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  • पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य, डीजल और ATF पर बढ़ाया टैक्स, घरेलू कीमतों पर असर नहीं

    पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य, डीजल और ATF पर बढ़ाया टैक्स, घरेलू कीमतों पर असर नहीं


    नई दिल्ली। दिवाली से पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले टैक्स की दरों में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 2.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दी है। वहीं, डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया गया है। नए आदेश 31 अक्टूबर से लागू होकर अगले दो सप्ताह तक प्रभावी रहेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन बदलावों का घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों या उन पर लगने वाली मौजूदा ड्यूटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी खत्म

    वित्त मंत्रालय ने शनिवार, 31 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। इसके मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली 2.50 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब पेट्रोल के निर्यात पर यह टैक्स शून्य रहेगा।

    दूसरी ओर, सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। डीजल के निर्यात पर लगने वाली SAED और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की संयुक्त दर भी 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। यानी डीजल के निर्यात पर प्रति लीटर 3 रुपये टैक्स बढ़ा है।

    पश्चिम एशिया में तनाव के बीच फैसला

    सरकार ने ये बदलाव ऐसे समय किए हैं, जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ रहा है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, डीजल और ATF पर बढ़ाई गई दरें अगले दो सप्ताह के लिए लागू रहेंगी। इसके बाद बाजार की परिस्थितियों के अनुसार समीक्षा की जाएगी।

    घरेलू बाजार में नहीं होगा बदलाव

    पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विंडफॉल टैक्स में किए गए ये बदलाव केवल पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लागू होंगे। घरेलू इस्तेमाल के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में इस फैसले से देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधे असर की संभावना नहीं है।

    क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

    विंडफॉल टैक्स वह अतिरिक्त कर है, जो कंपनियों को असाधारण बाजार परिस्थितियों में सामान्य से अधिक मुनाफा होने पर लगाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ने पर रिफाइनरी कंपनियों को विदेशों में पेट्रोल और डीजल बेचकर ज्यादा कमाई हो सकती है। ऐसे में सरकार निर्यात पर टैक्स लगाकर इस अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा हासिल करती है।

    निर्यात पर शुल्क बढ़ाने का एक उद्देश्य विदेशों में ईंधन बेचना कम आकर्षक बनाना और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरी कंपनियों को प्रोत्साहित करना भी है।

    2022 में पहली बार लगाया गया था टैक्स

    भारत ने जुलाई 2022 में पहली बार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था। करीब दो साल बाद दिसंबर 2024 में इसे हटा दिया गया। इसके बाद मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने इसे दोबारा लागू किया। तब से बाजार की स्थितियों के अनुसार इसकी दरों में बदलाव किया जा रहा है।

    सरकार आमतौर पर हर दो सप्ताह में इन टैक्स दरों की समीक्षा करती है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों और घरेलू रिफाइनरी कंपनियों को निर्यात से होने वाले मुनाफे को ध्यान में रखा जाता है।

  • केन्द्रीय कर्मचारियों को जल्द मिल सकता है बड़ा तोहफा… 3% तक DA बढ़ा सकती है सरकार

    केन्द्रीय कर्मचारियों को जल्द मिल सकता है बड़ा तोहफा… 3% तक DA बढ़ा सकती है सरकार


    नई दिल्ली।
    डीए (DA) में बढ़ोतरी (Hike) को लेकर कर्मचारियों के मन में यह सवाल भी है कि क्या सरकार को इसके लिए कैबिनेट (Cabinet) की बैठक का इंतजार करना होगा? इस सवाल का जवाब आगे जानेंगे, लेकिन सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि DA में 3 फीसदी बढ़ोतरी हो सकती है। अगर केंद्र सरकार (Central Government) इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) मौजूदा 60% से बढ़कर 63% हो जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई 2026 से लागू होने वाले महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का ऐलान कब होगा? आज 27 अक्टूबर तक केंद्र सरकार ने इसका ऐलान नहीं किया है।

    बता दें डीए में इजाफे से कर्मचारियों की हर महीने मिलने वाली सैलरी बढ़ेगी, जबकि पेंशनर्स को भी महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी का फायदा मिल सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी तक बढ़ोतरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।


    DA Hike 2026: आखिर क्यों हो रही है देरी?

    केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। जुलाई 2026 के DA संशोधन के लिए जरूरी महंगाई के आंकड़े उपलब्ध हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक नई दर घोषित नहीं की है।

    कर्मचारियों को उम्मीद थी कि अक्टूबर में सरकार की ओर से महंगाई भत्ते पर फैसला आ सकता है। खासकर 14 अक्टूबर को रेलवे कर्मचारियों के लिए बोनस और 16 अक्टूबर को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बोनस की घोषणा के बाद DA बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ गई थीं। हालांकि, दोनों ही घोषणाओं में महंगाई भत्ते को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ।

    इसके बाद 21 अक्टूबर को भी कर्मचारियों को निराशा हाथ लगी। उस दिन केंद्रीय कैबिनेट की बैठक ही नहीं हुई। फिलहाल सरकार ने DA बढ़ाने में हो रही देरी की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है।


    क्या DA बढ़ाने के लिए कैबिनेट की बैठक जरूरी है?

    महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर कर्मचारियों के मन में यह सवाल भी है कि क्या सरकार को इसके लिए कैबिनेट की बैठक का इंतजार करना होगा? रिपोर्ट के मुताबिक, DA में संशोधन की घोषणा के लिए हर बार नियमित कैबिनेट बैठक का इंतजार करना जरूरी नहीं है। वित्त मंत्रालय भी इस संबंध में घोषणा कर सकता है।

    इसलिए कर्मचारियों को अगली कैबिनेट बैठक के अलावा वित्त मंत्रालय की ओर से आने वाले आधिकारिक आदेश पर भी नजर रखनी चाहिए। हालांकि, घोषणा कब होगी और DA कितने प्रतिशत बढ़ेगा, इसका फैसला सरकार को ही करना है।


    3% बढ़ोतरी का अनुमान क्यों लगाया जा रहा है?

    केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की गणना औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI-IW के आधार पर की जाती है। जुलाई 2026 से लागू होने वाले DA संशोधन की गणना के लिए जुलाई 2025 से जून 2026 तक के 12 महीनों के आंकड़ों को ध्यान में रखा जाता है।

    इन आंकड़ों के आधार पर DA की गणना लगभग 63.75% बैठने की रिपोर्ट है। मौजूदा गणना पद्धति के अनुसार, दशमलव के बाद के हिस्से को छोड़कर दर 63% रहने का अनुमान है। यही वजह है कि इस बार महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है। ध्यान रखें कि 63% DA अभी संभावित दर है। सरकार की मंजूरी और आधिकारिक आदेश के बाद ही नई दर की पुष्टि होगी।


    DA Arrears: जुलाई से मिल सकता है एरियर

    केंद्र सरकार अगर जुलाई 2026 से महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को मंजूरी देती है, तो पात्र कर्मचारियों को नई दर के अनुसार एरियर भी मिल सकता है। उदाहरण के लिए, ₹50,000 बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी का DA 60% से बढ़कर 63% होने पर हर महीने ₹1,500 ज्यादा बनेगा।

    अगर नई दर 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होती है, तो जुलाई से वास्तविक भुगतान शुरू होने तक की अवधि का एरियर भी देय हो सकता है। हालांकि, एरियर की वास्तविक रकम इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार संशोधित DA का भुगतान किस महीने से करती है। पेंशनर्स को भी इसी तरह महंगाई राहत (DR) में संशोधन का फायदा मिल सकता है।

  • IAS अधिकारियों की नई पदस्थापना से बदली अहम मंत्रालयों की कमान नरेंद्र भूषण पर्यावरण मंत्रालय के सचिव नियुक्त

    IAS अधिकारियों की नई पदस्थापना से बदली अहम मंत्रालयों की कमान नरेंद्र भूषण पर्यावरण मंत्रालय के सचिव नियुक्त


    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS के दो वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। प्रशासनिक स्तर पर हुए इस बदलाव के तहत 1992 बैच के IAS अधिकारी नरेंद्र भूषण को पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं 1995 बैच के अधिकारी दिलीप कुमार को ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग में सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों अधिकारियों की नई पदस्थापना के साथ केंद्र सरकार के दो महत्वपूर्ण विभागों में प्रशासनिक नेतृत्व में बदलाव हुआ है।
    नरेंद्र भूषण इससे पहले ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे। अब उन्हें पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव तन्मय कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद किया गया है। तन्मय कुमार 1993 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी थे और 30 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हुए। उनके कार्यकाल के बाद पर्यावरण मंत्रालय में सचिव के पद पर नरेंद्र भूषण की नियुक्ति की गई है।

    नरेंद्र भूषण के पास प्रशासनिक क्षेत्र में लंबे अनुभव के साथ केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में काम करने का अनुभव है। भूमि संसाधन विभाग में सचिव के तौर पर उनकी जिम्मेदारी के दौरान भूमि प्रबंधन और उससे जुड़े प्रशासनिक विषयों से संबंधित कामकाज उनके अधीन रहा। अब नई भूमिका में उनके सामने पर्यावरण संरक्षण वन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर मंत्रालय के प्रशासनिक कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

    इसी प्रशासनिक फेरबदल में दिलीप कुमार को भी नई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। 1995 बैच के IAS अधिकारी दिलीप कुमार फिलहाल कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय में महानिदेशक प्रशिक्षण के पद पर कार्यरत थे। अब उन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग का सचिव बनाया गया है। वह नरेंद्र भूषण का स्थान लेंगे और विभाग के प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    भूमि संसाधन विभाग ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग है। भूमि से संबंधित नीतियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के साथ भूमि रिकॉर्ड में सुधार और भूमि संसाधन प्रबंधन जैसे विषय इसके कामकाज का हिस्सा हैं। ऐसे में दिलीप कुमार की नई नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। उनके सामने विभाग की मौजूदा योजनाओं और कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

    केंद्र सरकार में वरिष्ठ IAS अधिकारियों की नियुक्तियां प्रशासनिक व्यवस्था का अहम हिस्सा होती हैं। अलग अलग मंत्रालयों और विभागों में अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी देकर सरकार अपने कामकाज को आगे बढ़ाती है। इस ताजा बदलाव में भी दो वरिष्ठ अधिकारियों को उनके अनुभव के अनुरूप महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।

    एक ओर नरेंद्र भूषण अब पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव के रूप में काम करेंगे तो दूसरी ओर दिलीप कुमार भूमि संसाधन विभाग में सचिव की भूमिका संभालेंगे। दोनों नियुक्तियों के साथ संबंधित मंत्रालयों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का नया क्रम प्रभावी हो गया है। यह बदलाव 30 सितंबर को तन्मय कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद सामने आया है और केंद्र सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर इसे महत्वपूर्ण पदस्थापना के तौर पर देखा जा रहा है।

  • केन्द्र सरकार ने घटाया कर्ज का लक्ष्य…. 1.20 लाख करोड़ रुपये की कटौती की

    केन्द्र सरकार ने घटाया कर्ज का लक्ष्य…. 1.20 लाख करोड़ रुपये की कटौती की


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में बाजार से लिए जाने वाले कर्ज का लक्ष्य (Debt Target) घटा दिया है। सरकार अब पूरे वित्त वर्ष में 15.99 लाख करोड़ रुपये की बाजार उधारी करेगी। बजट में इसके लिए 17.20 लाख करोड़ रुपये का अनुमान रखा गया था। इस तरह सरकार ने सालाना उधारी (Annual Borrowing) के लक्ष्य में 1,20,494 करोड़ रुपये यानी करीब 1.20 लाख करोड़ रुपये की कटौती की है।


    दूसरी छमाही में 7.86 लाख करोड़ रुपये की उधारी

    वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने बताया कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही यानी अक्तूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच सरकार 7.86 लाख करोड़ रुपये बाजार से उधार लेगी। यह रकम सरकारी बॉन्ड जारी करके जुटाई जाएगी। इसमें 15,000 करोड़ रुपये के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा, दूसरी छमाही की पूरी उधारी 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिये जुटाई जाएगी।


    पहली छमाही में लक्ष्य से 13,500 करोड़ ज्यादा उधारी

    चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान सरकार करीब 8.13 लाख करोड़ रुपये की बाजार उधारी जुटाएगी। यह पहले तय 8 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य से लगभग 13,500 करोड़ रुपये अधिक है। पहली और दूसरी छमाही की उधारी को मिलाकर पूरे वित्त वर्ष के लिए संशोधित बाजार उधारी 15,99,506 करोड़ रुपये बैठती है।


    क्या होता है सरकारी बाजार उधार?

    सरकार की आमदनी और खर्च के बीच अंतर होने पर उसे अतिरिक्त धन की जरूरत पड़ती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार बाजार से पैसा उधार लेती है। इसके लिए वह सरकारी बॉन्ड या प्रतिभूतियां जारी करती है। इन बॉन्ड को बैंक, बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड और दूसरे निवेशक खरीदते हैं। तय अवधि पूरी होने पर सरकार मूल रकम लौटाती है और ब्याज भी देती है।


    ग्रीन बॉन्ड से क्या होगा?

    दूसरी छमाही की उधारी में 15,000 करोड़ रुपये सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड के जरिए जुटाए जाएंगे। इस रकम को सरकार पर्यावरण और हरित परियोजनाओं से जुड़े कामों में लगाने के लिए इस्तेमाल करती है। सरकार की पहली छमाही की उधारी योजना में भी सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड शामिल थे। वित्त मंत्रालय ने मार्च में बताया था कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 8.20 लाख करोड़ की उधारी योजना में 15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड शामिल थे।


    ब्याज चुकाने में भी खर्च होता है उधारी का हिस्सा

    सरकार की उधारी का एक बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज पर ब्याज चुकाने में भी जाता है। वित्त मंत्रालय के जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने इस अवधि में 4.27 लाख करोड़ रुपये ब्याज भुगतान पर खर्च किए थे। कुल सरकारी खर्च 17.62 लाख करोड़ रुपये रहा।


    3 साल से 50 साल तक के बॉन्ड होंगे जारी

    दूसरी छमाही में सरकार अलग-अलग अवधि के सरकारी बॉन्ड जारी करेगी। इनमें 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 साल की अवधि वाले बॉन्ड शामिल हैं। कुल उधारी में 10 साल की अवधि वाले बॉन्ड की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 26% होगी। इसके बाद 15 साल वाले बॉन्ड की हिस्सेदारी 17.6% और 5 साल के बॉन्ड की 12.1% होगी।

  • केंद्र सरकार आज लोकसभा में पेश करेगी 3 विधेयक…. राम मंदिर चढ़ावा मामले में हंगामे के आसार….

    केंद्र सरकार आज लोकसभा में पेश करेगी 3 विधेयक…. राम मंदिर चढ़ावा मामले में हंगामे के आसार….


    नई दिल्ली
    । संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में केंद्र सरकार (Central government) ने लोकसभा (Lok Sabha) में तीन विधेयकों को सूचीबद्ध किया है। सरकार की कोशिश बिलों को पारित कराने की होगी। वहीं, विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, चढ़ावा चोरी समेत अन्य मुद्दों पर हमलावर रहेगा। केंद्र सरकार (Central government) जिन विधेयकों को पेश करेगा उनमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 करने संबंधी विधेयक भी शामिल है। इसके अलावा, सरकार भारतीय सांख्यिकी संस्थान (इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टीट्यूट) के लिए व्यापक वैधानिक ढांचा उपलब्ध कराने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास अधिनियम में संशोधन से जुड़े विधेयक भी संसद में पेश करने की तैयारी में है।


    चढ़ावा चोरी को मुद्दा बना रहा विपक्ष

    दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने चढ़ावा चोरी के मुद्दे को धार देना शुरू कर दिया है। विपक्ष चंदा चोरी का सांकेतिक नाट्य रुपांतरण कर प्रदर्शन कर चुका है। मानसून सत्र के पहले दो सप्ताह विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़े। नीट मुद्दे पर आंदोलन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में चल रहे हंगामे के बीच कांग्रेस ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को धार देनी शुरू कर दी है। इससे पहले विपक्ष संसद भवन परिसर में चंदा चोरी का सांकेतिक नाट्य रुपांतरण कर प्रदर्शन कर चुका है।


    शिला पूजन से ही होने लगी चोरी- कांग्रेस

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा का हर नेता चंदा चोर नहीं है, पर सभी चंदा चोर सत्ताधारी दल में ही हैं। पार्टी ने दावा किया कि राम मंदिर में चोरी सिर्फ चढ़ावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इस चोरी की शुरुआत शिला पूजन के वक्त से हो गई थी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में सिर्फ चढ़ावे की चोरी नहीं हुई, बल्कि शिला पूजन से चोरी शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि वह खुद अवध के रहने वाले हैं। 1985 से 90 के बीच पर्यटन मंत्री रहे हैं और उन्होंने पूरे आंदोलन को करीब से देखा है।

    तिवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीतिक लाभ के लिए लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर चाहते थे। इसलिए उन्होंने एक अधूरे मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह कर दिया, जो कि एक अशुभ कार्य था। वहीं, इस समारोह में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शंकराचार्यों को भी आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरी प्रक्रिया की कमान खुद संभाली और मंदिर ट्रस्ट के प्रत्येक सदस्य की नियुक्ति उनकी व्यक्तिगत पसंद के आधार पर की गई। ऐसे में पीएम ने इसका श्रेय लिया है, तो उनकी पसंद से नियुक्त किए गए लोगों की चोरी से वह खुद को अलग नहीं कर सकते। क्योंकि, उन्होंने ही जिम्मेदारी सौंपी थी।

    भाजपा बोली- राहुल गांधी और पप्पू यादव माफी मांगें
    राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर संसद परिसर में किए गए एक व्यंग्य-नाटक को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने रविवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर हिंदू भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की।

    भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि इस प्रदर्शन से करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से हिंदू आस्था पर हमला है। चुघ ने कहा कि राहुल गांधी और इस प्रदर्शन में शामिल सभी नेताओं को देश और दुनिया भर के हिंदुओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया था और राम मंदिर के निर्माण का बहिष्कार किया था, वे अब मंदिर से जुड़े प्रतीकों का मजाक उड़ा रहे हैं।

    भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की राजनीति अब केवल सनातन का विरोध करने तक सीमित रह गई है। चुघ ने कहा कि पहले सनातन को ‘डेंगू’ और ‘वायरस’ कहा गया और अब राम मंदिर से जुड़े आस्था के प्रतीकों का मजाक उड़ाया जा रहा है। वीएचपी नेता सुरेंद्र गुप्ता ने भी प्रदर्शन को अशोभनीय बताते हुए कहा कि इससे सनातन धर्म और संत समाज का अपमान हुआ है। उन्होंने विपक्ष से राजनीतिक विरोध के नाम पर भारत की संस्कृति, हिंदुओं, संतों और मंदिरों का अपमान बंद करने की अपील की। वहीं, पप्पू यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन सनातन और करोड़ों लोगों की आस्था की रक्षा के लिए था। उन्होंने कहा कि वे किसी भी प्राथमिकी या कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।

  • केंद्र सरकार की जुलाई में बंपर कमाई…. GST कलेक्‍शन 15.4% बढ़कर ₹2.11 करोड़ पहुंचा

    केंद्र सरकार की जुलाई में बंपर कमाई…. GST कलेक्‍शन 15.4% बढ़कर ₹2.11 करोड़ पहुंचा


    नई दिल्‍ली।
    जुलाई महीने (July Month) में केंद्र सरकार (Central Government) को बंपर कमाई हुई है. सरकारी कोष में जीएसटी (GST) और टैक्‍स (Tax) से मोटी रकम शामिल हुई है. शनिवार को जारी सरकार के मंथली जीएसटी राजस्व आंकड़ों के अनुसार, घरेलू खपत में मजबूती, उच्च अनुपालन और आयात से टैक्‍स कलेक्‍शन (Tax collection) में तेज बढ़ोतरी के कारण जुलाई 2026 में भारत के सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्‍शन में साल-दर-साल 15.4% की बढ़ोतरी हुई और यह 2.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    वैश्विक अनिश्चितताओं और वेस्‍ट एशिया में भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद मजबूत आर्थिक गतिविधि को दर्शाते हुए, कलेक्‍शन लगातार दूसरे महीने 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से ऊपर बना रहा. घरेलू ट्रांजैक्‍शन से मिले सकल जीएसटी कलेक्‍शन जुलाई में पिछले साल के ₹1.31 लाख करोड़ से 10.1% बढ़कर ₹1.45 लाख करोड़ हो गया।

    आयात से मिले जीएसटी कलेक्‍शन में 28.8% की कहीं ज्‍यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बढ़कर ₹66,511 करोड़ हो गया, जिससे कुल कलेक्‍शन ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंच गया. रिफंड को ध्‍यान में रखते हुए नेट जीएसटी कलेक्‍शन ₹1.81 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 15.8% अधिक है।

    रिफंड अमाउंट भी बढ़ रहा
    इसी महीने जीएसटी रिफंड में भी दो अंकों की बढ़ोतरी देखी गई है. कुल रिफंड में साल-दर-साल 13.1% की वृद्धि हुई और यह ₹29,968 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि ICEGATE सिस्‍टम के माध्यम से संसाधित निर्यात रिफंड में 22.7% की वृद्धि हुई और यह ₹12,288 करोड़ तक पहुंच गया, जो निर्यातकों के लिए निरंतर सपोर्ट का संकेत देता है।

    वित्त वर्ष 2027 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में सकल जीएसटी कलेक्‍शन ₹8.43 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में मिले ₹7.66 लाख करोड़ से 10.1% अधिक है. इस अवधि के दौरान नेट जीएसटी कलेक्‍शन में 9.2% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹7.21 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

    बड़े राज्यों में मजबूत ग्रोथ
    हरियाणा में जीएसटी कलेक्‍शन में सबसे अधिक 25% की वृद्धि दर्ज की गई, इसके बाद गुजरात और तेलंगाना का स्थान रहा, जिनमें से प्रत्येक में 19% की वृद्धि हुई. पंजाब और केरल में 16% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में 15% की वृद्धि हुई।

    भारत में जीएसटी राजस्व का सबसे बड़ा योगदान देने वाले महाराष्ट्र राज्य में कलेक्‍शन में 13% की वृद्धि देखी गई, जबकि कर्नाटक में 12% की वृद्धि दर्ज की गई. दिल्ली में कलेक्‍शन पिछले साल जुलाई की तुलना में 8% बढ़ा. हालांकि, कुछ राज्यों में कलेक्‍शन में गिरावट दर्ज की गई. हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक 22% की गिरावट दर्ज की गई, इसके बाद उत्तराखंड (18%), पुडुचेरी (17%), मध्य प्रदेश (10%), आंध्र प्रदेश (5%) और तमिलनाडु में 1% की गिरावट आई।

  • केंद्र सरकार ने चीनी की स्टॉक लिमिट तय की, नये नियम 1 अगस्त से लागू होंगे

    केंद्र सरकार ने चीनी की स्टॉक लिमिट तय की, नये नियम 1 अगस्त से लागू होंगे


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए बड़ा सख्त कदम उठाया है। सरकार ने बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चीनी कारोबारियों के लिए नई स्टॉक रखने की सीमा लागू किया है। सरकार के नए आदेश के तहत अब कोई भी चीनी डीलर 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। ये नियम 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू रहेगा।

    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और सरकारी चीनी भंडार को इस नई स्टॉक सीमा से छूट दी गई है। केंद्र सरकार ने निर्देश दिया कि कोई भी चीनी डीलर 30 दिन से ज्यादा समय तक स्टॉक या भंडार न रखे। साथ ही चीनी की कीमतों को काबू में रखने की कोशिशों के तहत चार हजार क्विंटल की स्टॉक सीमा तय की गई है।

    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार सभी चीनी डीलरों को खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए हर हफ्ते अपने चीनी स्टॉक की जानकारी देनी होगी और स्टॉक की स्थिति को अपडेट करना होगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने राज्यों को भी अधिकार दिया है कि अगर जरूरी हो तो वे केंद्र की ओर से तय सीमा से कम स्टॉक लिमिट लागू कर सकते हैं। इस कदम का मकसद बाजार में चीनी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना, जमाखोरी पर अंकुश लगाना और कीमतों को कंट्रोल रखने में मदद करना है।

  • शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रह्लाद जोशी के हाथ, केंद्र सरकार ने सौंपी अतिरिक्त जिम्मेदारी

    शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रह्लाद जोशी के हाथ, केंद्र सरकार ने सौंपी अतिरिक्त जिम्मेदारी


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार ने वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे जोशी अब शिक्षा मंत्रालय का दायित्व भी निभाएंगे। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक कार्यशैली के कारण उन्हें सरकार के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है।

    कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुर में जन्मे जोशी वर्ष 2004 से धारवाड़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके पिता वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कार्यरत थे और उनका परिवार मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं।

    रेलवे स्कूल से विश्वविद्यालय तक की पढ़ाई

    प्रह्लाद जोशी की प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल और न्यू इंग्लिश स्कूल, हुबली में हुई। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय के केएस आर्ट्स कॉलेज, धारवाड़ से स्नातक (बीए) की डिग्री प्राप्त की। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी शुरू कर दी।

    आरएसएस से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

    जोशी का सार्वजनिक जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर शुरू हुआ। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाई और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम किया। 1990 के दशक में हुबली ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने के आंदोलन और ‘कश्मीर बचाओ’ अभियान के दौरान उनकी पहचान व्यापक स्तर पर बनी।

    संगठन में निभाईं कई अहम जिम्मेदारियां

    भाजपा संगठन में प्रह्लाद जोशी ने विभिन्न पदों पर कार्य किया। वर्ष 1995 से 1998 तक वे भाजपा के धारवाड़ जिला अध्यक्ष रहे। इसके बाद 1998 से 2003 तक जिला महासचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली। आगे चलकर वे कर्नाटक भाजपा के महासचिव बने और वर्ष 2013 से 2016-17 तक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    लगातार पांचवीं बार बने सांसद

    प्रह्लाद जोशी ने वर्ष 2004 में पहली बार धारवाड़ से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। इसके बाद 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज करते हुए पांचवीं बार सांसद बने। वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार में उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री बनाया गया। वहीं, मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के साथ उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।

  • CJP और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा नहीं, कई मुद्दों पर सहमति; इस्तीफे पर कल होगा फैसला

    CJP और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा नहीं, कई मुद्दों पर सहमति; इस्तीफे पर कल होगा फैसला


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर जारी गतिरोध के बीच शुक्रवार को केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अहम बैठक हुई। करीब 10 मिनट चली इस वार्ता में कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। सरकार ने इस विषय पर विचार के लिए शनिवार तक का समय मांगा है।

    बैठक में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि CJP का प्रतिनिधित्व सौरभ दास और आशुतोष रांका ने किया। वार्ता के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और घायल छात्रों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। हालांकि, CJP ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    बैठक के बाद जेपी नड्डा ने बताया कि CJP ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े पांच सुझाव रखे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन प्रस्तावों पर आंतरिक स्तर पर चर्चा करेगी और शनिवार दोपहर होने वाली अगली बैठक में अपना विस्तृत पक्ष रखेगी।

    इससे पहले 20 जुलाई को भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन वह किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। अब शुक्रवार की बैठक को समाधान की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    उधर, NEET पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अब तक किए गए सुधारों और जांच की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं।

    CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि सरकार आंदोलन के दबाव में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देर रात जारी किया गया संदेश भी इसी दबाव का परिणाम है। उनका कहना है कि संगठन अपनी प्रमुख मांगों से पीछे नहीं हटेगा और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा।

    इसी बीच, 26 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचकर उन्हें जूस पिलाया। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक और CJP के रुख में अंतर देखने को मिला।

    राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। एहतियात के तौर पर मध्य दिल्ली के कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं, कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर परिचालन प्रभावित होने की खबर है। प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों पर दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई जारी है।

  • केन्द्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विन्डफॉल टैक्स घटाया…. डीजल और ATF पर बढ़ाया

    केन्द्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विन्डफॉल टैक्स घटाया…. डीजल और ATF पर बढ़ाया


    नई दिल्ली।
    मोदी सरकार (Modi Government) ने बुधवार को डीजल (Diesel) और विमान में इस्तेमाल होने वाले ईंधन (Aviation fuel) ATF के निर्यात पर लगने वाले विन्डफॉल टैक्स (Windfall tax) को बढ़ा दिया है, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर यह टैक्स घटा दिया। यह फैसला 16 जुलाई यानी आज से लागू हो गया है। यह हर 15 दिन पर होने वाली समीक्षा का हिस्सा है।

    वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर विन्डफॉल टैक्स घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यह पहले 4 रुपये था। वहीं, डीजल पर यह शुल्क 8.5 रुपये से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। जबकि, विन्डफॉल टैक्स एटीएफ पर 7.5 रुपये से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। बता दें इससे आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।


    क्यों किया टैक्स में बदलाव

    यह टैक्स में बदलाव ऐसे समय आया है, जब वैश्विक तेल बाजार काफी अस्थिर है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत करीब 2% बढ़कर 84.73 डॉलर प्रति बैरल के एक महीने के हाई पर पहुंच गई। इसकी वजह थी कि अमेरिका ने ईरान पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर दी, जिससे होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई पर खतरा पैदा हो गया। इस रास्ते दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई होती थी।

    इसके अलावा, नए भू-राजनीतिक तनाव और तेल टैंकरों पर हमलों ने भी कीमतों को सहारा दिया, हालांकि महंगाई की चिंताओं और वैश्विक मांग में सुस्ती ने बढ़त को सीमित रखा। रूस के कम निर्यात जैसी सप्लाई की दिक्कतों से डीजल की रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ा है, जिससे ऑयल मार्केट पर दबाव बना हुआ है।


    थोक खरीद पर रोक और बाद में राहत

    केंद्र सरकार ने 11 जून को औद्योगिक, कमर्शियल और संस्थागत उपभोक्ताओं को खुदरा ईंधन पंपों से पेट्रोल-डीजल खरीदने से रोक दिया था और उन्हें थोक सप्लाई चैनलों से खरीदारी करने का निर्देश दिया था। यह अस्थायी आदेश ईंधन की उचित उपलब्धता सुनिश्चित करने, जमाखोरी और अवैध हेर-फेर रोकने तथा आम उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध सप्लाई बनाए रखने के लिए जारी किया गया था।

    सरकार ने कहा था कि ग्लोबल सप्लाई चेन और शिपिंग पर भू-राजनीतिक स्थिति का बुरा असर पड़ रहा है, जिससे आपूर्ति असंतुलन का खतरा बढ़ गया है। दरअसल, थोक खरीदारों और खुदरा दरों के बीच बड़े अंतर के कारण बड़े उपभोक्ता अपनी खरीदारी नियमित थोक चैनलों से हटाकर खुदरा पंपों पर कर रहे थे, जिससे खुदरा बिक्री असामान्य रूप से बढ़ गई थी। उस समय दिल्ली में रिटेल डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर था, जबकि थोक खरीदारों को 134.50 रुपये प्रति लीटर चुकाना पड़ रहा था।

    यह अंतर इसलिए पैदा हुआ, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से आम उपभोक्ताओं को ईंधन की महंगाई से बचाने के लिए रिटले रेट को नियंत्रित रखा। जबकि, थोक खरीदार बाजार-आधारित दरों का भुगतान करते रहे। इस आदेश के तहत, खुदरा पंपों से डीजल बिक्री केवल वाहन ईंधन टैंक या पीईएसओ अप्रूब्ड कंटेनरों तक सीमित कर दी गई।

    वहीं डीजल पर 200 लीटर की खरीद सीमा तय कर दी गई। यह प्रतिबंध 90 दिनों तक प्रभावी रह सकता था और नए आदेश से बढ़ाया भी जा सकता था। उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सजा का प्रावधान था। बाद में, 29 जून को ये पाबंदियां हटा ली गईं और 1 जुलाई से वापस सामान्य व्यवस्था लागू हो गई।