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  • जबलपुर के चार परिवार दुबई में फंसे, युद्ध और रद्द उड़ानों ने बढ़ाई मुश्किलें, केंद्र सरकार से सुरक्षा वापसी की अपील

    जबलपुर के चार परिवार दुबई में फंसे, युद्ध और रद्द उड़ानों ने बढ़ाई मुश्किलें, केंद्र सरकार से सुरक्षा वापसी की अपील



    नई दिल्ली। जबलपुर के चार व्यापारी परिवार दुबई में फंस गए हैं। शैलेश जैन, प्रशांत विश्वकर्मा, संजय सिंघई और प्रवीण जैन अपने परिवारों के साथ 21 फरवरी को दुबई घूमने गए थे और 28 फरवरी को लौटने वाले थे, लेकिन ईरान-इजराइल तनाव और मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण उनकी वापसी अनिश्चित हो गई।

    व्यापारियों ने वीडियो संदेश जारी कर बताया कि फिलहाल वे सुरक्षित हैं, लेकिन एयरपोर्ट का संचालन और उड़ानों का समय तय नहीं होने से तनाव बना हुआ है। होटल्स ने किराया तीन गुना तक बढ़ा दिया, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ गया। बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करने की वजह से मानसिक चिंता भी अधिक है।

    व्यापारियों ने केंद्र सरकार से विशेष विमान या सुरक्षित व्यवस्था के माध्यम से जल्दी स्वदेश लौटने की गुहार लगाई। इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला सहित कई यात्री अब लौटने लगे हैं, लेकिन एयर इंडिया एक्सप्रेस की शारजाह-इंदौर उड़ान IX-256 लगातार कैंसिल हो रही है, जिससे स्थिति और जटिल बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों में फंसे नागरिकों के लिए सरकार को त्वरित राहत, आर्थिक मदद और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए। व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार जल्द ही उनके परिवार सहित सुरक्षित लौटने का इंतजाम करेगी।

  • दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से बैठक: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बजट और प्रशासनिक मुद्दों पर जताई कड़ी अपील

    दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से बैठक: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बजट और प्रशासनिक मुद्दों पर जताई कड़ी अपील

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जिसमें दोनों ने राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में राज्य सरकार के बजट संबंधी बकाया राशि को समय पर जारी करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। चालू वित्त वर्ष में केंद्र से प्रदेश को कुल 44,000 करोड़ रुपए मिलने हैं, लेकिन जनवरी तक मात्र 9,500 करोड़ रुपए ही जारी किए जा सके हैं। इसी मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्रियों से आग्रह किया कि बची हुई राशि 31 मार्च से पहले राज्य सरकार को उपलब्ध कराई जाए, ताकि प्रदेश में विकास कार्य और योजनाएं समय पर पूरी हो सकें।

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से सौजन्य भेंट की। इस दौरान प्रदेश में संगठनात्मक सुधार और आगामी नियुक्तियों पर चर्चा हुई। इसी क्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी दिल्ली में मुलाकात की। इस बैठक में नर्मदा परियोजना के वैज्ञानिक अध्ययन और बलिदानी वीरनारी कार्यक्रम के संबंध में भी चर्चा की गई।

    मुख्यमंत्री का यह दिल्ली दौरा वित्तीय और प्रशासनिक मामलों के साथ-साथ संगठनात्मक सुधार और प्रदेश के विकास लक्ष्यों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्रियों और अन्य अधिकारियों से संवाद के जरिए प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बकाया राशि समय पर मिले और विकास योजनाएं बाधा रहित ढंग से लागू हो सकें। इस दौरे में प्रशासनिक मामलों, बजट वितरण और संगठनात्मक स्थिरता के मुद्दों पर फोकस किया गया।

  • विदेशी नागरिकों के आधार पर सख्ती: वीजा खत्म होते ही होगा निष्क्रिय, OCI और नेपाल-भूटान नागरिकों के लिए 10 साल तक वैध

    विदेशी नागरिकों के आधार पर सख्ती: वीजा खत्म होते ही होगा निष्क्रिय, OCI और नेपाल-भूटान नागरिकों के लिए 10 साल तक वैध


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने विदेशियों के आधार कार्ड की वैधता को लेकर नए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब स्पष्ट कर दिया गया है कि भारत में वीजा लेकर रहने वाले सभी विदेशी नागरिकों का आधार कार्ड उनकी कानूनी स्थिति और वीजा की अवधि से सीधे जुड़ा रहेगा। इसका मतलब यह है कि वीजा समाप्त होते ही आधार कार्ड स्वतः निष्क्रिय डिएक्टिवेट कर दिया जाएगा जिससे फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर कड़ी रोक लगेगी।

    सरकार ने बताया कि ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया कार्डधारक जिनका भारतीय मूल से संबंध है और जिन्हें लंबी अवधि तक रहने की विशेष अनुमति प्राप्त है उनके आधार कार्ड 10 वर्षों तक मान्य रहेंगे। 10 साल के बाद उन्हें आधार को नवीनीकरण या अपडेट करवाना होगा। इस प्रकार OCI कार्डधारकों को स्थायी रूप से आधार से जुड़े लाभों और सेवाओं का फायदा मिलता रहेगा।

    लॉन्ग टर्म वीजा पर भारत में रह रहे अन्य विदेशी नागरिकों के आधार कार्ड केवल उनके वीजा की अवधि तक ही वैध होंगे। इसी तरह टूरिस्ट बिजनेस स्टूडेंट और अन्य श्रेणी के वीजा पर आने वाले विदेशी नागरिकों का आधार कार्ड भी वीजा समाप्त होते ही निष्क्रिय कर दिया जाएगा। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    नेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। भारत के साथ विशेष संबंध वाले इन देशों के नागरिकों के आधार कार्ड 10 वर्षों तक वैध रहेंगे। यह प्रावधान उन सुविधाओं और लंबी अवधि के प्रवास को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है ताकि उनके लिए आधार से जुड़े लाभ जारी रह सकें।

    सरकार का कहना है कि पिछली कुछ वर्षों में ऐसे मामले सामने आए थे जहां वीजा समाप्त होने के बावजूद विदेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार बनवा लेते थे और देश में रहते थे। नई व्यवस्था के तहत अब आधार कार्ड की वैधता सीधे व्यक्ति की कानूनी स्थिति और वीजा अवधि से जुड़ी होगी। इससे सरकारी योजनाओं बैंकिंग सेवाओं और अन्य सुविधाओं में किसी भी तरह के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।

    विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आधार की निगरानी प्रणाली को और सख्त बनाया जाएगा। डिजिटल माध्यम और तकनीकी उपकरणों की मदद से वीजा समाप्त होते ही संबंधित आधार कार्ड स्वतः निष्क्रिय कर दिया जाएगा। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी विदेशी नागरिक केवल वैध आधार के माध्यम से ही सेवाओं का लाभ उठा सकें।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम न केवल सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगा बल्कि विदेशी नागरिकों और भारतीय नागरिकों के बीच पारदर्शिता और विश्वास को भी मजबूत करेगा। इससे फर्जी दस्तावेजों के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी और आधार प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहेगी।

  • जम्मू-कश्मीर को जल्द मिल सकता है राज्य का दर्जा, केंद्र के संकेत ने बढ़ाई उम्मीदें

    जम्मू-कश्मीर को जल्द मिल सकता है राज्य का दर्जा, केंद्र के संकेत ने बढ़ाई उम्मीदें


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द मिलने की संभावना फिर से सुर्खियों में आ गई है। केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने हाल ही में कहा कि यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है, लेकिन जब संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है, तो जम्मू-कश्मीर को उसका अधिकार निश्चित रूप से मिलेगा। मेघवाल ने यह भी संकेत दिए कि प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इस पर फैसला सुनने को मिल सकता है।

    अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित किया गया। तब से ही क्षेत्रीय राजनीतिक दल लगातार पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि राज्य का दर्जा लौटने से स्थानीय प्रशासनिक निर्णयों में जनता की भागीदारी बढ़ेगी और विकास की गति तेज होगी।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस मामले पर अपनी चिंता और उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ इस मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रही है और लंबे इंतजार के बावजूद वे उम्मीद नहीं खो रहे हैं। अब, केंद्रीय मंत्री के हालिया बयान के बाद उन्हें विश्वास है कि राज्य का दर्जा जल्द ही बहाल किया जा सकता है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह मामला जनता की संवेदनशील भावनाओं से जुड़ा हुआ है और देर होने से लोगों में बची हुई उम्मीद भी खत्म हो सकती है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल होना न केवल प्रशासनिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और विकास को भी मजबूती मिलेगी। स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार मिलेंगे, जिससे विकास योजनाओं और कानून-व्यवस्था के मामलों में बेहतर निर्णय लेने में सुविधा होगी।

    हालांकि, अभी तक कोई निश्चित तारीख या आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से लगातार सकारात्मक संकेत दिए जा रहे हैं। मेघवाल के बयान और पहले दिए गए लोकसभा आश्वासनों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है और यह मुद्दा उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद जल्द ही संसद या केंद्र सरकार के माध्यम से अंतिम रूप ले सकता है।

    निष्कर्ष: जम्मू-कश्मीर के लोगों और राजनीतिक दलों के लिए यह बड़ी उम्मीद की खबर है। लंबे समय से प्रतीक्षित यह फैसला क्षेत्रीय राजनीति, प्रशासनिक सुधार और विकास की दिशा में एक नया अध्याय खोल सकता है। केंद्रीय मंत्रियों के संकेतों और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की उम्मीदों के बीच लगता है कि अब राज्य के दर्जे की बहाली बहुत दूर नहीं है।

  • दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत

    दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत


    नई दिल्ली। 12 फरवरी, 2026 को अरुण जेटली स्टेडियम में होने वाले ICC T20 वर्ल्ड कप मैच के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने मेट्रो समय सारिणी में खास बदलाव किया है। मैच के कारण स्टेडियम और आसपास भारी भीड़ के मद्देनजर DMRC ने प्रमुख मेट्रो लाइनों पर आखिरी ट्रेन का समय लगभग 90 मिनट तक बढ़ा दिया है, ताकि दर्शक और सामान्य यात्री आसानी से घर लौट सकें।

    रेड लाइन (लाइन 1) पर शहीद स्थल से रिठाला रूट की आखिरी ट्रेन अब रात 12:10 से 12:15 बजे तक चलेगी। येलो लाइन (लाइन 2) पर समयपुर बादली से गुरुग्राम के मिलेनियम सिटी सेंटर तक ट्रेन 12:20 बजे तक उपलब्ध रहेगी। ब्लू लाइन (लाइन 3 और 4) की नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से द्वारका सेक्टर 21 तक की आखिरी ट्रेनें 11:35 और 11:45 बजे तक चलेंगी। ग्रीन लाइन (लाइन 5) की कुछ ट्रेनें 1:00 बजे तक उपलब्ध रहेंगी। वायलेट, पिंक, मैजेंटा, ग्रे लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर भी ट्रेन समय में बदलाव किया गया है।

    DMRC ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल 12 फरवरी के लिए है। 13 फरवरी से मेट्रो टाइमिंग पहले की तरह सामान्य हो जाएगी। इस निर्णय से न केवल मैच देखने वाले दर्शकों को सुविधा मिली है, बल्कि देर रात सफर करने वाले यात्रियों को भी राहत मिली है।

    DMRC के इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि मैच खत्म होने के बाद भी लोग सुरक्षित और समय पर घर पहुंच सकें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना नई टाइमिंग के अनुसार बनाएं और भीड़भाड़ वाले समय में अतिरिक्त समय रखें।

  • किरेन रिजिजू बोले- सरकार लाएगी राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव

    किरेन रिजिजू बोले- सरकार लाएगी राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव


    नई दिल्ली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सदन में लगाए गए आरोपों के कारण सरकार उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने जा रही है। रिजिजू ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि राहुल गांधी ने बिना पूर्व सूचना दिए कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर गंभीर और बेबुनियाद आरोप लगाए। यह सदन के सदस्य का विशेषाधिकार उल्लंघन है और इसकी सूचना लोकसभा अध्यक्ष को दी जाएगी।

    क्या कहा किरेन रिजिजू ने?

    रिजिजू ने बताया कि बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कोई उपयोगी या ठोस सुझाव नहीं दिए बल्कि केवल आरोप लगाते रहे। उन्होंने कहा कि जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शाम पांच बजे चर्चा का जवाब देंगी तो राहुल गांधी को सदन में उपस्थित रहने की सलाह दी गई थी।

    सदन से समय से पहले चले गए

    सांसदों के नियम के अनुसार एक सदस्य को अपना भाषण समाप्त करने के बाद तुरंत सदन छोड़ने की अनुमति नहीं होती। रिजिजू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अक्सर अपना भाषण समाप्त करके तुरंत सदन छोड़ देते हैं और इसे गंभीर मामला माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाकर सदन के नियमों और सम्मान की रक्षा की जाएगी।

  • देवेंद्र फडणवीस का आधी रात दिल्ली दौरा, महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, बड़े बदलाव के आसार

    देवेंद्र फडणवीस का आधी रात दिल्ली दौरा, महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, बड़े बदलाव के आसार


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के देर रात अचानक दिल्ली दौरे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार, 9 फरवरी की रात बीजेपी के शीर्ष नेताओं से बंद कमरे में मुलाकात करने के बाद फडणवीस तड़के मुंबई लौट आए। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस दौरे से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP के विलय और सहयोगी दलों के साथ नई बातचीत की अटकलें तेज हो गई हैं।

    सुनेत्रा पवार का भी दिल्ली दौरा

    फडणवीस के बाद महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार मंगलवार, 10 फरवरी को शाम 6:45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी। उनके साथ NCP प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद रहेंगे। वे बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगी। उनकी यह यात्रा शिष्टाचार भेंट के रूप में बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक संकेत भी इसे जोड़कर देखे जा रहे हैं।

    जिला परिषद और पंचायत चुनावों में बीजेपी का दबदबा
    महाराष्ट्र की हालिया जिला परिषद 12 और पंचायत समिति 125 चुनावों में बीजेपी ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। जिला परिषद की 731 सीटों में से बीजेपी ने 233 और पंचायत समितियों की 1462 सीटों में सबसे ज्यादा कब्जा जमाया। अजित पवार गुट की NCP को जिला परिषद में 167 और शिंदे गुट की शिवसेना को 162 सीटें मिलीं। महायुति गठबंधन ने कुल 562 सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की। दूसरी ओर, कांग्रेस 56, शरद पवार गुट 26 और उद्धव ठाकरे गुट 43 सीटें ही जीत सका। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि फडणवीस का दिल्ली दौरा और सुनेत्रा पवार की यात्रा आगामी महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलावों की शुरुआत हो सकती है।

  • केन्द्र सरकार इन साल इन बड़ी योजनाओं में 40% बजट ही कर पाई खर्च… सबसे पीछे किसानों से जुड़ी ये स्कीम

    केन्द्र सरकार इन साल इन बड़ी योजनाओं में 40% बजट ही कर पाई खर्च… सबसे पीछे किसानों से जुड़ी ये स्कीम


    नई दिल्ली।
    केन्द्र सरकार (Central Government) ने इस वित्त वर्ष में अपनी सबसे बड़ी योजनाओं (Biggest Plans) पर 40 फीसदी बजट ही खर्च किया है। ये वे योजनाएं हैं जिनके लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। इन योजनाओं में केंद्र और राज्यों को मिलकर खर्च करना है। इन योजनाओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेशन योजना (Widow Pension Scheme.) और अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री मैट्रिक वजीफा योजना (Pre Matric Scholarship Scheme) शामिल है। इसके अलावा मनरेगा, अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना पर भी 40 फीसदी ही खर्च हो पाया है।

    कुल 53 योजनाओं में से 6 योजनाओं पर 40 फीसदी से कम खर्च किया गया है। चार पर 40 से 50 फीसदी, 15 योनजाओं पर 51 से 75 फीसदी, 10 पर 90 से 100 पर्सेंट और 6 योजनाों पर 100 प्रतिशत खर्च हुआ है। बाकी 47 योजनाओं पर रिवाइज्ड एस्टिमेट बजट एस्टिमेट से कम है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में 850 करोड़ के बजट काआवंटन किया गया था जिसमें से केवल 150 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

    अगर कुल 53 योजनाओं पर कुल खर्च की बात करें तो यह 3.8 करोड़ रुपये है। इन योजनाओं पर 5 लाख करोड़ के बजट का ऐलान हुआ था। 31 दिसंबर तक दो लाख करोड़ का बजट रिलीज किया गया था। यह कुल बजट का 41.2 फीसदी था। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, वॉटर मैनेजमेंट, पीएम ईबस सेवा, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, जल जीवन मिशन, कंप्यूटराइजेशन ऑफ प्राइमरी ऐग्रीकस्च्र क्रेडिट सोसाइटी और अन्य कई योजाओं पर बजट का 40 फीसदी ही खर्च हुआ है। इनमें से 6 योजनाएं ऐसी भी हैं जिनके लिए केवल 10 फीसदी ही बजट रिलीज हुआ है।

    इस बजट सत्र के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटील ने शनिवार को यहां बताया कि देश में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत अब तक 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है।पाटिल ने यहां केन्द्रीय बजट को लेकर प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमृत सरोवर योजना और जेजेएम ऐतिहासिक साबित हो रहे हैं और अमृत सरोवर योजना के तहहत देशभर में 69 हजार से अधिक सरोवरों का निर्माण किया गया है, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    उन्होंने बताया कि जेजेएम के लिए 67 हजार 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और अब तक 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है और चार-पांच करोड़ घरों को और पानी देना है तथा इस योजना को वर्ष 2028 तक विस्तारित किया गया है। इससे देश की लगभग नौ करोड़ माताओं-बहनों का करीब 4.5 करोड़ घंटे का समय बचा है। साथ ही जल गुणवत्ता जांच के लिए 24 लाख 80 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित भी किया गया है और आठ लाख महिलाओं ने परीक्षण पोर्टल पर अपनी रिपोर्ट को रखा है।

  • राइडर्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, ‘10 मिनट डिलीवरी’ के दावों से पीछे हटीं क्विक कॉमर्स कंपनियां

    राइडर्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, ‘10 मिनट डिलीवरी’ के दावों से पीछे हटीं क्विक कॉमर्स कंपनियां


    नई दिल्ली।क्विक कॉमर्स सेक्टर में तेज डिलीवरी को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच अब केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राइडर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार की आपत्ति के बाद स्विगी और जेप्टो जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी जैसे दावों को हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब डिलीवरी की होड़ में सड़क सुरक्षा और गिग वर्कर्स पर बढ़ते दबाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।

    सरकारी स्तर पर यह मुद्दा तब गंभीर रूप से सामने आया जब क्विक कॉमर्स कंपनियों के विज्ञापनों और प्रचार अभियानों में बेहद कम समय में सामान पहुंचाने को प्रमुखता दी जाने लगी। मंत्रालय का मानना है कि इस तरह के वादे डिलीवरी पार्टनर्स पर अप्रत्यक्ष लेकिन गहरा दबाव बनाते हैं। नतीजतन कई बार राइडर्स को समय पर डिलीवरी पूरी करने के लिए तेज ड्राइविंग करनी पड़ती है जिससे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है।मंगलवार को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में क्विक कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में गिग वर्कर्स की सुरक्षा काम के घंटे भुगतान प्रणाली और डिलीवरी के दौरान पड़ने वाले दबाव जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग से ऐसी समय-सीमाएं हटाएं जो राइडर्स को जोखिम लेने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

    इससे पहले क्विक कॉमर्स सेक्टर की बड़ी कंपनी ब्लिंकिट ने अपने ऐप और प्रचार सामग्री से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा लिया था। अब स्विगी और जेप्टो ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपनी टैगलाइन और विज्ञापन रणनीति में बदलाव किया है। कंपनियां अब डिलीवरी की गति के बजाय उत्पादों की उपलब्धता सेवा की सुविधा और ग्राहकों को मिलने वाले विकल्पों पर जोर दे रही हैं।क्विक कॉमर्स मॉडल को लेकर यह सवाल लंबे समय से उठता रहा है कि क्या बेहद कम समय में डिलीवरी वास्तव में सुरक्षित और टिकाऊ है। सोशल मीडिया श्रमिक संगठनों और गिग वर्कर्स की ओर से बार-बार यह चिंता जताई गई कि कम समय की प्रतिस्पर्धा में राइडर्स को अपनी और दूसरों की सुरक्षा से समझौता करना पड़ता है। हाल के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में गिग वर्कर्स की हड़तालों ने भी इस मुद्दे को और मुखर बना दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि विज्ञापनों से समय-सीमा हटाने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां अपनी तेज डिलीवरी क्षमता खो देंगी। डार्क स्टोर्स माइक्रो-वेयरहाउस और स्थानीय आपूर्ति नेटवर्क के चलते क्विक कॉमर्स कंपनियां पहले की तरह तेजी से ऑर्डर पूरा करती रहेंगी। फर्क बस इतना होगा कि अब मार्केटिंग में सबसे तेज होने के बजाय सबसे भरोसेमंद सुरक्षित और सुविधाजनक सेवा को प्राथमिकता दी जाएगी।यह कदम भारत की गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों डिलीवरी पार्टनर्स के लिए अहम माना जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े हैं और उनकी सुरक्षा काम की शर्तों और अधिकारों को लेकर लंबे समय से स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग हो रही थी। केंद्र सरकार का यह हस्तक्षेप उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

  • उज्जैन सिंहस्थ 2028: मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20 हजार करोड़ का विशेष पैकेज मांगा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए अधोसंरचना का विकास होगा

    उज्जैन सिंहस्थ 2028: मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20 हजार करोड़ का विशेष पैकेज मांगा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए अधोसंरचना का विकास होगा


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने आगामी 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ के लिए केंद्र सरकार से 20 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मांगा है। इस मांग को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ शनिवार को नई दिल्ली में हुई एक बैठक में उठाया गया। बैठक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों की प्री-बजट मीटिंग का हिस्सा थी, जिसमें मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इस मुद्दे को केंद्र के सामने रखा।सिंहस्थ महाकुंभ, जो हर 12 साल में उज्जैन में आयोजित होता है, में लगभग 50 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है।
    ऐसे में श्रद्धालुओं के सुचारु दर्शन और अन्य सुविधाओं के लिए राज्य सरकार ने कई अहम योजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया है। इसमें प्रमुख रूप से सड़कें, पुल-पुलिया, क्षिप्रा नदी पर पक्के घाट, ठहरने के स्थल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।मध्य प्रदेश सरकार ने कहा है कि केंद्र से 20 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मिलने से इन कार्यों को तेज़ी से और बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि सिंहस्थ महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    4500 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेने की संभावना

    मध्यप्रदेश सरकार ने यह भी जानकारी दी कि 15वें वित्त आयोग द्वारा राज्य का जीएसडीपी 16.94 लाख करोड़ रुपये के रूप में आंका गया है, जबकि केंद्र सरकार इसे 15.44 लाख करोड़ रुपये मानती है। यदि राज्य सरकार के आंकड़ों को माना जाता है, तो मध्य प्रदेश को अतिरिक्त 4500 करोड़ रुपये तक कर्ज लेने का अवसर मिल सकता है, जिसका उपयोग राज्य के विकास कार्यों में किया जाएगा।

    अधोसंरचना के विकास के लिए केंद्र से मिलने वाली सहायता से न केवल सिंहस्थ महाकुंभ के आयोजन में मदद मिलेगी, बल्कि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी बुनियादी ढांचे का विकास संभव होगा। उज्जैन सिंहस्थ 2028 को लेकर सरकार की योजना काफी विस्तृत है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं मिलें।