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  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोहड़ी पर्व की प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोहड़ी पर्व की प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं


    भोपाल! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई फसल के स्वागत और हर्ष व उल्लास के पावन पर्व 
    लोहड़ी की  शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा  कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और खुशहाली लेकर आए तथा समाज में प्रेम, एकता और सद्भाव के भाव को और सुदृढ़ करे, यही मंगलकामना है।

  • देश का सबसे बेहतर इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली स्टेट है मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    देश का सबसे बेहतर इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली स्टेट है मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    जयपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, देश का सबसे युवा राज्य है। मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट है, चीता स्टेट है, फारेस्ट स्टेट है, मिनरल स्टेट है, बिजली सरप्लस स्टेट है और अब देश का सबसे बेहतर इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली स्टेट भी बन गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा निवेश पाने वाला देश का तीसरा राज्य बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अनंत अवसर और संभावनायें लिए हुए है। मध्यप्रदेश में निवेश हर मायने में लाभ का सौदा है। देश के मध्य में होने के कारण मध्यप्रदेश व्यापार, व्यवसाय, उद्योग-धंधे और स्टार्ट-अप्स लगाने से लेकर अपने उत्पाद को निर्यात करने के लिए एक अनुपम केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को पिंक सिटी जयपुर में राजस्थान डिजीफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट 2026 में मध्यप्रदेश सेशन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों सदियों से इतिहास, विरासत और व्यापार-व्यवसाय की समझ के मामले में साझा भागीदार रहे हैं। राजस्थान के मारवाड़ी व्यापारी मध्यप्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। समिट में राजस्थान के उप मुख्यमंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा भी उपस्थित थे। मध्यप्रदेश सरकार इस प्रतिष्ठित ग्लोबल समिट में ‘स्टेट पार्टनर’ के रूप में सहभागिता कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को विकास और अवसरों का केंद्र बताते हुए निवेशकों और उद्योगपतियों से कहा कि हमारा प्रदेश आज देश के उन चुनिंदा राज्यों में है, जहां प्राकृतिक संसाधन, उद्योग-अनुकूल नीतियां, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सहयोगी सरकार सभी निवेशकों के लिए आदर्श वातावरण तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 18 नई उद्योग-अनुकूल नीतियां, विस्तृत लैंड बैंक, भरपूर जल उपलब्धता, स्किल्ड मानव संसाधन, उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और पारदर्शी प्रशासन निवेशकों को सर्वोत्तम सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर राजस्थान डिजिफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट के मध्यप्रदेश सेशन का विधिवत् शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सभी राज्यों के बीच औद्योगिक विकास की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा चल रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश के सभी राज्यों को आगे बढ़ने का समान अवसर मिल रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था आज भी उहापोह की स्थिति में है, ऐसी परिस्थिति में भी भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। भारत के लोकतंत्र में ‘जियो और जीने दो’ की भावना समाहित है। उद्योग-व्यापार से कई लोगों के जीवन में सवेरा आता है। इससे पवित्र काम कुछ नहीं हो सकता है। मध्यप्रदेश विकास के सभी सेक्टर्स में लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर भी कई बड़े पुरस्कार मिले हैं। हमारे टूरिज्म सेक्टर में सबसे अच्छे रिजल्ट देखने को मिल रहे हैं। पिछले दो साल में हमने प्रदेश में दो नए टाइगर रिजर्व बनाए हैं। मध्यप्रदेश टाइगर और वल्चर स्टेट तो है ही, हमारी धरती पर चीता भी तेजी से अपना कुनबा बढ़ा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां 250 से अधिक नदियां बहती हैं। हमने राजस्थान के साथ जल बंटवारे का विवाद सुलझाया। हमारे कार्यों में परस्पर सौहार्द और बंधुता का भाव होना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मेक इन इंडिया और इंडिया फर्स्ट का आह्वान किया है। यह सिर्फ शब्द नहीं हैं, इसके लिए बड़े मन से काम करने का मानस होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार निवेशकों और उद्योगपतियों को प्रोत्साहित करने के लिए शासकीय कामकाज को और भी सरल, सहज, पारदर्शी, आसान और सहयोगी बना रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में होटल, हास्पिटल, एआई, ड्रोन, सेमी कंडक्टर निर्माण एवं अन्य कई व्यवसाय स्थापित करने पर अनुदान दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने की शुरुआत की है। जिससे प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को गति मिलेगी और हमें पर्याप्त संख्या में डाक्टर्स भी मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, फार्मा, आईटी और पेट्रो केमिकल्स जैसे सभी प्रमुख सेक्टर्स में निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने निवेशकों को औद्योगिक सहयोग के साथ-साथ शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति, कौशल विकास, अवसंरचना और पर्यटन में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को विश्वास दिलाया कि मध्यप्रदेश निवेशकों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। आप सभी आइडिया को जमीन पर उतारिए, हमारी सरकार हमेशा आपके साथ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार की संयुक्त भागीदारी से हुई इस समिट में हमारी सरकार ने आईटी और संबंधित सेक्टर्स के व्यवसायियों के बीच प्रदेश की औद्योगिक विशेषताओं और विलक्षणताओं को सबके समक्ष रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उम्मीद जताई कि मध्यप्रदेश औद्योगिक निवेश के लिए आईडियल स्टेट है। निवेशक मध्यप्रदेश में अपना व्यापार-व्यवसाय स्थापित करेंगे, तो हम सभी को पूरा सहयोग करेंगे। राजस्थान हमारा सहोदर भाई है। दोनों राज्यों में आईटी सेक्टर के उद्योग स्थापित हों, इसके लिए हमारी सरकार राजस्थान के साथ मिलकर काम करेगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना की सौगात दी। इससे राजस्थान के 15 और मध्यप्रदेश के 13 जिले लाभान्वित हो रहे हैं। इसी के साथ मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश के साथ केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और महाराष्ट्र के साथ ताप्ती ग्राउंड वॉटर रीचार्ज मेगा परियोजना पर भी मिलकर काम कर रहा है।

    राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने निवेशकों, स्टार्ट-अप और युवाओं के लिए अधिक अवसर प्रदान करने के लिए राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच बढ़ते सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने आर्थिक विकास में डिजिटल परिवर्तन, नवाचार और उद्यमिता की भूमिका पर प्रकाश डाला और म.प्र. के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश के विकास संबंधी विजन की सराहना की। उन्होंने सक्षम नीतियों और प्रौद्योगिकी-आधारित शासन के प्रति राजस्थान की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

    अपर मुख्य सचिव, विज्ञान एवं तकनीकी श्री संजय दुबे ने मध्यप्रदेश की बेजोड़ खूबियों पर प्रकाश डालते हुए निवेशकों से कहा कि देश में टियर 2 सिटी टेक्नोलॉजी सेक्टर में लीडर बनकर उभर रही है। इनमें जयपुर, इंदौर और भोपाल भी शामिल हैं। टीयर 1 सिटीज में ट्रैफिक और प्रदूषण जैसी समस्याएं होती हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी नई नीतियों में उद्योग-व्यापार को सहज-सरल बनाने पर ध्यान दिया गया है। मध्यप्रदेश सांस्कृतिक विविधता, खानपान दृष्टि से समृद्ध है। प्रदेश में 9 हवाई अड्डे है और यहाँ से इंटरनेशनल उड़ानें उपलब्ध हैं। प्रदेश में 21 अभायरण्य, 12 नेशनल पार्क और 7 टाइगर रिजर्व और 3 यूनेस्को साइट हैं। मध्यप्रदेश टाइगर और चीता स्टेट भी है। प्रदेश में बिजली सबसे सस्ती दरों पर मिलती है। भोपाल में एयरपोर्ट के पास 200 एकड़ भूमि पर एआई एवं नॉलेज सिटी प्रस्तावित है। राज्य सरकार डेटा सेंटर स्थापित करने पर 2 रुपए प्रति यूनिट इलेक्ट्रिसिटी सब्सिडी दे रही है। हमने जीसीसी पॉलिसी 2025 के माध्यम से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का एक बेहतर माहौल तैयार किया है। प्रदेश में फिल्म निर्माण उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। राज्य सरकार ने सेमी कंडक्टर पॉलिसी, स्टार्ट-अप पॉलिसी लॉन्च की हैं। प्रदेश में आईटी सेक्टर में 100 करोड़ निवेश करने पर 30 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जा रही है। इसी प्रकार ड्रोन टेक्नोलॉजी सेक्टर में 100 करोड़ निवेश करने पर 34 करोड़ और सेमी कंडक्टर में 100 करोड़ निवेश करने पर 38 करोड़ सब्सिडी देने का प्रावधान किया है।

    समिट में मध्यप्रदेश की मजबूत उद्योग शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए, राज्य में मुख्यालय या परिचालन आधारित विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त कंपनियों द्वारा मध्यप्रदेश की प्रौद्योगिकी सफलता एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यमों को सशक्त बनाने में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

    सीईओ इम्पेटस टेक्नोलॉजीज श्री संजीव अग्रवाल ने कहा कि वे पिछले 32 वर्षों से मध्यप्रदेश में कार्यरत हैं।उस समय राज्य में आईटी इको सिस्टम की शुरुआत हो रही थी। मध्यप्रदेश सरकार का व्यावहारिक सहयोग, संवाद के प्रति खुलापन, लागत-प्रभावशीलता पर जोर और गुणवत्तापूर्ण प्रतिभा पर ध्यान, ये सभी कारक मिलकर निवेश और विकास के लिए अत्यंत अनुकूल वातावरण का निर्माण करते हैं। श्री अग्रवाल ने कहा कि आज राज्य वैश्विक ग्राहकों के साथ सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है और निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।यदि कोई निवेशक सतत विकास, मजबूत सरकारी सहयोग और विश्वसनीय पारिस्थितिकी तंत्र की तलाश में है, तो मध्यप्रदेश इसके लिए सबसे उपयुक्त और आदर्श स्थान है।

    सह-संस्थापक इंफोबीन्स टेक्नोलॉजीज श्री सिद्धार्थ सेठी ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की स्थापना हुई थी। इंदौर का आईटी पार्क दिन-प्रतिदिन तेज़ गति से विकसित हो रहा है। ड्रोन और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़ी समर्पित नीतियां सरकार की दूरदर्शी सोच तथा भविष्यपरक दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।मध्यप्रदेश न केवल प्रगति कर रहा है, बल्कि इस क्षेत्र में नेतृत्व भी कर रहा है। उन्होंने सभी निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।

    सह-संस्थापक यश टेक्नोलॉजीज श्री धर्मेंद्र जैन ने कहा कि वर्तमान में इंदौर में कंपनी के 1,500 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार के स्पष्ट दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि जब तक आवश्यकता नहीं होती, सरकार हस्तक्षेप नहीं करती; लेकिन उद्योग को आवश्यकता पड़ने पर पूरी मजबूती से साथ खड़ी रहती है। यहां समय पर वरिष्ठ अधिकारियों से मिलना और सीधा संवाद करना संभव है। सरकार द्वारा निर्मित मजबूत औद्योगिक इको सिस्टम का ही परिणाम है कि एक बार व्यवस्थित हों जाने के बाद उद्योग स्वतः गति पकड़ लेता है और निरंतर विकास करता है।

    निदेशक क्लिनिसप्लाइज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रेरिता बाहेती ने मध्यप्रदेश में क्लिनिसपलाइज़ के तेज़ी से विस्तार पर ज़ोर दिया, जिसमें उज्जैन के विक्रमादित्य मेडिकल डिवाइस पार्क में 100 करोड़ की मैन्युफ़ैक्चरिंग फ़ैसिलिटी शामिल है, जिससे 1,000 से ज़्यादा रोज़गार सृजित होंगे।इंदौर में भारत में अपना पहला ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित किया गया है। उन्होंने इस फैसले का श्रेय मज़बूत और स्थिर टैलेंट की उपलब्धता, सरकार के सक्रिय समर्थन, बिज़नेस करने में आसानी और अच्छी क्वालिटी की ज़िंदगी को दिया, और लंबे समय के निवेश के लिए राज्य की प्रगतिशील और भविष्य-केंद्रित नीतियों पर भरोसा जताया।

    राजस्थान के उद्योगपतिश्री रजत अग्रवाल, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, ग्रेविटा इंडिया लिमिटेड ने रीसाइक्लिंग को एक भविष्य-उन्मुख उद्योग के रूप में बताया जो पर्यावरणीय स्थिरता को आर्थिक विकास के साथ जोड़ता है। उन्होंने मध्यप्रदेश की रणनीतिक केंद्रीय स्थिति, लॉजिस्टिक्स का फायदा और विकसित हो रहे सरकार-उद्योग साझेदारी मॉडल पर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि सही नेतृत्व और नीतियों के साथ, राज्य में सर्कुलर इकोनॉमी के लिए एक राष्ट्रीय और वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता है।

    सुश्री कार्लिना मारानी, ​​मैनेजिंग डायरेक्टर, एक्सेंचर ने एडवांस्ड डिजिटल स्किल्स की वैश्विक कमी और जैसे क्षेत्रों में विशेष टैलेंट की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत के टियर-2 शहर, मज़बूत टैलेंट पूल, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर जीवन स्तर के साथ, भविष्य में टेक्नोलॉजी से होने वाली ग्रोथ में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश में विस्तार के अवसरों को तलाशने में रुचि दिखाई।

    समिट में एक विशेष एमपी पेवेलियन स्थापित किया गया जिसमे राज्य के प्रमुख स्टार्ट-अप्स एवं कंपनियों को प्रदर्शित किया गया।इस पेवेलियन में किंट्सुगी बिजनेस लैब्स प्राइवेट लिमिटेड, थ्रीवे स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड, कॉमन स्कूल (कॉमनफाई वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड), एसए डिजिटल (ग्रोबोट्स), यंगोवेटर एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड, Gradyn.ai तथा ज़ांगोह सहित कई प्रदर्शक शामिल थे। प्रौद्योगिकी, शिक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और उभरते क्षेत्रों में अपने अभिनव समाधानों का प्रदर्शन किया जिससे मध्यप्रदेश के तेजी से विकसित हो रहे स्टार्ट-अप एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिलेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीईओ, निवेशकों तथा वैश्विक उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ व्यक्तिगत बैठक कर मध्यप्रदेश में रणनीतिक निवेश के अवसरों एवं दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। दुबई के TECOM ग्रुप के कार्यकारी उपाध्यक्ष श्री अम्मार अल मलिक के साथ चर्चा दुबई के सफल डिजिटल क्लस्टर मॉडल से प्रेरणा लेते हुए संस्थागत सहयोग पर केंद्रित रही। विशेष रूप से प्रस्तावित भोपाल AI नॉलेज सिटी के विकास तथा मध्यप्रदेश स्थित टेक्नोलॉजी कंपनियों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

    ग्रेविटा इंडिया लिमिटेड के श्री रजत अग्रवाल एवं इंसोलेशन एनर्जी लिमिटेड के श्री विकास जैन के साथ बातचीत सर्कुलर इकोनॉमी, मेटल रीसाइक्लिंग और रिन्यूएबल एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में विस्तार एवं निवेश के अवसरों पर केंद्रित रही।डेटा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री अजय डेटा के साथ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), डेटा सेंटर्स और GPU-आधारित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, KGeN के संस्थापक श्री मनीष अग्रवाल और पर्पल टेक्नोलॉजीज के संस्थापक श्रीधर मुप्पिडी के साथ विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी AI एवं गेमिंग-आधारित AVGC इको सिस्टम के निर्माण, वन-टू-वन फाइनेंस के संस्थापक एवं CEO डॉ. रवि मोदानी के साथ फिनटेक-आधारित MSME फाइनेंसिंग के अवसर, फ्रैक्टल एनालिटिक्स के उपाध्यक्ष श्रीकांत वेलामाकन्नी के साथ एडवांस्ड एनालिटिक्स तथा AI-आधारित गवर्नेंस, शुभाशीष ग्रुप के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री जय कृष्ण जाजू के साथ मध्यप्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स तथा शहरी विकास के संभावित अवसरों पर केंद्रित रही। ये वन-टू-वन बैठकें मध्यप्रदेश को नवाचार, सतत विकास तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।

  • डेयरी क्रांति की ओर मध्यप्रदेश का बड़ा कदम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को बताया ऐतिहासिक

    डेयरी क्रांति की ओर मध्यप्रदेश का बड़ा कदम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को बताया ऐतिहासिक

    भोपाल।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों को हर संभव तरीके से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाया जाएगा। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने सहित वर्तमान डेयरी उद्योग को सुनियोजित, सुव्यवस्थित, व्यावसायिक और लाभकारी बनाने की दिशा में ‘डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना’ आरंभ की है। यह योजना खासतौर पर उन जरूरतमंद युवाओं, किसानों और पशुपालकों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है, जो आधुनिक डेयरी इकाई स्थापित कर अपनी आय का स्थायी साधन विकसित करना चाहते हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नये-नये अवसर सृजित करना और पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है।

    डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना में लाभार्थियों को 25 दूधारू पशुओं की एक इकाई स्थापित करने का अवसर दिया जाता है। इच्छुक और सक्षम हितग्राही अधिकतम 8 इकाइयां अर्थात 200 पशुओं तक की डेयरी परियोजना भी स्थापित कर सकते हैं। यह योजना छोटे से लेकर मध्यम स्तर के डेयरी उद्यमियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। योजना की एक प्रमुख शर्त यह है कि प्रति इकाई के लिए इच्छुक हितग्राही के पास कम से कम 3.50 एकड़ कृषि भूमि उपलब्ध हो। भूमि की यह व्यवस्था पशुओं के आवास, चारे की व्यवस्था और डेयरी के समुचित तरीके से संचालन के लिए जरूरी है। इसके साथ ही सरकार पशुपालकों/दूध उत्पादकों की प्रोफेशनल ट्रेनिंग को भी महत्व दे रही है, जिससे पशुपालक वैज्ञानिक और आधुनिक पद्धति से अपना डेयरी बिजनेस चला सकें। पशुपालकों को आर्थिक सहायता देना इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू है। परियोजना की कुल लागत पर सरकार द्वारा अनुदान सब्सिडी भी दिया जा रहा है।

    अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को कुल परियोजना लागत का 33 प्रतिशत तथा अन्य सभी वर्गों को 25 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है। शेष राशि बैंक ऋण के जरिए उपलब्ध कराई जा रही है। इस प्रावधान से बड़े निवेश की बाधा काफी हद तक कम हो जाती है और डेयरी बिजनेस शुरू करना भी आसान हो जाता है। योजना में लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है और चयन सामान्यत: “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर ही किया जा रहा है। साथ ही उन पशुपालकों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जो पहले से ही किन्हीं दुग्ध संघों या सहकारी संस्थाओं को निरंतर दुग्ध आपूर्ति कर रहे हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, भूमि के दस्तावेज, बैंक खाता विवरण, जाति प्रमाण पत्र यदि लागू हो  और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। इच्छुक आवेदक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आधिकारिक पोर्टल या अपने जिले के पशु चिकित्सा सेवाएं कार्यालय से विस्तृत जानकारी और मार्गदर्शन भी ले सकते हैं।

    योजना के बारे में कुछ तथ्य

    1. मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना में नवीन घटक के रूप में राज्य सरकार ने 25 अप्रैल 2025 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को मंजूरी दी।

    2. योजना के अंतर्गत 25 दुधारु पशु की प्रति इकाई राशि 36 लाख से 42 लाख रुपये तक की इकाई लागत है।

    3. योजना में अधिकतम 8 इकाइयों की स्थापना एक हितग्राही द्वारा की जा सकती है। एक इकाई में एक ही नस्ल के गौ-वंश एवं भैसवंशीय पशु रहेंगे।

    4. हितग्राही के पास प्रत्येक इकाई के लिये न्यूनतम 3.50 एकड़ कृषि भूमि होना जरूरी है।

    5. भूमि के लिये परिवार के सामूहिक खाते भी सम्मिलित हैं। इनके लिये अन्य सदस्यों की सहमति भी जरूरी होगी।

    6. इकाइयों की संख्या में गुणात्मक वृद्धि होने पर आनुपातिक रूप से न्यूनतम कृषि भूमि की अर्हता में भी आनुपातिक वृद्धि जरूरी होगी।

    7. पात्र हितग्राही को ऋण राशि का भुगतान चार चरणों में किया जायेगा।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व रक्षा मंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व रक्षा मंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर किया नमन


    मध्य प्रदेशमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्व. पर्रिकर के जीवन और उनके कार्यों को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र सेवा, अनुशासन, और सादगी का प्रतीक था, जो हमेशा युवाओं को प्रेरणा देता रहेगा।

    स्व. मनोहर पर्रिकर एक आदर्श नेता थे जिनका जीवन उच्च नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा से ओत-प्रोत था। उनका कार्यकाल न केवल गोवा की जनता के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक था। उन्होंने रक्षा मंत्री के रूप में देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान की और हमेशा अपनी सादगी और ईमानदारी से पहचाने गए। उनका शासनकाल देश की रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण था, जिसमें उन्होंने कई अहम निर्णय लिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “स्व. पर्रिकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि सेवा का मतलब केवल कागजी योजनाएं नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करना और जनता की समस्याओं को दूर करना है। उनका व्यक्तिगत जीवन भी अत्यंत साधारण और अनुशासनप्रिय था, जो उनकी महानता का प्रतीक है। वे हमेशा दूसरों के लिए प्रेरणा बनकर रहते थे।”

    उन्होंने आगे कहा, “स्व. पर्रिकर का समर्पण देश और समाज के प्रति अनमोल था। उन्होंने हमेशा अपनी कर्तव्यनिष्ठा से देश की सेवा की। चाहे वह रक्षा मंत्रालय का कार्यकाल हो या गोवा राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल, उन्होंने हमेशा अपने फैसलों में पारदर्शिता और सादगी का पालन किया।”

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. पर्रिकर के द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान भारतीय राजनीति और रक्षा क्षेत्र में अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने बताया कि स्व. पर्रिकर का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है और उनकी सरलता, ईमानदारी और अनुशासन को हम सभी को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।

    स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके योगदान को नमन किया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर युवाओं से अपील की कि वे स्व. पर्रिकर के अनुशासन और देश सेवा के मार्ग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, ताकि उनकी महानता को आगे बढ़ाया जा सके।

    स्व. पर्रिकर का योगदान न केवल उनकी राजनीतिक उपलब्धियों में, बल्कि उनके दृढ़ नायकत्व और देशभक्ति में भी नजर आता है। उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता और उनका आदर्श हमेशा हमारे साथ रहेगा।

  • मप्रः मुख्यमंत्री डॉ. यादव खजुराहो में वैवाहिक कार्यक्रमों में हुए शामिल

    मप्रः मुख्यमंत्री डॉ. यादव खजुराहो में वैवाहिक कार्यक्रमों में हुए शामिल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को खजुराहो में दो वैवाहिक कार्यक्रम में सम्मिलित होकर वर एवं वधू को आशीर्वाद देकर सुखमय वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव खजुराहो के एक निजी होटल में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस विवेक कुमार की पुत्री तथा राजनगर में पूर्व विधायक रेखा यादव के पुत्र के शादी समारोह में शामिल हुए। शुभकामना दी।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार सहित सांसद विष्णुदत्त शर्मा, विधायक अरविन्द पटेरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष विद्या अग्निहोत्री भी उपस्थित रहीं।


    मुख्यमंत्री ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री तोमर के भतीजे के वैवाहिक कार्यक्रम में हुए शामिल

    इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के पारिवारिक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने ग्वालियर में रेसकोर्स रोड स्थित ऊर्जा मंत्री के निवास पर पहुंचकर उनके भतीजे सूर्य प्रताप सिंह तोमर (हितांशु) को सुखद दाम्पत्य जीवन के लिये आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर उन्होंने ऊर्जा मंत्री तोमर की माताश्री सुधा तोमर सहित अन्य परिजन से भी भेंट की। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल एवं लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भी ऊर्जा मंत्री तोमर के निवास पर पहुँचकर सूर्य प्रताप सिंह तोमर को सुखद दाम्पत्य जीवन के लिये शुभकामनाएँ प्रदान की।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले फिल्म निर्देशक गोवारीकर

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से फिल्म निर्माता एवं निर्देशक आशुतोष गोवारीकर ने गुरुवार को ग्वालियर विमानतल पर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोवारीकर का आत्मीय स्वागत किया और प्रदेश में फिल्म निर्माण की संभावनाओं पर उनसे चर्चा की। आशुतोष गोवारीकर ने भी मध्य प्रदेश में मिल रहे सहयोग की सराहना की तथा ग्वालियर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता की प्रशंसा की। मुलाकात के दौरान फिल्म और पर्यटन क्षेत्र में संभावित सहयोग पर बातचीत हुई।