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  • ‘PM का अपमान बर्दाश्त नहीं…’, दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के खिलाफ उतरे ‘हिट जनता पार्टी’ के युवा

    ‘PM का अपमान बर्दाश्त नहीं…’, दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के खिलाफ उतरे ‘हिट जनता पार्टी’ के युवा


    नई दिल्ली। दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन के बीच शुक्रवार, 9 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के पास जनपथ रोड पर ‘लाल हिट जनता पार्टी’ से जुड़े युवाओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के कथित अपमान और विपक्षी दलों की विरोध-प्रदर्शन की शैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने दिल्ली पुलिस और सरकार के समर्थन में नारे लगाए और आरोप लगाया कि विपक्षी दल प्रदर्शन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ एकजुट हुए हैं।

    ‘PM का अपमान नहीं सह सकते, पुलिस की तैयारी पुख्ता हो’

    समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में प्रदर्शन कर रहे एक युवक ने कहा कि वे प्रधानमंत्री का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते, इसलिए सड़कों पर उतरे हैं। उसने कहा कि पुलिस की तैयारियां इतनी पुख्ता होनी चाहिए कि विरोध करने वाले यहां न पहुंच सकें। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि सरकार प्रदर्शन की अनुमति नहीं देगी और कहा कि अब ‘कॉकरोचों’ का अंतिम समय आ गया है।

    एक अन्य युवक ने कहा कि शुक्रवार को उनके साथ जो हुआ, वैसा ही व्यवहार अगले दिन बड़ी संख्या में आने वाले प्रदर्शनकारियों के साथ भी होना चाहिए। उसने दावा किया कि 10 अक्टूबर को दो लाख लोगों की भीड़ जुट सकती है और तब प्रशासन की कार्रवाई देखी जाएगी।

    विपक्ष पर अमर्यादित टिप्पणियां करने का आरोप

    प्रदर्शनकारियों ने विपक्षी दलों पर लगातार इस्तीफे की मांग करने और नेताओं के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां करने का आरोप लगाया। एक युवक ने कहा कि विपक्ष हर मुद्दे पर किसी न किसी का इस्तीफा मांगने लगता है। उसके मुताबिक, अगर कोई देश के लिए अच्छा काम करेगा, तो विपक्ष एक दिन उसका भी इस्तीफा मांगने लगेगा।

    प्रदर्शनकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। उसने मांग की कि विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए।

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और जंतर-मंतर का भी किया जिक्र

    प्रदर्शन में शामिल एक अन्य व्यक्ति ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का उल्लेख करते हुए जंतर-मंतर पर चल रही गतिविधियों पर सवाल उठाए। उसने आरोप लगाया कि कभी शिक्षा मंत्री तो कभी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा जा रहा है। प्रदर्शनकारी ने आशंका जताई कि आगे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग भी की जा सकती है।

    उसने कहा कि उनका समूह 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ एकत्र हुआ है और चाहता है कि यह प्रदर्शन न हो।

    ‘देश का मजाक बनाया जा रहा है’

    ‘लाल हिट जनता पार्टी’ के बैनर तले प्रदर्शन करने पहुंचे एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि उनका समूह पुलिस के समर्थन में प्रदर्शन करने आया है, लेकिन उसे अनुमति नहीं दी जा रही है। उसने एक महिला के रोने वाले वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि घटना को देखकर उन्हें गुस्सा आया है और वे पुलिस को इस तरह की स्थिति में नहीं देख सकते।

    उसने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का अपमान किया जा रहा है और देश में कहीं भी किसी के इस्तीफे की मांग उठने लगती है। प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे देश के मुखिया का अपमान सहन नहीं करेंगे और आगे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।

    फिलहाल, प्रदर्शनकारियों की ये टिप्पणियां विपक्षी दलों के खिलाफ उनके विरोध और नाराजगी को दर्शाती हैं। प्रदर्शन की अनुमति और नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

  • सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन से रेलवे सतर्क, 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने वाली कई ट्रेनें रद्द, यात्रियों की यात्रा पर असर

    सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन से रेलवे सतर्क, 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने वाली कई ट्रेनें रद्द, यात्रियों की यात्रा पर असर

    नई दिल्ली । राजधानी में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय रेलवे ने कई ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया है। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली कुछ ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कुछ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है। स्टेशनों के आसपास संभावित भारी यातायात जाम की आशंका के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। इस बदलाव का असर बिहार, मुंबई, हावड़ा और सियालदह से दिल्ली आने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है।

    रेलवे प्रशासन के अनुसार, 9 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशन से रवाना होने वाली ऐसी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें, जिन्हें 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन पहुंचना था, उन्हें शुरुआती स्टेशन से ही रद्द करने का फैसला लिया गया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि कर लें। ट्रेनों के संचालन, रद्द होने और समय में बदलाव से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए रेलवन ऐप और एनटीईएस ऐप देखने को कहा गया है।

    दानापुर मंडल से संबंधित चार ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें गाड़ी संख्या 20801 मगध एक्सप्रेस शामिल है। यह ट्रेन 9 अक्टूबर को इस्लामपुर से दोपहर 3:30 बजे रवाना होने वाली थी और अगले दिन दोपहर 12 बजे नई दिल्ली पहुंचने का निर्धारित समय था। प्रदर्शन के मद्देनजर इस ट्रेन का परिचालन रद्द कर दिया गया है।

    गाड़ी संख्या 12309 राजेंद्र नगर-नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस भी रद्द कर दी गई है। यह ट्रेन 9 अक्टूबर को राजेंद्र नगर से शाम 7:10 बजे चलने वाली थी और 10 अक्टूबर को सुबह 7:40 बजे नई दिल्ली पहुंचती। इसके अलावा गाड़ी संख्या 12393 संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस का संचालन भी नहीं होगा। यह ट्रेन राजेंद्र नगर से 9 अक्टूबर को शाम 7:20 बजे रवाना होकर 10 अक्टूबर को सुबह 7:55 बजे नई दिल्ली पहुंचने वाली थी।

    रद्द की गई चौथी ट्रेन गाड़ी संख्या 22361 राजेंद्र नगर-नई दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस है। इसका निर्धारित प्रस्थान समय 9 अक्टूबर को शाम 7:50 बजे था, जबकि नई दिल्ली पहुंचने का समय 10 अक्टूबर को दोपहर 1:10 बजे तय था। इन चारों ट्रेनों के रद्द होने से इनके निर्धारित समय पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    इस बीच, भोपाल होकर चलने वाली मुंबई-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस भी रद्द कर दी गई है। गाड़ी संख्या 22221 को परिचालन संबंधी कारणों से 9 अक्टूबर को उसके शुरुआती स्टेशन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई से ही रद्द किया गया है। भोपाल स्टेशन से इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को यात्रा की योजना दोबारा बनाने और रेलवे की सूचना एवं पूछताछ सेवाओं से अपडेट जानकारी लेने की सलाह दी गई है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया है।

    पूर्वी रेलवे ने भी शुक्रवार के लिए हावड़ा और सियालदह से दिल्ली आने वाली दो राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द किए जाने की जानकारी दी है। इनमें गाड़ी संख्या 12301 हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और गाड़ी संख्या 12313 सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस शामिल हैं। इस तरह दिल्ली आने वाली कई प्रमुख ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों को प्रस्थान से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति जांचना जरूरी है। जिन यात्रियों ने इन ट्रेनों में टिकट बुक कराए हैं, उन्हें यात्रा से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करके ही स्टेशन के लिए निकलना चाहिए।

  • जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस की मंजूरी नहीं, धारा 163 लागू कर सुरक्षा व्यवस्था सख्त

    जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस की मंजूरी नहीं, धारा 163 लागू कर सुरक्षा व्यवस्था सख्त

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन नहीं दिए जाने और संगठन के पिछले प्रदर्शन के रिकॉर्ड को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। साथ ही, नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने की जानकारी दी गई है।

    दिल्ली पुलिस की संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने बताया कि CJP की ओर से सौरव दास ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के संबंध में आवेदन दिया था। प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही तय करने की मांग उठाना था। पुलिस ने आवेदन पर विचार करने के बाद पाया कि प्रदर्शन की सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन से कम से कम 10 दिन पहले सूचना मिलनी चाहिए। इस प्रक्रिया का पालन नहीं होने के कारण प्रदर्शन को मंजूरी नहीं दी गई।

    नूपुर प्रसाद ने बताया कि नई दिल्ली क्षेत्र में BNSS की धारा 163 लागू है। इसके तहत सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए निवारक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने CJP और उसके समर्थकों को चेतावनी दी है कि बिना अनुमति प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से बचें। अधिकारियों ने कहा कि प्रतिबंधों का पालन करना जरूरी है और नियम तोड़ने की स्थिति में कार्रवाई हो सकती है।

    पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे CJP के पिछले रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त के अनुसार, पहले संगठन को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन उस दौरान कानूनी निर्देशों और दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया गया। पुलिस का कहना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए इस बार प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने को लेकर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को मंजूरी नहीं देने का फैसला किया गया है।

    दूसरी ओर, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास ने घोषणा की है कि 10 अक्टूबर को प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों पर जवाबदेही देनी चाहिए। अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि पुलिस या सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों को रोकेंगे, तो वे जिस स्थान पर रोके जाएंगे, वहीं विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता भले ही सरकार के पास हो, लेकिन सड़कें देश की जनता की हैं और नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

    प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े कई एहतियाती कदमों की जानकारी भी दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम से 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने को कहा गया है। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से लागू होने हैं और शनिवार को स्थिति सामान्य होने तक जारी रह सकते हैं। संबंधित स्टेशनों पर मेट्रो ट्रेनों की आवृत्ति भी घटाई जा सकती है।

    रेलवे के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। प्रदर्शन के कारण सड़कों पर भारी जाम लगने की आशंका के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के एहतियाती उपाय के तौर पर दिल्ली में खुदरा शराब की दुकानों को 9 और 10 अक्टूबर को बंद रखने का आदेश दिया गया है।

  • दिल्ली में CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर विवाद, मौलाना ने लाउडस्पीकर से मुस्लिम समुदाय से शामिल नहीं होने की अपील की

    दिल्ली में CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर विवाद, मौलाना ने लाउडस्पीकर से मुस्लिम समुदाय से शामिल नहीं होने की अपील की


    नई दिल्ली ।दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन को लेकर विवाद सामने आया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को रद्द करने की मांग को लेकर पार्टी ने प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस की ओर से प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। इसी बीच दिल्ली के हर्ष विहार स्थित एक मस्जिद से मौलाना ने लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों से प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की अपील की है।

    मौलाना ने अपने ऐलान में कहा कि जंतर-मंतर पर होने वाला CJP का प्रदर्शन अवैध है और मुस्लिम समुदाय के लोगों को इसमें शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोगों से प्रशासन का सहयोग करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। मौलाना ने कहा कि सरकार ने जंतर-मंतर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की है। ऐसे में लोगों को वहां जाने से बचना चाहिए और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रदर्शन में शामिल होने जाता है और उसके साथ कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की नहीं होगी। उन्होंने लोगों से इस चेतावनी को गंभीरता से लेने और प्रस्तावित कार्यक्रम से दूर रहने की अपील दोहराई।

    दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे निर्धारित प्रक्रिया और सूचना देने से जुड़े नियमों का हवाला दिया है। दिल्ली पुलिस की संयुक्त आयुक्त नूपुर प्रसाद ने बताया कि CJP की ओर से सौरव दास के नाम से 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के संबंध में आवेदन प्राप्त हुआ था। इस प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही की मांग करना बताया गया था। पुलिस ने आवेदन पर विचार करने के बाद पाया कि कार्यक्रम की सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी। निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन से कम से कम 10 दिन पहले सूचना प्राप्त होनी चाहिए थी। पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई।

    पुलिस ने पार्टी और प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने की योजना बना रहे लोगों को चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है कि पुलिस ने इसे आयोजित करने की मंजूरी नहीं दी है। वहीं, मौलाना की अपील भी इसी घटनाक्रम के बीच सामने आई है, जिसमें उन्होंने लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और किसी भी तरह की परेशानी से बचने को कहा है।

    दूसरी ओर, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास ने प्रदर्शन करने के अपने फैसले पर कायम रहने की बात कही है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि 10 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और उन्हें अपने ऊपर लगाए गए गंभीर आरोपों पर जवाबदेही देनी होगी। अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि पुलिस या सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों को रोकेंगे, तो वे जिस स्थान पर रोके जाएंगे, वहीं जंतर-मंतर जैसा प्रदर्शन स्थल बना देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता सरकार के पास हो सकती है, लेकिन सड़कें देश की जनता की हैं। उनके अनुसार, नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से नहीं रोका जाना चाहिए। इस तरह, एक ओर पुलिस ने अनुमति नहीं दी है और कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि दूसरी ओर CJP ने प्रदर्शन करने का ऐलान दोहराया है।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?


    नई दिल्ली।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध लगातार तेज हो रहा है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा पिछले दो दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में सक्रिय नजर आए हैं। दोनों नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की और हिरासत में भी लिए गए। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पुलिस की बैरिकेडिंग पार कर आकाशवाणी भवन परिसर तक पहुंच गए, जहां उन्होंने विरोध जारी रखा।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की उस मुहिम को भी चर्चा में ला दिया है, जिसमें वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दीपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन का ऐलान किया है।

    चुनाव आयोग पर रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

    राहुल गांधी और कांग्रेस पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग तथा भारतीय जनता पार्टी पर मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हाल में एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कथित मतभेद का दावा किया गया था। चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन किया है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।

    CJP ने भी इस विवाद को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। संगठन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कई मांगें उठा रहा है।

    CJP और कांग्रेस के मुद्दे एक, रास्ते अलग

    कांग्रेस और CJP दोनों ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन दोनों की आंदोलन की रणनीति अलग रही है। इससे पहले जब अभिजीत दीपके ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन किया था, तब राहुल गांधी उनके प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे।

    अब ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर कांग्रेस ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की लगातार सक्रियता ने इस आंदोलन को विपक्ष की मुख्यधारा की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

    आकाशवाणी भवन में राहुल-प्रियंका का धरना

    7 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए और कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा बैरिकेड पार कर आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जारी रखा।

    रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कांग्रेस के दोनों नेताओं के साथ दूसरे विपक्षी दलों के नेता नजर नहीं आए। इसी वजह से INDIA ब्लॉक के भीतर समन्वय को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। हालांकि, दूसरे दलों की गैरमौजूदगी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं और सभी विपक्षी दलों की ओर से इस पर कोई एकसमान आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    CJP की फिर दिल्ली कूच की तैयारी

    इस बीच अभिजीत दीपके भी अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। CJP का कहना है कि यह प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर होगा।

    CJP के अनुसार, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में कई छात्र संगठनों और अन्य समूहों के शामिल होने की योजना है। संगठन ने संकेत दिया है कि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में भी वह आंदोलन जारी रखने की कोशिश करेगा।

    कौन सा मुद्दा किसके हाथ में?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन अब अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों की गतिविधियों में बंटा दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में सीधे सड़क पर उतरकर मुद्दा उठाया है, जबकि CJP अपने अलग संगठनात्मक नेटवर्क के जरिए प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।

    ऐसे में 10 अक्टूबर का प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि CJP अपने आंदोलन को कितना विस्तार दे पाती है और कांग्रेस के सक्रिय होने के बाद उसके अभियान की सार्वजनिक गूंज किस तरह आगे बढ़ती है। फिलहाल चुनाव आयोग ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है, जबकि विपक्षी दल इन मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

  • बेंगलुरु में आज CJP का प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, ध्रुव राठी-प्रकाश राज भी होंगे शामिल

    बेंगलुरु में आज CJP का प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, ध्रुव राठी-प्रकाश राज भी होंगे शामिल


    बेंगलुरु। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बेंगलुरु में गुरुवार, 8 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रदर्शन करेगी। फ्रीडम पार्क में होने वाले इस कार्यक्रम में CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ यूट्यूबर ध्रुव राठी और अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज के भी शामिल होने की पुष्टि हुई है।

    10:30 बजे शुरू होगा प्रदर्शन

    CJP की ओर से फ्रीडम पार्क में सुबह 10:30 बजे से प्रदर्शन और ‘पीपल्स ट्रिब्यूनल’ आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में कर्नाटक के अलग-अलग जिलों से ऐसे लोगों के पहुंचने की बात कही गई है, जिनका दावा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए हैं। आयोजकों के मुताबिक, इन लोगों की बात सुनी जाएगी और उनकी शिकायतों को सामने रखा जाएगा।

    इसके बाद CJP की ओर से ‘चप्पल प्रदर्शन’ भी किया जाएगा। पार्टी के मुताबिक, यह प्रदर्शन SIR को लेकर उसके विरोध का हिस्सा है।

    ध्रुव राठी ने वीडियो जारी कर की अपील

    ध्रुव राठी के बेंगलुरु पहुंचने की जानकारी CJP संस्थापक अभिजीत दिपके और प्रकाश राज की ओर से साझा किए गए वीडियो के जरिए सामने आई। राठी ने भी वीडियो संदेश में 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने की बात कही और लोगों से प्रदर्शन में पहुंचने की अपील की। उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने की भी अपील की है।

    प्रकाश राज ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर राठी को बेंगलुरु कार्यक्रम का ‘स्पेशल गेस्ट’ बताया। उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में फ्रीडम पार्क पहुंचने की अपील की है।

    SIR पर क्या है प्रदर्शनकारियों की आपत्ति?

    CJP और प्रदर्शन से जुड़े आयोजकों का आरोप है कि SIR के दौरान कई पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इसी मुद्दे पर ‘पीपल्स ट्रिब्यूनल’ में कथित तौर पर प्रभावित लोगों की शिकायतें दर्ज की जाएंगी।

    आयोजकों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची में नामों को लेकर जवाबदेही की मांग की है। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जाएगी।

    दिपके करेंगे लोगों से बातचीत

    CJP संस्थापक अभिजीत दिपके बेंगलुरु में उन स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे, जिनका दावा है कि SIR के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इसके बाद फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन किया जाएगा।

    CJP पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग और SIR को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इससे पहले पार्टी के नेतृत्व में मुंबई समेत अन्य जगहों पर भी प्रदर्शन हो चुके हैं।

    10 अक्टूबर को दिल्ली में भी प्रदर्शन

    बेंगलुरु के बाद CJP की ओर से 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन की घोषणा की गई है। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी। ध्रुव राठी ने भी अपने वीडियो संदेश में लोगों से 10 अक्टूबर को दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।

    इस बीच, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दल भी दिल्ली में प्रदर्शन कर चुके हैं। विपक्ष SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग ने प्रक्रिया से जुड़ी आपत्तियों पर अपना पक्ष अलग-अलग मौकों पर रखा है।

  • ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले दे सकते हैं इस्तीफा? सौरभ भारद्वाज के दावे से चुनाव आयोग और SIR विवाद पर बढ़ी सियासी हलचल

    ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले दे सकते हैं इस्तीफा? सौरभ भारद्वाज के दावे से चुनाव आयोग और SIR विवाद पर बढ़ी सियासी हलचल


    नई दिल्ली ।
    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है कि उनके पास मौजूद जानकारी के अनुसार ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, यह अभी केवल भारद्वाज का दावा है और इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    सौरभ भारद्वाज ने अपने सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है। उनके मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली है कि मुख्य चुनाव आयुक्त 10 अक्टूबर से पहले अपने पद से हट सकते हैं। इस दावे के बाद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है। भारद्वाज की ओर से अपने दावे के समर्थन में इससे अधिक जानकारी नहीं दी गई है।

    जिस 10 अक्टूबर की तारीख का जिक्र सौरभ भारद्वाज ने किया है, उसी दिन कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी लंबे समय से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सवाल उठाती रही है। सीजेपी की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग की जा रही है। पार्टी का कहना है कि इन मुद्दों के समाधान के बिना चुनाव व्यवस्था को लेकर सवाल बने रहेंगे।

    मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विवाद में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का मुद्दा भी प्रमुख है। बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के दौरान गड़बड़ी की आशंका है। वहीं, आयोग अपनी तय प्रक्रिया का हवाला देता रहा है।

    इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद को लेकर भी सवाल उठे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान 14 मौकों पर दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की राय ज्ञानेश कुमार से अलग रही। इस दावे को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज और निर्णय प्रक्रिया पर चर्चा तेज हुई है।

    सीजेपी ने चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेद के मुद्दे को भी गंभीर बताया है। पार्टी ने इस मामले में जांच की मांग की है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई है। वहीं, SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं और मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ी को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच सौरभ भारद्वाज का 10 अक्टूबर से पहले ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का दावा सामने आया है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्य चुनाव आयुक्त वास्तव में अपने पद से इस्तीफा देंगे या नहीं। चुनाव आयोग की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल इस्तीफे की बात सौरभ भारद्वाज के दावे तक ही सीमित है।

    10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे से जुड़ा यह दावा राजनीतिक चर्चा का नया मुद्दा बन गया है। इस मामले में आगे की स्थिति ज्ञानेश कुमार के किसी आधिकारिक निर्णय या चुनाव आयोग की ओर से सामने आने वाली जानकारी से स्पष्ट होगी।

  • मुंबई के बाद दिल्ली कूच करेगी CJP, दिपके का ऐलान- ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो जंतर-मंतर पर जुटेंगे

    मुंबई के बाद दिल्ली कूच करेगी CJP, दिपके का ऐलान- ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो जंतर-मंतर पर जुटेंगे


    नई दिल्ली। मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके ने अब दिल्ली कूच का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 10 अक्टूबर को देशभर से लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटेंगे। दिपके ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताया है।

    2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी अपनी अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में समर्थक वहां पहुंचे। प्रदर्शन में युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर और तिरंगे नजर आए।

    शिवाजी पार्क में जुटी बड़ी भीड़

    शिवाजी पार्क बड़े राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। प्रदर्शन के दौरान तेज गर्मी और बैरिकेडिंग के बावजूद बड़ी संख्या में युवा वहां पहुंचे। दादर स्टेशन और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

    मंच से दिपके ने इसे “जंतर-मंतर 2.0” बताते हुए ‘चलो दिल्ली’ का नारा दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो देशभर के युवा और Gen-Z दिल्ली पहुंचेंगे। CJP की ओर से आगे अन्य शहरों में भी आंदोलन करने की बात कही गई है।

    वोटर लिस्ट को लेकर दिपके के क्या आरोप?

    दिपके ने चुनावी मतदाता सूची को लेकर कई दावे किए। उनका आरोप है कि दो साल में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने 2024 के करीब 97 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं और लोकसभा चुनाव में NDA और विपक्षी गठबंधन के बीच करीब 2 प्रतिशत के वोट शेयर अंतर का हवाला देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का चुनावी नतीजों पर असर पड़ सकता है।

    दिपके ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सीट से करीब 40 हजार वोटर हटाए जाने और तमिलनाडु में करीब एक लाख नाम हटाए जाने का भी दावा किया। पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का आरोप उन्होंने लगाया। ये आंकड़े और आरोप CJP तथा दिपके के दावे हैं; इनका अंतिम सत्यापन या न्यायिक निष्कर्ष इस रिपोर्ट में स्थापित नहीं है।

    दिपके ने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करीब 40 लाख वोटर जोड़े गए और इसे चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी से जोड़ा। बीजेपी समर्थकों की ओर से तेलंगाना, कर्नाटक और झारखंड में विपक्षी दलों की जीत का उदाहरण दिए जाने पर उन्होंने कहा कि अगर मैच फिक्स हो तो हर गेंद नो-बॉल नहीं होती और हर कैच नहीं छूटता।

    CJP की प्रमुख मांगें क्या हैं?

    मुंबई प्रदर्शन में CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग रखी। पार्टी ने SIR प्रक्रिया को रोकने और 2024 लोकसभा चुनाव से पहले वाली मतदाता सूची को बहाल करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए स्वतंत्र संस्था बनाने की मांग भी सामने रखी गई है।

    दिपके ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की बहस को लेकर भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बीजेपी का लक्ष्य ‘एक देश, एक पार्टी’ की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने का आरोप लगाया और शिंदे गुट की शिवसेना को ‘शेल कंपनी’ कहा। ये दिपके के राजनीतिक आरोप हैं।

    प्रदर्शन में फिल्मी हस्तियां भी पहुंचीं

    शिवाजी पार्क के प्रदर्शन में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, निर्देशक विशाल भारद्वाज, फिल्मकार हंसल मेहता, संगीतकार विशाल ददलानी और महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी समेत कई लोग मौजूद रहे। शिवसेना (यूबीटी) ने भी प्रदर्शन को समर्थन दिया।

    स्थानीय विधायक महेश सावंत ने बताया कि आदित्य ठाकरे की तबीयत खराब होने के कारण वह प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए।

    CJP नेता ने दिल्ली पुलिस को दी चेतावनी

    CJP नेता सौरव दास ने पिछले जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि वह अपने रवैये में सुधार करे, वरना आंदोलन और तेज किया जाएगा। CJP नेताओं ने इसे ‘जंतर-मंतर सीजन 2’ बताया है।

    वामपंथी कार्यकर्ता शैलेश कांबले ने कहा कि कई वामपंथी संगठन भी आंदोलन में शामिल हुए हैं। वहीं, कानून के छात्र आयान पटेल ने मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया पर चिंता जताई। मंच से बोलने वाली किशोरी अनुजा ने भी सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।

    अब CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अगला प्रदर्शन करने की घोषणा की है। हालांकि, इस प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी स्थिति अलग विषय है और इसमें बदलाव संभव है।

  • अभिजीत दीपके के मेंटर कौन? वीडियो कॉल में सामने आया आजिंक्य शिंदे का नाम, जंतर-मंतर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

    अभिजीत दीपके के मेंटर कौन? वीडियो कॉल में सामने आया आजिंक्य शिंदे का नाम, जंतर-मंतर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके के राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों में किसकी अहम भूमिका रहती है, इसे लेकर एक वीडियो कॉल के दौरान जानकारी सामने आई है। बातचीत में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आजिंक्य शिंदे का नाम दीपके के मेंटर के तौर पर लिया। दीपके ने भी रांका की बात पर सहमति जताई।

    वीडियो कॉल में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और आजिंक्य शिंदे संगठन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते नजर आए। इसी दौरान रांका ने बताया कि आजिंक्य शिंदे, सीजेपी के गठन से पहले से ही दीपके के मेंटर रहे हैं और अब संगठन के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

    बातचीत में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया गया। आशुतोष रांका ने बताया कि इस आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से चलाने में आजिंक्य शिंदे की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके मुताबिक मंच पर दूसरे लोग नजर आते थे, लेकिन आंदोलन के पीछे की व्यवस्थाओं को संभालने और उसे आगे बढ़ाने का काम शिंदे कर रहे थे।

    अभिजीत दीपके ने भी इस बात का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वॉलेंटियर्स की टीम तैयार करने, भीड़ को व्यवस्थित करने और प्रदर्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने जैसी कई जिम्मेदारियां आजिंक्य शिंदे ने निभाई थीं।

    दीपके ने बातचीत के दौरान कहा कि आंदोलन के समय वह मुख्य रूप से आजिंक्य शिंदे, सौरभ दास और आशुतोष रांका को ही जानते थे। उन्होंने यह भी बताया कि मंच पर मौजूद लोग अपनी भूमिका निभा रहे थे, जबकि आंदोलन की वास्तविक व्यवस्थाओं और संगठनात्मक काम में शिंदे की बड़ी भागीदारी थी।

    दीपके के मुताबिक जंतर-मंतर पहुंचने के बाद वॉलेंटियर्स की एक बड़ी टीम तैयार हुई। बाद में यही टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी। दीपके ने इस टीम को तैयार करने में आजिंक्य शिंदे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

    बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि आजिंक्य शिंदे दीपके को सोने तक नहीं देते। इससे संगठन के भीतर शिंदे की सक्रियता और दीपके के साथ उनके लगातार संपर्क का संकेत मिलता है।

    आजिंक्य शिंदे इससे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। महाराष्ट्र में उन्होंने पार्टी की युवा इकाई में जिम्मेदारी संभाली थी और गोवा के सह प्रभारी के तौर पर भी काम किया था। सीजेपी के गठन के बाद उन्हें संगठन में राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    संगठन में उनकी भूमिका मुख्य रूप से विस्तार, टीम निर्माण और रणनीतिक काम से जुड़ी बताई गई है। वीडियो कॉल में सामने आई बातचीत के अनुसार, वह अभिजीत दीपके के साथ सलाह-मशविरा भी करते हैं और संगठन की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में सक्रिय रहते हैं।

    आजिंक्य शिंदे की कार्यशैली अपेक्षाकृत पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाली बताई गई है। यही वजह है कि संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बावजूद सार्वजनिक स्तर पर उनकी पहचान अभिजीत दीपके और दूसरे प्रमुख चेहरों की तुलना में कम दिखाई देती है। वीडियो कॉल में हुई बातचीत ने सीजेपी के भीतर उनकी भूमिका और दीपके के साथ उनके संबंधों को लेकर नई जानकारी सामने रखी है।भिजीत दीपके के मेंटर कौन? वीडियो कॉल में सामने आया आजिंक्य शिंदे का नाम, जंतर-मंतर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

    संक्षिप्त सार: वीडियो कॉल में आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके ने आजिंक्य शिंदे को दीपके का मेंटर बताया और जंतर-मंतर आंदोलन में उनकी भूमिका का जिक्र किया।

    Keywords: Abhijeet, Ajinkya, CJP, Protest, Mentor

    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके के राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों में किसकी अहम भूमिका रहती है, इसे लेकर एक वीडियो कॉल के दौरान जानकारी सामने आई है। बातचीत में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आजिंक्य शिंदे का नाम दीपके के मेंटर के तौर पर लिया। दीपके ने भी रांका की बात पर सहमति जताई।

    वीडियो कॉल में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और आजिंक्य शिंदे संगठन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते नजर आए। इसी दौरान रांका ने बताया कि आजिंक्य शिंदे, सीजेपी के गठन से पहले से ही दीपके के मेंटर रहे हैं और अब संगठन के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

    बातचीत में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया गया। आशुतोष रांका ने बताया कि इस आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से चलाने में आजिंक्य शिंदे की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके मुताबिक मंच पर दूसरे लोग नजर आते थे, लेकिन आंदोलन के पीछे की व्यवस्थाओं को संभालने और उसे आगे बढ़ाने का काम शिंदे कर रहे थे।

    अभिजीत दीपके ने भी इस बात का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वॉलेंटियर्स की टीम तैयार करने, भीड़ को व्यवस्थित करने और प्रदर्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने जैसी कई जिम्मेदारियां आजिंक्य शिंदे ने निभाई थीं।

    दीपके ने बातचीत के दौरान कहा कि आंदोलन के समय वह मुख्य रूप से आजिंक्य शिंदे, सौरभ दास और आशुतोष रांका को ही जानते थे। उन्होंने यह भी बताया कि मंच पर मौजूद लोग अपनी भूमिका निभा रहे थे, जबकि आंदोलन की वास्तविक व्यवस्थाओं और संगठनात्मक काम में शिंदे की बड़ी भागीदारी थी।

    दीपके के मुताबिक जंतर-मंतर पहुंचने के बाद वॉलेंटियर्स की एक बड़ी टीम तैयार हुई। बाद में यही टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी। दीपके ने इस टीम को तैयार करने में आजिंक्य शिंदे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

    बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि आजिंक्य शिंदे दीपके को सोने तक नहीं देते। इससे संगठन के भीतर शिंदे की सक्रियता और दीपके के साथ उनके लगातार संपर्क का संकेत मिलता है।

    आजिंक्य शिंदे इससे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। महाराष्ट्र में उन्होंने पार्टी की युवा इकाई में जिम्मेदारी संभाली थी और गोवा के सह प्रभारी के तौर पर भी काम किया था। सीजेपी के गठन के बाद उन्हें संगठन में राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    संगठन में उनकी भूमिका मुख्य रूप से विस्तार, टीम निर्माण और रणनीतिक काम से जुड़ी बताई गई है। वीडियो कॉल में सामने आई बातचीत के अनुसार, वह अभिजीत दीपके के साथ सलाह-मशविरा भी करते हैं और संगठन की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में सक्रिय रहते हैं।

    आजिंक्य शिंदे की कार्यशैली अपेक्षाकृत पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाली बताई गई है। यही वजह है कि संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बावजूद सार्वजनिक स्तर पर उनकी पहचान अभिजीत दीपके और दूसरे प्रमुख चेहरों की तुलना में कम दिखाई देती है। वीडियो कॉल में हुई बातचीत ने सीजेपी के भीतर उनकी भूमिका और दीपके के साथ उनके संबंधों को लेकर नई जानकारी सामने रखी है।भिजीत दीपके के मेंटर कौन? वीडियो कॉल में सामने आया आजिंक्य शिंदे का नाम, जंतर-मंतर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

    संक्षिप्त सार: वीडियो कॉल में आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके ने आजिंक्य शिंदे को दीपके का मेंटर बताया और जंतर-मंतर आंदोलन में उनकी भूमिका का जिक्र किया।

    Keywords: Abhijeet, Ajinkya, CJP, Protest, Mentor

    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके के राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों में किसकी अहम भूमिका रहती है, इसे लेकर एक वीडियो कॉल के दौरान जानकारी सामने आई है। बातचीत में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आजिंक्य शिंदे का नाम दीपके के मेंटर के तौर पर लिया। दीपके ने भी रांका की बात पर सहमति जताई।

    वीडियो कॉल में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और आजिंक्य शिंदे संगठन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते नजर आए। इसी दौरान रांका ने बताया कि आजिंक्य शिंदे, सीजेपी के गठन से पहले से ही दीपके के मेंटर रहे हैं और अब संगठन के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

    बातचीत में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया गया। आशुतोष रांका ने बताया कि इस आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से चलाने में आजिंक्य शिंदे की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके मुताबिक मंच पर दूसरे लोग नजर आते थे, लेकिन आंदोलन के पीछे की व्यवस्थाओं को संभालने और उसे आगे बढ़ाने का काम शिंदे कर रहे थे।

    अभिजीत दीपके ने भी इस बात का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वॉलेंटियर्स की टीम तैयार करने, भीड़ को व्यवस्थित करने और प्रदर्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने जैसी कई जिम्मेदारियां आजिंक्य शिंदे ने निभाई थीं।

    दीपके ने बातचीत के दौरान कहा कि आंदोलन के समय वह मुख्य रूप से आजिंक्य शिंदे, सौरभ दास और आशुतोष रांका को ही जानते थे। उन्होंने यह भी बताया कि मंच पर मौजूद लोग अपनी भूमिका निभा रहे थे, जबकि आंदोलन की वास्तविक व्यवस्थाओं और संगठनात्मक काम में शिंदे की बड़ी भागीदारी थी।

    दीपके के मुताबिक जंतर-मंतर पहुंचने के बाद वॉलेंटियर्स की एक बड़ी टीम तैयार हुई। बाद में यही टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी। दीपके ने इस टीम को तैयार करने में आजिंक्य शिंदे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

    बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि आजिंक्य शिंदे दीपके को सोने तक नहीं देते। इससे संगठन के भीतर शिंदे की सक्रियता और दीपके के साथ उनके लगातार संपर्क का संकेत मिलता है।

    आजिंक्य शिंदे इससे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। महाराष्ट्र में उन्होंने पार्टी की युवा इकाई में जिम्मेदारी संभाली थी और गोवा के सह प्रभारी के तौर पर भी काम किया था। सीजेपी के गठन के बाद उन्हें संगठन में राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    संगठन में उनकी भूमिका मुख्य रूप से विस्तार, टीम निर्माण और रणनीतिक काम से जुड़ी बताई गई है। वीडियो कॉल में सामने आई बातचीत के अनुसार, वह अभिजीत दीपके के साथ सलाह-मशविरा भी करते हैं और संगठन की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में सक्रिय रहते हैं।

    आजिंक्य शिंदे की कार्यशैली अपेक्षाकृत पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाली बताई गई है। यही वजह है कि संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बावजूद सार्वजनिक स्तर पर उनकी पहचान अभिजीत दीपके और दूसरे प्रमुख चेहरों की तुलना में कम दिखाई देती है। वीडियो कॉल में हुई बातचीत ने सीजेपी के भीतर उनकी भूमिका और दीपके के साथ उनके संबंधों को लेकर नई जानकारी सामने रखी है।

  • सीजेपी प्रदर्शन में एआई से महिला की फोटो से छेड़छाड़ का आरोप, चार नामों के साथ एफआईआर दर्ज

    सीजेपी प्रदर्शन में एआई से महिला की फोटो से छेड़छाड़ का आरोप, चार नामों के साथ एफआईआर दर्ज

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान एक महिला की निजी तस्वीर के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसकी निजी तस्वीर को एआई और फेस-स्वैप टूल की मदद से बदलकर फर्जी तस्वीर तैयार की गई और बाद में उसका इस्तेमाल प्रदर्शन से जुड़े पोस्टर और बैनर में किया गया।

    महिला ने साइबर पुलिस थाने में दी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने उसकी तस्वीर का उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया। उसके मुताबिक, मूल तस्वीर में डिजिटल तरीके से बदलाव कर उसे आपत्तिजनक और गलत रूप दिया गया। महिला का कहना है कि इस तस्वीर का इस्तेमाल उसकी सामाजिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।

    शिकायत के अनुसार, कथित तौर पर तैयार की गई फर्जी तस्वीर के बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर जंतर-मंतर पर लगाए गए। महिला ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उसके खिलाफ अमर्यादित नारे भी लगाए गए। उसने कहा कि उसकी निजी तस्वीर को सार्वजनिक प्रदर्शन में इस तरह इस्तेमाल किए जाने से उसकी गरिमा प्रभावित हुई और उसे सामाजिक स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा।

    महिला ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान वीडियो बनाए गए और बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। शिकायत में विशेष रूप से इंस्टाग्राम के माध्यम से वीडियो वायरल किए जाने का उल्लेख है। महिला के अनुसार, तस्वीर और वीडियो के प्रसार से उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा तथा निजी जीवन से जुड़ी सामग्री उसकी सहमति के बिना सार्वजनिक हुई।

    इस मामले में एफआईआर में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के नाम दर्ज किए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन चारों को एफआईआर में आरोपी नहीं बनाया गया है। एफआईआर में नाम दर्ज होने और आरोपी बनाए जाने की स्थिति अलग-अलग होती है, इसलिए मामले में उनकी भूमिका जांच के दौरान स्पष्ट होगी।

    महिला ने अपनी शिकायत में यह भी स्पष्ट किया है कि उसका सीजेपी या जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। उसका आरोप है कि इसके बावजूद उसकी तस्वीर को बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। उसने कहा कि तस्वीर में डिजिटल छेड़छाड़ कर उसे ऐसे तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे उसकी व्यक्तिगत गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।

    मामले में अब पुलिस द्वारा प्रदर्शन से संबंधित पोस्टर, बैनर, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच की जा सकती है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि महिला की मूल तस्वीर कहां से प्राप्त की गई, उसमें बदलाव किस माध्यम से किया गया और तैयार की गई सामग्री को प्रदर्शन तक कैसे पहुंचाया गया।

    इसके अलावा सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो और तस्वीरों की भी पड़ताल की जा सकती है। डिजिटल सामग्री तैयार करने, उसे सार्वजनिक करने और प्रदर्शन में इस्तेमाल करने वालों की भूमिका जांच का हिस्सा हो सकती है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    महिला ने पूरे घटनाक्रम को अपनी निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि या जिम्मेदारी तय होना पुलिस जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।