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  • CWG 2026: 10,000 मीटर में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की शुभकामनाएं

    CWG 2026: 10,000 मीटर में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत के स्टार लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए देश का गौरव बढ़ाने वाला खिलाड़ी बताया।

    राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा गया कि ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर गुलवीर सिंह ने भारत के लिए इतिहास रच दिया है। राष्ट्रपति ने कहा कि पूरे देश को उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है और भविष्य में भी वे इसी तरह देश के लिए नई सफलताएं हासिल करें, यही शुभकामना है।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गुलवीर सिंह को बधाई देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के सपूत और भारतीय सेना के नायब सूबेदार ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि गुलवीर की यह उपलब्धि कड़ी मेहनत, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

    ग्लासगो के स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में आयोजित फाइनल मुकाबले में गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर की दौड़ 27 मिनट 49.78 सेकंड में पूरी कर रजत पदक अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने 27 मिनट 48.93 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुलार्की 27 मिनट 50.28 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहे।

    उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा गांव में 1 जून 1998 को जन्मे गुलवीर सिंह भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। उनका एथलेटिक्स सफर गांव की पगडंडियों और खेतों में दौड़ लगाने से शुरू हुआ था, जब वे सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे थे। वर्ष 2018 में भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में शामिल होने के बाद उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ में लगातार शानदार प्रदर्शन किया और देश के शीर्ष धावकों में अपनी पहचान बनाई।

    गुलवीर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान 2023 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 मीटर दौड़ का कांस्य पदक जीतकर बनाई। इसके बाद 2022 एशियाई खेलों में 10,000 मीटर स्पर्धा में भी कांस्य पदक अपने नाम किया। वर्ष 2025 में दक्षिण कोरिया में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 5,000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर एशिया के शीर्ष लंबी दूरी के धावकों में अपनी मजबूत जगह बनाई।

    अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मिला यह ऐतिहासिक रजत पदक गुलवीर सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। उनकी इस सफलता ने न केवल भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दी है, बल्कि देश के युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक नई प्रेरणा प्रस्तुत की है।

  • भारत के दो और सिल्वर पर देश को गर्व, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, राजनाथ और मांडविया ने खिलाड़ियों की सराहना की

    भारत के दो और सिल्वर पर देश को गर्व, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, राजनाथ और मांडविया ने खिलाड़ियों की सराहना की


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत की झोली में दो अहम रजत पदक आए। महिला वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने 69 किलोग्राम वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता, जबकि लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ में इतिहास रचते हुए भारत को पहला कॉमनवेल्थ पदक दिलाया। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर देशभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं।

    उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दोनों खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरजिंदर कौर और गुलवीर सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि हरजिंदर का दृढ़ संकल्प और गुलवीर की ऐतिहासिक उपलब्धि देश के लाखों युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। उपराष्ट्रपति ने दोनों खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य और आगे भी इसी तरह सफलता हासिल करने की कामना की।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने गुलवीर सिंह को पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीतने और इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता गुलवीर की कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट संकल्प का परिणाम है, जिसने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

    हरजिंदर कौर के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए एक और पदक जीतना देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि हरजिंदर ने अपने समर्पण और संघर्ष से यह साबित कर दिया है कि भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

    केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि गुलवीर सिंह ने एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन कर भारत का सम्मान बढ़ाया है। वहीं हरजिंदर कौर ने दमदार खेल दिखाते हुए पोडियम पर जगह बनाकर भारतीय वेटलिफ्टिंग की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने दोनों खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण की सराहना की।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गुलवीर सिंह को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सपूत और भारतीय सेना के नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर प्रदेश और पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने इस उपलब्धि को कड़ी मेहनत, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया तथा गुलवीर के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हरजिंदर कौर ने कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। वहीं गुलवीर सिंह ने 10 हजार मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया और इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच दिया। दोनों खिलाड़ियों की सफलता ने भारत के पदक अभियान को नई मजबूती दी है और खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल बना दिया है।

  • ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं

    ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह और महिला वेटलिफ्टिंग के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की सराहना की है। दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों को भारत के खेल इतिहास में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गुलवीर सिंह को शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर दौड़ में भारत के लिए पहला पदक जीतना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि गुलवीर की यह सफलता देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी और आने वाले वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

    गुलवीर सिंह ने ग्लासगो में बारिश के बीच बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार दौड़ लगाई। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी भारतीय धावक पूरे मुकाबले में शीर्ष धावकों के साथ बने रहे और अंतिम लैप में जबरदस्त गति दिखाते हुए 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। इससे पहले उनके नाम एशियन गेम्स का कांस्य पदक और एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दो स्वर्ण पदक भी दर्ज हैं।

    वहीं महिला वेटलिफ्टिंग में हरजिंदर कौर ने भी भारत का गौरव बढ़ाया। उन्होंने 69 किलोग्राम वर्ग में कुल 227 किलोग्राम भार उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। स्नैच राउंड में हरजिंदर ने 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा की शार्लेट सिमोन्यू ने 240 किलोग्राम कुल वजन उठाकर जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नया फीबे हेमन ने 218 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

    हरजिंदर की उपलब्धि पर अमित शाह ने कहा कि वेटलिफ्टिंग में भारत का पदक जीतने का सिलसिला लगातार जारी है। उन्होंने लिखा कि यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष का परिणाम है तथा भविष्य में भी उनसे ऐसे ही उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग हमेशा से भारत के सबसे मजबूत खेलों में शामिल रही है और इस बार भी भारतीय खिलाड़ियों ने इस परंपरा को कायम रखा है। दूसरी ओर एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह का ऐतिहासिक पदक यह संकेत देता है कि अब भारत लंबी दूरी की दौड़ जैसी चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

    गुलवीर सिंह और हरजिंदर कौर की इन उपलब्धियों ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के अभियान को नई मजबूती दी है। दोनों खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से देशवासियों में उत्साह है और भारतीय दल से आगामी मुकाबलों में भी पदकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

  • भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व

    भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है और देश के पदकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वेटलिफ्टिंग में भारत को एक और बड़ी सफलता तब मिली जब तमिलनाडु के प्रतिभाशाली वेटलिफ्टर राजा मुथुपंडी ने पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम कर लिया। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी शानदार सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

    राजा मुथुपंडी ने पूरे मुकाबले के दौरान दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल 286 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 126 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 160 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में बेहद संतुलित और प्रभावशाली रहा। हालांकि स्वर्ण पदक मलेशिया के अजनील बिदिन ने जीता जिन्होंने रिकॉर्ड 299 किलोग्राम वजन उठाकर पहला स्थान हासिल किया लेकिन राजा मुथुपंडी का रजत पदक भारत के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए राजा मुथुपंडी को बधाई दी और कहा कि पुरुषों के 65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग वर्ग में रजत पदक जीतकर उन्होंने पूरे देश का सम्मान बढ़ाया है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को उनकी उपलब्धि पर गर्व है और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजा मुथुपंडी की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग से भारत के लिए एक और पदक आना बेहद गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राजा की सफलता से हर भारतीय खुश है और उनका प्रदर्शन देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा। प्रधानमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी प्रतियोगिताओं में और बड़ी सफलताओं की कामना भी की।

    राजा मुथुपंडी का यह पदक भारत के लिए बेहद अहम साबित हुआ क्योंकि इससे पहले भारतीय वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीत चुके थे जबकि स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। मीराबाई ने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया है।

    भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। शुरुआती दिनों में ही वेटलिफ्टिंग में मिले इन पदकों ने भारत की पदक तालिका को मजबूत किया है और अन्य खिलाड़ियों का भी मनोबल बढ़ाया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही लय बरकरार रही तो भारत इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर नतीजे हासिल कर सकता है।

    भारत के खिलाड़ियों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह साबित कर रहा है कि वर्षों की मेहनत आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाओं का सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने लगा है। राजा मुथुपंडी का रजत पदक भी इसी सफलता की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है जिसने देशवासियों को एक और गर्व का अवसर दिया है।

  • मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया

    मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को देशभर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उनकी शानदार उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि मीराबाई की मेहनत अनुशासन और संघर्ष करोड़ों भारतीयों विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मीराबाई चानू की विजयी तस्वीर साझा करते हुए उन्हें लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि मीराबाई ने अपनी अटूट मेहनत दृढ़ संकल्प और अनुशासन के दम पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा शान से लहराया है। राहुल ने लिखा कि हर भारतीय को उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व है और उनकी उपलब्धि देश के लाखों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मीराबाई चानू को बधाई देते हुए उनकी उपलब्धि को भारतीय खेल इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम को भी रजत पदक जीतने पर शुभकामनाएं दीं। खड़गे ने कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का सम्मान बढ़ाया है और उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतने का ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। इससे पहले वह 2018 के गोल्ड कोस्ट और 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वहीं 2014 के ग्लासगो खेलों में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई का यह स्वर्ण भारत का पहला गोल्ड मेडल भी बना। दूसरी ओर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता और भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    मीराबाई चानू पिछले कई वर्षों से भारतीय वेटलिफ्टिंग की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रही हैं। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरे स्वर्ण पदक के साथ अपने शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ दी है। उनकी इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण के दम पर भारतीय खिलाड़ी विश्व मंच पर लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर सकते हैं।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों का जलवा, प्रीति और जादूमणि की शानदार जीत, मीराबाई और ऋषिकांत ने दिलाए पदक

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों का जलवा, प्रीति और जादूमणि की शानदार जीत, मीराबाई और ऋषिकांत ने दिलाए पदक


    नई दिल्ली । महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में भारतीय मुक्केबाज प्रीति ने मलावी की डेबरा मिटेंजे के खिलाफ एकतरफा मुकाबला खेलते हुए रेफरी स्टॉप्स कॉन्टेस्ट के जरिए शानदार जीत हासिल की। मुकाबले की शुरुआत से ही प्रीति पूरी तरह हावी रहीं और उन्होंने अपने सटीक पंचों से प्रतिद्वंद्वी पर लगातार दबाव बनाए रखा। पहले राउंड में सभी जजों ने उन्हें बढ़त दी जबकि दूसरे राउंड में लगातार प्रभावी आक्रमण के कारण रेफरी को मुकाबला बीच में ही रोकना पड़ा। मुकाबले के दौरान डेबरा मिटेंजे दो बार नॉकडाउन भी हुईं। इस शानदार जीत के साथ प्रीति ने क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया जहां उनका मुकाबला नॉर्दर्न आयरलैंड की निकोल क्लाइड से होगा। यह मुकाबला सेमीफाइनल में पहुंचने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

    पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में भारत के जादूमणि सिंह ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के रहमान को 5-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल किया। पहले राउंड में मामूली बढ़त लेने के बाद उन्होंने दूसरे राउंड में पूरी तरह दबदबा कायम कर लिया और सभी जजों से पूरे अंक हासिल किए। इससे पहले जादूमणि ने शुरुआती मुकाबले में स्कॉटलैंड के एरॉन कुलेन को भी 5-0 से हराया था। लगातार दूसरी शानदार जीत के बाद उनसे पदक की उम्मीद और मजबूत हो गई है।

    बॉक्सिंग के अलावा वेटलिफ्टिंग में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम भार उठाते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया। मीराबाई ने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय दल का मनोबल और ऊंचा कर दिया।

    वहीं पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में ऋषिकांत सिंह चनंबम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाया जिसमें स्नैच में 121 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 143 किलोग्राम का सफल प्रयास शामिल रहा। उनके इस प्रदर्शन ने भारत के पदकों की संख्या में महत्वपूर्ण इजाफा किया।

    भारतीय खिलाड़ियों की इन लगातार सफलताओं से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देश की पदक उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं। अब सभी की नजरें बॉक्सिंग के आगामी मुकाबलों और अन्य स्पर्धाओं पर टिकी हैं जहां भारतीय खिलाड़ी एक बार फिर देश के लिए पदक जीतने के इरादे से उतरेंगे।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला लॉन बॉल्स टीम को पहला झटका, अब इंग्लैंड के खिलाफ करो या मरो की टक्कर

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला लॉन बॉल्स टीम को पहला झटका, अब इंग्लैंड के खिलाफ करो या मरो की टक्कर


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला लॉन बॉल्स टीम का लगातार जीत का सिलसिला आखिरकार थम गया। महिला पेयर्स स्पर्धा के ग्रुप-बी मुकाबले में भारत की रूपा रानी टिर्की और पिंकी सिंह को नामीबिया की अमांडा स्टीनकम्प और डायना विल्जोएन के खिलाफ बेहद रोमांचक मुकाबले में टाई-ब्रेक के बाद हार का सामना करना पड़ा। हालांकि यह हार भारतीय टीम के अभियान का अंत नहीं है। ग्रुप की स्थिति ऐसी बनी हुई है कि भारत के पास अब भी नॉकआउट चरण में पहुंचने का सुनहरा मौका है।

    भारतीय जोड़ी ने मुकाबले की शुरुआत शानदार अंदाज में की और पहले ही एंड से अपना दबदबा कायम कर लिया। रूपा रानी टिर्की की सटीक गेंदबाजी और पिंकी सिंह की बेहतरीन रणनीति के दम पर भारत ने शुरुआती दो एंड में पांच अंक जुटाकर 5-0 की मजबूत बढ़त बना ली। दोनों खिलाड़ियों के तालमेल ने नामीबिया की टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा और ऐसा लग रहा था कि भारत आसानी से पहला सेट अपने नाम कर लेगा।

    लेकिन तीसरे एंड से मुकाबले की तस्वीर बदलने लगी। नामीबिया ने धीरे-धीरे वापसी की और लगातार अंक बटोरते हुए भारतीय बढ़त को कम कर दिया। अमांडा स्टीनकम्प और डायना विल्जोएन ने शानदार खेल दिखाते हुए पहले स्कोर 5-4 किया और फिर पांचवें एंड में तीन अंक हासिल कर पहला सेट 7-5 से जीत लिया। भारतीय टीम शुरुआती बढ़त का फायदा बरकरार नहीं रख सकी और नामीबिया ने मैच में वापसी कर ली।

    पहला सेट गंवाने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने दूसरे सेट में जबरदस्त जवाब दिया। रूपा और पिंकी ने आक्रामक खेल दिखाते हुए शुरुआत से ही मुकाबले पर नियंत्रण बना लिया। भारतीय जोड़ी ने लगातार अंक जुटाकर 7-0 की बढ़त बनाई और नामीबिया को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। पिंकी सिंह के शानदार शॉट्स और रूपा की सटीक गेंदों की बदौलत भारत ने दूसरा सेट 10-1 से अपने नाम कर मुकाबले को निर्णायक टाई-ब्रेक तक पहुंचा दिया।

    टाई-ब्रेक में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। हर गेंद के साथ रोमांच बढ़ता गया और मुकाबला अंतिम क्षणों तक बराबरी का बना रहा। भारत को जीत के लिए आखिरी गेंद पर सटीक निशाना लगाने की जरूरत थी, लेकिन पिंकी सिंह की अंतिम कोशिश लक्ष्य से थोड़ा आगे निकल गई। इसका फायदा उठाते हुए नामीबिया ने टाई-ब्रेक 3-0 से जीत लिया और मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    हालांकि हार के बावजूद भारतीय टीम के लिए राहत की खबर भी आई। ग्रुप-बी के दूसरे मुकाबले में इंग्लैंड को दक्षिण अफ्रीका के हाथों टाई-ब्रेक में हार का सामना करना पड़ा। इस परिणाम से भारत की नॉकआउट दौर में पहुंचने की उम्मीद बरकरार है। अब भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाला अंतिम ग्रुप मुकाबला दोनों टीमों के लिए निर्णायक साबित होगा। इस मुकाबले में जीत दर्ज करने वाली टीम अगले चरण में जगह बनाएगी।

    अब भारतीय महिला लॉन बॉल्स टीम के सामने करो या मरो की चुनौती है। रूपा रानी टिर्की और पिंकी सिंह से उम्मीद होगी कि वे इस हार को पीछे छोड़ते हुए निर्णायक मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें और भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स के नॉकआउट चरण तक पहुंचाएं।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले नीरज का दमदार संदेश, कहा- विदेशी खिलाड़ियों से अब नहीं घबराते भारतीय

    कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले नीरज का दमदार संदेश, कहा- विदेशी खिलाड़ियों से अब नहीं घबराते भारतीय


    नई दिल्ली । भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले भारतीय खिलाड़ियों के बढ़ते आत्मविश्वास को देश के खेलों के लिए सबसे बड़ा बदलाव बताया है। ग्लासगो पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत में नीरज ने कहा कि अब भारतीय खिलाड़ी विदेशी एथलीटों से डरते नहीं हैं, बल्कि पूरी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ मुकाबला करते हैं। उनका मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय खेलों की तस्वीर बदली है और इसका सबसे बड़ा कारण खिलाड़ियों का मानसिक रूप से मजबूत होना है।

    नीरज ने कहा कि पहले भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विदेशी खिलाड़ियों को खुद से बेहतर मान लेते थे। इससे प्रदर्शन पर भी असर पड़ता था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आज भारतीय एथलीट कड़ी मेहनत, आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर तैयारी के दम पर दुनिया के किसी भी खिलाड़ी को चुनौती देने का माद्दा रखते हैं। यही आत्मविश्वास अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बन रहा है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी तैयारियों को लेकर नीरज ने कहा कि ग्लासगो की ठंडी हवाएं और मौसम निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन ये परिस्थितियां सभी खिलाड़ियों के लिए समान हैं। ऐसे में मौसम को बहाना बनाने के बजाय मानसिक रूप से मजबूत रहना ज्यादा जरूरी है। उनका कहना है कि किसी भी कठिन परिस्थिति में यह सोचना चाहिए कि उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे किया जाए।

    उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में उनका लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं होता, बल्कि अपनी तकनीक और रणनीति को पूरी तरह लागू करना होता है। यदि खिलाड़ी मैदान पर अपना शत-प्रतिशत दे देता है तो परिणाम अपने आप बेहतर आते हैं। नीरज ने कहा कि वह हर बार भारत की जर्सी पहनकर मैदान में उतरते हैं तो वह प्रतियोगिता उनके लिए खास बन जाती है और इस बार भी उनका प्रयास देश के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का रहेगा।

    फिटनेस को लेकर नीरज ने भरोसा जताया कि वह पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि विश्व चैंपियनशिप और दोहा प्रतियोगिता के बाद उन्होंने अपनी कमजोरियों पर लगातार काम किया है। अब वह खुद को पहले से ज्यादा फिट और तैयार महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के तुरंत बाद एशियन गेम्स होने हैं, इसलिए लगातार फिट रहना और प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।

    90 मीटर से ज्यादा का थ्रो करने के बाद हर प्रतियोगिता में उसी प्रदर्शन को दोहराने के दबाव के सवाल पर नीरज ने कहा कि उनका ध्यान किसी एक दूरी पर नहीं रहता। उनका लक्ष्य हर बार अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करना और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच अपनी पहचान मजबूत बनाए रखना है। उन्होंने स्वीकार किया कि ग्लासगो में मुकाबला बेहद कठिन होगा क्योंकि यहां ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और डायमंड लीग के कई चैंपियन खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन वह पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेंगे।

    नीरज चोपड़ा ने खिलाड़ियों को मिल रहे सरकारी सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रशिक्षण, विदेशों में अभ्यास और अन्य सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है। इससे भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में बड़ी मदद मिली है। उनका मानना है कि यदि यही समर्थन और तैयारी आगे भी जारी रही तो भारतीय खिलाड़ी आने वाले वर्षों में वैश्विक खेल मंच पर और अधिक बड़ी सफलताएं हासिल करेंगे।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दूसरी बड़ी सफलता, ऋषिकांत सिंह ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के साथ जीता सिल्वर मेडल

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दूसरी बड़ी सफलता, ऋषिकांत सिंह ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के साथ जीता सिल्वर मेडल


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। रविवार को वेटलिफ्टिंग में भारत को एक और बड़ी सफलता मिली जब युवा वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। ऋषिकांत ने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाते हुए पोडियम पर दूसरा स्थान हासिल किया। उनके शानदार प्रदर्शन से भारत की पदक तालिका में दूसरा पदक जुड़ गया और खेल प्रेमियों को एक और जश्न मनाने का मौका मिला।

    प्रतियोगिता के स्नैच राउंड में ऋषिकांत का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 116 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में 119 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 121 किलोग्राम वजन उठाकर सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। 121 किलोग्राम का सफल प्रयास उनके लिए ऐतिहासिक साबित हुआ क्योंकि इसके साथ उन्होंने स्नैच वर्ग में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस प्रदर्शन ने उन्हें गोल्ड मेडल की मजबूत दावेदारी में ला खड़ा किया।

    क्लीन एंड जर्क राउंड में भी ऋषिकांत ने आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की और पहले ही प्रयास में 143 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। इसके बाद उन्होंने 148 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान मलेशिया के मोहम्मद अनिक ने 149 किलोग्राम वजन उठाकर बढ़त हासिल कर ली।

    गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद बनाए रखने के लिए ऋषिकांत ने अंतिम प्रयास में 151 किलोग्राम वजन उठाने की चुनौती स्वीकार की। उन्होंने वजन को कंधों तक सफलतापूर्वक पहुंचा भी दिया लेकिन अंतिम जर्क पूरा नहीं कर सके। इसी के साथ उनका कुल स्कोर 264 किलोग्राम पर रुक गया और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

    मलेशिया के मोहम्मद अनिक ने कुल 273 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं केन्या के जोशुआ अमूंगा मबोया ने 260 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक हासिल किया।

    ऋषिकांत सिंह का यह प्रदर्शन भारत के लिए बेहद अहम रहा। उन्होंने न केवल सिल्वर मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया बल्कि स्नैच में गेम्स रिकॉर्ड बनाकर अपनी प्रतिभा का भी शानदार परिचय दिया। शुरुआती दिनों में ही भारतीय खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदकों की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।

    फिलहाल भारत के खाते में एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल दर्ज हैं और देश पदक तालिका में 10वें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया शीर्ष स्थान पर बना हुआ है जबकि इंग्लैंड और नाइजीरिया क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। आने वाले मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों से और पदकों की उम्मीद की जा रही है।

  • मैच के दौरान सिर के बल गिरे गैब्रियल लैंगटन अब पूरी तरह सुरक्षित स्कैन रिपोर्ट सामान्य आने पर अस्पताल से मिली छुट्टी

    मैच के दौरान सिर के बल गिरे गैब्रियल लैंगटन अब पूरी तरह सुरक्षित स्कैन रिपोर्ट सामान्य आने पर अस्पताल से मिली छुट्टी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के दौरान एक दर्दनाक हादसे ने खेल प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी थी लेकिन अब इस घटना से जुड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। इंग्लैंड के युवा जिम्नास्ट गैब्रियल लैंगटन को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। ब्रिटिश जिम्नास्टिक्स ने पुष्टि की है कि विस्तृत मेडिकल जांच और कई स्कैन के बाद उनके शरीर में किसी भी तरह की गंभीर चोट नहीं पाई गई। इसके बाद उन्हें टीम इंग्लैंड की मेडिकल टीम की निगरानी में अस्पताल से सीधे टीम होटल भेज दिया गया।

    19 वर्षीय गैब्रियल लैंगटन पुरुष टीम फाइनल के दौरान हॉरिजॉन्टल बार इवेंट में अपना प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान हवा में लगभग तीन मीटर की ऊंचाई पर उन्होंने बार पर अपनी पकड़ खो दी और सिर के बल जमीन पर गिर पड़े। हादसा इतना गंभीर था कि पूरे एरिना में सन्नाटा छा गया और मुकाबला काफी देर तक रोकना पड़ा। मेडिकल टीम तुरंत मौके पर पहुंची और लंबे समय तक मैट पर उनका इलाज किया गया। इसके बाद सिर और गर्दन को पूरी सुरक्षा देते हुए उन्हें स्ट्रेचर पर ले जाया गया। हालांकि उस समय भी वह होश में थे और अपने हाथ पैर हिला पा रहे थे जिससे सभी को कुछ राहत मिली।

    ब्रिटिश जिम्नास्टिक्स ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि एहतियात के तौर पर गैब्रियल लैंगटन को पूरी रात अस्पताल में निगरानी में रखा गया। इस दौरान उनके कई मेडिकल स्कैन किए गए जिनकी रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य रही। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं लगी है और उनकी स्थिति पूरी तरह स्थिर है। संस्था ने यह भी बताया कि खिलाड़ी का मनोबल अच्छा है और वह दुनियाभर से मिले शुभकामना संदेशों तथा मेडिकल टीम की देखभाल के लिए सभी का आभार व्यक्त कर रहे हैं।

    इस हादसे के बावजूद गैब्रियल लैंगटन का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने फ्लोर और रिंग्स इवेंट में इंग्लैंड के लिए महत्वपूर्ण अंक जुटाए और टीम को स्वर्ण पदक की दौड़ में बनाए रखा। हालांकि अंतिम चरण में कनाडा ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए लगभग दो दशक बाद कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक जीत लिया जबकि इंग्लैंड को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

    हादसे के कारण गैब्रियल लैंगटन पदक वितरण समारोह में अपनी टीम के साथ मौजूद नहीं रह सके। बाद में जब वह अस्पताल से टीम होटल पहुंचे तो साथियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें उनका सिल्वर मेडल सौंपा गया। टीम इंग्लैंड ने उनकी वापसी पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि गैब्रियल को स्वस्थ देखकर पूरी टीम बेहद खुश है और उनके चेहरे की मुस्कान सभी के लिए सबसे बड़ी जीत है।

    यह घटना खेलों में सुरक्षा और त्वरित चिकित्सा व्यवस्था की अहमियत को भी उजागर करती है। समय पर मिले उपचार और विशेषज्ञों की निगरानी के कारण एक संभावित गंभीर हादसा बड़ी राहत में बदल गया। अब खेल प्रेमी यही उम्मीद कर रहे हैं कि गैब्रियल लैंगटन जल्द पूरी तरह फिट होकर फिर से जिम्नास्टिक्स के मंच पर शानदार वापसी करेंगे।