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  • CJP समर्थन के बदले पैसे लेने के आरोपों पर भड़कीं उर्फी जावेद, बोलीं- एक रुपया साबित करो, अकाउंट डिलीट कर दूंगी

    CJP समर्थन के बदले पैसे लेने के आरोपों पर भड़कीं उर्फी जावेद, बोलीं- एक रुपया साबित करो, अकाउंट डिलीट कर दूंगी

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और अभिनेत्री उर्फी जावेद एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने Cockroach Janta Party (CJP) का समर्थन करने के बदले एक लाख रुपये लिए थे। इन आरोपों पर उर्फी ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है और पूरे मामले को पूरी तरह निराधार बताते हुए आरोप लगाने वालों को खुली चुनौती दी है।

    हाल ही में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने अभियान के समर्थन के लिए कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और चर्चित चेहरों को भुगतान किया था। इसी दावे में उर्फी जावेद का नाम भी शामिल किया गया और आरोप लगाया गया कि उन्हें पार्टी का समर्थन करने के बदले एक लाख रुपये मिले थे। यह दावा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

    इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उर्फी जावेद ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया पर संबंधित खबर का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए पहले आश्चर्य व्यक्त किया और फिर वीडियो जारी कर आरोपों का विस्तार से जवाब दिया। उर्फी ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं और उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

    उर्फी ने आरोप लगाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके बारे में गलत जानकारी फैलाई गई हो। उन्होंने दावा किया कि पहले भी उनके खिलाफ कई तरह की भ्रामक और असत्य बातें सार्वजनिक की जा चुकी हैं। उर्फी के अनुसार इस तरह के आरोप उनकी छवि खराब करने की कोशिश हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनके पेशे और सोशल मीडिया से होने वाली आय को समझता है तो वह ऐसे आरोपों पर आसानी से विश्वास नहीं करेगा। उर्फी ने तंज भरे अंदाज में कहा कि बिना किसी कारण केवल एक लाख रुपये के लिए किसी संगठन का समर्थन करने का आरोप वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उनका कहना था कि ऐसे दावे तथ्यों के बजाय केवल अफवाहों पर आधारित हैं।

    उर्फी जावेद ने यह भी दावा किया कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम से आर्थिक नुकसान हुआ है। उनके अनुसार CJP का समर्थन करने के बाद कई ब्रांड्स ने उनके साथ व्यावसायिक साझेदारी समाप्त कर दी, जिससे उन्हें वित्तीय हानि उठानी पड़ी। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं मिला, बल्कि इसके विपरीत उनके काम और कमाई पर असर पड़ा है।

    इस मामले में उर्फी ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी भी आरोप को प्रकाशित करने से पहले उसके समर्थन में ठोस प्रमाण होना चाहिए। उन्होंने बिना पर्याप्त साक्ष्यों के केवल दावों के आधार पर खबरें प्रकाशित करने की प्रवृत्ति पर भी आपत्ति जताई।

    उर्फी ने अंत में आरोप लगाने वालों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई यह साबित कर दे कि उन्होंने CJP का समर्थन करने के बदले एक रुपया भी लिया है, तो वह उसी दिन अपना इंस्टाग्राम अकाउंट स्थायी रूप से बंद कर देंगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया उनके करियर और आय का प्रमुख माध्यम है, लेकिन यदि आरोप सही साबित होते हैं तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के अपना अकाउंट हटाने के लिए तैयार हैं। फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।

  • अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की

    अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एक आवेदन प्रस्तुत किया गया है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर फैजान अंसारी ने राष्ट्रीय राजधानी पहुंचकर अभिजीत दीपके के विरुद्ध प्राथमिक दर्ज करने और उन्हें हिरासत में लेने की मांग उठाई है। शिकायत आवेदन में कई संगीन आरोप लगाए गए हैं, यद्यपि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं हुआ है।

    शिकायतकर्ता फैजान अंसारी ने दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों को सौंपे पत्र में कहा कि उन पर अभिजीत दीपके के समर्थकों द्वारा दो अलग-अलग मौकों पर हमला किया गया। उनके अनुसार पहली घटना पुणे में और दूसरी औरंगाबाद में घटित हुई, जिनके संदर्भ में स्थानीय थानों में पूर्व में ही सूचना दी जा चुकी है। उन्होंने इन घटनाओं से जुड़े साक्ष्य होने का दावा करते हुए दिल्ली पुलिस से त्वरित वैधानिक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

    आवेदन में अभिजीत दीपके पर कई अन्य गंभीर आक्षेप भी मढ़े गए हैं। इसमें उन्हें पाकिस्तान का एजेंट बताने के साथ-साथ उमर खालिद का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है। इसके अतिरिक्त यह दावा भी किया गया है कि विगत आंदोलनों में कुछ नामचीन हस्तियों को धनराशि देकर आमंत्रित किया गया था। हालांकि, किसी भी प्रशासनिक या न्यायिक संस्था ने इन आरोपों का समर्थन नहीं किया है और न ही अभिजीत दीपके की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान आया है।

    फैजान अंसारी ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे विशेष रूप से मुंबई से दिल्ली केवल इस आवेदन को सौंपने आए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि समय पर उचित कार्रवाई न होने से स्थिति बिगड़ सकती है। मध्य प्रदेश समेत देशभर के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस पूरे घटनाक्रम की चर्चाएं तेज हो गई हैं, लेकिन यह पूरी तरह से एकपक्षीय आरोपों पर आधारित मामला है।

    यह विवाद ऐसे वक्त सामने आया है जब सीजेपी और अभिजीत दीपके पूर्व में आयोजित आंदोलनों के कारण सार्वजनिक रूप से चर्चा का केंद्र रहे हैं। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उनके संगठन की भूमिका पर बात हुई थी। फिलहाल दिल्ली पुलिस को प्राप्त शिकायत की समीक्षा की जा रही है और प्राथमिक जांच के पश्चात ही अगली विधिक प्रक्रिया तय होगी। जांच पूर्ण होने तक इन दावों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

  • PM केयर्स फंड पर उठे सवालों के बीच CJP का पलटवार, RTI शिकायतों को बताया राजनीतिक एजेंडा

    PM केयर्स फंड पर उठे सवालों के बीच CJP का पलटवार, RTI शिकायतों को बताया राजनीतिक एजेंडा


    नई दिल्ली । कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) की फंडिंग और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके के परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग को लेकर दायर शिकायतों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पार्टी ने इन शिकायतों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए तीखा पलटवार किया है। पार्टी की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने कहा कि यदि पारदर्शिता और जवाबदेही की बात की जा रही है तो केवल एक संगठन या व्यक्ति को निशाना बनाने के बजाय सभी मामलों की समान रूप से जांच होनी चाहिए। उन्होंने इस दौरान पीएम केयर्स फंड का भी उल्लेख किया और उस पर जांच की मांग उठाते हुए तंज भरी टिप्पणी की कि “पीएम माफ कर देंगे, चिंता मत करो।”

    पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने 1 अगस्त को भारत निर्वाचन आयोग, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और महाराष्ट्र सरकार सहित कई सरकारी संस्थाओं को शिकायत भेजी। शिकायत में उन्होंने CJP की फंडिंग के स्रोत, पार्टी की कानूनी स्थिति और संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके की आर्थिक स्थिति की जांच कराने की मांग की। शिकायत में यह भी कहा गया कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

    अमित तिवारी ने अपनी शिकायत में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा घोषित एक करोड़ रुपये के लीगल डिफेंस फंड का भी उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि इस फंड पर लागू कर नियमों की समीक्षा की जाए और आवश्यकता होने पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाए जाने के पहलू की भी जांच की जाए। शिकायत में विभिन्न सरकारी एजेंसियों से पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल करने का अनुरोध किया गया है।

    इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी निजी व्यक्ति की शिक्षा, पारिवारिक खर्च या व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। उनके अनुसार इस तरह की शिकायतें तथ्यों से अधिक राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित दिखाई देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना ही उद्देश्य है तो सभी संस्थाओं और फंडों पर समान मानदंड लागू होने चाहिए।

    पार्टी ने अपने आधिकारिक रुख में कहा कि उसकी फंडिंग और कानूनी स्थिति को लेकर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और उन्हें राजनीतिक एजेंडे के तहत उछाला जा रहा है। CJP का कहना है कि वह कानून के दायरे में काम कर रही है और यदि किसी सक्षम एजेंसी द्वारा कोई वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है तो पार्टी पूरा सहयोग करेगी। साथ ही पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनिंदा संगठनों और व्यक्तियों को निशाना बनाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।

    फिलहाल इस पूरे मामले में भारत निर्वाचन आयोग, सीबीआईसी, महाराष्ट्र सरकार या अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायतों पर जांच शुरू हुई है या नहीं, इस संबंध में भी अभी तक कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में अब निगाहें संबंधित एजेंसियों के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि मामले में किसी प्रकार की जांच शुरू होती है तो उसके निष्कर्षों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली नाबालिग की माफी के बाद कंगना रनौत ने माता-पिता से की बच्चों को वैचारिक प्रभाव से बचाने की अपील

    पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली नाबालिग की माफी के बाद कंगना रनौत ने माता-पिता से की बच्चों को वैचारिक प्रभाव से बचाने की अपील

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में माफी मांगने वाली 15 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़ा विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया देते हुए अभिभावकों से अपने बच्चों के मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किशोर उम्र के बच्चों को गलत संगत और ऐसे वैचारिक प्रभावों से बचाने की आवश्यकता है, जो उन्हें भड़काऊ या अनुचित व्यवहार की ओर ले जा सकते हैं।

    कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि संबंधित किशोरी स्वयं यह स्वीकार कर रही है कि वह पहले कभी प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई पोस्ट या टिप्पणी नहीं करती थी, लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों के कहने पर उसने आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के सामाजिक और वैचारिक परिवेश पर ध्यान दें तथा उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए सही दिशा प्रदान करें। उन्होंने अपने संदेश में कुछ वैचारिक समूहों की आलोचना करते हुए समाज से आत्ममंथन की भी अपील की।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में एक नाबालिग लड़की प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करती दिखाई दी। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और इसके संबंध में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हुई।

    मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना क्षेत्र में एक महिला की शिकायत पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक और सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया। बाद में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मामला दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया, जहां संबंधित तथ्यों और शिकायत की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

    विवाद के बीच 15 वर्षीय लड़की ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उसने कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस गई थी, जहां कुछ लोगों ने उसे आपत्तिजनक नारे और शब्द दोहराने के लिए उकसाया। उसने स्वीकार किया कि उससे गंभीर गलती हुई और वह अपने व्यवहार को लेकर बेहद शर्मिंदा है। किशोरी ने देशवासियों से क्षमा मांगते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में वह ऐसी गलती दोबारा नहीं करेगी।

    इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ-साथ उनकी दिवंगत मां के लिए भी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई बच्चा गुमराह होकर ऐसी गलती करता है तो उसे सही मार्ग दिखाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने ऐसे बच्चों को माफ करने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने की बात कही।

    दूसरी ओर, विरोध प्रदर्शन से जुड़े संगठन के प्रतिनिधियों ने इस मामले में दर्ज शिकायत पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अपमानजनक भाषा के मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा रही है, तो सभी पक्षों के लिए समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और संबंधित एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी कर रही हैं। इस बीच, नाबालिग की माफी, कंगना रनौत की प्रतिक्रिया और प्रधानमंत्री की अपील ने इस मुद्दे को सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना दिया है।

  • अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके संगठन से जुड़े वित्तीय एवं कानूनी मामलों को लेकर नया विवाद सामने आया है। गुजरात के सूरत निवासी एक RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और संबंधित कर अधिकारियों से कई बिंदुओं पर विस्तृत जांच कराने की मांग की है। शिकायत में अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति, पार्टी की वैधानिक स्थिति तथा हाल ही में घोषित लीगल डिफेंस फंड के वित्तीय और कर संबंधी पहलुओं की निष्पक्ष जांच का आग्रह किया गया है।

    शिकायत में कहा गया है कि अभिजीत दिपके के पिता महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी रहे हैं। ऐसे में यह जानने की आवश्यकता बताई गई है कि परिवार की आय और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विदेश में उच्च शिक्षा के लिए होने वाले खर्च का प्रबंध किस प्रकार किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि इस संबंध में सभी वित्तीय स्रोत वैध हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, जबकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

    विवाद केवल व्यक्तिगत संपत्ति तक सीमित नहीं है। शिकायत में कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी स्थिति पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि संगठन राजनीतिक दल की तरह सक्रिय दिखाई देता है, इसलिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या उसका पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक दल के रूप में हुआ है या नहीं। शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि संगठन की वैधानिक स्थिति की आधिकारिक जांच कर आवश्यक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर धन जुटा रहा है या बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहा है, तो उसके कानूनी स्वरूप और नियामकीय अनुपालन की पुष्टि होना आवश्यक है। उनका तर्क है कि इससे राजनीतिक वित्तपोषण की पारदर्शिता बनी रहती है और आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होता है।

    इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू लीगल डिफेंस फंड से भी जुड़ा है। यह फंड उन लोगों की कानूनी सहायता के लिए घोषित किया गया था जो विभिन्न मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। इसी संदर्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा चर्चा का विषय बनी। अब शिकायतकर्ता ने इस राशि पर लागू होने वाले कर नियमों और GST अनुपालन की भी जांच कराने की मांग की है।

    कर अधिकारियों को भेजे गए पत्र में यह आग्रह किया गया है कि संबंधित राशि पर वस्तु एवं सेवा कर के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं, तथा यदि लागू होते हैं तो निर्धारित नियमों का पालन किया गया है या नहीं, इसकी जांच की जाए। शिकायतकर्ता का मानना है कि बड़ी वित्तीय घोषणाओं के मामलों में कर संबंधी सभी औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    फिलहाल संबंधित संस्थाओं की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। यदि चुनाव आयोग और कर विभाग इस मामले में जांच प्रारंभ करते हैं, तो उसके निष्कर्षों से संगठन की वैधानिक स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और कर अनुपालन से जुड़े कई प्रश्नों पर स्पष्टता आ सकती है। वहीं, मामले में लगाए गए सभी आरोप अभी जांच और आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • विदेशी फंडिंग और डिजिटल कैंपेन की जांच तेज, जंतर मंतर प्रदर्शन मामले में पांच कंपनियां एजेंसियों के निशाने पर

    विदेशी फंडिंग और डिजिटल कैंपेन की जांच तेज, जंतर मंतर प्रदर्शन मामले में पांच कंपनियां एजेंसियों के निशाने पर


    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए विवादित प्रदर्शन को लेकर जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले में कथित विदेशी फंडिंग डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया नेटवर्क की गहन पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती जांच के आधार पर पांच से अधिक कंपनियां एजेंसियों के रडार पर बताई जा रही हैं। इनमें कुछ ऐसी कंपनियां भी शामिल हैं जो डिजिटल मार्केटिंग सोशल मीडिया कैंपेन और इंफ्लूएंसर मैनेजमेंट से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों के लिए धन किस माध्यम से जुटाया गया और उसका इस्तेमाल किस प्रकार किया गया।

    सूत्रों के अनुसार बीते तीन दिनों के दौरान दिल्ली गुरुग्राम मुंबई और बेंगलुरु स्थित कई कार्यालयों और परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज डिजिटल कैंपेन का रिकॉर्ड सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के साथ हुए समझौते और अन्य महत्वपूर्ण कागजात की जांच की गई। एजेंसियों ने कई डिजिटल उपकरण भी अपने कब्जे में लिए हैं जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सके।

    जांच में कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी सामने आने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन लेनदेन के माध्यम से सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार के प्रचार अभियान चलाए गए हो सकते हैं। इसी कारण कई सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर भी जांच के दायरे में आए हैं। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या किसी प्रकार के भुगतान के बदले सोशल मीडिया पर विशेष अभियान संचालित किए गए थे। जांच पूरी होने और पर्याप्त दस्तावेजी तथा डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

    जांच एजेंसियों ने सोशल मीडिया गतिविधियों की भी विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में करीब दो हजार संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान किए जाने का दावा किया गया है। इनमें से कई अकाउंट विदेशों से संचालित बताए जा रहे हैं जबकि लगभग सात सौ अकाउंट भारत से सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। जांच का फोकस इन खातों के संचालन भुगतान और डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने पर भी है ताकि पूरे डिजिटल नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट की जा सके।

    इसी बीच पश्चिम बंगाल एसटीएफ की जांच में गिरफ्तार जैश ए मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी हामिम मंडल से जुड़े मामले ने भी जांच को नया आयाम दिया है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि उसने कथित रूप से जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर तोड़फोड़ करने की साजिश रची थी। साथ ही कुछ पुलिस अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बनाने की योजना होने की बात सामने आई है। हालांकि इन दावों की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।

    इसके अलावा कई यूट्यूबर और ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर भी जांच एजेंसियों की निगरानी में हैं। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि प्रदर्शन और उससे जुड़े डिजिटल प्रचार अभियान में उनकी भूमिका क्या थी और क्या किसी प्रकार का आर्थिक लेनदेन या संगठित अभियान चलाया गया था। फिलहाल एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक मामले की विस्तृत पड़ताल जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय नेटवर्क और डिजिटल गतिविधियों में किसकी क्या भूमिका रही।

  • CJP के वायरल जश्न वीडियो पर सोनम वांगचुक की नसीहत, सफलता के साथ जिम्मेदारी निभाने की दी सलाह

    CJP के वायरल जश्न वीडियो पर सोनम वांगचुक की नसीहत, सफलता के साथ जिम्मेदारी निभाने की दी सलाह

    नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कुछ सदस्यों द्वारा मनाए गए जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो को लेकर शुरू हुई बहस के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी उपलब्धि या सफलता का उत्सव मनाना स्वाभाविक है, लेकिन उसके साथ विनम्रता, जिम्मेदारी और गरिमा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक होता है। उन्होंने समर्थकों से आग्रह किया कि किसी भी आंदोलन की सफलता को ऐसे तरीके से मनाया जाए जिससे उसके मूल उद्देश्य और सामाजिक संदेश की गंभीरता बनी रहे।

    वांगचुक का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब सोशल मीडिया पर CJP के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के जश्न मनाने वाले वीडियो व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। वायरल वीडियो में पार्टी से जुड़े कुछ लोग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खुशी जाहिर करते और उत्सव मनाते दिखाई दे रहे हैं। इन दृश्यों को लेकर अलग-अलग वर्गों में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और इसे लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई है।

    सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी भी संघर्ष का उद्देश्य केवल लक्ष्य प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि उस पूरी प्रक्रिया में सामाजिक मूल्यों और नैतिक जिम्मेदारियों को भी बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार जीत तभी सार्थक मानी जाएगी जब उसमें विनम्रता और दूसरों के प्रति सम्मान भी दिखाई दे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी भी जन आंदोलन की विश्वसनीयता उसके समर्थकों के आचरण से भी तय होती है।

    हाल के दिनों में वांगचुक CJP के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। उन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। बाद में उन्हें स्वास्थ्य कारणों से पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने 23 जुलाई को अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त की थी। यह निर्णय उस आश्वासन के बाद लिया गया, जिसमें प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने और NEET पेपर लीक प्रकरण के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित सहायता देने की बात कही गई थी।

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामने आए जश्न के वीडियो पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे आंदोलन की सफलता पर युवाओं की स्वाभाविक खुशी बताया, जबकि कई अन्य लोगों ने इसे अनुचित समय पर किया गया उत्सव करार दिया। आलोचकों का कहना था कि आंदोलन की पृष्ठभूमि छात्रों की समस्याओं और परीक्षा प्रणाली से जुड़े गंभीर मुद्दों पर आधारित थी, इसलिए जश्न का स्वरूप अधिक संयमित होना चाहिए था।

    इस बीच CJP की ओर से भी पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी गई। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि वायरल वीडियो में युवाओं का उत्साह और उनकी अभिव्यक्ति का तरीका दिखाई देता है। उनके अनुसार नई पीढ़ी अपने विचार अलग-अलग माध्यमों से व्यक्त करती है और लोकतांत्रिक आंदोलनों में भागीदारी के तरीके समय के साथ बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि युवा सड़क पर बैठकर, सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से या अन्य रचनात्मक तरीकों से भी अपनी बात समाज के सामने रख सकते हैं।

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शुरू हुई इस बहस ने आंदोलन की शैली, सार्वजनिक व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर आंदोलन की उपलब्धियों पर समर्थकों में उत्साह दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कई लोग यह भी मान रहे हैं कि किसी भी लोकतांत्रिक सफलता का उत्सव संवेदनशीलता, संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाया जाना चाहिए।

  • बिहार-असम में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज केस होंगे वापस, सरकार से वार्ता के बाद CJP का बड़ा अपडेट

    बिहार-असम में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज केस होंगे वापस, सरकार से वार्ता के बाद CJP का बड़ा अपडेट


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद बताया कि बिहार और असम समेत विभिन्न राज्यों में आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने देर रात सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार की ओर से इस संबंध में सकारात्मक आश्वासन मिला है।

    सौरभ दास ने बताया कि पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचे। करीब डेढ़ से दो घंटे तक चली बैठक में सरकार की ओर से किए गए वादों के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा हुई।

    उन्होंने कहा कि पुलिस प्रतिनिधि अपने साथ बिहार सरकार के गृह विभाग की एक प्रेस विज्ञप्ति भी लाए थे, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी और भविष्य में भी उनके विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    सौरभ दास के मुताबिक बैठक में उन अन्य राज्यों पर भी चर्चा हुई, जहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जिन राज्यों को लेकर चिंता जताई गई है, वहां भी जल्द इसी तरह की अधिसूचनाएं जारी की जाएंगी। यदि किसी राज्य में मामलों की वापसी नहीं होती है, तो पार्टी संबंधित सरकार से सीधे संपर्क कर समाधान सुनिश्चित करेगी। शेष राज्यों की सूची भी सरकार को उपलब्ध कराई जाएगी।

    उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत से ही पार्टी हर प्रदर्शनकारी के साथ मजबूती से खड़ी रही है और आगे भी किसी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। इस दौरान उन्होंने रत्ना, आशु, अभिजीत और वैष्णवी समेत टीम के अन्य सदस्यों के योगदान का भी उल्लेख किया।

    वहीं, रत्ना सिंह ने कानूनी सहायता को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की मदद करने वाले वकीलों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया है। फिलहाल औपचारिक लीगल टीम का गठन नहीं हुआ है, लेकिन इसे जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने यह सुनिश्चित किया है कि वकीलों के प्रयास व्यर्थ न जाएं और इस संबंध में लिखित आश्वासन भी प्राप्त हो चुका है।

  • CJP ने सरकार को दिया नया अल्टीमेटम, प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई रोकने और रिहाई की दोहराई मांग

    CJP ने सरकार को दिया नया अल्टीमेटम, प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई रोकने और रिहाई की दोहराई मांग

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से एक बार फिर अपनी मांगें दोहराई हैं। पार्टी ने कहा है कि जिन आश्वासनों के आधार पर विरोध प्रदर्शन स्थगित किए गए थे, उनका समयबद्ध पालन किया जाना चाहिए। संगठन ने विशेष रूप से छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई रोकने और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

    पार्टी के अनुसार उसे अलग-अलग राज्यों से ऐसी रिपोर्टें प्राप्त हो रही हैं जिनमें प्रदर्शन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है। CJP ने विशेष रूप से असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने की खबरों पर गंभीर चिंता है। संगठन का कहना है कि यदि ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो संबंधित मामलों पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

    CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने बयान में कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा तथा उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने की मांग पहले भी उठाई गई थी। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय सरकार की ओर से मिले आश्वासनों पर विश्वास करते हुए लिया गया था। ऐसे में अब उन आश्वासनों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

    पार्टी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि देश के किसी भी हिस्से में शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना नागरिकों का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

    CJP ने यह भी कहा कि उसकी कानूनी टीम हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। पार्टी का दावा है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को न्यायिक प्रक्रिया में हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। संगठन ने प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखने की भी अपील की है।

    अपने बयान में CJP ने केंद्रीय नेतृत्व से पूर्व में दिए गए आश्वासनों का सम्मान करने का आग्रह किया है। पार्टी का कहना है कि सरकार को 28 जुलाई तक इस संबंध में लिखित रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि प्रदर्शनकारियों और छात्रों के बीच उत्पन्न अनिश्चितता समाप्त हो सके। संगठन का मानना है कि स्पष्ट और औपचारिक आश्वासन से तनाव कम करने में मदद मिलेगी और संवाद का वातावरण मजबूत होगा।

    फिलहाल सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार का रुख और संभावित कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ता है तो स्थिति सामान्य होने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि मांगों और सरकारी रुख के बीच मतभेद बने रहते हैं तो यह विषय राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

  • जंतर-मंतर आंदोलन के बाद होटल पार्टी का दावा चर्चा में, वायरल वीडियो पर राजनीतिक बहस तेज

    जंतर-मंतर आंदोलन के बाद होटल पार्टी का दावा चर्चा में, वायरल वीडियो पर राजनीतिक बहस तेज


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोगों को एक होटल में नाच-गाने और जश्न के माहौल में देखा जा रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद संगठन की गतिविधियों, आंदोलन के दौरान हुए खर्च और उसकी फंडिंग को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान तथा घटना की परिस्थितियों पर कोई आधिकारिक पुष्टि भी सामने नहीं आई है।

    यह वीडियो सोशल मीडिया पर वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी द्वारा साझा किए जाने के बाद अधिक चर्चा में आया। वीडियो साझा करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में CJP की नेतृत्व टीम दिल्ली के एक होटल में जश्न मना रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि राजधानी में कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान यात्रा, भोजन और ठहरने जैसी व्यवस्थाओं का खर्च किसने वहन किया और इसके लिए धन किस स्रोत से उपलब्ध कराया गया।

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने आंदोलन के बाद जश्न मनाने को सामान्य बताया, जबकि अन्य ने प्रदर्शन से जुड़े आर्थिक पहलुओं पर पारदर्शिता की मांग उठाई। हालांकि, अब तक किसी सक्षम सरकारी एजेंसी या संबंधित संगठन की ओर से वीडियो में किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है।

    कॉकरोच जनता पार्टी पिछले कुछ समय से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन के कारण चर्चा में रही है। जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। इस आंदोलन को समय के साथ विभिन्न सामाजिक समूहों और कुछ प्रमुख हस्तियों का भी समर्थन मिला, जिससे इसकी राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा हुई।

    हाल के घटनाक्रम में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन से जुड़े समर्थकों ने इसे अपनी मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। विरोध प्रदर्शन के समाप्त होने के बाद विभिन्न स्थानों पर समर्थकों के बीच खुशी का माहौल भी देखने को मिला। इसी बीच सामने आए इस कथित होटल वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को नई राजनीतिक दिशा दे दी है और आंदोलन की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    उधर, शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पदभार ग्रहण करते ही वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मंत्रालय के विभिन्न लंबित मामलों के अलावा राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े विषयों पर भी अधिकारियों के साथ चर्चा की गई। संबंधित संस्थानों के अधिकारियों से वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना पर विस्तृत जानकारी ली गई।

    फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक जांच या निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में वीडियो से जुड़े दावों, उसमें दिखाई गई गतिविधियों और लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। आने वाले दिनों में यदि संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया या किसी जांच एजेंसी की रिपोर्ट सामने आती है, तो पूरे मामले की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी। तब तक यह मामला मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों और उन पर उठ रहे सार्वजनिक व राजनीतिक सवालों के केंद्र में बना हुआ है।