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  • लक्षद्वीप को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला…., 47 साल से लागू शराबबंदी को किया खत्म

    लक्षद्वीप को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला…., 47 साल से लागू शराबबंदी को किया खत्म


    नई दिल्ली।
    लक्षद्वीप (Lakshadweep) को लेकर केंद्र सरकार (Central government) ने बड़ा फैसला किया है। यहां 47 साल पहले लागू की गई शराबबंदी (Prohibition of alcohol) अब खत्म कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक द्वीपसमहू में पर्यटन को बढ़ावा देने और राजस्व के लिए सरकार ने यह फैसला किया है। आपको बता दें कि लक्षद्वीप में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। ऐसे में इस्लामिक सिद्धातों को देखते हुए यहां 1979 में शराबबंदी लागू की गई थी। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से लक्षद्वीप के लोग खुश नहीं हैं।


    क्यों हटा ली गई शराबबंदी

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने लक्षद्वीप एक्साइज रेग्युलेशन 2026 पर साइन कर दिए हैं। इसके बाद लक्षद्वीप प्रोहिबिशन रेग्युलेश 1979 को वापस ले लिया गया है। केंद्र सरकार लक्षद्वीप को वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। ऐसे में विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए रेस्तरां और होटलों में शराब उपलब्ध करवाने और रेवेन्यू जनरेट करने के लिए सरकार ने लगभग 50 साल पुराना कानून वापस ले लिया है।

    नए नियमों के मुताबिक नियंत्रित तरीके से द्वीपसमूह में शराब बेची जा सकगी। सरकार को इससे बड़ा मुनाफा होने वाला है. सरकार शराब पर एक्साइज ड्यूटी, लाइसेंस फीस और अन्य चार्ज लगाकर कमाई करेगी। पूरी तरह से लागू की गई शराबबंदी को नए कानून ने रिप्लेस कर दिया है और अब नियंत्रित करीके से शराब की मैन्युफेक्चरिंग, आयात, निर्यात, ट्रांसपोर्ट और बिक्री को लागू किया जाएगा। साथ ही सरकार इन सारी गतिविधियों पर पूरी नजर रखेगी।


    कैसे काम करेगा नया नियम

    रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऐसा नहीं है कि शराब को मनमाने तरीके से बेचने की छूट दे दी गई है। इसपर सरकार का पूर् नियंत्रण होगा। देसी और विदेशी शराब पर 400 फीसदी का आबकारी कर लगाया गया है। इसके अलावा बियर पर 200 फीसदी और वाइन पर 80 पर्सेंट का कर वसूला जाएगा। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट एजेंसियां शराब बिक्री के लिए लाइसेंस ले सकती हैं। 21 साल से नीचे वालों को शराब बेचने की अनुमति नहीं होगी।


    क्यों है इस फैसले पर विवाद कि आशंका

    लक्षद्वीप में 96.5 पर्सेंट मुसलमान रहते हैं। 1979 में शराबबंदी इस्लामिक सिद्धातों को ध्यान में रखकर ही की गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां शराब बेचने की अनुमति देकर माहौल बिगाड़ने का ही प्रयास है। अपने फायदे के लिए सरकार समाज को दूषित करना चाहती है। लक्षद्वीप से सांसद हमदुल्लाह सईद ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह से सरकार की उपलब्धता से युवाओं को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। वे नशे के आदी हो जाएंगे और फिर लक्षद्वीप में भी अपराध बढ़ने लगेंगे।

  • आरबीआई का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, आर्थिक मजबूती को मिलेगा सहारा

    आरबीआई का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, आर्थिक मजबूती को मिलेगा सहारा

    नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय घटनाक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड स्तर का डिविडेंड देने का निर्णय लिया है। यह राशि करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जो अब तक के इतिहास में सबसे बड़े सरप्लस ट्रांसफर में से एक माना जा रहा है। इस निर्णय से सरकार की राजकोषीय स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और भू-राजनीतिक तनाव कई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।

    नई दिल्ली। यह फैसला मुंबई में आयोजित भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। बैठक में देश और दुनिया की आर्थिक स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें संभावित जोखिमों और भविष्य की वित्तीय चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि इस वर्ष सरप्लस ट्रांसफर की स्थिति मजबूत है और इसे केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जा सकता है।

    आरबीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक की बैलेंस शीट का आकार उल्लेखनीय रूप से बढ़कर लगभग 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। इसी अवधि में बैंक की कुल आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे केंद्रीय बैंक की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है।

    डिविडेंड के इस बड़े निर्णय के पीछे बैंक की आय में वृद्धि और जोखिम प्रावधानों के बाद बची शुद्ध आय प्रमुख कारण रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जोखिम प्रावधान और अन्य वैधानिक फंड में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय में भी पिछले वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार को बड़ी राशि हस्तांतरित करना संभव हुआ।

    नई दिल्ली। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम सरकार के लिए वित्तीय रूप से राहत देने वाला साबित हो सकता है। इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे, विकास परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था में निवेश और मांग दोनों को समर्थन मिलेगा।

    इसके साथ ही आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि आर्थिक पूंजी ढांचे के तहत एक सुरक्षित जोखिम बफर बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित आर्थिक अनिश्चितता का सामना किया जा सके। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि पर्याप्त प्रावधानों के बाद शेष राशि को केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जाए।

    इस ऐतिहासिक डिविडेंड के बाद सरकार की वित्तीय स्थिति को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है, जो आगामी बजट और आर्थिक नीतियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • बाजार में बिकने वाला सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में केन्द्र सरकार

    बाजार में बिकने वाला सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में केन्द्र सरकार


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) बाजार (Market) में बिकने वाले सिंथेटिक पनीर (Synthetic Cheese) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India- FSSAI) ने फैसला लिया है कि कम पोषण वाले और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले दिखावटी पनीर को बाजार से पूरी तरह बाहर किया जाएगा। मामले से जुड़े दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

    इस मामले में बनी एक हाई लेवल कमेटी ने अक्टूबर 2025 में इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया था, जिसे मार्च 2026 की बैठक में आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। समिति का कहना था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी उत्पादक देश है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में बड़ी मात्रा में सस्ता सिंथेटिक पनीर बेचा जा रहा है। यह असली पनीर जैसा दिखता और स्वाद में मिलता-जुलता होता है, जिससे आम ग्राहक के लिए पहचान करना मुश्किल हो जाता है और वह भ्रमित होता है।


    1,000 कंपनियों के पास सिंथेटिक पनीर बनाने के लाइसेंस

    इसी वजह से इसे बाजार से चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना बनाई जा रही है। वर्तमान में सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं है। देश में करीब 1,000 ऐसी कंपनियां या कारोबारी हैं, जिनके पास इसे बनाने का लाइसेंस है। नई नीति के तहत अब नए लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे और मौजूदा कंपनियों को अपना स्टॉक खत्म करने और उत्पादन बंद करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।


    इसलिए पड़ी जरूरत

    बीते कुछ समय से बाजार में ‘सिंथेटिक पनीर’ का चलन तेजी से बढ़ा है। यह एक सस्ता विकल्प है, जिसे ताजे दूध की बजाय मुख्यतः पाम ऑयल, मिल्क पाउडर, स्टार्च और इमल्सीफायर्स से बनाया जाता है। यह दिखने और बनावट में असली पनीर जैसा होता है, लेकिन इसकी गुणवत्ता और पोषण मूल्य दूध से बने पनीर की तुलना में काफी कम होता है। यह सिंथेटिक पनीर सस्ता होने के कारण कई रेस्तरां में उपयोग किया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को भ्रम होता है।

    लगातार बढ़ रहा बाजार: उत्तर भारत में खासतौर पर पनीर प्रोटीन का प्रमुख स्रोत माना जाता है। यही कारण है कि भारत का पनीर बाजार 10.8 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। मार्केट रिसर्च कंपनी आईएमएआरसी के अनुसार, वर्ष 2033 तक भारतीय पनीर बाजार के 22.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 8.7% रहने की संभावना है।

    कीमत में भारी अंतर: अधिकारियों के अनुसार, असली ब्रांडेड पनीर की कीमत करीब 450 रुपये प्रति किलो तक होती है, जबकि खुले में बिकने वाला सिंथेटिक या बिना ब्रांड वाला पनीर 250 से 300 रुपये प्रति किलो तक बिकता है।


    स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ा

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सिंथेटिक पनीर में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम और फैट बहुत ज्यादा होता है। इसके नियमित सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध पैदा हो सकता है, जो टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकता है।

  • ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल

    ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर राज्य को तीन हिस्सों में बांटने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों को बिहार और ओडिशा में मिलाने की योजना है, जिससे बंगालियों को परेशान किया जाएगा।

    परिसीमन के जरिए राज्य विभाजन का आरोप
    बांकुरा जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा परिसीमन विधेयक के जरिए पश्चिम बंगाल की सीमाओं में बदलाव करना चाहती है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया से राज्य के कुछ हिस्सों का दूसरे राज्यों में विलय किया जा सकता है।

    केंद्रीय बलों पर महिलाओं के अपमान का आरोप
    मुख्यमंत्री ने चुनाव के लिए तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है।

    टीएमसी सरकार गिराने के लिए ‘1000 करोड़ की साजिश’ का दावा
    ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए 1000 करोड़ रुपये की डील करने का आरोप लगाया। उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर के एक वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भाजपा नेताओं से संपर्क और अल्पसंख्यक वोटों को बांटने की बात सामने आई है।

    SIR को बताया ‘देश का सबसे बड़ा घोटाला’
    मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को हाल के समय का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आती है तो केंद्र के सभी जनविरोधी कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा।

    सत्ता परिवर्तन का दावा
    ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि 2026 में केंद्र सरकार सत्ता से बाहर हो जाएगी। इसके बाद नई सरकार जनहित में फैसले लेगी और मौजूदा नीतियों में बदलाव किया जाएगा।

  • केन्द्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में…. इसी माह फिर बुलाया जाएगा संसद का विशेष सत्र

    केन्द्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में…. इसी माह फिर बुलाया जाएगा संसद का विशेष सत्र


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) के मौजूदा बजट सत्र (Current Budget Session) के समापन पर चल रही अटकलों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू (Kiren Rijiju) ने स्पष्ट किया है कि बजट सत्र को अनिश्चित काल के लिए आज स्थगित नहीं किया जाएगा बल्कि इसे कुछ दिनों के लिए स्थगित किया जाएगा और बहुत जल्द ही संसद के सदस्य फिर से मिलेंगे। राज्यसभा में उन्होंने कहा, ”हमारे पास कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, यह विपक्ष के साथ भी साझा किया गया है। अगले 2-3 हफ्तों में हम एक बहुत महत्वपूर्ण विधेयक (Very Important Bill) लाने वाले हैं। आज सरकार सदन को स्थगित करने का प्रस्ताव रखेगी और हम जल्द ही फिर मिलेंगे; उद्देश्य सदस्यों को ज्ञात है।”

    उनका यह बयान उन अटकलों और मीडिया रिपोर्ट्स के बीच आया, जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार संसद के मौजूदा बजट सत्र को अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित नहीं करेगी और कुछ दिनों के अंतराल पर फिर से दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू करेगी ताकि महिला आरक्षण में संशोधन करने वाले बिल को पेश और पारित कराया जा सके। संसद के बजट सत्र के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बजट सत्र के दूसरे चरण का आज अंतिम दिन है।


    हम जल्दी ही दो-तीन सप्ताह के अंदर फिर मिलेंगे

    यह मुद्दा राज्य सभा में अपराह्न दो बजे गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के आंध प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 को चर्चा और पारित कराने का प्रस्ताव रखने के लिए खड़े होते ही उठा। कांग्रेस के जयराम रमेश ने सभापति सीपी राधाकृष्णन के माध्यम से जानना चाहा कि सरकार सदन की कार्यवाही के विषयों के बारे में क्या सोचती है। क्या सदन को कल भी चलाया जाएया या इसे अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जाएगा। आसन के निर्देश पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि हम जल्दी ही दो-तीन सप्ताह के अंदर फिर मिलेंगे। इसका एक विशेष उद्येश्य है।


    कांग्रेस को क्या आपत्ति, क्यों कर रही विरोध?

    इस पर कांग्रेस अध्यक्ष और सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश ने कहा कि सरकार विधान सभा चुनावों का लाभ लेने के लिए महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की यह चाल चल रही है। उन्होंने मांग की कि इस के बारे में अब कोई भी बैठक 29 अप्रैल को विधान सभा चुनावों के आखिरी चरण का मतदान हो जाने के बाद ही बुलाया जाना चाहिए। दरअसल, विपक्ष चाहता है कि इस मुद्दे पर काई कार्यवाही अब कुछ राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में चल रहे विधान सभा चुनाव के बाद ही की जानी ठीक रहेगी क्योंकि भाजपा इसका आगामी चुनावों में लाभ उठा सकती है।

    16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिनों का संसद का विशेष सत्र
    इस पर रिजिजू ने कहा कि उन्होंने इस बारे में कांग्रेस सहित विपक्ष के सभी दलों के साथ पत्र लिखा है और चर्चा की है। विपक्ष के नेता ने पत्र का जवाब दिया है। उन्होंने विपक्ष से राजनीति में न पड़ कर सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि ‘ सरकार ने देश और महिलाओं के प्रति एक प्रतिबद्धता व्यक्त कर रखी है। उन्होंने कोई व्याख्या प्रस्तुत किए बिना कहा कि -सरकार समय से बंधी हुई है। समय बहुत कम है। इसका चुनावी राजनीति से कोई संबंध नहीं है।’NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार 16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिनों का संसद का विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है। इस दौरान संविधान संशोधन विधेयक पेश किये जाने की संभावना है जिसके जरिये नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन किया जाएगा।

  • SC ने अनावश्यक मुकदमेबाजी पर केंद्र सरकार को लगाई फटकार, ठोका 25 हजार जुर्माना

    SC ने अनावश्यक मुकदमेबाजी पर केंद्र सरकार को लगाई फटकार, ठोका 25 हजार जुर्माना


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) को अनावश्यक मुकदमेबाजी में पड़ने के लिए फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को उस पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश केंद्र की उस याचिका पर दिया है जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) द्वारा एक सीआईएसएफ अधिकारी की बर्खास्तगी को रद्द करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने सजा को असंगत पाते हुए अधिकारी को बकाया वेतन देने का भी आदेश दिया।

    जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “हमें समझ नहीं आ रहा कि भारत सरकार ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश को चुनौती क्यों दी है। हम बातें सुनते हैं कि मामले लंबित हैं। आखिर सबसे बड़ा मुकदमेबाज कौन है? हर्जाना लगाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि अगर उच्च न्यायालय ने इसे अनुचित पाया और सभी आदेशों को रद्द करते हुए राहत प्रदान की, तो हम उच्चतम न्यायालय न जाएं?” उन्होंने कहा कि अधिकारी ने चिकित्सा अवकाश लिया था, लेकिन उन्हें उनके परिवार में एक अप्रिय घटना से भी निपटना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित एक हालिया सम्मेलन में उन्होंने कहा था कि मामलों के लंबित रहने के लिए सरकार जिम्मेदार है। इस बयान का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि अदालत ने एससीबीए सम्मेलन को बहुत गंभीरता से लिया है।

    उन्होंने कहा, “यह सिर्फ किसी रिसॉर्ट में जाकर वापस आने की बात नहीं थी। हमने तैयारियां कीं, हमने पूरी जानकारी जुटाई। हमने बात की। महज इसलिये नहीं कि हम भूल जाएं।” सीआईएसएफ अधिकारी के खिलाफ दो आरोप लगाए गए थे – पहला 11 दिनों तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और दूसरा, एक महिला, जोकि एक सीआईएसएफ कांस्टेबल की बेटी थी, के साथ मिलकर मुंबई से भागने और अपने छोटे भाई के साथ उसकी शादी में शामिल होने की साजिश रचकर अनुशासनहीनता का कार्य करने का।


    स्वीकृत चिकित्सा अवकाश पर थे अधिकारी

    उच्च न्यायालय ने इस बात पर संज्ञान लिया कि 11 दिनों की अनुपस्थिति की अवधि के दौरान अधिकारी स्वीकृत चिकित्सा अवकाश पर थे। अदालत ने कहा, “प्रतिवादी-याचिकाकर्ता के भाई के साथ भाग जाने के दूसरे आरोप के संबंध में, यह रिकॉर्ड पर आया है कि महिला स्वयं अनुशासनात्मक कार्यवाही के दौरान उपस्थित हुई और उसने कहा कि उसे प्रतिवादी-याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है।”

    उच्च न्यायालय ने कहा, “यह बात निर्विवाद है कि याचिकाकर्ता के भाई ने संबंधित महिला से विवाह किया था। अतः यह पाया गया है कि वास्तव में याचिकाकर्ता की ओर से ऐसा कोई कदाचार नहीं हुआ था जिसके लिए उसे सेवा से हटाया जा सके।”

  • नक्सल-मुक्त भारत पर लोकसभा में अहम चर्चा, केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 तक लक्ष्य पूरा करने को प्रतिबद्ध

    नक्सल-मुक्त भारत पर लोकसभा में अहम चर्चा, केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 तक लक्ष्य पूरा करने को प्रतिबद्ध


    नई दिल्ली:लोकसभा में 30 मार्च को नक्सल-मुक्त भारत के लक्ष्य को लेकर अहम चर्चा होने जा रही है। केंद्र सरकार के अनुसार, मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना प्राथमिकता है। लोकसभा की कार्यसूची के मुताबिक, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे नियम 193 के तहत अल्पकालिक चर्चा शुरू करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई मौकों पर यह दोहराया है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य केंद्र सरकार का सर्वोच्च काम है। इस चर्चा में सुरक्षा अभियानों, रणनीति और माओवादी नेताओं के पुनर्वास नीतियों पर विस्तार से बात होगी।

    बीते एक साल में कई शीर्ष माओवादी नेताओं ने हथियार डालकर मुख्यधारा में वापसी की है। हाल ही में ओडिशा में वांछित माओवादी नेता सुक्कू ने चार अन्य माओवादियों के साथ 25 मार्च को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। एडीजी (एंटी नक्सल ऑपरेशंस) संजीव पांडा के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी नेताओं पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम था। साथ ही पांच हथियार भी बरामद किए गए, जिनमें एक एके-47, एक इंसास राइफल और एक सिंगल शॉट गन शामिल हैं।

    कंधमाल जिले में अब माओवादियों की संख्या सिंगल डिजिट में रह गई है। एडीजी संजीव पांडा ने बताया कि अब केवल 8–9 माओवादी बचे हैं और आने वाले दिनों में अभियान को और तेज किया जाएगा। उन्होंने शेष माओवादियों से अपील की है कि वे आत्मसमर्पण करें और सरकार की सभी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीतियों का लाभ उठाएं।

    इस चर्चा के माध्यम से लोकसभा में नक्सलवाद को समाप्त करने के केंद्र सरकार के व्यापक प्रयासों और रणनीति को साझा किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीतियों के संयोजन से न केवल हिंसा कम होगी, बल्कि मुख्यधारा में शामिल माओवादी नेताओं के लिए नए अवसर भी खुलेंगे। इस तरह, नक्सल-मुक्त भारत का सपना मार्च 2026 तक हकीकत बन सकता है

  • पीएम मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का किया उद्घाटन, सपा पर बोला हमला, कहा- नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया था

    पीएम मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का किया उद्घाटन, सपा पर बोला हमला, कहा- नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया था


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सपा सरकार में नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया गया था लेकिन अब भाजपा शासन में यही नोएडा उत्तर प्रदेश के विकास का मजबूत आधार बन रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जेवर एयरपोर्ट से हर दो मिनट में एक विमान उड़ान भरेगा। प्रधानमंत्री ने युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश के नौजवान समझते हैं कि इस तरह की परियोजनाएं उनके भविष्य को नई दिशा और अवसर देने वाली हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा।

    पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज विकसित यूपी विकसित भारत अभियान के तहत एक नए दौर की शुरुआत हो रही है। उन्होंने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय दुनिया के कई हिस्सों में संकट की स्थिति बनी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते कई देशों में खाद्य सामग्री ईंधन और अन्य जरूरी संसाधनों की कमी देखने को मिल रही है। ऐसे समय में भारत भी मजबूती से इन चुनौतियों का सामना कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का निरीक्षण भी किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

    एयरपोर्ट से बढ़ती है तरक्की

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी देश में एयरपोर्ट केवल सुविधा नहीं बल्कि विकास को गति देने का माध्यम होते हैं। उन्होंने बताया कि साल 2014 से पहले देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि अब हवाई कनेक्टिविटी सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही बल्कि छोटे शहरों और कस्बों तक भी तेजी से पहुंच रही है।

  • संकट के बीच केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला… पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये घटाया टैक्स

    संकट के बीच केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला… पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये घटाया टैक्स

    नई दिल्ली। भारत सरकार (Government of India) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol and Diesel Prices) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर यह ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क पहले पेट्रोल पर 13 रुपये लीटर था और डीजल पर 10 रुपये था। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा हुआ है।

    नायरा ने बढ़या था पेट्रोल-डीजल के दाम
    इस फैसले से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि बाजार में कीमतों का ट्रेंड अभी भी अस्थिर बना हुआ है। खास बात यह है कि यह सरकारी हस्तक्षेप उस समय आया है जब निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम ₹5 प्रति लीटर और डीजल ₹3 प्रति लीटर तक बढ़ा दिए थे।

    रूस की कंपनी रोसनेफ्ट की मालिकाना हक वाली नायरा एनर्जी देश भर में 7,000 से अधिक पेट्रोल पंप चलाती है। वहां के डीलरों ने इस कीमत वृद्धि पर चिंता जताई है, और कहा है कि इससे ईंधन की मांग पर असर पड़ सकता है। साथ ही, उन्होंने संभावित विरोध प्रदर्शनों का भी इशारा किया है। कुछ डीलरों ने यह भी बताया कि पिछले कुछ दिनों में ईंधन की सप्लाई में कटौती की गई है।

    ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर
    सरकार के इस कदम से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए यह दोधारी तलवार साबित हो सकता है। एक्साइज ड्यूटी घटने से हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC) जैसी कंपनियों पर कीमतें स्थिर रखने का दबाव बढ़ सकता है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।

    क्यों लिया गया यह फैसला?
    इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में सरकार ने टैक्स घटाकर आम लोगों को राहत देने और महंगाई पर नियंत्रण रखने की कोशिश की है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भविष्य में पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ सकते हैं।

    फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। यह कीमतें करीब 119 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थीं और फिर घटकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।

  • दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग

    दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग


    भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने महिला दिवस के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव होता रहा है और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में उगाए जाने वाले बासमती चावल को एपीडा से जीआई टैग नहीं दिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार जीआई टैग नहीं दिलाती है तो वे अनशन पर बैठने को भी तैयार हैं।

    दिग्विजय सिंह ने किसानों के हित में केंद्र सरकार को पत्र लिखने और संसद में उठाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर असंतोष जताया। उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल से लेकर मालवा और महाकौशल क्षेत्र तक लगभग 14 जिलों में किसान उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन जीआई टैग न मिलने के कारण उनका उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित मूल्य नहीं पा रहा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था, लेकिन 2016 में वर्तमान केंद्र सरकार ने इसे वापस ले लिया। अब जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग मिल चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश के किसानों को वंचित रखा गया।

    इस अवसर पर दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट प्लान पर भी बात की। उन्होंने फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा बैंक से रिटायरमेंट लेने के बाद कार को घर बनाकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले हैं। दिग्विजय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह देखकर प्रेरणा मिली और रिटायरमेंट के बाद की योजना पर भी सोचा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे राज्यसभा के सेकंड टर्म के बाद तीसरे टर्म के लिए नहीं जाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे कांग्रेस के लिए काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी का काम जीवन के अंतिम क्षण तक करेंगे, लेकिन आगे का निर्णय पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा।

    दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती किसानों को उचित मूल्य और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग बेहद जरूरी है, ताकि उनका उत्पाद पाकिस्तान और अन्य देशों के बासमती चावल के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को अब तक किसानों के हित में ठोस कदम नहीं उठाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और मंत्री मंडल से अपील की कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जल्द से जल्द जीआई टैग दिलवाया जाए और किसानों के आर्थिक नुकसान को रोका जाए।