कि वर्ष 2019 में आरक्षण लागू होने के बाद उसके संरक्षण के लिए सरकार ने क्या प्रयास किए।

    कमलनाथ ने कहा कि यदि भाजपा नेताओं के दावों को सही मान लिया जाए, तो यह सवाल खड़ा होता है कि पिछले छह वर्षों में अदालत के समक्ष ओबीसी वर्ग का पक्ष रखने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने भाजपा पर आरक्षण के मुद्दे पर जिम्मेदारी निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया। हालांकि, अदालत में ओबीसी आरक्षण से संबंधित पक्ष रखने और आंकड़े प्रस्तुत करने को लेकर कमलनाथ ने जो आरोप लगाए, वे उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

    कमलनाथ ने प्रदेश सरकार से मांग की कि वह ओबीसी वर्ग के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में नया कानून पारित करके 27 प्रतिशत आरक्षण बहाल किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, आरक्षण को सुरक्षित रखने के लिए सरकार को न्यायिक और विधायी स्तर पर कदम उठाने चाहिए। हाई कोर्ट के फैसले के बाद कमलनाथ की यह मांग मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच सामने आई है।

  • ‘राष्ट्रपति की बात को गलत तरीके से पेश कर रहे राहुल’, BJP का आरोप- संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति में घसीट रहे

    ‘राष्ट्रपति की बात को गलत तरीके से पेश कर रहे राहुल’, BJP का आरोप- संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति में घसीट रहे


    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद राहुल गांधी के बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस नेता के उस दावे को झूठा बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति ने चुनाव में धांधली के आरोपों का खंडन नहीं किया और विपक्षी नेताओं की बात स्वीकार कर ली। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल पर दुर्भावनापूर्ण राजनीति करने और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया। यह विवाद इंडिया ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति से मुलाकात और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सौंपे गए ज्ञापन के बाद सामने आया है।

    राहुल के दावे पर भाजपा ने उठाए सवाल

    इंडिया ब्लॉक के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।

    मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह इस बात से हैरान और स्तब्ध हैं कि राष्ट्रपति ने चुनाव में धांधली के आरोपों का खंडन नहीं किया और विपक्षी नेताओं की बातों को स्वीकार कर लिया।

    राहुल के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण और अजीब’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं और राष्ट्रपति की बातचीत को अपने तरीके से पेश कर रहे हैं।

    ‘हर संवैधानिक संस्था को राजनीति का शिकार बना रहे’

    सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोप स्वीकार कर लिए, ऐसा दावा करना राहुल गांधी की दुर्भावनापूर्ण राजनीति को दर्शाता है। उनके मुताबिक, राहुल हर संवैधानिक संस्था को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी के बयान के दौरान उनके साथ खड़े नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भाव भी कई सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल के कथन का सच्चाई से कोई संबंध नहीं दिखता और कांग्रेस नेता का पिछला रिकॉर्ड भी इसी तरह के बयानों का संकेत देता है।

    त्रिवेदी ने आगे कहा कि राहुल का दावा अजीब होने के साथ-साथ तथ्यों से ज्यादा राजनीतिक मंशा से प्रेरित लगता है।

    भाजपा ने राहुल से मांगा सबूत

    भाजपा नेता ने राहुल गांधी से सवाल किया कि राष्ट्रपति ने उनके आरोपों को स्वीकार किया था, इस दावे के समर्थन में उनके पास क्या सबूत हैं। उन्होंने राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक को राजनीतिक मकसद के लिए इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।

    इस मामले में फिलहाल भाजपा की ओर से राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद जो दावा किया, उसे लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।

  • सिरोही में क्रॉस वोटिंग के आरोपों से भाजपा में घमासान, मंदिर में वफादारी की कसम खाने वाले पार्षद समेत चार लोग व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए

    सिरोही में क्रॉस वोटिंग के आरोपों से भाजपा में घमासान, मंदिर में वफादारी की कसम खाने वाले पार्षद समेत चार लोग व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए

    सिरोही। राजस्थान के सिरोही में नगर परिषद सभापति चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर विवाद जारी है। पार्टी के नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से तीन पार्षदों और एक पार्षद पति को हटा दिया गया है। इनमें गीता पुरोहित, प्रवीण राठौड़, गौरव प्रजापत और धनपत सिंह शामिल हैं। इस घटनाक्रम को सभापति चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को अपेक्षा से कम वोट मिलने के बाद उठे सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, भाजपा ने अब तक किसी पार्षद के क्रॉस वोटिंग करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    सिरोही नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं। सितंबर 2026 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा के खाते में 10 सीटें आई थीं। दो वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए थे। इसके बाद 21 सितंबर को सभापति पद के लिए चुनाव हुआ। कांग्रेस ने रितु जैन को और भाजपा ने पूजा माली को उम्मीदवार बनाया था। मतदान में रितु जैन को 30 वोट मिले, जबकि पूजा माली को केवल 5 वोट प्राप्त हुए। इस तरह कांग्रेस ने 25 वोटों के अंतर से सभापति पद पर जीत हासिल की। बाद में कांग्रेस के ईश्वर सिंह उपसभापति पद पर निर्विरोध चुने गए और नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बन गया।

    भाजपा के 10 पार्षदों के मुकाबले पार्टी उम्मीदवार को केवल पांच वोट मिलने के बाद क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई जाने लगी। नतीजों के आधार पर यह सवाल उठा कि क्या भाजपा के कुछ पार्षदों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि, सभापति चुनाव में मतदान गोपनीय होने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि किस पार्षद ने किस उम्मीदवार को वोट दिया। पार्टी के भीतर संदेह और असंतोष के बीच बुधवार देर रात चार लोगों को नगर मंडल के व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया। फिलहाल उनके खिलाफ पार्टी से निष्कासन या किसी पद से हटाने का आदेश सामने नहीं आया है।

    इस विवाद में गौरव प्रजापत का नाम भी चर्चा में है। सभापति चुनाव के बाद भाजपा के पांच पार्षद सारणेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे थे। वहां उन्होंने हाथ में जल लेकर पार्टी के प्रति वफादार रहने और सभापति पद के लिए अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन करने की कसम खाई थी। इन पार्षदों में गौरव प्रजापत का नाम भी बताया गया था। अब उन्हें भी व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद मंदिर में ली गई कसम का मामला फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, गौरव प्रजापत के क्रॉस वोटिंग करने की पुष्टि नहीं हुई है।

    व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने के बाद पार्षद प्रवीण राठौड़ ने संगठन के सभी पदों और जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से ईमानदारी के साथ पार्टी के लिए काम कर रहे थे और संगठन की ओर से दी गई जिम्मेदारियां निभाते रहे। नगर परिषद चुनाव के बाद पार्टी में हुए घटनाक्रम से उन्हें दुख पहुंचा है। उनके अनुसार, अब पहले की तरह सम्मान और भरोसे के साथ काम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने अपना इस्तीफा व्हाट्सऐप के माध्यम से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को भेजा है। राठौड़ ने संगठन के पद छोड़े हैं, लेकिन पार्षद पद से इस्तीफा नहीं दिया है।

    सिरोही भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी ने कहा कि उन्हें पार्षदों को व्हाट्सऐप ग्रुप से हटाए जाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि सभापति चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर कुछ पार्षदों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं और संगठन इन शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी पार्षद का इस्तीफा नहीं मिला है। इस बीच जिले के अन्य निकायों में भी क्रॉस वोटिंग की चर्चा है। पिंडवाड़ा में उपसभापति और शिवगंज में सभापति चुनाव के दौरान दूसरी पार्टी को एक-एक वोट मिलने की बात सामने आई है। आबूरोड में सभापति चुनाव में भाजपा को 27 और कांग्रेस को 13 वोट मिले थे, जबकि उपसभापति चुनाव में भाजपा के वोट घटकर 22 और कांग्रेस के बढ़कर 18 हो गए। हालांकि, इन मामलों में भी संबंधित मतदाताओं की पहचान की पुष्टि नहीं हुई है। सिरोही में सभापति चुनाव से पहले रितु जैन के नामांकन पर भाजपा ने आपत्ति जताई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद दोनों उम्मीदवार मैदान में रहे और रितु जैन चुनाव जीत गईं।