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  • देवास में शिप्रा बैराज पानी विवाद गरमाया: कांग्रेस ने उठाया मुद्दा, सांसद-विधायक ने दिया आश्वासन

    देवास में शिप्रा बैराज पानी विवाद गरमाया: कांग्रेस ने उठाया मुद्दा, सांसद-विधायक ने दिया आश्वासन


    मध्‍य प्रदेश । देवास में शिप्रा बैराज से नर्मदा जल आपूर्ति और उससे जुड़े वितरण को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि देवास के हिस्से का पानी मांगलिया क्षेत्र को दिया जा रहा है, जबकि भाजपा पक्ष इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है। इस मुद्दे ने अब शहर की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है।

    गुरुवार को कांग्रेस नेता प्रदीप चौधरी ने इस मामले को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें उन्होंने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने सीधे फोन पर सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी और विधायक गायत्री राजे पवार से बात की और देवास के जल अधिकारों की सुरक्षा की मांग रखी।

    फोन पर हुई बातचीत के दौरान कांग्रेस नेता ने सांसद से कहा कि देवास के नागरिकों के हितों की रक्षा की जाए और उनके हिस्से का पानी किसी अन्य क्षेत्र को न दिया जाए। इस पर सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह भी इस मुद्दे पर संवेदनशील हैं और देवास की जनता के साथ खड़े हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर उचित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। सांसद ने यह भी कहा कि वे 24 घंटे जनता की सेवा के लिए उपलब्ध हैं।

    इसके बाद कांग्रेस नेता ने विधायक गायत्री राजे पवार से भी फोन पर संपर्क किया। विधायक ने स्पष्ट रूप से कहा कि देवास के हिस्से के पानी में किसी प्रकार की कटौती या अन्य क्षेत्र को स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    कांग्रेस की ओर से लगातार इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। बीते कुछ दिनों में ज्ञापन, धरना और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के माध्यम से पार्टी ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। अब यह मामला सीधे जनप्रतिनिधियों तक पहुंचने के बाद और अधिक राजनीतिक महत्व प्राप्त कर चुका है।

    शिप्रा बैराज से नर्मदा जल की आपूर्ति देवास शहर के लिए की जाती है, लेकिन कांग्रेस का दावा है कि मांगलिया क्षेत्र को भी इसी स्रोत से पानी दिया जा रहा है। वहीं भाजपा और स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि मांगलिया को पानी एनवीडीए के माध्यम से अलग व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराया जा रहा है और देवास के हिस्से में कोई कटौती नहीं की गई है।

    इस पूरे विवाद के बीच अब देखना होगा कि प्रशासनिक स्तर पर क्या स्पष्ट निर्णय सामने आता है और दोनों पक्षों के बीच चल रहा यह राजनीतिक तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई: कांग्रेस ने तेज की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई

    मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई: कांग्रेस ने तेज की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनावी राजनीति में मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंच गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग पर फैसला सुरक्षित रखते हुए मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। इस बीच कांग्रेस ने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामले की तत्काल सुनवाई आवश्यक है क्योंकि नामांकन वापसी की समय-सीमा बेहद निकट है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि यदि विस्तृत सुनवाई अगले दिन हो तो भी तब तक चुनाव परिणाम घोषित न किए जाएं। दूसरी ओर चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि याचिका की प्रति उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है और मामले का अध्ययन करने के लिए समय चाहिए।

    अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले को शुक्रवार तक के लिए सूचीबद्ध कर दिया। इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इस पूरे प्रकरण को उठाने की तैयारी में हैं।

    राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं क्योंकि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह बदल गया है। यदि कांग्रेस उम्मीदवार चुनावी मैदान से बाहर रहती हैं तो भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना बढ़ जाएगी। भाजपा की ओर से महेश केवट के साथ-साथ अन्य दो उम्मीदवारों का निर्वाचन भी बिना मतदान के संभव हो सकता है।

    विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि आयोग ने समय रहते निर्णय नहीं लिया। उन्होंने कहा कि आयोग चाहे तो इस मामले में हस्तक्षेप कर सकता था, जैसा कि अन्य राज्यों के कुछ मामलों में किया गया था। हालांकि ये आरोप कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं और इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    विवाद की जड़ 9 जून को हुई नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया में है, जब रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। भाजपा ने आपत्ति उठाई थी कि उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत से जुड़े मामले की जानकारी नहीं दी। कांग्रेस का तर्क है कि संबंधित प्रकरण केवल एक निजी शिकायत और नोटिस तक सीमित है तथा इसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।

    अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आयोग या अदालत कांग्रेस के पक्ष में राहत देती है तो राज्यसभा चुनाव फिर से मुकाबले की स्थिति में आ सकता है। वहीं यदि नामांकन रद्द रहने का फैसला बरकरार रहता है तो भाजपा के उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो सकता है।

    फिलहाल कानूनी प्रक्रिया जारी है और अंतिम स्थिति अदालत तथा संवैधानिक संस्थाओं के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • जनसमर्थन और विकास कार्यों ने दिलाई ऐतिहासिक पहचान, पीएम मोदी के लंबे कार्यकाल पर बोले सीआर पाटिल

    जनसमर्थन और विकास कार्यों ने दिलाई ऐतिहासिक पहचान, पीएम मोदी के लंबे कार्यकाल पर बोले सीआर पाटिल

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार लंबे कार्यकाल को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। इसी क्रम में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रति जनता का बढ़ता विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है। उनका मानना है कि लंबे समय तक जनता का समर्थन बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आसान नहीं होता और इसके पीछे सरकार की नीतियों तथा कार्यशैली की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर काम किया है। यही कारण है कि जनता का भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। उनके अनुसार सरकार ने विकास, आधारभूत संरचना, सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया है, जिसका लाभ देश के विभिन्न वर्गों तक पहुंचा है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देती है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता का दायरा लगातार बढ़ा है और यही कारण है कि वे लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। उनके अनुसार सरकार की प्राथमिकता हमेशा देशहित और आम नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की रही है।

    विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से करोड़ों लोगों तक सरकारी लाभ पहुंचाया गया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, पेयजल उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिना गया। उनका कहना था कि इन प्रयासों ने आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।

    विपक्ष की भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना आवश्यक है, लेकिन उसकी मजबूती का दायित्व स्वयं विपक्षी दलों पर होता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति, संगठन और जनसंपर्क के माध्यम से जनता का विश्वास हासिल करना पड़ता है। किसी भी दल की कमजोरी या मजबूती का निर्धारण अंततः जनता के समर्थन से ही होता है।

    जल संसाधनों और सिंधु जल समझौते से जुड़े मुद्दों पर भी उन्होंने सरकार का पक्ष रखा। उनका कहना था कि देश के जल संसाधनों का उपयोग राष्ट्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार जल प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर गंभीरता से काम कर रही है, ताकि विभिन्न राज्यों की जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।

    पाकिस्तान और आतंकवाद से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सरकार का रुख स्पष्ट और दृढ़ रहा है। उनके अनुसार देश की सुरक्षा और नागरिकों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं तथा इसी दृष्टिकोण के साथ नीतिगत निर्णय लिए जाते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी वर्षों में भी विकास, जनकल्याण, राष्ट्रीय सुरक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बने रहेंगे। ऐसे में सरकार और विपक्ष दोनों के लिए जनता का विश्वास जीतना सबसे बड़ी चुनौती और अवसर होगा। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में जनसमर्थन, नीतिगत फैसले और विकास कार्य ही किसी भी दल की स्वीकार्यता तय करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।

  • मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर महाकाल दरबार में विशेष पूजन, भाजपा कार्यकर्ताओं ने की राष्ट्र समृद्धि की कामना

    मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर महाकाल दरबार में विशेष पूजन, भाजपा कार्यकर्ताओं ने की राष्ट्र समृद्धि की कामना


    मध्यप्रदेश। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा विशेष धार्मिक अनुष्ठान और पूजन-अर्चन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के स्वस्थ, दीर्घायु और यशस्वी जीवन के साथ देश की प्रगति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की गई।

    महाकाल मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया, बाल योगी उमेश नाथ, भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

    कार्यक्रम के दौरान भगवान महाकाल का विधि-विधान से पूजन किया गया। साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों के तहत 108 जाप का आयोजन भी किया गया। श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य, सामाजिक समरसता और विकास की निरंतरता के लिए प्रार्थना की।

    भाजपा के मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 12 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया है। इस अवसर को उपलब्धियों और जनसेवा के संकल्प के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित विशेष पूजा का उद्देश्य देश के विकास और जनकल्याण के लिए प्रार्थना करना है।

    उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में देश ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से गरीब कल्याण, आधारभूत संरचना के विस्तार, डिजिटल सेवाओं के विकास, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में कार्य किए गए हैं। इन्हीं उपलब्धियों के उपलक्ष्य में भाजपा कार्यकर्ताओं ने महाकाल के दरबार में आकर आभार व्यक्त किया और राष्ट्र की निरंतर प्रगति की कामना की।

    धार्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुए इस आयोजन में कार्यकर्ताओं ने भगवान महाकाल के जयकारे लगाए और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। मंदिर परिसर में पूरे समय श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नेताओं ने कहा कि जनता के विश्वास और सहयोग से देश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।

    उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है और राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता रहा है। इसी परंपरा के तहत भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर यह धार्मिक आयोजन किया।

    कार्यक्रम का समापन राष्ट्र की उन्नति, समाज के कल्याण और नागरिकों के सुख-समृद्धि की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।

  • किसानों के अनाज से सजी पीएम मोदी की भव्य रंगोली, 12 साल के कार्यकाल पर भोपाल में विशेष आयोजन

    किसानों के अनाज से सजी पीएम मोदी की भव्य रंगोली, 12 साल के कार्यकाल पर भोपाल में विशेष आयोजन


    मध्यप्रदेश । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने और देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी भोपाल में भाजपा द्वारा एक विशेष और अनूठा आयोजन किया गया। शहर के नीलबड़ स्थित दुर्गा माता मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों के अनाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशाल और आकर्षक रंगोली बनाई गई, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    इस आयोजन की पहल भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने की। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन स्थल पर सुबह से ही भाजपा कार्यकर्ताओं, किसानों और स्थानीय नागरिकों की बड़ी संख्या जुटने लगी थी। धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल के बीच प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को याद किया गया।

    कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण किसानों के अनाज से तैयार की गई रंगोली रही। इस रंगोली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया। रंगोली के निर्माण में विभिन्न प्रकार के अनाज का उपयोग किया गया, जो देश के अन्नदाताओं के सम्मान और कृषि क्षेत्र के महत्व को भी प्रदर्शित करता है। उपस्थित लोगों ने इस अनूठी कलाकृति की सराहना करते हुए इसे प्रधानमंत्री और किसानों के बीच मजबूत संबंध का प्रतीक बताया।

    कार्यक्रम के दौरान सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इसके पश्चात मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने देश की प्रगति, समृद्धि और विकास के लिए भी प्रार्थना की।

    विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास, सुशासन और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा उपलब्ध कराए गए अनाज से रंगोली बनाकर अन्नदाता वर्ग की भावनाओं को भी सम्मान दिया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधानमंत्री के कार्यों के प्रति आभार व्यक्त करना और जनभागीदारी के माध्यम से उनके योगदान को याद करना था।

    उधर, भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने नेहरू नगर स्थित करुणाधाम आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहां ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया गया। इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी, किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा, जिला अध्यक्ष रविंद्र यति, प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया सहित अनेक भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता के संदेश के साथ आयोजित यह कार्यक्रम भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण जनसंपर्क अभियान भी साबित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

  • पार्षद से संसद तक का सफर! महेश केवट बनेंगे राज्यसभा सांसद, केवट-मल्लाह समाज को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व

    पार्षद से संसद तक का सफर! महेश केवट बनेंगे राज्यसभा सांसद, केवट-मल्लाह समाज को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा नाम चर्चा के केंद्र में है, जो अब तक राष्ट्रीय राजनीति से दूर था, लेकिन जल्द ही संसद के उच्च सदन में पहुंच सकता है। निवाड़ी जिले के ऐतिहासिक नगर ओरछा के निवासी महेश केवट का राज्यसभा सांसद बनना लगभग तय माना जा रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की राह काफी आसान हो गई है। यदि कांग्रेस को अदालत से राहत नहीं मिलती, तो महेश केवट मध्य प्रदेश से केवट, मल्लाह, माझी, भोई और रैकवार समाज के पहले राज्यसभा सांसद बनेंगे।

    ओरछा के वार्ड नंबर 12 स्थित हरिशंकरी मोहल्ले में रहने वाले महेश केवट का राजनीतिक सफर बेहद साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ। वे वर्ष 2000 से 2005 तक ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहने वाले महेश के परिवार का धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से भी गहरा जुड़ाव है। उनके परिवार के सदस्य ओरछा के प्रसिद्ध फूलबाग स्थित लाला हरदौल बैठका की वर्षों से सेवा करते आ रहे हैं। उनके छोटे भाई आज भी नियमित रूप से यहां सेवा कार्य करते हैं। महेश स्वयं सीमेंट व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

    महेश केवट का राजनीतिक सफर हमेशा आसान नहीं रहा। वर्ष 2022 के नगर परिषद चुनाव के दौरान स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाते हुए निष्कासन की कार्रवाई की थी। हालांकि बाद में जब मामले की जांच हुई तो प्रदेश स्तर पर उनके निष्कासन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद भाजपा संगठन ने वर्ष 2023 में औपचारिक रूप से निष्कासन समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने महेश के राजनीतिक कद को और अधिक चर्चा में ला दिया।

    भाजपा संगठन में हाल ही में हुए बदलावों के बाद पार्टी ने ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई, जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हों लेकिन अब तक बड़े पदों पर न पहुंचे हों। इसी रणनीति के तहत सामाजिक रूप से प्रभावशाली लेकिन राजनीतिक रूप से अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व वाले केवट और निषाद समाज पर फोकस किया गया। महेश केवट को पहले मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया और अब उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने बड़ा सामाजिक संदेश देने की कोशिश की है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महेश केवट का चयन केवल मध्य प्रदेश तक सीमित रणनीति नहीं है। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां निषाद, केवट और मल्लाह समाज की बड़ी राजनीतिक भूमिका है। ओरछा की भौगोलिक स्थिति झांसी और बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण महेश केवट भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में भी प्रभावी प्रचारक साबित हो सकते हैं।

    मध्य प्रदेश में भी ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, विंध्य, महाकौशल और नर्मदा क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों पर केवट, मल्लाह, कहार, धीमर और निषाद समाज का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में भाजपा का यह दांव आगामी चुनावों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक छोटे नगर के जनप्रतिनिधि से लेकर राज्यसभा सांसद बनने की दहलीज तक पहुंचे महेश केवट की कहानी अब प्रदेश की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व के उभार का बड़ा उदाहरण बनती नजर आ रही है।

  • MP: नामांकन रद्द होने पर मीनाक्षी नटराजन ने BJP पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- फर्जी बात पेश की

    MP: नामांकन रद्द होने पर मीनाक्षी नटराजन ने BJP पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- फर्जी बात पेश की


    भोपाल।
    मंगलवार को मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से कांग्रेस (Congress) की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Rajya Sabha candidate Meenakshi Natarajan) का नामांकन रद्द कर दिया गया. चुनाव अधिकारियों ने पाया कि उनके नामांकन पत्रों के साथ जमा किए गए हलफनामे में एक मामले से जुड़ी जानकारी कथित तौर पर छिपाई गई थी।

    यह घटनाक्रम तब हुआ, जब बीजेपी नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराते हुए नटराजन की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की. बीजेपी का आरोप था कि लीडर नेता ने तेलंगाना में चल रहे एक अदालती मामले की जानकारी अपने चुनावी हलफनामे में नहीं दी थी, यह एक जरूरी दस्तावेज है, जिसे उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करते समय जमा करना होता है। पार्टी ने तर्क दिया कि जानकारी न देना ज़रूरी जानकारी छिपाने के बराबर है और इसके आधार पर उनका नामांकन रद्द किया जाना चाहिए।

    मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन रद्द होने के बाद बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि जब बीजेपी ने देखा कि कांग्रेस का पूरा विधायक दल एकजुट है और सभी विधायक लगातार पार्टी बैठकों में शामिल हो रहे हैं, तब उसे समझ आ गया कि खरीद-फरोख्त की राजनीति सफल नहीं होगी. उनके मुताबिक, बीजेपी ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर पहले ही यह दिखा दिया था कि उसकी राजनीतिक शुचिता किस स्तर पर पहुंच चुकी है. जब उन्हें लगा कि कांग्रेस के विधायकों में कोई टूट नहीं है, तब इस स्थिति से निपटने के लिए एक ‘फर्जी बात’ पेश कर दी।

    मीनाक्षी ने कहा कि जिस मामले को आधार बनाकर उनका नामांकन रद्द किया गया, वह केवल एक कानूनी नोटिस था. उस पर न तो किसी अदालत ने संज्ञान लिया था और न ही कोई मामला दर्ज हुआ था. उन्होंने कहा कि वह मामला प्री-कॉग्निसेंस स्टेज पर था, इसलिए उसे चुनावी हलफनामे में दर्ज करने का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई कानूनी मामला ही अस्तित्व में नहीं है, तब जानकारी छिपाने का आरोप कैसे लगाया जा सकता है. उनके मुताबिक, अगर किसी मामले में अदालत संज्ञान ले चुकी होती या उनके खिलाफ आरोप तय हो चुके होते और वह उसे छिपातीं, तब यह आरोप उचित माना जा सकता था।

    कांग्रेस लीडर ने यह भी आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर के आखिरी आदेश में उनकी तरफ से रखे गए कानूनी तर्कों का कोई उल्लेख नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि इससे साफ हो जाता है कि यह फैसला किस राजनीतिक दबाव और मंशा से प्रेरित था. मीनाक्षी नटराजन ने कहा, “यह ऐसी कानूनी लड़ाई नहीं है, जिसे हम अदालत में हार गए हों, बल्कि यह वह लड़ाई है जिसे हमने राजनीतिक इच्छाशक्ति के सामने गंवाया है।

    उन्होंने आगे कहा कि यह लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश है, जो पहले वोट चोरी से शुरू हुई और अब सीट चोरी तक पहुंच गई है. चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग निष्पक्ष संवैधानिक संस्था की तरह नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के एक फ्रंटल संगठन की तरह काम कर रहा है. उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • नितिन नवीन की नई टीम का काउंटडाउन शुरू…. जल्द बदलेगा BJP का संगठनात्मक ढांचा

    नितिन नवीन की नई टीम का काउंटडाउन शुरू…. जल्द बदलेगा BJP का संगठनात्मक ढांचा


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) (Bharatiya Janata Party – BJP) के संगठनात्मक ढांचे में जल्द ही बड़ा फेरबदल (Organizational Structure Major Change) देखने को मिल सकता है। पार्टी के शीर्ष निकाय यानी संसदीय बोर्ड सहित कई अहम संगठनात्मक टीमों में बदलाव की पूरी तैयारी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 15 जून के बाद नए पदाधिकारियों की टीम की घोषणा की जा सकती है।

    पार्टी की यह परंपरा रही है कि नए अध्यक्ष के चुने जाने के बाद संगठन में बदलाव किए जाते हैं। इसी कड़ी में, जनवरी में नितिन नवीन (Nitin Navin) के बीजेपी अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद से ही नई टीम को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। बुधवार को एनडीए (NDA) की होने वाली एक बड़ी बैठक के बीच पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि लगभग एक हफ्ते के भीतर नए पदाधिकारियों के नामों का ऐलान कर दिया जाएगा।


    युवा और अनुभव का दिखेगा संगम, इन वर्गों पर होगा फोकस

    45 वर्षीय नितिन नवीन बीजेपी के सबसे युवा अध्यक्ष हैं। ऐसे में पार्टी आलाकमान संगठन को अधिक युवा और सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाला बनाने पर जोर दे रहा है। माना जा रहा है कि पदाधिकारियों की नई टीम में ‘युवा और अनुभव’ का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलेगा।

    आगामी राजनीतिक रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए इस नई टीम में ओबीसी (OBC) और दलितों जैसे प्रमुख वर्गों पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है।


    राज्यों का दौरा कर फीडबैक ले रहे अध्यक्ष

    पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन इन दिनों लगातार कई राज्यों का सघन दौरा कर रहे हैं। इस दौरान वे राज्य की पार्टी इकाइयों से जमीनी फीडबैक जुटाने के साथ-साथ अपनी प्राथमिकताएं भी तय कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उनके इन दौरों से मिलने वाला फीडबैक संगठन में होने वाले समग्र बदलावों के लिए बीजेपी आलाकमान के फैसलों में अहम भूमिका निभाएगा।


    मोदी कैबिनेट में भी फेरबदल की सुगबुगाहट

    पार्टी संगठन में होने वाले इन बदलावों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में भी फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। गौरतलब है कि पीएम मोदी अपने तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे करने जा रहे हैं, जिसे देखते हुए कैबिनेट विस्तार की अटकलें लगाई जा रही हैं। सरकार और संगठन में बदलाव की इन सुगबुगाहटों को हाल के कुछ फैसलों से भी बल मिला है।

    दो केंद्रीय मंत्रियों- पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः उत्तर प्रदेश और दिल्ली में पार्टी की राज्य इकाइयों का प्रमुख बनाकर भेजा गया है। वहीं, जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नेताओं को पार्टी ने राज्यसभा के लिए दोबारा नामित नहीं किया है। इन हालिया घटनाक्रमों के बाद से राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार और संगठन, दोनों स्तरों पर बड़ी तब्दीलियां देखने को मिल सकती हैं।


    कई चौंकाने वाले नामों को मिल सकती है जगह

    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई कोर टीम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित कैबिनेट विस्तार में कई चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं। 15 जून को ‘अधिकमास’ (मलमास) खत्म होने के बाद जून के अंत तक नए पदाधिकारियों की आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है। भाजपा आलाकमान की रणनीति में दक्षिण भारत में पार्टी की स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे अहम राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 46 वर्षीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को उपाध्यक्ष और युवा चेहरों को अन्य पदों पर जगह मिल सकती है।


    रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का क्या होगा?

    केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को राजस्थान से दोबारा राज्यसभा का टिकट नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह के करीबी बिट्टू को पंजाब चुनाव के मद्देनजर वहां कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी या चुनाव अभियान का अहम जिम्मा सौंपा जा सकता है। वहीं केरल से आने वाले मंत्री जॉर्ज कुरियन का भी राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है और उन्हें भी दोबारा नॉमिनेट नहीं किया गया है। चर्चा है कि उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल बनाकर भेजा जा सकता है।


    मोदी कैबिनेट में किन्हें मिल सकती है जगह?

    चूंकि पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को राज्यों के संगठन में भेज दिया गया है, इसलिए मोदी कैबिनेट में पहले से ही जगह खाली हो रही है। 18 जून 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद कैबिनेट में एक बड़े फेरबदल (करीब 12 मंत्रियों के विभाग या पद में बदलाव) की सुगबुगाहट है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को पार्टी ने राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। इस कदम से मजबूत कयास लगाए जा रहे हैं कि चुघ को जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री पद से नवाजा जा सकता है।

    राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को भी राज्यसभा भेजा जा रहा है। संसद में उनका यह डेब्यू उन्हें केंद्र की राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी दिला सकता है। एनडीए के सहयोगी दलों जैसे जेडीयू (JDU), टीडीपी (TDP), एनसीपी (NCP) और आरएलएम (RLM) के नेताओं को इस कैबिनेट विस्तार में तवज्जो मिलने की उम्मीद है। जेडीयू और टीडीपी के खाते में कुछ ‘राज्यमंत्री’ पद जा सकते हैं।

    पंजाब से आप (AAP) के बागी सांसद: चर्चा यह भी है कि आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पंजाब के एक राज्यसभा सांसद को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठ रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि उनके विभाग में भी बदलाव किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा (यूपी से कुर्मी नेता) का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2026 में खत्म हो रहा है, लेकिन 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें दोबारा टिकट मिलने और कैबिनेट में बरकरार रहने की पूरी उम्मीद है।

  • ताश के पत्तों की तरह ढह रहा विपक्ष का किला… राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के करीब BJP

    ताश के पत्तों की तरह ढह रहा विपक्ष का किला… राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के करीब BJP


    नई दिल्ली।
    दो साल पहले हुए लोकसभा चुनावों (Lok Sabha elections) में भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को कड़ी टक्कर देने वाला विपक्षी इंडिया (INDIA) गठबंधन आज अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। आंतरिक कलह, हालिया चुनावी हार और घटक दलों के पाला बदलने के कारण लोकसभा में विपक्ष का आंकड़ा 200 के नीचे गिरने की कगार पर पहुंच गया है। विपक्ष के रणनीतिकारों को डर है कि इस बिखराव के बाद संसद के भीतर सरकार के विधायी और राजनीतिक एजेंडे को चुनौती देने की विपक्ष की बची-कुची क्षमता भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

    संसद के भीतर इंडिया गठबंधन (India Alliance) का किला ताश के पत्तों की तरह ढहता नजर आ रहा है। 22 सांसदों वाली डीएमके और 3 सांसदों वाली आम आदमी पार्टी (AAP) ने हाल ही में इंडिया का साथ छोड़ दिया। इससे इंडिया गठबंधन की लोकसभा में ताकत 2024 के 234 से घटकर पहले ही 209 पर आ चुकी है। अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 29 लोकसभा सांसदों में से दो-तिहाई के बागी होने की खबरों ने विपक्ष की नींद उड़ा दी है। अगर ऐसा होता है तो विपक्षी गठबंधन का आंकड़ा 190 के भी नीचे चला जाएगा।


    भाजपा की नजर पूर्ण बहुमत पर

    विपक्ष के इस पतन से उत्साहित होकर भाजपा लोकसभा में अपने दम पर साधारण बहुमत 272 का आंकड़ा पार करने की रणनीति बना रही है। फिलहाल भाजपा के यहां 240 सांसद हैं। अगर टीएमसी के सांसदों का विलय हो जाता है तो भाजपा का यह आंकड़ा बहुमत के काफी करीब पहुंच जाएगा। वहीं, संकट सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं है। राज्यसभा में भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों के बीच विभाजन की पूरी संभावना है। हाल ही में आम आदमी पार्टी में भी यह देखा गया। इन बदलते समीकरणों के कारण राज्यसभा में भी एनडीए दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच रहा है।

    इंडिया गठबंधन के कुछ पदाधिकारियों को डर है कि इस मजबूती से उत्साहित होकर सत्तारूढ़ गठबंधन (NDA) विपक्ष के अन्य कमजोर या असंतुष्ट धड़ों को भी अपने पाले में लाने के लिए प्रेरित हो सकता है।


    महिला आरक्षण और परिसीमन बिल की वापसी तय

    दोनों सदनों में सरकार का विधायी रास्ता पूरी तरह साफ होने के बाद अब यह माना जा रहा है कि मोदी सरकार अपने कई महत्वाकांक्षी और लंबित विधेयकों को तेजी से आगे बढ़ाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब यह केवल समय की बात है कि सरकार महिला आरक्षण में संशोधन विधेयक और परिसीमन बिल को दोबारा संसद में पेश कर पास करा लेगी, जिन्हें पिछले सत्र में इंडिया गठबंधन ने एकजुट होकर रोक दिया था।


    हार का सिंड्रोम और कांग्रेस पर आरोप

    सोमवार को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में जमकर आरोप-प्रत्यारोप और घोर निराशा का माहौल देखा गया। विपक्षी नेताओं का यह गुस्सा और हताशा लगातार मिली चुनावी शिकस्त का नतीजा है। 2024 के आम चुनाव के बाद विपक्ष को हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस राजनीतिक कुप्रबंधन के चलते क्षेत्रीय दलों खासकर TMC, RJD, DMK, शिवसेना-UBT, एनसीपी-शरदचंद्र पवार, आप और लेफ्ट का कांग्रेस के नेतृत्व की क्षमता पर से भरोसा उठ गया है।


    अब सिर्फ 6 राज्यों में बची INDIA की सत्ता

    लगातार मिली हार के बाद अब ‘इंडिया’ गठबंधन का शासन देश के गिने-चुने राज्यों में ही सिमट कर रह गया है। उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में विपक्ष की सरकार है। वहीं, दक्षिण भारत में कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में कांग्रेस सत्ता में है।

  • राज्यसभा की 26 सीटों पर मुकाबले से पहले तेज हुई रणनीतिक जंग, भाजपा के दांव से कांग्रेस सतर्क

    राज्यसभा की 26 सीटों पर मुकाबले से पहले तेज हुई रणनीतिक जंग, भाजपा के दांव से कांग्रेस सतर्क

    नई दिल्ली । राज्यसभा की रिक्त हो रही 26 सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले देश की राजनीति में गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन राज्यसभा में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है, जबकि विपक्षी दल अपने मौजूदा संख्या बल को सुरक्षित रखने और संभावित राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कई राज्यों में राजनीतिक समीकरणों और संभावित क्रॉस-वोटिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    इस बार सबसे अधिक चर्चा मध्य प्रदेश और झारखंड की हो रही है, जहां भाजपा के कुछ फैसलों ने विपक्षी दलों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों राज्यों में उम्मीदवारों के चयन और चुनावी गणित ने मुकाबले को अपेक्षा से अधिक दिलचस्प बना दिया है। भाजपा की कोशिश केवल अपनी सीटें सुरक्षित करने तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि वह विपक्षी दलों पर मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दबाव बनाने का प्रयास भी कर रही है।

    मध्य प्रदेश में भाजपा द्वारा तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारना राजनीतिक हलकों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है और वह दो सीटों पर सहज जीत की स्थिति में मानी जा रही है। हालांकि तीसरे उम्मीदवार की एंट्री ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, को सतर्क कर दिया है। कांग्रेस का मानना है कि यह कदम चुनावी मुकाबले को जटिल बनाने और विपक्षी खेमे में असहजता पैदा करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने के लिए विशेष कदम उठा सकती है। संभावित क्रॉस-वोटिंग या अनुपस्थिति की आशंकाओं के बीच पार्टी नेतृत्व लगातार अपने विधायकों के संपर्क में बताया जा रहा है। इसी कारण राज्यसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश की राजनीति में गतिविधियां सामान्य से अधिक तेज हो गई हैं।

    विधानसभा के वर्तमान गणित के अनुसार किसी उम्मीदवार को जीत के लिए निर्धारित संख्या में मतों की आवश्यकता होगी। ऐसे में अतिरिक्त उम्मीदवार की मौजूदगी चुनाव को केवल औपचारिक प्रक्रिया न बनाकर रणनीतिक मुकाबले में बदल सकती है। यही कारण है कि दोनों प्रमुख दल लगातार एक-दूसरे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी कर रहे हैं।

    झारखंड में भी राजनीतिक तस्वीर कम दिलचस्प नहीं है। यहां दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय स्वरूप ले चुका है। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन देकर चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। इस फैसले ने राज्य में राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

    झारखंड में अब नजर इस बात पर रहेगी कि उपलब्ध संख्या बल और सहयोगी दलों के समर्थन के आधार पर कौन-सा उम्मीदवार बढ़त हासिल कर पाता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि मतदान के दौरान कोई अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आता है तो परिणामों पर उसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

    दूसरी ओर राजस्थान में स्थिति अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रही है। यहां रिक्त सीटों के मुकाबले उतने ही उम्मीदवार मैदान में होने के कारण निर्विरोध निर्वाचन की संभावना मजबूत मानी जा रही है। वहीं गुजरात में भी भाजपा के उम्मीदवारों की राह अपेक्षाकृत आसान दिखाई दे रही है और वहां बड़े मुकाबले की संभावना कम नजर आ रही है।

    राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत से नहीं लड़े जाते, लेकिन इनका राजनीतिक महत्व बेहद व्यापक होता है। संसद के उच्च सदन में संख्या बल किसी भी सरकार की विधायी क्षमता को प्रभावित करता है। यही कारण है कि चुनाव से पहले प्रत्येक सीट को लेकर राजनीतिक दल पूरी ताकत और रणनीति के साथ मैदान में उतरते हैं। इस बार भी मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में विकसित हो रहे समीकरण चुनावी प्रक्रिया को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहे हैं।