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  • मध्यप्रदेश: राज्यमंत्रियों की भूमिका होगी और मजबूत, अहम विभागों की मिल सकती है अतिरिक्त जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: राज्यमंत्रियों की भूमिका होगी और मजबूत, अहम विभागों की मिल सकती है अतिरिक्त जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल ही में हुई सत्ता और संगठन की समीक्षा बैठकों के बाद यह संकेत सामने आए हैं कि राज्य के राज्यमंत्रियों की भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है। इसके तहत उन्हें केवल सीमित कार्यों तक सीमित रखने के बजाय विभागीय स्तर पर अतिरिक्त अधिकार और जिम्मेदारियां देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज को अधिक गति देना और विभागों में निर्णय प्रक्रिया को तेज करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन विभागों में जहां कैबिनेट मंत्रियों के साथ राज्यमंत्री कार्यरत हैं, वहां राज्यमंत्रियों को और अधिक स्वतंत्र जिम्मेदारियां देने की योजना पर चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि इससे विभागीय कामकाज में न केवल तेजी आएगी बल्कि फाइलों के निपटारे में भी सुधार देखने को मिलेगा।

    बताया जा रहा है कि जिन राज्यमंत्रियों को अब तक सीमित कार्य या केवल समन्वय की भूमिका दी गई थी, उन्हें अब कुछ अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकार दिए जा सकते हैं। इनमें विभागीय निर्णयों में भागीदारी, योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और कुछ स्तर तक स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति शामिल हो सकती है। इससे राज्यमंत्रियों की भूमिका केवल औपचारिक न रहकर अधिक सक्रिय और प्रभावशाली हो जाएगी।

    सूत्र यह भी बताते हैं कि स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन और पंचायत जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत राज्यमंत्रियों को इस बदलाव का अधिक लाभ मिल सकता है। इन विभागों में काम का दायरा बड़ा होने के कारण प्रशासनिक दबाव भी अधिक रहता है, ऐसे में अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिलने से कार्यों के बेहतर संचालन की उम्मीद की जा रही है।

    वर्तमान व्यवस्था में कई राज्यमंत्रियों के पास केवल सीमित कार्यों की जिम्मेदारी है, जबकि कुछ को केवल कर्मचारी स्तर के तबादलों या छोटे प्रशासनिक निर्णयों तक ही सीमित रखा गया है। नए प्रस्ताव के तहत इस संरचना में बदलाव कर उन्हें विभागीय कार्यप्रणाली में अधिक सक्रिय भूमिका देने की तैयारी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सरकार की उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसके तहत प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे जहां एक ओर विभागीय कामकाज में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर मंत्रियों और राज्यमंत्रियों के बीच जिम्मेदारियों का बेहतर संतुलन भी स्थापित हो सकेगा।

    हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है, लेकिन चर्चा के स्तर पर इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इसे लागू किया जाता है तो मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली और अधिक गतिशील और परिणामोन्मुख बन सकती है।

  • शुभेंदु मंत्रिमंडल…. सबकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक यात्रा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग

    शुभेंदु मंत्रिमंडल…. सबकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक यात्रा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग


    कोलकाता।
    सबका साथ, सबका विकास के अपने राजनीतिक नारे को जमीन पर उतारते हुए भाजपा ने मंत्रिमंडल में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर खास जोर दिया है। शुभेंदु अधिकारी (Shuvendu Adhikari) ने मंत्रिमंडल (Cabinet) में ऐसे चेहरों को जगह दी है, जिनकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक यात्रा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रही है। इसमें फैशन डिजाइनर (Fashion Designer) से राजनीति में आई महिला नेता हैं,

    आरएसएस (RSS) के प्रचारक रहे संगठनकर्ता हैं। राजवंशी और अनुसूचित जाति समुदाय के चेहरे हैं, तो आदिवासी इलाकों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री (Chief Minister) के साथ शपथ लेने वालों में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, अशोक कीर्तनिया, निशीथ प्रमाणिक और क्षुदिराम टुडू बतौर मंत्री शामिल हैं। हालांकि विभागों का बंटवारा बाद में किया जाएगा, लेकिन शुरुआती तस्वीर से साफ है कि भाजपा ने राजनीतिक अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों को प्राथमिकता दी है।


    अग्निमित्रा पॉल: फैशन डिजाइनर से भाजपा की आक्रामक महिला चेहरा

    अग्निमित्रा पॉल उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने राजनीति में आने से पहले अलग क्षेत्र में पहचान बनाई। अग्निमित्रा ने भाजपा में तेजी से अपनी जगह बनाई और प्रदेश उपाध्यक्ष तक पहुंचीं। बॉटनी ऑनर्स में बीएससी, फैशन टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा और एमबीए करने वाली अग्निमित्रा भाजपा के मुखर महिला चेहरों में हैं। कायस्थ समुदाय से आने वाली अग्निमित्रा ने आसनसोल दक्षिण सीट से तृणमूल कांग्रेस के तापस बनर्जी को 40 हजार से अधिक वोटों से हराया।


    दिलीप घोष: आरएसएस प्रचारक से भाजपा के संगठन निर्माता

    दिलीप घोष का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक के रूप में शुरू हुआ। संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद बंगाल भाजपा की कमान सौंपी गई। 2015 से 2021 तक प्रदेश अध्यक्ष रहते भाजपा को बूथ स्तर तक मजबूत किया और ग्रामीण व आदिवासी इलाकों में पार्टी का विस्तार किया। 2016 में खड़गपुर सदर से विधायक बने। 2019 में मेदिनीपुर से सांसद चुने गए। बंगाल में भाजपा को मुख्य विपक्षी ताकत बनाने का श्रेय काफी हद तक दिलीप घोष को दिया जाता है। 2024 लोकसभा चुनाव में हार के बाद 2026 विधानसभा चुनाव में खड़गपुर सदर से वापसी की।


    निशीथ प्रमाणिक: सबसे युवा केंद्रीय मंत्रियों में रहे

    निशीथ प्रमाणिक बंगाल में भाजपा का बड़ा चेहरा हैं। सबसे युवा केंद्रीय मंत्रियों में रहे निशीथ राजवंशी समुदाय से आते हैं। पहले तृणमूल कांग्रेस में रहे निशीथ 2019 में भाजपा में शामिल हुए और उसी साल कूचबिहार से सांसद चुने गए। 35 की उम्र में केंद्र के सबसे युवा मंत्रियों में शामिल हुए और गृह राज्य मंत्री तथा युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। 2026 में माथाभांगा सीट से जीत दर्ज की। उत्तर बंगाल में भाजपा के विस्तार में अहम भूमिका रही।


    अशोक कीर्तनिया: सीमावर्ती राजनीति का मजबूत चेहरा

    उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव उत्तर क्षेत्र से आने वाले अशोक कीर्तनिया लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। अनुसूचित जाति बहुल और सीमावर्ती इलाके में भाजपा का संगठन मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। उन्होंने लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी पकड़ साबित की है। व्यवसाय और राजनीति से जुड़े अशोक को भाजपा के मजबूत एससी चेहरे के रूप में देखा जाता है।


    क्षुदिराम टुडू: आदिवासी चेहरा

    उत्तर रानीबांध सीट से जीत दर्ज करने वाले क्षुदिराम टुडू को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने जंगलमहल और आदिवासी इलाकों को स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने में सक्रिय रहे टुडू को भाजपा ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में महत्वपूर्ण चेहरा मानती है। शुभेंदु के पहले मंत्रिमंडल में दक्षिण बंगाल, उत्तर बंगाल, जंगलमहल, औद्योगिक क्षेत्र और सीमावर्ती इलाकों सभी को प्रतिनिधित्व दिया गया।

  • बड़ा फैसला…. छह साल बाद सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या…. कैबिनेट ने दी मंजूरी

    बड़ा फैसला…. छह साल बाद सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या…. कैबिनेट ने दी मंजूरी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जजों की संख्या को लेकर मंगलवार को अहम फैसला लिया। कैबिनेट ने SC में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने की मंजूरी दे दी। यह फैसला छह साल बाद लिया गया है, जब 2019 में इसे 31 से बढ़ाकर 33 किया गया था। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद सुप्रीम कोर्ट को और मजबूत करना व न्याय प्रक्रिया को तेज (Justice Process Speeding up) करना है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने बताया कि फिलहाल अदालत में 33 न्यायाधीश और एक मुख्य न्यायाधीश हैं। संसद के आगामी सत्र में इस संबंध में एक विधेयक पेश किया जाएगा। विधेयक के पारित होने के बाद मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के जजों की कुल संख्या 38 हो जाएगी। यह फैसला न्यायालय में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से लिया गया है।


    SC में कुछ इस तरह बढ़ती गई जजों की संख्या

    सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 में मूल रूप से मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर 10 न्यायाधीशों का प्रावधान था। 1960 में इसे 13 और बाद में 17 किया गया। 1986 के संशोधन से संख्या 25 हो गई और 2009 में इसे 30 कर दिया गया। फिलहाल ताजा प्रस्ताव के बाद न्यायपालिका को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उठाया गया है, जो देश के न्यायिक ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक साबित होगा।

    भारत के संविधान में सुप्रीम कोर्ट की कुल संख्या तय नहीं है। अनुच्छेद 124(1) के तहत चीफ जस्टिस के अलावा अन्य जजों की संख्या संसद तय करती है। समय-समय पर बढ़ती मुकदमों की संख्या को देखते हुए इसमें बदलाव किया जाता है। इस बढ़ोतरी का मकसद लंबित मामलों के बोझ को कम करना है। हालांकि, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ जजों की संख्या बढ़ाने से ही न्याय में देरी पूरी तरह दूर नहीं हो सकती।

  • मप्र कैबिनेट ने दी मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम को मंजूरी, विकास कार्यों के लिए 33,240 करोड़ रुपये स्वीकृत

    मप्र कैबिनेट ने दी मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम को मंजूरी, विकास कार्यों के लिए 33,240 करोड़ रुपये स्वीकृत


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही मंत्रि-परिषद ने कल्याणकारी योजनाओं सहित विभिन्न सात विभागों की महत्वपूर्ण योजनाओं की आगामी 5 वर्षों तक निरंतरता के लिए लगभग 33 हजार 240 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

    प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री यंग इंटनर्स फॉर गुड-गवर्नेंस प्रोगाम को भी मंजूरी दी है। सिंगरौली के चितरंगी में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित कुल 7 नवीन पदों के सृजन की भी मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने मैहर, कैमोर जिला कटनी और निमरानी जिला खरगोन में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के 3 औषधालय खोलने सहित चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ के 51 पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई है।

    उन्होंने बताया कि मंत्रि-परिषद द्वारा “मुख्यमंत्री यंग इंटर्नस फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम” को 3 वर्ष के लिए क्रियान्वयन के लिए लगभग 190 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। लोक सेवा प्रबंधन विभाग को अग्रिम कार्यवाही तथा प्रक्रिया निर्धारण कर नियमों एवं निर्देशों को जारी कर क्रियान्वयन के लिए अधिकृत किया गया है।

    निःशक्त जन को वृत्तिकर से छूट की निरंतरता की स्वीकृति
    काश्यप ने बताया कि मंत्रि-परिषद द्वारा मध्य प्रदेश वृत्तिकर अधिनियम, 1995 के अंतर्गत निःशक्त जन को वृत्तिकर से छूट को 31 मार्च, 2030 तक निरंतर किये जाने की स्वीकृति दी गयी गई है।


    7 जिलों के लिए “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना का अनुमोदन

    उन्होंने बताया कि मंत्रि-परिषद द्वारा “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना अंतर्गत चयनित 07 जिलों में पारंपरिक व विशिष्ट उत्पाद के सरंक्षण, विकास और विपणन हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आगामी 5 वर्षों में 37.50 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस परियोजना में चयनित 07 जिलों में सीधी जिले में दरी एवं कारपेट, दतिया में गुड़, अशोकनगर में चंदेरी, हाथकरघा वस्त्र, भोपाल मे जरी-जरदोजी एवं जूट उत्पाद (जैसे पर्स आदि), धार में बाग प्रिंट, सीहोर में लकड़ी के खिलौने तथा उज्जैन में बटिक प्रिंट में आगामी 5 वर्षों के लिए 37.50 करोड़ रूपये की डी.पी.आर, तैयार की गयी है।इस परियोजना से स्थानीय शिल्पकारों, बुनकरों और कारीगरों को प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण, ब्रांडिंग, विपणन तथा बाजार उपलब्धता जैसी सुविधायें प्रदान की जाएगी। यह परियोजना प्रदेश में स्थानीय उद्यमिता को बढावा, रोजगार सृजन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।


    सिंगरौली में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित 7 पदों की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने चितरंगी जिला सिंगरौली में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के लिए व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड का एक नवीन पद और उनके कार्यालयीन अमले के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 6 नवीन पद सहित कुल 7 नवीन पदों का सृजन किये जाने की स्वीकृत प्रदान की है।


    मैहर, कैमोर और निमरानी में 3 नये औषधालयों को मंजूरी

    मंत्रि-परिषद ने भारत सरकार के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (इएसआईसी) द्वारा मैहर (जिला-मैहर), कैमोर (जिला कटनी), तथा निमरानी (जिला खरगौन) में 3 नये औषधालयों को खोलने एवं चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ के 51 पदों का सृजन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। मैहर, कैमोर तथा निमरानी में नये कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय खोलने एवं नये पद सृजित करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इससे रजिस्टर्ड 15,686 श्रमिकों एवं उन पर आश्रित लगभग 62,744 परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी।

    इसके साथ ही मंत्रि-परिषद् द्वारा निर्णय लिया गया कि रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत वितरण अधोसंरचना के उन्नयन, यथा वितरण हानियों में कमीं तथा वितरण प्रणाली सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना के निर्माण और विकास कार्यों के लिए प्राप्त केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि राज्य की वितरण कंपनियों को राज्य शासन द्वारा अनुदान के स्थान पर अंशपूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी।स्कीम के अंतर्गत माह नवम्बर 2024 तक ऋण के रूप में प्रदत्त राशि 887 करोड़ 91 लाख रुपये को राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान किए जाने का अनुमोदन किया गया।

    वहीं, मंत्रि-परिषद् द्वारावित्त विभाग की लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया के अन्तर्गत 16 वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि (01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक) के लिए निरंतरता के लिए कुल 63 करोड़ 76 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। मंत्रि-परिषद द्वारा खनिज साधन विभाग के अंतर्गत “खनिज अधिभार का रक्षित निधि में अतंरण” योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर रखे जाने के लिए 6090 करोड़ 12 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

    मंत्रि परिषद द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की 31 मार्च 2031 तक निरंरता एवं सुचारू संचालन के लिये 7,127 करोड़ 38 लाख रूपये और योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय अंतर्गत संचालित 10 योजनाओं की 31 मार्च, 2031 तक निरंतरता के लिए 2,064 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। वहीं, जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के विकास और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सहित अन्य कार्यों से संबंधित योजनाओं की वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता के लिए कुल राशि 1,645 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गयी है।

    मंत्रि-परिषद द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता के लिए 3,773 करोड़ रुपये और एमएसएमई विभाग के अंतर्गत प्रोत्साहन व्यवसाय निवेश सवंर्धन/सुविधा प्रदाय योजना और स्टार्ट-अप पॉलिसी का क्रियान्वयन योजना सहित अन्य कार्यों की आगामी 5 वर्षों तक निरंतरता के लिए 11,361 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

  • MP: मोहन यादव मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं नए चेहरे…. कैबिनेट में बदलाव की सुगबुगाहट तेज

    MP: मोहन यादव मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं नए चेहरे…. कैबिनेट में बदलाव की सुगबुगाहट तेज


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल (Madhya Pradesh Cabinet) में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) और प्रदेश अध्यक्ष के दिल्ली दौरे के बाद से पैदा हुई हलचलों में कयास लगाए जा रहे हैं कि मंत्रिमंडल से कई दिग्गज मंत्री बाहर हो सकते हैं, वहीं उनकी जगह नए या फिर पुराने चेहरों को मौका मिल सकता है। हालांकि ऐसा कब तक होगा, इसके लिए कोई निश्चित तारीख बता पाना जल्दबाजी होगी, लेकिन ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha elections) के संपन्न होने के बाद ये बदलाव देखने को मिल सकता है।


    शीर्ष नेताओं से मिले सीएम यादव

    बताया जा रहा है कि दिल्ली दौरे में सीएम मोहन यादव पार्टी के शीर्ष स्तर के नेताओं के साथ मिले थे। इनमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन जैसे शीर्ष स्तर के नेता शामिल रहे थे। कहा जा रहा है कि उन बैठकों में मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर भी चर्चा हुई थी, जिसके बाद मीडिया में अलग-अलग तरह के कयास लगाए जाने लगे कि किसका पत्ता कटेगा और किसे मौका मिलेगा।


    प्रदेश प्रभारी भी घोषित होने हैं…

    अनुमान लगाया जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव होने के बाद कुछ प्रदेशों में प्रदेश प्रभारी भी घोषित होने हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि मंत्रिमंडल के दिग्गज और एक्सपीरियंस चेहरों को सरकार से हटाकर संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। क्योंकि, आने वाले समय में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जा सकती है।


    तजुर्बेकार नेताओं को मिल सकती अन्य राज्यों की कमान

    उदाहरण के तौर पर बंगाल चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय को मौका मिला है, पंजाब के प्रभारी रहे हरियाणा के नरेंद्र सिंह तोमर भी कमान संभाल चुके हैं। बिहार चुनाव में किए गए बेहतरीन प्रदर्शन में एमपी मॉडल से मिले लाभ की भी चर्चाएं हैं। ऐसे में संगठन के स्तर पर प्रदेश के कई दिग्गज नेता अहम भूमिका निभाते हैं, जो कि आने वाले चुनावों में काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

    कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह, उदय प्रताप सिंह जैसे दिग्गज नेता लंबे समय से मध्य प्रदेश की राजनीति कर रहे हैं। इन्हें काफी अनुभव हो चुका है। ऐसे में संभावना है कि पार्टी उन्हें अन्य राज्यों की जिम्मेदारी सौंप दे ताकि उनके अनुभवों को और ज्यादा भुनाया जा सके।


    कब तक हो सकता है बदलाव

    बदलाव के समय को लेकर कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है, लेकिन ऐसा अनुमान है कि ये फेरबदल मार्च के आखिरी तक राज्यसभा चुनाव संपन्न होने के बाद हो सकता है। चूंकि 2027 में राज्य के अंदर निकाय चुनाव होने हैं, ऐसे में जो भी बदलाव होगा वो चुनावों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। ताकि सभी वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल सके। यानी नाम को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है कि किसे शामिल किया जाएगा और किसे बाहर।

    बताया जा रहा है कि राज्य के मंत्रियों-विधायकों की रिपोर्ट भी तैयार की गई थी, जिसे आलाकमान के पास सौंपा गया है। इसके आधार पर फैसला लिया जा सकता है कि किन मंत्रियों का कामकाज संतोषजनक नहीं है। वहीं ठीक काम करने वाले और आलाकमान से नजदीकियां/खास रखने वालों को मौका मिल सकता है।

  • बांग्लादेश के 11वें प्रधानमंत्री बने तारिक रहमान, 25-सदस्यीय मंत्रिमंडल में शामिल एक हिंदू नेता

    बांग्लादेश के 11वें प्रधानमंत्री बने तारिक रहमान, 25-सदस्यीय मंत्रिमंडल में शामिल एक हिंदू नेता


    ढाका। बांग्लादेश में मंगलवार को एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ, जब तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। तारिक रहमान अब बांग्लादेश नेशनल पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय खालिदा जिया के पुत्र के रूप में देश की कमान संभालेंगे। वह बांग्लादेश के 11वें प्रधानमंत्री बने। आम चुनावों में बड़ी जीत के साथ ही उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनूस की जगह यह पद ग्रहण किया। शपथ ग्रहण समारोह ढाका स्थित संसद भवन के साउथ प्लाजा में शाम 4 बजे आयोजित किया गया। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें शपथ दिलाई।

    नई सरकार के मंत्रियों में शामिल प्रमुख चेहरे हैं:-

    डॉ. खलीलुर रहमान – विदेश मंत्री
    सलाहुद्दीन अहमद – गृह मंत्री
    डॉ. अमीर खसरू महमूद – वित्त एवं योजना मंत्री
    शमा ओबैद – विदेश राज्य मंत्री

    शपथ ग्रहण समारोह में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति भी रही। भारत से लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भाग लिया। इसके अलावा मलेशिया, पाकिस्तान, मालदीव, तुर्की, श्रीलंका के प्रतिनिधि तथा चीन, सऊदी अरब, यूएई और ब्रुनेई को आमंत्रित किया गया।

    कैबिनेट मंत्रियों की सूची

    कुल 25 सदस्यों के मंत्रिमंडल में शामिल हैं:- मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खोशरू महमूद चौधरी, सलाहुद्दीन अहमद, इकबाल हसन महमूद, मेजर रिटायर्ड हाफिज उद्दीन अहमद बीर बिक्रम, अबू जफर मोहम्मद जाहिद हुसैन, डॉ. खलीलुर रहमान, अब्दुल अव्वल मिंटू, काजी शाह मोफज्जल हुसैन कैकोबाद, मिजानुर रहमान मीनू, निताई रॉय चौधरी (हिंदू नेता), खंडेकर अब्दुल मुक्तदिर, अरिफुल हक चौधरी, जहीर उद्दीन स्वपन, मोहम्मद अमीन उर रशीद, अफरोजा खानम रीटा, शाहिद उद्दीन चौधरी एनी, असदुल हबीब दुलु, मोहम्मद असदुज्जमां, जकारिया ताहिर, दीपेन दीवान (अल्पसंख्यक), एएनएम एहसानुल हक मिलन, सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन, फकीर महबूब अनम और शेख रबीउल आलम।

    राज्य मंत्रियों में शामिल प्रमुख नाम
    एम रशीदुज्जमां मिल्लत, अनिंद्य इस्लाम अमित, एमडी शरीफुल आलम, शमा ओबैद इस्लाम, सुल्तान सलाहुद्दीन टुकू, बैरिस्टर कैसर कमाल, फरहाद हुसैन आजाद, एमडी अमीनुल हक टेक्नोक्रेट मीर मोहम्मद हेलाल उद्दीन, हबीबुर रशीद, एमडी राजीब अहसन, एमडी अब्दुल बारी, मीर शाहे आलम, जोनायद अब्दुर रहीम साकी, इशराक़ हुसैन, फरजाना शर्मिन, शेख फ़रीदुल इस्लाम, नुरुल हक नूर, यासर खान चौधरी, एम इकबाल हुसैन, एमए मुहिथ, अहमद सोहेल मंजूर, बॉबी हज्जाज और अली नेवाज महमूद खैयाम।

    संसदीय दल का नेता चुना गया

    बीएनपी ने शपथ ग्रहण से पहले संसदीय दल की बैठक में तारिक रहमान को दल का नेता चुना। उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं से भी मुलाकात की, जिनमें जमात-ए-इस्लामी चीफ शफीकुर रहमान और नेशनल सिटीजन पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम शामिल थे।

    चुनाव में बड़ी जीत

    हाल ही में हुए चुनाव में बीएनपी को 297 में से 209 सीटें मिलीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी केवल 68 सीटों तक सीमित रही। शेख हसीना की आवामी लीग इस चुनाव में भाग नहीं ले सकी। अल्पसंख्यक समुदाय से चार उम्मीदवार जीतकर आए, जिनमें दो हिंदू बीएनपी के टिकट पर विजयी रहे। राजनीतिक अस्थिरता और छात्र आंदोलनों के बाद अब नई सरकार के गठन के साथ बांग्लादेश लोकतांत्रिक ढांचे के तहत सुचारू रूप से चलने लगा है।

  • बांग्लादेश की नई BNP सरकार में हिंदू नेता गोयेश्वर चंद्र रॉय को मंत्री बनाए जाने का अनुमान

    बांग्लादेश की नई BNP सरकार में हिंदू नेता गोयेश्वर चंद्र रॉय को मंत्री बनाए जाने का अनुमान


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में हाल ही में हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है और नई सरकार गठन की तैयारी में है। पार्टी ने निर्वाचित सांसदों की आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार पार्टी के 4 अल्पसंख्यक सांसद चुने गए, जिनमें दो हिंदू और दो बौद्ध समुदाय के नेता शामिल हैं।

    ढाका-3 सीट से जीतने वाले गोयेश्वर चंद्र रॉय को नई कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना है। 1951 में जन्मे रॉय BNP के स्थायी समिति सदस्य और पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वह खालिदा जिया की BNP सरकार में 1991-1996 के बीच राज्य मंत्री रह चुके हैं और पर्यावरण, वन, मत्स्य एवं पशुपालन मंत्रालयों का प्रभार संभाल चुके हैं। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, गोयेश्वर चंद्र रॉय और उनके समधी निताई रॉय चौधरी ने हाल ही में चुनाव में जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवारों को हराया।

    BNP के प्रधान तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय और अन्य पांच मंत्रालय अपने पास रखने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत निर्वाचित सांसद तीन दिन के भीतर शपथ लेंगे और उसी दिन कैबिनेट गठन की प्रक्रिया पूरी होगी।

    कैबिनेट में कुल 30 से 40 सदस्य शामिल होने की संभावना है। चर्चा के अनुसार, विदेश मंत्री पद के लिए हुमायूं कबीर, वित्त मंत्री के लिए डॉ. रेजा किब्रिया, वाणिज्य मंत्रालय के लिए आमिर खुसरो महमूद चौधरी और कानून मंत्रालय के लिए पूर्व अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमान पर विचार चल रहा है। अन्य मंत्रालयों की जिम्मेदारी जैसे गृह, स्थानीय सरकार, सड़क परिवहन, स्वास्थ्य और सूचना मंत्रालयों के लिए वरिष्ठ नेताओं के नामों पर चर्चा जारी है।

    गोयेश्वर चंद्र रॉय का BNP और जिया परिवार के साथ गहरा संबंध है और वे बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने अपने भाषणों में बार-बार यह जताया है कि बांग्लादेश में हिंदू या अन्य अल्पसंख्यक नागरिक समान अधिकारों के हकदार हैं।

    इस चुनावी सफलता और कैबिनेट गठन के संकेतों के बीच बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व मजबूत होने की संभावना है। BNP की नई सरकार के गठन के बाद गोयेश्वर चंद्र रॉय की भूमिका पर सभी की नजर रहेगी।

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    MP: BJP विधायक का छलका दर्द, 'कुछ साल पहले तक CM, आधी कैबिनेट हमारी होती थी, अब कुछ…'


    मध्य प्रदेश ।मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने सागर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। प्रदेश के सबसे वरिष्ठ विधायकों में शुमार गोपाल भार्गव ने मंच से ब्राह्मण समाज और मौजूदा हालात को लेकर अपनी पीड़ा खुलकर जाहिर की। उनका कहना था कि आज कई संगठनों का एक ही एजेंडा रह गया है ब्राह्मणों को दबाना, उन्हें हाशिए पर ले जाना और उनके खिलाफ माहौल बनाना।

    आज ब्राह्मण समाज आंखों में खटक रहा है

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने कहा कि ब्राह्मण समाज आज कई लोगों की आंखों में खटक रहा है। उन्होंने चिंता जताते हुए सवाल किया कि आखिर नियम-कानून बनाते समय हमेशा ब्राह्मण समाज को ही क्यों निशाना बनाया जाता है। भार्गव ने कहा कि अब समय आ गया है कि ब्राह्मण समाज एकजुट होकर अपनी सामाजिक और धार्मिक पहचान की रक्षा के लिए आगे आए।

    कुछ साल पहले तक सीएम और आधी कैबिनेट हमारी होती थी

    अपने संबोधन में वरिष्ठ विधायक ने राजनीतिक परिदृश्य में आए बदलावों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक मुख्यमंत्री हमारे होते थे, प्रशासन में अधिकारी हमारे होते थे और यहां तक कि आधी से ज्यादा कैबिनेट भी ब्राह्मण समाज से आती थी। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि गिने-चुने लोग ही बचे हैं। भार्गव का यह बयान न केवल समाज की स्थिति पर सवाल उठाता है, बल्कि सत्ता और प्रतिनिधित्व में आए बदलाव की ओर भी संकेत करता है।

    यूजीसी और नियमों पर उठाए सवाल

    गोपाल भार्गव ने यूजीसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अन्य संस्थाओं के नियमों को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकतर नियम और नीतियां ब्राह्मण समाज के खिलाफ ही बनाई जा रही हैं। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए समाज से जागरूक होने और संगठित रहने की अपील की।

    पहले भी आ चुके हैं संवेदनशील बयान

    यह मामला इसलिए और गंभीर माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में कुछ आईएएस अधिकारियों के बयान भी चर्चा में रहे हैं। पहले आईएएस संतोष वर्मा का ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिया गया विवादित बयान सामने आया, फिर आईएएस नियाज खान ने सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समाज के समर्थन में टिप्पणी की। अब एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता का ऐसा बयान पूरे मुद्दे को और संवेदनशील बना रहा है।

    सम्मान समारोह में दिया गया बयान

    गौरतलब है कि विधायक गोपाल भार्गव रविवार 1 फरवरी 2026 को सागर शहर के रविंद्र भवन में आयोजित ब्राह्मण समाज की पत्रिका के विमोचन एवं मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इसी मंच से उन्होंने यह बयान दिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे चुका है।
  • MP में अस्थायी पद होंगे स्थायी, मोहन कैबिनेट ने सेवा भर्ती नियमों में बदलाव को दी मंजूरी

    MP में अस्थायी पद होंगे स्थायी, मोहन कैबिनेट ने सेवा भर्ती नियमों में बदलाव को दी मंजूरी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने विभिन्न परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए राहतों का ऐलान करते हुए राज्य की कर्मचारी व्यवस्था में बड़ा सुधार करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक (Cabinet meeting) में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थाई और अस्थाई पदों में भेदभाव को समाप्त करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में जरूरी प्रावधान करने पर भी मुहर लगाई है।

    कैबिनेट ने अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना के डूब प्रभावितों के लिए 1,782 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी। डूब प्रभावितों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में प्रावधान किए गए 1656 करोड़ रुपये के अतिरिक्त 1,782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज स्वीकृत किया गया। सिंचाई और जलविद्युत की परियोजनाएं अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में चल रही हैं।

    अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना 5,512 करोड़ रुपये की है। इससे 71 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी और 125 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इन तीनों परियोजनाओं से कुल 13,873 परिवार प्रभावित होंगे, जिन्हें विशेष पैकेज के तहत प्रति परिवार 12.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। एससी और एसटी के 50 हजार परिवारों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी।

    कैबिनेट ने 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में विभाग स्तर पर 10 लाख या उससे अधिक के कार्यों पर मुहर लगाई है। इसके तहत 693 करोड़ 76 लाख रुपये के लगभग 3810 काम होंगे। भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के मेंटिनेंस के लिए भी 2025-26 के दौरान 90 करोड़ 67 लाख रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है।

    कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को साल 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के लिए 905 करोड़ 25 लाख रुपये को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थायी और अस्थायी पदों के विभेदीकरण को खत्म करने की मंजूरी दी। इस दिशा में स्वीकृत अस्थायी पदों को स्थायी पदों में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में जरूरी प्रावधान करने को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।