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  • लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए नए फार्मूलों पर काम कर रही केन्द्र सरकार….

    लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए नए फार्मूलों पर काम कर रही केन्द्र सरकार….


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) लोकसभा सीटों (Lok Sabha seats) की संख्या बढ़ाने के लिए कई तरह के फार्मूलों पर काम कर रही है। दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। साथ ही, सरकार महिला आरक्षण कानून (Women’s Reservation Law) को लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill) के नए मसौदे को प्रभावी बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।

    दक्षिणी राज्यों की इस चिंता को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया जा रहा है कि आबादी के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया से लोकसभा में उनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी। पहला विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो सका, क्योंकि सरकार इसे पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई।


    क्या है नया फॉर्मूला

    पहले वाले विधेयक को आधार बनाते हुए नए मसौदे में 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा अनुपात को बनाए रखने का प्रस्ताव किया गया है। सूत्रों ने बताया कि यह उन प्रस्तावों में से एक है जिन पर सरकार काम कर रही है, और अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा, क्योंकि अभी की जा रही जनगणना के आंकड़े आने बाकी हैं।


    दो तिहाई बहुमत का इंतजार

    सूत्रों ने बताया कि सरकार को जब संख्याबल का भरोसा हो जाएगा उसके बाद ही विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। अभी सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास लोकसभा में लगभग 300 सांसद हैं और तीन सीटें खाली हैं। दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए उसे 360 के आंकड़े की जरूरत है।


    2034 से पहले अड़चन

    मौजूदा कानून के तहत महिलाओं के लिए आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि यह प्रक्रिया 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के पूरा होने से जुड़ी हुई है। इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण कानून में बदलाव की जरूरत थी।

    सरकार की योजना के अनुसार, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए, पिछली प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया के बाद लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 कर दी जाएगी।


    पिछला संविधान संशोधन विधेयक

    अप्रैल में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जाएंगी। विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें ‘किसी राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों को बारी-बारी से आवंटित की जाएंगी।’

  • अमेरिकी कमांड के नक्शे पर सियासत: भारत का गलत मानचित्र दिखाने पर पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार को घेरा

    अमेरिकी कमांड के नक्शे पर सियासत: भारत का गलत मानचित्र दिखाने पर पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार को घेरा

    नई दिल्ली भारत के मानचित्र को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सैन्य कमांड द्वारा इस्तेमाल किए गए एक कथित गलत भारतीय नक्शे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और कहा है कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट और सख्त रुख अपनाना चाहिए।

    मामला उस समय चर्चा में आया जब अमेरिकी सैन्य कमांड की एक प्रस्तुति या दस्तावेज में भारत का ऐसा नक्शा सामने आया, जिसमें भारतीय सीमाओं को लेकर विवादित चित्रण होने का आरोप लगाया गया। इस पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि भारत के नक्शे के साथ किसी भी प्रकार की गलत प्रस्तुति स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भारत और अमेरिका के संबंधों को सरकार लगातार मजबूत और ऐतिहासिक बता रही है, तब इस तरह की चूक कैसे हो गई।

    पवन खेड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर औपचारिक आपत्ति दर्ज करानी चाहिए और अमेरिकी पक्ष से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए। उनका कहना था कि देश की सीमाओं और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपलब्धियों का प्रचार तो करती है, लेकिन जब भारत की संवेदनशील सीमाओं से जुड़ा कोई मामला सामने आता है तो अपेक्षित कठोरता नहीं दिखाती।

    इस मुद्दे के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस शुरू हो गई है। विपक्ष का कहना है कि भारत के नक्शे के गलत चित्रण पर केंद्र सरकार को तुरंत प्रतिक्रिया देनी चाहिए, जबकि सरकार समर्थक पक्ष का तर्क है कि ऐसे मामलों में कूटनीतिक स्तर पर कार्रवाई की जाती है और हर मुद्दे को सार्वजनिक विवाद का रूप देना उचित नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने मानचित्र और क्षेत्रीय दावों को लेकर हमेशा संवेदनशील रहा है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े नक्शों में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवादित प्रस्तुति पर भारत पहले भी कई देशों और संस्थाओं के सामने आपत्ति दर्ज कराता रहा है। यही कारण है कि अमेरिकी सैन्य कमांड के दस्तावेज में कथित गलत नक्शे का मामला राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    फिलहाल इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। वहीं कांग्रेस लगातार सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने और अमेरिकी पक्ष के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराने की मांग कर रही है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक बहस के साथ-साथ भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर

    केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर


    नई दिल्ली।
    देश में हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (Domestic LPG Cylinder Prices) में तेल वितरण कंपनियों ने 29 रुपये की बढ़ोतरी कर महंगाई का बम फोड़ा था. ये तीन महीने में 14.2 किलोग्राम वाले LPG Cylinder की कीमत में दूसरी बढ़ोतरी थी. सिलेंडर महंगा होने के बाद अब सरकार (Government) ने उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojna) के लाभार्थियों को बड़ा झटका दिया है. इस सरकारी स्कीम के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की संख्या में बड़ी कटौती की गई है।

    इसके साथ ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, PMUY के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा. उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार रिफिल की खपत होती है, पहले PMUY लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर DBT मिलता था।


    9 नहीं, अब सिर्फ 4 सिलेंडर

    प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत अब तक लाभार्थियों के लिए रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 थी, जिसे कम करते हुए सरकार ने सिर्फ 4 कर दिया है. केंद्र सरकार के इस बड़े फैसले को लेकर अधिकारियों ने बताया कि ये कदम वित्तीय सहायता को वास्तविक औसत घरेलू खपत के स्तर के अनुरूप बनाता है।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने इस संबंध में कहा कि संशोधित पात्रता उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है.


    2016 में शुरुआत, अब तक ऐसे घटी संख्या

    मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की थी और इसका उद्देश्य वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना था. योजना की शुरुआत में इसके लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिए जाते थे. लेकिन फिर सरकार ने इस वार्षिक कोटे को कम करते 9 कर दिया था और अब इसे घटाकर सिर्फ चार करने का फैसला लिया गया है.

    उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर पर सरकार सब्सिडी (LPG Cylinder Subsidy) भी देती है. इन्हें किफायती बनाए रखने के लिए सरकार ने मई 2022 में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की, जिसे अगले साल यानी अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया था. सरकार की ओर से दी जाने वाली ये एलपीजी सब्सिडी हर रिफिल खरीद के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा की जाती है।


    उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर का दाम

    बता दें कि 7 जून को घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 942 रुपये हो गई. इससे पहले 7 मार्च को तेल वितरण कंपनियों ने 60 रुपये की बढ़ोतरी की थी. इस हिसाब से 300 रुपये की सब्सिडी के साथ उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अपने पहले चार सिलेंडरों के लिए प्रति रिफिल 642 रुपये का भुगतान करना होगा.

    पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने 2022 से अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं. हाल ही में घरेलू खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, सरकारी तेल विपणन कंपनियां बेचे गए प्रत्येक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं।

  • लक्षद्वीप को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला…., 47 साल से लागू शराबबंदी को किया खत्म

    लक्षद्वीप को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला…., 47 साल से लागू शराबबंदी को किया खत्म


    नई दिल्ली।
    लक्षद्वीप (Lakshadweep) को लेकर केंद्र सरकार (Central government) ने बड़ा फैसला किया है। यहां 47 साल पहले लागू की गई शराबबंदी (Prohibition of alcohol) अब खत्म कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक द्वीपसमहू में पर्यटन को बढ़ावा देने और राजस्व के लिए सरकार ने यह फैसला किया है। आपको बता दें कि लक्षद्वीप में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। ऐसे में इस्लामिक सिद्धातों को देखते हुए यहां 1979 में शराबबंदी लागू की गई थी। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से लक्षद्वीप के लोग खुश नहीं हैं।


    क्यों हटा ली गई शराबबंदी

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने लक्षद्वीप एक्साइज रेग्युलेशन 2026 पर साइन कर दिए हैं। इसके बाद लक्षद्वीप प्रोहिबिशन रेग्युलेश 1979 को वापस ले लिया गया है। केंद्र सरकार लक्षद्वीप को वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। ऐसे में विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए रेस्तरां और होटलों में शराब उपलब्ध करवाने और रेवेन्यू जनरेट करने के लिए सरकार ने लगभग 50 साल पुराना कानून वापस ले लिया है।

    नए नियमों के मुताबिक नियंत्रित तरीके से द्वीपसमूह में शराब बेची जा सकगी। सरकार को इससे बड़ा मुनाफा होने वाला है. सरकार शराब पर एक्साइज ड्यूटी, लाइसेंस फीस और अन्य चार्ज लगाकर कमाई करेगी। पूरी तरह से लागू की गई शराबबंदी को नए कानून ने रिप्लेस कर दिया है और अब नियंत्रित करीके से शराब की मैन्युफेक्चरिंग, आयात, निर्यात, ट्रांसपोर्ट और बिक्री को लागू किया जाएगा। साथ ही सरकार इन सारी गतिविधियों पर पूरी नजर रखेगी।


    कैसे काम करेगा नया नियम

    रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऐसा नहीं है कि शराब को मनमाने तरीके से बेचने की छूट दे दी गई है। इसपर सरकार का पूर् नियंत्रण होगा। देसी और विदेशी शराब पर 400 फीसदी का आबकारी कर लगाया गया है। इसके अलावा बियर पर 200 फीसदी और वाइन पर 80 पर्सेंट का कर वसूला जाएगा। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट एजेंसियां शराब बिक्री के लिए लाइसेंस ले सकती हैं। 21 साल से नीचे वालों को शराब बेचने की अनुमति नहीं होगी।


    क्यों है इस फैसले पर विवाद कि आशंका

    लक्षद्वीप में 96.5 पर्सेंट मुसलमान रहते हैं। 1979 में शराबबंदी इस्लामिक सिद्धातों को ध्यान में रखकर ही की गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां शराब बेचने की अनुमति देकर माहौल बिगाड़ने का ही प्रयास है। अपने फायदे के लिए सरकार समाज को दूषित करना चाहती है। लक्षद्वीप से सांसद हमदुल्लाह सईद ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह से सरकार की उपलब्धता से युवाओं को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। वे नशे के आदी हो जाएंगे और फिर लक्षद्वीप में भी अपराध बढ़ने लगेंगे।

  • आरबीआई का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, आर्थिक मजबूती को मिलेगा सहारा

    आरबीआई का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, आर्थिक मजबूती को मिलेगा सहारा

    नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय घटनाक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड स्तर का डिविडेंड देने का निर्णय लिया है। यह राशि करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जो अब तक के इतिहास में सबसे बड़े सरप्लस ट्रांसफर में से एक माना जा रहा है। इस निर्णय से सरकार की राजकोषीय स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और भू-राजनीतिक तनाव कई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।

    नई दिल्ली। यह फैसला मुंबई में आयोजित भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। बैठक में देश और दुनिया की आर्थिक स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें संभावित जोखिमों और भविष्य की वित्तीय चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि इस वर्ष सरप्लस ट्रांसफर की स्थिति मजबूत है और इसे केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जा सकता है।

    आरबीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक की बैलेंस शीट का आकार उल्लेखनीय रूप से बढ़कर लगभग 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। इसी अवधि में बैंक की कुल आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे केंद्रीय बैंक की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है।

    डिविडेंड के इस बड़े निर्णय के पीछे बैंक की आय में वृद्धि और जोखिम प्रावधानों के बाद बची शुद्ध आय प्रमुख कारण रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जोखिम प्रावधान और अन्य वैधानिक फंड में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय में भी पिछले वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार को बड़ी राशि हस्तांतरित करना संभव हुआ।

    नई दिल्ली। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम सरकार के लिए वित्तीय रूप से राहत देने वाला साबित हो सकता है। इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे, विकास परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था में निवेश और मांग दोनों को समर्थन मिलेगा।

    इसके साथ ही आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि आर्थिक पूंजी ढांचे के तहत एक सुरक्षित जोखिम बफर बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित आर्थिक अनिश्चितता का सामना किया जा सके। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि पर्याप्त प्रावधानों के बाद शेष राशि को केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जाए।

    इस ऐतिहासिक डिविडेंड के बाद सरकार की वित्तीय स्थिति को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है, जो आगामी बजट और आर्थिक नीतियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • बाजार में बिकने वाला सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में केन्द्र सरकार

    बाजार में बिकने वाला सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में केन्द्र सरकार


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) बाजार (Market) में बिकने वाले सिंथेटिक पनीर (Synthetic Cheese) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India- FSSAI) ने फैसला लिया है कि कम पोषण वाले और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले दिखावटी पनीर को बाजार से पूरी तरह बाहर किया जाएगा। मामले से जुड़े दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

    इस मामले में बनी एक हाई लेवल कमेटी ने अक्टूबर 2025 में इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया था, जिसे मार्च 2026 की बैठक में आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। समिति का कहना था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी उत्पादक देश है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में बड़ी मात्रा में सस्ता सिंथेटिक पनीर बेचा जा रहा है। यह असली पनीर जैसा दिखता और स्वाद में मिलता-जुलता होता है, जिससे आम ग्राहक के लिए पहचान करना मुश्किल हो जाता है और वह भ्रमित होता है।


    1,000 कंपनियों के पास सिंथेटिक पनीर बनाने के लाइसेंस

    इसी वजह से इसे बाजार से चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना बनाई जा रही है। वर्तमान में सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं है। देश में करीब 1,000 ऐसी कंपनियां या कारोबारी हैं, जिनके पास इसे बनाने का लाइसेंस है। नई नीति के तहत अब नए लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे और मौजूदा कंपनियों को अपना स्टॉक खत्म करने और उत्पादन बंद करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।


    इसलिए पड़ी जरूरत

    बीते कुछ समय से बाजार में ‘सिंथेटिक पनीर’ का चलन तेजी से बढ़ा है। यह एक सस्ता विकल्प है, जिसे ताजे दूध की बजाय मुख्यतः पाम ऑयल, मिल्क पाउडर, स्टार्च और इमल्सीफायर्स से बनाया जाता है। यह दिखने और बनावट में असली पनीर जैसा होता है, लेकिन इसकी गुणवत्ता और पोषण मूल्य दूध से बने पनीर की तुलना में काफी कम होता है। यह सिंथेटिक पनीर सस्ता होने के कारण कई रेस्तरां में उपयोग किया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को भ्रम होता है।

    लगातार बढ़ रहा बाजार: उत्तर भारत में खासतौर पर पनीर प्रोटीन का प्रमुख स्रोत माना जाता है। यही कारण है कि भारत का पनीर बाजार 10.8 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। मार्केट रिसर्च कंपनी आईएमएआरसी के अनुसार, वर्ष 2033 तक भारतीय पनीर बाजार के 22.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 8.7% रहने की संभावना है।

    कीमत में भारी अंतर: अधिकारियों के अनुसार, असली ब्रांडेड पनीर की कीमत करीब 450 रुपये प्रति किलो तक होती है, जबकि खुले में बिकने वाला सिंथेटिक या बिना ब्रांड वाला पनीर 250 से 300 रुपये प्रति किलो तक बिकता है।


    स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ा

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सिंथेटिक पनीर में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम और फैट बहुत ज्यादा होता है। इसके नियमित सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध पैदा हो सकता है, जो टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकता है।

  • ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल

    ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर राज्य को तीन हिस्सों में बांटने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों को बिहार और ओडिशा में मिलाने की योजना है, जिससे बंगालियों को परेशान किया जाएगा।

    परिसीमन के जरिए राज्य विभाजन का आरोप
    बांकुरा जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा परिसीमन विधेयक के जरिए पश्चिम बंगाल की सीमाओं में बदलाव करना चाहती है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया से राज्य के कुछ हिस्सों का दूसरे राज्यों में विलय किया जा सकता है।

    केंद्रीय बलों पर महिलाओं के अपमान का आरोप
    मुख्यमंत्री ने चुनाव के लिए तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है।

    टीएमसी सरकार गिराने के लिए ‘1000 करोड़ की साजिश’ का दावा
    ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए 1000 करोड़ रुपये की डील करने का आरोप लगाया। उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर के एक वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भाजपा नेताओं से संपर्क और अल्पसंख्यक वोटों को बांटने की बात सामने आई है।

    SIR को बताया ‘देश का सबसे बड़ा घोटाला’
    मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को हाल के समय का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आती है तो केंद्र के सभी जनविरोधी कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा।

    सत्ता परिवर्तन का दावा
    ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि 2026 में केंद्र सरकार सत्ता से बाहर हो जाएगी। इसके बाद नई सरकार जनहित में फैसले लेगी और मौजूदा नीतियों में बदलाव किया जाएगा।

  • केन्द्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में…. इसी माह फिर बुलाया जाएगा संसद का विशेष सत्र

    केन्द्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में…. इसी माह फिर बुलाया जाएगा संसद का विशेष सत्र


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) के मौजूदा बजट सत्र (Current Budget Session) के समापन पर चल रही अटकलों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू (Kiren Rijiju) ने स्पष्ट किया है कि बजट सत्र को अनिश्चित काल के लिए आज स्थगित नहीं किया जाएगा बल्कि इसे कुछ दिनों के लिए स्थगित किया जाएगा और बहुत जल्द ही संसद के सदस्य फिर से मिलेंगे। राज्यसभा में उन्होंने कहा, ”हमारे पास कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, यह विपक्ष के साथ भी साझा किया गया है। अगले 2-3 हफ्तों में हम एक बहुत महत्वपूर्ण विधेयक (Very Important Bill) लाने वाले हैं। आज सरकार सदन को स्थगित करने का प्रस्ताव रखेगी और हम जल्द ही फिर मिलेंगे; उद्देश्य सदस्यों को ज्ञात है।”

    उनका यह बयान उन अटकलों और मीडिया रिपोर्ट्स के बीच आया, जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार संसद के मौजूदा बजट सत्र को अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित नहीं करेगी और कुछ दिनों के अंतराल पर फिर से दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू करेगी ताकि महिला आरक्षण में संशोधन करने वाले बिल को पेश और पारित कराया जा सके। संसद के बजट सत्र के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बजट सत्र के दूसरे चरण का आज अंतिम दिन है।


    हम जल्दी ही दो-तीन सप्ताह के अंदर फिर मिलेंगे

    यह मुद्दा राज्य सभा में अपराह्न दो बजे गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के आंध प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 को चर्चा और पारित कराने का प्रस्ताव रखने के लिए खड़े होते ही उठा। कांग्रेस के जयराम रमेश ने सभापति सीपी राधाकृष्णन के माध्यम से जानना चाहा कि सरकार सदन की कार्यवाही के विषयों के बारे में क्या सोचती है। क्या सदन को कल भी चलाया जाएया या इसे अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जाएगा। आसन के निर्देश पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि हम जल्दी ही दो-तीन सप्ताह के अंदर फिर मिलेंगे। इसका एक विशेष उद्येश्य है।


    कांग्रेस को क्या आपत्ति, क्यों कर रही विरोध?

    इस पर कांग्रेस अध्यक्ष और सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश ने कहा कि सरकार विधान सभा चुनावों का लाभ लेने के लिए महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की यह चाल चल रही है। उन्होंने मांग की कि इस के बारे में अब कोई भी बैठक 29 अप्रैल को विधान सभा चुनावों के आखिरी चरण का मतदान हो जाने के बाद ही बुलाया जाना चाहिए। दरअसल, विपक्ष चाहता है कि इस मुद्दे पर काई कार्यवाही अब कुछ राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में चल रहे विधान सभा चुनाव के बाद ही की जानी ठीक रहेगी क्योंकि भाजपा इसका आगामी चुनावों में लाभ उठा सकती है।

    16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिनों का संसद का विशेष सत्र
    इस पर रिजिजू ने कहा कि उन्होंने इस बारे में कांग्रेस सहित विपक्ष के सभी दलों के साथ पत्र लिखा है और चर्चा की है। विपक्ष के नेता ने पत्र का जवाब दिया है। उन्होंने विपक्ष से राजनीति में न पड़ कर सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि ‘ सरकार ने देश और महिलाओं के प्रति एक प्रतिबद्धता व्यक्त कर रखी है। उन्होंने कोई व्याख्या प्रस्तुत किए बिना कहा कि -सरकार समय से बंधी हुई है। समय बहुत कम है। इसका चुनावी राजनीति से कोई संबंध नहीं है।’NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार 16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिनों का संसद का विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है। इस दौरान संविधान संशोधन विधेयक पेश किये जाने की संभावना है जिसके जरिये नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन किया जाएगा।

  • SC ने अनावश्यक मुकदमेबाजी पर केंद्र सरकार को लगाई फटकार, ठोका 25 हजार जुर्माना

    SC ने अनावश्यक मुकदमेबाजी पर केंद्र सरकार को लगाई फटकार, ठोका 25 हजार जुर्माना


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) को अनावश्यक मुकदमेबाजी में पड़ने के लिए फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को उस पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश केंद्र की उस याचिका पर दिया है जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) द्वारा एक सीआईएसएफ अधिकारी की बर्खास्तगी को रद्द करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने सजा को असंगत पाते हुए अधिकारी को बकाया वेतन देने का भी आदेश दिया।

    जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “हमें समझ नहीं आ रहा कि भारत सरकार ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश को चुनौती क्यों दी है। हम बातें सुनते हैं कि मामले लंबित हैं। आखिर सबसे बड़ा मुकदमेबाज कौन है? हर्जाना लगाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि अगर उच्च न्यायालय ने इसे अनुचित पाया और सभी आदेशों को रद्द करते हुए राहत प्रदान की, तो हम उच्चतम न्यायालय न जाएं?” उन्होंने कहा कि अधिकारी ने चिकित्सा अवकाश लिया था, लेकिन उन्हें उनके परिवार में एक अप्रिय घटना से भी निपटना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित एक हालिया सम्मेलन में उन्होंने कहा था कि मामलों के लंबित रहने के लिए सरकार जिम्मेदार है। इस बयान का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि अदालत ने एससीबीए सम्मेलन को बहुत गंभीरता से लिया है।

    उन्होंने कहा, “यह सिर्फ किसी रिसॉर्ट में जाकर वापस आने की बात नहीं थी। हमने तैयारियां कीं, हमने पूरी जानकारी जुटाई। हमने बात की। महज इसलिये नहीं कि हम भूल जाएं।” सीआईएसएफ अधिकारी के खिलाफ दो आरोप लगाए गए थे – पहला 11 दिनों तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और दूसरा, एक महिला, जोकि एक सीआईएसएफ कांस्टेबल की बेटी थी, के साथ मिलकर मुंबई से भागने और अपने छोटे भाई के साथ उसकी शादी में शामिल होने की साजिश रचकर अनुशासनहीनता का कार्य करने का।


    स्वीकृत चिकित्सा अवकाश पर थे अधिकारी

    उच्च न्यायालय ने इस बात पर संज्ञान लिया कि 11 दिनों की अनुपस्थिति की अवधि के दौरान अधिकारी स्वीकृत चिकित्सा अवकाश पर थे। अदालत ने कहा, “प्रतिवादी-याचिकाकर्ता के भाई के साथ भाग जाने के दूसरे आरोप के संबंध में, यह रिकॉर्ड पर आया है कि महिला स्वयं अनुशासनात्मक कार्यवाही के दौरान उपस्थित हुई और उसने कहा कि उसे प्रतिवादी-याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है।”

    उच्च न्यायालय ने कहा, “यह बात निर्विवाद है कि याचिकाकर्ता के भाई ने संबंधित महिला से विवाह किया था। अतः यह पाया गया है कि वास्तव में याचिकाकर्ता की ओर से ऐसा कोई कदाचार नहीं हुआ था जिसके लिए उसे सेवा से हटाया जा सके।”

  • नक्सल-मुक्त भारत पर लोकसभा में अहम चर्चा, केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 तक लक्ष्य पूरा करने को प्रतिबद्ध

    नक्सल-मुक्त भारत पर लोकसभा में अहम चर्चा, केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 तक लक्ष्य पूरा करने को प्रतिबद्ध


    नई दिल्ली:लोकसभा में 30 मार्च को नक्सल-मुक्त भारत के लक्ष्य को लेकर अहम चर्चा होने जा रही है। केंद्र सरकार के अनुसार, मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना प्राथमिकता है। लोकसभा की कार्यसूची के मुताबिक, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे नियम 193 के तहत अल्पकालिक चर्चा शुरू करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई मौकों पर यह दोहराया है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य केंद्र सरकार का सर्वोच्च काम है। इस चर्चा में सुरक्षा अभियानों, रणनीति और माओवादी नेताओं के पुनर्वास नीतियों पर विस्तार से बात होगी।

    बीते एक साल में कई शीर्ष माओवादी नेताओं ने हथियार डालकर मुख्यधारा में वापसी की है। हाल ही में ओडिशा में वांछित माओवादी नेता सुक्कू ने चार अन्य माओवादियों के साथ 25 मार्च को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। एडीजी (एंटी नक्सल ऑपरेशंस) संजीव पांडा के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी नेताओं पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम था। साथ ही पांच हथियार भी बरामद किए गए, जिनमें एक एके-47, एक इंसास राइफल और एक सिंगल शॉट गन शामिल हैं।

    कंधमाल जिले में अब माओवादियों की संख्या सिंगल डिजिट में रह गई है। एडीजी संजीव पांडा ने बताया कि अब केवल 8–9 माओवादी बचे हैं और आने वाले दिनों में अभियान को और तेज किया जाएगा। उन्होंने शेष माओवादियों से अपील की है कि वे आत्मसमर्पण करें और सरकार की सभी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीतियों का लाभ उठाएं।

    इस चर्चा के माध्यम से लोकसभा में नक्सलवाद को समाप्त करने के केंद्र सरकार के व्यापक प्रयासों और रणनीति को साझा किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीतियों के संयोजन से न केवल हिंसा कम होगी, बल्कि मुख्यधारा में शामिल माओवादी नेताओं के लिए नए अवसर भी खुलेंगे। इस तरह, नक्सल-मुक्त भारत का सपना मार्च 2026 तक हकीकत बन सकता है