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  • म्यांमार के खनिजों पर चीन की पकड़ से बढ़ी भारत की चिंता, गृहयुद्ध में बदला भू-राजनीतिक खेल

    म्यांमार के खनिजों पर चीन की पकड़ से बढ़ी भारत की चिंता, गृहयुद्ध में बदला भू-राजनीतिक खेल



    नई दिल्ली। म्यांमार 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से लगातार गृहयुद्ध जैसी स्थिति में फंसा हुआ है, जहां सेना और विभिन्न जातीय सशस्त्र समूहों के बीच संघर्ष जारी है। इस अस्थिर माहौल के बीच देश के रणनीतिक खनिज संसाधनों, खासकर रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर चीन की बढ़ती भूमिका ने क्षेत्रीय भू-राजनीति को और जटिल बना दिया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, म्यांमार के उत्तरी राज्यों जैसे कचीन और शान में स्थित खनिज क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में रेयर अर्थ तत्वों का उत्पादन होता है, जिनका वैश्विक सप्लाई चेन में अहम स्थान है। इन खनिजों का बड़ा हिस्सा चीन को निर्यात होता है, क्योंकि चीन दुनिया में रेयर अर्थ प्रोसेसिंग का सबसे बड़ा केंद्र है।

    विश्लेषकों का मानना है कि चीन इस क्षेत्र में सिर्फ आर्थिक निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि वह स्थानीय सशस्त्र समूहों और सीमावर्ती नेटवर्क के जरिए अपनी रणनीतिक पकड़ भी बनाए हुए है। इससे म्यांमार के भीतर संघर्ष और अधिक गहरा हुआ है और सीमावर्ती इलाकों में अस्थिरता बनी हुई है।

    भारत के लिए यह स्थिति इसलिए संवेदनशील है क्योंकि म्यांमार की करीब 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश से लगती है। इस क्षेत्र में पहले से ही उग्रवाद और तस्करी की चुनौतियां रही हैं, जो अब और जटिल हो गई हैं।

    सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, म्यांमार की अस्थिरता और चीन की सक्रिय मौजूदगी भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं जैसे त्रिपक्षीय राजमार्ग और कलादान मल्टीमॉडल प्रोजेक्ट पर भी असर डाल रही है।

    कुल मिलाकर, म्यांमार का संकट अब केवल आंतरिक गृहयुद्ध नहीं रह गया है, बल्कि यह एक व्यापक क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन और संसाधन प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बन चुका है, जिसमें भारत, चीन और स्थानीय समूहों के हित सीधे जुड़े हुए हैं।

  • ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर चीन का प्रोपेगेंडा: J-10CE अपग्रेड कर राफेल पर फिर किया दावा, वीडियो से मचा विवाद

    ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर चीन का प्रोपेगेंडा: J-10CE अपग्रेड कर राफेल पर फिर किया दावा, वीडियो से मचा विवाद



    नई दिल्ली। चीन की ओर से एक बार फिर अपने लड़ाकू विमान J-10CE को लेकर नए दावे सामने आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय सैन्य और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ के आसपास चीनी मीडिया और कुछ आधिकारिक चैनलों ने इस फाइटर जेट से जुड़ा एक नया वीडियो और अपग्रेड की जानकारी साझा की है।

    दावा किया जा रहा है कि चीन ने अपने मल्टी-रोल फाइटर जेट Chengdu J-10CE में तकनीकी सुधार किए हैं, जिसमें इसके हथियार सिस्टम और कॉम्बैट क्षमता को और उन्नत बनाने की बात कही गई है। इसके साथ ही मीडिया रिपोर्ट्स में लंबी दूरी की मिसाइल PL-15 का भी जिक्र किया गया है, जिसे इस विमान की ताकत के रूप में पेश किया जा रहा है।

    चीनी मीडिया ने अपने प्रसारण में यह भी दावा दोहराया है कि J-10C/CE का उपयोग हाल के संघर्षों में किया गया था और इससे दुश्मन के विमानों को नुकसान पहुंचा था। हालांकि, इन दावों के समर्थन में स्वतंत्र और पुष्ट प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं, और कई विशेषज्ञ इन्हें प्रचार (propaganda) का हिस्सा मानते हैं।

    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि चीन अपने इस विमान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक सीमित देशों को छोड़कर इसे बड़े स्तर पर कोई नया खरीदार नहीं मिला है। पाकिस्तान इस विमान का प्रमुख उपयोगकर्ता बताया जाता है।

    इसी बीच चीनी रक्षा उद्योग से जुड़े अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया है कि J-10CE के नए वर्जन में कई सुधार किए जा रहे हैं ताकि इसकी मल्टी-डोमेन कॉम्बैट क्षमता और बढ़ सके, जिसमें हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री लक्ष्य पर हमले की क्षमता शामिल है।

    कुल मिलाकर यह मामला केवल तकनीकी अपग्रेड का नहीं बल्कि वैश्विक हथियार बाजार और रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा का हिस्सा माना जा रहा है, जहां दावों और वास्तविकता के बीच अंतर को लेकर लगातार बहस जारी है।

  • चीन दौरे पर जा सकते हैं बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान, राजदूत बोले- द्विपक्षीय रिश्तों में आएगा नया मोड़

    चीन दौरे पर जा सकते हैं बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान, राजदूत बोले- द्विपक्षीय रिश्तों में आएगा नया मोड़



    नई दिल्ली। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित चीन यात्रा को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। चीन के राजदूत याओ वेन ने संकेत दिया है कि अगर यह दौरा होता है तो यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। यह बयान ढाका में आयोजित ‘चीन-बांग्लादेश शासन अनुभव आदान-प्रदान’ विषय पर हुई एक गोलमेज बैठक के दौरान दिया गया।

    राजदूत याओ वेन ने कहा कि चीन बांग्लादेश की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है और हर परिस्थिति में उसके विकास और स्थिरता का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में राजनीतिक और आर्थिक सहयोग पहले से अधिक मजबूत हुआ है।

    उन्होंने बांग्लादेश के ‘वन चाइना’ नीति के समर्थन के लिए आभार जताते हुए इसे दोनों देशों के भरोसेमंद रिश्तों की नींव बताया। साथ ही कहा कि उच्च-स्तरीय संपर्क लगातार बढ़ रहे हैं और आने वाले समय में यह सहयोग और गहरा होगा।

    आर्थिक सहयोग का जिक्र करते हुए चीनी राजदूत ने बताया कि हाल ही में चीनी कंपनियों ने बांग्लादेश में बड़े स्तर पर निवेश किया है, जिससे हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर बने हैं। इसके अलावा तीस्ता नदी प्रोजेक्ट, बंदरगाह आधुनिकीकरण और ऊर्जा क्षेत्र में भी चीन सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

    याओ वेन के अनुसार, दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही भी तेजी से बढ़ रही है और इस साल बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों को चीन का वीजा दिया गया है। इससे व्यापार और शैक्षणिक सहयोग को भी बढ़ावा मिला है।

    हालांकि अभी तक प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा की आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है, लेकिन इस संभावित दौरे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दक्षिण एशिया की कूटनीतिक रणनीति में बदलाव का संकेत हो सकता है, खासकर उस समय जब क्षेत्रीय देशों के बीच संतुलन और साझेदारी की दिशा बदल रही है।

  • ऑपरेशन सिंदूर में चीन की एंट्री? पाकिस्तान को मिली टेक्निकल मदद और रियल-टाइम इनपुट के दावों से हड़कंप

    ऑपरेशन सिंदूर में चीन की एंट्री? पाकिस्तान को मिली टेक्निकल मदद और रियल-टाइम इनपुट के दावों से हड़कंप



    नई दिल्ली। चीन की ओर से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मदद देने के दावे ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। चीनी सरकारी मीडिया के एक इंटरव्यू के हवाले से कहा जा रहा है कि इंजीनियरों ने पाकिस्तान को तकनीकी सपोर्ट और रियल-टाइम इनपुट दिए थे। हालांकि इन दावों पर आधिकारिक स्तर पर पूरी तरह स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट और चीनी टीवी इंटरव्यू में दावा किया गया है कि चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक इंजीनियर ने पाकिस्तान में तकनीकी सहायता की बात स्वीकार की है। कहा गया कि टीम का काम J-10CE जैसे लड़ाकू विमानों और उनके सिस्टम को ऑपरेशनल रूप से तैयार रखना था। यह भी दावा है कि पाकिस्तान ने चीन में बने J-10CE फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया, जिन्हें AVIC की सहयोगी कंपनियां बनाती हैं। इसी दौरान रियल-टाइम डेटा सपोर्ट और सैटेलाइट इनपुट देने जैसे आरोप भी सामने आए हैं।

    भारत की ओर से पहले ही यह कहा जा चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर मदद दी थी। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात का जिक्र किया था कि संघर्ष के दौरान चीन ने अपने नेटवर्क और सिस्टम के जरिए क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखी और पाकिस्तान को जानकारी उपलब्ध कराई। वहीं चीन ने पहले इन आरोपों को खारिज किया था, लेकिन अब आए इंटरव्यू और रिपोर्ट्स ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही काफी गहरा है और J-10CE जैसे एडवांस फाइटर जेट्स इसकी बड़ी मिसाल हैं। पाकिस्तान पहले से ही चीन से बड़े पैमाने पर हथियार आयात करता रहा है और हाल के वर्षों में यह निर्भरता और बढ़ी है। इसी बीच चीन द्वारा नए स्टील्थ फाइटर जेट J-35 को पाकिस्तान को देने की चर्चा ने भी क्षेत्रीय सैन्य समीकरणों पर बहस तेज कर दी है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑपरेशन के दौरान चीन ने अपने तकनीकी और सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल कर स्थिति पर नजर रखी, जिसे कुछ विशेषज्ञ “लाइव लैब” रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि इन सभी दावों पर अभी तक पूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, जिससे इस मुद्दे पर बहस और तेज हो गई है।

  • चीन में भ्रष्टाचार पर ‘ड्रैगन’ का बड़ा वार, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा; रिश्वतखोरी ने छीनी सत्ता और सम्मान

    चीन में भ्रष्टाचार पर ‘ड्रैगन’ का बड़ा वार, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा; रिश्वतखोरी ने छीनी सत्ता और सम्मान


    नई दिल्ली। चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को बड़ा झटका लगा है। चीनी सैन्य अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्री वेई फेंगहे और ली शांगफू को भ्रष्टाचार के मामले में मौत की सजा सुनाई है। हालांकि दोनों को दो साल की मोहलत भी दी गई है।

    सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक वेई फेंगहे को रिश्वत लेने का दोषी पाया गया, जबकि ली शांगफू पर रिश्वत लेने और देने दोनों के आरोप साबित हुए। दोनों नेताओं को पहले ही 2024 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित किया जा चुका था।

    शी जिनपिंग के करीबी रहे दोनों नेता
    रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों पूर्व मंत्री चीन की शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य रह चुके हैं। वेई फेंगहे ने 2018 से 2023 तक रक्षा मंत्री के तौर पर काम किया था, जबकि ली शांगफू ने उनके बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी। दोनों नेताओं का संबंध चीन की रणनीतिक पीपल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फ़ोर्स से भी रहा है, जिसे राष्ट्रपति जिनपिंग के सैन्य सुधार कार्यक्रम के तहत मजबूत किया गया था।

    भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई
    2012 में सत्ता संभालने के बाद से शी जिनपिंग लगातार भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चला रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान के तहत अब तक लाखों अधिकारियों और कई वरिष्ठ सैन्य अफसरों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सेना और कम्युनिस्ट पार्टी में बढ़ते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए यह कार्रवाई एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

  • बांग्लादेश पर चीन का बड़ा दांव! वांग यी ने भारत-अमेरिका को दिया साफ संदेश

    बांग्लादेश पर चीन का बड़ा दांव! वांग यी ने भारत-अमेरिका को दिया साफ संदेश


    नई दिल्ली। चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ती नजदीकियों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बीजिंग दौरे पर पहुंचे बांग्लादेश के विदेश मंत्री Khalilur Rahman ने चीनी विदेश मंत्री Wang Yi से मुलाकात की, जिसके बाद चीन ने ऐसा बयान दिया जिसे भारत और अमेरिका के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है। वांग यी ने साफ कहा कि दक्षिण एशियाई देशों के साथ चीन के संबंध किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं और न ही इन रिश्तों पर किसी बाहरी देश का असर होना चाहिए। माना जा रहा है कि यह इशारा India और United States की ओर था।

    बांग्लादेश की नई सरकार और चीन की सक्रियता
    फरवरी में नई बीएनपी सरकार बनने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री की यह पहली चीन यात्रा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले महीने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री Tarique Rahman भी चीन दौरे पर जा सकते हैं।

    बैठक के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। चीन ने बांग्लादेश को हरसंभव समर्थन देने की बात कही।

    बेल्ट एंड रोड परियोजना पर जोर
    वांग यी ने कहा कि चीन बांग्लादेश के विकास में सबसे भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने चीन की महत्वाकांक्षी Belt and Road Initiative परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    ताइवान मुद्दे पर चीन को मिला समर्थन
    बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने “वन चाइना पॉलिसी” का समर्थन करते हुए कहा कि ताइवान चीन का हिस्सा है और बीजिंग ही पूरे चीन की वैध सरकार है। इसे चीन के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।

    दक्षिण एशिया में बदल रहे समीकरण
    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन लगातार दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बांग्लादेश के साथ बढ़ती नजदीकियां भारत और अमेरिका दोनों के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकती हैं।

  • चीन की नई चाल से बढ़ी टेंशन! पाकिस्तान को मिल सकता है जे-35 स्टील्थ जेट, भारत के एस-400 पर मंडराया खतरा

    चीन की नई चाल से बढ़ी टेंशन! पाकिस्तान को मिल सकता है जे-35 स्टील्थ जेट, भारत के एस-400 पर मंडराया खतरा



    नई दिल्ली। चीन एक बार फिर पाकिस्तान के जरिए भारत के खिलाफ अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन पाकिस्तान को अपना अत्याधुनिक जे-35एई स्टील्थ फाइटर जेट देने की तैयारी कर रहा है, जिसे अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन F-35 लाइटनिंग II का मुकाबला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का दावा है कि यह फाइटर जेट भारत के एयर डिफेंस सिस्टम, खासकर S-400 Triumf के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी हलचल
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें Noor Khan Airbase का नाम भी शामिल रहा। भारतीय लड़ाकू विमानों और ब्रह्मोस मिसाइलों की क्षमता ने पाकिस्तान और चीन दोनों को सतर्क कर दिया।

    क्या है चीन का जे-35एई?
    शेनयांग जे-35 चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार से बच निकलने में सक्षम माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान 40 जे-35 खरीद सकता है। चीन इसे वैश्विक बाजार में अमेरिकी एफ-35 के विकल्प के रूप में पेश करना चाहता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील्थ तकनीक की वजह से यह विमान दुश्मन के वायु रक्षा सिस्टम के बेहद करीब पहुंचकर हमला कर सकता है। यही कारण है कि इसे भारत के एस-400 सिस्टम के लिए संभावित खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

    परमाणु सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान को जे-35 मिलता है तो वह लंबी दूरी तक सटीक हमले करने में ज्यादा सक्षम हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक चीन पाकिस्तान को सैटेलाइट और निगरानी सहायता भी दे रहा है, जिससे भारतीय वायु रक्षा की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो सकता है।

    हालांकि भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता मजबूत कर रहा है। भारतीय सेना पहले से दसाल्ट राफेल, एस-400 और ब्रह्मोस जैसी आधुनिक प्रणालियों से लैस है और नए वायु रक्षा सिस्टम पर भी तेजी से काम चल रहा है।

    एशिया में बढ़ सकती है सैन्य प्रतिस्पर्धा
    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा पाकिस्तान को अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान देने से दक्षिण एशिया में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • चीन के हुनान में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 21 की मौत, 61 घायल; जांच जारी

    चीन के हुनान में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 21 की मौत, 61 घायल; जांच जारी


    नई दिल्ली। चीन के हुनान प्रांत के लियूयांग शहर में सोमवार शाम एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हो गया। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि 61 लोग घायल हो गए हैं।लियूयांग हुआशेंग फायरवर्क्स मैन्युफैक्चरिंग एंड डिस्प्ले कंपनी में हुए इस धमाके के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    अचानक हुए विस्फोट से मची तबाही
    जानकारी के अनुसार यह हादसा शाम करीब 5 बजे हुआ। धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री परिसर में आग फैल गई और आसपास के इलाके में धुएं का गुबार छा गया।

    तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
    घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव कार्य शुरू कर घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    कारणों की जांच जारी
    फिलहाल विस्फोट के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसा तकनीकी खराबी, सुरक्षा मानकों की अनदेखी या किसी अन्य वजह से हुआ।

    यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।व्हाइट हाउस के पास गोलीबारी, सीक्रेट सर्विस की जवाबी कार्रवाई में संदिग्ध घायलअमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस के पास सोमवार को गोलीबारी की घटना से हड़कंप मच गया।

    कैसे हुई घटना
    सीक्रेट सर्विस के अनुसार, गश्त के दौरान सुरक्षा एजेंट्स ने एक संदिग्ध व्यक्ति को हथियार के साथ देखा। रोकने का प्रयास करने पर आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में एजेंट्स ने गोली चलाई और उसे घायल कर दिया।

    एक नाबालिग भी घायल
    इस घटना में एक नाबालिग के घायल होने की भी पुष्टि हुई है, हालांकि उसकी हालत गंभीर नहीं बताई गई है।

    इलाके में हाई अलर्ट
    घटना के समय उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का काफिला कुछ ही देर पहले उस इलाके से गुजर चुका था। इसके बाद व्हाइट हाउस परिसर को कुछ समय के लिए लॉकडाउन कर दिया गया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और हमले के मकसद का पता लगाने में जुटी है

  • 5 चीनी कंपनियों पर US ने लगाया बैन, चीन की दो टूक….. कहा-हम नहीं करेंगे प्रतिबंध का पालन

    5 चीनी कंपनियों पर US ने लगाया बैन, चीन की दो टूक….. कहा-हम नहीं करेंगे प्रतिबंध का पालन


    बीजिंग।
    चीन (China) के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वह ईरान (Iran) से तेल (Oil) खरीदने के कारण अपनी पांच कंपनियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों (US Sanctions) का पालन नहीं करेगा। चीन हमेशा से ईरानी तेल का एक प्रमुख और महत्वपूर्ण ग्राहक रहा है। चीन में ईरान से यह तेल मुख्य रूप से स्वतंत्र ‘टीपॉट’ रिफाइनरियों के माध्यम से खरीदा जाता है। ये छोटी और स्वतंत्र रिफाइनरियां होती हैं जो इस्लामिक गणराज्य (ईरान) से भारी छूट पर कच्चा तेल खरीदती हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका (America) का मुख्य लक्ष्य ईरान की अर्थव्यवस्था और उसकी आय के स्रोतों को पूरी तरह से बंद करना है, इसीलिए उसने इस तरह की तेल खरीद करने वाली रिफाइनरियों पर प्रतिबंध कड़े कर दिए हैं।


    चीन का कड़ा रुख और तर्क

    चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने पिछले साल से अलग-अलग समय पर घोषित हुए इन अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। प्रतिबंधों को अस्वीकार करना: चीन ने साफ कहा है कि अमेरिकी उपायों को चीन द्वारा “मान्यता नहीं दी जाएगी, लागू नहीं किया जाएगा या उनका पालन नहीं किया जाएगा।”

    अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला: मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका के ये प्रतिबंध अनुचित रूप से चीनी कंपनियों को तीसरे देशों के साथ सामान्य आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियां करने से रोकते हैं। चीन का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों का सीधा उल्लंघन है।

    एकतरफा कार्रवाई का विरोध: चीन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह हमेशा से उन एकतरफा प्रतिबंधों का कड़ा विरोध करता रहा है जिन्हें संयुक्त राष्ट्र (UN) की मंजूरी प्राप्त नहीं है।


    किन कंपनियों पर है अमेरिका का निशाना?

    चीनी मंत्रालय के इस आदेश के तहत जिन पांच प्रमुख कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचाया जा रहा है, वे हैं:
    शेडोंग प्रांत की तीन कंपनियां:
    शेडोंग जिनचेंग पेट्रोकेमिकल ग्रुप
    शेडोंग शौगुआंग ल्यूकिंग पेट्रोकेमिकल
    शेडोंग शेंगक्सिंग केमिकल
    चीन के अन्य हिस्सों की दो कंपनियां
    हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनरी
    हेबेई सिन्हुआ केमिकल ग्रुप


    अमेरिका की ताजा कार्रवाई

    इसी बीच, शुक्रवार को अमेरिका ने एक और चीनी फर्म पर नए प्रतिबंध लगा दिए। अमेरिका का दावा है कि इस फर्म ने ईरानी कच्चे तेल के “करोड़ों बैरल” का आयात किया है, जिससे तेहरान को अरबों डॉलर की कमाई हुई है। इस फर्म का नाम किंगदाओ हैये ऑयल टर्मिनल कं, लिमिटेड है। हालांकि, चीनी वाणिज्य मंत्रालय के हालिया आदेश में इस कंपनी का जिक्र नहीं किया गया था।


    भू-राजनीतिक स्थिति और आगामी कूटनीति

    यह प्रतिबंध और विवाद ऐसे तनावपूर्ण माहौल में सामने आए हैं।अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह से ठप है। फरवरी के अंत में ईरान पर हुए अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद से शुरू हुए इस विवाद का फिलहाल कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है।

    ट्रंप का चीन दौरा: इस बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस महीने के अंत में चीनी नेता शी जिनपिंग के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत के लिए चीन का दौरा करने वाले हैं। इस बैठक में व्यापार और प्रतिबंधों का मुद्दा अहम होने की उम्मीद है।

  • Hangor Submarine Deal: चीन ने पाकिस्तान को सौंपी पहली हैंगोर पनडुब्बी, भारत का P75-I प्रोजेक्ट अभी भी अटका, समंदर में बढ़ी नौसेना की रेस

    Hangor Submarine Deal: चीन ने पाकिस्तान को सौंपी पहली हैंगोर पनडुब्बी, भारत का P75-I प्रोजेक्ट अभी भी अटका, समंदर में बढ़ी नौसेना की रेस



    नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान के बीच पनडुब्बी साझेदारी ने दक्षिण एशिया में समुद्री सुरक्षा संतुलन को फिर चर्चा में ला दिया है। चीन ने पाकिस्तान नौसेना को पहली हैंगोर-क्लास पनडुब्बी सौंप दी है। यह वही डील है जिसके तहत कुल 8 आधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक AIP (Air Independent Propulsion) पनडुब्बियां पाकिस्तान को मिलनी हैं।यह पनडुब्बियां चीन की Type 039 (Yuan-class) तकनीक पर आधारित हैं, जिन्हें बेहतर स्टील्थ, लंबी अवधि तक पानी के भीतर रहने की क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणालियों के लिए जाना जाता है।

    कैसे हो रहा है पूरा प्रोजेक्ट?
    इस पूरे प्रोजेक्ट की कीमत करीब 5 अरब डॉलर बताई जा रही है।
    4 पनडुब्बियां चीन के वुचांग शिपयार्ड में बन रही हैं
    4 पनडुब्बियां पाकिस्तान के कराची शिपयार्ड (KS&EW) में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत बनाई जाएंगी
    पहली पनडुब्बी की डिलीवरी चीन के सान्या नौसैनिक बेस पर की गई, जो PLA Navy का अहम अड्डा माना जाता है।

    पाकिस्तान को क्या फायदा मिलेगा?
    इस डील को पाकिस्तान के लिए “नौसेना में JF-17 मॉडल” की तरह देखा जा रहा है।
    यानी सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि निर्माण क्षमता भी मिल रही है
    पनडुब्बियों का आंशिक निर्माण
    मेंटेनेंस और रिपेयर क्षमता
    भविष्य में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
    हालांकि रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि असली तकनीकी नियंत्रण और हाई-एंड सिस्टम अभी भी चीन के पास ही रहेंगे।

    हैंगोर पनडुब्बी क्यों खास है?
    हैंगोर-क्लास पनडुब्बियां आधुनिक AIP तकनीक से लैस हैं, जिससे येलंबे समय तक पानी के नीचे रह सकती हैंआसानी से डिटेक्ट नहीं होतींटॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलों से हमला कर सकती हैं

    कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इनमें रणनीतिक हथियारों की क्षमता हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

    भारत की चिंता क्यों बढ़ी?
    इसी बीच भारत का महत्वाकांक्षी P75-I पनडुब्बी प्रोजेक्ट अभी तक फाइनल कॉन्ट्रैक्ट स्टेज में ही अटका हुआ है।इस प्रोजेक्ट के तहत भारत को 6 एडवांस AIP पनडुब्बियां बनानी हैं, जिन्हें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) और जर्मनी की कंपनी TKMS मिलकर बनाएंगे।

    लेकिन समस्या ये हैप्रोजेक्ट 20 साल से ज्यादा समय से चर्चा में हैटेक्नोलॉजी ट्रांसफर और शर्तों पर बातचीत लंबी खिंच रही हैफाइनल डील अभी तक पूरी नहीं हुईअगर सब कुछ तय भी हो जाए, तो पहली पनडुब्बी को सेवा में आने में 2032 या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है।

    भारत का मौजूदा सबमरीन बेड़ा
    भारतीय नौसेना के पास अभी लगभग 16–17 पारंपरिक पनडुब्बियां हैं, जिनमें शामिल हैं
    किलो-क्लास (रूस)
    टाइप-209 (जर्मनी)
    स्कॉर्पीन/कलवरी क्लास (फ्रांस)
    लेकिन बड़ी चुनौती यह है कि इनमें से कई पुरानी हो चुकी हैं और AIP तकनीक सीमित है, जिससे उनकी अंडरवॉटर स्टे क्षमता नई पीढ़ी की पनडुब्बियों से कम है।

    दक्षिण एशिया में अब नौसेना की दौड़ तेज हो गई है।एक तरफ पाकिस्तान चीन के सहयोग से तेजी से नई पनडुब्बियां शामिल कर रहा है, वहीं भारत अभी अपनी अगली पीढ़ी की पनडुब्बियों के लिए प्रक्रिया पूरी करने में जुटा है।विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दशक में समुद्री शक्ति ही रणनीतिक संतुलन तय करने में सबसे बड़ा रोल निभाएगी।