Tag: Commonwealth Games 2026

  • PM मोदी के शब्दों से गदगद मीराबाई चानू, बोलीं- आने वाली प्रतियोगिताओं में और कड़ी मेहनत करने की मिलेगी प्रेरणा

    PM मोदी के शब्दों से गदगद मीराबाई चानू, बोलीं- आने वाली प्रतियोगिताओं में और कड़ी मेहनत करने की मिलेगी प्रेरणा


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाली भारतीय महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद उनका आभार जताया है। रविवार को प्रधानमंत्री आवास पर कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से खास मुलाकात हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनका हौसला बढ़ाया। मीराबाई चानू ने कहा कि प्रधानमंत्री के उत्साह बढ़ाने वाले शब्द उन्हें और अन्य खिलाड़ियों को आने वाली प्रतियोगिताओं में कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेंगे।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मीराबाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की यात्रा में प्रधानमंत्री का लगातार सहयोग और प्रोत्साहन काफी महत्वपूर्ण है। मीराबाई ने लिखा कि मुलाकात के दौरान हर पदक विजेता के लिए पीएम मोदी के उत्साह बढ़ाने वाले शब्द निश्चित तौर पर खिलाड़ियों को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए और बेहतर तैयारी करने की प्रेरणा देंगे।

    इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने मीराबाई के उस भावुक पल का भी जिक्र किया जब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद पोडियम पर आंसू बहाए थे। प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि वह उस समय इतनी भावुक क्यों हो गई थीं। पीएम मोदी ने मजाकिया और भावुक अंदाज में कहा कि उनके इतने आंसू निकल रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे हर आंसू की बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो।

    मीराबाई ने इसके जवाब में अपने संघर्ष की पूरी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह बेहद खुश और भावुक थीं। उनकी आंखों से आंसू इसलिए भी निकल आए क्योंकि पेरिस ओलंपिक में वह महज एक किलो के अंतर से पदक जीतने से चूक गई थीं। इसके बाद के चार वर्षों में उन्होंने कई तरह की चुनौतियों का सामना किया। चोटों ने उनकी तैयारी को प्रभावित किया और परिवार में भी कई परेशानियां चलती रहीं। इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपनी फिटनेस तथा प्रदर्शन पर काम करती रहीं।

    मीराबाई ने बताया कि जब वह कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम पर खड़ी थीं और भारत का राष्ट्रगान बजना शुरू हुआ तो वह खुद को रोक नहीं सकीं। उन्होंने कहा कि जब सामने देश का तिरंगा ऊपर उठता है और राष्ट्रगान बजता है तो भावनाएं अपने आप उमड़ पड़ती हैं। उनके लिए वह पल वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई ने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो भारतीय खेल जगत के लिए बेहद खास है। मीराबाई लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली वेटलिफ्टर बन गई हैं।

    मीराबाई की इस उपलब्धि के पीछे केवल उनकी ताकत और तकनीक ही नहीं बल्कि लंबे समय तक किया गया संघर्ष भी शामिल है। पेरिस ओलंपिक की निराशा, चोटों और निजी चुनौतियों के बाद उन्होंने जिस तरह वापसी की, वह युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। प्रधानमंत्री से मुलाकात और उनके प्रोत्साहन के बाद मीराबाई ने भी संकेत दिया कि उनका लक्ष्य यहीं खत्म नहीं हुआ है। आने वाली प्रतियोगिताओं में वह और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूरी मेहनत करेंगी और देश के लिए नए पदक जीतने की कोशिश जारी रखेंगी।

  • पोडियम पर क्यों रोई थीं मीराबाई चानू? PM मोदी ने पूछा सवाल, बोलीं- चार साल में बहुत कुछ सहा

    पोडियम पर क्यों रोई थीं मीराबाई चानू? PM मोदी ने पूछा सवाल, बोलीं- चार साल में बहुत कुछ सहा


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की भावुक तस्वीरें अब भी लोगों के जेहन में हैं। ग्लासगो में पोडियम पर खड़ी मीराबाई जब अपने गले में गोल्ड मेडल पहनकर भारत का राष्ट्रगान सुन रही थीं तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े थे। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर कॉमनवेल्थ गेम्स से पदक जीतकर लौटे भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने मीराबाई चानू के उसी भावुक पल का जिक्र करते हुए उनकी उपलब्धि और संघर्ष की जमकर सराहना की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीराबाई से पूछा कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह पोडियम पर इतनी भावुक क्यों हो गई थीं। पीएम ने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि उनके इतने आंसू बह रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे हर आंसू की बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो। प्रधानमंत्री की यह बात सुनकर मीराबाई ने भी अपने भावुक होने की वजह बताई और कहा कि उस दिन वह बेहद खुश और भावुक थीं। उन्होंने बताया कि पेरिस ओलंपिक में वह सिर्फ एक किलो के अंतर से पदक से चूक गई थीं और उस अनुभव ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया था।

    मीराबाई ने बताया कि एक खिलाड़ी के सफर में केवल मैदान पर प्रदर्शन करना ही चुनौती नहीं होता, बल्कि इसके साथ कई व्यक्तिगत और शारीरिक संघर्ष भी जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान उन्हें लगातार चोटों का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही परिवार में भी कई तरह की परेशानियां चल रही थीं। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और खुद को दोबारा मजबूत बनाकर कॉमनवेल्थ गेम्स में वापसी की।

    मीराबाई ने कहा कि जब वह पोडियम पर खड़ी थीं और भारत का राष्ट्रगान बजना शुरू हुआ, तो वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकीं। ऊपर लहराता भारतीय तिरंगा देखकर उनके आंसू अपने आप निकल आए। उनके लिए वह पल केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष, चोटों और निराशाओं के बाद देश के लिए सम्मान हासिल करने का क्षण था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू का प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद खास रहा। उन्होंने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर ऐसी उपलब्धि हासिल की, जो इससे पहले किसी महिला वेटलिफ्टर के नाम नहीं थी। उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस जीत ने एक बार फिर साबित किया कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद निरंतर मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति से दुनिया के बड़े मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।

    मीराबाई की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके सामने पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियां आईं। चोटों के कारण उन्हें अपनी फिटनेस और तैयारी पर लगातार काम करना पड़ा। पेरिस ओलंपिक में पदक से मामूली अंतर से चूकने के बाद उनके लिए वापसी आसान नहीं थी। लेकिन उन्होंने निराशा को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए फिर से स्वर्ण पदक हासिल किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों से मुलाकात के दौरान भारतीय दल के प्रदर्शन की भी सराहना की। ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 39 पदक जीते। इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने देश को गौरवान्वित किया और मीराबाई चानू की ऐतिहासिक हैट्रिक ने इस सफलता को और खास बना दिया। उनके पोडियम पर छलके आंसू उस संघर्ष की कहानी बयां कर रहे थे, जिसने उन्हें लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ चैंपियन बनाया।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में चमका भारत, स्वदेश लौटते ही खिलाड़ियों का भव्य अभिनंदन, अब एशियन गेम्स और वर्ल्ड कप पर नजर

    कॉमनवेल्थ गेम्स में चमका भारत, स्वदेश लौटते ही खिलाड़ियों का भव्य अभिनंदन, अब एशियन गेम्स और वर्ल्ड कप पर नजर


    नई दिल्ली । भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अपने बेहतरीन प्रदर्शन से पूरी दुनिया में खेल शक्ति के रूप में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। प्रतियोगिता से स्वदेश लौटने पर भारतीय खिलाड़ियों का दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत किया गया। ढोल नगाड़ों, फूल मालाओं और भारत माता के जयघोष के बीच खिलाड़ियों का अभिनंदन हुआ। बड़ी संख्या में खेल प्रेमी, परिवार के सदस्य और खेल अधिकारी खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने पहुंचे। खिलाड़ियों ने इस सम्मान को अपने जीवन का सबसे भावुक पल बताते हुए कहा कि देशवासियों का यह प्यार उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देगा।

    भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन इस बार सबसे अधिक चर्चा में रहा। बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के 96 वर्ष के इतिहास में पहली बार भारत ने मुक्केबाजी में सात स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और सभी सहयोगी संस्थाओं को देते हुए कहा कि भारतीय बॉक्सिंग अब वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना चुकी है और आने वाले वर्षों में भारत की चुनौती और मजबूत होगी।

    स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने एयरपोर्ट पर मिले भव्य स्वागत को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरे देश का है और उनकी सफलता में भारत सरकार, बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया तथा हरियाणा सरकार के सहयोग की बड़ी भूमिका रही है। साक्षी ने अपना स्वर्ण पदक देशवासियों को समर्पित करते हुए कहा कि भविष्य में भी उनका लक्ष्य भारत के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना रहेगा। उनके दादा सतपाल सिंह ने कहा कि परिवार को साक्षी पर गर्व है और युवाओं को मेहनत तथा आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। वहीं परिवार की सदस्य प्रिया ने कहा कि साक्षी की जीत पूरे परिवार के लिए गर्व और खुशी का अवसर है।

    भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने भी शानदार प्रदर्शन पर खुशी जताते हुए कहा कि सरकार, सेना और खेल संस्थाओं से मिले सहयोग ने खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि अब जल्द ही राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर शुरू होगा जहां एशियन गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी की जाएगी। वहीं अरुंधति चौधरी ने अपनी सफलता का श्रेय भारतीय सेना, आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट और कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस को दिया। उन्होंने कहा कि सैनिक होने के कारण देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उनका अगला लक्ष्य उज्बेकिस्तान में होने वाला विश्व कप है।

    पुरुषों के 90 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल ने कहा कि इस सफलता के पीछे कई महीनों की कठिन तैयारी और विशेष प्रशिक्षण शिविरों का योगदान है। उन्होंने बताया कि अब पूरा ध्यान एशियन गेम्स की तैयारी पर रहेगा। दूसरी ओर पैरा एथलीटों ने भी शानदार प्रदर्शन कर देश का मान बढ़ाया। पुरुष शॉट पुट एफ 57 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले सोमन राणा ने कहा कि यह पदक पूरे देश और भारतीय सेना को समर्पित है। महिला शॉट पुट एफ 57 वर्ग की स्वर्ण पदक विजेता शर्मिला धनखड़ ने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं के लिए आभार व्यक्त किया।

    पैरा एथलीट सुवर्णा राज ने विश्वास जताया कि भारत आने वाले वर्षों में खेलों की महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं पदक विजेता शुभम जुयाल ने कहा कि हर खिलाड़ी का सपना देश के लिए पदक जीतना होता है और अब चार वर्ष बाद भारत में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए तैयारी का नया दौर शुरू होगा। खिलाड़ियों के जोश और आत्मविश्वास ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय खेलों का भविष्य लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।

  • कॉमनवेल्थ में मध्य प्रदेश का दम, यामिनी और अजय बाबू ने जीते रजत पदक, सरकार देगी 25-25 लाख और नौकरी

    कॉमनवेल्थ में मध्य प्रदेश का दम, यामिनी और अजय बाबू ने जीते रजत पदक, सरकार देगी 25-25 लाख और नौकरी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का मान बढ़ाया है। जूडो में सागर जिले की किसान परिवार की बेटी यामिनी मौर्य और वेटलिफ्टिंग में अजय बाबू वल्लुरी ने रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर मध्य प्रदेश सरकार ने 25-25 लाख रुपए की पुरस्कार राशि और खेल नीति के तहत सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है और यह सफलता प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

    महिलाओं की 57 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में यामिनी मौर्य ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। स्वर्ण पदक के मुकाबले में उनका सामना इंग्लैंड की असेल्या टोपराक से हुआ, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद रजत पदक जीतकर उन्होंने मध्य प्रदेश और देश का नाम रोशन किया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यामिनी एक सामान्य किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता हरिओम मौर्य खेती करते हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटी के सपनों को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

    यामिनी के कोच दीपक रजक ने बताया कि उन्होंने पहली बार यामिनी की प्रतिभा को पुराने सदर स्कूल के मैदान में खेलते हुए पहचाना था। उन्होंने परिवार को समझाया कि बेटी में असाधारण क्षमता है और उसे नियमित प्रशिक्षण मिलना चाहिए। शुरुआत में आर्थिक स्थिति और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण परिवार थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन बाद में उन्होंने यामिनी का पूरा साथ दिया। लगातार मेहनत और अनुशासन के दम पर यामिनी ने राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाई और अब कॉमनवेल्थ गेम्स का रजत पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

    यामिनी के चाचा श्रीनाथ मौर्य ने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन आज उनकी उपलब्धि पूरे परिवार के संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यदि बेटियों को खेल और शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर मिले तो वे देश के लिए बड़ी सफलताएं हासिल कर सकती हैं। यामिनी की सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है।

    वहीं पुरुषों की 79 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में अजय बाबू वल्लुरी स्वर्ण पदक से केवल एक किलोग्राम दूर रह गए। मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले अजय के पिता भोपाल में पदस्थ हैं और इसी कारण वह लंबे समय से मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अजय ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 149 किलोग्राम वजन उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया, जबकि क्लीन एंड जर्क में 181 किलोग्राम वजन उठाकर गेम्स रिकॉर्ड की बराबरी भी की।

    हालांकि अंतिम प्रयास में मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने 184 किलोग्राम वजन उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बना दिया। उनका कुल स्कोर 331 किलोग्राम पहुंच गया और वे स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे। अजय बाबू महज एक किलोग्राम के अंतर से गोल्ड से चूक गए, लेकिन उनका प्रदर्शन पूरे प्रतियोगिता के दौरान बेहद शानदार रहा।

    दूसरी ओर महिलाओं की 10000 मीटर रेस वॉक में भारत की रवीना गायकवाड़ का अभियान निराशाजनक रहा। रेस वॉकिंग नियमों के उल्लंघन पर उन्हें तीन रेड कार्ड मिलने के बाद अयोग्य घोषित कर दिया गया और उनका सफर वहीं समाप्त हो गया।

    मध्य प्रदेश के दो खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यामिनी और अजय बाबू की सफलता प्रदेश के हजारों युवा खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें मेहनत के दम पर पूरा करने की प्रेरणा देती रहेगी।

  • कॉमनवेल्थ में रजत जीतकर दिखाई संवेदनशीलता, लवलीना ने असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित किया पदक

    कॉमनवेल्थ में रजत जीतकर दिखाई संवेदनशीलता, लवलीना ने असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित किया पदक


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने भले ही स्वर्ण पदक से मामूली दूरी पर रुककर रजत पदक जीता हो, लेकिन उन्होंने अपनी संवेदनशील सोच और मानवीय भावना से पूरे देश का दिल जीत लिया। ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन के बाद लवलीना ने अपना पहला कॉमनवेल्थ पदक असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित कर दिया। उनकी इस भावनात्मक पहल पर उनके पिता टिकेन बोरगोहेन ने गर्व जताते हुए कहा कि बेटी ने खेल के साथ-साथ इंसानियत का भी बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।

    महिलाओं की 75 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा के फाइनल में लवलीना का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की अमासो ग्रीनटी से हुआ, जिसमें उन्हें 1-4 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि हार के बावजूद उन्होंने अपने करियर का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। मुकाबले के बाद उन्होंने इस उपलब्धि को असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को समर्पित करने का फैसला किया, जिसने उनकी जीत को और भी खास बना दिया।

    लवलीना के पिता टिकेन बोरगोहेन ने बताया कि बेटी प्रतियोगिता के दौरान भी लगातार असम के बाढ़ पीड़ितों की चिंता कर रही थी। उन्होंने कहा कि लवलीना ने उनसे फोन पर बातचीत के दौरान आग्रह किया था कि जितना संभव हो सके बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद की जाए। इसी सोच के साथ लवलीना अकादमी की ओर से लगातार राहत कार्यों में सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेटी द्वारा अपना पदक बाढ़ पीड़ितों को समर्पित करना पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है।

    उन्होंने कहा कि फाइनल में हार का थोड़ा दुख जरूर है, लेकिन सिल्वर मेडल भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। यह लवलीना का कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला पदक है और पूरे परिवार के लिए बेहद खुशी का क्षण है। उनके अनुसार पदक जीतने से भी बड़ी बात यह है कि लवलीना ने अपनी सफलता को जरूरतमंद लोगों के नाम कर दिया।

    लवलीना की इस उपलब्धि पर देशभर से उन्हें बधाइयां मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उन्हें शानदार प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। टिकेन बोरगोहेन ने इन सभी नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को मिलने वाला यह सम्मान उनके मनोबल को और मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि मुकाबले के बाद लवलीना से उनकी संक्षिप्त बातचीत हुई थी और वह रजत पदक जीतने से संतुष्ट होने के साथ-साथ आगे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए भी उत्साहित हैं।

    मुकाबले के बाद लवलीना ने भी स्वीकार किया कि स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का थोड़ा अफसोस जरूर है, लेकिन भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन ने उनकी खुशी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक है, इसलिए इसकी अहमियत उनके लिए बेहद खास है। उनका मानना है कि यदि वह देश के लिए स्वर्ण जीत पातीं तो खुशी और अधिक होती, लेकिन अब उनका पूरा ध्यान आगामी एशियाई खेलों पर है, जहां वह स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरेंगी।

    लवलीना बोरगोहेन ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि एक सच्चा खिलाड़ी केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रहता बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाता है। खेल के मैदान में संघर्ष और मैदान के बाहर संवेदनशीलता का यह अनूठा उदाहरण उन्हें देश के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बनाता है। उनकी उपलब्धि और मानवीय सोच आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को भी समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देती है।

  • बॉक्सिंग में गोल्डन पंच, एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन… भारत ने 16 मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ में बदली तस्वीर

    बॉक्सिंग में गोल्डन पंच, एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन… भारत ने 16 मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ में बदली तस्वीर


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार दिनों में शामिल हो गया। भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही दिन में 16 पदक जीतकर न केवल देश का गौरव बढ़ाया बल्कि पदक तालिका में भी लंबी छलांग लगाते हुए चौथा स्थान हासिल कर लिया। मुक्केबाजी, एथलेटिक्स और पैरा स्पर्धाओं में मिले शानदार परिणामों ने यह साबित कर दिया कि भारत अब कॉमनवेल्थ खेलों में एक मजबूत खेल शक्ति बनकर उभर रहा है।

    भारत ने 10वें दिन के बाद कुल 39 पदक अपने नाम कर लिए हैं। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय दल ने पदक तालिका में छह स्थान की छलांग लगाई और चौथे पायदान पर पहुंच गया। मेजबान स्कॉटलैंड को पीछे छोड़ते हुए भारत ने शीर्ष चार देशों में अपनी जगह मजबूत कर ली है।

    पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा लगातार कायम है। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने अब तक 61 स्वर्ण, 38 रजत और 50 कांस्य सहित कुल 149 पदक जीतकर पहला स्थान बरकरार रखा है। इंग्लैंड 99 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है, जबकि कनाडा 57 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत के चौथे स्थान पर पहुंचने के बाद स्कॉटलैंड पांचवें स्थान पर खिसक गया है। नाइजीरिया, वेल्स और न्यूजीलैंड क्रमशः छठे, सातवें और आठवें स्थान पर बने हुए हैं।

    भारतीय सफलता की सबसे बड़ी कहानी मुक्केबाजी से निकली, जहां खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते। इनमें सात स्वर्ण पदक शामिल रहे। पुरुष वर्ग में अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने स्वर्ण जीतकर देश का मान बढ़ाया। महिला वर्ग में जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी और प्रीति ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी का दबदबा साबित किया। वहीं जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीतकर भारत के पदकों की संख्या बढ़ाई।

    एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल ने रजत पदक हासिल किया, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। पैरा एथलेटिक्स की शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। भारतीय सेना के इस पैरा खिलाड़ी ने अपने संघर्ष और मेहनत से देश को गौरवान्वित किया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में अहम योगदान दिया।

    भारत के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए भी सकारात्मक संदेश दिया है। मुक्केबाजी में लगातार स्वर्ण पदकों की बरसात, एथलेटिक्स में नए रिकॉर्ड और पैरा खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारतीय खेलों का भविष्य पहले से कहीं अधिक मजबूत नजर आ रहा है।

    अब भारतीय दल की नजर बाकी प्रतियोगिताओं पर है, जहां पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ियों ने यही लय बरकरार रखी तो भारत पदक तालिका में और ऊपर पहुंच सकता है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह ऐतिहासिक दिन भारतीय खेलों के स्वर्णिम अध्याय के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

  • गुलवीर की ऐतिहासिक दौड़ पर प्रधानमंत्री का सलाम, बॉक्सिंग और जूडो के पदक विजेताओं को भी दी बधाई

    गुलवीर की ऐतिहासिक दौड़ पर प्रधानमंत्री का सलाम, बॉक्सिंग और जूडो के पदक विजेताओं को भी दी बधाई


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। भारत ने एक ही दिन में सात स्वर्ण सहित कुल 16 पदक जीतकर अपनी खेल प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन किया। इस शानदार सफलता के बीच सबसे अधिक चर्चा लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह की रही, जिन्होंने पुरुषों की 10000 मीटर स्पर्धा में रजत और 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से बधाई देते हुए इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गुलवीर सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने कहा कि गुलवीर एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स की दो स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। साथ ही वह पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में भारत के लिए कॉमनवेल्थ पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट भी बने हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि पूरे भारतीय एथलेटिक्स के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।

    गुलवीर सिंह के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलीट अब विश्व स्तर की लंबी दूरी की प्रतियोगिताओं में भी मजबूती से अपनी पहचान बना रहे हैं। लगातार दो अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतना उनकी फिटनेस, धैर्य, रणनीति और मानसिक मजबूती का प्रमाण है। खेल विशेषज्ञ भी इसे भारतीय ट्रैक एंड फील्ड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने केवल एथलेटिक्स ही नहीं बल्कि भारतीय मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन की भी सराहना की। पुरुषों की 90 प्लस किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि पूरे टूर्नामेंट में उनके साहस, संघर्ष और दृढ़ संकल्प ने सभी को प्रभावित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि नरेंद्र भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

    पुरुषों की 80 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले अंकुश पंघाल की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान उनकी ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास शानदार रहा। उन्होंने कहा कि अंकुश की सफलता आने वाले समय में देश के हजारों युवा मुक्केबाजों को प्रेरित करेगी और भारतीय बॉक्सिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

    प्रधानमंत्री ने महिलाओं की 63 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली उन्नति शर्मा को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान उन्नति का समर्पण, अनुशासन और संघर्ष साफ दिखाई दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह भविष्य में भी इसी तरह लगातार बेहतर प्रदर्शन कर भारत को गौरवान्वित करती रहेंगी।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि देश अब केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है बल्कि एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, जूडो और अन्य स्पर्धाओं में भी लगातार अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। खिलाड़ियों की मेहनत, बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था और सरकार व खेल संस्थाओं के सहयोग का असर अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर साफ दिखाई देने लगा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से खिलाड़ियों को मिली बधाई उनके मनोबल को और मजबूत करेगी। अब भारतीय खिलाड़ियों की नजरें आगामी एशियाई खेलों और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं पर हैं, जहां वे इसी शानदार प्रदर्शन को दोहराकर देश के लिए और अधिक पदक जीतने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे।

  • भारतीय मुक्केबाजों का गोल्डन पंच, अंकुश पंघाल बोले- विश्वास नहीं खोया, इसलिए मिली जीत

    भारतीय मुक्केबाजों का गोल्डन पंच, अंकुश पंघाल बोले- विश्वास नहीं खोया, इसलिए मिली जीत


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय मुक्केबाजी के लिए यादगार साबित हुआ। भारतीय बॉक्सरों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक अपने नाम किए, जिनमें सात स्वर्ण पदक शामिल रहे। इस दमदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय मुक्केबाजी विश्व स्तर पर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। स्वर्ण पदक जीतने वाले मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा राज आत्मविश्वास को बताया और कहा कि कठिन समय में खुद पर भरोसा बनाए रखना ही उनकी जीत की सबसे बड़ी वजह बना।

    फाइनल मुकाबले के बाद अंकुश पंघाल ने कहा कि शुरुआत उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं रही। पहले बाउट में वह 0-5 से पीछे हो गए थे, जिससे उन पर काफी दबाव बन गया था। हालांकि उन्होंने घबराने के बजाय अपने खेल और खुद की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। यही आत्मविश्वास अंत तक उनके साथ रहा और आखिरकार उन्होंने मुकाबला पलटते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। अंकुश ने कहा कि परिवार और कोच का विश्वास हमेशा उनके साथ रहा और यही वजह है कि वह दबाव के बावजूद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके। उन्होंने अपना स्वर्ण पदक अपने परिवार और कोच को समर्पित किया तथा कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीतना है।

    महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। मुकाबले के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का थोड़ा अफसोस जरूर है लेकिन टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन ने उनकी खुशी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक है और इसलिए इसकी अहमियत उनके लिए बेहद खास है। लवलीना ने कहा कि अब वह एशियाई खेलों की तैयारी में पूरी ताकत झोंकेंगी और वहां स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करेंगी। उन्होंने अपना यह पदक असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को समर्पित करते हुए उनके जल्द सामान्य जीवन में लौटने की कामना भी की।

    पुरुषों की 90 प्लस किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र ने भी अपने प्रदर्शन का ईमानदारी से आकलन किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की लेकिन विरोधी मुक्केबाज की रणनीति उनके अनुमान से अलग थी। उनके अनुसार प्रतिद्वंद्वी लगातार मूवमेंट करता रहा जिससे उसे प्रभावी ढंग से पकड़ पाना मुश्किल साबित हुआ। नरेंद्र ने कहा कि वह अपनी कमियों पर काम करेंगे और एशियाई खेलों में इस हार की भरपाई करने का प्रयास करेंगे।

    स्वर्ण पदक विजेता सचिन सिवाच ने भी अपने फाइनल मुकाबले की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि शुरुआती दो राउंड में वह 2-3 से पीछे थे और उनके पास आखिरी राउंड में सब कुछ दांव पर लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसी सोच के साथ उन्होंने लगातार आक्रामक अंदाज अपनाया और विरोधी पर दबाव बनाया। सचिन ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि वह मुकाबला पलट सकते हैं और आखिरकार उनका विश्वास सही साबित हुआ। उनके अनुसार खेल में तकनीक जितनी जरूरी है उतना ही जरूरी मानसिक मजबूती और जीत का विश्वास भी होता है।

    भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उसने यह भी दिखाया कि मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत मानसिकता के दम पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। अब सभी खिलाड़ियों की नजरें एशियाई खेलों और आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर हैं, जहां वे इसी शानदार लय को बरकरार रखते हुए भारत के लिए और अधिक पदक जीतने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे।

  • देश सेवा से खेलों तक जीत का सफर, पैरा एथलीट सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ में रचा इतिहास

    देश सेवा से खेलों तक जीत का सफर, पैरा एथलीट सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ में रचा इतिहास


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए कई ऐतिहासिक पल देखने को मिले लेकिन शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पैरा एथलीट सोमन राणा की कहानी हर भारतीय के लिए प्रेरणा बन गई। भारतीय सेना में देश की सेवा करते हुए अपना दाहिना पैर गंवाने वाले सोमन ने हिम्मत नहीं हारी बल्कि कठिन परिस्थितियों को चुनौती देकर ऐसा मुकाम हासिल किया जिस पर पूरा देश गर्व कर रहा है। उनकी यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक नहीं बल्कि साहस, आत्मविश्वास और अदम्य इच्छाशक्ति की मिसाल है।

    ग्लासगो में आयोजित प्रतियोगिता में सोमन राणा ने 13.40 मीटर की दूरी तक गोला फेंकते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इससे पहले वह 2022 के एशियाई पैरा खेलों में रजत पदक जीत चुके थे, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर स्वर्णिम सफलता हासिल कर ली।

    सोमन राणा ने बताया कि उनका जीवन वर्ष 2006 में पूरी तरह बदल गया था। भारतीय सेना में ड्यूटी के दौरान हुए हादसे में उन्होंने अपना दाहिना पैर खो दिया। उस समय उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सामान्य जीवन में लौटने की थी। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को मामूली चोट लगती है तो चलना भी मुश्किल हो जाता है, लेकिन उनका पूरा पैर चला गया था। ऐसे में कृत्रिम पैर के सहारे दोबारा चलना और फिर खेलों में उतरना बेहद कठिन था।

    उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें यह समझ ही नहीं आता था कि कृत्रिम पैर के साथ सामान्य जीवन कैसे जिएंगे। लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को संभाला और नई परिस्थितियों के अनुरूप ढालना शुरू किया। वर्ष 2017 में उन्हें पैरालंपिक खेलों के बारे में जानकारी मिली और तभी उन्होंने तय कर लिया कि अब खेलों के जरिए देश के लिए कुछ बड़ा करना है।

    सोमन ने कहा कि दूसरे पैरा खिलाड़ियों को देखकर उनके भीतर नया आत्मविश्वास पैदा हुआ। उन्होंने महसूस किया कि कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिनके दोनों पैर नहीं हैं फिर भी वे दुनिया भर में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। यही सोच उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी। उन्होंने अपने डर को पीछे छोड़कर लगातार मेहनत की और हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने में जुट गए।

    उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय भारतीय सेना, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया, भारतीय खेल प्राधिकरण और अपने परिवार को दिया। सोमन ने कहा कि इन सभी का सहयोग और विश्वास ही उन्हें इस मुकाम तक लेकर आया। अगर परिवार और संस्थाओं का साथ नहीं मिलता तो शायद यह सपना पूरा करना इतना आसान नहीं होता।

    सोमन राणा की कहानी यह साबित करती है कि जीवन में मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपना एक पैर खोया लेकिन उसी जज्बे के साथ खेल के मैदान में उतरकर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। उनकी यह उपलब्धि लाखों युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मिला यह स्वर्ण पदक केवल सोमन राणा की व्यक्तिगत जीत नहीं बल्कि भारतीय सेना, खेल जगत और पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। उनका संघर्ष और सफलता आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि सच्ची जीत शरीर की ताकत से नहीं बल्कि मन की दृढ़ता और हौसले से हासिल होती है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की शानदार सफलता, राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने खिलाड़ियों को दी बधाई

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की शानदार सफलता, राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने खिलाड़ियों को दी बधाई


    नई दिल्ली। भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 16 पदक अपने नाम किए, जिनमें मुक्केबाजी से 10 पदक शामिल रहे। इस शानदार सफलता पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि उनके साहस, समर्पण और संघर्ष ने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह की ऐतिहासिक उपलब्धि की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज और इससे पहले 10000 मीटर में सिल्वर मेडल जीतकर गुलवीर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों स्पर्धाओं में भारत के लिए पहला पदक जीतना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

    राष्ट्रपति ने भारतीय मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन को भी देश के लिए गर्व का क्षण बताया। पुरुषों के 90 प्लस किलोग्राम वर्ग में सिल्वर जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि कठिन मुकाबलों में उनका जुझारूपन और आत्मविश्वास भविष्य की बड़ी सफलताओं का संकेत है। पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतने वाले अंकुश पंघाल को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि रिंग में उनके बेहतरीन प्रदर्शन ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और तिरंगे को सबसे ऊंचे स्थान पर पहुंचाया है।

    60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले सचिन सिवाच की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि फाइनल मुकाबले में उनका धैर्य, संयम और शानदार तकनीक उन्हें स्वर्ण पदक तक लेकर गई। उन्होंने विश्वास जताया कि सचिन भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करेंगे। महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन के सिल्वर मेडल को भी उन्होंने भारतीय खेलों की बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि उनका अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प हर खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है।

    उधर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन की खुलकर सराहना की। उन्होंने अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल को गोल्ड मेडल जीतने पर बधाई देते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन और अटूट जज्बे से देश का सम्मान बढ़ाया है। साथ ही लवलीना बोरगोहेन के सिल्वर मेडल को भी उन्होंने भारत के लिए गर्व का क्षण बताया।

    उपराष्ट्रपति ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतने वाली प्रिया घांगस और 51 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतने वाली साक्षी चौधरी को भी शुभकामनाएं दीं। इसके अलावा महिलाओं की 63 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली उन्नति शर्मा की उपलब्धि को भी उन्होंने देश के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों का संघर्ष, मेहनत और समर्पण पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह साबित कर रहा है कि देश खेलों के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की ओर से मिली सराहना ने खिलाड़ियों का मनोबल और बढ़ाया है। अब पूरे देश की नजरें आने वाले मुकाबलों पर हैं, जहां भारतीय खिलाड़ी पदकों की संख्या बढ़ाकर इतिहास रचने की तैयारी में जुटे हैं।