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  • बीएमसी चुनाव प्रचार में नितेश राणे का फिर विवादित बयान, मुस्लिम समाज पर की अपमानजनक टिप्पणी

    बीएमसी चुनाव प्रचार में नितेश राणे का फिर विवादित बयान, मुस्लिम समाज पर की अपमानजनक टिप्पणी


    मुंबई । बीएमसी चुनावों के प्रचार के दौरान महाराष्ट्र के बीजेपी नेता और मंत्री नितेश राणे ने एक बार फिर विवादित बयान देकर राजनीति में हलचल मचा दी है। राणे ने मुस्लिम समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे चुनावी माहौल और भी गरमा गया है। राणे ने वसई में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कोई भी हरा सांप हिंदू समाज की तरफ गंदी नजर से देख नहीं सकता। हिंदुओं के त्योहार में कोई मस्ती करने की कोशिश करेगा तो वह वापस शुक्रवार को सरेंडर नहीं कर पाएगा । राणे ने आगे कहा हमें यह गारंटी है कि हम आपके साथ पूरी ताकत से खड़े रहेंगे। इस दौरान उन्होंने आई लव मोहम्मद कहने वालों को पाकिस्तान भेजने की धमकी भी दी और कहा कि शहर का मेयर जय श्रीराम बोलने वाला ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होकर पाकिस्तान में बैठे आई लव मोहम्मद’ वालों को वहां भेजना होगा।

    विवादों में घिरे नितेश राणे

    यह पहली बार नहीं है जब नितेश राणे ने इस तरह का विवादित बयान दिया हो। इससे पहले भी उन्होंने ठाकरे परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। नितेश राणे ने यह कहा था, ठाकरे भाइयों को वोट देने का मतलब पाकिस्तान में बैठे उनके अब्बा को वोट देना है। उन्होंने हिंदू समाज को सुरक्षित रखने की बात की और कहा कि मुंबई का मेयर हिंदू और मराठी” ही होना चाहिए। राणे के इस बयान के बाद से राजनीति में खलबली मच गई है। उनके बयान को विपक्ष ने आक्रामक ढंग से नकारा और इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया है। वहीं बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों ने इसे हिंदू समाज की सुरक्षा और हित की बात बताया है।

    राजनीतिक गर्मी बढ़ी

    नितेश राणे के बयान के बाद से बीएमसी चुनावों में राजनीति और भी तीव्र हो गई है। जहां एक ओर बीजेपी और हिंदूवादी दल इसे अपनी चुनावी रणनीति के हिस्से के रूप में देख रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे समाज में नफरत फैलाने की कोशिश के रूप में उजागर कर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान केवल वोटों के ध्रुवीकरण के लिए दिए जाते हैं, जो चुनावी लाभ के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। राणे के इस बयान पर कई नेताओं ने आलोचना की है, लेकिन बीजेपी के भीतर इसे लेकर कोई प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली है। हालांकि, राणे पहले भी ऐसे विवादित बयान दे चुके हैं, जिन्हें बीजेपी की ओर से अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

  • BMC चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की बढ़ी टेंशन, अपनों के बयानों से बिगड़ सकते हैं सियासी समीकरण

    BMC चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की बढ़ी टेंशन, अपनों के बयानों से बिगड़ सकते हैं सियासी समीकरण


    नई दिल्ली । एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के चुनाव से ठीक 48 घंटे पहले सियासी माहौल अचानक गरमा गया है। 15 जनवरी 2026 को होने वाले मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी के लिए हालात आसान नहीं दिख रहे। वजह विपक्ष नहीं, बल्कि पार्टी के अपने नेताओं के बयान हैं, जिन्होंने मुंबई की पहचान और मराठी अस्मिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    चुनावी प्रचार के दौरान बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी। अन्नामलाई ने कहा कि मुंबई सिर्फ महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि एक इंटरनेशनल शहर है। उन्होंने मुंबई के 75 हजार करोड़ रुपये के बजट की तुलना चेन्नई और बेंगलुरु से करते हुए इसे वैश्विक शहर बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब बीएमसी चुनाव में मराठी अस्मिता एक संवेदनशील और निर्णायक मुद्दा बना हुआ है।अन्नामलाई के बयान को महाराष्ट्र में कई राजनीतिक दलों ने मराठी पहचान पर हमला करार दिया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे मुंबई को महाराष्ट्र से अलग दिखाने की कोशिश बताया। राज ठाकरे के अलावा शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और बीजेपी पर मराठी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।

    इसी बीच उत्तर प्रदेश के जौनपुर से बीजेपी के पूर्व सांसद कृपाशंकर सिंह के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया। चुनाव प्रचार के दौरान सिंह ने कहा कि मीरा-भाईंदर का मेयर उत्तर भारतीय होना चाहिए और इतने हिंदी भाषी पार्षद चुने जाने चाहिए कि महानगर पालिका में उत्तर भारतीय मेयर बने। इस बयान ने भी स्थानीय राजनीति में भूचाल ला दिया।शिवसेना उद्धव गुट और मनसे ने इन बयानों को मुद्दा बनाते हुए बीजेपी की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। मनसे नेता अविनाश जाधव ने कहा कि बीजेपी मराठी लोगों का वोट सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए चाहती है, जबकि असल में पार्टी की नीति उत्तर भारतीय राजनीति को बढ़ावा देने की है। शिवसेना नेताओं ने भी प्रचार में इसे मराठी मानुष के अपमान के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है।

    बढ़ते विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कई चुनावी सभाओं में दोहराया कि बीजेपी ने कभी मराठी अस्मिता से समझौता नहीं किया है और न ही भविष्य में करेगी। सीएम फडणवीस ने कहा कि बीजेपी ही मराठी मानुष, मराठी माटी और महाराष्ट्र की संस्कृति की सच्ची आवाज है।हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान से ठीक पहले इस तरह के बयान बीजेपी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। बीएमसी जैसे बड़े नगर निगम में स्थानीय पहचान और भावनाएं हमेशा निर्णायक भूमिका निभाती रही हैं। ऐसे में अपनों के बयान चुनावी समीकरणों को अंतिम समय में बदल सकते हैं और इसका सीधा असर मतदान पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • उद्धव ठाकरे का BJP पर तंज: ‘इतनी बेशर्म कि रावण को भी अपने पार्टी में शामिल कर सकती है’

    उद्धव ठाकरे का BJP पर तंज: ‘इतनी बेशर्म कि रावण को भी अपने पार्टी में शामिल कर सकती है’

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे और भाजपा के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। नासिक में अपनी चचेरे भाई और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ आयोजित संयुक्त चुनावी रैली में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह पार्टी इतनी बेशर्म हो गई है कि वह असुर सम्राट रावण को भी अपने खेमे में शामिल कर सकती है।

    चुनावी हिंदुत्व पर आरोप

    उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी का हिंदुत्व केवल चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने नासिक महानगरपालिका की उस योजना पर भी सवाल उठाया, जिसमें अगले साल के कुंभ मेले के लिए ‘साधुग्राम’ बनाने के लिए पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है। उद्धव ने पूछा कि भाजपा का हिंदुत्व वास्तविक है या सिर्फ राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

    दागी नेताओं को प्राथमिकता देने का आरोप

    शिवसेना प्रमुख ने भाजपा के “दागी” नेताओं को पार्टी में प्राथमिकता देने का आरोप भी लगाया। उद्धव ने कहा कि कई वफादार नेताओं को नजरअंदाज किया गया है, जबकि पार्टी उन्हें सही अवसर नहीं दे रही। उन्होंने इस रवैये को दुखद बताया और भाजपा के आचरण पर सवाल उठाए।

    प्रधानमंत्री पर भी टिप्पणी

    यह पहली बार नहीं है जब उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर सीधे निशाना साधा हो। कुछ दिन पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि पीएम पहले चुनाव में प्रचार कर रहे थे, लेकिन अब उनकी पार्टी को कमजोर करने में लगी हुई है।

    महाराष्ट्र में चुनावी हालात

    महाराष्ट्र में राजनीतिक परिस्थितियां इस समय उलझी हुई हैं। 15 जनवरी को राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव होने हैं और मतगणना 16 जनवरी को होगी। इस बार शिवसेना को तोड़कर अलग पार्टी बनाने वाले एकनाथ शिंदे भी भाजपा के साथ चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में उद्धव ठाकरे ने भाजपा और शिंदे दोनों पर निशाना साधा है और जनता के बीच अपनी पार्टी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की।

    उद्धव ठाकरे की नासिक रैली में भाजपा पर तंज और हिंदुत्व को लेकर सवाल, साथ ही शिंदे के सहयोग पर निशाना, महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है। चुनावों से पहले दोनों राजनीतिक धड़ों के बीच जुबानी जंग और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

  • सत्य की जीत हुई है, हाईकोर्ट के आदेश के बाद विपक्ष पर बरसे भाजपा नेता दुष्यंत गौतम

    सत्य की जीत हुई है, हाईकोर्ट के आदेश के बाद विपक्ष पर बरसे भाजपा नेता दुष्यंत गौतम


    नई दिल्ली । अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम ने कांग्रेसआम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद दुष्यंत गौतम ने इसे सत्य की जीत बताते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर हमेशा से पूरा भरोसा रहा है और अदालत के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि झूठ कितनी भी जोर से फैलाया जाएअंततः टिक नहीं पाता।

    दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत करते हुए दुष्यंत गौतम ने कहा कि वे हमेशा संविधान और कानून के दायरे में रहकर काम करते आए हैं। उन्होंने कहा“सत्यमेव जयते। अंत में सच की ही जीत होती है। आज अदालत के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि झूठ और दुष्प्रचार की एक सीमा होती है।उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। दुष्यंत गौतम ने कहा कि एक बेटी की निर्मम हत्या को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर छह महीने बाद एक नया नैरेटिव गढ़ा जाता हैकभी उनका नाम जोड़ा जाता हैतो कभी किसी और का। इससे न तो सच्चाई सामने आती है और न ही पीड़ित बेटी को न्याय मिलता है।

    भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेसआम आदमी पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल मिलकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे थे।मेरी मानहानि की गईमेरी छवि को नुकसान पहुंचाया गया और उस बेटी का बार-बार अपमान किया गया। सोशल मीडिया पर जो वीडियो और पोस्ट डाली गईंवे पूरी तरह झूठी थीं और उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए, उन्होंने कहदुष्यंत गौतम ने स्पष्ट किया कि घटना के समय वे उत्तराखंड गए ही नहीं थे। उन्होंने कहा कि उनकी लोकेशनकार्यक्रम और आधिकारिक रिकॉर्ड यह साफ दिखाते हैं कि उनके खिलाफ फैलाया गया प्रचार पूरी तरह झूठा और द्वेषपूर्ण था। इसके बावजूद उन्होंने लंबे समय तक चुप रहना उचित समझाक्योंकि वे सत्य के साथ खड़े थे।

    उन्होंने यह भी बताया कि लगातार आरोपों और सोशल मीडिया ट्रायल के कारण उन्हें मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी।मैं विचलित भी हुआदुखी भी। मेरी छवि को नुकसान पहुंचा। लेकिन जब झूठ पूरे देश में फैलाया जाने लगा और पानी सिर के ऊपर चला गयातब मुझे मानहानि का मुकदमा दर्ज कराना पड़ा, उन्होंने कहा।इस बीचदिल्ली हाईकोर्ट ने दुष्यंत कुमार गौतम की मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को निर्देश दिया कि वे 24 घंटे के भीतर सभी सोशल मीडिया पोस्ट हटाएंजिनमें उन्हें अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ा गया है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने अंतरिम आदेश में दोनों दलों को भविष्य में भी ऐसी कोई सामग्री पोस्ट करने से रोक दिया है।

  • प्रियंका चतुर्वेदी का चुनाव आयोग पर हमला: अब आयोग को BJP ऑफिस से काम करना चाहिए

    प्रियंका चतुर्वेदी का चुनाव आयोग पर हमला: अब आयोग को BJP ऑफिस से काम करना चाहिए



    नई दिल्ली।
    महाराष्ट्र नगर निगम और निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश में सियासी पारा चरम पर है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला और उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    प्रियंका ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के दौरान खुलेआम धांधली हो रही है, लेकिन राज्य चुनाव आयोग जानबूझकर आंखें मूंदकर बैठा है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में चुनाव चोरी हो रहा है।

    राज्य चुनाव आयोग अंधा बन चुका है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को बंद कर देना चाहिए और अब उसे बीजेपी ऑफिस से ही काम करना चाहिए।”

    प्रियंका ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर चुनाव के दौरान खुलेआम धमकियां दे रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। उनके अनुसार, इस वजह से आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है।

    इंदौर दूषित पानी मामले पर भी सरकार को घेरा
    प्रियंका चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश सरकार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को देश को शर्मसार करने वाली घटना बताया और कहा कि इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रियंका ने आरोप लगाया कि इससे पहले मध्य प्रदेश में कफ सिरप से हुई मौतों के मामले को दबाने की कोशिश की गई थी, और अब इंदौर की घटना में भी सरकार जवाबदेही से बच रही है।

    प्रियंका के इन बयानों के बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। उनके आरोप-प्रत्यारोप ने चुनाव आयोग और राज्य सरकारों की निष्पक्षता पर बहस को तेज कर दिया है।

  • दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी

    दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मच गया है लेकिन उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में अब तक इस मामले पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिग्विजय सिंह ने हाल ही में संघ और भाजपा की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट किया था जिस पर विवाद छिड़ गया है। इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने नाराजगी जताई है लेकिन ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खामोशी का माहौल बना हुआ है।

    कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि यह पोस्ट पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक खासकर उनके बेटे जयवर्धन सिंह और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह उनके समर्थन में खड़े हैं। जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के संगठन के प्रति समर्पण को व्यक्त करते हुए राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो भी पोस्ट किए और कहा कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है।पूर्व मुख्यमंत्री के संगठन के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाने वालों को डॉ. गोविंद सिंह ने गलत बताया।

    उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है और उनके द्वारा की गई पोस्ट केवल एक व्यंग्य है न कि भाजपा या संघ की प्रशंसा।दिग्विजय सिंह की पोस्ट के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में उनके कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेताओं जैसे पूर्व मंत्री केपी सिंह और राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके साथ ही उनके विरोधी भी फिलहाल चुप हैं जिससे यह साफ है कि कांग्रेस के नेता शायद पार्टी नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं।

    वहीं भाजपा के नेताओं ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया जबकि नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल के रूप में निरूपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश बताया। अब देखना होगा कि दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट का असर कांग्रेस पार्टी और उनके गढ़ ग्वालियर-चंबल में किस प्रकार होता है और क्या इस विवाद से पार्टी में कोई बड़े बदलाव होते हैं।

  • महानगर पालिका चुनावों से पहले महायुति को मिली बढ़त 66 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए

    महानगर पालिका चुनावों से पहले महायुति को मिली बढ़त 66 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में आगामी महानगरपालिका चुनावों से पहले भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को बड़ी बढ़त मिली है। शुक्रवार को नामांकन पत्रों की वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद महायुति के 66 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है। वहीं अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के दो उम्मीदवारों को भी निर्विरोध जीत मिली है।महानगरपालिका चुनावों में अब तक की स्थिति यह रही कि विपक्षी दलों और गठबंधनों के उम्मीदवारों ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है जिससे कुल 68 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। इनमें से 66 भाजपा और शिवसेना गठबंधन से हैं जबकि एनसीपी के दो उम्मीदवार भी निर्विरोध विजयी हुए हैं।

    प्रमुख क्षेत्रों में महायुति की बढ़त

    मुंबई महानगर क्षेत्र एमएमआर में कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में महायुति के सबसे अधिक 21 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए जिनमें से 15 भाजपा और 6 शिवसेना के थे। उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव जिले में भी भाजपा और शिवसेना ने समान सफलता हासिल की जहां दोनों दलों के छह-छह उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए।

    पनवेल और भिवंडी में महायुति की मजबूत पकड़

    पनवेल में भाजपा ने सात उम्मीदवारों को निर्विरोध जीत दिलाई है जबकि भिवंडी में जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP का प्रभाव रहा है भाजपा के छह उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए।

    धुले और अहिल्यानगर में परिणाम

    धुले जिले में भाजपा के तीन उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। अहिल्यानगर में निर्विरोध चुनावों में एनसीपी को दो सीटें मिलीं जबकि भाजपा ने एक सीट पर विजय प्राप्त की।ठाणे में शिवसेना की सफलताएं और राज ठाकरे का विरोध ठाणे जिले में जहां सत्तारूढ़ महायुति के बीच राजनीतिक मतभेद थे शिवसेना ने छह सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज की है। हालांकि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना MNS ने इन निर्विरोध चुनावों को लेकर आपत्ति जताई है और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषक की राय

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हाल ही में संपन्न नगर परिषद चुनावों में महायुति के क्लीन स्वीप के बाद इन निर्विरोध जीतों से राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन को मनोवैज्ञानिक बढ़त और नई ऊर्जा मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार निर्विरोध जीत के चलते महायुति को संगठनात्मक मजबूती मिलेगी और वे उन क्षेत्रों में भी पूरी ताकत से प्रचार कर सकेंगे जहां सीधा चुनावी मुकाबला बाकी है।महाराष्ट्र में बीएमसी समेत अन्य महानगरपालिका चुनावों के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को परिणाम घोषित किए जाएंगे।

  • इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला

    इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला


    इंदौर । इंदौर में गंदा पानी पीने से हुए मौतों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 338 नए मरीजों में से 32 की हालत गंभीर है। गंदे पानी की लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया। इस पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर में आम आदमी को पानी नहीं बल्कि जहर दिया गया है। उनका कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है और अब भी कार्रवाई नहीं हो रही है।

    राहुल गांधी ने ट्विटर पर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि “इंदौर में पानी नहीं जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में था। घर-घर मातम है गरीब बेबस हैं लेकिन भाजपा के नेता घमंड में चूर हैं। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है उन्हें सांत्वना मिलनी चाहिए थी लेकिन सरकार ने घमंड परोस दिया।” उन्होंने यह भी पूछा कि गंदा पानी प्रशासन ने क्यों नहीं रोका और सीवर पानी पीने का कारण क्या था। राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “क्यों नहीं कार्रवाई की गई।

    इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बयान दिया था जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के बाहर प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दूषित पानी की आपूर्ति पर सरकार से जवाबदेही की मांग की। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार प्रशासन और नेतृत्व इस घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने मध्य प्रदेश को कुप्रशासन का एपिसेंटर बताया और कहा कि यहां लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिनमें गरीबों की जान जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर हमेशा की तरह खामोश रहते हैं जब गरीब मरते हैं। इस घटना के बाद से जनता में गुस्सा और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश फैल गया है और इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और प्रदर्शनों का दौर जारी है।

  • इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…

    इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…


    हैदराबाद। भाजपा शासित मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले और देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा जीतने वाले इंदौर में दूषित पानी पीने के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप से अब तक 13 मौत का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस आंकड़े पर स्थानीय लोगों, सरकार और अधिकारियों के बीच विरोधाभास बना हुआ है।
    इस बीच, हैदराबाद से सांसद और AIMIM की चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस हादसे के लिए भाजपा को न सिर्फ जिम्मेदार ठहराया है बल्कि उसकी नीतियों की भी आलोचना की है। ओवैसी ने दो टूक कहा कि ये लोग आम लोगों के घरों पर बुलडोजर तो चलवा सकते हैं लेकिन उन्हें साफ पानी पीने जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं दे सकते हैं।

    हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, “…उन्हें (बीजेपी) सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन की परवाह है… वे साफ पीने के पानी जैसी ज़रूरी चीज़ें भी नहीं दे सकते और खुद को विश्वगुरु कहते हैं।”

    उन्होंने कहा, “उन्हें सिर्फ बुलडोजर की फिक्र है। किसी मुसलमनान पर इल्जाम लगा तो उसको लाकर पीटते हैं और घर तोड़ देते हैं। इनकी सरकार ऐसी ही है कि देश में इंसानों को बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा सकते। हम 2026 में आ गए हैं और ये लोग विश्वगुरू बनने का दावा करते हैं लेकिन साफ पानी भी नहीं दे सकते हैं। लोग गंदा पानी पीकर मर रहे हैं तो इन लोगों (बीजेपी के लोगों) को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।”

    13 लोगों के मरने का दावा
    बता दें कि इंदौर में स्थानीय नागरिकों ने दूषित जल के प्रकोप के दौरान पिछले आठ दिन में छह माह के बच्चे समेत 13 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है, जबकि प्रशासन ने डायरिया से केवल चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक पहली नजर में लीकेज के कारण पेयजल की पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिलने के कारण भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला। भागीरथपुरा, राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है।
    अधिकारियों के मुताबिक चार लोगों की मौत

    विजयवर्गीय ने संवाददाताओं को बताया कि उल्टी-दस्त के प्रकोप से भागीरथपुरा में 1,400 से 1,500 लोग प्रभावित हुए जिनमें से लगभग 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।

    उन्होंने कहा कि इन मरीजों की हालत खतरे से बाहर है और स्वस्थ होने पर लोगों को अस्पताल से लगातार छुट्टी दी जा रही है।विजयवर्गीय ने उल्टी-दस्त के प्रकोप से मरे लोगों के आंकड़े को लेकर जारी विरोधाभास पर कहा,‘‘मुझे प्रशासन के अधिकारियों ने इस प्रकोप से चार लोगों की मौत की जानकारी दी है, पर यहां (भागीरथपुरा में) आठ-नौ लोगों की मौत की सूचना है। हम इस सूचना की तसदीक कर लेंगे और इसके सही पाए जाने पर संबंधित मृतकों के परिवारों के मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के अनुसार सहायता राशि प्रदान की जाएगी।’’
    अतिरिक्त मुख्य सचिव का दौरा

    इस बीच, राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्थानीय अफसरों के साथ भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा करके हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पेयजल की आपूर्ति की पाइपलाइन के लीकेज को दुरुस्त करने के बाद भागीरथपुरा में बृहस्पतिवार को जलप्रदाय किया गया और घरों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए।

  • 5 राज्यों के चुनावों की तैयारी.. इसी माह BJP अध्यक्ष पद संभाल सकतें हैं नितिन नबीन

    5 राज्यों के चुनावों की तैयारी.. इसी माह BJP अध्यक्ष पद संभाल सकतें हैं नितिन नबीन


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के कार्यकारी अध्यक्ष (Working President) नितिन नवीन (Nitin Naveen) जनवरी के मध्य में अध्यक्ष पद संभाल सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। फिलहाल, यह जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा (Jagat Prakash Nadda) संभाल रहे हैं। वह साल 2020 से अध्यक्ष पद पर हैं। खास बात है कि नवीन को भाजपा की कप्तानी ऐसे समय पर मिल रही है, जब पार्टी पश्चिम बंगाल (West Bengal) समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है।

    एक रिपोर्ट में भाजपा सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव की जरूरत पूरी हो गई हैं। ऐसे में नवीन का मध्य जनवरी तक पार्टी के शीर्ष पद पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। वह इस पद पर 2029 लोकसभा चुनाव तक रहेंगे। भाजपा के एक नेता ने कहा, ‘हमने 18 लाख पोलिंग बूथों में से 17 लाख से ज्यादा पर देश की 1050 जिलों में से 950 से ज्यादा में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 30 में पार्टी के संविधान के अनुसार संगठन चुनाव करा लिए हैं। आगे की प्रक्रिया भी पूरी तरह की जाएगी।’

    उन्होंने कहा, ‘चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में करीब 3 से 4 दिन लगने की संभावनाएं हैं। इसके बाद राष्ट्रीय परिषद की तरफ से इसे मंजूरी दी जाएगी।’ पार्टी के अन्य सूत्र ने अखबार को बताया, ‘चूंकि इस प्रक्रिया की घोषणा मकर संक्रांति के आसपास हो सकती है, तो ऐसे में 20 जनवरी तक नए अध्यक्ष के ऐलान के आसार हैं।’

    चुनाव कर रहे हैं इंतजार
    वर्ष 2025 के अंत में बिहार के विधायक नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया जाना पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत माना जा रहा है। उनके ऊपर साल 2026 में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी होगी। माना जा रहा है कि बंगाल चुनाव सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।