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  • जबलपुर सिहोरा विवाद: 10 और आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने दोनों पक्षों पर दर्ज की एफआईआर

    जबलपुर सिहोरा विवाद: 10 और आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने दोनों पक्षों पर दर्ज की एफआईआर


    जबलपुर के सिहोरा के आजाद चौक में गुरुवार रात हुए विवाद के बाद से माहौल धीरे-धीरे शांत हुआ लेकिन पुलिस की सतत गश्ती जारी रही लोग दहशत में थे लेकिन आवागमन सामान्य रूप से चलता रहा शुक्रवार और शनिवार की सुबह पुलिस की कई टीमों ने 10 और हंगामा करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार किया ये आरोपी हिंदू पक्ष से हैं और इन पर दूसरे वर्ग के धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने का आरोप है

    इससे पहले ही पुलिस ने 49 लोगों को गिरफ्तार किया था अब तक कुल 59 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है वहीं कुछ और आरोपियों की तलाश जारी है पुलिस ने मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है

    शुक्रवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने समझाने का प्रयास किया लेकिन जब वे नहीं माने तो लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया गया पुलिस ने बताया कि मामला शांतिपूर्ण बनाने के लिए यह आवश्यक था

    पुलिस ने घटना स्थल और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और स्थानीय लोगों से पूछताछ की कई असामाजिक तत्व घटना को अंजाम देकर फरार हो गए ऐसे लोगों की पहचान भी की जा रही है इस काम में स्थानीय पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच और अन्य अधिकारियों को लगाया गया है

    मामला गुरुवार रात का है जब सिहोरा के आजाद चौक में दो पक्षों में विवाद हुआ देखते ही देखते दोनों पक्षों के सैकड़ों लोग वहां जमा हो गए और एक दूसरे पर पथराव और तोड़फोड़ शुरू कर दी भगदड़ के हालात बन गए मौके पर सिहोरा समेत आसपास के थानों की पुलिस पहुंची भीड़ को खदेड़कर स्थिति को नियंत्रित किया गया

    पुलिस ने रात में ही उपद्रवियों की पहचान कर ली थी इनमें किशोर और अधिक उम्र के लोग शामिल थे कुछ को सिहोरा में ही छोड़ दिया गया जबकि लगभग 25 से 30 आरोपियों को बस से शहर के थानों में ले जाकर गिरफ्तारी और अन्य कार्रवाई की गई

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है और किसी भी परिस्थिति में कानून व्यवस्था को बनाए रखना प्राथमिकता है दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनावी या धार्मिक तनाव के समय ऐसे घटनाओं को रोकने के लिए सतत निगरानी और समय पर कार्रवाई जरूरी है

  • इंदौर में राजनीतिक हिंसा, भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया पथराव, जिला अध्यक्ष अस्पताल में भर्ती

    इंदौर में राजनीतिक हिंसा, भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया पथराव, जिला अध्यक्ष अस्पताल में भर्ती


    इंदौर में शनिवार को सियासी पारा चरम पर पहुंच गया जब भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए शहर के कांग्रेस मुख्यालय गांधी भवन के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे भाजपा कार्यकर्ताओं और वहां पहले से मौजूद कांग्रेसियों के बीच झड़प हो गई

    स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब भाजपा की ओर से गांधी भवन पर पथराव शुरू कर दिया गया पथराव के दौरान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े गंभीर रूप से घायल हो गए उनके सिर पर गहरी चोट आई और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया

    स्थानीय लोगों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटना अचानक हुई और झड़प में कई अन्य कार्यकर्ता भी घायल होने के कगार पर थे मौके पर भारी संख्या में पुलिस तैनात की गई और स्थिति को नियंत्रित किया गया

    पुलिस ने बताया कि पथराव करने वालों की पहचान की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों ने घटना की निंदा की है और प्रशासन से शीघ्र जांच की मांग की है

    घटना के बाद गांधी भवन के आसपास क्षेत्र को सील कर दिया गया और हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया स्थानीय प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है

    विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी मौसम में शहरों में ऐसे सियासी तनाव बढ़ सकते हैं ऐसे मामलों में समय पर नियंत्रण और न्यायिक कार्रवाई बेहद जरूरी होती है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे

  • असम राजनीति: गौरव गोगोई ने हिमंता बिस्वा सरमा को कहा ‘असम का जिन्ना’, भूपेन बोरा को कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता बताने पर कसा तंज

    असम राजनीति: गौरव गोगोई ने हिमंता बिस्वा सरमा को कहा ‘असम का जिन्ना’, भूपेन बोरा को कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता बताने पर कसा तंज



    नई दिल्ली। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने पूर्व कांग्रेस नेता भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने पर प्रतिक्रिया दी है। गौरव गोगोई ने कहा कि बीजेपी में शामिल होने वाले लोग अपने राजनीतिक सफर में महत्वहीन हो चुके हैं और भूपेन बोरा का भी यही हाल होगा। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें नेताओं को “हिंदू प्रमाण पत्र” देना बंद कर देना चाहिए और साथ ही कहा कि सरमा असम के जिन्ना हैं।

    गौरव गोगोई ने कहा कि बीजेपी पुराने कांग्रेस नेताओं से भरी हुई है, जो राज्य में कांग्रेस के 15 साल के शासनकाल में सबसे भ्रष्ट माने जाते थे। उन्होंने कांग्रेस को समंदर के समान बताते हुए कहा कि पार्टी हमारे पूर्वजों के अस्तित्व से बहुत पहले से मौजूद है और हम सब उसमें पानी की बूंदें मात्र हैं।

    भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा देने का कारण बताया कि उन्हें पार्टी में अपनी कोई जरूरत महसूस नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें एहसास हुआ कि बीजेपी विरोधी वोट को एकजुट करने की जिम्मेदारी थी और अकेले कांग्रेस इसके लिए सक्षम नहीं थी। भूपेन बोरा ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस अब गौरव गोगोई के नियंत्रण में नहीं है, बल्कि धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन गठबंधन वार्ता के मुख्य कर्ताधर्ता हैं।

    भूपेन बोरा ने यह भी कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनके इस्तीफे के बारे में एक शब्द तक नहीं कहा, जबकि उन्होंने पार्टी को आगे बढ़ाने में योगदान दिया था। गौरव गोगोई ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला असली कांग्रेस और पुरानी कांग्रेस के बीच होगा और बीजेपी में शामिल पुराने नेता चुनावी तौर पर कोई असर नहीं डालेंगे।

  • राजस्थान बजट सत्र में BJP विधायक के विवादित बयान ने मचाया हंगामा: 'BJP सरकार ने छोरा, गहलोत ने छोरी पैदा की'

    राजस्थान बजट सत्र में BJP विधायक के विवादित बयान ने मचाया हंगामा: 'BJP सरकार ने छोरा, गहलोत ने छोरी पैदा की'


    नई दिल्ली । राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक बार फिर सियासी और सांस्कृतिक विवाद उभर गया है। सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के विधायक बहादुर सिंह कोली ने सदन में एक विवादित बयान देते हुए बजट की तुलना ‘बेटे’ और ‘बेटी’ से कर दी। बहादुर सिंह कोली जो भरतपुर जिले से विधायक और पूर्व लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं ने कहा कि भजनलाल शर्मा की बीजेपी सरकार का बजट छोरा था जबकि अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार का बजट ‘छोरी’ था और इसी वजह से कांग्रेस चुनाव में हार गई।

    बीजेपी विधायक ने बजट सत्र के दौरान रात करीब 8 बजे सदन में कहा हमारी सरकार ने पहले बजट में छोरा पैदा किया फिर दूसरे और तीसरे बजट में भी छोरा पैदा किया। जो जवानी में छोरा पैदा करता है वह हमेशा काम आता है। जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे उन्होंने अपने आखिरी बजट में घोषणाएं कीं लेकिन छोरा नहीं पैदा हुआ छोरी पैदा हुई और इसी वजह से आप विपक्ष में बैठे हैं। इस बयान ने सदन में मौजूद सदस्यों को झकझोर दिया और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया।

    कांग्रेस ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी के अनुसार यह बयान लड़कों और लड़कियों में भेदभाव को दर्शाता है और सदन में इस तरह की संवेदनहीन टिप्पणी देना महिलाओं के प्रति पक्षपात को उजागर करता है। कांग्रेस के मुख्य सचेतक रफीक खान ने कहा कि बीजेपी विधायक के इस बयान ने उनकी पार्टी की सोच को सार्वजनिक कर दिया है। बीजेपी के लोग महिलाओं को लेकर क्या सोच रखते हैं यह अब साफ हो गया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस तरह के बयान केवल राजनीतिक लाभ के लिए महिलाओं के प्रति नजरिए को हल्के में दिखाने वाले हैं।

    वहीं बीजेपी की तरफ से गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने बहादुर सिंह कोली के बयान की व्याख्या करते हुए कहा कि विधायक बजट पर चर्चा कर रहे थे और कांग्रेस केवल हंगामा कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी और हमारी सरकार बेटियों का सम्मान करती है और उन्हें देवी स्वरूप में पूजती है। मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि भाजपा सरकार ने संसद में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिलाने का काम किया है और महिलाओं के सम्मान को सर्वोपरि माना जाता है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह बयान न केवल बजट सत्र में विवाद पैदा करने वाला है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी संवेदनशील है। महिलाओं और लड़कियों के प्रति राजनीतिक दलों की सोच पर भी बहस छिड़ा है। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह केवल बजट पर व्यंग्य था जबकि विपक्ष इसे महिलाओं के प्रति पक्षपातपूर्ण टिप्पणी मान रहा है। यह घटना राज्य में आगामी चुनावों के मद्देनजर भी राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर सकती है।

    कुल मिलाकर बहादुर सिंह कोली के बयान ने विधानसभा में बहस का नया मुद्दा खड़ा किया है जहां बजट पर चर्चा के दौरान संवेदनशील सामाजिक मुद्दों को भी राजनीति की भेंट चढ़ाया गया। बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी और प्रतिक्रिया जारी रही और राज्य की सियासत में यह विवाद केंद्र में बन गया।

  • वंदे मातरम की अनिवार्यता पर सियासत तेज, BJP का कांग्रेस पर हमला कांग्रेस ने किया पलटवार

    वंदे मातरम की अनिवार्यता पर सियासत तेज, BJP का कांग्रेस पर हमला कांग्रेस ने किया पलटवार


    भोपाल । वंदे मातरम की अनिवार्यता को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम अनिवार्य किए जाने के निर्देश जारी होने के बाद बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।

    बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जिन्ना के सामने घुटने टेक दिए थे और मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम को अनिवार्य नहीं किया। शर्मा ने कहा कि जिस दिन वंदे मातरम के जयघोष के साथ देश को आजादी मिली, उसी दिन इसे अनिवार्य कर देना चाहिए था, लेकिन कांग्रेस ने इसकी अनिवार्यता समाप्त कर दी और इसके कई अंश हटा दिए।

    मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी वंदे मातरम को देश के लिए मंत्र बताते हुए कहा कि इसे बहुत पहले अनिवार्य हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश में कई सुधार कर रहे हैं और यह भी उसी दिशा में एक कदम है।

    वहीं कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि वंदे मातरम हमेशा से कार्यक्रमों का हिस्सा रहा है और यह आजादी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि जो लोग आजादी की लड़ाई में शामिल नहीं थे, वे आज राष्ट्रभक्ति का प्रमाण पत्र बांट रहे हैं। शर्मा ने आरोप लगाया कि मदरसों के नाम पर राजनीति की जा रही है, जबकि वहां भी वंदे मातरम गाया जाता है।

    कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वंदे मातरम के सम्मान पर कभी आपत्ति नहीं रही, लेकिन कुछ शब्दों को लेकर पहले आपत्तियां थीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान सभी करते हैं, लेकिन गाने या न गाने का प्रश्न व्यक्तिगत और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है।

    केंद्र सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, राष्ट्रपति और राज्यपाल के कार्यक्रमों सहित सभी सरकारी आयोजनों में वंदे मातरम अनिवार्य होगा। तिरंगा फहराने के अवसर पर भी इसे गाया जाएगा। निर्देशों में छह अंतरों वाला पूरा संस्करण शामिल करने, जन गण मन से पहले वंदे मातरम बजाने और सम्मान में खड़ा होना अनिवार्य करने की बात कही गई है। इसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है। इन निर्देशों के बाद प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

  • 20 साल मंत्री रहे गोपाल भार्गव ने छलका दर्द, बोले- दिग्विजय ने कांग्रेस में आने का ऑफर दिया था

    20 साल मंत्री रहे गोपाल भार्गव ने छलका दर्द, बोले- दिग्विजय ने कांग्रेस में आने का ऑफर दिया था


    सागर: बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पिछले 40 वर्षों से विधायक रहे गोपाल भार्गव ने मोहन कैबिनेट में जगह न मिलने का अपना दर्द सार्वजनिक रूप से साझा किया। सागर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्ष और अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद अपेक्षित सम्मान न मिलना गहरा दुख देता है।

    गोपाल भार्गव ने बताया कि उन्होंने 20 साल तक लगातार मंत्री पदों पर रहते हुए कठिन परिस्थितियों का सामना किया, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी नहीं टिक पाते। उन्होंने कहा, राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। अगर किसी व्यक्ति की बात सरकार नहीं सुनती, तो उसका मन टूट जाता है।

    कार्यक्रम में उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उन्हें एक बार कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए भार्गव ने कहा, मैंने साफ कह दिया था कि यह माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने हमेशा सिद्धांतों की राजनीति की है और किसी भी प्रकार के राजनीतिक सौदे से खुद को दूर रखा।

    गोपाल भार्गव ने संकेत दिया कि लंबे समय तक पार्टी को समर्पित रहने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिलना उनकी पीड़ा का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा, मैंने पार्टी को जीवन दिया है, और यह सीधे तौर पर मंत्री नहीं बनाए जाने की पीड़ा की ओर इशारा करता है।उल्लेखनीय है कि गोपाल भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा से लगातार नौ बार विधायक चुने गए हैं। वे भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और पूर्व में लोक निर्माण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं।

    इससे पहले दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा था, हर जगह सिर्फ ब्राह्मणों को ही टारगेट किया जा रहा है। इस बयान ने प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी। उनके हालिया बयान और मंत्री न बनने की पीड़ा भविष्य में पार्टी और प्रदेश की राजनीति पर क्या असर डालेगी, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी।

    गोपाल भार्गव की यह खुलकर कही गई भावनाएं वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और पार्टी में वरिष्ठता के महत्व को भी उजागर करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में स्थायित्व, सेवा और नैतिकता उनके लिए हमेशा प्राथमिकता रही है, और कोई भी पद उनके सिद्धांतों से ऊपर नहीं है।सागर और प्रदेश के राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भार्गव के बयान आने वाले दिनों में पार्टी के अंदर और समाज में हलचल पैदा कर सकते हैं। वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाएं, सम्मान और उनके अनुभव को अगर नजरअंदाज किया गया, तो राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है

  • बीजेपी में नकद चंदा बंद, सहयोग निधि अब केवल ऑनलाइन चेक से 15 मार्च तक अभियान

    बीजेपी में नकद चंदा बंद, सहयोग निधि अब केवल ऑनलाइन चेक से 15 मार्च तक अभियान


    भोपाल । मध्यप्रदेश बीजेपी में अब से नकद चंदा बंद किया जा रहा है। पार्टी ने यह निर्णय लिया है कि अब से सहयोग निधि केवल ऑनलाइन और चेक के माध्यम से ही जमा होगी। यह नई व्यवस्था कल से शुरू हो रहे सहयोग निधि अभियान के साथ लागू होगी। बीजेपी के प्रदेश स्तर पर आज बड़ी बैठक हुई, जिसमें क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, संभागीय प्रभारी और जिला प्रभारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में यह तय किया गया कि पार्टी को मिलने वाली सहयोग निधि में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए नकद चंदा पूरी तरह बंद किया जाएगा।

    अभियान कल से शुरू हो रहा है और यह 15 मार्च तक चलेगा। इस दौरान जिला स्तर पर पार्टी के बैंक खाते में कोई राशि जमा नहीं होगी। सभी योगदान सीधे प्रदेश स्तर के खाते में आएंगे और बाद में उन्हें जिलों को भेजा जाएगा। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि 20,000 रुपए या इससे अधिक की राशि बिना PAN नंबर के स्वीकार नहीं की जाएगी। चेक से चंदा देने वालों की सूची तैयार की जाएगी, जिसमें नाम-पता, बैंक का नाम-पता और चेक-बुक नंबर जैसी जानकारी दर्ज होगी।

    यह अभियान पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि से शुरू हो रहा है। इससे पहले पिछले साल स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की शताब्दी वर्ष पर समर्पण निधि का अभियान चलाया गया था, जिसमें करीब 100 करोड़ से अधिक राशि जुटाई गई थी। बीजेपी का यह कदम पार्टी की वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ाने और नकदी प्रवाह को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, इससे फंडिंग के स्रोतों की स्पष्टता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

    केंद्र और प्रदेश स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को देखते हुए यह निर्णय समय की मांग माना जा रहा है। साथ ही, चुनावी साल में वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।अब यह देखना होगा कि इस अभियान के तहत कितनी सहयोग निधि जुटती है और पार्टी के लिए यह नया तरीका कितना प्रभावी साबित होता है।

  • Tamil Nadu में भाजपा को झटका… अन्नामलाई ने चुनाव से पहले प्रभारी पद से दिया इस्तीफा

    Tamil Nadu में भाजपा को झटका… अन्नामलाई ने चुनाव से पहले प्रभारी पद से दिया इस्तीफा


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu:) की सियासत में बड़ी हलचल मच गई है। भाजपा (BJP) के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई (Annamalai) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने पिता की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए तमिलनाडु के छह विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव प्रभारी पद से इस्तीफा (Resignation Post Election In-charge) लिया। अन्नामलाई ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने इस निर्णय की जानकारी तमिलनाडु भाजपा नेतृत्व को दे दी है और उनकी स्थिति को समझते हुए वह इस समय अपने पिता के पास रहना चाहते हैं।

    अन्नामलाई ने कहा, “मेरे पिता डायलिसिस पर हैं और उनके इलाज और देखभाल का जिम्मा लेना मेरी प्राथमिकता है। इस कारण से मैं फिलहाल यात्रा करने की स्थिति में नहीं हूं। मैंने पार्टी नेतृत्व से अनुरोध किया है कि वे इन छह विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी किसी अन्य नेता को सौंप दें।”

    अन्नामलाई को जिन छह विधानसभा क्षेत्रों का चुनाव प्रभारी बनाया गया था, वे हैं – सिंगानल्लूर, विरुगमबाक्कम (चेन्नई), करैक्कुडी, श्रीवैकुंटम, मदुरै (दक्षिण), और पद्मनाभपुरम (कन्याकुमारी)। अन्नामलाई ने यह भी स्पष्ट किया कि वे भविष्य में पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि पार्टी उनके स्थान पर किसी अन्य नेता को नियुक्त कर सकती है।

    अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद राजनीतिक सियासत भी तेज हो गई। किल्लियूर के कांग्रेस विधायक राजेश कुमार ने इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा, “उन्हें चुनावी बुखार चढ़ गया था, और इसीलिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया। मुझे लगता है कि चुनावी हार के डर से ही उन्होंने यह कदम उठाया है।” उन्होंने कहा, “कन्याकुमारी में भाजपा का कमल नहीं खिलेगा, चाहे वे कोई भी कदम उठाएं।”

  • इस साल 5 राज्यों में होंगे विधानसभा चुनाव….. असम से बंगाल तक विपक्षी गठबंधन तक अकेले घेरेगी BJP

    इस साल 5 राज्यों में होंगे विधानसभा चुनाव….. असम से बंगाल तक विपक्षी गठबंधन तक अकेले घेरेगी BJP


    नई दिल्ली।
    इस साल होने वाले पांच विधानसभाओं के चुनावों (Five Legislative Assemblies Elections) के लिए भाजपा (BJP) के अधिकांश हमलों के निशाने पर कांग्रेस ही रहेगी, भले ही उसका मुकाबला विपक्ष के किसी भी दल के साथ क्यू न हो। दरअसल, भाजपा का मानना है कि देशभर में उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस (Congress) है और वही विपक्ष के गठबंधन (Opposition Alliance) की धुरी भी। इन चुनावों में असम में भाजपा का सीधा मुकाबला कांग्रेस से है, जबकि केरल में उसे कांग्रेस और वामपंथी दलों के गठबंधनों से जूझना है। तमिलनाडु में कांग्रेस सत्तारूढ़ गठबंधन का अहम हिस्सा है। केवल पश्चिम बंगाल ही ऐसा है, जहां भाजपा व तृणमूल कांग्रेस में सीधा संघर्ष है।

    भाजपा के चुनाव रणनीतिकारों का मानना है कि विपक्ष के केंद्र में कांग्रेस है इसलिए भाजपा का निशाना भी कांग्रेस ही रहेगी। वैसे भी बीते 75 वर्षों में अधिकांश समय कांग्रेस के सत्ता में रहने से भाजपा को उस पर हमला करने के लिए काफी मुद्दे रहते हैं। पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को देखें तो भाजपा कांग्रेस को हराकर ही केंद्र व अधिकांश राज्यों में सत्ता में है और भाजपा का बड़ा समर्थक वर्ग भी वही है, जो कभी कांग्रेस का हुआ करता था। ऐसे में बड़े स्तर पर उसके लिए चुनौती भी कांग्रेस ही बन सकती है।

    सूत्रों के मुताबिक रणनीति के अनुसार भाजपा के केंद्रीय चुनाव प्रचारक सभी जगहों पर कांग्रेस को केंद्र में रखकर हमलावर रहेंगे। राज्य के नेता स्थानीय समीकरणों के अनुसार राज्य के विरोधी खेमे पर निशाना साध रहे हैं। गठबंधन की राजनीति में भाजपा अपने सहयोगी दलों की रणनीति का भी अनुसरण कर अपना ऐजेंडा भी उसी तरह से आगे बढ़ाएगी। चूंकि भाजपा राष्ट्रीय दल है इसलिए वह कई मुद्दों पर क्षेत्रीय दलों के स्तर पर नहीं जा सकती है।