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  • बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम जल्द होगी घोषित, नितिन नवीन के साथ विनोद तावड़े और हरीश द्विवेदी को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

    बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम जल्द होगी घोषित, नितिन नवीन के साथ विनोद तावड़े और हरीश द्विवेदी को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को लेकर चर्चा अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय संगठन में कुछ पुराने और अनुभवी चेहरों को बरकरार रखते हुए युवाओं और महिलाओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। नई टीम का गठन ऐसे समय में होने जा रहा है, जब बीजेपी के सामने अगले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण चुनावी चुनौतियां हैं।

    पार्टी की राष्ट्रीय टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव और अन्य प्रमुख संगठनात्मक पदों के लिए कई नामों पर विचार किए जाने की चर्चा है। इनमें हरीश द्विवेदी और विनोद तावड़े को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना बताई जा रही है। दोनों नेताओं के संगठनात्मक अनुभव और अलग-अलग राज्यों में उनकी राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए उन्हें नई टीम में जगह दिए जाने की अटकलें तेज हैं।

    सुनील बंसल के भी नई टीम में बने रहने की संभावना जताई जा रही है। संगठन के स्तर पर उनका अनुभव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में नई टीम में अनुभवी नेताओं और नई पीढ़ी के चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है। पार्टी नेतृत्व संगठन को ऐसा स्वरूप देना चाहता है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों और आयु वर्गों को प्रतिनिधित्व मिले।

    नई टीम में युवाओं को अधिक अवसर देने पर भी विशेष जोर रहने की संभावना है। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी फैसले किए जा सकते हैं। संगठन में 40 से 50 वर्ष की आयु वाले नेताओं को आगे लाने की चर्चा भी सामने आई है। इससे पार्टी में नई पीढ़ी के नेतृत्व को मजबूत करने की रणनीति का संकेत मिलता है।

    बीजेपी के लिए यह संगठनात्मक बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव पार्टी की रणनीति के लिए अहम रहेंगे। इन चुनावों के बाद 2029 में लोकसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन की नई टीम को चुनावी तैयारियों के साथ-साथ राज्यों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

    उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनावी समीकरण बीजेपी के लिए विशेष महत्व रखते हैं। वहीं उत्तराखंड और पंजाब में अलग राजनीतिक परिस्थितियां हैं। नई टीम का गठन करते समय अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक और सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखने की कोशिश की जा सकती है। क्षेत्रीय संतुलन के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व भी संगठनात्मक नियुक्तियों में महत्वपूर्ण कारक रह सकता है।

    इस बीच नितिन नवीन और बीजेपी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष सोमवार शाम विशाखापट्टनम पहुंचने वाले हैं। दोनों नेता वहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक 19 से 21 अगस्त तक प्रस्तावित है, जिसमें संघ और उससे जुड़े संगठनों के बीच विभिन्न संगठनात्मक और समसामयिक मुद्दों पर चर्चा होनी है।

    बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम को लेकर अंतिम तस्वीर इसी बैठक के दौरान या उसके बाद स्पष्ट होने की संभावना है। हालांकि जब तक पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक संभावित नामों और जिम्मेदारियों को लेकर चल रही चर्चाओं को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

    नितिन नवीन के सामने नई टीम के गठन के साथ संगठन में अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। साथ ही आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए राज्यों में पार्टी की चुनावी तैयारियों को गति देना भी महत्वपूर्ण होगा। नई राष्ट्रीय टीम से बीजेपी की संगठनात्मक प्राथमिकताओं और आगामी चुनावों की रणनीति की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर बीजेपी का चिदंबरम पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से नक्सलवाद पर रुख स्पष्ट करने को कहा

    ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर बीजेपी का चिदंबरम पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से नक्सलवाद पर रुख स्पष्ट करने को कहा

    नई दिल्ली । ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए संबोधन में नक्सली हिंसा के साथ नक्सली विचारधारा को बढ़ावा देने वाली सोच से सावधान रहने की बात कहे जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम की टिप्पणी के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है।

    पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ कहा जाता है तो उन्हें इस संबोधन पर गर्व है। उनके इस बयान को बीजेपी ने नक्सलवाद के मुद्दे पर कांग्रेस की सोच से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी के कुछ ही समय बाद चिदंबरम का खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताना राजनीतिक बहस को नया मोड़ देता है।

    सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से सवाल किया कि पार्टी नक्सलवाद के मुद्दे पर किस रुख के साथ खड़ी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस पुराने बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया था। बीजेपी का तर्क है कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह मनमोहन सिंह के पुराने रुख का समर्थन करती है या चिदंबरम की मौजूदा टिप्पणी को सही मानती है।

    बीजेपी ने इस बहस को देश में नक्सली हिंसा के पुराने हालात से भी जोड़ा है। पार्टी नेताओं के अनुसार, एक समय देश के कई हिस्सों में नक्सली गतिविधियों का व्यापक प्रभाव था और बड़ी संख्या में जिले प्रभावित बताए जाते थे। हिंसा के कारण सुरक्षाबलों और आम नागरिकों की जान जाने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।

    सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि केंद्र सरकार की सुरक्षा और विकास संबंधी कोशिशों के बाद नक्सली हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने बताया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 31 मई 2026 तक नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर शून्य हो गई थी। बीजेपी इसे नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय से चलाए जा रहे अभियान की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।

    इस दौरान बस्तर का उदाहरण भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बना। कभी नक्सली हिंसा के लिए चर्चा में रहने वाले बस्तर में अब खेल और अन्य सामाजिक गतिविधियों के विस्तार का उल्लेख करते हुए बीजेपी ने इसे बदले हुए माहौल का संकेत बताया। त्रिवेदी ने बस्तर ओलंपिक जैसी गतिविधियों का हवाला देकर कहा कि क्षेत्र में सामान्य स्थिति और विकास की दिशा में बदलाव दिखाई दे रहा है।

    विवाद की मूल शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण से हुई थी। उन्होंने कहा था कि हथियार उठाने वाले नक्सलवाद का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन ऐसी विचारधारा और सोच से सतर्क रहने की आवश्यकता है जो नक्सली विचारों को बढ़ावा देती हो। इसके बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।

    अब चिदंबरम की टिप्पणी और बीजेपी की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा कांग्रेस और बीजेपी के बीच वैचारिक तथा राजनीतिक टकराव का नया विषय बन गया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस बयान को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।

  • गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    मध्य प्रदेश:  के पूर्व मंत्री और रहली विधानसभा क्षेत्र से लगातार नौ बार विधायक रहे गोपाल भार्गव का एक बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। रहली में वीर दुर्गादास राठौर जयंती समारोह के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। इसी दौरान उन्होंने अपने आलोचकों पर भी तीखा तंज कसा।

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि बीजेपी में प्रत्येक कार्यकर्ता का अपना महत्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने प्रसंग का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, पार्टी में किसी कार्यकर्ता की अहमियत किसी पद या बाहरी प्रमाण से तय नहीं होती, बल्कि संगठन के प्रति उसकी भूमिका और योगदान महत्वपूर्ण होता है।

    इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। उनके इस बयान की चर्चा इसलिए भी तेज हुई क्योंकि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर उनके नाम से जुड़ा एक स्थानीय विवाद सामने आया था। इसी विवाद को उनके ताजा बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दरअसल, कुछ दिन पहले एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति गोपाल भार्गव के गढ़ाकोटा स्थित निवास के बाहर लगे बोर्ड पर एक पर्चा चिपकाता दिखाई दिया था। इस पर्चे में भार्गव को ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ कहकर निशाना बनाया गया था। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी।

    रहली के कार्यक्रम में भार्गव ने इसी तरह की आलोचनाओं का जवाब देते हुए हाथी और कुत्ते का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हाथी अपनी चाल से आगे बढ़ता रहता है और उसके पीछे कुत्ते भौंकते रहते हैं। उनके बयान का आशय यह था कि आलोचना के बावजूद व्यक्ति को अपने रास्ते और काम से विचलित नहीं होना चाहिए।

    भार्गव ने अपने संबोधन में चींटियों और गन्ने का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की कि सार्वजनिक जीवन में आलोचनाएं होती रहती हैं, लेकिन उन्हें अपनी जिम्मेदारी और लक्ष्य से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बीजेपी कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री के समान बताने वाला उनका बयान पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर उनकी सोच को भी सामने रखता है। उन्होंने कहा कि संगठन में कोई सेवक की भूमिका निभाता है तो कोई जनप्रतिनिधि के तौर पर जिम्मेदारी संभालता है। उनके अनुसार, पार्टी में हर स्तर के कार्यकर्ता का अपना महत्व है।

    गोपाल भार्गव का मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वह रहली विधानसभा सीट से लगातार नौ बार निर्वाचित हो चुके हैं और राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उनके सार्वजनिक बयानों पर राजनीतिक नजर बनी रहती है।

    इस बार भी उनके बयान के दो हिस्से सबसे अधिक चर्चा में हैं। पहला, बीजेपी के हर कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री जैसा बताना और दूसरा, आलोचकों के लिए ‘भौंकने वालों’ वाली टिप्पणी करना। उनके समर्थक इसे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

    फिलहाल बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, भार्गव ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं के महत्व और आलोचनाओं से प्रभावित न होने का संदेश दिया। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ विवाद अब उनके बयान के कारण व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

  • ‘वंदे मातरम्’ विवाद में सोनिया गांधी के खिलाफ बीजेपी ने मंगलुरु पुलिस में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की

    ‘वंदे मातरम्’ विवाद में सोनिया गांधी के खिलाफ बीजेपी ने मंगलुरु पुलिस में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की


    नई दिल्ली । कर्नाटक के मंगलुरु में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता विकास पुत्तूर ने सोनिया गांधी के खिलाफ उर्वा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत 15 अगस्त को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में हुए स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान से जुड़ी है।

    बीजेपी नेता का आरोप है कि कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाए जाने के समय सोनिया गांधी का व्यवहार राष्ट्रगीत के प्रति सम्मानजनक नहीं था। शिकायत में कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर व्यवधान पैदा करने और गीत के प्रति उचित सम्मान नहीं दिखाने का आरोप लगाया गया है।

    विकास पुत्तूर ने पुलिस से मामले की जांच करने और शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि राष्ट्र से जुड़े प्रतीकों और गीतों के सम्मान से संबंधित मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के अनुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

    यह विवाद 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के बाद सामने आया। कार्यक्रम में ध्वजारोहण के बाद ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ था। बीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया कि गीत के दौरान कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता बातचीत करते हुए दिखाई दिए और उनका रवैया उचित नहीं था। इसी आधार पर बीजेपी ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताया है।

    मामले को लेकर बीजेपी नेता ने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि शिकायत पर कार्रवाई करते समय किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस और राज्य सरकार की ओर से मामले में कार्रवाई नहीं की जाती है तो वह कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं।

    हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। पुलिस की ओर से मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाया जाता है, यह स्पष्ट होना बाकी है। फिलहाल शिकायत के आधार पर लगाए गए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय गीत है और इसके साथ देश के स्वतंत्रता संघर्ष की ऐतिहासिक स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। इसी कारण सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके सम्मान और प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया अक्सर महत्वपूर्ण बन जाती है।

    मंगलुरु में दर्ज शिकायत ने इस मुद्दे को कर्नाटक की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना दिया है। एक तरफ बीजेपी इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं मामले में पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर कोई कानूनी उल्लंघन बनता है या नहीं।

    इस विवाद के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना भी है। शिकायतकर्ता ने हाई कोर्ट जाने की बात कहकर मामले को आगे कानूनी स्तर पर ले जाने का संकेत दिया है। अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं।

    फिलहाल मामले का केंद्र 15 अगस्त के कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ के दौरान हुए कथित व्यवहार पर है। पुलिस जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। तब तक सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के दावे के रूप में ही देखे जा रहे हैं।

  • तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे युवा, इंदौर में भाजपा की यात्रा में दिखा जोरदार उत्साह..

    तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे युवा, इंदौर में भाजपा की यात्रा में दिखा जोरदार उत्साह..

     मध्य प्रदेश:  के इंदौर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से बड़ी तिरंगा यात्रा निकाली गई। टंट्या भील चौराहे से शुरू हुई इस यात्रा में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, युवा, नेता और आम नागरिक शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लेकर लोग देशभक्ति के नारे लगाते हुए शहर की सड़कों से आगे बढ़े।

    यात्रा के दौरान कई स्थानों पर तिरंगे नजर आए और माहौल में देशभक्ति का रंग दिखाई दिया। आयोजन में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और पदाधिकारी भी मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम को पार्टी की ओर से बड़े जनसंपर्क और संगठनात्मक सक्रियता के प्रदर्शन के तौर पर भी देखा गया।

    इंदौर में यह यात्रा ऐसे समय निकाली गई, जब शहर का टंट्या भील चौराहा पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां युवाओं की ओर से शिक्षा और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया गया था। इसी पृष्ठभूमि में भाजपा की तिरंगा यात्रा को राजनीतिक संदेश से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

    हालांकि यात्रा में किसी एक मुद्दे को केंद्र में रखने के बजाय राष्ट्रभक्ति को प्रमुख विषय बनाया गया। कार्यकर्ताओं और युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा में हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण शहर में कई जगह आयोजन को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।

    यात्रा में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अलावा विधायक मधु वर्मा, रमेश मेंदोला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा समेत कई नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आम नागरिक भी यात्रा का हिस्सा बने। इससे आयोजन का दायरा केवल पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहा।

    तिरंगा यात्रा में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से दिखाई दी। बड़ी संख्या में युवा तिरंगा लेकर आगे बढ़ते नजर आए। भाजपा की ओर से युवाओं की इस भागीदारी को संगठन के प्रति समर्थन और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।

    टंट्या भील चौराहे पर हाल में हुए प्रदर्शन के बाद भाजपा की ओर से निकाली गई यह यात्रा शहर की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रही। एक ओर जहां युवाओं से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन हुआ, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने तिरंगा यात्रा के जरिए राष्ट्रभक्ति को केंद्र में रखते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

    यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। सड़क पर तिरंगा लेकर चल रहे लोगों और देशभक्ति के नारों से माहौल में उत्सव जैसा वातावरण बना रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए भाजपा ने संगठन की सक्रियता के साथ युवाओं और आम लोगों की भागीदारी को भी सामने रखा।

    इंदौर में स्वतंत्रता दिवस के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के बीच भाजपा की यह तिरंगा यात्रा राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से चर्चा में रही। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक रूप दिया और शहर में राष्ट्रभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों के बीच इसकी अलग पहचान बनी।

  • हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़ने की मुख्य वजह बताई और पंजाब में ड्रग्स की समस्या पर सवाल उठाए।

    हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़ने की मुख्य वजह बताई और पंजाब में ड्रग्स की समस्या पर सवाल उठाए।


    नई दिल्ली । 
    पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़ने और भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने के फैसले को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरानी पार्टी में खेल और जनहित से जुड़े सुझावों की लगातार उपेक्षा की जा रही थी। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब में पैर पसार रहे नशीले पदार्थों के नेटवर्क और ड्रग्स की गंभीर होती समस्या पर राज्य की भगवंत मान सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।

    हरभजन सिंह ने एक विशेष बातचीत के दौरान बताया कि जब उन्हें पंजाब के मुख्यमंत्री की ओर से पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था, तब उनका मुख्य उद्देश्य राज्यसभा में खेलों और खिलाड़ियों के मुद्दों को मजबूती से उठाना था। उन्होंने शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे सक्रिय राजनीति के बजाय केवल खेल विकास पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इस अवसर के जरिए वे पंजाब समेत पूरे देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना चाहते थे।

    हालांकि, समय बीतने के साथ पार्टी के भीतर उनके सुझावों को दरकिनार किया जाने लगा। भविष्य की योजनाओं और सुधारों को लेकर जब भी उन्होंने अपनी बात रखनी चाही, तो उनकी आवाज़ को अनसुना कर दिया गया। लगातार किनारे किए जाने से वे मानसिक रूप से काफी परेशान महसूस कर रहे थे। जिस सोच और विज़न के साथ वे पार्टी में शामिल हुए थे, वह कार्य पूरा नहीं हो पा रहा था, जिसके चलते उन्होंने अंततः पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया।

    पंजाब में गहराते नशीले पदार्थों के संकट पर चिंता जताते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा कि इसके दुष्परिणाम बेहद भयावह रूप ले रहे हैं। यह समस्या केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के जिस भी हिस्से में ड्रग्स पहुंचती है, वहां युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब में स्थिति और भी अधिक संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बात की गहन जांच होनी चाहिए कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति राज्य में किस रास्ते से हो रही है। इस समस्या पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए सख्त से सख्त कानून बनाए जाने और उन्हें कड़ाई से लागू करने की तत्काल आवश्यकता है। सरकार को इस दिशा में जवाबदेही तय करते हुए कड़े कदम उठाने होंगे ताकि युवा पीढ़ी को इस दलदल से बचाया जा सके।

    आप से अलग होने के बाद उनके आवास के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों और पुतला दहन की घटनाओं पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोगों की पहचान किसी से छिपी नहीं है, इसलिए वे किसी का व्यक्तिगत नाम नहीं लेना चाहते। देश की जनता ने उन्हें एक क्रिकेटर के रूप में अपार प्रेम और सम्मान दिया है, जो उनके लिए सर्वोपरि है।

    देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में भी खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और युवाओं को नशे के कुचक्र से दूर रखने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि हरभजन सिंह द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे देश के खेल जगत और युवा नीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है।

    हरभजन सिंह का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़कर वे खेलों के विकास और युवाओं के कल्याण के लिए अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगे। आने वाले समय में वे खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और नशा विरोधी अभियानों को राष्ट्रव्यापी स्तर पर गति देने के लिए प्रयासरत रहेंगे, ताकि देश का युवा सही दिशा में आगे बढ़ सके।

  • दिल्ली में नितिन नवीन से मिले हेमंत खंडेलवाल, मध्य प्रदेश भाजपा संगठन और आगामी रणनीति पर हुई विस्तृत चर्चा

    दिल्ली में नितिन नवीन से मिले हेमंत खंडेलवाल, मध्य प्रदेश भाजपा संगठन और आगामी रणनीति पर हुई विस्तृत चर्चा

    नई दिल्ली / मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने गुरुवार को दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बैठक में मध्य प्रदेश भाजपा संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। मुलाकात को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें प्रदेश में पार्टी की मौजूदा गतिविधियों और आगे की कार्ययोजना से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

    हेमंत खंडेलवाल और नितिन नवीन के बीच हुई मुलाकात को औपचारिक रूप से सौजन्य भेंट बताया गया है। हालांकि, बैठक के दौरान प्रदेश संगठन की गतिविधियों, पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और संगठन को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने प्रदेश में भाजपा के संगठनात्मक कामकाज और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विचार साझा किए।

    मध्य प्रदेश में भाजपा संगठन लगातार अपनी गतिविधियों को विस्तार देने पर जोर दे रहा है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष की राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ हुई बैठक को संगठन के अगले चरण की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में प्रदेश में चल रहे संगठनात्मक कार्यक्रमों की स्थिति और पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

    बैठक के दौरान प्रदेश संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और पार्टी की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की दिशा में चल रहे प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ साझा की गई।

    मध्य प्रदेश भाजपा के सामने संगठनात्मक गतिविधियों को लगातार सक्रिय बनाए रखने के साथ आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारी भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में राष्ट्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन के बीच बेहतर समन्वय पार्टी की रणनीति को प्रभावी तरीके से लागू करने में मददगार हो सकता है। बैठक में इसी समन्वय और संगठनात्मक दिशा से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

    मुलाकात के दौरान आगामी रणनीति को लेकर भी मंथन किया गया। प्रदेश में पार्टी की आगे की गतिविधियों, संगठनात्मक कार्यक्रमों और भविष्य में होने वाले अभियानों को लेकर दोनों नेताओं ने विचारों का आदान-प्रदान किया। हालांकि, बैठक के बाद किसी विशेष अभियान या कार्यक्रम को लेकर विस्तृत घोषणा सामने नहीं आई है।

    प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल संगठन को मजबूत करने और पार्टी की गतिविधियों को गति देने पर लगातार जोर दे रहे हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ उनकी बैठक से प्रदेश संगठन की प्राथमिकताओं को राष्ट्रीय स्तर पर साझा करने का अवसर भी मिला। इसके साथ ही प्रदेश में संगठन के स्तर पर आगे की कार्ययोजना को लेकर मार्गदर्शन और समन्वय की संभावना बनी है।

    भाजपा के लिए प्रदेश संगठन की मजबूती का सीधा संबंध कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ स्तर तक पार्टी की गतिविधियों से है। इसलिए संगठनात्मक बैठकों में स्थानीय स्तर की गतिविधियों, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और आगामी कार्यक्रमों की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

    दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर आगे की दिशा पर नजर रहेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच हुई चर्चा से यह संकेत मिला है कि प्रदेश संगठन की गतिविधियों और आगामी रणनीति को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ नियमित समन्वय जारी है।

    बैठक का मुख्य फोकस संगठन को मजबूत करने, आगामी गतिविधियों की तैयारी और प्रदेश में पार्टी की कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर रहा। आने वाले समय में इन चर्चाओं के आधार पर संगठनात्मक स्तर पर नई गतिविधियां और कार्यक्रम सामने आ सकते हैं।

  • JPSC-JSSC विवाद: लाठीचार्ज के विरोध में आज झारखंड बंद, 17वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन

    JPSC-JSSC विवाद: लाठीचार्ज के विरोध में आज झारखंड बंद, 17वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन


    रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन 17वें दिन भी जारी है। सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद विवाद और बढ़ गया। छात्रों के समर्थन में बीजेपी ने मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड बंद का आह्वान किया है। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से शांति बनाए रखने और सरकार पर भरोसा रखने की अपील की है।

    आंदोलन के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते की गिरफ्तारी, तीन भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की ED जांच को मंजूरी जैसे कदम भी सामने आए हैं। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।

    विधानसभा घेराव में पुलिस से भिड़े छात्र
    JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा का घेराव करने पहुंचे थे। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कई छात्र विधानसभा के गेट तक पहुंच गए। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

    घटना के दौरान कई छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई। तनाव के चलते विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। बाद में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया। अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की देर शाम तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    छात्र नेता रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि छात्र पूरे दिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन शाम को पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्रों के साथ मारपीट भी हुई। पासवान के मुताबिक, आंदोलन अब सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जन आंदोलन का रूप ले चुका है।

    सीएम सोरेन ने की शांति की अपील
    घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से सुन रही है। मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वरिष्ठ मंत्री लगातार छात्रों से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, सोरेन ने कुछ विपक्षी नेताओं पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप भी लगाया और छात्रों से किसी के बहकावे में नहीं आने की अपील की।

    लाठीचार्ज के खिलाफ बीजेपी का आज बंद
    10 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद बीजेपी ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान किया। रांची में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और बाबूलाल मरांडी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए था। पार्टी ने प्रदेश के लोगों से बंद को समर्थन देने की अपील की है।

    राहुल गांधी ने भी उठाया लाठीचार्ज का मुद्दा
    छात्रों का आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग पर सवाल उठाते हुए झारखंड सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की। उनके बयान पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों में छात्रों के मुद्दे उठाते हैं, जबकि सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में उनका रुख अलग होता है।

    कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि झारखंड सरकार में कांग्रेस भागीदार है, लेकिन JPSC-JSSC मामले में पार्टी किसी भी तरह से शामिल नहीं है। उन्होंने परीक्षाओं में गड़बड़ी की बात स्वीकार करते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और लाठीचार्ज व आंसू गैस के इस्तेमाल को गलत बताया।

    अंबा प्रसाद ने मामले की CBI जांच की मांग की। उनका तर्क है कि शिक्षा, गृह और पुलिस विभाग मुख्यमंत्री के अधीन हैं और JPSC का गठन भी सरकार की सिफारिश पर होता है। ऐसे में CID की जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

    सरकार तीन परीक्षाएं कर चुकी है रद्द
    सरकार JPSC-JSSC विवाद के बीच तीन भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का फैसला पहले ही ले चुकी है। इनमें 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी शामिल है। सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने की मांग भी स्वीकार कर ली है। हालांकि, छात्र संगठन अभी भी CBI जांच की मांग पर कायम हैं।

    पूर्व JPSC चेयरमैन एल खियांग्ते गिरफ्तार
    विवाद के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले 3 अगस्त को उनसे करीब 7 घंटे तक पूछताछ की गई थी। यह कार्रवाई JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत हुई। इसी मामले में CID ने राज्यभर में 18 स्थानों पर छापेमारी भी की थी।

    22 जुलाई 2026 को CID की छापेमारी के बाद खियांग्ते ने JPSC चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि निष्पक्ष जांच के लिए पद छोड़ना उचित है। खियांग्ते पर JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के लिए पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनी TSR Data Processing Limited (TDPL) को काम देने का आरोप है। प्रदर्शनकारी छात्र TDPL से जुड़ी सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। रविवार को JPSC के तीन सदस्यों ने भी इस्तीफा दिया था।

    मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद बने थे चेयरमैन
    एल खियांग्ते राज्य के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पिछले साल फरवरी में JPSC के चेयरमैन नियुक्त हुए थे। उन पर झारखंड में कई परीक्षाओं के संचालन का ठेका TDPL को देने का आरोप है। TDPL को JSSC ने कथित अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्ट किया था। इसके बावजूद एजेंसी को परीक्षा संबंधी काम दिए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने आरोप लगाया था कि खियांग्ते ने ठेका देने के बदले 2 करोड़ रुपये और सभी भुगतानों पर 20 फीसदी कमीशन की मांग की थी। हालांकि, ये आरोप हैं और झारखंड CID की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    अभय तिवारी के पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र
    विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के हाथों में अभय तिवारी के पोस्टर भी नजर आए। छात्र उनके खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। CID के अनुसार, अभय तिवारी पहले TDPL में मार्केटिंग मैनेजर था और बाद में गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर बना। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में उसका नाम सामने आया है।

    अभय तिवारी पर आरोप है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘गारंटीड सिलेक्शन’ का दावा कर अभ्यर्थियों से 25 से 40 लाख रुपये तक मांगता था। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है। प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों में उसके कथित रिश्तेदारों के अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में चयन और रैंक का भी दावा किया गया।

    अब बातचीत से निकलेगा रास्ता या बढ़ेगा आंदोलन?
    JPSC-JSSC विवाद को लेकर छात्र अभी भी CBI जांच समेत अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। सरकार बातचीत और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का भरोसा दे रही है, जबकि बीजेपी ने लाठीचार्ज के विरोध में बंद का ऐलान कर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में मंगलवार के झारखंड बंद और सरकार-छात्र संगठनों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार की ओर से उठाए गए कदम आंदोलन को शांत कर पाते हैं या छात्रों का प्रदर्शन और व्यापक रूप लेता है।

  • टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचीं ममता, विरोध के बीच बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

    टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचीं ममता, विरोध के बीच बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल के हलीसहर में रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को विरोध का सामना करना पड़ा। वह कथित पुलिस हिरासत में जान गंवाने वाले तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंची थीं। इसी दौरान स्थानीय लोगों के एक समूह ने उनके काफिले को रोक दिया। विरोध के दौरान उनकी कार पर कीचड़ लगाने, जूते-चप्पल फेंकने और पत्थरबाजी किए जाने के आरोप सामने आए हैं।

    घटना के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी के खिलाफ नारेबाजी भी की। उनके खिलाफ ‘चोर-चोर’ जैसे नारे लगाए जाने की बात सामने आई है। जब तक उनका वाहन मौके पर रुका रहा, विरोध प्रदर्शन जारी रहा। इस घटनाक्रम के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव की स्थिति बन गई।

    ममता बनर्जी ने घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थानीय ग्रामीणों की ओर से नहीं किया गया, बल्कि बाहर से लोगों को लाकर विरोध कराया गया। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार पर बड़े पत्थर और ईंटें फेंकीं तथा अपशब्दों का इस्तेमाल किया।

    ममता ने कहा कि वह उस परिवार से मिलने गई थीं, जिसके सदस्य की पुलिस हिरासत में मौत हुई है। उनका आरोप है कि परिवार के सदस्यों को भी डराने और धमकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि परिवार से मिलने का उन्होंने वादा किया था और उसी के तहत वह वहां पहुंची थीं।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में उनकी गाड़ी पर पत्थर फेंके गए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक रही और पुलिस के सामने ही प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। ममता ने दावा किया कि इस घटना में बाहरी लोगों की भूमिका थी।

    उन्होंने पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए। ममता के मुताबिक पुलिस अपनी कथित विफलताओं को छिपाने के लिए ऐसे लोगों का सहारा ले रही है। उन्होंने राज्य में हिरासत में होने वाली मौतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है।

    ममता ने दावा किया कि उन्होंने मृतक कार्यकर्ता के परिवार से मिलने का आश्वासन पहले ही दिया था। उनके अनुसार उन्होंने परिवार की महिला सदस्य से एक दिन पहले दो बार फोन पर बातचीत भी की थी। उन्होंने यह भी कहा कि एक विधायक के माध्यम से परिवार को घर से बाहर नहीं निकलने की चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई थी।

    उन्होंने कहा कि घटना के संबंध में मामला दर्ज कराया जाएगा। ममता ने पुलिस के प्रति व्यक्तिगत नाराजगी से इनकार करते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक स्तर पर तनाव को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने राज्य के गृह विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष से जुड़े लोग हालात को बिगाड़ने में भूमिका निभा रहे हैं।

    दूसरी ओर, स्थानीय लोगों की ओर से ममता बनर्जी के दौरे को लेकर अलग प्रतिक्रिया सामने आई। कुछ लोगों का आरोप है कि वह शांत इलाके में राजनीतिक गतिविधि के लिए पहुंची थीं, जिससे वहां तनाव बढ़ गया। स्थानीय स्तर पर ममता के दौरे और विरोध को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

    घटना के बाद हलीसहर में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर ममता बनर्जी ने इसे बीजेपी समर्थित विरोध और बाहरी लोगों की कार्रवाई बताया है, जबकि दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर उनके दौरे को लेकर सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल पत्थरबाजी और विरोध की घटना के बाद इलाके की स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

  • पंजाब में AAP का हिंदू वोटों पर फोकस! राम शो और शिव भजन से साधेगा सियासी समीकरण, BJP की बढ़ी चुनौती

    पंजाब में AAP का हिंदू वोटों पर फोकस! राम शो और शिव भजन से साधेगा सियासी समीकरण, BJP की बढ़ी चुनौती


    नई दिल्ली । पंजाब की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने अपनी रणनीति का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया है। अब तक पंथक मुद्दों के जरिए सिख मतदाताओं तक पहुंच बनाने वाली आम आदमी पार्टी हिंदू मतदाताओं के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही है। इसी रणनीति के तहत भगवान श्रीराम पर आधारित हमारे राम नाटक के मंचन और भगवान शिव को समर्पित भजन संध्याओं का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 7 अगस्त को मोहाली से हमारे राम के मंचन की शुरुआत की। इसके बाद प्रदेश के अलग-अलग शहरों में इसके आयोजन की तैयारी है। इसे पंजाब की बदलती राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    आम आदमी पार्टी की यह पहल केवल भगवान श्रीराम तक सीमित नहीं है। इससे पहले भगवान शिव के नाम पर एक शाम शिव के नाम भजन संध्या कार्यक्रम की शुरुआत भी की जा चुकी है। इन आयोजनों को पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में ले जाने की योजना है। बताया गया है कि राज्य के 22 शहरों में शिव भजन संध्याओं का आयोजन किया जाएगा। वहीं हमारे राम के कुल 41 मंचन किए जाने की तैयारी है। पंजाब कैबिनेट ने इसी साल जनवरी में हमारे राम के 40 शो कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बाद में इनकी संख्या बढ़ाकर 41 कर दी गई। इस नाटक में अभिनेता आशुतोष राणा रावण की भूमिका निभा रहे हैं।

    राजनीतिक नजरिए से देखें तो पंजाब में आम आदमी पार्टी की यह रणनीति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य में हिंदू मतदाताओं की आबादी करीब 39 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है और कई शहरी व सीमावर्ती क्षेत्रों में उनका चुनावी प्रभाव काफी अहम है। पठानकोट, होशियारपुर, जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, फाजिल्का और मोहाली जैसे क्षेत्रों में हिंदू मतदाताओं की भूमिका चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है। ऐसे में आम आदमी पार्टी का धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए इन इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास राजनीतिक तौर पर खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पंजाब की राजनीति में हिंदू वोटरों को लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत आधार माना जाता रहा है। हाल के चुनावों में भी भाजपा ने हिंदू बहुल और शहरी इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़कर 18.6 प्रतिशत पहुंचा था। पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर और रोपड़ जैसे कंडी बेल्ट के क्षेत्रों में भी भाजपा का प्रभाव देखने को मिला। ऐसे में आम आदमी पार्टी की ओर से राम और शिव से जुड़े कार्यक्रमों को इन इलाकों तक ले जाना चुनावी समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राजनीतिक मामलों के जानकारों के मुताबिक पंजाब में कोई भी राजनीतिक दल हिंदू मतदाताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता। यही वजह है कि आम आदमी पार्टी अब पंथक राजनीति के साथ हिंदू मतदाताओं तक भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि पार्टी इन आयोजनों को सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने की पहल के तौर पर पेश कर रही है। आयोजकों के अनुसार हमारे राम के मंचन के जरिए भगवान श्रीराम के सत्य, धर्म, दया और सद्भावना के आदर्शों को जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    आम आदमी पार्टी की रणनीति में आगे भी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भूमिका बढ़ती दिखाई दे रही है। भगवान शिव के नाम पर होने वाली भजन संध्याओं के अलावा अगले साल फरवरी तक संत श्री गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर भी विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। इससे साफ है कि पार्टी पंजाब के अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक समूहों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।

    अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी की यह रणनीति चुनावी राजनीति में कितना असर डालती है। एक तरफ भाजपा हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सक्रिय रहेगी तो दूसरी ओर आप पंथक मुद्दों के साथ हिंदू वोटरों को भी साधने की कोशिश करेगी। ऐसे में पंजाब में आने वाले चुनाव से पहले हिंदू और पंथक वोटों का समीकरण किस दिशा में जाता है यह राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।