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  • CJP प्रदर्शन के बाद तेज हुई राजनीतिक हलचल, घायल छात्रों से मिलने अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, राहुल गांधी ने भी जाना हाल

    CJP प्रदर्शन के बाद तेज हुई राजनीतिक हलचल, घायल छात्रों से मिलने अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, राहुल गांधी ने भी जाना हाल


    नई दिल्ली ।
    CJP के संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों से मिलने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा मंगलवार को दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती छात्रों का हालचाल जाना और उनके उपचार में लगे चिकित्सकों से भी बातचीत की। इससे पहले प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की जा चुकी थी। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात की और उनका हाल जाना।

    संसद मार्च के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की घटनाएं सामने आईं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस के अनुसार झड़प के दौरान कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। घटनास्थल के आसपास कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की भी सूचना मिली, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई।

    घटना के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। कांग्रेस ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि युवाओं की मांगों को सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांगा और कहा कि ऐसे मामलों पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।

    दूसरी ओर सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत की पहल की गई है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों को सुना था। इसके बाद अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात को सरकार की ओर से संवाद और स्थिति की समीक्षा के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि यह कदम घटना के बाद उठाया गया, जबकि शुरुआत में सरकार की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं थी।

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी परीक्षा से जुड़े विवादों और अनियमितताओं के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा जताया है। सरकार का कहना है कि युवाओं के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं विपक्ष लगातार इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद मार्च के बाद उत्पन्न स्थिति ने एक बार फिर छात्र आंदोलनों, लोकतांत्रिक विरोध और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सरकार और विपक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपने-अपने पक्ष को मजबूती से रख रहे हैं, जबकि घायल प्रदर्शनकारियों के उपचार और पूरे घटनाक्रम की जांच भी जारी है। आने वाले दिनों में इस विषय पर संसद और राजनीतिक मंचों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन पर बॉलीवुड की तीखी प्रतिक्रिया, लाठीचार्ज के बाद सोनू सूद, हुमा कुरैशी और अनुराग कश्यप समेत कई सितारों ने उठाए सवाल

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन पर बॉलीवुड की तीखी प्रतिक्रिया, लाठीचार्ज के बाद सोनू सूद, हुमा कुरैशी और अनुराग कश्यप समेत कई सितारों ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली । दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज को लेकर बॉलीवुड के कई कलाकारों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों के बाद अभिनेता, अभिनेत्री और फिल्म निर्माताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी राय साझा करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद, संयम और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। कई कलाकारों ने कहा कि युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और किसी भी विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालना अधिक उचित है।

    प्रदर्शन के बाद अभिनेता आयुष शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती केवल चुनावों तक सीमित नहीं होती, बल्कि नागरिकों की बात सुनने और उनकी चिंताओं को समझने में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि छात्रों सहित हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है। उनके अनुसार, यदि अंततः छात्रों की मांगों पर विचार किया जाना था तो शुरुआत से ही संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि अपनी मांग रखने के दौरान छात्रों को आंसू गैस और लाठीचार्ज जैसी परिस्थितियों का सामना करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

    अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने भी इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान सामने आई तस्वीरें लंबे समय तक लोगों की स्मृति में बनी रहेंगी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों को धैर्य, बातचीत और परस्पर विश्वास के जरिए सुलझाया जा सकता है। उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले छात्रों और नागरिकों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति को सम्मानपूर्वक सुनना आवश्यक है।

    अभिनेता सोनू सूद ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के छात्रों को कठोर कार्रवाई नहीं, बल्कि सहयोग और विश्वास की आवश्यकता है। वहीं अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं निकल सकता। उन्होंने युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संवाद की संस्कृति लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। उनके अनुसार, किसी भी आंदोलन का उद्देश्य सकारात्मक बदलाव होना चाहिए और सभी पक्षों को संयम बनाए रखना चाहिए।

    फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि कार्रवाई की प्रकृति और उसके प्रभाव पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने अपने संदेश में पुलिस की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक समाज में जवाबदेही और संवेदनशीलता दोनों का समान महत्व है।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार कर संसद की ओर बढ़ने लगे, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर झड़पें भी हुईं। दूसरी ओर प्रदर्शन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने का प्रयास किया जा रहा था और बल प्रयोग से बचा जा सकता था।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर लोकतांत्रिक विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है। राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के साथ-साथ फिल्म जगत की ओर से आई टिप्पणियों ने भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि छात्रों की मांगों और पूरे घटनाक्रम पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • दिल्ली में CJP प्रदर्शन के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव, कपिल सिब्बल का केंद्र पर तीखा हमला, पुलिस कार्रवाई और नड्डा के बयान पर उठाए सवाल

    दिल्ली में CJP प्रदर्शन के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव, कपिल सिब्बल का केंद्र पर तीखा हमला, पुलिस कार्रवाई और नड्डा के बयान पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प और उसके बाद की राजनीतिक प्रतिक्रिया ने राष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदर्शन के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की टिप्पणी को अहंकारपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के सामने रखी गई मांगों की लंबे समय तक अनदेखी की गई और संवाद के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।

    कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह दावा करना कि पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया, वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे लोगों की मांगें पहले से सार्वजनिक थीं और सरकार को उनकी पूरी जानकारी थी। उनके अनुसार यदि समय रहते सकारात्मक बातचीत की पहल की जाती तो हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते। उन्होंने सरकार पर संवेदनशील मुद्दों पर देर से प्रतिक्रिया देने और प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

    सिब्बल ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी आंदोलन का समाधान संवाद और विश्वास के जरिए निकाला जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की बात समय पर सुनी जाती तो टकराव की स्थिति से बचा जा सकता था। उन्होंने सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप व्यवहार करने और जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील भी की।

    इस बीच कांग्रेस ने भी पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, उससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित हुई है। पार्टी ने कहा कि युवाओं और आंदोलनकारियों के प्रति कठोर कार्रवाई किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित संकेत नहीं मानी जा सकती।

    प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी थी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों, वीडियो फुटेज और अन्य जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा। इस मुलाकात के बाद सरकार की ओर से संवाद की पहल की बात कही गई, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह पहल काफी देर से हुई और इससे पहले हालात अनावश्यक रूप से बिगड़ चुके थे। इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी लगातार जारी है।

    पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि लोकतांत्रिक आंदोलनों से जुड़े मामलों में सरकार और प्रशासन की भूमिका कैसी होनी चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में समय पर संवाद, पारदर्शिता और संयमित प्रशासनिक कार्रवाई से विवादों को बढ़ने से रोका जा सकता है। फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है, जबकि राजनीतिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने के संकेत नहीं दिख रहे हैं।

  • संसद मार्च पर बवाल के बीच सरकार की सक्रियता तेज, आरएमएल अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने घेरा

    संसद मार्च पर बवाल के बीच सरकार की सक्रियता तेज, आरएमएल अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने घेरा

    नई दिल्ली । संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और उसके बाद उपजे राजनीतिक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति पर सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राजधानी स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर उन प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना, जो प्रदर्शन के दौरान घायल हुए थे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती लोगों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उपचार कर रहे चिकित्सकों से भी पूरे घटनाक्रम तथा इलाज की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। इस मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब संसद मार्च को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है।

    संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान बड़ी संख्या में युवा राजधानी की सड़कों पर पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, वहीं ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। झड़प के दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे राजधानी के प्रमुख इलाकों में कुछ समय के लिए सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

    घटनाक्रम के बाद सरकार की ओर से लगातार संवाद स्थापित करने की कोशिशें भी देखने को मिलीं। जेपी नड्डा ने अस्पताल पहुंचने से पहले संगठन के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों और शिकायतों को भी सुना था। इसके बाद घायलों से सीधे मिलना सरकार की ओर से संवेदनशीलता दिखाने की पहल माना जा रहा है। अस्पताल में उन्होंने चिकित्सकों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी घायलों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं और उनके उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे।

    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस विषय पर संसद में चर्चा होनी चाहिए थी और सरकार को पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग उचित नहीं था और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया। विपक्ष ने यह भी कहा कि यदि संसद में ऐसे मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी तो लोकतांत्रिक विमर्श कमजोर होगा।

    वहीं सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करना आवश्यक था ताकि किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके। प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़े प्रभाव की भी समीक्षा की जा रही है। राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम का आकलन कर रही हैं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    संसद मार्च के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का भी प्रमुख विषय बन चुका है। एक ओर सरकार घायलों के उपचार और संवाद के जरिए स्थिति सामान्य करने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को संसद और जनता के बीच उठाकर जवाबदेही की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

  • CJP का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी, दिपके फिर धरने पर बैठे, घायल प्रदर्शनकारियों से मिलेंगे केजरीवाल

    CJP का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी, दिपके फिर धरने पर बैठे, घायल प्रदर्शनकारियों से मिलेंगे केजरीवाल


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का ‘संसद चलो’ आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन वापस नहीं लिया जाएगा और संसद तक मार्च का प्रयास जारी रहेगा। सोमवार को हुए हिंसक घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारी एक बार फिर जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल पर लौट आए।

    सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित यह प्रदर्शन नीट (NEET) पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया।

    दिपके बोले- आंदोलन जारी रहेगा
    सोमवार देर रात अभिजीत दिपके ने कहा कि आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारी फिर से संसद की ओर मार्च करेंगे और धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे। सोमवार को पुलिस द्वारा मंच हटाए जाने के बाद भी प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर पहुंच गए।

    सोमवार को हुआ था हिंसक टकराव
    दिल्ली पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर से संसद तक निकाला गया मार्च हिंसक हो गया था। पुलिस का दावा है कि इस दौरान 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। वहीं प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लाठीचार्ज किया और 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। कुछ पुलिस वाहनों के शीशे टूटने की भी घटनाएं सामने आईं।

    सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर
    सफदरजंग अस्पताल की ओर से मंगलवार सुबह जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है। हालांकि उनका ब्लड शुगर स्तर अभी भी कम है। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, सीरम पोटेशियम 3.2 mEq/L दर्ज किया गया है तथा एनीमिया और कम ल्यूकोसाइट काउंट की समस्या बनी हुई है।

    डॉक्टरों ने उन्हें ओआरएस और ओरल पोटेशियम दिया है, लेकिन चिकित्सकीय सलाह के बावजूद उन्होंने ड्रिप और ग्लूकोज लेने से इनकार किया है। लंबे अनशन के कारण डिहाइड्रेशन और कमजोरी बनी हुई है, इसलिए उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

    दिलजीत दोसांझ ने जताया समर्थन
    गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया के जरिए प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर विचार करने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए।

    RML अस्पताल जाएंगे अरविंद केजरीवाल
    आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि वह आंदोलन के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों से मिलने राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल जाएंगे। उन्होंने बताया कि इससे पहले सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना पर अपनी प्रतिक्रिया भी देंगे।

    दिल्ली पुलिस ने पांच राज्यों से मांगा सहयोग
    सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को पत्र भेजा है। पत्र में संसद सत्र के दौरान जंतर-मंतर पहुंचने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और आवश्यकता पड़ने पर राज्य की सीमा पर ही रोकने के लिए सहयोग मांगा गया है। पुलिस का कहना है कि संसद सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    धरना स्थल पर फिर जुटे प्रदर्शनकारी
    सोमवार शाम पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से हट गए थे और अभिजीत दिपके केरल हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए थे। हालांकि मंगलवार सुबह प्रदर्शनकारी फिर से निर्धारित धरना स्थल पर लौट आए। फिलहाल वहां करीब 100 प्रदर्शनकारी मौजूद बताए जा रहे हैं।

  • 'संसद चलो' मार्च में बवाल: 118 पुलिसकर्मी घायल, 70 प्रदर्शनकारी हिरासत में, 20 सरकारी वाहनों को नुकसान

    'संसद चलो' मार्च में बवाल: 118 पुलिसकर्मी घायल, 70 प्रदर्शनकारी हिरासत में, 20 सरकारी वाहनों को नुकसान


    नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान व्यापक हंगामा देखने को मिला। जंतर-मंतर, जनपथ और रायसीना रोड सहित कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। दिनभर तनावपूर्ण माहौल के बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाया, लेकिन देर रात वे दोबारा वहां पहुंच गए।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने प्रशासन की चेतावनियों की अनदेखी करते हुए लागू धारा 163 का उल्लंघन किया और हालात हिंसक हो गए।

    118 पुलिसकर्मी घायल, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़
    पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और सुरक्षा बलों पर पथराव किया। इस दौरान 15 से 20 सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा, जबकि जनपथ क्षेत्र में कुछ दुकानों में भी तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।

    हिंसा में स्पेशल सीपी, जॉइंट सीपी, एडिशनल सीपी, डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी स्तर के पांच से अधिक आईपीएस अधिकारियों सहित 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। घायलों में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। वहीं, झड़प के दौरान करीब 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना है।

    एक घायल पुलिस अधिकारी ने बताया कि जनपथ स्थित क्लैरिजेस होटल के पास तैनाती के दौरान अचानक भीड़ की ओर से पथराव शुरू हो गया। उनके अनुसार, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि पत्थरों की पहले से व्यवस्था की गई थी और प्रदर्शन समाप्त होने के बाद भीड़ ने अचानक हिंसक रूप ले लिया।

    70 प्रदर्शनकारी हिरासत में
    स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस ने करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस सूत्रों का दावा है कि हिरासत में लिए गए कई लोग छात्र नहीं हैं। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    अभिजीत दिपके ने समाप्त किया अनशन
    CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार को अपना ढाई दिन पुराना भूख हड़ताल समाप्त कर दिया। उन्होंने 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाए जाने के बाद अनशन शुरू किया था।

    जेपी नड्डा से दो दौर की बातचीत
    प्रदर्शन के बीच CJP प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से दो बार मुलाकात की। पहली बैठक सुबह करीब 11:50 बजे हुई, जिसमें नड्डा ने संगठन की मांगों की जानकारी लेकर लिखित ज्ञापन देने को कहा। इसके बाद दोपहर करीब 4 बजे प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। हालांकि, सरकारी सूत्रों के अनुसार बैठक में संगठन की तीनों प्रमुख मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने प्रतिनिधियों से आंदोलन समाप्त कर शांति बनाए रखने की अपील की।

    सरकार ने हालात पर रखी नजर
    दिनभर चले घटनाक्रम पर केंद्र सरकार लगातार नजर बनाए रही। गृह मंत्री अमित शाह वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में रहे। पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को निर्देश दिए गए कि स्थिति नियंत्रित करने के दौरान बल प्रयोग केवल अत्यंत आवश्यक होने पर और न्यूनतम स्तर पर ही किया जाए।

    आज भी जारी रहेगा प्रदर्शन
    सोमवार को लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बावजूद प्रदर्शनकारी देर रात फिर जंतर-मंतर पहुंच गए। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने घोषणा की कि मंगलवार को भी ‘संसद चलो’ मार्च जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी अपना धरना समाप्त नहीं करेंगे और संसद की ओर मार्च का प्रयास जारी रखेंगे।

  • CJP प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जेपी नड्डा की अपील, धरना समाप्त करने का अनुरोध; प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान

    CJP प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जेपी नड्डा की अपील, धरना समाप्त करने का अनुरोध; प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी CJP के धरना-प्रदर्शन के बीच सोमवार को सरकार और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक बातचीत का दौर शुरू हुआ। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने CJP के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सकारात्मक माहौल में चर्चा हुई है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील भी की।

    जेपी नड्डा ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव मिलने के बाद चर्चा शुरू हुई। उनके अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के साथ पहले मौखिक स्तर पर विस्तृत बातचीत हुई और बाद में उन्हें एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया। उन्होंने कहा कि सरकार संवाद के माध्यम से विषय को समझने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध किया।

    हालांकि, CJP की ओर से इस मुलाकात को लेकर अलग रुख सामने आया। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि बैठक में उनकी प्रमुख मांगों पर कोई स्पष्ट या ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के समक्ष रखीं। उनका कहना है कि संबंधित मुद्दों पर उचित स्तर पर चर्चा का भरोसा जरूर मिला है, लेकिन जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

    प्रदर्शनकारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी चिंताओं का उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि वह पिछले कई सप्ताह से इन मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहा है। ज्ञापन में विभिन्न मांगों के साथ परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।

    संगठन ने अपने ज्ञापन में कुछ अन्य मांगें भी सरकार के समक्ष रखी हैं। इनमें आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से संबंधित मुद्दों, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई तथा नीट-2026 पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिए जाने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से बल प्रयोग किया गया, जिसे रोकने की भी मांग की गई है।

    सरकार और आंदोलनकारियों के बीच शुरू हुआ यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब संसद का मानसून सत्र भी चल रहा है और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्ष लगातार इस विषय को संसद में उठा रहा है, जबकि सरकार बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के रुख में अंतर बना हुआ है। सरकार प्रदर्शन समाप्त करने की अपील कर रही है, जबकि आंदोलनकारी अपनी मांगों पर ठोस निर्णय आने तक धरना जारी रखने की बात कह रहे हैं। आने वाले दिनों में आगे की बातचीत और संभावित निर्णय पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल

    जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP के प्रदर्शन को सोमवार को महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी का समर्थन मिला। उन्होंने आंदोलन के समर्थन में सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अभियान अब केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की नई पीढ़ी भी इससे जुड़ रही है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष भी संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल होकर इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं।

    तुषार गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। उनके अनुसार यह अब केवल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक या CJP तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा इसमें भागीदारी कर रहे हैं। उन्होंने इसे नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी का उदाहरण बताते हुए कहा कि आंदोलन का स्वरूप लगातार व्यापक होता जा रहा है।

    उन्होंने अपने परिवार की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष संसद मार्च में शामिल हुए। उनके अनुसार दोनों ने परिवार का प्रतिनिधित्व करते हुए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध में भाग लिया। तुषार गांधी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग का हिस्सा बताया और कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी किसी भी जन आंदोलन को व्यापक स्वरूप देती है।

    तुषार गांधी ने अपने वक्तव्य में केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन के प्रति संवेदनशील रुख अपनाने के बजाय उसे नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का उल्लेख किया और कहा कि उस समय भी नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद जनभागीदारी के कारण आंदोलन जारी रहा था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और असहमति व्यक्त करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

    अपने वक्तव्य में तुषार गांधी ने अभिनेता आमिर खान और फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी की फिल्म “3 इडियट्स” का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें फिल्म पसंद आई थी, लेकिन उन्हें यह अच्छा नहीं लगा कि सोनम वांगचुक के संदर्भ में “इडियट” शब्द का उपयोग किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माताओं द्वारा यह स्पष्ट किया जाना उचित था कि फिल्म सीधे तौर पर सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित नहीं थी।

    दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। समर्थक इसे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का माध्यम बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक स्तर पर भी इसे लेकर अलग-अलग मत व्यक्त किए जा रहे हैं। तुषार गांधी के समर्थन और उनके परिवार की भागीदारी ने इस आंदोलन को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है।

    फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और इससे जुड़े घटनाक्रमों पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर बहस जारी रहने की संभावना है।

  • जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बढ़ा सियासी विवाद, CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की उठाई मांग

    जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बढ़ा सियासी विवाद, CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की उठाई मांग

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से जारी अनशन के बीच शनिवार को उस समय नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरनास्थल से हटाकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा दिया। लंबे समय से भोजन नहीं करने के कारण उनकी सेहत लगातार कमजोर हो रही थी। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद आंदोलन से जुड़े संगठनों और समर्थकों ने विरोध जताया, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग कर दी।

    सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका अनशन देश में पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन के समर्थन में चल रहा था। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी।

    शनिवार सुबह पुलिस ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए वांगचुक को धरनास्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक अनशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो रही थी और चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक थी। इससे पहले न्यायालय की ओर से भी उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता पर टिप्पणी की गई थी। पुलिस का कहना है कि यह कदम उनकी सुरक्षा और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया।

    वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध किया। कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

    इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजी दीपके ने घोषणा की कि वह स्वयं भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसकी आलोचना की। दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया और उनके साथ भी मारपीट हुई। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए लोगों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखने की अपील की।

    घटना के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े लोग अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध, प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य कारणों से यह कदम उठाना आवश्यक था, वहीं आंदोलन से जुड़े संगठन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हस्तक्षेप बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं जारी रहने की संभावना है, जबकि सभी की नजर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और आंदोलन की आगामी दिशा पर बनी हुई है।

  • जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को मिला बॉलीवुड का समर्थन, स्वरा भास्कर पहुंचीं धरना स्थल, आंदोलन में जताई एकजुटता

    जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को मिला बॉलीवुड का समर्थन, स्वरा भास्कर पहुंचीं धरना स्थल, आंदोलन में जताई एकजुटता


    नई दिल्ली ।
    नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। आंदोलन के 18वें दिन बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर प्रदर्शन स्थल पहुंचीं और सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने आंदोलन से जुड़े लोगों से भी बातचीत की और प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी एकजुटता दिखाई। वांगचुक की गिरती सेहत के बीच इस मुलाकात को आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

    जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन में शामिल होकर परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर अपनी आवाज उठा रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोग शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संबंधित मांगों पर सरकार से कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। लंबे समय से जारी इस अनशन के कारण वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है।

    प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं स्वरा भास्कर ने आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों से मुलाकात की और अपने समर्थन का संदेश साझा किया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। स्वरा ने आंदोलन से जुड़े लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह भविष्य की पीढ़ियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने का प्रयास है। उन्होंने सोनम वांगचुक के लंबे संघर्ष की प्रशंसा करते हुए उनके प्रति सम्मान और समर्थन व्यक्त किया।

    आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति प्रभावित हो रही है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी उनकी सेहत को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण उनके शरीर पर इसका असर दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है और संगठन अपनी मांगों पर सकारात्मक पहल की उम्मीद कर रहा है।

    सोनम वांगचुक के समर्थन में केवल स्वरा भास्कर ही नहीं बल्कि फिल्म और साहित्य जगत की कई अन्य हस्तियां भी सामने आई हैं। लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, फिल्मकार संजय काक सहित कई लोगों ने वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की है। इन हस्तियों ने आंदोलन से जुड़े पक्षों से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने और वांगचुक की भूख हड़ताल समाप्त कराने की अपील भी की है। इसके अलावा अभिनेता ओमी वैद्य ने भी वीडियो संदेश जारी कर लोगों से इस मुद्दे पर जागरूक होने और अपनी आवाज उठाने का आग्रह किया है।

    आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च निकालने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए आंदोलन से जुड़े लोग और समर्थक उनकी चिकित्सकीय निगरानी तथा जल्द समाधान की उम्मीद जता रहे हैं। यह आंदोलन अब सामाजिक, शैक्षणिक और सार्वजनिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।